कांग्रेस की विचारधारा विश्व कल्याण और मानवता की है : पप्पू यादव

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के नतीजों पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कोई खत्म नहीं कर सकता और इसकी विचारधारा विश्व कल्याण और मानवता के लिए है। पप्पू यादव ने आईएएनएस से कहा, “कोई एनएसयूआई का क्लीन स्वीप नहीं हुआ। जब तक हम सब हैं, कांग्रेस को कोई डुबा नहीं सकता। कांग्रेस को कोई मार नहीं सकता। कांग्रेस की विचारधारा यह विश्व कल्याण और मानवता की विचारधारा है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बाहर से कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, बल्कि नुकसान खुद कांग्रेसियों की वजह से होता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव में भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस को खुद कांग्रेसी खत्म करते हैं।” पप्पू यादव ने कहा कि पार्टी के लोग राहुल गांधी की छवि और उनके संघर्ष को देखकर काम नहीं करते, बल्कि निजी स्वार्थ और अहंकार में काम करते हैं। उन्होंने कहा, “हम लोग राहुल गांधी के इमेज के बारे में, उसके जो संघर्ष है उसको हम लोग देखकर काम नहीं करते। अपने निजी स्वार्थ को देख के, अपने निजी ईगो को देख के काम करते हैं।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार छात्रों की बात कर रहे हैं। कैंपस में कई बच्चों की मौत हुई और जो इंडिपेंडेंट पैनल जीता, वो भी कांग्रेसी ही हैं। जो 100 वोट से हारे, वो भी कांग्रेसी हैं। पप्पू यादव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने आदिवासी समाज के बच्चों को मौका दिया, यह छोटी बात नहीं है। उनके अनुसार हार-जीत मायने नहीं रखती। उन्होंने कहा, “हमारे अध्यक्ष, राहुल गांधी ने जो आदिवासी समाज के बच्चों को दिया, यह छोटी बात थोड़ी है। हार-जीत का मैटर नहीं है। मैटर है कि हमारे बच्चों ने हारा नहीं, हराए गए हमारे अध्यक्ष को। हजार-डेढ़ हजार वोट से हरा दिए गए।” उन्होंने बताया कि गिनती के दौरान वे 14 से 15 राउंड तक आगे चल रहे थे। अंत में उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राहुल गांधी ने बड़ी जिम्मेदारी दी है, वे ही उनके सपने, उम्मीद और विश्वास के साथ धोखा कर रहे हैं।
आजम खान के समर्थन में सपा कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में किया प्रदर्शन, कहा- ‘साजिश के तहत हुए 350 मुकदमे’

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के समर्थन में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रविवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। सपा कार्यकर्ताओं ने आजम खान की रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर से पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान के नेतृत्व में रविवार को पार्टी कार्यक्रम रविवार को जंतर-मंतर पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। मोहम्मद अरशद खान ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि हमारे पास प्रदर्शन की अनुमति थी, लेकिन पुलिस ने इसे एकाएक रद्द कर दिया। हम लोग यहां प्रदर्शन करने पहुंचे तो पुलिस ने चारों ओर बैरिकेडिंग करके रास्ते को रोक दिया। उन्होंने कहा कि 2019 में तमाम साजिशों के बावजूद आजम खान को जीत मिली थी। अगले कुछ महीनों में उन पर और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ तकरीबन 350 मुकदमे दर्ज कर दिए गए। इतने मुकदमे दर्ज होना सरकारी साजिश का ही नतीजा था। आजम खान और उनके परिवार के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी जायज तरीके से बनी हुई है, लेकिन तीन महीने पहले 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का नोटिस दे दिया गया। यह नोटिस गलत तरीके से दिया गया। मांग है कि ध्वस्तीकरण के नोटिस को वापस लिया जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा के नेता प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन लेकर भी पहुंचे। इसमें उन्होंने लिखा, “यह सर्वविदित है कि वर्ष 2019 में मात्र 3-4 महीनों की अल्प अवधि में आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध लगभग 350 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। एक ही परिवार पर इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होना प्रथम दृष्टया राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक दुरूपयोग की आशंका को जन्म देता है। इससे यह संदेह गहरा होता है कि क्या इतने मुकदमे वास्तविक अपराधों पर आधारित हैं या राजनीतिक विरोध की कीमत वसूलने के लिए दर्ज किए गए हैं।” इसमें मोहम्मद अरशद खान ने लिखा, “रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया गया है। यह हजारों छात्रों के भविष्य का सवाल है। यह केवल इमारतों का नहीं बल्कि शिक्षा, शोध और रोजगार से जुड़े हजारों परिवारों के जीवन का प्रश्न है। इसलिए, इस नोटिस को तत्काल निरस्त किया जाए और अंतिम निर्णय तक किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
बिहार बाढ़ पीड़ितों के लिए एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक महीने की सैलरी देना सराहनीय : राजीव रंजन

पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक महीने की सैलरी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने के फैसले का स्वागत करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि यह एक मिसाल कायम करने वाला कदम है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “इतनी भयानक बाढ़ के बीच, लोगों की मुश्किलों को कम करने और स्थिति को जितना हो सके काबू में करने की कोशिशें की जा रही हैं। राहत और पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे हालात में केंद्र की मदद, राज्य सरकार के संसाधन और फिर आम लोगों की भागीदारी होती है। अब जन-प्रतिनिधियों ने इस बड़े अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का फैसला किया है, और यह एक स्वागत योग्य कदम है।” वहीं, जेडीयू विधायक अनंत सिंह और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार के बीच चल रहे मतभेदों पर पूछे गए सवाल पर राजीव रंजन ने इसे चुनाव से पहले की सामान्य खींचतान बताया। उन्होंने कहा, “अभी चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। लेकिन एनडीए एक बड़ा परिवार है और इसके सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं। बिहार में हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की है। इसलिए, अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। हमें अब भी भरोसा है कि सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा।” इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान मंच से एक बुजुर्ग माता को कुर्सी देने के लिए कहने वाले बयान का कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के मंच से मजाक उड़ाए जाने की घटना पर भी कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। राजीव रंजन ने कहा, “राहुल गांधी ‘सेल्फ-गोल’ करने की कला में माहिर हो गए हैं। वे अक्सर ऐसी गलतियां करते हैं जो भारतीय जनता को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होतीं। एक मां के प्रति आम लोगों के सम्मान और श्रद्धा को समझे बिना ऐसी बातें कहना गलत है। बेशक, राहुल गांधी ने ‘गूंज’ कार्यक्रम में कई बातें कही होंगी, लेकिन आज सिर्फ इसी बात पर चर्चा हो रही है। इसलिए, यह समझा जाना चाहिए कि अब तक उन्होंने जितने भी ‘गूंज’ कार्यक्रम किए हैं, वे बेमतलब साबित हुए हैं।
कोलकाता में सीपीआई-एम के दफ्तरों में तोड़फोड़, टीएमसी के पूर्व विधायक के परिवार पर हमला

कोलकाता। दक्षिण कोलकाता के जादवपुर इलाके में मोटरसाइकिल सवार अज्ञात बदमाशों ने सीपीआई-एम के कई पार्टी दफ्तरों और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक देबराब्रता मजूमदार के घर व दफ्तर पर हमला किया और तोड़-फोड़ की। कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) इलाके के छह वार्डों में सीपीआई-एम के दफ्तरों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि इन हमलों के दौरान पार्टी का झंडा उतारकर जमीन पर फेंक दिया गया। वार्ड नंबर 96 के लंबे समय से केएमसी पार्षद और पूर्व विधायक मजूमदार के घर और दफ्तर पर भी हमला किया गया और उनके परिवार के कुछ सदस्यों से मारपीट की गई। अभी यह साफ नहीं है कि इस घटना में कौन-कौन शामिल था। सीपीआई(एम) के एक नेता के अनुसार, वार्ड संख्या 96, 99, 101, 102, 105 और 106 में पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई। बताया जा रहा है कि इनमें सबसे अधिक तनाव वार्ड संख्या 96 में था, जहां पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक के आवास और पार्टी कार्यालय के सामने स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। इसके अलावा, इस वार्ड में स्थापित सीपीआई(एम) के शहीद स्मारक (मार्टियर्स अल्टर) को भी निशाना बनाकर हमला किया गया। आरोप है कि बदमाशों ने तृणमूल के पूर्व विधायक के बड़े भाई को धमकाया और उन्हें धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। इस हमले के बाद मजूमदार के परिवार ने कहा, “हमने बार-बार पुलिस को फोन करके घटना की जानकारी दी, लेकिन पुलिस एक घंटे बाद आई।” इसके अलावा, वार्ड नंबर 101 और वार्ड नंबर 105 में भी अशांति फैल गई। आरोप है कि वहां भी मारपीट हुई। तृणमूल के पूर्व पार्षद तरुण मंडल के दफ्तर में भी तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। आरोप है कि यह बाइक गैंग न सिर्फ जादवपुर इलाके में, बल्कि दक्षिण 24 परगना जिले के नरेंद्रपुर में भी उपद्रव मचा रहा है। इस घटना के बाद सीपीआई-एम और तृणमूल दोनों ने ही पूरी घटना में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। भाजपा पर भी आरोप लगाए गए हैं, लेकिन पार्टी ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मजूमदार ने कहा, “कम से कम 100 लोग आए और घर में तोड़फोड़ की। उन्होंने मेरे बड़े भाई को अपशब्द कहे। उन्हें धक्का दिया। उन्होंने मुझे भी अपशब्द कहे। मैंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। वे सभी भाजपा समर्थक हैं।” एक सीपीआई एम कार्यकर्ता ने कहा, “उन्होंने पार्टी के झंडे फाड़ दिए। उन्होंने हमें अपशब्द कहे। वे हमसे यहां न आने के लिए कह रहे हैं। वे सभी भाजपा के हैं। वे पहले तृणमूल के साथ थे।
विश्व अल्जाइमर दिवस 2026: जितनी जल्दी पहचान, उतनी बेहतर देखभाल

नई दिल्ली। अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। कई बार शुरुआती लक्षणों को लोग उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। समय रहते बदलावों को पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना आगे की देखभाल और सहायता की योजना बनाने में मदद कर सकता है। अल्जाइमर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। जितनी जल्दी आपको बीमारी के बारे में पता चलेगा, उतना ही बेहतर तरीके से आगे की तैयारी और जरूरी सहायता की जा सकती है। इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अल्जाइमर और डिमेंशिया के शुरुआती संकेत हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। जैसे व्यक्ति को समय या जगह को लेकर भ्रम होने लगना, रोजमर्रा की योजना बनाने या किसी समस्या को हल करने में परेशानी होना और पहले से आसानी से किए जाने वाले परिचित कामों को करने में कठिनाई महसूस होना। इसी तरह ऐसी याददाश्त की कमी, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। कुछ लोग काम या सामाजिक गतिविधियों से धीरे-धीरे दूरी बनाने लगते हैं। ऐसे बदलाव दिखाई दें तो उन्हें केवल बढ़ती उम्र का असर मानने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। अल्जाइमर से बचाव के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सक्रिय रहना जरूरी है। नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। रोजाना टहलना, योग या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी शारीरिक गतिविधियां शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी हैं। अपने दोस्तों और परिवार के साथ मजबूत सामाजिक जुड़ाव बनाए रखें। बातचीत करना, लोगों से मिलना-जुलना और सामूहिक गतिविधियों में शामिल होना व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक रूप से सक्रिय रख सकता है। खाने में फल और सब्जियों सहित संतुलित और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें। साथ ही पर्याप्त और नियमित नींद लेना भी जरूरी है। कोशिश करें कि सोने और जागने का समय लगभग तय रहे। दिमाग को सक्रिय रखने के लिए नई चीजें सीखते रहें। किताब पढ़ना, कोई नया कौशल सीखना, संगीत या रचनात्मक गतिविधियों में रुचि लेना जैसे काम मानसिक सक्रियता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ऐसी गतिविधियों के लिए भी समय निकालें, जिनसे आपको खुशी और संतुष्टि मिलती है।
दक्षिण कोरियाई सेना का दावा, ‘उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी में दागा अज्ञात प्रोजेक्टाइल’

सोल। दक्षिण कोरिया की सेना ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी (जापान सागर) की ओर अज्ञात प्रोजेक्टाइल दागा है। ज्यादा दिन नहीं बीते जब प्योंगयांग ने वॉनसन इलाके से ईस्ट सी की तरफ कई मिसाइलें दागी थीं। योनहाप न्यूज एजेंसी ने दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) के हवाले से बताया कि उन्होंने मीडिया को भेजे एक संदेश में इस लॉन्च की जानकारी दी, लेकिन इसके बारे में और कोई डिटेल नहीं साझा किया। अकसर देखा गया है कि जब भी उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई चर्चा होती है या फिर उसे लगता है कि उसके हित प्रभावित हो रहे हैं तो वो इसी अंदाज में अपनी बात रखता है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने आईएईए के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें एक प्रस्ताव के तहत प्योंगयांग को परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा न दिए जाने की बात थी। वियना में हुए 70वें महासम्मेलन में ये प्रस्ताव पारित किया गया था। कहा गया कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत उत्तर कोरिया को इजाजत नहीं दी जा सकती। किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने गुरुवार को कहा कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार बनाए रखेगा। ये हथियार देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। किम यो ने परमाणु हथियार छोड़ने के लिए मनाने की कोशिशों को ‘बेवकूफी भरी बात’ कहा था। 12 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने वॉनसन इलाके से ईस्ट सी की तरफ कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं थीं। उस कार्रवाई को सोल, वॉशिंगटन और टोक्यो के बीच हो रहे त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास (7 सितंबर से 12 सितंबर) के विरोध के तौर पर देखा गया था। उत्तर कोरिया लगातार अपनी आक्रामक रुख पर कायम रहा है। 20 अगस्त को भी प्योंगयांग ने ईस्ट सी की ओर एक मिसाइल दागी थी। दक्षिण कोरिया की सेना ने दावा किया था कि इसकी रेंज 300 किलोमीटर की रही। जेसीएस ने मिसाइल के दागे जाने की जानकारी दी थी। हालांकि, पहले इसे अज्ञात प्रोजेक्टाइल बताया गया था और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसने कितनी दूरी तय की। उत्तर कोरिया ने इससे पहले 12 अगस्त को भी पूर्व दिशा में एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास के विरोध में किया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति के कहने पर इसकी अवधि घटा दी गई थी। पहले ये 17 अगस्त से 27 अगस्त के बीच होना था, लेकिन बाद में इसे 21 अगस्त तक कर दिया गया था। नॉर्थ कोरिया की कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से योनहाप ने बताया था कि किम यो जोंग ने सैन्य अभ्यास को लेकर किए जा रहे दावे पर संदेह जताते हुए कहा, “सैन्य अभ्यासों का दायरा या अवधि कम करने से उनके उकसावे वाले और आक्रामक स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आता।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्योंगयांग की ट्रंप के इस कदम में “जरा भी दिलचस्पी नहीं” है।
बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए जन सुराज ने पांच उम्मीदवारों का किया ऐलान

पटना। बिहार विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जन सुराज ने रविवार को पांच सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने पटना में उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। जनसुराज की ओर से दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एसपी राय, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रवींद्र यादव, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अफाक अहमद, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से दिव्या ज्योति और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रजनीश रंजन को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने इससे पहले सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए थे। इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल ने 11 सितंबर को आठ में से छह सीटों पर अपने अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा की थी। राजद ने पटना शिक्षक से डॉ. संजीव कुमार सिंह, पटना स्नातक से दिलीप कुमार, कोसी स्नातक से नितेश कुमार, दरभंगा स्नातक से अनिल कुमार झा, सारण शिक्षक से प्रो. जयराम यादव और तिरहुत स्नातक से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को उम्मीदवार बनाया है। दो सीटों दरभंगा शिक्षक और तिरहुत शिक्षक पर राजद ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की कुल आठ सीटों के लिए चुनाव होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इनमें पटना, दरभंगा, सारण और तिरहुत की शिक्षक तथा पटना, दरभंगा, कोसी और तिरहुत की स्नातक सीटें शामिल हैं। जन सुराज के मैदान में उतरने से इन सीटों पर मुकाबला और बहुकोणीय होने की संभावना है। वहीं, एनडीए की ओर से भाजपा और जदयू समर्थित उम्मीदवारों के मैदान में आने की तैयारी है। दूसरी ओर, महागठबंधन में राजद के अलावा कांग्रेस और वाम दलों की ओर से भी अलग-अलग सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए जाने से सीटों के तालमेल का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में आठ विधान परिषद सीटों के चुनाव में कई निर्वाचन क्षेत्रों में एक से अधिक प्रमुख राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के आमने-सामने आने की स्थिति बन रही है। जन सुराज के पांच उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब शेष सीटों पर उसके उम्मीदवारों तथा एनडीए और अन्य दलों की अंतिम सूची पर नजर रहेगी।
राहुल गांधी का ज्ञान हर मामले में निम्न स्तर का है : एनडीए

पटना। बिहार की राजधानी पटना में रविवार को सियासी सरगर्मी तेज रही और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान सामने आए। दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंच से एक बुजुर्ग महिला को कुर्सी देने के आग्रह का कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मजाक उड़ाया गया। इस घटना को लेकर एनडीए ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा, “जैसे संस्कार होते हैं, वैसी ही भाषा होती है। मैं राहुल गांधी का बहुत सम्मान करता हूं, लेकिन जिस तरह से वह शब्दों का चयन कर रहे हैं। उससे गंभीर समझ की कमी दिखती है। उन्होंने न केवल देश के प्रधानमंत्री का अपमान किया है, बल्कि उनकी मां का अपमान करना दिखाता है कि उनका संस्कार और मूल्यों से कोई लेना-देना नहीं है। राहुल गांधी का ज्ञान हर मामले में निम्न स्तर का है।” वहीं, जदयू विधायक अनंत सिंह और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता व एमएलसी नीरज कुमार के बीच मतभेद की खबरों पर श्याम रजक ने कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है। उन्होंने कहा, “मैं आपको दो बातें बताना चाहता हूं। हमारी पार्टी आंतरिक लोकतंत्र की सबसे मजबूत समर्थकों में से एक है और यहां अभिव्यक्ति की आजादी है। लेकिन इसके बावजूद हमारे नेता जो भी फैसला लेते हैं, सभी लोग उस फैसले को पूरे दिल से स्वीकार करते हैं। इसलिए हमारे नेता ने तय किया है कि नीरज कुमार समेत सभी एनडीए उम्मीदवार भारी अंतर से जीते, और हमारे सभी लोग इसी दिशा में काम कर रहे हैं। अगर कुछ लोग अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त कर रहे हैं, तो वह हमारी अभिव्यक्ति की आजादी का ही नतीजा है।” दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान मंच से एक बुजुर्ग माता को कुर्सी देने के लिए कहने वाले बयान का कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के मंच से मजाक उड़ाए जाने की घटना पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “राजनीति में एक बुनियादी मर्यादा, मूल्य और शालीनता होती है। लेकिन राहुल गांधी की मौजूदगी में और यह पहली बार नहीं हो रहा है, हमें बिहार विधानसभा चुनाव याद है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में और कांग्रेस पार्टी के मंच से प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया था। यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कांग्रेस पार्टी के महिला विरोधी, पिछड़ा विरोधी और गरीब विरोधी चरित्र को दर्शाता है।” नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर गुरु प्रकाश ने कहा, “मामला विचाराधीन है, यह न्यायिक प्रक्रिया में है और अदालत के सामने है। हमें पूरा भरोसा है और देश की न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है। जब न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी तो सच्चाई सामने आएगी और न्याय होगा।
कैलिफोर्निया में चुनावी रिकॉर्ड जब्त करना अब गंभीर अपराध, मध्यावधि चुनावों से पहले नए विधेयकों को मंजूरी

लॉस एंजिल्स। कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 13 नए विधेयकों को मंजूरी दी है। इनका उद्देश्य मतपत्रों की सुरक्षा करना, डाक के जरिए होने वाली वोटिंग में बाधा रोकना, चुनावी रिकॉर्ड और वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ रोकना, चुनाव से जुड़े डेटा को सुरक्षित रखना और किसी भी तरह के दबाव, धमकी या गैरकानूनी हस्तक्षेप को रोकना होगा। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति चुनावों के बीच आयोजित किए जाते हैं। चुनावी प्रक्रियाओं का संचालन मुख्य रूप से राज्यों के कानूनों के तहत होता है, जबकि संघीय कानून देशभर के लिए कुछ मानक निर्धारित करते हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, नए कानूनों में शामिल असेंबली बिल 282 के तहत चुनाव परिणामों के आधिकारिक प्रमाणन से पहले मतपत्रों, चुनावी रिकॉर्ड या प्रमाणित मतदान तकनीक को जब्त करना फेलोनी (गंभीर अपराध) माना जाएगा। वहीं सीनेट बिल 259 किसी अधिकारी या प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किसी को डाक मतपत्र की डिलीवरी या उसे वापस भेजने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के निर्देश देने को भी फेलोनी अपराध घोषित करता है। इसके अलावा, असेंबली बिल 1664 स्थानीय एजेंसियों और चुनाव अधिकारियों को यह अनिवार्य करता है कि चुनावी रिकॉर्ड या प्रमाणित मतदान तकनीक से जुड़े किसी भी निर्दिष्ट कानून-प्रवर्तन कार्रवाई की जानकारी वे तुरंत राज्य प्रशासन को दें। यह विधायी कदम कैलिफोर्निया और ट्रंप प्रशासन के बीच संघीय चुनावी नीतियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया है। मार्च में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर संघीय एजेंसियों को मतदान आयु के सत्यापित नागरिकों की सूची राज्यों को उपलब्ध कराने और डाक मतपत्रों से संबंधित नए मानकों पर नियम बनाने का निर्देश दिया था। कैलिफोर्निया समेत कई राज्यों ने इस आदेश को संघीय अदालत में चुनौती दी थी। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रतिबंधों को नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले लागू करने के प्रयास पर रोक लगा दी। कैलिफोर्निया ने राज्यव्यापी मतदाता पंजीकरण डेटा साझा करने की संघीय मांगों का भी विरोध किया है। गवर्नर गैविन न्यूसम, राज्य सचिव शर्ली वेबर और अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि नया कानून पैकेज राज्य की चुनावी व्यवस्था को संघीय हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने में मदद करेगा। शर्ली वेबर ने कहा, “यह विधायी पैकेज सुनिश्चित करेगा कि कैलिफोर्निया के मतदाताओं को न तो डराया जाएगा और न ही उनकी आवाज दबाई जाएगी।” वहीं गैविन न्यूसम ने कहा कि ये नए कानून कैलिफोर्निया की चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए पहले से बनाए गए सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करेंगे।
अयोध्या में चंद्रशेखर आजाद का सरकार पर हमला, बोले-‘बम से सरेआम हत्या और अब तक आरोपी नहीं पकड़े गए’

अयोध्या। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद रविवार को अयोध्या सर्किट हाउस से थाना पूरा कलंदर क्षेत्र में मृतक राम लगन मौर्य के परिजनों से मुलाकात करने के लिए रवाना हुए। राम लगन मौर्य और उनकी मां की बीते दिनों गोलीबारी और बमबाजी की घटना में मौत हुई थी। चंद्रशेखर आजाद ने घटना को बेहद दर्दनाक बताते हुए अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल उठाए। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्होंने फिल्मों में या बंगाल अथवा दूसरे देशों के संदर्भ में बम के इस्तेमाल और सरेआम हत्या की घटनाएं देखी-सुनी थीं, लेकिन अयोध्या जैसे शहर में इस तरह की घटना होना बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा, “राम लगन जी के साथ जो हुआ, वह बहुत दर्दनाक है। हमने पिक्चरों में देखते थे या बंगाल या दूसरे देशों में यह सुनाई देता था कि बम का प्रयोग होता है, सरेआम हत्या कर दी जाती है। लेकिन यह हमने अपनी आँखों से यहाँ अयोध्या जिसे साकेत भी कहा जाता है और पूरी दुनिया में जिसकी पहचान है वहाँ अगर सरेआम बम से हत्या हो रही है, कई-कई बम दागे जा रहे हैं…” उन्होंने कहा कि घटना में केवल राम लगन मौर्य की ही जान नहीं गई, बल्कि उनकी मां भी गंभीर रूप से प्रभावित हुईं और करीब 15 दिन बाद उनकी भी मौत हो गई। चंद्रशेखर ने कहा कि परिवार के लोगों ने उनसे मुलाकात कर दुख में शामिल होने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, “एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरी भी यह जिम्मेदारी है, अगर किसी के यहाँ कुछ हुआ है… अब तो कार्रवाई पुलिस करेगी, लेकिन उस परिवार का दुख बाँटना, उनके विश्वास को कानून के प्रति, संविधान के प्रति मजबूत करना यह जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।” चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्होंने परिवार से मुलाकात कर उनकी बात सुनने और मामले को मीडिया के माध्यम से देश के सामने रखने का वादा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने और नई भर्तियों की घोषणाओं को लेकर भी चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे और नई रिक्तियों की घोषणा होगी, लेकिन पिछले साढ़े नौ वर्षों में हुई भर्तियों को लेकर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब नियुक्ति पत्र भी बटेंगे, नई वैकेंसी की घोषणाएं भी होंगी। नई जो है, सुविधा देने की बात भी होगी, लेकिन सच यह है कि पिछले साढ़े नौ साल में कितने नियुक्ति पत्र दिए हैं यह सब जानते हैं।” चंद्रशेखर आजाद ने 68,500 और 69,000 शिक्षक भर्ती के साथ पंचायत सहायकों, रोजगार सेवकों, आशा, आंगनबाड़ी, भोजन माताओं, पीआरडी जवानों और पुलिस भर्ती से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि बीएड और बीटीसी अभ्यर्थियों के बीच भी रोजगार को लेकर असंतोष है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पदों का बैकलॉग है और सवाल उठाया कि यदि पद खाली हैं तो अब तक उन्हें भरा क्यों नहीं गया। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि 2027 में जनता की अदालत लगेगी और सरकार अब अपने कामकाज को लेकर जनता के सवालों का सामना करेगी। उन्होंने नियुक्ति पत्र वितरण और नई भर्तियों की घोषणाओं को लेकर आरोप लगाया कि यह चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “यह सब जो है, चुनाव में वोट अपने फेवर में प्रभावित करने का तरीका है। जनता सब जानती है।” उन्होंने बेरोजगारी को लेकर कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर डिग्री लेकर घूम रहा है और रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर रहा है। उन्होंने प्रयागराज में विभिन्न वर्गों के युवाओं के आंदोलनों का भी जिक्र किया। चंद्रशेखर आजाद ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बाढ़ आने के बाद सरकारी स्तर पर दौरे किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त काम नहीं होता। उन्होंने कहा कि बस्ती में बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं और वहां बिजली, पानी तथा सड़कों की समस्याएं भी गंभीर हैं। उन्होंने क्षेत्र में लगी एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर भी लोगों की परेशानियों का जिक्र किया और कहा कि इन समस्याओं के समाधान की जरूरत है। सांसद ने कहा कि आज का पढ़ा-लिखा युवा रोजगार चाहता है और सरकार की जिम्मेदारी है कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षकों की भर्ती की जाए।