ग्रीन एनर्जी को बड़ी उड़ान: 54 हजार करोड़ की ऊर्जा गलियारा-3 योजना मंजूर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करने और 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुगम बनाने के लिए पीएम-धारा (पीएम-विकसित सामंजस्यपूर्ण और त्वरित नवीकरणीय ऊर्जा पहुंच) योजना को मंजूरी दी है। इस संबंध में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा, “आज केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीईसी-3 योजना को मंजूरी दी है, यह ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-3 योजना है जिसका परिव्यय लगभग 54,000 करोड़ रुपए है और यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य सरकारों को राज्यों के भीतर आरई क्षेत्रों से उनके लोड सेंटर तक लगभग 135 गीगावाट आरई पावर की निकासी के लिए सहायता प्रदान की जाए।” इस योजना के तहत ग्रिड लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर या नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर या जेनरेटर के छोर पर 50 गीगावाट-घंटा की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की तैनाती का भी प्रावधान है। बीईएसएस क्षमता का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमितता, ट्रांसमिशन भीड़ और पीक-आवर कटौती से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करना है, साथ ही गैर-सौर घंटों के दौरान बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करना है। इस योजना से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर बेहतर ग्रिड एकीकरण और बिजली निकासी में मदद मिलने की उम्मीद है। यह योजना वित्त वर्ष 2032-33 तक लागू करने के लिए लक्षित है, जिसकी कुल परियोजना लागत 1,86,405 करोड़ रुपए है। इसमें से 1,36,378 करोड़ रुपए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-थर्ड के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि 50 गीगावाट-घंटा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए 50,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस योजना में कुल 54,082 करोड़ रुपए की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है। केंद्रीय वित्तीय सहायता से इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे बिजली की लागत कम रखने में मदद मिलेगी और अंततः बिजली उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम घटक के तहत सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से लागू किया जाएगा, जबकि ब्राउनफील्ड उन्नयन और नेटवर्क सुदृढ़ीकरण कार्य लागत प्लस आधार (सीपीबी) पर किए जाएंगे। राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज समग्र कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में कार्य करेंगी। ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेंटेन (बीओओएम) मॉडल के माध्यम से टीबीसीबी तंत्र के तहत परियोजनाओं में भाग लेंगे।

भाखड़ा नहर पर व्यक्ति ने वीडियो बनाकर लगाए प्रताड़ना के आरोप, सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब सरकार को घेरा

समाना। पंजाब के समाना स्थित भाखड़ा नहर के पुल से एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में व्यक्ति ने आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब सरकार में मंत्री अमन अरोड़ा, गांव के सरपंच और अपने भाई व भतीजों पर कथित रूप से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। व्यक्ति ने मानसिक परेशानी का जिक्र करते हुए अपनी जान देने की बात भी कही है। वीडियो में व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और उसकी बेटियों के साथ भी कथित तौर पर मारपीट की गई है। हालांकि, वीडियो में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, पंजाब कांग्रेस के विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार पर निशाना साधा। खैरा ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति दलवीर सिंह है और उसने अपनी स्थिति के लिए अमन अरोड़ा समेत अन्य लोगों पर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता ने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर भी आरोप लगाए। खैरा ने दावा किया कि कुछ दिन पहले गुलजार दिड़बा नाम के व्यक्ति की मौत के मामले में भी हरपाल चीमा का नाम लिया गया था। खैरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब पुलिस पर सवाल उठाते हुए अमन अरोड़ा और हरपाल चीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दोनों मंत्रियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करती है। दूसरी ओर, सिटी समाना पुलिस ने वायरल वीडियो को लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति ने भाखड़ा नहर में छलांग लगाई है या नहीं। मामले की जांच जारी है। वीडियो सामने आने और सुखपाल सिंह खैरा की ओर से इसे सोशल मीडिया पर उठाए जाने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा में भी आ गया है।

मर्चेंट नेवी में बिहार का परचम, कैप्टन रितु बनीं विदेशी जहाज की कमान संभालने वाली महिला

पटना। कैप्टन रितु कुमारी ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के इतिहास में पहली महिला मास्टर बनीं और मर्चेंट नेवी टैंकर, एमटी जग पवित्रा की कमान संभालने वाली बिहार की दूसरी महिला बनीं। इस मौके पर कैप्टन रितु कुमारी ने कहा, “भारत में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया कंपनी में काफी महिलाएं आ गई हैं, लेकिन बिहार से मैं दूसरी हूं। विदेश जाने वाले जहाजों में मैं बिहार की पहली महिला कैप्टन हूं। यदि पूरे समुद्री क्षेत्र की बात करें तो इसमें महिलाओं की भागीदारी केवल दो प्रतिशत है। कैप्टन और मुख्य अधिकारी जैसे शीर्ष पदों पर और चीफ इंजीनियर, सेकंड इंजीनियर जैसे तकनीकी पदों पर अभी भी बहुत कम महिलाएं पहुंच पाई हैं।” अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर उन्होंने कहा कि शुरुआत में मुझे इस क्षेत्र के बारे में जानकारी नहीं थी। बिहार में आज भी बहुत से लोगों को इसके बारे में पता नहीं है, तब तो जागरूकता बिल्कुल नहीं थी। मैं आनंद सर के यहां ट्यूशन करती थी, जहां सुपर-30 बैच चलता था। वहां सीनियर्स ने बताया कि आईआईटी के अलावा भी विकल्प है, जबकि उस समय लोग केवल आईआईटी के बारे में ही जानते थे। सीनियर्स ने बताया कि यदि आईआईटी में रैंक पीछे भी आती है तो यह एक विकल्प है, इसका अलग से फॉर्म भरना होता है, और कोई अलग परीक्षा नहीं देनी पड़ती, चयन आईआईटी के परिणाम से ही होता है। वहीं से मेरा चयन हुआ। कैप्टन रितू ने कहा कि उस समय जागरूकता कम थी, इसलिए उनका चयन आईआईटी के माध्यम से हुआ। वह बहुत खुश थीं। काउंसलिंग के लिए गई तो आईआईटी के जरिए तीन कॉलेजों में दाखिला होता था, दो मुंबई में और एक कोलकाता में। वह काउंसलिंग के लिए गईं, तब भी महिला उम्मीदवार के तौर पर उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्होंने केवल यह देखा कि मुंबई में रहने की इच्छा थी और टीएस चाणक्य मुंबई में था, जो बीएससी नॉटिकल साइंस का तीन साल का कोर्स कराता था। उन्होंने कहा कि मैंने सोचा कि पहले सभी दोस्त बीटेक कर रहे हैं जिसमें चार साल लगते हैं, मेडिकल में भी समय लगता है। वहां पढ़ाई कम और अतिरिक्त गतिविधियां ज्यादा थीं। सुबह पीटी, दिन भर खेल, स्विमिंग की सुविधा थी, जो मैंने पहले कभी देखी भी नहीं थी। मैं रोज सुबह-शाम स्विमिंग के लिए जाती थी। इसके अलावा कई तरह के खेल, क्विज, नाटक जैसी गतिविधियां होती रहती थीं, जो मैं अपने स्कूल नवोदय विद्यालय, राजगीर में भी करती रही हूं। कैप्टन रितु ने कहा कि मैं वहां इन गतिविधियों में बहुत सक्रिय रहती थी, कार्यक्रमों के आयोजन में हिस्सा लेती थी। मैं स्कूल कैप्टन भी रही हूं। मुझे लगा कि यही वह करियर है जिसकी मैं तलाश कर रही थीं, जिसमें किताबी पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा और अतिरिक्त गतिविधियां करने को मिलेंगी। यह उनके लिए अच्छा रहा। थोड़ी रैगिंग भी हुई, लेकिन उन्होंने उसका भी आनंद लिया। फिर तीन साल की पढ़ाई पूरी हुई और उन्होंने अपने पहले जहाज पर नौकरी शुरू की। उन्होंने बताया कि वह नाव के जरिए जहाज पर गईं। जब उन्होंने नाव से जहाज को देखा तो वह विशालकाय था; वह एक टैंकर जहाज था, और मैंने अपने पूरे करियर में टैंकर जहाजों पर ही काम किया है। कैप्टन रितु ने कहा कि जहाज पर चढ़ते समय थोड़ी घबराहट भी हुई। जहाज पर पहुंचने के बाद लगा कि चलो, अब शुरुआत करनी है। उस समय यही सोच थी कि जहां भी जाऊंगी, अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी। कॉलेज में गईं, तब भी और पहला जहाज जॉइन किया, तब भी यही सोचा कि सबसे बेहतर बनना है। उस समय महिला होने को लेकर मन में ऐसा कोई भेदभाव नहीं था।

अखिलेश यादव स्वार्थ के लिए गठबंधन करते हैं, प्रदेश की जनता देगी जवाब: दिनेश प्रताप सिंह

लखनऊ। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की पीडीए यात्रा, दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के बयान पर भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह ने टिप्पणी की। उन्होंने अखिलेश यादव के गठबंधन संबंधी रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ गठबंधन की बात की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ राहुल गांधी के घर से युद्ध का शंखनाद किया जा रहा है। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि उत्तर प्रदेश की जनता गठबंधन की पवित्रता को कैसे महसूस करेगी। विपक्षी दलों के गठबंधन अपने-अपने हित और स्वार्थ के लिए बनते हैं। प्रदेश की जनता इन गठबंधनों की राजनीति को समझती है और समय आने पर इसका जवाब देगी। अखिलेश यादव के उस बयान पर भी दिनेश प्रताप सिंह ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने हरे रंग को हरियाली और लाल रंग को दूसरी क्रांति का प्रतीक बताया था। इस पर भाजपा नेता ने कहा कि रंगों का भारतीय संस्कार और संस्कृति में महत्व है, लेकिन राजनीति और जनसेवा में रंग से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कौन जनता की बेहतर सेवा कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोई सफेद, हरा या लाल कपड़ा पहनकर और कोई भगवा झंडा लेकर भी जनता की सेवा कर सकता है। असली सवाल यह है कि जनता की सेवा कौन बेहतर तरीके से कर रहा है। दिनेश प्रताप सिंह ने इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश सुरक्षित है, देशवासियों की मेहनत की कमाई सुरक्षित है और देश का सम्मान सुरक्षित है। भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा के साथ काम कर रही है। इंडिया ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से रखी गई छह प्रमुख मांग, जिनमें ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने और चुनाव आयोग की जवाबदेही व निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग शामिल थी। दिनेश प्रताप सिंह ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की आलोचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चुनाव में हार होती है तो विपक्ष ईवीएम और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि जिस चुनाव आयोग से उसके नेताओं को सांसद चुने जाने का प्रमाणपत्र मिला, उसी आयोग पर सवाल उठाने से पहले उन प्रमाणपत्रों को वापस करना चाहिए। उन्होंने पुराने चुनाव आयोग से जुड़े एक आरोप का भी उल्लेख किया और सोनिया गांधी की नागरिकता और मतदाता सूची से संबंधित सवाल उठाए। विपक्ष को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वर्तमान चुनाव आयोग ने ऐसी कौन-सी गलती की है जिसके आधार पर उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर कठपुतली की तरह काम करने का आरोप लगाया था और कहा था कि ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को चुपचाप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पर दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने राहुल गांधी को परजीवी सांसद और परजीवी आंदोलनकारी बताते हुए कहा कि वे दूसरे आंदोलनों का हिस्सा बनकर खुद को आंदोलनकारी के रूप में पेश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्र या अन्य समूह आंदोलन करते हैं तो राहुल गांधी उनके साथ खड़े होकर उस आंदोलन का हिस्सा बनने की कोशिश करते हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी के देश और विदेश में रहने को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वे देश की अपेक्षा विदेशों में अधिक समय बिताते हैं।

फ्लाईदुबई विमान घटना: इजरायली यात्रियों की सुरक्षित वापसी पर यूएन में इजरायल के राजदूत बोले- ‘वेलकम होम’

यरुशलम। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में बुधवार को हुई आपातकालीन घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डेनी डेनन ने विमान में सवार इजरायली यात्रियों के साहस की तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यात्रियों की वापसी का स्वागत करते हुए कहा कि संकट के समय उन्होंने असाधारण साहस और सूझबूझ दिखाई। इजरायली राजदूत डेनन ने एक्स पर पोस्ट किया, “वेलकम होम। मैं उन इजरायली यात्रियों को सलाम करता हूं, जिन्होंने संकट के समय असाधारण साहस और सूझबूझ दिखाई। उन्होंने निर्णायक कदम उठाए, हालात को संभाला और लोगों की जान बचाने में मदद की।” यह बयान फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट एफजेड 1073 में हुई घटना के बाद आया है। विमान ने बुधवार को उड़ान के दौरान आपातकालीन सिग्नल भेजा था और तेजी से नीचे आने के बाद उसे सऊदी अरब की ओर डायवर्ट किया। बाद में विमान ने सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। फ्लाईदुबई के प्रवक्ता के मुताबिक, विमान में सवार सभी यात्रियों का पता लगा लिया गया और वे सुरक्षित हैं। इजरायल की सरकारी कान टीवी न्यूज ने एक इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया था कि अधिकारी घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि संभावित आतंकी घटना की आशंका को भी जांच के दायरे से बाहर नहीं किया गया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी इस पहलू की भी जांच कर रहे हैं कि क्या दोनों पायलटों में से किसी एक ने विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की थी। घटना में एक पायलट के घायल होने की भी बात कही गई। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें चेहरे पर खून के निशान वाला एक इजरायली यात्री विमान के अंदर हमले का दावा करते हुए यात्रियों द्वारा कथित हमलावरों को काबू में करने की बात कहता नजर आया। एक इजरायली अधिकारी के मुताबिक, दोनों पायलटों के बीच कथित रूप से शारीरिक विवाद होने के बाद विमान से आपातकालीन सिग्नल भेजा गया था। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट जा रही फ्लाइट को ताबुक एयरपोर्ट पर उतारा गया। घटना के बाद इजरायल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने यात्रियों के परिजनों के लिए बेन गुरियन एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 में एक विशेष वेटिंग और इन्फॉर्मेशन एरिया भी बनाया था।

भारत में पहली बार वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी का आयोजन, जेपी नड्डा बोले- 60 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंचा आयुष्मान भारत का लाभ

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार को नई दिल्ली में वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (डब्ल्यूसीओजी 2026) को संबोधित किया। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे इस चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के डॉक्टर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। डब्ल्यूसीओजी 2026 की शुरुआत 30 सितंबर को हुई है और यह 3 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस साल सम्मेलन की थीम ‘ट्रांसफॉर्मिंग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ, प्रिजर्विंग नेचर’ रखी गई है। इस सम्मेलन की मेजबानी इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (आईएसजी) और वर्ल्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूजीओ) संयुक्त रूप से कर रहे हैं। इसमें इंडियन नेशनल एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ द लिवर (आईएनएएसएल), क्रोन्स एंड कोलाइटिस फाउंडेशन इंडिया (सीसीएफआई), इंडियन पैंक्रियाज क्लब (आईपीसी) और इंडियन न्यूरोगैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड मोटिलिटी एसोसिएशन (आईएनएमए) भी सहयोग कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापक और समग्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। इलाज के साथ बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पुनर्वास और गंभीर मरीजों की देखभाल पर भी जोर दिया जा रहा है। नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव किया गया। इसके तहत प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और इनके बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देशभर में करीब 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का नेटवर्क लोगों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने गैर-संचारी रोगों की जांच को बीमारी की रोकथाम का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए 30 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मुंह, स्तन तथा सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक हाई ब्लड प्रेशर के लिए 42 करोड़ से ज्यादा, डायबिटीज के लिए 42 करोड़, ओरल कैंसर के लिए 36 करोड़, ब्रेस्ट कैंसर के लिए 17 करोड़ और सर्वाइकल कैंसर के लिए 9 करोड़ से ज्यादा स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वस्थ खानपान और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने एफएसएसएआई के ईट राइट इंडिया अभियान और पोषण माह जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने मोटापे जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए खाने में तेल की खपत कम करने की प्रधानमंत्री की अपील को भी याद किया। नड्डा ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सुधार हुआ है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक, संस्थागत प्रसव 2015-16 में 79 प्रतिशत से बढ़कर करीब 90 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि 1990 से 2023 के बीच भारत में मातृ मृत्यु में 86 प्रतिशत, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में 79 प्रतिशत और नवजात मृत्यु में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। जेपी नड्डा ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इलाज के खर्च से राहत दिलाने के लिए सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रत्येक परिवार को हर साल 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है। इसका दायरा 60 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों तक पहुंच चुका है। इसके अलावा आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना 70 साल और उससे अधिक उम्र के करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों तक भी योजना का विस्तार किया गया है। नड्डा के मुताबिक, योजना के तहत अब तक 13 करोड़ से अधिक इलाज किए जा चुके हैं, जिन पर 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का स्वास्थ्य खर्च हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देशभर में 20,149 से ज्यादा जन औषधि केंद्र लोगों को कम कीमत पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस पहल की वजह से लोगों ने दवाओं पर होने वाले खर्च में सामूहिक रूप से करीब 45 हजार करोड़ रुपए की बचत की है। नड्डा के मुताबिक, स्वास्थ्य पर लोगों का अपनी जेब से होने वाला खर्च भी कम हुआ है। कुल स्वास्थ्य खर्च में आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च की हिस्सेदारी 2014-15 में 62 प्रतिशत थी, जो 2021-22 में घटकर 43.4 प्रतिशत रह गई। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मिली उपलब्धियों के बावजूद नई चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार रिसर्च और इनोवेशन जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टर और शोधकर्ता पेट तथा लिवर की बीमारियों और प्रमुख संक्रमणों से निपटने के लिए नए समाधान विकसित करेंगे। नड्डा ने कहा कि डब्ल्यूसीओजी जैसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन अलग-अलग देशों के विशेषज्ञों को अपना ज्ञान और अनुभव साझा करने का अवसर देते हैं। ऐसे आयोजन युवा डॉक्टरों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, जो भविष्य में रिसर्च, इलाज और मेडिकल इनोवेशन को आगे बढ़ाएंगे। कार्यक्रम के दौरान नड्डा ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और मरीजों की देखभाल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली प्रतिष्ठित हस्तियों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी प्रदान किए। डब्ल्यूसीओजी 2026 में दुनियाभर से गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट, पैंक्रियाटोलॉजिस्ट, एंडोस्कोपिस्ट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन, डायटीशियन, नर्स, टेक्नोलॉजिस्ट और अन्य स्वास्थ्य पेशेवर हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के चार दिनों के दौरान वैज्ञानिक सत्र, व्याख्यान, बहस, वर्कशॉप, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और रिसर्च से जुड़े प्रेजेंटेशन आयोजित किए जाएंगे। इसमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ में नई तकनीकों और इनोवेशन पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम में एम्स के निदेशक प्रो. निखिल टंडन, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, डब्ल्यूजीओ की अध्यक्ष डॉ. कैरोलिना ओलानो, डब्ल्यूसीओजी की स्थानीय आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गोविंद मखारिया और आईएसजी के महासचिव डॉ. मैथ्यू फिलिप समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

दिल्ली एनसीआर में हवा सुधरी, पिछले पांच साल में सितंबर में एक्यूआई घटकर 102 पर आया

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की हवा में सुधार का ट्रेंड जारी है। राजधानी ने इस साल 2026 के सितंबर महीने में पिछले 5 सालों का सबसे कम औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दर्ज किया है। आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में दिल्ली का मासिक औसत एक्यूआई 102 रहा, जबकि 2025 में 105, 2024 में भी 105, 2023 में 108 और 2022 में 104 था। यानी इस बार सितंबर की हवा पिछले 5 सालों में सबसे साफ रही। सिर्फ सितंबर ही नहीं, पूरे साल की हवा भी बेहतर है। जनवरी से सितंबर (28 सितंबर तक) की अवधि में इस साल 2026 में 194 दिन ऐसे रहे जब दैनिक औसत एक्यूआई 200 से कम यानी ‘मध्यम’ श्रेणी में रहा। यह पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2025 में 187 दिन, 2024 में 188 दिन, 2023 में 193 दिन और 2022 में सिर्फ 146 दिन ही हवा इस श्रेणी में थी। वहीं, खराब हवा वाले दिनों में भी बड़ी गिरावट आई है। जनवरी-सितंबर 2026 में ‘खराब से लेकर बेहद खराब प्लस’ वाले दिन सिर्फ 79 दिन रहे, जो पिछले 5 सालों में सबसे कम हैं। 2025 में 86 दिन, 2024 में 86 दिन, 2023 में 80 दिन और 2022 में 127 दिन हवा बेहद खराब श्रेणी में थी। पीएम2.5 के स्तर में भी सुधार देखा गया है। जनवरी से सितंबर तक दिल्ली में पीएम2.5 का औसत 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो 2022 के बाद से सबसे कम है। पिछले साल 2025 में भी 69 था, लेकिन 2024 में 81, 2023 में 73 और 2022 में 80 माइक्रोग्राम था। सीएक्यूएम (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) ने कहा कि वह दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है और आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के प्रयासों को तेज किया जाएगा।

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत, व्यापार-रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसे और मजबूत करने के लिए करीबी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। बातचीत के दौरान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों नेताओं ने वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जारी प्रयासों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने फोन पर बातचीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसे ‘सार्थक बातचीत’ बताया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के साथ सार्थक बातचीत हुई। हमने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और अन्य क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। हमने अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए करीबी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।” प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार साझा किए, जिसमें वैश्विक शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए जारी प्रयास शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के हित में सहयोग को और गहरा करने के लिए करीबी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। पीएमओ ने कहा कि नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जारी प्रयासों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। इस बीच, आईएएनएस ने इससे पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत-अमेरिका संबंधों के विस्तार के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप का संकेत दिया है। वाशिंगटन अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा की दिशा में काम कर रहा है और नई दिल्ली को अपने सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में से एक मानता है। जून में व्हाइट हाउस में आईएएनएस को दिए अलग-अलग विशेष साक्षात्कारों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बताया था। दोनों अधिकारियों ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया था। रुबियो ने कहा था कि अमेरिकी प्रशासन अगले साल ट्रंप की भारत यात्रा की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा था कि वह खुद भी साल के अंत से पहले भारत आने और अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति की यात्रा की तैयारियों की उम्मीद कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों को भी द्विपक्षीय रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण बताया था। रुबियो ने कहा था कि भारत अमेरिका का बेहद करीबी साझेदार और सहयोगी है तथा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच संबंध कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। वहीं, गोर ने दोनों नेताओं के संबंधों को भारत-अमेरिका रिश्तों के प्रमुख आधारों में से एक बताया था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच वर्षों से दोस्ती है और यह आगे भी जारी रहेगी। रुबियो और गोर ने भारत-अमेरिका सहयोग के बढ़ते दायरे का भी उल्लेख किया था। इसमें अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं: सरकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लघु यानी छोटी बचत योजनाओं (स्मॉल सेविंग स्कीम्स) में निवेश करने वाले करोड़ों निवेशकों को राहत देते हुए अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही, यानी 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक विभिन्न छोटी बचत योजनाओं पर लागू ब्याज दरें जुलाई-सितंबर तिमाही के समान रहेंगी। इस फैसले का मतलब है कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) और अन्य सरकारी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को पहले की तरह ही रिटर्न मिलता रहेगा। मौजूदा ब्याज दरों के अनुसार, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) पर 7.1 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा। वहीं बेटियों के भविष्य के लिए लोकप्रिय सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 प्रतिशत ब्याज दर जारी रहेगी, जो छोटी बचत योजनाओं में सबसे आकर्षक रिटर्न देने वाली योजनाओं में शामिल है। इसके अलावा, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) में निवेश करने वालों को भी 7.7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा। इन योजनाओं का उपयोग बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक सुरक्षित और निश्चित रिटर्न प्राप्त करने के लिए करते हैं। छोटी बचत योजनाएं भारतीय परिवारों की वित्तीय योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। सरकार समर्थित होने के कारण इनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम माना जाता है और यही वजह है कि पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना, एनएससी, डाकघर जमा योजनाएं और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना जैसी स्कीम्स निवेशकों के बीच लोकप्रिय हैं। सरकार का मानना है कि ब्याज दरों को स्थिर रखने से निवेशकों को निश्चितता मिलेगी और बदलती ब्याज दरों के माहौल में भी इन योजनाओं का आकर्षण बना रहेगा। इससे बचतकर्ताओं को अपने निवेश और भविष्य की वित्तीय योजना बनाने में सुविधा होगी। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा हर तिमाही की जाती है और निवेशक इस घोषणा पर करीबी नजर रखते हैं, क्योंकि नई जमा राशि पर मिलने वाला रिटर्न इसी के आधार पर तय होता है। हालांकि पहले से किए गए निवेश संबंधित योजना के नियमों के अनुसार ब्याज अर्जित करते रहते हैं। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए दरें यथावत रहेंगी, हालांकि योजना-वार पूरी ब्याज दर सूची अधिसूचना में अलग से प्रकाशित नहीं की गई है।

गुवाहाटी में ‘गरजा’ गिल का बल्ला, ‘दोहरे शतक’ के साथ वेस्टइंडीज को 8 विकेट से रौंदा, वनडे सीरीज में भारत की अजेय बढ़त

गुवाहाटी। कप्तान शुभमन गिल की डबल सेंचुरी के दम पर भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ बारसापरा क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले को 8 विकेट से अपने नाम किया। बुधवार को खेले गए इस मैच में दमदार जीत के साथ टीम इंडिया ने तीन मुकाबलों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त हासिल कर ली है। टॉस गंवाकर बल्लेबाजी के लिए उतरी वेस्टइंडीज ने निर्धारित ओवरों में 7 विकेट खोकर 405 रन बनाए। इस टीम को 37 के स्कोर पर कीसी कार्टी (9) के रूप में पहला झटका लग गया था, जिसके बाद जॉन कैंपबेल ने शाई होप के साथ दूसरे विकेट के लिए 79 गेंदों में 110 रन जोड़ते हुए टीम को 147 के स्कोर तक पहुंचा दिया। कैंपबेल 68 गेंदों में 5 छक्कों और 9 चौकों के साथ 101 रन बनाकर पवेलियन लौटे, जिसके बाद कप्तान शाई होप ने आमिर जंगू के साथ 131 गेंदो में 182 रन जोड़कर टीम को 300 के पार पहुंचा दिया। होप 94 गेंदों में 104 रन बनाकर आउट हुए। उनकी इस पारी में 3 छक्के और 8 चौके शामिल रहे, जबकि आमिर 77 गेंदों में 3 छक्कों और 13 चौकों के साथ 114 रन बनाकर आउट हुए। इनके अलावा, रोस्टन चेज ने 29 रन की नाबाद पारी खेली। भारत के लिए गूरनूर बरार, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव ने 2-2 विकेट हासिल किए, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने 1 विकेट अपने नाम किया। इसके जवाब में भारत ने 43.3 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया। रोहित शर्मा ने कप्तान शुभमन गिल के साथ पहले विकेट के लिए 158 गेंदों में 255 रन की साझेदारी करते हुए टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। रोहित 75 गेंदों में 6 छक्कों और 10 चौकों के साथ 101 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद गिल ने विराट कोहली के साथ दूसरे विकेट के लिए 35 गेंदों में 65 रन जुटाकर टीम को 300 के पार पहुंचा दिया। यहां से गिल ने ऋतुराज गायकवाड़ के साथ मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने 68 गेदों में 86 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को आसान जीत दिलाई। गिल 133 गेंदों में 223 रन बनाकर नाबाद रहे। इस दौरान 8 छक्के और 26 चौके लगाए। यह वनडे फॉर्मेट में गिल का सबसे बड़ा स्कोर रहा। ऋतुराज गायकवाड़ 37 गेंदों में 2 चौकों के साथ 31 रन बनाकर नाबाद रहे। मेहमान टीम की तरफ से जेडेन सील्स और शमार जोसेफ ने एक-एक सफलताएं हासिल कीं। भारत ने सीरीज का पहला मैच भी 8 विकेट से अंतर से अपने नाम किया था। अब तीसरा और अंतिम वनडे मुकाबला 3 अक्टूबर को न्यू चंडीगढ़ में खेला जाना है, जिसके बाद 5 मुकाबलों की टी20 सीरीज का आयोजन होगा।