अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक-ध्रुवीय सिस्टम बीते दिनों की बात: पुतिन

नई दिल्ली। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ‘एक-ध्रुवीय व्यवस्था’ को पुरानी बात करार दिया । उनके मुताबिक ये व्यवस्था छोटे समूह तक सीमित है और शक्ति संतुलन में व्यवधान पैदा करती है। शनिवार को शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं। क्रेमलिन ने उनका बयान प्रकाशित किया। जिसमें उन्होंने मल्टी-पोलर दुनिया की जरूरत, ब्रिक्स की ताकत, संयुक्त राष्ट्र महासभा में ज्यादा से ज्यादा देशों के प्रतिनिधित्व को लेकर अपने विचार प्रमुखता से रखे। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक-ध्रुवीय व्यवस्था, जो देशों के एक छोटे समूह के हितों को साधती थी, अब अतीत की बात होती जा रही है। शक्ति का संतुलन अब ग्लोबल साउथ और पूर्व के नए विकास केंद्रों के पक्ष में बदल रहा है। ज्यादा से ज्यादा देश अब खुलकर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और वैश्विक समस्याओं को सुलझाने में योगदान देने के लिए अपनी मुस्तैदी जाहिर कर रहे हैं।” पुतिन के अनुसार, “मल्टी-पोलर दुनिया का बनना चुनौतियों से खाली नहीं है। इसका विरोध उन लोगों की ओर से होता है जिनकी सोच की जड़ें औपनिवेशिक मानसिकता में हैं। जो दुनिया को एक लहलहाते बाग और जंगल में बांटकर देखते हैं, और दूसरों की मेहनत पर जीने के आदी हैं। वे बदलते सच को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और सिर उठाते प्रतिद्वंदी को रोकने की हर संभव कोशिश करते हैं।” वहीं, ब्रिक्स की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ब्रिक्स कोई छोटा नहीं बल्कि बड़ा संगठन बन गया है। यहीं मैं कहना चाहूंगा कि हमारे पास विस्तृत, प्रचुर बौद्धिक और तकनीकी क्षमता है। मुझे लगता है यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार, ब्रिक्स में साझेदारी हमेशा बराबरी, अच्छे पड़ोसी जैसे संबंध और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखने के सिद्धांतों पर बनी है। साथ ही इसमें एक-दूसरे की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विविधता, इतिहास, परंपराओं और मूल्यों का सम्मान भी शामिल है। इसलिए, यह स्वाभाविक है कि दुनिया भर में ब्रिक्स की विश्वसनीयता और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। पुतिन ने कहा कि इस संगठन ने वैश्विक शासन के एक अहम केंद्र के तौर पर अपनी सही जगह बनाई है, और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और मानवीय सहयोग का भविष्य काफी हद तक हमारे सामूहिक फैसलों और कार्यों पर निर्भर करता है। जैसा कि जोर देकर कहा गया है, ब्रिक्स देश सभी अहम क्षेत्रों में अपना आपसी सहयोग और गहरा कर रहे हैं। इसमें राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त, साथ ही सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्र भी शामिल हैं। पुतिन ने यूएनएससी को लेकर कहा, “हमारा मानना है कि हमें अपने ब्रिक्स सहयोगियों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम करते रहना चाहिए। विशेष रूप से, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देकर सुरक्षा परिषद का विस्तार करने से निश्चित रूप से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।” संबोधन का समापन करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “मैं एक बार फिर इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने हमारे संगठन की उस बड़ी क्षमता को दिखाया है जिसके जरिए हम पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को और बढ़ा सकते हैं और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार कर सकते हैं। इससे सचमुच बहु-ध्रुवीय और ज्यादा न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपने सभी भारतीय सहयोगियों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उन्होंने हमारे लिए इतना शानदार आयोजन किया।
मायावती का आकाश पर हमला, बोलीं ‘अपने दिमाग से काम नहीं कर रहे, अभी भी अशोक सिद्धार्थ के कहे पर चल रहे’

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने रविवार को अपने अस्वस्थ होने की खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने काम में लगी हुई हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी से निष्कासित आकाश आनंद पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह अभी भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहे हैं और अपने ससुर व पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के इशारे पर चल रहे हैं। मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव को लेकर पूरी ताकत से जुट जाने का आह्वान किया। मायावती ने कहा कि पिछले एक-दो दिनों से पार्टी से निकाले गए कुछ लोगों की ओर से कार्यकर्ताओं के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि वह बीमार हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को सही जानकारी देने के लिए उन्हें स्वयं सामने आना पड़ा। बसपा प्रमुख ने शनिवार रात हुई कथित फोन कॉल का जिक्र करते हुए कहा कि उनके आवास पर पार्टी इंचार्ज आलोक कुमार के फोन पर आकाश आनंद का फोन आया था। आकाश आनंद ने पूछा कि क्या बहन जी अस्वस्थ हैं। इस पर आलोक कुमार ने जवाब दिया कि मायावती पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपना काम कर रही हैं। मायावती ने बताया कि इसके बाद आकाश आनंद ने कहा कि उनकी इस कॉल के बारे में बहन जी को नहीं बताया जाए। उन्होंने कहा कि इस फोन कॉल की मंशा अच्छी भी हो सकती है और गलत भी लेकिन यह सोचने का विषय है कि आखिर ऐसी बात क्यों कही गई। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद अभी भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहा है। वह अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के दिमाग से काम कर रहा है।” मायावती ने कहा कि पार्टी और मूवमेंट के हित में हाल के दिनों में उनके द्वारा लिए गए कड़े फैसलों से बसपा को लाभ ही हुआ है, नुकसान नहीं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे पार्टी मूवमेंट में हमेशा पूरी तरह जुटे रहें और आगामी चुनाव की तैयारियों में युद्ध स्तर पर लग जाएं। बसपा प्रमुख ने बताया कि तीन सितंबर को पार्टी की बैठक बुलाई गई थी, जो काफी लंबी चली। इसमें संगठन के काम को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए पार्टी को तीन सेक्टर में बांटने का फैसला लिया गया। उन्होंने बताया कि पहले सेक्टर में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को रखा गया है, जिसकी जिम्मेदारी उनके दिशानिर्देश में देखी जा रही है। अन्य क्षेत्रों को भी अलग-अलग सेक्टर में बांटा गया है। संबंधित सेक्टरों के केंद्रीय सेक्टर प्रभारी दिल्ली जाकर अपनी रिपोर्ट देते रहेंगे। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार पार्टी के कामकाज की प्रगति रिपोर्ट लेते रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य सेक्टर प्रभारी का पद समाप्त कर दिया गया है और अब उनके काम की सीधी रिपोर्ट पार्टी के उपाध्यक्ष आनंद कुमार उन्हें देंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी हित में लिए गए इन फैसलों से संगठन को मजबूत करने और पार्टी के मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मायावती ने हाल ही में आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने के बाद बसपा से निष्कासित कर दिया था। वहीं, उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ ने भी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। मायावती ने दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान जारी 140 पैराग्राफ वाले दिल्ली घोषणापत्र का स्वागत किया। उन्होंने इसे भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र में फिलिस्तीन के लिए दो-देश समाधान और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन को जगह दी गई है। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद से हर संभव तरीके से निपटने की प्रतिबद्धता का भी स्वागत किया और कहा कि इसमें भारत के दृष्टिकोण को उचित स्थान मिला है। भारत-चीन संबंधों पर मायावती ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकना और एक-दूसरे को विकास में भागीदार मानना सकारात्मक दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामों का उचित मूल्यांकन आने वाले समय में होगा। बसपा प्रमुख ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को भी आपसी बातचीत के जरिए जितनी जल्दी संभव हो, सुलझा लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में यूएन प्रमुख ने की संघर्षों को रोकने की अपील, बोले- दुनिया को शांति की जरूरत

यूनाइटेड नेशंस। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शांति की अपील की। उन्होंने ऐसे संघर्षों को रोकने की अपील कि जिनका असर खास तौर पर ग्लोबल साउथ पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “गाजा से लेकर पूरे मध्य पूर्व, यूक्रेन, सूडान और अन्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों तक दुनिया को शांति की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि समावेशी वैश्विक विकास का रास्ता शांति से ही होकर जाता है। सम्मेलन में पश्चिम एशिया के संघर्ष से जुड़े कई नेता भी मौजूद थे। इनमें एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन थे, जबकि दूसरी ओर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद शामिल थे। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सम्मेलन में मौजूद थे। रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले के बाद दुनिया भर में खाद्यान्न और उर्वरक आपूर्ति को लेकर संकट पैदा हुआ था। गुटेरेस ने कहा, “सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि इन जिम्मेदारियों में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवागमन के अधिकार और स्वतंत्रता का सम्मान, देशों की संप्रभु समानता, उनकी क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार कानूनों का पालन शामिल है। फरवरी में इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई। इससे दुनिया के तेल और गैस की उस बड़ी आपूर्ति पर असर पड़ा जो इस मार्ग से गुजरती है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तय किए गए सम्मेलन के विषय का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जैसा कि इस सम्मेलन का विषय सही तरीके से बताता है, हमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के आधार पर आगे बढ़ना होगा।” ये सभी चीजें समावेशी वैश्विक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए शांति सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है। मध्य पूर्व, गाजा और सूडान में शांति के लिए गुटेरेस की अपील शनिवार को अपनाए गए ब्रिक्स संयुक्त घोषणा-पत्र में भी दिखाई दी। ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक एकजुटता का संकेत देते हुए ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब के नेताओं ने भी इस घोषणा-पत्र का समर्थन किया। 11 सदस्य देशों के इस घोषणा-पत्र में मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। साथ ही ऐसे कदम उठाने से बचने को कहा गया जो हालात को और खराब कर सकते हैं। घोषणा-पत्र में गाजा के सभी पक्षों से युद्धविराम बनाए रखने की अपील की गई। इसमें फिलिस्तीनियों के मौलिक और अविभाज्य अधिकारों की रक्षा का समर्थन किया गया और उन्हें उनके घरों से बेदखल किए जाने का विरोध किया गया।
इंडोनेशिया में 243 यात्रियों को लेकर निकला ‘वर्गो ट्रांसपोर्ट-8’ जहाज जावा सागर में लापता, तलाश में निकली रेस्क्यू टीम

नई दिल्ली। इंडोनेशिया के जावा सागर में रविवार को ‘वर्गो ट्रांसपोर्ट-8’ नामक एक जहाज लापता हो गया। 243 लोगों को लेकर यह जहाज शनिवार सुबह सुराबाया से रवाना हुआ था, लेकिन यात्रा के दौरान अचानक इसका संपर्क टूट गया। इंडोनेशिया की खोज और बचाव एजेंसी (बसारनास) ने जहाज की तलाश में सर्च एंड रेस्क्यू (एसएआर) टीम भेजी है। इंडोनेशिया की सरकारी और राष्ट्रीय समाचार एजेंसी अंतरा की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्गो ट्रांसपोर्ट-8’ जहाज सुराबाया से बांजारमासिन जा रहा था। इस यात्रा के दौरान जावा सागर में जहाज का संपर्क अचानक टूट गया। जहाज अभी लापता है। जहाज में करीब 243 सवार हैं। बांजारमासिन क्लास-ए सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस के प्रमुख और एसएआर मिशन कोऑर्डिनेटर आई पुतु सुदायाना ने रविवार सुबह बांजारमासिन, दक्षिण कालिमंतान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जहाज का संपर्क लगभग सुबह 02:00 डब्ल्यूआईटीए बजे टूट गया। इससे पहले यात्रा के दौरान जहाज को खराब मौसम का सामना करना पड़ा था। अंतरा की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि जहाज की आखिरी लोकेशन बांजारमासिन के बसिरिह एसएआर जेट्टी से लगभग 80 समुद्री मील दूर मिली थी। बांजारमासिन क्लास-ए सर्च एंड रेस्क्यू कार्यालय को जहाज के संपर्क टूटने की सूचना सुबह 04:10 डब्ल्यूआईटीए बजे मिली। यह सूचना पीटी वर्गो के जनरल मैनेजर योएल रिही ने दी थी। जानकारी के अनुसार, जहाज शनिवार को सुराबाया से 10:13 जीएमटी पर रवाना हुआ था, जिसके बाद यात्रा के दौरान उसका संपर्क टूट गया। तरा की रिपोर्ट के अनुसार, पुतु ने बताया कि ‘वर्गो ट्रांसपोर्ट-8’ जहाज के संपर्क टूटने की सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू टीम को उसकी आखिरी लोकेशन वाली जगह पर भेज दिया है। हम इस अभियान में ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों और संसाधनों को लगा रहे हैं। जहाज में बड़ी संख्या में यात्री और चालक दल के सदस्य सवार हैं। उनकी सुरक्षा ही अभियान की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। बांजारमासिन एसएआर कार्यालय अन्य सभी संबंधित एजेंसियों और संस्थाओं के साथ भी लगातार समन्वय कर रहा है, ताकि खोज अभियान को तेज किया जा सके और जहाज के सभी यात्रियों तथा चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने गिनाईं ‘ब्रिक्स’ की उपलब्धियां, बोले- विविधता और सहयोग ही हमारी असली ताकत

नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की वास्तविक शक्ति उनकी विविधता और आपसी सहयोग में निहित है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया, “हमारी विविधता हमारी पहचान बने, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति संपूर्ण मानवता के कल्याण के काम आए।” प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि हमने एम्प्लॉयबिलिटी, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कैपेसिटी बिल्डिंग को बढ़ावा दिया। छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए मार्केट से जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई कॉर्पोरेशन पोर्टल का इनिशिएटिव लिया गया है। हमारे शहरों के बीच बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ की स्थापना की गई है। पीएम मोदी ने कहा, भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, पूरक हैं। ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है। यही सस्टेनेबिलिटी का आधार है। यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस दिशा में हमने कई पहलुओं पर प्रगति की है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट ग्रिड्स और एनर्जी स्टोरेज के लिए हम ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना है। यह हमारे क्लीन एनर्जी सिस्टम्स को अधिक विश्वसनीय, सक्षम और एक्सेसिबल बनाने में मदद करेगा। पीएम ने कहा कि एग्रो-इकोलॉजी और री-जनरेटिव एग्रीकल्चर के सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस पारंपरिक ज्ञान को मॉडर्न साइंस से जोड़ेंगे। कम्युनिटी-बेस्ड क्लाइमेट एडैप्टेशन के लिए तैयार किए गए सिद्धांत, इंडिजिनस नॉलेज को क्लाइमेट एक्शन का महत्वपूर्ण आधार बनाएंगे। उन्होंने कहा, इन चारों स्तंभों पर आगे बढ़ते हुए ब्रिक्स के माध्यम से हमने इंक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ को बढ़ावा देने का प्रयास किया है, क्योंकि हमारा मानना है कि ब्रिक्स में विकसित सॉल्यूशंस का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के अनुरूप एडैप्टेबल और एक्सेसिबल बनाना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा, “मैं मेरे निजी अनुभव से कह सकता हूं कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि ब्रिक्स में उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है, और सॉल्यूशंस उनके लिए ही नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं। ब्रिक्स की शक्ति हमारी विविधता और सहयोग में है।” अंत में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए।
ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद चीन रवाना हुए शी जिनपिंग

नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन रवाना हो गए। दूसरे दिन आउटरीच बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन सुनने के बाद उन्होंने फैमिली फोटो भी खिंचवाई। शनिवार को ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए वो सात साल बाद भारत आए थे। शिखर सम्मेलन से इतर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। जिसमें उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार हैं। इसके साथ ही दोनों देशों द्वारा सीमा विवाद को सुलझाते हुए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की। चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, पिछले दो वर्षों में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी दो बार मुलाकात कर चुके हैं। इन बैठकों ने दोनों देशों के संबंधों को फिर से पटरी पर लाने और उन्हें सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बयान में कहा गया कि भारत और चीन के बीच संस्थागत स्तर पर संवाद धीरे-धीरे फिर शुरू हुआ है। दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है और द्विपक्षीय व्यापार भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे की ताकतों से सीख सकते हैं, एक-दूसरे का सहयोग कर सकते हैं और साझा सफलता हासिल करते हुए साथ आगे बढ़ सकते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने भारत-चीन संबंधों के दीर्घकालिक और स्थिर विकास के लिए चार प्रमुख सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि पहला, दोनों देशों को वस्तुनिष्ठ और संतुलित रणनीतिक समझ के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं। उन्होंने कहा कि यह सोच दोनों देशों के विकास स्तर, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और जनता के साझा हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। दूसरा, दोनों देशों को सहयोग और साझेदारी के जरिए साझा सफलता हासिल करनी चाहिए। इसके लिए विकास को साझा लक्ष्य मानकर मित्रवत संबंधों और पारस्परिक लाभकारी सहयोग को बढ़ाया जाना चाहिए। तीसरा, दोनों देशों को आपसी सम्मान और समझदारी के आधार पर बाधाओं को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों और सीमा से जुड़े मुद्दों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जाना चाहिए तथा सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखनी चाहिए। चौथे सुझाव में शी जिनपिंग ने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत और चीन को ब्रिक्स की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन तथा जी-20 जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाना चाहिए। जिनपिंग ने दोनों देशों को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर बल दिया।
भारत मंडपम में डीप-टेक का जलवा, पीएम मोदी संग ब्रिक्स नेताओं ने देखी भारतीय इनोवेशन इकोसिस्टम की झलक

नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के बढ़ते डीप-टेक और इनोवेशन इकोसिस्टम की सराहना की। उन्होंने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन’ का दौरा ब्रिक्स देशों के नेताओं के साथ किया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस दौरे की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “भारत से नवाचार, दुनिया के लिए समाधान! मैंने ब्रिक्स देशों के नेताओं के साथ भारत इनोवेट्स का दौरा किया। हमारे युवाओं की ऊर्जा और समर्पण पर गर्व है।” इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अन्य ब्रिक्स नेताओं ने भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रदर्शनी देखी। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को भारत मंडपम में दो दिन का ‘भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन’ शुरू हुआ। इसमें भारत की डीप-टेक क्षेत्र की नई और उन्नत तकनीकों को प्रदर्शित किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का आयोजन शिक्षा मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया है। यह शिक्षा मंत्रालय का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों से निकलने वाले नवाचारों को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना है। इस पहल का मकसद भारत के इनोवेशन नेटवर्क को दुनिया भर के कॉरपोरेट्स, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स, विश्वविद्यालयों, रिसर्च संस्थानों, सरकारों और विदेशों में रहने वाले भारतीय पूर्व छात्रों से जोड़ना है। इनमें स्टार्टअप, विश्वविद्यालय, लैब, रिसर्च पार्क और अन्य संस्थान शामिल हैं। इससे लंबे समय तक सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा। ब्रिक्स भारत इनोवेट्स (बीबीआई) एक्सपोजिशन वर्ष 2026 में भारत के डीप-टेक स्टार्टअप्स की दूसरी बड़ी प्रदर्शनी है। इससे पहले पहली भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी 14 से 16 जून 2026 के बीच फ्रांस के नीस शहर में आयोजित हुई थी। इस बार बीबीआई में 37 भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स भाग ले रहे हैं। ये उन 120 स्टार्टअप्स के समूह से चुने गए हैं जिन्होंने नीस में आयोजित भारत इनोवेट्स 2026 में हिस्सा लिया था। यह प्रदर्शनी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण’ के अनुरूप है। इस बीच, शनिवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में आयोजित भव्य रात्रिभोज (गाला डिनर) के लिए कई देशों के नेता और प्रतिनिधि भारत मंडपम पहुंचे। इस कार्यक्रम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। शाम का मुख्य आकर्षण एक विशेष वीगन गाला डिनर था। इस मेन्यू को भारत की विविध खान-पान परंपराओं को दिखाने के लिए तैयार किया गया था। साथ ही इसमें पर्यावरण संरक्षण, सबको साथ लेकर चलने की सोच और जिम्मेदार मेहमाननवाजी को भी ध्यान में रखा गया। कार्यक्रम में “नवरसा – साझा भावनाओं का ब्रह्मांड” नाम की एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति भी हुई। एक और खास आकर्षण ब्रिक्स सिम्फनी “वन रिदम, मेनी कल्चर्स” रही, जिसमें ब्रिक्स देशों और उनके साझेदार देशों के संगीतकारों ने मिलकर प्रस्तुति दी। अलग-अलग देशों की संगीत परंपराओं और वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल करते हुए इस सिम्फनी ने एक साझा कलात्मक प्रस्तुति पेश की, जो ब्रिक्स परिवार की सांस्कृतिक विविधता और एकता की भावना को दर्शाती है।
ब्रिक्स समिट को लेकर दिलीप घोष बोले-‘भारत दुनिया को शांति और समृद्धि का रास्ता दिखाएगा’

कोलकाता। ब्रिक्स समिट 2026 को लेकर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने भारत, रूस और चीन के बीच सहयोग को दुनिया में शांति और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया। कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि एशिया के तीन बड़े देश अगर मिलकर काम करते हैं, तो इससे सभी देशों की तरक्की होगी और वैश्विक तनाव कम करने में मदद मिलेगी। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दुनिया में एक नया समीकरण बन रहा है और भारत इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत दुनिया को शांति और समृद्धि का रास्ता दिखा सकता है। उनके मुताबिक, रूस, चीन और भारत के बीच सहयोग बढ़ने से दुनिया की कई समस्याओं को कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों ने यह महसूस किया है कि आपसी सहयोग और संवाद जरूरी है। उन्होंने इसे दुनिया के हित में बनने वाला नया समीकरण बताया। प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्रियों के डिनर को लेकर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी अन्य मुख्यमंत्रियों के साथ डिनर में शामिल हुईं। उनके अनुसार, यह पूरे देश के लिए एक संदेश है कि देश के सभी हिस्से मिलकर एक परिवार की तरह काम कर रहे हैं। घोष ने देश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक विकास और जीडीपी में वृद्धि का असर विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग से लेकर खेल तक कई क्षेत्रों में देश आगे बढ़ रहा है। वहीं, पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा शुरू होने तक जनता टीएमसी का राजनीतिक ड्रामा देख सकती है, लेकिन इसमें उन्हें या आम जनता को कोई दिलचस्पी नहीं है। जनता भाजपा के कामों से खुश है और अब हमारे साथ ही है। जनता को भी पता है कि कौन जनता के हित में काम करेगा और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि इससे पहले की सरकार में जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करती थी, लोग खुले में कही घूम नहीं सकते थे लेकिन अब घूम रहे हैं।
भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आज दूसरा और आखिरी दिन, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

नई दिल्ली। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का रविवार को दूसरा और अंतिम दिन है। विदेशी मेहमानों के लिए आज के दिन भी भारत मंडपम सजकर तैयार है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यह सम्मेलन शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुआ था। सभी ब्रिक्स देशों के समर्थन से कल ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ जारी किया गया। इस घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए आपसी बातचीत, परामर्श और कूटनीतिक प्रयासों के अपने संकल्प को दोहराया। घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी चिंता जताई गई और ज्यादा से ज्यादा संयम बरतने के साथ-साथ ऐसी कार्रवाइयों से बचने को कहा गया जिनसे हालात और बिगड़ सकते हैं। बता दें कि भारत चौथी बार इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। वहीं, शनिवार को चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को लेकर अहम बातें कही। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को मानवता के भविष्य और अपने लोगों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ मिलकर ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत बनाना चाहिए तथा विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने भारत-चीन संबंधों के दीर्घकालिक और स्थिर विकास के लिए चार प्रमुख सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि पहला, दोनों देशों को वस्तुनिष्ठ और संतुलित रणनीतिक समझ के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं। उन्होंने कहा कि यह सोच दोनों देशों के विकास स्तर, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और जनता के साझा हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। दूसरा, दोनों देशों को सहयोग और साझेदारी के जरिए साझा सफलता हासिल करनी चाहिए। इसके लिए विकास को साझा लक्ष्य मानकर मित्रवत संबंधों और पारस्परिक लाभकारी सहयोग को बढ़ाया जाना चाहिए। तीसरा, दोनों देशों को आपसी सम्मान और समझदारी के आधार पर बाधाओं को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों और सीमा से जुड़े मुद्दों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जाना चाहिए तथा सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखनी चाहिए। चौथे सुझाव में शी जिनपिंग ने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत और चीन को ब्रिक्स की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन तथा जी-20 जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाना चाहिए।
ईरान और ओमान के बीच बनी सहमति, होर्मुज स्ट्रेट के नए प्रवेश और निकास मार्गों की रूपरेखा तैयार

तेहरान/दोहा। ईरान के अधिकारियों ने बताया है कि ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट के लिए नए प्रवेश और निकास मार्गों की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। दोनों देश सोमवार को मस्कट में होने वाली एक क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों को इस बातचीत के नतीजों की जानकारी देंगे। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने ईरान की वार्ता टीम से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया कि यह समझौता ईरान और ओमान के बीच लंबे समय तक चली तकनीकी और कूटनीतिक बातचीत के बाद हुआ। अगस्त के आखिर में दोनों पक्षों के बीच अंतिम सहमति बनी। सूत्र के मुताबिक, नए समझौते के तहत खाड़ी क्षेत्र में प्रवेश करने वाला मार्ग पूरी तरह ईरान के क्षेत्रीय समुद्री जल के भीतर होगा। वहीं निकास मार्ग का एक हिस्सा भी ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आएगा। सूत्र ने कहा कि यह मार्ग ईरान की ओर से तय की गई व्यवस्थाओं के तहत संचालित होगा। नया सिस्टम लागू होने के बाद जलमार्ग के दक्षिणी मार्ग को बंद कर दिया जाएगा। सूत्र के अनुसार, अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा था कि दक्षिणी मार्ग खुला रहना चाहिए। सूत्र ने यह भी साफ किया कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खोल दिया जाएगा। उसने कहा कि जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए ईरान ने 7 शर्तें रखी हैं, जो अमेरिका को बता दी गई हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र ने कहा कि जब तक उन शर्तों को लागू नहीं किया जाता, तब तक यह जलमार्ग बंद रहेगा। उसके अनुसार, इसे दोबारा खोलने का फैसला पूरी तरह अमेरिका के व्यवहार पर निर्भर करेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने शुक्रवार को बताया कि खाड़ी तटवर्ती देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक सोमवार को ओमान में होने वाली है। इस बैठक में क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित समुद्री मार्ग तय करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच हुई बातचीत भी शामिल है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए बाघेई ने कहा कि उम्मीद है कि इस बैठक में खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों के अलावा ईरान और इराक के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा, “कार्यसूची के तहत हम प्रतिनिधिमंडलों को होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के सुरक्षित आवागमन को लेकर ईरान और ओमान के बीच हुई बातचीत के नतीजों की जानकारी देंगे।” उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने यह बातचीत इसलिए की क्योंकि वे होर्मुज स्ट्रेट के दोनों तटीय देश हैं। पिछले महीने के अंत में ईरान और ओमान ने एक संयुक्त बयान में कहा था कि उन्होंने एक चरणबद्ध योजना पर विचार-विमर्श किया है। इस योजना में जलडमरूमध्य के भीतर अस्थायी संयुक्त नौवहन गलियारा (शिपिंग कॉरिडोर) बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद तेहरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों की ओर आने या वहां से जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हुए नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी थी। होर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, दुनिया में तेल और गैस की ढुलाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। ओमान और ईरान इस जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित हैं। समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देश लंबे समय से आपसी बातचीत और सहयोग बनाए हुए हैं।