समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान ही राष्ट्र निर्माण’, पं. दीनदयाल की जयंती पर पीएम मोदी ने किया नमन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सुभाषितम में भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल को नमन किया है। इसके साथ ही संस्कृत श्लोक के जरिए पुरुषार्थ से सफलता के बारे में बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “राष्ट्रसेवा के सच्चे साधक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और अंत्योदय की एक ऐसी विचारधारा दी, जिससे आज भी जनकल्याण की अद्भुत प्रेरणा मिलती है। आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का संकल्प दोहराएं।” इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने संस्कृत का श्लोक भी साझा किया, “यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा। इति पौरुषमेवास्ति दैवमस्तु तदेव च॥” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, मनुष्य जितना अधिक पुरुषार्थ और प्रयास करता है, उतनी ही शीघ्र सफलता प्राप्त करता है। इसलिए केवल भाग्य नहीं बल्कि कर्म, साहस और नए विचारों को साकार करने का पुरुषार्थ ही सफलता और नवाचार का मार्ग प्रशस्त करता है। यह श्लोक प्रसिद्ध हिंदू दार्शनिक ग्रंथ ‘योगवासिष्ठ’ से लिया गया है। यह इस ग्रंथ के द्वितीय प्रकरण (मुमुक्षुव्यवहारप्रकरणम्) के छठे सर्ग का दूसरा श्लोक है। योगवाशिष्ठ महारामायण संस्कृत सहित्य में अद्वैत वेदान्त का विशाल ग्रन्थ है। परम्परानुसार आदिकवि वाल्मीकि योगवाशिष्ठ महारामायण के रचयिता माने जाते हैं, लेकिन वास्तविक रचयिता वशिष्ठ हैं और महर्षि वाल्मीकि इस सिद्धांत ग्रन्थ के संकलनकर्ता मात्र हैं। योगवाशिष्ठ महारामायण में जगत् की असत्ता और परमात्मसत्ता का विभिन्न दृष्टान्तों के माध्यम से प्रतिपादन है। भारद्वाज के मोक्ष की प्राप्ति के लिए की गई प्रश्नोत्तरी का भी वर्णन है। इसके पहले पीएम मोदी ने गुरुवार को सुभाषित में संस्कृत श्लोक, “अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्। स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥” साझा किया था। जिसका हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को सदैव ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो सत्य, प्रिय और हितकारी हो और किसी के मन में अशांति उत्पन्न न करे। सद्ग्रंथों का निरंतर स्वाध्याय और चिंतन ही वाणी को वास्तविक सार्थकता प्रदान करता है। विचारपूर्वक बोली गई वाणी समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का संचार करती है।

दीनदयाल उपाध्याय को उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि, कहा- ‘राष्ट्र निर्माण की यात्रा को प्रेरित करते हैं उनके आदर्श’

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अंत्योदय व एकात्म मानववाद के प्रणेता और भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास के केंद्र में लोगों को रखने और पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के उत्थान के उनके शाश्वत आदर्श, समावेशी प्रगति, सामाजिक न्याय और राष्ट्र-निर्माण की हमारी सामूहिक यात्रा को निरंतर प्रेरित करते हैं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर मैं सादर नमन करता हूं। एक दूरदर्शी विचारक, देशभक्त और ‘एकात्म मानववाद’ व ‘अंत्योदय’ के पुरोधा के रूप में, विकास के केंद्र में लोगों को रखने और पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के उत्थान के उनके शाश्वत आदर्श, समावेशी प्रगति, सामाजिक न्याय और राष्ट्र-निर्माण की हमारी सामूहिक यात्रा को निरंतर प्रेरित करते हैं।” केंद्रीय संसदीय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय को नमन किया। उन्होंने लिखा, “भारतीय चिंतन, सांस्कृतिक मूल्यों और मानव कल्याण पर आधारित ‘एकात्म मानववाद’ उनके समग्र दृष्टिकोण का दर्शन है। ‘अनेकता में एकता और विभिन्न रूपों में एकता की अभिव्यक्ति’ वाली भारतीय संस्कृति की उनकी सोच आज भी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और राष्ट्रहित के लिए मार्गदर्शक है। राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पित जीवन हम सभी के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।” केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लिखा, “प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने सदैव राष्ट्रसेवा, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान को केंद्र में रखा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार और आदर्श हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।” वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भारत माता के महान सपूत और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।” उन्होंने लिखा, “दीनदयाल ने भारतीय चिंतन के आधार पर ऐसी विकास दृष्टि प्रस्तुत की, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रगति का लाभ पहुंचाना केंद्र में रहा। उनका अंत्योदय का विचार आज भी राष्ट्र के समावेशी विकास और जनकल्याण की दिशा में हमारा मार्गदर्शन करता है। उनका जीवन राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सेवा यात्रा’ में शामिल युवाओं से किया संवाद, कहा- ‘ये अनुभव अमूल्य हैं’

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वाराणसी से वडनगर तक जाने वाली ‘सेवा यात्रा’ में शामिल लोगों से संवाद किया। पीएम मोदी ने उनका हालचाल जाना और ‘सेवा यात्रा’ में उनके सफर और लोगों के बीच संदेश के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा में जो अनुभव आपको मिल रहे हैं, वो सचमुच में अमूल्य हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा यात्रियों से संवाद करते हुए कहा कि आप सभी बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का आशीर्वाद लेकर वडनगर में चीर पुरातन हाटकेश्वर महादेव के दर्शन करने जा रहे हैं। पूरे रास्ते आप सेवा कार्य भी कर रहे हैं। यह निश्चित रूप से बहुत बड़े सौभाग्य की बात है। पीएम मोदी ने कहा कि वडनगर ने उन्हें जीवन के संस्कार दिए और काशी ने संस्कारों में सेवा के अनगिनत रंग भरे। उन्होंने कहा, “मुझे संतोष है कि आप सभी युवा साथी भी अपनी यात्रा को अनेक सेवा के रंगों से सरावोर कर रहे हैं। ये रंग सेवा, संस्कार, संकल्प के हैं।” उत्तर प्रदेश के सेवा यात्री कुलदीप पटेल ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे जब एक गांव में रात्रि विश्राम के लिए पहुंचे, तो लोगों ने बड़े उत्साह के साथ उनका स्वागत किया था। एक घर में बेहद स्वादिष्ठ खाना बनाया गया, तब एक छोटे बच्चे ने भी बोला था कि वह भी मोदी जी के गांव जाना चाहते हैं। पीएम मोदी ने कुलदीप पटेल से पूछा कि हर दिन गाड़ी से लंबी दूरी तय करनी होती है, तो परेशानी रहती होगी। इस पर सेवा यात्री ने कहा कि कोई परेशानी नहीं होती है। सभी सेवा यात्रियों में आपके प्रति स्नेह और ऊर्जा के साथ सभी आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा यात्रा में शामिल लोगों से कहा, “सेवा संकल्प यात्रा में जो अनुभव आपको मिल रहे हैं, वो सचमुच में अमूल्य हैं। आपकी पूरी जीवन यात्रा में ये यात्राएं एक नई ऊर्जा भर देगी और लोगों के बीच जाना और उनसे जुड़ने उसमें अपने आपको ढाल देना ये अपने आप में एक अद्भूत अनुभव होता है और अलग-अलग प्रदेश के गांवों में आप जब जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि भारत कितना भव्य, विराट और विशाल है ये सब आप किताबों में नहीं समझेंगे जो आप इस यात्रा में देख सकते हैं।” उन्होंने कहा कि हर जगह अलग-अलग परंपराएं हैं। खान-पान अलग होता है। सेवा के आनंद में देखा जा सकता है कि समाज कितना जुड़ता है। हम कुछ नहीं हैं। जब हम लोगों से सुनते हैं तो आनंद आता है और वही ऊर्जा बनता है। पीएम मोदी ने सेवा यात्रियों से कहा कि आप इस यात्रा को जी लीजिए। आपको जीवन का एक बहुत बड़ा खजाना मिला है। इसको कभी भी ओझल मत होने देना। जीवन में इससे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इसके बाद पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के रायसेन में सेवा यात्री प्रदीप मुखर्जी से संवाद किया। सेवा यात्रियों के स्वागत सत्कार के लिए पीएम मोदी ने गांवों के लोगों को प्रणाम किया। पीएम मोदी ने प्रदीप मुखर्जी और उनकी टीम के सदस्यों का हालचाल पूछा। साथ ही, पीएम मोदी ने यात्रा के दौरान हेलमेट पहनने की सलाह दी। इसी बीच, प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रा में शामिल लोगों से पूछा कि आप गांवों में लोगों, किसानों और युवाओं से मिलते हैं तो वहां से भागने की जल्दी रहती है या जहां जाते हैं वहां जीने की कोशिश करते हैं। इस पर प्रदीप मुखर्जी ने कहा कि हमें भागने की कोई जल्दी नहीं होती है। हम लोग सेवा कार्य में निकले हैं। आपसे (पीएम मोदी) हमें प्रेरणा मिली है। आपने जनसेवा के 25 साल पूरे किए हैं। आप हमारे प्रेरणास्त्रोत हैं। हम 20 हजार किलोमीटर की यात्रा के लिए भी तैयार हैं। इस पर पीएम मोदी ने उनकी प्रशंसा की। साथ ही, पीएम मोदी ने उनसे कहा, “जब योजनाएं बनती है तो कभी-कभी लगता है कि सरकारें हैं तो योजनाएं बना दी। लेकिन जब योजना से जब किसी भी जिंदगी बदल जाती है, किसी के जीवन में एक नई जिंदगी आ जाती है, तो कितना संतोष मिलता है, ये आपने अनुभव किया होगा। सेवा यात्रियों के लिए ये भी एक प्रशिक्षण है कि सरकारों की योजनाएं सिर्फ पैसे खर्च करना नहीं होता है अगर वो योजना आखिरी व्यक्ति तक पहुंचती है,तो उसके लिए एक नया जीवन शुरू हो जाता है उसका संतोष बहुत अद्भूत है।

भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार क्रय शक्ति समता के आधार पर करीब 20 ट्रिलियन डॉलर : पीयूष गोयल

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार क्रय शक्ति समता के आधार पर करीब 20 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया है, जो इसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाते हैं। यह बयान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिया। क्रय शक्ति समता (पीपीपी) मुद्रा बदलने की वे दरें हैं जिनका उद्देश्य अलग-अलग देशों में कीमतों के स्तर के अंतर को खत्म करके अलग-अलग मुद्रा की खरीदने की क्षमता को बराबर करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेगा, इन उपायों के बीच का अंतर कम होता जाएगा। खास बात यह है कि व्यापार वार्ता को लेकर भारत का नजरिया देश की बदलती आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के साथ जुड़ाव को मजबूत करने के उसके लक्ष्य को दर्शाता है। उन्होंने सामान, सेवाओं, पर्यटकों, शिक्षण संस्थानों और खेलों के आसानी से आवागमन के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया। राष्ट्रीय राजधानी 13वें ‘पीएएफआई एनुअल फोरम 2026’ में बोलते हुए, गोयल ने कहा कि भारत ऐसी अर्थव्यवस्था के तौर पर व्यापार और आर्थिक साझेदारी के लिए बातचीत कर रहा है, जिसके 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। अभी चल रही बातचीत में कनाडा, चिली, पेरू, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (एसएसीयू), मेक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) और इजरायल के साथ बातचीत शामिल है। इन बातचीत का मकसद भारत के लिए ग्लोबल वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में शामिल होने के मौके बढ़ाना और सामान व सेवाओं के आवागमन को आसान बनाना है। इस बीच, अगले पांच सालों में भारत में सेमीकंडक्टर की सालाना खपत की मांग बढ़कर 150 अरब डॉलर से ज्यादा होने की उम्मीद है। गोयल ने एआई इकोसिस्टम में क्षमताएं विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया, जिसमें बड़े लैंग्वेज मॉडल और एजेंटिक मॉडल शामिल हैं। अब ध्यान इनोवेशन और डीप-टेक इकोसिस्टम में भारतीय स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत प्राइवेट सेक्टर द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा, भारत की युवा आबादी ग्लोबल घटनाक्रमों और अवसरों के बारे में तेजी से जागरूक हो रही है। उन्होंने युवाओं की अपने भविष्य के बारे में सही फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा जताया। मंत्री ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की ग्रोथ का भी जिक्र किया।