लखनऊ में डिवाइडर से टकराने के बाद रोडवेज बस में लगी आग, ड्राइवर-कंडक्टर ने कूदकर बचाई जान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के थाना पारा क्षेत्रान्तर्गत भूहर पुल के पास जनरथ बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और आग लग गई। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया। फिलहाल कोई जनहानि नहीं हुई है। दमकल विभाग के अनुसार, शनिवार को थाना पारा क्षेत्रान्तर्गत बुद्धेश्वर-दुबग्गा मुख्य मार्ग पर भूहर पुल के पास एक रोडवेज जनरथ बस के दुर्घटनाग्रस्त होकर आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर थाना पारा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। मौके पर जांच से ज्ञात हुआ कि पारा की ओर से दुबग्गा की तरफ जा जनरथ बस भूहर पुल के प्रारम्भ में पहुंचने पर अचानक अनियंत्रित होकर पुल के बाईं ओर बने डिवाइडर से टकरा गई। बस के डिवाइडर से टकराने के लगभग 2-3 मिनट बाद उसमें आग लग गई, जिससे बस में भीषण आग फैल गई। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के समय बस में चालक एवं परिचालक मौजूद थे, जो बस से उतरकर सुरक्षित बाहर निकल गए। बस में आग लगने की सूचना तत्काल फायर सर्विस को दी गई, जिस पर फायर सर्विस की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और फायर सर्विस कर्मियों द्वारा तत्परता से कार्रवाई करते हुए आग को पूर्ण रूप से बुझा दिया गया। आग बुझने के बाद पुलिस द्वारा बस के अंदर जाकर गहनता से निरीक्षण किया गया, जिसमें बस के अंदर कोई व्यक्ति अथवा अन्य वस्तु मौजूद नहीं पाई गई। दुर्घटना एवं आग लगने की घटना में किसी प्रकार की जनहानि अथवा अन्य जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। आग लगने के कारण बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में आवश्यक जांच एवं अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में मौके पर शांति एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है तथा यातायात सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।
सुनील जाखड़ बोले- ‘पंजाब में गैंगस्टरों से डर रहे पुलिसकर्मी, सरकार ने एडवाइजरी में अकेले यात्रा न करने को कहा’

चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के नेता सुनील जाखड़ ने अमृतसर में एक एएसआई की हत्या के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि पंजाब सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें पुलिसकर्मियों से अकेले यात्रा न करने और आते-जाते समय यूनिफॉर्म न पहनने की सलाह दी गई है। भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पंजाब किस ओर जा रहा है? आजकल पंजाब में अपराधियों को पुलिस का डर नहीं रहा, बल्कि पुलिस ही गैंगस्टरों और गुंडों से डर रही है। अपराधियों के हाथों कई पुलिस अधिकारियों की हत्या के बाद माना जा रहा है कि पंजाब सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था की असल तस्वीर दिखाती है।” उन्होंने पोस्ट में लिखा, “इस एडवाइजरी में पुलिसकर्मियों से कहा गया है कि वे अकेले यात्रा न करें, आते-जाते समय यूनिफॉर्म न पहनें, दो-पहिया वाहनों का इस्तेमाल न करें और हो सके तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करें। सोचने वाली बात है कि क्या यह वही पंजाब पुलिस है, जिसने राज्य से आतंकवाद का सफाया किया था?” भाजपा की पंजाब इकाई ने शनिवार सुबह एक पोस्ट में लिखा, “पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। अमृतसर में एक एएसआई की सरेआम हत्या यह दिखाती है कि राज्य में अपराधी कितने बेखौफ हो गए हैं। जब लोगों की सुरक्षा करने वाली पुलिस ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? सरकार के ‘रंगला पंजाब’ के दावों की असलियत यह है कि यहां हर दिन गुंडागर्दी और खून-खराबे की घटनाएं हो रही हैं।” बता दें कि अमृतसर में 18-19 सितंबर की दरमियानी रात ड्यूटी के दौरान एएसआई हरजीत सिंह की मोटरसाइकिल सवार दो अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 3 बजे हुई, जब हमलावर अधिकारी के पास पहुंचे और बहुत करीब से उन पर कई गोलियां चलाईं। हमले के बाद हरजीत सिंह को पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वह तरनतारन जिले के रहने वाले थे।
अनुपम श्याम बर्थ एनिवर्सरी: ‘ठाकुर सज्जन सिंह’ बनकर अमर हुए अभिनेता, यूं तय किया था प्रतापगढ़ से मुंबई तक का सफर

मुंबई। अभिनेता अनुपम श्याम ओझा आज भी ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ में निभाए गए किरदार ‘ठाकुर सज्जन सिंह’ को लेकर लोगों के बीच मशहूर हैं। उन्होंने छोटे पर्दे से लेकर फिल्मों तक दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अलग अंदाज की वजह से खास पहचान बनाई थी। अनुपम श्याम का जन्म 20 सितंबर 1957 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई प्रतापगढ़ में पूरी की। इसके बाद अवध विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की और फिर लखनऊ स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी में थिएटर की पढ़ाई की। यहां उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं। वह प्रशिक्षण पूरा करने के बाद दिल्ली के श्रीराम सेंटर रंगमंडल से जुड़े और रंगमंच पर लगातार काम किया। उन्होंने थिएटर में अनुभव लेने के बाद सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई का रुख किया। मुंबई पहुंचने के बाद उनका सफर आसान नहीं था। शुरुआत में उनको छोटे-छोटे किरदार मिले। दिलचस्प बात यह है कि उनके फिल्मी करियर की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘लिटिल बुद्धा’ से हुई। इसके बाद उन्होंने शेखर कपूर की चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में काम किया। इसके बाद उन्होंने आगे चलकर ‘लगान’, ‘नायक’, ‘शक्ति’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘वांटेड’, ‘हल्ला बोल’ और ‘रक्त चरित्र’ जैसी कई फिल्मों में दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। उन्हें अक्सर खलनायक या दबंग किरदार निभाने का मौका मिलता था। फिल्मों में लंबे समय तक काम करने के बावजूद उन्हें असली पहचान साल 2009 में लोकप्रिय धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ से मिली। इस सीरियल में उन्होंने ठाकुर सज्जन सिंह का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और ‘ठाकुर सज्जन सिंह’ से ज्यादा पहचानने लगे। बाद में उन्होंने ‘प्रतिज्ञा 2’, ‘कृष्णा चली लंदन’, ‘डोली अरमानों की’ समेत कई अन्य टीवी सीरियल्स में भी अभिनय किया। जिंदगी का आखिरी दौर उनके लिए काफी मुश्किलों भरा रहा। वह लंबे समय तक किडनी की गंभीर बीमारी से जूझते रहे और उन्हें नियमित डायलिसिस कराना पड़ता था। इलाज का खर्च बढ़ने से आर्थिक परेशानी भी सामने आई। उस समय उनके भाई ने लोगों से मदद की अपील की थी। बाद में एक इंटरव्यू में खुद अनुपम श्याम ने बताया था कि जब उनकी बीमारी की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिली, तो उन्होंने इलाज के लिए 20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अस्पताल के खाते में भिजवाई। इसी मदद से उनका इलाज आगे बढ़ सका। उन्होंने बताया था कि सीएम योगी आदित्यनाथ उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते थे और उनके काम की सराहना करते थे। इलाज के दौरान कुछ समय के लिए उनकी तबीयत में सुधार भी आया और वे दोबारा काम पर लौटे। उन्होंने ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा 2’ की शूटिंग भी शुरू कर दी थी, लेकिन उनकी सेहत लगातार बिगड़ती रही। अभिनेता अनुपम श्याम का 8 अगस्त 2021 को मुंबई के लाइफलाइन अस्पताल में 63 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से टीवी और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी।
ऑस्कर में ‘गोंधल’ की एंट्री पर डायरेक्टर संतोष दावखर बोले, पता नहीं था लोगों को पसंद आएगी या नहीं

मुंबई। फिल्ममेकर संतोष दावखर की ‘गोंधल’ को 2027 के ऑस्कर अवॉर्ड्स की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया है। फिल्ममेकर ने बताया कि फिल्म बनाते वक्त उनका मुख्य मकसद भारतीय संस्कृति और विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने सिनेमाई अंदाज में पेश करना था। महाराष्ट्र के ग्रामीण परिवेश पर आधारित थ्रिलर फिल्म गोंधल नवविवाहित महिला सुमन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी शादी से खुश नहीं है। संतोष दावखर ने आईएएनएस के साथ बातचीत में फिल्म को लेकर अपने नजरिए पर बात की और बताया कि शुरुआत में उन्हें इस बात को लेकर यकीन नहीं था कि दर्शक इसे कैसे लेंगे। मेरी पहली प्रायोरिटी यह थी कि मुझे यह फिल्म इंटरनेशनल लेवल पर बनानी है।” मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को कान्स समेत कई फिल्म फेस्टिवल में चुना जा चुका है। फिल्ममेकर का कहना है कि उन्होंने भारतीय सिनेमा के बारे में एक ऐसी सोच देखी जो अक्सर गरीबी और जातिवाद जैसे थीम पर फोकस करती थी। उन्होंने कहा, “जब मैं कान्स और दूसरे इंटरनेशनल फेस्टिवल्स में था, तब मुझे इंडियन फिल्मों के रिप्रजेंटेशन के बारे में पता चला और लोग कैसे सोचते हैं कि यहां की फिल्में गरीबी और जातिवाद के बारे में होती हैं और भारत में यह जरूरी मुद्दा है। इसके अलावा भारत की एक रिच विरासत है, गर्व करने वाला कल्चर भी है और मैं उस कल्चर को सिनेमैटिक तरीके से दिखाना चाहता था।” उन्होंने बताया कि फिल्म बनाते समय उन्होंने इंटरनेशनल सिनेमा और स्क्रीनराइटिंग की बहुत स्टडी की थी। उन्होंने कहा, “जब मैं कान्स में था, तो मैं दिन में तीन-चार फिल्में देखता था। 15 दिनों में, मैंने 40 से ज्यादा फिल्में देखी हैं और अगर आप एक इंटरनेशनल फिल्म बनाना चाहते हैं तो आपकी मेकिंग भी उसी के हिसाब से होनी चाहिए।” संतोष दावखर ने आगे बताया कि स्क्रीनप्ले पर भी काफी रिसर्च की गई, जिसका मकसद एक थ्रिलर मिस्ट्री को आसान और आसान तरीके से पेश करना था। उन्होंने कहा, “मैंने इस पर बहुत रिसर्च की, स्क्रीनप्ले पर भी बहुत रिसर्च की है और मैंने लोगों को बहुत ही आसान तरीके से एक थ्रिलर मिस्ट्री दी है। इसके साथ ही, मैंने रीति-रिवाजों की रिचनेस भी दी है।” फिल्म गोंधल में मिस्ट्री और थ्रिलर एलिमेंट्स को इंडियन रीति-रिवाजों और कल्चरल ट्रेडिशन की रिचनेस के साथ मिलाया गया है। फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निषाद भोईर, अनुज प्रभु, सुरेश विश्वकर्मा और विट्ठल काले हैं।
भारत बन रहा ग्लोबल चिप हब, आईएसएम 2.0 से उभरीं 200 नई डिजाइन कंपनियां: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (आईएसएम 2.0) के तहत अब तक करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियां उभरकर सामने आई हैं, जो देश में स्वदेशी सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि 105 से अधिक चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। इनमें से 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग भी प्राप्त हुई है। पिछले चार वर्षों में देश में करीब 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य 85,000 डिजाइन इंजीनियरों को तैयार करना है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए उच्च गुणवत्ता और लागत प्रतिस्पर्धा दोनों जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि आईएसएम 1.0 के तहत स्वीकृत 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों में से पांच संयंत्रों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत को एक विश्वसनीय देश के रूप में मान्यता मिल रही है और बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की सुरक्षा के मामले में देश का रिकॉर्ड मजबूत है। केंद्रीय मंत्री ने ‘सेमिकॉन इंडिया 2026’ को मिले देशी और विदेशी समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि कार्यक्रम के दौरान व्यापक बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकों का आयोजन हुआ और दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर अर्थव्यवस्थाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। इस दौरान आयोजित विभिन्न कंट्री राउंडटेबल्स में वैश्विक कंपनियों ने भारत के साथ अपने सहयोग और निवेश को बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई। वहीं, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि मजबूत और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के निर्माण के लिए वैश्विक साझेदारियां आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वसनीयता, भरोसे, प्रोत्साहन और मूल्य सृजन को सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया। साथ ही आत्मनिर्भरता के लिए घरेलू क्षमताओं और वैश्विक विशेषज्ञता के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। भारत-सिंगापुर राउंडटेबल में 142 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें सिंगापुर की विनिर्माण, एडवांस पैकेजिंग और सप्लाई चेन विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़े बाजार और विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के साथ जोड़ने पर चर्चा हुई। भारत-यूरोप राउंडटेबल में 139 प्रतिभागियों ने भाग लिया। बैठक में निवेश, सप्लाई चेन स्थानीयकरण, उपकरण एवं सामग्री, विनिर्माण, एडवांस पैकेजिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा, भारत-दक्षिण कोरिया राउंडटेबल में 115 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जहां विनिर्माण, तकनीक, सामग्री, एडवांस पैकेजिंग, निवेश और सप्लाई चेन समेत पूरे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई। इसमें दक्षिण कोरिया की स्थापित सेमीकंडक्टर विशेषज्ञता और भारत की इंजीनियरिंग क्षमता तथा बढ़ते विनिर्माण इकोसिस्टम को जोड़ने पर जोर दिया गया।
सारा दिन बैठे-बैठे अकड़ जाती है पीठ? पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन से मिलेगा आराम

नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां घंटों बैठकर काम करते हैं, वहां हमारी हैमस्ट्रिंग, पीठ और कंधे सबसे ज्यादा अकड़ जाते हैं। ऐसे में ‘पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन’ एक ऐसा अभ्यास है, जो न सिर्फ शरीर के लचीलेपन को बढ़ाता है बल्कि मन को शांत कर तनाव को दूर करने में भी बेहद मददगार है। ‘पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन’ आगे की ओर झुकने वाला योगासन है, जो पश्चिमोत्तानासन के लाभों के अलावा पैरों के भीतरी भाग, कंधों के नीचे और बीच की मांसपेशियों को भी व्यापक खिंचाव प्रदान करता है। पाद प्रसार पश्चिमोत्तानासन नाम संस्कृत शब्दों ‘पाद’ (जिसका अर्थ है ‘पैर’), ‘प्रसार’ (जिसका अर्थ है ‘फैलाना’), ‘पश्चिम’ (जिसका अर्थ है ‘पश्चिम’ या ‘शरीर का पिछला भाग’), ‘उत्तान’ (जिसका अर्थ है ‘ऊपर उठाया हुआ’ या ‘विस्तारित’) और ‘आसन’ (जिसका अर्थ है ‘मुद्रा’) से लिया गया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, ‘पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन’ (या पाद प्रसार पश्चिमोत्तानासन) बैठकर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है। यह सामान्य पश्चिमोत्तानासन (जिसमें पैर आपस में जुड़े होते हैं) का एक उन्नत रूप है, जिसमें पैरों को फैलाकर आगे की ओर झुका जाता है। पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन करते वक्त पैर फैलाकर आगे झुकते हैं तो जांघ के पीछे की हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों पर सबसे ज्यादा खिंचाव आता है। रोजाना अभ्यास से इसकी टाइटनेस दूर होती है और पैरों में हल्कापन महसूस होता है। पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन करते वक्त दोनों पैरों को अपनी क्षमता के अनुसार चौड़ा करके आगे की ओर झुकाते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रोइन और अंदरूनी जांघों पर पड़ता है। दरअसल हमारी अंदरूनी जांघों में एडक्टर मांसपेशियों का एक समूह होता है, जो ग्रोइन से जुड़ा होता है। लगातार बैठे रहने, गलत पोस्चर या व्यायाम न करने से ये मांसपेशियां बहुत टाइट और छोटी हो जाती हैं। जिन लोगों को चलने, सीढ़ियां चढ़ने या जमीन पर बैठने में अंदरूनी जांघों में खिंचाव महसूस होता है, उनके लिए ये आसन बहुत फायदेमंद है। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी अच्छा है जो रनिंग, साइकिलिंग या जिम करते हैं। इस आसन को करने के दौरान शरीर को जबरदस्ती नीचे न झुकाएं, शुरुआत में जितना संभव हो उतना ही झुकें। यदि किसी भी व्यक्ति को स्लिप डिस्क, साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द हो, तो इस आसन को करने से बचें।
उत्तराखंड का झंकार सैम मंदिर, जहां देवताओं के गुरु की होती है पूजा, जानिए इसकी पौराणिक मान्यता

उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड के हरे-भरे पहाड़, वन और असीम वादियां में लोकदेवताओं की कहानी कहते हैं। ऐसा ही एक पवित्र और रहस्यमयी धाम है सैम देवता मंदिर (सैमज्यू)। मान्यता है कि सैम देवता सभी देवी-देवताओं के गुरु और मामा हैं, जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। ‘सैम’ शब्द का अर्थ स्वयंभू होता है। इन्हें न्यायकारी और कल्याणकारी देवता माना जाता है जो भक्तों की रक्षा करते हैं और बुराई का नाश करते हैं। शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर जोर देते हुए सभी से मंदिर दर्शन करने की अपील की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, “अल्मोड़ा जिले में स्थित झंकार सैम देवता मंदिर आस्था और पौराणिक मान्यताओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने इस पवित्र जगह पर तपस्या की थी। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे इस मंदिर में सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। अल्मोड़ा आने पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें।” अल्मोड़ा से लगभग 40 किलोमीटर दूर, जागेश्वर धाम से 4 किलोमीटर की दूरी पर दारुक वन में देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर भगवान शिव के अंशावतार सैम देवता को समर्पित है। स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान इस मंदिर का इतिहास पौराणिक कथाओं और लोक-गाथाओं से जुड़ा है, जहां आज भी एक चमत्कारी देवदार के पेड़ में गणेश जी की आकृति और कभी दूध निकलने की कथा प्रचलित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गांव में जब भी कोई अनुष्ठान या भंडारा (बेसी) होता है, तो सबसे पहला भोग इन्हें ही लगाया जाता है। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में सैम देवता (सैम ज्यू) को भगवान शिव का ही एक अंशावतार और प्रमुख लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। लोककथाओं के अनुसार इनका उद्गम नेपाल के डोटी क्षेत्र से माना जाता है। एक समय पर देवदार के पेड़ से दूध निकलना और अपनी शक्ति से भक्तों के कष्ट दूर करना जैसी कई चमत्कारिक कथाएं प्रचलित हैं।
एशियन गेम्स: क्विम्सी डिसूजा टेकबॉल सेमीफाइनल में हारीं, कांस्य पदक के लिए युइना सकामोटो से भिड़ेंगी

नागोया। भारत की क्विम्सी जोआकिम डिसूजा को एशियन गेम्स 2026 में टेकबॉल के सेमीफाइनल में शनिवार को नागोया सिटी हिगाशी स्पोर्ट्स सेंटर में महिला एकल सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की इमा सुमाया से 1-2 से हार का सामना करना पड़ा। हार के साथ ही उनका स्वर्ण जीतने का सपना टूट गया। एशियन गेम्स में डेब्यू कर रही 24 साल की भारतीय खिलाड़ी ने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की और आराम से पहला सेट 12-7 से जीत लिया। हालांकि, सुमाया ने दूसरे सेट में जबरदस्त वापसी की, शुरुआती कमी को दूर करते हुए बढ़त बनाई और आखिर में इसे 12-9 से जीतकर मुकाबला निर्णायक बना दिया। क्विम्सी ने तीसरे सेट की शुरुआत शानदार तरीके से की और 3-0 की बढ़त बनाई, फिर इसे 4-1 कर दिया। लेकिन सुमाया ने जबरदस्त वापसी करते हुए, डिसाइडर पर कब्जा कर लिया और उसे 12-7 से जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। हार का मतलब है कि क्विमसी अब रविवार को वर्ल्ड नंबर 7 युइना सकामोटो के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल मैच में हिस्सा लेंगी। वहां जीत से भारत को एशियन गेम्स में अपना पहला टेकबॉल मेडल मिल जाएगा। क्विमसी ने इससे पहले कॉन्टिनेंटल शोपीस में अपने डेब्यू में ग्रुप ए में दो जीत के साथ टॉप पर रहकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली थी। उन्होंने अपने कैंपेन की शुरुआत टॉप सीडेड जापान की युइना सकामोटो पर 2-1 की शानदार जीत के साथ की। क्विमसी पहला सेट 10-12 से हार गई, लेकिन वापसी करते हुए दूसरा सेट 12-11 से जीता और फिर डिसाइडिंग सेट 13-11 से अपने नाम कर लिया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने अपने दूसरे ग्रुप मैच में भी इसी मोमेंटम को बनाए रखा, जहां उन्होंने कंबोडिया की कोएमियन डीवाई को सीधे सेटों में 12-9, 12-7 से हराया। इस नतीजे में वह ग्रुप ए में टॉप पर रहीं और क्वार्टर फाइनल से बचते हुए सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गईं। क्विम्सी ने मोहम्मद अनस इमरान बेग के साथ मिक्स्ड डबल्स में भी हिस्सा लिया, जिसमें भारतीय जोड़ी ने अपने ग्रुप ए के पहले मैच में फिलीपींस की जोआना अबुलेंसिया और प्रिंस अगस्टिन को हराया। हंगरी में बना टेकबॉल, फुटबॉल के एलिमेंट्स को एक घुमावदार टेबल के साथ मिलाता है और फ्रीस्टाइल फुटबॉल और सेपक टकराव का मिश्रण जैसा दिखता है।
समिक भट्टाचार्य ने मनोहर लाल को लिखा पत्र, दक्षिण बंगाल में आरआरटीएस नेटवर्क की मांग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) नेटवर्क की मांग तेज हो गई है। राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर दक्षिण बंगाल में आरआरटीएस शुरू करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। राज्यसभा सदस्य ने पत्र में कोलकाता को कल्याणी-कृष्णानगर-मायापुर, दुर्गापुर-आसनसोल, डायमंड हार्बर-हल्दिया और खड़गपुर-मेदिनीपुर से जोड़ने वाले आरआरटीएस नेटवर्क का प्रस्ताव रखा है। पत्र में समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि पश्चिम बंगाल का शहरी विकास अभी भी कोलकाता पर बहुत अधिक केंद्रित है, जबकि दुर्गापुर, आसनसोल, खड़गपुर, कृष्णानगर और हल्दिया जैसे दूसरे शहर बड़े औद्योगिक, शैक्षिक, बंदरगाह और पर्यटन केंद्र बन गए हैं। इन शहरों के बीच आवाजाही अब भी पारंपरिक रेल और सड़क मार्ग पर निर्भर है, जो भीड़भाड़ के कारण रोजाना सुगम और तेज आवागमन के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीआरटीसी के नमो भारत कॉरिडोर की तर्ज पर आरआरटीएस नेटवर्क इस कमी को पूरा कर सकता है और मेट्रो जैसी हाई-स्पीड क्षेत्रीय कनेक्टिविटी दे सकता है। समिक भट्टाचार्य ने पत्र के साथ ट्रांजिट रिसर्चर सौरदीप सरकार और आर्द्रि रॉय चौधरी द्वारा तैयार की गई एक प्रारंभिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी भेजी है। इस रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल आरआरटीएस का प्रस्ताव है। रिपोर्ट में कोलकाता के मैदान को केंद्रीय हब बनाते हुए चार कॉरिडोर का प्रस्ताव है। पहला कल्याणी, कृष्णानगर और मायापुर तक 135 किमी, दूसरा बर्दवान, दुर्गापुर और आसनसोल तक 232 किमी जिसमें आसनसोल मेट्रो शामिल है, तीसरा फल्टा, डायमंड हार्बर और हल्दिया तक 102 किमी जिसमें मैदान से बज बज तक मेट्रो है और चौथा संतरागाछी, कोलाघाट, खड़गपुर और मेदिनीपुर तक 135 किमी का है। इसके साथ ही दुर्गापुर और आसनसोल के लिए अलग मेट्रो सिस्टम का भी प्रस्ताव है। प्रस्ताव को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जमीन अधिग्रहण कम से कम हो, इसके लिए कॉरिडोर को मौजूदा हाईवे और रेलवे लाइन के साथ जोड़ा जाएगा। रिपोर्ट में एनसीआरटीसी की तर्ज पर पश्चिम बंगाल रैपिड ट्रांजिट कॉर्पोरेशन (डब्ल्यूबीआरटीसी) नाम से एक स्पेशल पर्पज व्हीकल बनाने की भी सिफारिश की गई है, जिसका स्वामित्व केंद्र और राज्य सरकार के पास संयुक्त रूप से होगा। राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने मंत्रालय से अनुरोध किया है कि इस प्रस्ताव की जांच की जाए और अगर उपयुक्त पाया जाए तो इंजीनियरिंग, मांग पूर्वानुमान और वित्तीय विश्लेषण को कवर करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह रिपोर्ट के लेखकों के साथ बैठक कराने में भी मदद करेंगे।
‘महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं’, नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले पर बोलीं प्रियंका

नई दिल्ली। दिल्ली में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दिल्ली में एक 17 साल की बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं और उसके बाद उसे बर्बरता से मार डाला गया।” उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों पहले एक और नाबालिग लड़की का बलात्कार किया गया। देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। महिलाओं के विकास की सिर्फ खोखली बातें की जाती हैं। सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार होते हैं और हिंसा होती है, मगर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई की वे उम्मीद नहीं कर सकतीं। एफआईआर दर्ज तक नहीं होते। साथ ही, प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि समाज और सरकार दोनों, महिलाओं को सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देने में पूरी तरह से विफल हैं। इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली की घटना को लेकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती। दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।” कांग्रेस सांसद ने लिखा, “अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं। दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सजा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।” यह मामला 13 सितंबर को सामने आया, जब उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड पर जयपाल राणा के खेत के पास एक बुरी तरह सड़ी-गली लाश मिली। हालत ऐसी थी कि पुलिस शुरू में यह भी तय नहीं कर पाई कि शव लड़के का है या लड़की का। जांच में पीड़िता की पहचान की गई। बाद में पता चला कि इस वारदात को चार लोगों ने अंजाम दिया, जिनमें तीन नाबालिग हैं। आरोपियों ने बाद में लड़की के शव को खुले इलाके में फेंक दिया था। पुलिस के अनुसार, पीड़िता आरोपियों को जानती थी और उनके साथ टेंपो में सफर कर रही थी। सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को खुले खेत में फेंक दिया गया।