गाजियाबाद: फैक्ट्री में आग से मोबाइल बैटरी और मोटरसाइकिल के सामान जलकर खाक, ऑक्सीजन प्लांट को बचाया गया

गाजियाबाद। गाजियाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात एक रिसाइक्लिंग फैक्ट्री में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में फैक्ट्री के टीन शेड में रखा मोबाइल की बैटरी और सेल, मोटरसाइकिल समेत अन्य सामान आग की चपेट में आ गया। सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। फायर विभाग के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 11.15 बजे एमडीटी-1487 के माध्यम से फायर स्टेशन कोतवाली को सूचना मिली कि सिल्वर सिटी मॉल के पीछे, सी-11/3 साउथसाइड जीटी रोड स्थित सीकेसीपीसी रिसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की फैक्ट्री में आग लग गई है। सूचना मिलते ही फायर स्टेशन कोतवाली से एफएसओ के नेतृत्व में तीन फायर टैंकर तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किए गए। फायर टीम जब मौके पर पहुंची तो फैक्ट्री के टीन शेड में आग तेजी से जलती हुई दिखाई दी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री में मोबाइल की बैटरी व सेल, मोटरसाइकिल तथा अन्य रिसाइक्लिंग सामग्री रखी हुई थी। इन सामानों में आग लगने के कारण लपटें तेजी से फैल रही थीं। आग की स्थिति को देखते हुए फायर यूनिट ने बिना समय गंवाए तत्काल बचाव और अग्निशमन अभियान शुरू किया। फायर कर्मियों ने एमएफई से होज पाइप फैलाकर आग पर पानी की बौछार शुरू की। आग लगातार फैल रही थी, इसलिए उसे नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल फोम का भी इस्तेमाल किया गया। फायर कर्मियों की टीम ने कई दिशाओं से आग पर पानी और फोम डालकर आग की लपटों को नियंत्रित किया। लगातार प्रयास के बाद आग को पूरी तरह बुझा दिया गया। सीएफओ सौरभ कुमार सिंह ने बताया कि फायर विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री के पीछे की ओर बने ऑक्सीजन प्लांट को सुरक्षित रखना था। आग अगर ऑक्सीजन प्लांट तक पहुंचती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। फायर यूनिट ने सावधानी बरतते हुए आग को प्लांट की ओर बढ़ने से रोका और ऑक्सीजन प्लांट को सुरक्षित बचा लिया। फायर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सीएफओ भी घटनास्थल पर मौजूद रहे और राहत व बचाव कार्य का जायजा लिया। फायर यूनिट ने एफएसओ के नेतृत्व में अभियान चलाते हुए आग को पूरी तरह बुझाया। फायर विभाग के अनुसार, घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। आग लगने के कारण फैक्ट्री में रखी सामग्री को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। आग किस वजह से लगी, इसका तत्काल स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। फायर विभाग और संबंधित अधिकारी घटना के कारणों की जानकारी जुटा रहे हैं।
चेन्नई में पालतू जानवर को सार्वजनिक जगह पर छोड़ने पर लगेगा 25,000 रुपये का जुर्माना

चेन्नई। अगर आपने पालतू कुत्ते या बिल्ली का लाइसेंस लिया है और फिर उसे सड़क या किसी सार्वजनिक जगह पर छोड़ दिया, तो अब आपको 25,000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। दरअसल, ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) ने यह नया नियम लागू किया है। नगर निगम को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि लोग अपने पालतू जानवरों को रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी सड़कों पर छोड़ देते हैं। इसी को रोकने के लिए जुर्माने का प्रावधान लाया गया है। कॉर्पोरेशन हर लाइसेंस वाले जानवर को उसके मालिक से जोड़ने के लिए माइक्रोचिप का इस्तेमाल कर रहा है। इस चिप में मालिक का नाम, पता और जानवर के एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन की जानकारी होती है। अगर कोई पालतू जानवर सड़क पर लावारिस मिलता है तो माइक्रोचिप के जरिए उसके मालिक का पता लगाया जा सकेगा। यह रिकॉर्ड यह सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा कि पालतू जानवरों को हर साल वैक्सीन लग रही है या नहीं। शहर की सीमा में रहने वाले पालतू जानवरों के मालिकों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। यह नियम अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 की धारा 292 और 2023 में बने नियमों के तहत लागू है। आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है। पालतू जानवरों के लिए माइक्रोचिप लगवाना जरूरी है। जीसीसी ने अपनी ऑनलाइन पेट लाइसेंसिंग सिस्टम पिछले साल अक्टूबर में शुरू की थी। इस साल जुलाई तक कॉर्पोरेशन 78,232 पालतू जानवरों के मालिकों को लाइसेंस जारी कर चुका है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद ही कॉर्पोरेशन ने जुर्माने का फैसला लिया है। 25,000 रुपये का जुर्माना उन मालिकों पर लागू होगा जो अपने लाइसेंस वाले कुत्तों या बिल्लियों को सड़कों या सार्वजनिक जगहों पर छोड़ेंगे। रजिस्ट्रेशन और माइक्रोचिप का मतलब है कि लाइसेंस मिलने के बाद भी जानवर की पहचान बनी रहती है और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड के जरिए मालिक को ट्रेस किया जा सकता है।
समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर नेताओं ने किया नमन

नई दिल्ली। महान दार्शनिक, समाज सुधारक और शिक्षाविद् ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने याद करते हुए नमन किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “बंगाल पुनर्जागरण के प्रमुख स्तंभों में से एक और जाने-माने समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर को उनकी जयंती पर याद करते हुए।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में कहा, “महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक एवं भारतीय नवजागरण के अग्रदूत ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। नारी शिक्षा, सामाजिक समरसता एवं मानव कल्याण के लिए आपका अतुलनीय योगदान भारतीय समाज को निरंतर प्रेरणा प्रदान करता रहेगा।” हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर पोस्ट किया, “महान दार्शनिक, समाज सुधारक और शिक्षाविद् ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर उन्हें सादर नमन। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का आधार मानने वाले विद्यासागर ने नारी शिक्षा, सामाजिक समानता और जनजागरण के लिए अथक प्रयास किए। बंगाली भाषा और साहित्य को सरल एवं आधुनिक स्वरूप देने में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका विचार, व्यक्तित्व और मानव सेवा के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, “बंगाल की धरती ने भारत को नवजागरण की जो चेतना दी, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर उसके प्रखर प्रकाश-स्तंभ थे। महान शिक्षाविद् एवं समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की जयंती पर शत-शत नमन।” राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट किया, “महान समाज सुधारक, प्रखर शिक्षाविद् एवं राष्ट्रभक्त, स्वतंत्रता सेनानी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन! नारी शिक्षा, सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों के लिए उनका अथक संघर्ष एवं समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके प्रगतिशील विचार हमें राष्ट्र और समाज के सर्वांगीण उत्थान के लिए निरंतर समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।” बिहार के मुख्मंत्री ने एक्स पोस्ट में कहा, “महान शिक्षाविद, समाज सुधारक एवं मानवतावादी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। शिक्षा के प्रसार, महिला शिक्षा और समाज में सुधार के लिए उनका समर्पित जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।” मध्य प्रदश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर लिखा, “प्रख्यात समाज सुधारक, शिक्षाविद् एवं स्वतंत्रता सेनानी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर सादर नमन करता हूं। नारी सशक्तिकरण एवं सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका सरल जीवन, मानवीय दृष्टिकोण और समाज के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणादायी रहेगा।” उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने एक्स पर लिखा, “महान समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर सादर नमन। शिक्षा के प्रसार, नारी सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार के लिए आपके अथक प्रयास सदैव समाज को प्रेरणा देते रहेंगे।
पुनपुन घाट :’पितृ तीर्थ’ गया से पहले पिंडदान करने का स्थान और ‘मोक्ष का प्रथम द्वार’

नई दिल्ली। पितृपक्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाला 16 दिनों का विशेष पक्ष है। इस अवधि में लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और अन्य पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों पितरों का स्मरण और उनके नाम से दान-पुण्य करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितृपक्ष को पूर्वजों के तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बिहार के गयाजी धाम पहुंचते हैं और अपने पितरों के लिए पिंडदान करते हैं। पिंडदान के लिए गयाजी को विशेष महत्व दिया गया है। धार्मिक ग्रंथों जैसे गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण और वायु पुराण में गयाजी को पितृ कर्मों के लिए सर्वोच्च तीर्थ बताया गया है। मान्यता है कि गयाजी में विधि-विधान से पिंडदान करने पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथा के अनुसार, गयासुर नामक तपस्वी असुर के शरीर पर भगवान विष्णु ने अपने चरण रखे थे। जिस स्थान पर भगवान विष्णु का पदचिह्न माना जाता है, वहीं आज प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर स्थित है। माना जाता है कि गयासुर के वरदान के कारण यहां किए गए पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है। विष्णुपद मंदिर, गयाजी में फल्गु नदी के तट पर एक प्रसिद्ध और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे पवित्र चरण चिह्न आज भी मौजूद हैं, जिसमें शंख, चक्र और गदा जैसे नौ प्रतीक बने हैं। यह स्थान पितरों के मोक्ष और तर्पण (पिंडदान) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ के लिए गयाजी में श्राद्ध किया था। वहीं, माता सीता द्वारा फल्गु नदी तट पर पिंडदान करने की कथा भी प्रचलित है। गयाजी धाम में पिंडदान के लिए 48 प्रमुख वेदियां और कई पवित्र स्थल माने जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी तट, अक्षयवट (अक्षयवट वृक्ष), सीता कुंड, पंचतीर्थ, प्रेतशिला, रामशिला, ब्रह्मकुंड, और गया शिरोमणि क्षेत्र को महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक परंपरा में गयाजी को ‘पितृ तीर्थ’ कहा जाता है और इसे पूर्वजों के मोक्ष का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गया पहुंचने से पहले भी एक ऐसी जगह है, जहां तर्पण और पिंडदान करना जरूरी बताया गया है। यह जगह है पुनपुन नदी का घाट, जिसे धार्मिक मान्यताओं में पितृमोक्ष का पहला द्वार कहा जाता है। पटना जिले के पास स्थित पुनपुन नदी का यह घाट पितृपक्ष के दौरान खास महत्व रखता है। मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से पहले पुनपुन नदी में स्नान, तर्पण और प्रथम पिंडदान करना चाहिए। इसके बाद गया जाकर फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पुनपुन घाट की सबसे खास बात इससे जुड़ी भगवान राम और माता सीता की पौराणिक कथा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान राम अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान करने के लिए निकले तो उन्होंने गया जाने से पहले पुनपुन नदी के तट पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था। कहा जाता है कि भगवान राम ने माता जानकी के साथ पुनपुन नदी के किनारे सबसे पहले पिंड अर्पित किया। इसके बाद वे गया पहुंचे और फल्गु नदी के तट पर विधि-विधान से पिंडदान किया। इसी मान्यता के चलते पुनपुन को गया से पहले पिंडदान करने का स्थान और ‘मोक्ष का प्रथम द्वार’ कहा जाता है। पुनपुन नदी को लेकर धार्मिक ग्रंथों में भी मान्यताएं मिलती हैं। गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यता के अनुसार इसे ‘आदिगंगा’ कहा गया है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि पुनपुन नदी के तट पर पितरों के लिए तर्पण करने से पूर्वजों का उद्धार होता है और सात पीढ़ियों को इसका पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि पितृपक्ष में आज भी कई लोग पुनपुन से अपनी धार्मिक यात्रा शुरू करते हैं। मान्यता के अनुसार यहां स्नान और तर्पण के बाद प्रथम पिंडदान किया जाता है। इसके बाद गया जाकर फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और अन्य कर्मकांड किए जाते हैं।
भारत और खाड़ी देशों ने समुद्री आवाजाही की आजादी और जहाजों की सुरक्षा पर प्रतिबद्धता जताई

न्यूयॉर्क। भारत और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) ने समुद्री रास्तों पर बिना रुकावट आवाजाही की आजादी के सिद्धांत को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। क्षेत्र में मौजूदा हालात के कारण इस स्वतंत्रता पर खतरा बढ़ गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को भारत-जीसीसी ट्रोइका मंत्रिस्तरीय बैठक की संयुक्त अध्यक्षता की। इस दौरान क्षेत्र के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) ने समुद्री रास्तों पर बिना रुकावट आवाजाही की आजादी के सिद्धांत को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हमने समुद्री आवाजाही की आजादी और नाविकों तथा कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई।” इस बैठक में जीसीसी के महासचिव जासेम अल-बुदैवी, बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ अल-जयानी और कतर के विदेश मामलों के राज्य मंत्री सुल्तान बिन साद अल मुरैखी समेत कई प्रतिनिधि शामिल हुए। जयशंकर ने बताया कि बैठक में भारत-जीसीसी संयुक्त कार्य योजना 2024-28 के तहत अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही भारत और जीसीसी के बीच साझेदारी को और आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इस जॉइंट एक्शन प्लान को 2024 में रियाद में हुई पहली भारत-जीसीसी विदेश मंत्रियों की बैठक में अपनाया गया था। इसमें स्वास्थ्य, व्यापार, कृषि, खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा तथा संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। जयशंकर ने खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय को दिए जा रहे सहयोग के लिए जीसीसी देशों के नेतृत्व को धन्यवाद भी दिया। भारतीय प्रवासियों की सबसे बड़ी आबादी खाड़ी क्षेत्र में रहती है, जहां 90 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं। जयशंकर ने बताया कि बैठक में भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत शुरू होने का भी स्वागत किया गया। छह देशों वाला जीसीसी फिलहाल भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और जीसीसी के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 178 अरब डॉलर रहा था। मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत फरवरी में दोबारा शुरू हुई थी। मंत्रिस्तरीय बैठक की तैयारी के तहत पिछले महीने रियाद में सऊदी अरब में भारत के राजदूत विपुल और जीसीसी महासचिव अल-बुदैवी के बीच भी बातचीत हुई थी। जयशंकर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “हम व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, नई टेक्नोलॉजी, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद करते हैं।
जिस चीज से डर लगे, उसे जरूर करना चाहिए, उज्ज्वल निकम का रोल निभाने पर बोले राजकुमार राव

मुंबई। अभिनेता राजकुमार राव और वामिका गब्बी आगामी फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ में नजर आएंगे। दोनों कलाकारों सरकारी वकील उज्ज्वल निकम (राजकुमार राव) और पत्नी ज्योति निकम (वामिका गब्बी) का किरदार निभाने को लेकर अपनी शुरुआती घबराहट के बारे में बताया। दोनों कलाकार उज्ज्वल निकम के साथ ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ में पहुंचे। इस दौरान शो के होस्ट और बॉलीवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने असल जिंदगी के किरदारों को पर्दे पर निभाने की मुश्किलों का जिक्र किया। राजकुमार ने बताया कि जब निर्देशक अविनाश अरुण ने उन्हें उज्ज्वल निकम के रोल के लिए संपर्क किया था, तो वे शुरू में काफी नर्वस थे, खासकर उम्र, शारीरिक बनावट और आवाज में अंतर की वजह से। अभिनेता राजकुमार ने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा, “सर, जब फिल्म के डायरेक्टर ने बताया कि ये फिल्म बन रही है, तो मैं डर गया कि मैं उज्ज्वल जी का किरदार कैसे निभाऊंगा क्योंकि उम्र का फर्क है, शारीरिक बनावट का फर्क है और आवाज का फर्क है। पर मैं ऐसा मानता हूं कि जिस चीज से डर लगता है, उसे जरूर करना चाहिए, तभी आप खुद को आगे बढ़ाते हो, नहीं तो एक कलाकार के तौर पर आप हमेशा अपने कम्फर्ट जोन में ही रहोगे।” राजकुमार ने बताया कि उन्होंने उज्ज्वल निकम के हावभाव और आवाज को समझने के लिए घंटों तक उनके वीडियो देखे। इस किरदार के लिए उन्होंने अपना वजन भी बढ़ाया ताकि वे सरकारी वकील जैसे दिख सकें। उन्होंने कहा, “तो मैंने हमारे निर्देशक अविनाश अरुण से कहा कि फिल्म करते हैं, पर मैं उज्ज्वल जी से नहीं मिल पाया क्योंकि वो काफी बिजी रहते हैं, पर मैंने यूट्यूब पर घंटों-घंटों तक उनके वीडियो देखे। उज्ज्वल जी की आवाज को पकड़ना बहुत मुश्किल था और फिर मैंने शारीरिक बनावट के लिए वजन बढ़ाया।” वहीं वामिका गब्बी ने बताया कि वह भी ज्योति निकम का किरदार निभाने से पहले हिचकिचा रही थीं। उन्होंने कहा, “सर, इनकी तरह मैं भी डर गई थी और मैंने तो पहले फिल्म के लिए मना कर दिया था, क्योंकि एक तो मुझे 50 साल की महिला का किरदार निभाना था और मेरी तो अभी तक शादी भी नहीं हुई और वहां तो 22-23 साल के बच्चे हैं। हालांकि एक अभिनेता के तौर पर कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना जरूरी है। यह सोचकर मैंने यह चुनौती स्वीकार करने का फैसला किया।” उन्होंने कहा, “जिस चीज से डर लगे वो करना चाहिए और मैंने भी सोचा कि मैं भी देख लूं कि मैं कितने पानी में हूं। पर ज्योति मैम इतनी प्यारी हैं कि बाद में मुझे एहसास हुआ कि मैं कितने मजबूत इंसान का किरदार निभा रही हूं।
सपा नेता राम गोविंद चौधरी के निधन से सियासी गलियारों में शोक, अखिलेश समेत नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी के निधन से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शनिवार को लखनऊ के निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी अपार्टमेंट पहुंचे और चौधरी के पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। इस दौरान अखिलेश यादव भावुक नजर आए। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और समर्थक भी उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के निधन को समाजवादी आंदोलन और समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा, “राम गोविंद चौधरी जी समाजवादी आंदोलन के नेता रहे और शुरुआती दौर में जिस समय समाजवाद की पहचान बनानी थी, उस पीढ़ी के वो लोग हैं।” सपा अध्यक्ष ने कहा कि राम गोविंद चौधरी ने समाजवादी आंदोलन के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया और उनका पूरा जीवन संघर्ष में गुजरा। उन्होंने कहा, “वह बहुत प्रभावी ढंग से अपनी बात को रखते थे। उनके ना रहने पर समाजवादी आंदोलन को क्षति हुई है। समाजवादी पार्टी को बहुत बड़ी क्षति हुई है। इस दुख की घड़ी में हम सब समाजवादी लोग उनके परिवार के साथ हैं।” राम गोविंद चौधरी के निधन पर बलिया के बांसडीह से भाजपा विधायक केतकी सिंह ने भी शोक जताया। उन्होंने कहा कि उनका निधन पूरे क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। वैचारिक मतभेदों के बावजूद वह राजनीति में उनके लिए अभिभावक के समान थे। केतकी सिंह ने कहा कि जनसेवा, जमीनी संघर्ष और समाजवादी विचारधारा के प्रति राम गोविंद चौधरी का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी राम गोविंद चौधरी के आवास पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके आवास पर राजनीतिक दलों के नेताओं, समर्थकों और परिचितों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। पूरे परिसर में शोक का माहौल रहा। राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। बलिया जिले से आने वाले चौधरी ने वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में चिलकहर विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। राम गोविंद चौधरी के निधन पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “यह बहुत दुखद घटना है। वे एक लोकप्रिय नेता थे जिन्होंने संसद से लेकर सड़कों तक गरीबों, कमजोर वर्गों, पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचितों के लिए लड़ाई लड़ी। हम उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दें।” वर्ष 1990 से 1991 के बीच मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बांसडीह से जीत दर्ज करने के बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह से फिर जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। वर्ष 2017 से 2022 तक उन्होंने इस पद की जिम्मेदारी संभाली। वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान राम गोविंद चौधरी पूर्वांचल की राजनीति में समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। उनके निधन पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से शोक संवेदनाओं का सिलसिला जारी है।
एशियन गेम्स: महिला कबड्डी टीम ने देश को दिलाया तीसरा गोल्ड, फाइनल में ईरान को 37-34 से हराया

नागोया। भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में देश को तीसरा गोल्ड मेडल दिला दिया है। भारतीय टीम ने फाइनल मुकाबले में ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय महिला टीम ने हांगझोऊ 2023 एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। बेहद रोमांचक और करीबी रहे इस मुकाबले में भारत ने आखिरी समय तक अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी थी। ईरान भी वापसी के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। मैच के आखिरी मिनट में ईरान को मुकाबले में बने रहने के लिए पॉइंट्स की जरूरत थी। भारत के डिफेंस ने आयनाज पर एक जरूरी टैकल करके मुकाबला आसानी से जीत लिया। 37-34 से मैच जीतकर भारतीय टीम ने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। पूरे टूर्नामेंट में भारत की तरफ से शानदार प्रदर्शन करने वाली संजू देवी ने एक बार फिर अहम भूमिका निभाई। भारतीय महिला कबड्डी टीम में पूजा, राज रानी, सोनाली विष्णु शिंगटे, पुष्पा, भावना देवी, रितु, संजू देवी, रितु नेगी, मनीषा कुमारी, पिंकी रॉय, ज्योति और निकिता शामिल थीं। भारतीय पुरुष कबड्डी टीम का भी शनिवार को ही फाइनल मुकाबला होने वाला है। भारतीय पुरुष टीम भी ईरान से ही भिड़ेगी। भारतीय टीम भी गत चैंपियन है और ईरान के खिलाफ अपने खिताब का बचाव करने उतरेगी। भारतीय दल के लिए शनिवार का दिन अच्छा रहा है। सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन में 2:11:37 के नेशनल रिकॉर्ड टाइम के साथ सिल्वर मेडल जीता। बरवाल ने एशियन गेम्स मैराथन में पदक के लिए भारत का 44 साल का इंतजार समाप्त किया। भारत ने महिलाओं के 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में आशी चौकसे, तिलोत्तमा सेन और विदरसा विनोद की मदद से सिल्वर मेडल भी जीता। स्क्वैश में, जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार ने हांगकांग के टैंग मिंग होंग और ली का यी के खिलाफ मिक्स्ड डबल्स सेमीफाइनल हारने के बाद ब्रॉन्ज मेडल जीता।
दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को बारिश-आंधी का अलर्ट, तीन दिन तक छाए रहेंगे बादल

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश का असर अब दिल्ली-एनसीआर के मौसम पर भी दिखाई देने लगा है। शनिवार सुबह से ही दिल्ली, नोएडा और आसपास के इलाकों में आसमान पर काले बादल छाए हुए हैं और कई स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 26 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर के लिए बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। आईएमडी के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 और 27 सितंबर को सामान्य तौर पर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार, 26 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। इस दिन सामान्य तौर पर बादल छाए रहेंगे और मध्यम बारिश हो सकती है। सुबह से लेकर पूर्वाह्न, दोपहर और शाम तक अलग-अलग समय पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। 27 सितंबर को भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। आईएमडी के पूर्वानुमान में इस दिन अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आसमान सामान्य तौर पर बादलों से घिरा रहेगा और मध्यम बारिश की संभावना है। सुबह, पूर्वाह्न, दोपहर और शाम के समय हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की रफ्तार 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। 28 सितंबर को भी बादल छाए रहने की संभावना है, हालांकि बारिश की तीव्रता कम होगी। अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। इस दिन हल्की बारिश का अनुमान है और कोई मौसम चेतावनी नहीं दी गई है। वहीं 29 सितंबर को मौसम में धीरे-धीरे सुधार की संभावना है। अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आसमान मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है और कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। मौसम विभाग के 26 सितंबर के उप-विभागीय पूर्वानुमान में पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी है। 27 सितंबर को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान है। इसके चलते उत्तर प्रदेश से सटे दिल्ली-एनसीआर में भी बादल और बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। बारिश और तेज हवाओं के चलते सड़क यातायात प्रभावित होने, जलभराव तथा बिजली से जुड़ी दिक्कतों की आशंका बन सकती है।
श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर राजनाथ सिंह और नितिन नवीन समेत कई नेताओं ने किया नमन

नई दिल्ली। सिख धर्म के तृतीय गुरु श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति ज्योत दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि श्री गुरु अमरदास जी के उच्च आदर्श, आध्यात्मिक दृष्टि और मानव कल्याण के प्रति समर्पित दिव्य जीवन सदैव सभी को प्रेरणा देता रहेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सिख धर्म के तृतीय गुरु, श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति ज्योत दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन। श्री गुरु अमरदास जी ने ‘पहले पंगत, फिर संगत’ की परंपरा को सुदृढ़ करते हुए सामाजिक समरसता और समानता को प्रतिष्ठित किया। उन्होंने जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध मानवता, सेवा और एकता का अमर संदेश दिया। उनके उच्च आदर्श, आध्यात्मिक दृष्टि और मानव कल्याण के प्रति समर्पित दिव्य जीवन सदैव सभी को प्रेरणा देता रहेगा।” केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “प्रेम, दया और करुणा के सागर, सिखों के तृतीय गुरु, श्रद्धेय श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। आपने धर्म की रक्षा और मानवता के कल्याण के लिए जो पुण्य ज्योत प्रज्वलित की है, वह सदैव देदीप्यमान रहेगी।” भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पोस्ट किया, “तीसरे गुरु, साहिब श्री गुरु अमर दास जी की ‘ज्योति-जोत’ पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। ‘गुरु का लंगर’ की परंपरा को मजबूत करके ‘पहले पंगत, फिर संगत’ का सिद्धांत देकर गुरु साहिब ने ‘गुरु घर’ में हर जरूरतमंद को समान स्थान दिया गया।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, “सेवा, समता और करुणा का मार्ग दिखाने वाले सिख पंथ के तृतीय गुरु, श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर श्रद्धापूर्वक नमन। मानवता के कल्याण और सामाजिक समरसता के लिए उनकी शिक्षाए सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी।” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी श्री गुरु अमर दास जी के ज्योति ज्योत दिवस पर नमन किया। उन्होंने लिखा, “गुरु साहिब ने अपने जीवन में सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध खड़े होकर समानता की भावना को सुदृढ़ किया। संगत-पंगत की परंपरा को व्यापक रूप देकर उन्होंने हर व्यक्ति के सम्मान और समान अधिकार का संदेश समाज तक पहुंचाया। उनकी शिक्षाएं आज भी हमें सेवा, सद्भाव और मानवीय गरिमा के मूल्यों को अपनाते हुए समाज को अधिक समरस और एकजुट बनाने की दिशा दिखाती हैं।