विनोद साहनी हत्याकांड पर ओम प्रकाश राजभर का पलटवार, बोले- 80 फीसदी घटनाओं में सपा से जुड़े लोग शामिल

अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने सपा से जुड़े लोगों के अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “सरकार ने कानूनी कार्रवाई की और तत्काल तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस दुख की घड़ी में सरकार पूरी तरह निषाद परिवार के साथ है।” अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “80 प्रतिशत घटनाएं तो अखिलेश यादव के लोगों की ओर से की जा रही है। पीडीए की मीटिंग में दलित को मंच पर बैठने तक नहीं दिया गया। हां, सरकार कानूनी कार्रवाई न करें, तब दोषी है।” इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीते दिन समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “भाजपा के वर्चस्ववादी लोग अपना दबदबा बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, यहां तक ​​कि हत्या भी कर सकते हैं या किसी को घुटनों पर भी ला सकते हैं।” उन्होंने भाजपा के शासन को अहंकार, घमंड और घमंड का आपराधिक गठजोड़ करार दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा था, “हम अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं हो जाते और उन पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक हम इसे न्याय नहीं मानेंगे। लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर भी केस दर्ज होना चाहिए और इलाज में हुई चूक के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और मुआवजा मिलना चाहिए।” गोंडा के एसपी अभिषेक ने बताया था, “9 सितंबर, 2026 को पारसपुर थाना क्षेत्र में एक घटना हुई थी, जिसमें विनोद साहनी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि घर लौटते समय कुछ युवकों ने उसके साथ मारपीट की। उसे तुरंत मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए केजीएमयू लखनऊ भेज दिया गया। साथ ही, इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। शुक्रवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

यूपी सरकार ने परिषदीय स्कूलों में निगरानी और चाइल्ड ट्रैकिंग को दी रफ्तार, 6.55 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों में बच्चों से जुड़ी सूचनाओं की निगरानी, विद्यालयी प्रबंधन और शैक्षिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में वर्ष 2026-27 के लिए एमआईएस (यू-डायस प्लस) और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के प्रभावी संचालन एवं उपयोग के लिए 6.55 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को धनराशि के उपयोग और निगरानी के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ज्ञात हो कि इस व्यवस्था के माध्यम से योगी सरकार विद्यालयी आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित, बच्चों की शैक्षिक प्रगति की निगरानी को अधिक प्रभावी तथा स्कूल प्रबंधन को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में डिजिटल प्रणालियों के उपयोग को मजबूत कर रही है। निर्देशों के अनुसार कुल 655.01 लाख रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। इसमें एमआईएस (यू-डायस प्लस) के लिए 262.00 लाख रुपये तथा चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के लिए 393.01 लाख रुपये शामिल हैं। यह धनराशि विद्यालय स्तर पर एसएमसी के माध्यम से निर्धारित गतिविधियों पर व्यय की जाएगी। निर्देशों में यू-डायस प्लस पर विद्यालयों एवं विद्यार्थियों से संबंधित आंकड़ों के संकलन और उनके उपयोग को महत्वपूर्ण माना गया है। साथ ही चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से बच्चों की शैक्षिक स्थिति पर नजर रखने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। पत्र में अपार आईडी और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी की विशिष्ट पहचान के साथ उसकी शैक्षिक जानकारी को व्यवस्थित रूप से ट्रैक किया जा सके। निर्देशों में जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक धनराशि के उपयोग की निगरानी के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को एसएमसी स्तर पर हुए व्यय की प्रगति की समीक्षा करने तथा निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार विद्यालयी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के साथ हर बच्चे की शैक्षिक प्रगति पर प्रभावी नजर सुनिश्चित कर रही है। एमआईएस और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से बच्चों से जुड़ी जानकारी के बेहतर उपयोग को नई मजबूती मिलेगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि एमआईएस, यू-डायस प्लस और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों की जानकारी को व्यवस्थित रूप से जोड़ते हुए एसएमसी स्तर पर स्वीकृत धनराशि का निर्धारित मद में पारदर्शी उपयोग और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो।

शादी की सालगिरह पर पति रवि दुबे की याद में इमोशनल हुईं लिलेट दुबे, शेयर की पुरानी तस्वीर

मुंबई। ‘जुबेदा,’ ‘कल हो ना हो’ और ‘चलते चलते’ समेत कई फिल्मों में काम कर अपनी अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री लिलेट दुबे ने शनिवार को अपनी शादी की सालगिरह पर अपने गुजरे हुए पति रवि दुबे को याद किया। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर पति संग कुछ तस्वीर पोस्ट की,। इस तस्वीर में दोनों एक सुकून भरे पल में नजर आ रहे हैं, जिसमें लिलेट कैमरे की तरफ मुस्कुरा रही हैं और रवि उनके बगल में बैठे हैं। लिलेट दुबे ने इस पोस्ट के जरिए करीब पांच दशक पहले शुरू हुए अपने रिश्ते पर एक इमोशनल नोट लिखा, “डार्लिंग रवि, एक और एनिवर्सरी आ गई। एक और जिंदगी की तस्वीर के साथ। लव यू और तुम्हारी बहुत याद आती है।” अभिनेत्री की पोस्ट को फैंस और उनके करीबियों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। कई यूजर्स ने कमेंट सेक्शन पर प्रतिक्रिया दी। अभिनेत्री दिव्या शेठ शाह ने लिखा, “रवि बहुत नेक इंसान थे। वे हमेशा मुझे सपोर्ट करते रहते थे।” लिलेट दुबे और रवि दुबे कॉलेज के दिनों से एक दूसरे को जानते थे। 12 सितंबर 1978 को कपल ने शादी कर ली थी। लिलेट दुबे अक्सर बताती रहती हैं कि रवि उनके सबसे करीबी दोस्तों में से एक बने थे और फिर धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। कई साल तक साथ रहने के बाद दोनों ने शादी की थी। इस कपल की दो बेटियां हैं, नेहा दुबे और इरा दुबे। दोनों ही थिएटर, फिल्मों और टीवी से जुड़ी हुई हैं। अभिनेत्री के पति रवि दुबे मानसिंह होटल के महाप्रंबधक थे। रवि दुबे का निधन साल 2015 में अग्नाशय के कैंसर से हो गया था। उनके जाने के बाद लिलेट दुबे ने अकेले ही अपनी दोनों बेटियों को संभाला और अपनी प्रोफेशनल जिंदगी को भी जारी रखा।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन : पर्यटन को कम न आंकें, जीडीपी में बड़ा योगदान- साउथ अफ्रीका टूरिज्म हेड

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में विदेशी मेहमान भारत के आतिथ्य से काफी खुश नजर आ रहे हैं। ब्रिक्स वुमेन्स बिजनेस अलायंस, साउथ अफ्रीका की कार्यकारी सदस्य और टूरिज्म हेड थेंबिसा जिमाना ने ब्रिक्स से मिलने वाले अवसरों पर आईएएनएस से कहा, “पर्यटन को कम नहीं आंका जाना चाहिए, क्योंकि पर्यटन पूरी अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। सभी उद्योग पर्यटन पर निर्भर हैं। आपके यहां आने के लिए आपको होटल बुक करना होगा, आपको तैयार होना होगा, यह पर्यटन है। यदि आप बीमार पड़ते हैं, तो वह मेडिकल टूरिज्म है। इसलिए पर्यटन जीडीपी में बहुत योगदान देता है। इसलिए इस तरह के मंचों में भी इसकी बड़ी भूमिका है।” महिला सशक्तीकरण पर उन्होंने कहा, “हम मैडम लेबो के नेतृत्व में हैं, जो बहुत ऊर्जावान हैं, जो हमेशा महिला समावेश के लिए लड़ती हैं। इसलिए हम भी उनसे प्रेरणा लेते हैं। इसलिए इस शिखर सम्मेलन में आना उन लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करना भी है जो साउथ अफ्रीका में पीछे रह गए थे, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वैश्विक स्तर पर लिए जाने वाले सभी निर्णयों में महिलाओं को शामिल किया जाए। और ब्रिक्स, एक मंच के रूप में, इसकी अनुमति देता है, महिलाओं को भी आवाज मिले। और न केवल दस्तावेजों, कागजों के लिए आवाज, बल्कि ठोस परिणाम भी हों। जैसे हाल ही में, हमने एक स्टार्टअप प्रोग्राम की मेजबानी की, जिसे ब्रिक्स वुमेन्स बिजनेस अलायंस ने शुरू किया था, जहां वे सबसे अच्छा करने वाले उद्यमियों को सशक्त बनाते हैं और उन्हें पुरस्कार देते हैं।” बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में ‘मैडम लेबो’ के नाम से प्रसिद्ध व्यक्तित्व मुख्य रूप से लेबोगांग (लेबो) रामाफोको को माना जाता है, जो देश की एक बेहद लोकप्रिय नारीवादी कार्यकर्ता और सामाजिक न्याय की पैरोकार हैं ‘टीवी ब्रिक्स अफ्रीका’ के शेड्रैक हॉलो ने अपने अनुभव को साझा करते हुए आईएएनएस से कहा, “नमस्ते। मेरा प्रवास बहुत शानदार रहा। मैं साउथ अफ्रीका से हूं। मैं 8 सितंबर को यहां पहुंचा और अनुभव बहुत अच्छा रहा। खाना अद्भुत है, यह स्वादिष्ट है, रंग-बिरंगा है। मैंने हर निवाले का लुत्फ उठाया, खासकर आपका तंदूरी चिकन। ” उन्होंने ब्रिक्स समिट बिजनेस फोरम और द्विपक्षीय बातचीत के फायदों पर बात करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि इस बार ब्रिक्स बहुत अच्छा रहा है। खासकर बिजनेस फोरम में जिसमें मैं शामिल हुआ, वह वास्तव में अवसरों को खोलने के बारे में था। मुझे लगता है कि मंत्री जो पूरे साल मिलते रहे हैं, वे समझते हैं कि हमें ब्रिक्स देशों को सुरक्षित करना है और करना ही चाहिए, खासकर जब कृषि की बात आती है। खाद्य सुरक्षा ब्रिक्स देशों के लिए बहुत, बहुत महत्वपूर्ण उद्देश्य है। और मुझे लगता है कि हम आगे बढ़ रहे हैं। ब्रिक्स के उद्यमियों के बीच जो बातचीत हुई, वह वास्तव में इस बात को समझने में दृढ़ थी कि हमें मैन्युफैक्चरिंग में कौशल साझा करने और एक-दूसरे से ज्यादा खरीदने की जरूरत है।” उन्होंने बताया कि साउथ अफ्रीका के राजदूत ने भी कहा है कि चीजें बदल गई हैं। शेड्रैक हॉलो ने कहा कि साउथ अफ्रीका और भारत के बीच गहरा रिश्ता है।

ब्रिक्स ने दुनिया को नई दिशा दी, ग्लोबल साउथ तेजी से उभरा: चीनी पत्रकार

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इस मौके पर दुनिया से आए पत्रकारों और प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी। चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली के सीनियर पत्रकार रेन यान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बीजिंग से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। मुझे लगता है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने भारत और चीन के नेताओं को मिलने और भारत-चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक अच्छा मंच प्रदान किया है।” क्या ब्रिक्स वैश्विक व्यवस्था को बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, इस सवाल पर रेन यान ने कहा, “मुझे लगता है कि 20 साल पहले विश्व व्यवस्था पर पश्चिमी शक्तियों का वर्चस्व था लेकिन ग्लोबल साउथ के एक सामूहिक संगठन के रूप में उभरने के साथ मुझे लगता है कि पिछले 20 साल में ग्लोबल साउथ तेजी से उभरा है और धीरे-धीरे पुरानी विश्व व्यवस्था को बदल दिया है।” उन्होंने कहा, “ब्रिक्स में कई महाद्वीपों के कई देश शामिल हैं। यह विविधता में एकता है, लेकिन मुझे लगता है कि हमारे बीच मतभेदों या विवादों से ज्यादा समानताएं हैं। मुझे लगता है कि यह अच्छा है कि हमारा लक्ष्य ‘विकास’ ही हैं, क्योंकि हम विकासशील देश हैं।” थिंक ब्रिक्स की ब्लॉगर अनास्तासिया गोल्याकोवा ने भारत-रूस संबंधों पर कहा, “दिल्ली में हमारी मेजबानी करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से यह पहली यात्रा है। हां, मैं शुरुआत से 2023 से ब्रिक्स एजेंडे को कवर कर रही हूं और यह मेरा पहला शिखर सम्मेलन नहीं है। मॉस्को में हमने भारत द्वारा रूस में आयोजित कई कार्यक्रमों में भाग लिया है।” चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स में आने पर उन्होंने कहा, “कजान में, अगर आपको याद हो, तो मुख्य खबर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाथ मिलाना था। और वह नंबर एक खबर थी। इस साल, सच कहूं तो मुझे नहीं पता था कि क्या उम्मीद करनी है। लेकिन मुझे लगता है कि हम सभी को अधिक मैत्रीपूर्ण बातचीत, अधिक मैत्रीपूर्ण माहौल की उम्मीद है, और चलिए राजनीति के बारे में नहीं, बल्कि शांति के बारे में बात करते हैं।” अनास्तासिया गोल्याकोवा ने कहा, “अगर मैं गलत नहीं हूं, तो राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2019 के बाद से भारत नहीं आए हैं। फिर भी दोनों नेता एक-दूसरे से मिलते रहे हैं। 2024 के बाद से, प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में बीजिंग का दौरा किया, और अब शी जिनपिंग दिल्ली आए हैं। तो, हम क्या कह सकते हैं? मुझे उम्मीद है कि भारत और चीन के बीच संबंध विकसित होंगे और दूसरे स्तर पर जाएंगे।” टीवी ब्रिक्स अफ्रीका की मेलिसा हॉलो ने भारत यात्रा पर कहा, “नई दिल्ली का क्या विनम्र और सुंदर अनुभव है। शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही मैं कुछ मंदिरों में गई हूं, और मैंने आसपास थोड़ा टहल भी लिया। और मैं सच में कह सकती हूं कि यह बहुत ही शांतिपूर्ण जगह है। यहां अरबों लोग हैं, लेकिन फिर भी आप घर जैसा महसूस करते हैं। सड़क पर चलने वाले स्थानीय लोग भी बहुत मददगार थे, मुझे बिल्कुल भी अकेलापन महसूस नहीं हुआ। खाना बेहद स्वादिष्ट है। मैं संस्कृति की बहुत सराहना करती हूं।” ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन पर उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति को हाथ में हाथ डालकर चलते हुए देखना वास्तव में ब्रिक्स देशों के बीच एकता और विश्वास को दर्शाता है। साथ ही साउथ अफ्रीका में मुझे पता है कि राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा वास्तव में चल रहे युद्धों के बीच शांतिपूर्ण बातचीत को सक्रिय करते हैं। मुझे लगता है कि कुल मिलाकर मेरा नजरिया सकारात्मक था।” भारत-साउथ अफ्रीका संबंधों पर मेलिसा हॉलो ने कहा, “साउथ अफ्रीका और भारत का एक लंबा इतिहास है। हमें दोनों देशों के लिए फायदेमंद व्यापार को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। मुझे लगता है कि शिखर सम्मेलन के बाद सबसे अधिक संभावना है कि हम इसे होते हुए देख सकते हैं। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में चर्चा में शामिल होने पर यह दिखा कि साउथ अफ्रीका और भारत के व्यापारिक प्रतिनिधियों के बीच सहयोग को लेकर काफी उत्साह है। और अब हमें इसे अगले एक साल में हकीकत में होते देखना है।” यूरोपीय प्रेस फेडरेशन के पत्रकार मार्को अल्पेगियानी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम सेशन पर कहा, “मैं दुनिया के उस हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के लिए यहां हूं जो अभी तक ब्रिक्स में प्रतिनिधित्व नहीं करता है। यूरोप, पश्चिमी समाज के रूप में, फिलहाल प्रतिनिधित्व नहीं करता है। राजनीतिक रूप से, यह शायद ब्रिक्स के लक्ष्य से दूर है, लेकिन यूरोप के लोग निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग में बहुत रुचि रखते हैं, सांस्कृतिक, आर्थिक और मानवीय तरीके से। इसलिए मैं विशेष रूप से एक पत्रकार के रूप में यूरोपीय दर्शकों को ब्रिक्स सहयोग और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सभी के लिए समानता हासिल करने की कोशिश और उपलब्धि के बारे में रिपोर्ट करने के लिए यहां हूं। फिलहाल यह ब्रिक्स देशों के बीच है, लेकिन निश्चित रूप से जल्द ही यह एक विश्वव्यापी आंदोलन होगा। मैं रिपोर्ट करने और यूरोपीय दर्शकों को इस लक्ष्य की ओर प्रेरित करने के लिए यहां हूं।” उन्होंने कहा, “भारत हाल ही में बहुत बदल रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी इस बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं और वह अलग-अलग तरीकों और अलग-अलग संभावनाओं में वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

नेहा धूपिया ने बताया कैसे मदरहुड ने बदली उनकी जिंदगी, बताया- 90 प्रतिशत दिमाग बच्चों में ही लगा रहता है

मुंबई। अभिनेत्री नेहा धूपिया आगामी रियलिटी शो ‘रोडीज रीबर्थ’ के 20वें एडिशन में एक गैंग लीडर के तौर पर नजर आएंगी। अभिनेत्री ने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जीवन में किस तरह के बदलाव आए हैं। उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि प्रोफेशनल लाइफ में हार-जीत से उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बच्चों की तबीयत बिगड़ने से वह घबरा जाती हैं। अभिनेत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि कॉन्फिडेंश कंफर्ट से आता है फिर चाहे वह कपड़े पहनना हो या बात करना। मैं न उन विषयों पर बात नहीं करना चाहती, जिनमें कंफर्टेबल नहीं हूं और न ऐसे कपड़े पहनना चुनती हूं जिनमें मैं असहज महसूस करूं।” नेहा धूपिया ने बताया कि मदरहुड ने उनके कॉन्फिडेंस को कैसे बदला है। उन्होंने कहा, “जब आप घबराहट की बात करते हैं, तो मुझे लगता है कि मां बनने के बाद मैं बहुत घबराने लगी हूं। जब बात बच्चों की आती है, तो मेरा कॉन्फिडेंस जीरो हो जाता है। भगवान न करे ऐसा हो, लेकिन कभी-कभी जब मेरे बच्चों को बुखार आता है या उनकी तबीयत खराब होती है, तो मैं बहुत ज्यादा घबरा जाती हूं।” नेहा धूपिया ने बताया कि वे अपने पति की शुक्रगुजार हैं, जो उनकी गैरमौजूदगी में बच्चों का ख्याल रखते हैं। उन्होंने कहा, “भगवान का शुक्र है कि मेरी शादी ऐसे इंसान से हुई है, क्योंकि जब बच्चा बीमार होता है तो उसे बच्चे के साथ-साथ मुझे भी संभालना पड़ता है। मैं बहुत नर्वस हो जाती हूं।” नेहा ने आगे कहा, “अजीब बात है कि इतने सालों में कोई भी चीज मुझे नर्वस नहीं कर पाई। मैं जीतने-हारने से नहीं डरती, सही या गलत साबित करने से नहीं डरती, किसी के सही-गलत कहने से भी नहीं डरती। इस तरह की चीजों ने मुझे कभी परेशान नहीं किया, क्योंकि मैं बस यही सोचती हूं कि पल में जियो, जिंदगी बहुत छोटी है, इसके बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन बच्चों की बात आते ही मेरा सारा कॉन्फिडेंस खत्म हो जाता है। मैं बस यही सोचती रहती हूं कि मेरे बच्चे ठीक हों। अभी जब मैं इंटरव्यू दे रही हूं, तब भी मेरे दिमाग का 90 प्रतिशत हिस्सा बच्चों के बारे में ही सोच रहा है और सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा ही वह कॉन्फिडेंट इंसान है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

नई दिल्ली। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे। यह लगभग सात वर्षों में उनकी भारत की पहली यात्रा है। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद शी जिनपिंग का पहला भारत दौरा है और दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से जारी राजनयिक सुधार की प्रक्रिया के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन 2020 की घातक गलवान झड़पों के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना एक जरूरी शर्त है। हाल ही में बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट के दौरान पीएम मोदी और शी के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई थी। अब उम्मीद है कि दोनों नेता इस सप्ताहांत नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट के दौरान विस्तृत द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। इस बीच, भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि बीजिंग और नई दिल्ली, शी और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि चीन दोनों नेताओं द्वारा दिए गए रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। ब्रिक्स समिट में शी की भागीदारी से दोनों पक्षों को भारत-चीन संबंधों की व्यापक दिशा पर चर्चा करने का मौका मिलने की उम्मीद है। ब्रिक्स समिट में समूह के बीच सहयोग को मजबूत करने और आपसी महत्व के वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान पर चर्चा होने की उम्मीद है।

एक दशक बाद केरल में लौटा पावर कट का मुद्दा, सतीशन सरकार के खिलाफ विपक्ष को मिला बड़ा हथियार

तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में करीब एक दशक तक बिजली कटौती का मुद्दा लगभग गायब रहा, लेकिन पिछले एक सप्ताह से रात के समय हो रही लंबी बिजली कटौती ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। विपक्ष ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जिससे पहली बार सरकार इस मुद्दे पर गंभीर राजनीतिक दबाव महसूस कर यही है। मई में राज्य की सत्ता संभालने वाली कांग्रेस अब तक अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले किसी बड़े विवाद से बची हुई थी, लेकिन बिजली संकट अब एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिससे सरकार और बिजली मंत्री सनी जोसेफ दोनों ही जनता की कड़ी आलोचना का सामना कर रहे हैं। टीवी चैनलों पर उपभोक्ताओं की शिकायतों की बाढ़ आ गई है। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने पिछले दस साल में इतनी बार बिजली जाते हुए नहीं देखी। जनता की इस नाराजगी ने लेफ्ट के सोशल मीडिया नेटवर्क को नया जोश दे दिया है। लेफ्ट समर्थक मीम्स, पोस्ट और पिछली एलडीएफ सरकार के साथ तुलना के जरिए बिजली कटौती को खूब उछाल रहे हैं। यह दिलचस्प है कि नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही लेफ्ट समर्थक सोशल मीडिया हैंडल सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें कोई ऐसा मुद्दा नहीं मिल रहा था जो जनता से जुड़ सके। अब बिजली कटौती ने उन्हें ठीक वही मौका दे दिया है जिसकी उन्हें तलाश थी। सतीशन सरकार और मंत्री सनी जोसेफ ने इस संकट के लिए पिछली एलडीएफ सरकार के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया है, खासकर ओमन चांडी सरकार के समय शुरू हुए एक बिजली खरीद समझौते को रद्द करने के फैसले को। हालांकि आलोचकों का कहना है कि जब पिनाराई विजयन सरकार ने अप्रैल में पद छोड़ा था, तब केरल में ऐसी कटौती नहीं हो रही थी, इसलिए संकट के समय पर सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय के समाधान की बात करते हुए सनी जोसेफ ने शनिवार को कहा कि सरकार उन घरों के लिए एक आकर्षक टैरिफ सिस्टम पर विचार कर रही है जो अपनी स्टोर की हुई बिजली केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (केएसईबी) को वापस देंगे। सरकार सोलर पावर से जुड़े कम्युनिटी बैटरी सिस्टम और अपने घर में बैटरी स्टोरेज लगाने वाले परिवारों के लिए सब्सिडी पर भी विचार कर रही है। मंत्री के मुताबिक, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग करीब 1,000 मेगावाट बढ़ गई है, जबकि कोयले की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। केरल अपनी जरूरत की केवल 25 प्रतिशत बिजली ही पैदा करता है और नए बिजली प्रोजेक्ट शुरू करने में देरी ने चुनौती को और बढ़ा दिया है। इस बहस को और राजनीतिक रंग देते हुए पूर्व बिजली मंत्री एमएम मणि ने आरोप लगाया कि सरकार बाहर से महंगी बिजली खरीदने से पहले संकट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही हो सकती है, और ऐसे सौदों में निहित स्वार्थ हो सकते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लेफ्ट का मुख्य नैरेटिव सीधा है कि अगर विजयन सत्ता में रहते तो केरल को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। सतीशन सरकार के लिए यह मुद्दा अब केवल बिजली क्षेत्र की समस्या नहीं रहा, बल्कि उनकी सरकार के सामने पहला बड़ा सियासी तूफान बन गया है, जिसका विपक्ष पूरी तरह से फायदा उठाने की कोशिश में है।

यूएस ओपन जीतने का सपना एक दिन पूरा होगा: फ्रांसिस टियाफो

न्यूयॉर्क। अमेरिका के फ्रांसिस टियाफो का यूएस ओपन जीतने का सपना एक बार फिर टूट गया। टियाफो शानदार प्रदर्शन करते हुए यूएस ओपन 2026 के सेमीफाइनल में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सेमीफाइनल में हमवतन बेन शेल्टन से हारकर टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। टियाफो का यूएस ओपन जीतने का इंतजार लंबा हो गया है, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। शेल्टन से मिली हार के बाद टियाफो ने कहा, “उम्मीद है कि वह एक दिन यूएस ओपन का खिताब जीतेंगे। मैं बस इसे जीतना चाहता हूं। यह कुछ ऐसा है जो उस बच्चे की तरह मेरी आंखों में आंसू ला देता है।” फैंस से मिले समर्थन का जिक्र करते हुए टियाफो ने कहा, “यहां मुझे जो प्यार मिलता है वह कमाल का है। मैं जो भी मैच खेलता हूं, हर कोई, सारा स्टाफ, सुरक्षाकर्मी हर कोई सच में मुझे जीतते हुए देखना चाहता है। दोस्त, परिवार, मेरी टीम, यह बहुत अच्छी ऊर्जा है।” उन्होंने कहा, “वे हर साल मुझे देखने के लिए बहुत उत्साहित रहते हैं। मुझे अच्छा लग रहा है। मुझे यहां न्यूयॉर्क में रहकर बहुत अच्छा लग रहा है। उम्मीद है कि एक दिन हम यह कर लेंगे।” टियाफो पिछले सात सीजन में से छह में फ्लशिंग मीडोज में कम से कम चौथे राउंड तक जगह बनाई है। वह 2024 में सेमीफाइनल में साथी अमेरिकी टेलर फ्रिट्ज से और 2022 के सेमीफाइनल में स्पेन के कार्लोस अल्काराज से हार गए थे। घरेलू यूएस ओपन टियाफो का सबसे सफल ग्रैंड स्लैम रहा है, क्योंकि उनके तीनों सेमीफाइनल न्यूयॉर्क में हुए हैं। वह फ्रेंच ओपन और ऑस्ट्रेलियन ओपन में क्वार्टर फाइनलिस्ट रहे हैं। यूएस ओपन 2026 का फाइनल बेन शेल्टन और अलेक्जेंडर ज्वेरेव के बीच होने वाला है। ज्वेरेव ने करेन खाचानोव को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। रविवार को होने वाले इस मुकाबले के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।

फ्रीबी कल्चर पर शिवसेना (यूबीटी) ने की ट्रंप और मोदी की राजनीति की तुलना, बोले-यह लोकतंत्र के लिए खतरा

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को चुनाव के समय मुफ्त तोहफे बांटने की बढ़ती ग्लोबल संस्कृति की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित “ट्रंप डिविडेंड” योजना और भारत में राजनीतिक पार्टियों द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं के बीच समानताएं बताईं। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे एक संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने आरोप लगाया कि अमेरिका में ट्रंप और भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बढ़ावा दिए गए “मुफ्त की चीजें बांटने के कल्चर” (फ्रीबी कल्चर) ने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया है और इंसानी गरिमा को नुकसान पहुंचाया है। संपादकीय में कहा गया है कि जहां भारत में “लाडकी बहिन” और राज्यों में इसी तरह के कल्याणकारी कार्यक्रम चल रहे हैं। वहीं, अगर रिपब्लिकन कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो हर वयस्क अमेरिकी के बैंक खाते में 5,000 डॉलर जमा करने का ट्रंप का प्रस्ताव भी चुनाव के समय लुभाने वाला कदम ही है। ठाकरे गुट के अनुसार, ट्रंप का प्रस्तावित “ट्रंप डिविडेंड” सीधे नकद ट्रांसफर के जरिए चुनावी समर्थन हासिल करने की कोशिश है। उनका तर्क है कि ऐसी योजना लागू करने से अमेरिकी खजाने पर 1 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा का बोझ पड़ेगा, जबकि देश का राष्ट्रीय कर्ज पहले ही 40 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है और सालाना राजकोषीय घाटा 1.8 ट्रिलियन डॉलर है। संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि ट्रंप की घोषणा से उनकी अपनी पार्टी में बेचैनी पैदा हो गई है और इस प्रस्ताव के वित्तीय असर और इसे लागू करने को लेकर जताई जा रही चिंताओं की खबरों का जिक्र किया गया। संपादकीय में कहा गया, “इस तरह की नकद मदद बांटने के लिए कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी। जैसे ही ट्रंप ने 5,000 डॉलर के भुगतान की घोषणा की, उनकी अपनी पार्टी के नेता और मंत्री हैरान रह गए। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने साफ तौर पर निराशा जताई और यह कहकर बात को संभालने की कोशिश की कि पैसा सिर्फ कड़ी जांच-पड़ताल और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही बांटा जाएगा, ताकि यह पक्का किया जा सके कि अमीर वयस्कों को इसका फायदा न मिले। यह उसी रणनीति को दिखाता है जिसका इस्तेमाल भारतीय सरकार करती है, पहले बड़ी-बड़ी घोषणाएं करना, फिर शर्तों और नौकरशाही की पेचीदगियों का इस्तेमाल करके उन्हें लागू करने में देरी करना।” भारत का उदाहरण देते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने पीएम मोदी के 2014 के उस वादे का जिक्र किया जिसमें हर भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रुपए जमा करने की बात कही गई थी, यह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। पार्टी ने देशभर की राज्य सरकारों द्वारा घोषित कई कल्याणकारी योजनाओं की भी आलोचना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का इस्तेमाल तेजी से चुनावी हथकंडों के तौर पर किया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि भारत में बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की परेशानी जैसे अहम मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, जबकि अमेरिका में भी ट्रंप प्रशासन घरेलू चुनौतियों से निपटने में नाकाम रहा है। यह दावा करते हुए कि “मुफ्त की चीजें देने की राजनीति” एक ग्लोबल ट्रेंड बन गई है। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकारें चुनाव जीतने के लिए जनता के पैसे से दी जाने वाली मुफ्त सुविधाओं पर अधिक निर्भर हो रही हैं। इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि ऐसी राजनीति, चाहे भारत में हो या अमेरिका में लोकतांत्रिक सिद्धांतों से समझौता करती है और जनता के प्रति जवाबदेही को कम करती है। संपादकीय में दावा किया गया, “मोदी और शाह भारत में जो कर रहे हैं, ट्रंप अमेरिका में वही दोहरा रहे हैं। जनता के पैसे का इस्तेमाल करना, मुफ्त की चीजें बांटना और चुनाव जीतना।” इसमें आगे कहा गया कि भले ही लाभार्थी अलग-अलग हों, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक सोच एक जैसी ही है।