ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एस जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक समूह तस्वीर भी साझा की, जिसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअट्टी, कजाखस्तान के विदेश मंत्री मुख्तार तिल्यूबेर्दी, इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी नजर आए। तस्वीर साझा करते हुए विदेश मंत्री ने लिखा, “ब्रिक्स इंडिया 2026 के दौरान कई सहयोगियों से औपचारिक रूप से मुलाकात हुई। और जैसा कि आप देख सकते हैं, कुछ से अनौपचारिक मुलाकात भी हुई।” इससे पहले जयशंकर ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “ब्रिक्स इंडिया 2026 से इतर सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से मिलकर खुशी हुई। क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों के साथ-साथ द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।” भारत ने 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, साझेदार देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के नेता शामिल हुए। ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। वहीं, ब्रिक्स के साझेदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले दो दिनों की चर्चाओं ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, बल्कि “समाधानों का एक इकोसिस्टम” है। उन्होंने शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा के सभी निर्णयों को समयबद्ध कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। भारत मंडपम में ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा साझा दृष्टि और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है और दुनिया को अब केवल विचारों और प्रतिबद्धताओं की नहीं, बल्कि ठोस परिणामों की अपेक्षा है। प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी और महत्वपूर्ण योगदान के लिए सभी ब्रिक्स नेताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नेताओं के सुझावों ने ब्रिक्स सहयोग को नई गहराई और व्यापकता प्रदान की है। साथ ही उन्होंने अगले ब्रिक्स मेजबान के रूप में चीन को शुभकामनाएं देते हुए नई दिल्ली शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी देशों और उनके प्रतिनिधिमंडलों की सराहना की।

ब्रिक्स सम्मेलन के समापन पर पीएम मोदी बोले-‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ साझा विजन को देगा नई दिशा

नई द‍िल्‍ली। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा क‍ि ‘ब्रिक्स’ सिर्फ देशों का समूह नहीं बल्कि समाधान का इकोसिस्टम है। उन्‍होंने उम्मीद जताई कि ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ साझा विजन को नई दिशा देगा। पीएम ने आयोजन को सफल बनाने के ल‍िए सभी सदस्य देशों का आभार जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्‍मेलन में शाम‍िल सभी सदस्‍यों का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा क‍ि आपके महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने हमारे सहयोग को व्यापकता भी दी है और गहराई भी दी है। आप सबकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती उपयुक्तता, उदारता और समावेशिता का प्रमाण है। पीएम मोदी ने कहा, पिछले दो दिनों की हमारी चर्चाओं ने हमारा विश्वास और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, समाधान का एक इकोसिस्टम है। हम आशा करते हैं इस समिट से उसमें जोड़े गए ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ हमारे साझा विजन और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा। हमें सभी परिणाम को समयबद्ध एक्शन और अंतिम पायदान पर प्रभाव से जोड़ना होगा। उन्‍होंने कहा हमारे फ्रेमवर्क फाइल्स से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में प्रभाव पैदा करें, इसके लिए हम सब मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। अब दुनिया हमसे केवल विचार और प्रतिबद्धता नहीं, कंक्रीट पर‍िणाम की अपेक्षा करती है। मुझे विश्वास है कि हम साझा प्रयासों से इन अपेक्षाओं पर जरूर खरे उतरेंगे। इस मौके पर पीएम मोदी ने ब्रिक्स के अगले होस्ट के तौर पर चीन को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा, नई दिल्ली समिट को सफल बनाने के लिए मैं आप सभी का और आप सबकी टीम्स का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आप सभी की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना करता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एआई से लेकर ट्रेड तक पांच नई पहलों का प्रस्ताव दिया

नई द‍िल्‍ली। नई द‍िल्‍ली में आयोज‍ित 18वें ब्र‍िक्‍स श‍िखर सम्‍मेलन के दूसरे सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हिस्सा लिया। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग ने ब्र‍िक्‍स सहयोग को और मजबूत करने के लिए पांच नई पहलें प्रस्तावित कीं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्‍ता माओ निंग ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में 18वें श‍िखर सम्‍मेलन में राष्‍ट्रपत‍ि शी ज‍िनप‍िंग के संबोधन की जानकारी साझा क‍ी। व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, 18वें ब्र‍िक्‍स श‍िखर सम्‍मेलन में अपने संबोधन के दौरान राष्‍ट्रपत‍ि शी जिनपिंग ने ओपन सोर्स और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पहल पर बात करते हुए कहा क‍ि चीन ब्र‍िक्‍स के तहत एक एआई ओपन सोर्स समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। वह बड़े भाषा मॉडल के विकास और उनके उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देगा। उन्‍होंने बताया क‍ि चीन एआई से जुड़े विशेष सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा तथा एआई के लिए एक खुला और सहयोगी इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा, उन्‍होंने व्यापार और निवेश को आसान बनाने पर बात की। जिनपिंग ने ब्र‍िक्‍स विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी बनाने का प्रस्ताव रखा है। उन्‍होंने बताया क‍ि इस व्यवस्था के तहत सदस्य देश एक स्मार्ट ऑनलाइन पोर्टल बना सकेंगे, नीतियों में बेहतर तालमेल कर सकेंगे और खुले विकास के लिए नए अवसर तैयार कर सकेंगे। उन्‍होंने कहा क‍ि आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को नई गति देने के लिए चीन अगले वर्ष ब्र‍िक्‍स व्यापार सेवा मंच आयोजित करेगा। राष्ट्रपति जिनपिंग ने बताया क‍ि चीन ब्र‍िक्‍स देशों के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म स्थापित करने की दिशा में काम करेगा। इसके तहत डिजिटल कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि मिलकर डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को आगे बढ़ाया जा सके। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग सहयोग पर बात करते हुए जिनपिंग ने कहा क‍ि चीन अन्य ब्र‍िक्‍स देशों को स्मार्ट फैक्ट्री बनाने और उनसे जुड़े मानक एवं नियम विकसित करने में मदद देने के लिए तैयार है। इसके जरिए सदस्य देश मिलकर अपने विनिर्माण क्षेत्र को आधुनिक बना सकेंगे और उसकी गुणवत्ता तथा क्षमता बढ़ा सकेंगे। इसके अलावा उन्‍होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रतिभा विकास पर बात करते हुए कहा क‍ि चीन ने ब्रिक्‍स इंजीनियर विकास गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य इंजीनियरों का संयुक्त प्रशिक्षण करना और उनकी योग्यता के मानकों को एक-दूसरे द्वारा मान्यता देना है। इसके साथ ही चीन ब्रिक्‍स युवा वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार आदान-प्रदान कार्यक्रम भी शुरू करेगा, ताकि भविष्य के लिए अधिक कुशल और प्रतिभाशाली युवाओं को तैयार किया जा सके। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य ब्रिक्‍स देशों के बीच तकनीक, व्यापार, उद्योग, नवाचार और मानव संसाधन विकास के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है।

दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच निवेश, व्यापार, औद्योगिक विकास और सहयोग बढ़ाने के अवसर: रामाफोसा

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए दौर की शुरुआत की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास निवेश, व्यापार, औद्योगिक विकास और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बड़े अवसर हैं। नई दिल्ली में ब्र‍िक्‍स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित दक्षिण अफ्रीका-भारत राउंडटेबल बैठक को संबोधित करते हुए रामाफोसा ने दोनों देशों के कारोबारियों से साझेदारी मजबूत करने और नीतिगत चर्चाओं को वास्तविक व्यावसायिक परियोजनाओं तथा दीर्घकालिक निवेश में बदलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हम अपने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए युग के लिए तैयार हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी जरूरी है। रामाफोसा ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, महत्वपूर्ण खनिज संसाधन, बुनियादी ढांचा, कृषि और डिजिटल नवाचार ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देश सहयोग को और आगे बढ़ा सकते हैं। उनके अनुसार, दक्षिण अफ्रीका के खनिज संसाधन और भारत की विनिर्माण क्षमता मिलकर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), बैटरियां और अन्य औद्योगिक उत्पादों के विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने भारतीय कंपनियों को अपने देश की इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास परियोजनाओं में भाग लेने का भी निमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका ने 195 रणनीतिक परियोजनाओं की पहचान की है, जिनकी कुल कीमत 100 अरब डॉलर से अधिक है। इनमें परिवहन नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा, जल अवसंरचना और अस्पतालों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। रामाफोसा ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में बढ़ते सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय बिजनेस सर्विसेज कंपनी ‘एटैन’ के केप टाउन स्थित नए केंद्र का जिक्र किया। यह कंपनी दक्षिण अफ्रीका में अपने कर्मचारियों की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 2,000 से अधिक युवाओं तक पहुंचाने की योजना बना रही है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, कौशल विकास संगठनों और व्यवसायों के बीच अधिक सहयोग की भी अपील की। रामाफोसा ने कहा कि मजबूत संस्थागत साझेदारी से नई क्षमताएं विकसित होंगी और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा, “हमारे देशों के बीच साझेदारी की ताकत इस बात से नहीं मापी जाती कि हम कितने समझौतों पर हस्ताक्षर करते हैं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि हम मिलकर कितना वास्तविक प्रभाव पैदा करते हैं।” दक्षिण अफ्रीका-भारत राउंडटेबल बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई जब दुनिया भर के नेता ब्रि‍क्‍स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में एकत्र हुए थे। यह बैठक व्यापार जगत और नीति निर्माताओं के लिए निवेश, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर तलाशने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

नई दिल्ली घोषणा से ब्रिक्स देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा ने पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया है और सदस्य देशों ने इस विषय पर ब्रिक्स विशेषज्ञ कार्य समूह के प्रस्तावित गठन का स्वागत किया है। आयुष मंत्रालय ने रविवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी। आयुष मंत्रालय ने कहा कि ब्रिक्स हेल्थ ट्रैक के तहत प्रस्तावित कार्य समूह को पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच संवाद, सहयोग और आदान-प्रदान के मंच के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। घोषणा में उपचारात्मक और निवारक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले औषधीय पौधों और हर्बल तैयारियों पर शोध में अधिक सहयोग का भी आह्वान किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, ब्रिक्स देशों की साझा पारंपरिक फार्माकोपिया को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती चिकित्सीय उत्पाद विकसित करने की संभावित आधारशिला के रूप में मान्यता दी गई है। केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि घोषणा में टीसीआईएम को मान्यता दिया जाना पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विशेषज्ञ कार्य समूह सदस्य देशों को ज्ञान साझा करने, अनुसंधान को मजबूत करने और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा। जाधव ने कहा, “भारत वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आयुर्वेद और चिकित्सा की अन्य पारंपरिक प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।” इस बीच, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह घोषणा ब्रिक्स देशों के बीच टीसीआईएम पर संरचित सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कार्य समूह साक्ष्यों को साझा करने, अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने तथा गुणवत्ता और नियामकीय दृष्टिकोण में सुधार के लिए एक केंद्रित मंच प्रदान कर सकता है। मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा, घोषणा में सदस्य देशों के राष्ट्रीय संदर्भों के अनुरूप साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण और उपयुक्त नियामकीय ढांचे के माध्यम से टीसीआईएम पद्धतियों और उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया गया है। मंत्रालय ने आगे कहा कि यह पहल 21 जुलाई को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत चंडीगढ़ में आयोजित पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पर ब्रिक्स बैठक के बाद सामने आई है। सरकार ने कहा कि औषधीय पौधों और हर्बल तैयारियों पर जोर देने से ब्रिक्स देशों के बीच दस्तावेजीकरण, फार्माकोपियल मानकों, गुणवत्ता आश्वासन और चिकित्सीय उत्पादों के विकास सहित वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को और गहरा करने के रास्ते खुल सकते हैं।

अपनी संस्कृति और स्मृतियों की रक्षा करने वाला राष्ट्र कभी पराजित नहीं होता: अमित शाह

मुंबई। गृह मंत्री अमित शाह मुंबई दौरे के दौरान एशियाटिक सोसायटी में आयोजित गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। समारोह में आए लोगों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “मैं पहला गृह मंत्री हूं जो एशियाटिक सोसायटी में आया है, लेकिन मैं यहां गृह मंत्री के नाते नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को सहस्रों वर्षों तक आगे ले जाने के आंदोलन के एक आंदोलनकारी के रूप में आया हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि एशियाटिक सोसायटी मुंबई भारतीय ज्ञान परंपरा की वाहक बनकर इसे देशभर में पहुंचाने का कार्य करेगी।” उन्होंने कहा, “जो राष्ट्र अपनी भाषा, संस्कृति, स्मृति, इतिहास, संस्कार, अभिलेख और पंरपराओं की रक्षा नहीं कर सकता है, वह कितना भी शक्तिशाली हो, उसको समाप्त होने में देर नहीं लगती है। जो राष्ट्र अपनी भाषा, संस्कृति, स्मृति, इतिहास, संस्कार, भाषा, परंपराएं और व्यकारण की रक्षा करता है, वह चाहे जितने साल भी गुलाम रहे, उसको गुलाम नहीं बना सकता है, इसका भारत उदाहरण है। अनेक लोगों ने पूरे विश्व का मार्दर्शन देने वाले यहां पैदा हुए ओजस्वी ज्ञान को समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन नहीं कर पाए। नालंदा का पुस्तकालय जला सकते हैं, लेकिन स्मृति और श्रुति से जो लोगों के चित में बसा है, उस ज्ञान को कोई समाप्त नहीं कर सकता।” गृह मंत्री ने कहा, “हमारे देश का संस्कार है कि जब हम पराजित होते हैं, तब धैर्य रखकर आगे बढ़ते हैं। जब विजयी होते हैं, तो जिन पर विजय प्राप्त करते हैं, उनकी स्मृतियों को नष्ट किए बिना हमारे परंपरा में जोड़ने का प्रयास करते हैं।” अमित शाह ने एशियाटिक सोसायटी में परिवर्तन लाने पर जोर देते हुए कहा, “सच्चा ज्ञान, कभी किसी विचारधारा का बंधक नहीं होता। ज्ञान अपने आप में एक विचारधारा है और इसको किसी प्रकार से बांधते हो तो ज्ञान के मायने बदल जाते हैं। ज्ञान मुक्त और उन्मुक्त होना चाहिए। इसलिए एशियाटिक सोसायटी में जो ज्ञान, संपदा और एकत्रिकरण का उपयोग महान भारत की रचना में करना चाहिए। एशियाटिक सोसायटी के ज्ञान का इस्तेमाल अब विश्व के कल्याण के लिए होगा। अंग्रेजों ने ज्ञान और सत्ता को एक सूत्र में बांध दिया था, लेकिन अब ज्ञान और सत्ता को अलग कर ज्ञान के आधार पर सत्ता की रचना हो और देश चले, ऐसी व्यवस्था बनाने का काम एशियाटिक सोसायटी को करना चाहिए।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “आज मैं यहां बहुत कम समय के लिए बोलने आया हूं, लेकिन मैं ‘इंडोलॉजी’ शब्द के बारे में जरूर बात करना चाहता हूं। एशियाटिक सोसायटी को समझने के लिए ‘इंडोलॉजी’ शब्द को समझना भी जरूरी है। न्यूमिजमैटिक्स (सिक्का-विज्ञान), एपिग्राफी (अभिलेख-शास्त्र), एंथ्रोपोलॉजी (मानव-विज्ञान), इतिहास, पुरातत्व, भाषा-विज्ञान, दर्शनशास्त्र, साहित्य, धर्मशास्त्र और व्याकरण – इन सबको मिलाकर ‘इंडोलॉजी’ बनी। हालांकि, मैं आज यह साफ करना चाहता हूं कि उस समय इसका मकसद दुनिया या ब्रह्मांड का कल्याण करना नहीं था, जो भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान का मकसद होता है। इसका मकसद यहां की व्यवस्थाओं को समझना और लंबे समय तक लोगों पर राज करना था।” गृह मंत्री ने कहा, “भारत का संस्कार है कि जब हम पराजित होते हैं, तो धैर्य रखकर आगे बढ़ते हैं और जब विजय प्राप्त करते हैं, तो जिन पर विजय पाई है, उनकी स्मृति को नष्ट किए बिना उन्हें अपनी परंपरा से जोड़ने का प्रयास करते हैं। एशियाटिक सोसायटी में बदलाव की बात करते हुए मैं कहना चाहता हूं कि सच्चे ज्ञान को कभी बांधा नहीं जा सकता। एशियाटिक सोसायटी के ज्ञान का भारत के विकास में किस तरह योगदान हो सकता है, इस पर काम करना चाहिए।” अमित शाह ने कहा, “एशियाटिक सोसायटी के ज्ञान के संपूर्ण का विस्तार तीन दृष्टियों से होना चाहिए। ज्ञान का विस्तार करने वाले विद्वानों को यहां लाना चाहिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से देशभर के पुस्तकालयों को आपस में जोड़ना चाहिए और महाराष्ट्र के गांव-गांव में मौजूद पांडुलिपियों को सहेजकर उनके शोध व ज्ञान को भारतम पांडुलिपि के माध्यम से सामने लाने में योगदान देना चाहिए।

पीएम मोदी के जन्मस्थान वडनगर पहुंचेगा चार धामों का पवित्र जल, भाजपा की सेवा संकल्प बाइक यात्रा शुरू

अहमदाबाद। भाजपा के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत रविवार को गुजरात के चार प्रमुख धार्मिक स्थलों से पवित्र जल लेकर चार बाइक यात्राएं शुरू हुईं। करीब 500 कार्यकर्ता 250 मोटरसाइकिलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मस्थान वडनगर की ओर रवाना हुए हैं। ये यात्राएं सोमनाथ, उनाई माता मंदिर, शामलाजी और पावागढ़ से शुरू हुई हैं और राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों से होते हुए अलग-अलग रास्तों से 16 सितंबर को वडनगर में एक साथ मिलेंगी। पार्टी प्रवक्ता के अनुसार, यह यात्रा इसके बाद होने वाली ‘वडनगर से वाराणसी’ बाइक यात्रा से पहले आयोजित की जा रही है। चारों समूह पवित्र जल लेकर वडनगर पहुंचेंगे, जहां एक हिस्सा हाटकेश्वर महादेव के जलाभिषेक के लिए इस्तेमाल होगा और बाकी जल शर्मिष्ठा झील में मिलाया जाएगा। इसके बाद झील के पवित्र जल को 500 कार्यकर्ता 250 बाइकों पर वाराणसी ले जाएंगे, जहां काशी विश्वनाथ महादेव का जलाभिषेक किया जाएगा। भाजपा ने कहा कि यह अभियान पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल की सेवा पूरी करने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 13 साल और प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल शामिल हैं। यात्राओं के दौरान कार्यकर्ता रास्ते में पड़ने वाले गांवों और शहरों के लोगों से संवाद करेंगे। अलग-अलग पड़ावों पर कार्यक्रम, ग्राम सभाएं और स्वागत समारोह भी आयोजित किए जाएंगे। राज्य भाजपा पदाधिकारी, राज्य मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य पार्टी नेता अलग-अलग चरणों में यात्राओं में शामिल होंगे। सोमनाथ समूह पहले दिन केशोद, जूनागढ़, वीरपुर और गोंडल से होकर गुजरेगा, 14 सितंबर को जसदान, विंछिया और पालीयाड होते हुए सारंगपुर पहुंचेगा। यह 15 सितंबर को बरवाला, धंधुका और धोलका होते हुए पीराना पहुंचेगा और 16 सितंबर को साणंद, बेचाराजी और मेहसाणा होते हुए वडनगर पहुंचेगा। उनाई माता मंदिर समूह 14 सितंबर को व्यारा, सोनगढ़ और मांडवी से होते हुए नेतरंग और राजपिपला के रास्ते स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचेगा। यह 15 सितंबर को वडताल जाएगा और अगले दिन अडालज, मानसा और विसनगर होते हुए वडनगर पहुंचेगा। शामलाजी समूह भिलोडा, इडर, वडाली और खेडब्रह्मा से होते हुए अंबाजी पहुंचेगा। यह 14 सितंबर को पालनपुर और डीसा होते हुए थराद, 15 सितंबर को राधनपुर होते हुए पाटन और 16 सितंबर को सिद्धपुर और विसनगर होते हुए वडनगर जाएगा। पावागढ़ समूह हालोल, कालोल, गोधरा, बालासिनोर और थासरा से होते हुए डाकोर पहुंचेगा। यह 14 सितंबर को आनंद, नडियाद और कठलाल होते हुए कपडवंज जाएगा और 15 सितंबर को बायड, धानसुरा, मोडासा और प्रांतिज होते हुए हिम्मतनगर पहुंचेगा। यह 16 सितंबर को विजापुर होते हुए दोपहर 3 बजे वडनगर पहुंचेगा। वडनगर चरण के बाद 500 कार्यकर्ता शर्मिष्ठा झील से पवित्र जल लेकर वाराणसी की ओर अपनी आगे की यात्रा शुरू करेंगे।

चुंबक’ की अभिनेत्री संदीपा धर बोलीं, ‘हीरोइन’ नहीं, दमदार अभिनेत्री के रूप में बनाना चाहती हूं पहचान

मुंबई। अभिनेत्री संदीपा धर हाल ही में नेटफ्लिक्स की ओरिजिनल सीरीज ‘चुंबक’ में नजर आईं। उन्होंने अपने करियर में कॉमेडी, थ्रिलर, ड्रामा और इमोशनल कहानियों में अलग-अलग तरह के भूमिका निभाने की कोशिश की। संदीपा का मानना है कि एक कलाकार की पहचान तभी मजबूत होती है, जब वह खुद को बार-बार अलग भूमिकाओं में आजमाने से न डरे। आईएएनएस संग बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके लिए सिर्फ ‘हीरोइन’ कहलाना कभी मकसद नहीं रहा। वह चाहती हैं कि लोग उन्हें एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर पहचानें, जो अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की काबिलियत रखती है। संदीपा ने कहा, ”मेरा फोकस हमेशा एक एक्टर के तौर पर अपनी पहचान बनाने पर रहा है। मेरे लिए यह ज्यादा जरूरी है कि लोग मेरी एक्टिंग को नोटिस करें और मुझे अलग-अलग किरदार निभाने वाली अभिनेत्री के तौर पर याद रखें। ‘हीरोइन’ का टैग कोई मंजिल नहीं है, बल्कि एक कलाकार के लिए असली चुनौती अपने काम के जरिए पहचान बनाना है।” संदीपा ने कहा, ”मैंने फिल्मों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काम किया है। ओटीटी ने कलाकारों को ऐसा स्टेज दिया है, जहां वह अलग तरह की कहानियों और किरदारों के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकते है। पहले जहां कलाकारों की एक खास इमेज बन जाने के बाद उन्हें उसी तरह के रोल ज्यादा मिलने लगते थे, वहीं ओटीटी पर अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए अपनी रेंज दिखाने के ज्यादा मौके मिल रहे हैं।” अभिनेत्री ने आगे कहा, ”खुशकिस्मती से मैं ओटीटी स्पेस का हिस्सा बनी और मुझे अपनी अलग-अलग खूबियां दिखाने का मौका मिला। दर्शकों ने भी मुझे बहुत प्यार दिया है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि मैं आगे भी अलग-अलग किरदार निभाती रहूंगी और अपनी रेंज दिखाती रहूंगी।” संदीपा धर की सीरीज ‘चुंबक’ का प्रीमियर 10 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर हुआ। जेडी मजेठिया और आतिश कपाड़िया की बनाई इस कॉमेडी-ड्रामा सीरीज में उनके साथ नीना गुप्ता, देवेन भोजानी, अर्जुन बिजलानी, हेली शाह, मानसी पारेख, सुमीत व्यास, सुमीत राघवन, अनंत वी. जोशी, अमायरा दस्तूर, डेलनाज ईरानी और अतुल कुमार जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।

टेस्ला लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को अगली पीढ़ी की रोडस्टर को करेगी लॉन्च

मुंबई। इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने घोषणा की कि कंपनी लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को रोडस्टर लॉन्च करेगी। टेस्ला रोडस्टर की पहली जनरेशन को करीब एक दशक पहले बाजार में उतारा गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टेस्ला ने एक पोस्ट में कहा, “गो फॉर लॉन्च”, साथ ही इसमें एक पोस्टर भी था, जिसमें इसकी तारीख एक अक्टूबर दी गई थी। इस पोस्ट के रिप्लाई में मस्क ने कहा, “नई टेस्ला रोडस्टर 10.01 को लॉन्च की जाएगी।” इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में अगस्त में दावा किया गया था कि टेस्ला नए डिजाइन वाली रोडस्टर को जल्द ही लॉन्च करने की योजना बना रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इवेंट में स्पेसएक्स के साथ मिलकर बनाए गए कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स वाले लिमिटेड-एडिशन वर्जन का डेमो दिखाया जा सकता है। टेस्ला ने सबसे पहले 2017 में अगली पीढ़ी की रोडस्टर लाने का ऐलान किया था और कहा था कि इसकी डिलीवरी 2020 में शुरू हो जाएगी, लेकिन इस प्रोग्राम में बार-बार देरी हुई है। यह कदम टेस्ला द्वारा पिछले हफ्ते ऑस्टिन, टेक्सास के कुछ इलाकों में अपनी दो-सीटर साइबरकैब में राइड्स की सुविधा शुरू करने के बाद उठाया गया है। इस साइबरकैब में न तो स्टीयरिंग व्हील है और न ही पैडल। मस्क ने इस गाड़ी को टेस्ला को ड्राइवरलेस गाड़ियों के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनाने के लिए अहम बताया है। खबरों के मुताबिक, नई रोडस्टर अब एक आम हाई-परफॉर्मेंस ईवी से बदलकर पूरी तरह से नई कार्बन-फाइबर हाइपरकार बन गई है। नई रोडस्टर के लॉन्च से पहले टेस्ला के शेयर में तेजी देखी गई। बीते एक महीने में टेस्ला ने 7 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू के घर पर देर रात फायरिंग, बाइक सवार हमलावरों ने की कई राउंड फायरिंग

चंडीगढ़। पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के मशहूर पंजाबी गायक गुलाब सिद्धू के बरनाला स्थित घर पर देर रात फायरिंग की गई। जानकारी के मुताबिक, बाइक पर सवार तीन अज्ञात युवक गांव फरवाही पहुंचे। तीनों ने अपने चेहरे कवर किए हुए थे। घर के गेट के पास पहुंचने के बाद युवकों ने कई राउंड फायर किए और इसके बाद मौके से फरार हो गए। घटना देर रात की बताई जा रही है। अचानक हुई इस फायरिंग के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। फरवाही गांव बरनाला जिले में आता है और गुलाब सिद्धू का संबंध इसी गांव से बताया जाता है। हमलावर फायरिंग करने के बाद बाइक से फरार हो गए। फिलहाल यह साफ नहीं है कि इस हमले के पीछे कौन है और हमलावरों का मकसद क्या था। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गुलाब सिद्धू के लिए यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इससे पहले भी उनके खिलाफ हमले की साजिश सामने आ चुकी है। जनवरी 2026 में बरनाला पुलिस ने दावा किया था कि उसने गुलाब सिद्धू पर हमले की एक कथित साजिश को नाकाम किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें कोटदुना गांव का सरपंच बलजिंदर सिंह उर्फ किंदा भी शामिल था। पुलिस के मुताबिक, उसके साथ बलविंदर सिंह उर्फ बिंदर मान और गुरविंदर सिंह उर्फ गिल को भी पकड़ा गया था। आरोपियों के पास से हथियार और कारतूस बरामद हुए थे और गुलाब सिद्धू को निशाना बनाने की योजना बनाई गई थी। उस समय पुलिस ने इस कथित साजिश को गुलाब सिद्धू के एक गाने को लेकर हुए विवाद से भी जोड़कर देखा था। उनके एक गाने में सरपंचों को लेकर की गई टिप्पणी के बाद पंजाब के कुछ सरपंचों ने विरोध जताया था। पुलिस का दावा था कि इसी विवाद के बाद कथित तौर पर गुलाब सिद्धू को निशाना बनाने की योजना बनाई गई। बात करें गुलाब सिद्धू के करियर की बात है, तो वह पिछले कुछ सालों में पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। उन्होंने ‘पंच्छी’, ‘टौर कड्ड दा’, ‘सरदारनी’, ‘दिल जट्ट दा’, ‘चादरे’, ‘जट्ट दे इरादे’ और ‘फोटो ते फ्लावर’ जैसे कई गाने दिए। गुलाब सिद्धू ने सिद्धू मूसे वाला के साथ भी काम किया है। दोनों का गाना ‘बाई बाई’ 2020 में रिलीज हुआ था और यह उनके करियर के चर्चित कोलैबोरेशन में शामिल रहा। इसके अलावा ‘पंज सत्त’, ‘आइनक’, ‘नखरा’, ‘वाइब’, ‘शोमेन’, ‘डेड जोन’, ‘लाहौर’ और ‘सोल्ड टू डेथ’ जैसे गाने भी उनके नाम से जुड़े हैं। गुलाब सिद्धू का करियर सिर्फ पुराने हिट गानों तक सीमित नहीं है। 2025 और 2026 में भी उन्होंने लगातार नए प्रोजेक्ट्स पर काम किया, जिसमें ‘जट्टा लव यू’, ‘गरूर’, ‘गलबात’, ‘जमाना’, ‘सरदारी’, ‘सरपंच-टाइटल ट्रैक’, ‘क्रीमलैंड’ और ‘मंगनी’ जैसे गाने शामिल है।