दिल्ली में बनेगी खुद की आपदा राहत फोर्स एसडीईआरएफ, सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली। दिल्ली में किसी भी आपदा से निपटने के लिए अब अपना खुद का त्वरित और सक्षम तंत्र होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली में राज्य आपदा आपातकालीन राहत बल (एसडीईआरएफ) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सीएमओ दिल्ली ने ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि दिल्ली सचिवालय में एनडीआरएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात हुई। इस दौरान अत्याधुनिक एसडीईआरएफ टीम को लेकर जरूरी इनपुट लिए गए। सरकार का कहना है कि किसी भी आपदा की स्थिति में दिल्ली के पास अपना प्रशिक्षित, सक्षम और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र हो, इस दिशा में सरकार निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही है। साथ ही मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद चलाए गए राहत और बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने जिस तत्परता और समन्वय के साथ काम किया, उसके लिए समस्त दिल्लीवासियों की ओर से पूरी टीम का आभार भी व्यक्त किया। बता दें कि इससे पहले 8 सितंबर को भी सीएमओ दिल्ली ने सत्य निकेतन हादसे को लेकर पोस्ट किया था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर एमसीडी को हादसा स्थल से सटी जर्जर इमारत को जन सुरक्षा के हित में गिराने के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया था कि इमारत के अंदर छात्रों का सामान दिल्ली फायर सर्विस के कर्मियों द्वारा व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित निकाला जा रहा है। सभी छात्रों और स्थानीय निवासियों से अधिकारियों का सहयोग करने का अनुरोध किया गया था। उसी दिन 8 सितंबर को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एम्स जाकर सत्य निकेतन हादसे में घायल छात्रों से मिली थीं और उनके इलाज की स्थिति की जानकारी ली थी। सीएम रेखा गुप्ता ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा था, “एम्स जाकर सत्य निकेतन हादसे में घायल छात्रों से मिली और उनके उपचार की स्थिति की जानकारी ली। उनके परिजनों से भी बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि एम्स के चिकित्सकों द्वारा सभी घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार, दुर्घटना में घायल हुए सभी छात्रों के उपचार का पूरा खर्च वहन करेगी और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।” अब इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने अपनी खुद की आपदा राहत फोर्स बनाने की तैयारी तेज कर दी है ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

मतदाता सूची में 3 अफगान नागरिकों के नाम पर झामुमो ने केंद्र को घेरा, कहा-गृह मंत्रालय दे जवाब

रांची। झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान वोटर लिस्ट में तीन अफगान नागरिकों के नाम सामने आने के बाद सियासत तेज हो गई है। सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को कटघरे में खड़ा किया है। रांची में झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने वोटर लिस्ट में तीन अफगान नागरिकों के नाम शामिल होने के मामले पर कहा, “सबसे पहले, गृह मंत्रालय से यह पूछा जाना चाहिए कि अफगान नागरिक यहां कैसे रह रहे थे, किसकी इजाजत से रह रहे थे और क्या उनके वीजा वैध थे या नहीं। इसकी जांच कौन करेगा? क्या हेमंत सोरेन इसकी जांच करेंगे? कौन देखेगा कि कोई विदेशी नागरिक कहां से आ रहा है, कहां जा रहा है, किसकी इजाजत से जा रहा है और उनकी गतिविधियों का मकसद क्या है? इन सभी चीजों पर नजर रखने के लिए एक विभाग है- गृह विभाग, जो विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता है। यह कैसे हुआ? सबसे पहले गृह मंत्रालय को यह साफ करना चाहिए कि वे लोग किसकी इजाजत से आए थे।” जेपीएससी और एएसएससी मामले को लेकर मनोज पांडे ने पूर्व की भाजपा सरकारों पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “उस समय, 2000 से 2023 के बीच जो रिपोर्टें आईं—जब बाबूलाल मरांडी और फिर अर्जुन मुंडा सत्ता में थे- उनसे यह साबित हो चुका था कि नियुक्तियां पैसे और रसूख के आधार पर की गई थीं। कितना पैसा लिया गया था? उस समय ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि 1 करोड़ रुपये लिए गए थे। आज, कम से कम हमारी राज्य एजेंसी ने इन बातों का खुलासा किया है। अब सब कुछ सामने आ रहा है। ये तथ्य सार्वजनिक हो रहे हैं और पता चल रहा है कि इसमें कौन-कौन शामिल था। उस समय राजनीतिक दखलंदाजी थी और ऊंचे पदों पर बैठे लोग इसमें शामिल थे। आज इसमें किसी राजनेता का नाम सामने नहीं आया है। किसी राजनेता ने अपने भाई या भतीजे को नियुक्त नहीं करवाया है।” गुजरात की शेल पार्टियों को मिल रहे हजारों करोड़ के चंदे पर जेएमएम प्रवक्ता ने कहा, “सिर्फ जांच से ही पता चलेगा कि वे क्या कर रहे हैं। सीबीआई क्या कर रही है? आयकर विभाग क्या कर रहा है? यह पैसा कहां से आता है? इसे किस मकसद से भेजा जाता है? इसका स्रोत क्या है? यह बात सार्वजनिक होनी चाहिए। इस पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार क्या कर रही है? चुनाव आयोग क्या कर रहा है? क्या चुनाव आयोग सिर्फ झारखंड में आदिवासियों के नाम हटाने के लिए ही आगे आएगा?” मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने के ऐलान पर उन्होंने कहा, “सनातन को मजबूत करना है तो इस तरह की कवायद करनी होगी और जो सनातन विरोधी लोग हैं उनको एक्सपोज करना होगा। जो भी राजनीतिक दल खास करके यूपी में जो सक्रिय राजनीतिक दल हैं उनको इस तरह के कार्यक्रम करने चाहिए जिससे यह चोर लोग जिन लोगों ने भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी नहीं बख्शा, उनके घर में भी चोरी कर ली, उनके चरण पादुका लेकर भाग गए, वैसे लोगों को जनता के बीच एक्सपोज करने की आवश्यकता है। इस तरह के कार्यक्रम और दलों को भी करना चाहिए।

दिल्ली की कोर्ट ने निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड कोल ब्लॉक मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को दी मंजूरी

नई दिल्ली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड कोल ब्लॉक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित और सांसद मणिक्कम टैगोर ने विरोध याचिकाओं के जरिए इस क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी थी। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने एक सितंबर को कांग्रेस नेताओं संदीप दीक्षित और मणिक्कम टैगोर की ओर से दायर विरोध याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया। साथ ही, सीबीआई की क्लोजर के खिलाफ दायर विरोध याचिका को खारिज कर दिया गया। संदीप दीक्षित ने सीबीआई की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि जांच में अवैधता के प्रमुख पहलुओं की जांच पर सीबीआई ने ध्यान नहीं दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में सीबीआई की ओर से एडिशनल लीगल एडवाइजर संजय कुमार पेश हुए। याचिकाकर्ताओं के वकील भी व्यक्तिगत रूप से और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद थे। बता दें कि सितंबर 2012 में, तत्कालीन सांसद संदीप दीक्षित और छह अन्य सांसदों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें 1993 और 2005 के बीच किए गए कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। बाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने मामले को सीबीआई को सौंप दिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रारंभिक जांच हुई और बाद में निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड और आरपीजी इंडस्ट्रीज से संबंधित मामलों सहित कई कंपनियों और आवंटनों से जुड़े एफआईआर दर्ज किए गए।

पाकिस्तान जूनियर टीम को इंग्लैंड में एंटी-इमिग्रेंट प्रोटेस्टर्स ने समझ लिया ‘शरण मांगने वाला’ ग्रुप

नई दिल्ली। इंग्लैंड के पोर्ट्समाउथ के एक होटल के बाहर एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। पाकिस्तान अंडर-19 टीम इंग्लैंड के अपने मल्टी-फॉर्मेट टूर के दौरान होटल में रुकी थी। मास्क पहने एंटी-इमिग्रेंट प्रोटेस्टर्स (आप्रवासी-विरोधी प्रदर्शनकारी) के एक ग्रुप ने टीम को ‘आश्रय की तलाश’ वाला ग्रुप समझ लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मास्क पहने प्रदर्शनकारियों का एक ग्रुप पोर्ट्समाउथ के एक फोर-स्टार होटल के बाहर इकट्ठा हो गया, जब खबर आई कि असाइलम सीकर्स (आश्रय की तलाश) के एक ग्रुप को वहां ले जाया गया है। रिफॉर्म काउंसलर जॉर्ज मैडविक, जिन्हें स्टाफ और जमा हुई भीड़ के बीच-बचाव करने के लिए होटल बुलाया गया था, ने कहा कि यह एक बहुत बुरी घटना थी। यह घटना रविवार शाम को पोर्ट्समाउथ में सैकड़ों लोगों, जिनमें से कई ने मास्क पहना हुआ था, और पुलिस के बीच झड़प के बाद हुई। इस समय फ्रांस से असाइलम सीकर्स को ले जा रही एक छोटी नाव यूके के कोस्टलाइन पर पहुंची थी। मैडविक ने कहा कि ग्रुप होटल के बाहर तब इकट्ठा हुआ जब ऐसी खबरें आईं कि होटल में करीब 40 आदमी आए थे, जो अंग्रेज नहीं लग रहे थे, और उन्हें ले जाने वाली कोच उसी कंपनी की थी, जो नाव से आए शरणार्थियों को ले गई थी। यह बहुत बुरी घटना तब काबू में आई जब मैडविक ने होटल मैनेजर से बात की, जिन्होंने बताया कि होटल पाकिस्तान की एक अंडर-21 क्रिकेट टीम के सदस्यों की मेजबानी कर रहा था, जो साउथ कोस्ट का टूर कर रही थी और मैरियट को अपने बेस के तौर पर इस्तेमाल कर रही थी। रिपोर्ट में मैडविक के हवाले से कहा गया, “मैंने टीम के कोच से भी बात की, जो बहुत समझदार थे। मैं विरोध करने वालों के पास गया और उनसे कहा, ‘तुम गलत समझ रहे हो दोस्तों, यह एक क्रिकेट क्लब है।’ वे कुछ ही मिनटों में चले गए।” इस घटना के बाद से, इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने टूर करने वाले ग्रुप के बारे में जानने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से संपर्क साधा है। टीम के बाकी टूर के सुरक्षा इंतजाम की समीक्षा की जा रही है।

एनसीडब्ल्यू वर्कशॉप में हिंदी थोपने का आरोप, सीएम सतीशन ने कहा-यह निंदनीय

नई दिल्ली। हरियाणा के फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की तरफ से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप में भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केरल से आई महिला विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हिंदी के इस्तेमाल और अनुवाद की सुविधा न होने के विरोध में वर्कशॉप से वॉकआउट कर दिया था। इस घटना पर केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गुरुवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि एनसीडब्ल्यू वर्कशॉप में केरल की महिला विधायकों के साथ किया गया व्यवहार बेहद निंदनीय है। सीएम सतीशन ने लिखा, “राष्ट्रीय सम्मेलन में हिंदी थोपना और गैर-हिंदी भाषी राज्यों के प्रतिनिधियों को डराना हमारे संवैधानिक समझौते की जड़ पर हमला है। हमारे संस्थापकों ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जिसकी ताकत एकरूपता से नहीं, बल्कि विविधता की एकता से आएगी। एक ऐसा संघ जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और पहचान राष्ट्रीय ताने-बाने को कमजोर नहीं, बल्कि समृद्ध करती हैं।” उन्होंने कहा कि भारत विविध भाषाई परंपराओं का संघ है, न कि एक एकल इकाई। आपसी सम्मान, समायोजन और संवैधानिक समानता, न कि भाषाई थोपना, हमारे राष्ट्रीय मंचों को परिभाषित करना चाहिए। हमारी विविधता भारतीय एकता के लिए चुनौती नहीं है बल्कि यही इसकी नींव है। इससे पहले 8 सितंबर को कांग्रेस ने भी एनसीडब्ल्यू को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने केरल सरकार के मंत्री बिंदु कृष्णा का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि हमें 73वें और 74वें संशोधन के जरिए स्थानीय निकायों में आरक्षण मिला। अब हम राज्य विधानसभाओं और संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं। कानून पास हो चुका है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ है। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने क्या हस्तक्षेप किया है? कांग्रेस ने कहा था कि राष्ट्रीय महिला आयोग भाजपा का प्रॉक्सी नहीं है। इसे पूरे भारत में महिलाओं के उत्थान के लिए खड़ा होना चाहिए। बिंदु कृष्णा केरल सरकार में महिला एवं बाल विकास, पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री हैं।

गृह मंत्री के रूप में गोविंद बल्लभ पंत ने भाषाई संघर्ष का समाधान कर हिंदी को दिलाया सम्मान : सीएम योगी

लखनऊ। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देश के पूर्व गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास में योगदान का उल्लेख करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन किया। सीएम योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत जी की पावन जयंती है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से वह पंत जी की स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत महान अधिवक्ता होने के साथ-साथ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वर्ष 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के खिलाफ जो अभियोग दर्ज किया था, उसके खिलाफ क्रांतिकारियों की पैरवी मजबूती के साथ करने वाले महान नेताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत प्रमुख थे। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1937 में पंत जी को यूपी के प्रीमियर के रूप में चुना गया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने पद से इस्तीफा देकर स्वाधीनता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी। भारत छोड़ो आंदोलन समेत समय-समय पर हुए स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न बड़े आंदोलनों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे में इतने बड़े राज्य की व्यवस्था को सुशासन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने के साथ ही आर्थिक उन्नयन और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए उन्होंने काम किया। पंत जी ने अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके द्वारा प्रस्तुत लैंड रिफॉर्म मॉडल भी महत्वपूर्ण रहा। सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1954 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश के गृह मंत्री बने। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश के भीतर चल रहे भाषाई संघर्ष और समाज में नए विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का सूझ-बूझ के साथ समाधान निकाला। हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एआई बैंकिंग सेक्टर की बढ़ा सकता है दक्षता, एआई एजेंट्स के लिए स्पष्ट ढांचा बनाना आवश्यक :एसबीआई चेयरमैन

मुंबई। एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बैंकों को हजारों ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। हालांकि, जैसे-जैसे यह तकनीक सिफारिशें देने से आगे बढ़कर फैसलों को लागू करने की दिशा में बढ़ रही है, वित्तीय संस्थानों को एआई एजेंट्स के लिए स्पष्ट ढांचा तैयार करना होगा। यह बयान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने गुरुवार को दिया। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बोलते हुए शेट्टी ने कहा कि बैंक एआई अपनाने के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं। वित्तीय सेवाओं में एआई एजेंट्स की तैनाती एक बड़ा अवसर प्रदान करती है। शेट्टी ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हमेशा मानव संसाधनों की क्षमता बढ़ाने का काम करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई को लागू करने की शुरुआती स्थिर लागत अधिक हो सकती है, लेकिन इसके बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के साथ अतिरिक्त लागत कम हो सकती है, जिससे बैंकों के लिए आर्थिक दक्षता बढ़ सकती है। शेट्टी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रणनीतिक क्षमताएं विकसित करने के लिए बुनियादी एआई मॉडल तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई बैंकों को बड़े पैमाने पर ग्राहकों के लिए अधिक व्यक्तिगत सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम बना सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि बैंक इस तकनीक को एक ऐसे बाजार में अपना रहे हैं, जो काफी विविध और जटिल है। इससे वित्तीय संस्थानों के सामने कई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। शेट्टी ने कहा कि बैंक पिछले कई वर्षों से मशीन लर्निंग (एमएल) मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अगला बड़ा अवसर वित्तीय सेवाओं में एआई एजेंट्स की तैनाती में है। उन्होंने कहा कि एसबीआई बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को शुरुआती दौर में अपनाने वाले संस्थानों में रहा है। बैंक पहले से ही क्रेडिट आकलन और कैश फ्लो आधारित ऋण देने के लिए पारंपरिक एआई आधारित तरीकों का इस्तेमाल करता है। शेट्टी ने तकनीक को अपनाने में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सफलतापूर्वक भरोसे में बदला और फिर उस भरोसे को बड़े पैमाने पर विस्तार में बदला है।” उनके अनुसार, जैसे-जैसे एजेंटिक एआई बैंकिंग का अधिक अभिन्न हिस्सा बनता जाएगा, वित्तीय संस्थानों को एआई एजेंट्स की पहचान और प्रमाणीकरण, ग्राहकों की सहमति तथा लेनदेन की सीमाओं को नियंत्रित करने वाले स्पष्ट नियम बनाने होंगे। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई सिस्टम केवल सिफारिशें देने से आगे बढ़कर फैसलों को लागू करना शुरू करेंगे, जवाबदेही का महत्व भी लगातार बढ़ता जाएगा।

गरबा में धर्म के आधार पर रोक गलत, भाईचारा मजबूत करने की जरूरत : रामदास आठवले

मुंबई। नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की गाइडलाइंस और मुस्लिमों की एंट्री को लेकर शुरू हुए विवाद पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान ने सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने त्योहार मनाने का अधिकार दिया है। रामदास आठवले ने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे देश में बाबासाहेब अंबेडकर का दिया संविधान सभी धर्मों के लोगों को अपना त्योहार मनाने का हक देता है। एक धर्म के लोगों को दूसरे धर्म का सम्मान करना चाहिए और एक-दूसरे के कार्यक्रमों में भी शामिल होना चाहिए। जैसे अजमेर दरगाह जो मुस्लिमों का तीर्थ स्थल है, वहां कई हिंदू भी जाते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे विवादित मुद्दे नहीं उठाने चाहिए। भाईचारा मजबूत करने की जरूरत है।” महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने गरबा आयोजनों में आडी चेक और मुस्लिमों की एंट्री पर टिप्पणी की थी। इस पर रामदास आठवले ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से आईडी चेक हो सकता है लेकिन धर्म के आधार पर रोक लगाना गलत है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा, “आईडी चेक की बात है तो अगर कोई अपराधी है या सुरक्षा का मामला है तो पुलिस या संबंधित अधिकारी पहचान की जांच कर सकते हैं। हालांकि सिर्फ धर्म के आधार पर किसी को रोकना गलत है बल्कि अच्छी बात है अगर मुस्लिम गरबा में शामिल होते हैं, हिंदू ईद मनाते हैं या दोनों बुद्ध जयंती पर साथ आते हैं।” बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने कहा था कि गरबा एक सर्वसमावेशी उत्सव है और अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति शांतिपूर्वक इसमें शामिल होकर आनंद लेता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा के लिए आईडी कार्ड की जांच करना अच्छी बात है लेकिन धर्म के आधार पर लोगों की जांच करना या भेदभाव करना सही नहीं है। पंजाब में गुलजार सिंह की आत्महत्या से मौत के मामले में उठे विवाद पर भी रामदास आठवले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जो कहते हैं, बोलने का हक सबको है लेकिन नशा एक गंभीर मुद्दा है, खासकर पंजाब में। यह उनके मंत्रालय के तहत आता है और उन्होंने ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ शुरू किया है। रामदास आठवले ने कहा, “जब भी मैं पंजाब जाता हूं और अधिकारियों से बात करता हूं तो साफ है कि नशे की लत का स्तर बहुत ज्यादा है। एनडीए और भारत सरकार पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए सभी प्रयास जारी रखेगी।” दरअसल, राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पोस्ट कर कहा था कि पंजाब की ‘आप’ सरकार में एक खतरनाक तबाही दिख रही है कि नाकामी पर सवाल करोगे, तो जवाब धमकी और टॉर्चर से मिलेगा। बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के संगरूर जिले में रहने वाले 50 साल के गुलजार सिंह ने जहर खा लिया था। बताया जा रहा है कि वह सरकार द्वारा ड्रग्स की समस्या रोकने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने से परेशान थे। जहर खाने के बाद उन्हें काफी दर्द हुआ लेकिन मरने से पहले उन्होंने लोगों से बात की। मरने से पहले गुलजार सिंह ने कहा था, “हरपाल सिंह चीमा भी मेरी मौत के लिए जिम्मेदार हैं।” वह पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर इशारा कर रहे थे, जिनसे उन्होंने गांव के दौरे के दौरान राज्य की ड्रग्स समस्या को लेकर सवाल किया था। गुलजार सिंह ने आरोप लगाया था कि ‘आप’ सरकार के मंत्री से सवाल करने के बाद पुलिस उन्हें अलग ले गई और माफी मांगने के लिए काफी दबाव डाला। अपने आखिरी बयान में उन्होंने कहा था, “सरपंच भी मेरी मौत के लिए जिम्मेदार है। मैंने हरपाल सिंह चीमा से ड्रग्स के बारे में सवाल किया था। मेरा बेटा ड्रग्स लेता है। मेरा घर बिक गया। मेरे पास कुछ नहीं है और आखिरकार अब मैंने जहर खा लिया है। पंजाब में कहीं भी ड्रग्स की समस्या हल नहीं हुई है।

संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार पर नगमा बोलीं, भाषा सीखना व्यक्ति की जरूरत और परिस्थिति पर करता है निर्भर

मुंबई। एक्ट्रेस नगमा ने एक्टर संजय दत्त के मराठी भाषा को लेकर दिए गए हालिया बयान पर अपनी राय रखी। संजय दत्त ने हाल ही में महाराष्ट्र के ठाणे में आयोजित एक दही हांडी कार्यक्रम में मराठी में बात करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई। अब नगमा ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा है कि किसी भाषा को सीखना या बोलना पूरी तरह व्यक्ति की परिस्थितियों और जरूरत पर निर्भर करता है। आईएएनएस से बात करते हुए नगमा ने कहा, ”जब हम स्कूल में थे, तब सिलेबस में एक भाषा जोड़ी गई थी। इसलिए महाराष्ट्र में रहते हुए हमें मराठी सीखनी पड़ी। हमें स्कूल में मराठी पढ़ाई जाती थी। मेरी मां भी महाराष्ट्र से हैं, इसलिए मुझे मराठी आती है। मेरे आसपास के लोगों से बातचीत के कारण भी मेरी मराठी बेहतर हुई। मेरे घर में काम करने वाली महिला भी महाराष्ट्र से थीं और हम उनसे मराठी में ही बात करते थे। मैंने एक मराठी फिल्म भी की है। मुझे नहीं लगता कि हमें अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर कुछ कहना चाहिए।” नगमा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब संजय दत्त अपने एक बयान को लेकर चर्चा में है। हाल ही में वह ठाणे में एक दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे, जिसे शिवसेना की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में संजय दत्त ने लोगों को हिंदी में संबोधित करना शुरू किया। इसी दौरान शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बोलने का अनुरोध किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजय दत्त ने इस अनुरोध पर हंसते हुए मराठी में बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ”मैंने यरवदा जेल में छह साल बिताए, लेकिन फिर भी मराठी नहीं सीख पाया।” संजय दत्त के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने इसे उनकी व्यक्तिगत पसंद से जोड़कर देखा। इसी पूरे विवाद के बीच नगमा की बात इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उनका संजय दत्त के साथ पुराना फिल्मी कनेक्शन रहा है। दोनों कलाकारों ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया है। नगमा और संजय दत्त पहली बार 1992 में आई फिल्म ‘यलगार’ में साथ नजर आए थे। फिरोज खान के निर्देशन में बनी इस एक्शन फिल्म में संजय दत्त ने विशाल सिंघल का किरदार निभाया था, जबकि नगमा उनकी पत्नी अनु सिंघल के रोल में थीं। फिल्म का गाना ‘आखिर तुम्हें आना है’ भी काफी लोकप्रिय हुआ था। इसके बाद दोनों कलाकार 2000 में आई डेविड धवन की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘चल मेरे भाई’ में भी साथ दिखाई दिए। हालांकि इस फिल्म में नगमा का स्पेशल अपीयरेंस था और उन्होंने सोनिया का किरदार निभाया था।

मिडटर्म चुनाव को ट्रंप ने बताया निर्णायक, रिपब्लिकन को बहुमत दिलाने की अपील, तय किया एजेंडा

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों को एक अहम फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव तय करेगा कि उनकी सरकार का एजेंडा आगे बढ़ेगा या सत्ता फिर से डेमोक्रेट्स के हाथ में जाएगी। उन्होंने टैक्स, स्वास्थ्य सेवा, सीमा सुरक्षा और अपराध जैसे मुद्दों पर आगे भी काम करने का वादा किया। डलास में रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के विशेष मिडटर्म सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “55 दिनों में अमेरिकी लोग हमारे इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक में वोट डालने जा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “आपका वोट तय करेगा कि हमारे देश के अगले 250 साल की शुरुआत में ही हम लड़खड़ा जाएंगे या तेजी से आगे बढ़ेंगे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे।” ट्रंप ने अमेरिकी जनता से प्रतिनिधि सभा और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के उम्‍मीदवारों को बहुमत दिलाने की अपील की। उन्होंने इस चुनाव को राष्ट्रपति पद पर अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 19 महीनों के कामकाज पर जनता के फैसले के तौर पर पेश किया। साथ ही उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी और उसके उम्मीदवारों पर तीखा हमला बोला। ट्रंप ने कहा, “इस चुनाव में फैसला बहुत आसान है। मैं आपसे कह रहा हूं कि हमें वह काम पूरा करने का मौका दें, जिसकी शुरुआत हमने राष्ट्रपति पद के इतिहास के सबसे शानदार दो वर्षों के साथ की थी। साथ मिलकर हम दो साल की वापसी को 250 साल की बढ़त में बदल देंगे।” राष्ट्रपति ने कहा कि रिपब्लिकन सांसदों ने उनकी सरकार के एजेंडे को लागू करने में मदद की है। उन्होंने अवैध प्रवास में कमी, हिंसक अपराधों में गिरावट, निजी क्षेत्र में नौकरियों की बढ़ोतरी, ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और टैक्स में कटौती को अपनी सरकार की उपलब्धियों के तौर पर गिनाया। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास अब ‘देश के इतिहास की सबसे मजबूत और सुरक्षित सीमा’ है और ‘अवैध प्रवास का स्तर अब तक दर्ज सबसे निचले स्तर पर है।’ उन्होंने टिप्स, ओवरटाइम और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े टैक्स प्रावधानों का भी जिक्र किया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि अगर डेमोक्रेट्स फिर से कांग्रेस का नियंत्रण हासिल करते हैं तो वे इन नीतियों को खत्म करने की कोशिश करेंगे। ट्रंप ने कहा, “कांग्रेस में हर एक डेमोक्रेट ने हमारे टैक्स कटौती के खिलाफ वोट किया, उन्होंने टिप्स पर टैक्स नहीं लगाने, ओवरटाइम पर टैक्स नहीं लगाने और हमारे महान वरिष्ठ नागरिकों की सोशल सिक्योरिटी पर टैक्स नहीं लगाने के खिलाफ भी वोट किया।” राष्ट्रपति ने अगली कांग्रेस के लिए अपनी सरकार के विधायी एजेंडे की भी जानकारी दी। उन्होंने अपने टैक्स कटौती को स्थायी बनाने और जिसे उन्होंने ‘ग्रेट हेल्थकेयर प्लान’ कहा, उसे आगे बढ़ाने का वादा किया। ट्रंप के बताए प्रस्ताव के तहत बड़ी बीमा कंपनियों को मिलने वाली सरकारी रकम को खत्म किया जाएगा और उसकी जगह लोगों को सीधे पैसा दिया जाएगा, ताकि वे अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बीमा खरीद सकें। ट्रंप ने सरप्राइज मेडिकल बिलिंग को खत्म करने का भी वादा किया। इसके अलावा उन्होंने अस्पतालों और बीमा कंपनियों के लिए कीमतों की जानकारी आसान भाषा में सार्वजनिक करना अनिवार्य करने और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों को लेकर हुए समझौतों को स्थायी बनाने की बात कही। उन्होंने कहा क‍ि हम बेकाबू क्रेडिट कार्ड स्वाइप फीस को कम करेंगे, जिससे एक औसत परिवार को हर साल 1,200 डॉलर की बचत होगी।” ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार कैशलेस बेल व्यवस्था खत्म करने और बड़े स्तर पर ड्रग्स बेचने वालों, मानव तस्करों तथा कानून लागू करने वाले अधिकारियों की हत्या के दोषी लोगों के लिए मौत की सजा लागू करने की दिशा में काम करेगी। तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से यह तय होगा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट का नियंत्रण किस पार्टी के हाथ में रहेगा। चुनाव के नतीजे यह भी तय करेंगे कि ट्रंप अपने कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों में कांग्रेस के जरिए अपने एजेंडे को कितनी आसानी से आगे बढ़ा पाएंगे।