भूपेन हजारिका : असम की मिट्टी से निकली वह आवाज, जिसे शोहरत तो मिली पर संघर्ष ने नहीं छोड़ा पीछा नई

दिल्ली। असम की मिट्टी से निकली एक ऐसी आवाज, जिसने न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बनाई। आवाज में मिठास थी, गीतों में समाज की चिंता थी और अंदाज में अपनी मिट्टी से जुड़ाव। यह आवाज थी महान गायक, संगीतकार, फिल्मकार और और भूपेन हजारिका की। उन्हें प्यार से ‘सुधाकंठ’ यानी अमृत जैसी आवाज वाला कलाकार कहा जाता था। भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के तिनसुकिया में हुआ था। संगीत से उनका रिश्ता बचपन में ही जुड़ गया था। उनकी मां शांतिप्रिया ने उन्हें पारंपरिक असमिया संगीत से परिचित कराया। यही संगीत आगे चलकर उनकी पहचान बना और उनकी आवाज में असम की संस्कृति, मिट्टी और आम लोगों की जिंदगी की झलक दिखाई देने लगी। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गुवाहाटी में की और बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिला। विदेश में रहने के बावजूद उनकी जड़ें अपनी मिट्टी से कभी नहीं टूटीं। उनकी रचनाओं में बार-बार आम आदमी, सामाजिक बराबरी और इंसानियत जैसे मुद्दे सामने आते रहे। भूपेन हजारिका की आवाज की गहराई और प्रभाव ने उन्हें अलग पहचान दी। ‘सुधाकंठ’ की उपाधि उन्हें असम के प्रसिद्ध कवि आनंद चंद्र बरुआ से मिली थी। यह नाम उनकी आवाज पर बिल्कुल सटीक बैठता था। उनके गीतों में सिर्फ सुर और संगीत नहीं था, बल्कि समाज की आवाज भी सुनाई देती थी। उनका संगीत गरीब, मजदूर, वंचित और आम इंसान की जिंदगी से जुड़ा था। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही। वह अपने गीतों के जरिए लोगों को सोचने और सवाल करने के लिए भी प्रेरित करते थे। उनके लिए संगीत सिर्फ कमाई का जरिया नहीं था। वह अपनी कला को समाज के प्रति जिम्मेदारी मानते थे। इसी वजह से बिना अनुमति उनके गीतों को रीमिक्स किए जाने पर भी वह नाराज होते थे। उनका मानना था कि उनके गीतों में जो सामाजिक संदेश है, उसे बदलने या कमजोर करने का अधिकार किसी को नहीं है। हालांकि, वह बेहद ही कोमल दिल वाले इंसान थे। एक बार बिहू उत्सव के दौरान एक कार्यक्रम के बाद उन्होंने एक स्थानीय ढोलकिए को मंच के नीचे सोते हुए देखा। वह कलाकार लंबे समय तक प्रस्तुति देने के बाद थककर वहीं सो गया था। भूपेन दा ने उसे देखा तो अपनी कार रुकवाई और उसे खुद घर तक पहुंचाया। उनका मानना था कि कलाकार छोटा या बड़ा नहीं होता। जो व्यक्ति कला के लिए मेहनत करता है, वह सम्मान का हकदार है। भूपेन हजारिका और महान गायिका लता मंगेशकर के बीच आपसी सम्मान का रिश्ता भी बेहद खास था। एक बार मुंबई में लता मंगेशकर के घर पहुंचने पर सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें बाहर इंतजार करना पड़ा। जब लता मंगेशकर को पता चला कि भूपेन दा बाहर हैं, तो वह खुद उनका स्वागत करने के लिए दौड़ी आईं। भूपेन हजारिका ने अपने जीवन में करीब एक हजार गीत गाए और कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। ‘रुदाली’ जैसी फिल्मों के संगीत ने उन्हें हिंदी सिनेमा में भी खास पहचान दिलाई। उन्हें पद्म भूषण, दादा साहब फाल्के पुरस्कार और बाद में मरणोपरांत भारत रत्न जैसे बड़े सम्मानों से नवाजा गया। इतनी बड़ी पहचान मिलने के बावजूद भूपेन हजारिका को दिखावे से ज्यादा सादगी पसंद थी। उन्हें भुना हुआ मक्का, लाल लौकी जैसे साधारण असमिया व्यंजन पसंद थे। यही छोटी-छोटी चीजें उन्हें अपनी मिट्टी और अपने लोगों से जोड़े रखती थीं। लेकिन उनकी जिंदगी का आखिरी दौर आसान नहीं था। गंभीर बीमारी के दौरान इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा। एक समय अस्पताल में इलाज के लिए तत्काल ढाई लाख रुपये जमा करने की जरूरत पड़ी, लेकिन उस वक्त पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया था। आखिरकार उधार लेकर इलाज का खर्च जुटाया गया। भूपेन हजारिका 2011 में इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी आवाज आज भी जिंदा है।
कोनोली-कुन्हेमैन की क्यों हुई ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में वापसी? समझिए नेसर कैसे बन सकते हैं साउथ अफ्रीका में ट्रंप

कार्ड नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम का ऐलान हो गया है। मैथ्यू कुन्हेमैन, कूपर कोनोली और माइकल नेसर की टीम में वापसी हुई है। आइए आपको बताते हैं इन तीनों खिलाड़ियों को किस आधार पर टेस्ट टीम में वापस बुलाया गया है। कूपर कोनोली : ऑस्ट्रेलिया के उभरते हुए ऑलराउंडर कूपर कोनोली ने पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। लगभग डेढ़ साल बाद कोनोली को दोबारा से टेस्ट टीम में जगह दी गई है। इसका कारण यह है कि कोनोली ने पिछले कुछ समय में अपनी बल्लेबाजी से खासा प्रभावित किया है। बांग्लादेश के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में कोनोली का प्रदर्शन दमदार रहा था। उन्होंने सीरीज के तीसरे वनडे में 149 रनों की बड़ी पारी खेलकर अपने धैर्य और संयम का परिचय दिया था। कोनोली तेजी से रन बटोरने में तो माहिर है ही लेकिन उनकी बल्लेबाजी में वो स्थिरता भी नजर आती है, जो टेस्ट फॉर्मेट में कामयाब होने के लिए एक बल्लेबाज के लिए सबसे जरूर मानी जाती है। बल्ले के साथ-साथ वह गेंद से भी अहम योगदान दे सकते हैं। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में कोनोली का बल्लेबाजी औसत 42.10 का रहा है। मैथ्यू कुन्हेमैन: साल 2023 में भारत दौरे पर आए मैथ्यू कुन्हेमैन ने अपनी गेंदबाजी से खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उस सीरीज में कुन्हेमैन ने 3 टेस्ट मैचों में 9 विकेट अपने नाम किए थे। यही नहीं, बल्कि नाथन लायन के साथ मिलकर वह भारतीय बल्लेबाजों के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हुए थे। बाएं हाथ के स्पिनर का प्रदर्शन जून में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में भी दमदार रहा था और वह घरेलू क्रिकेट में भी लगातार अपनी काबिलियत साबित करते रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने किफायती गेंदबाजी करने के साथ-साथ 3 मुकाबलों में 5 विकेट भी निकाले थे। यही वजह है कि साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए उन्हें नाथन लायन का साथ देने के लिए एक बार फिर से चुना गया है। माइकल नेसर:चोट के कारण बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज को मिस करने वाले माइकल नेसर की टीम में वापसी हुई है। एशेज सीरीज 2025-26 में नेसर ने अपनी गेंदबाजी से हर किसी को खासा प्रभावित किया था। उन्होंने महज 3 मुकाबलों में 15 विकेट अपने नाम किए थे। साउथ अफ्रीका की उछाल लेती पिचों पर नेसर काफी कारगर साबित हो सकते हैं। गेंद के साथ-साथ वह बल्ले से भी योगदान देने की काबिलियत रखते हैं। नेसर के होने से ऑस्ट्रेलियाई टीम की गेंदबाजी तो मजबूत होगी ही, इसके साथ ही टीम की बललेबाजी में गहराई भी बढ़ेगी।
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर बांग्लादेश उच्चायोग ने जताया दुख, घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत हादसे को लेकर भारत स्थित बांग्लादेश उच्चायोग ने दुख जताते हुए पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की। इस दुखद हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होनी के आशंका अभी भी जताई जा रही है। फिलहाल 11 लोगों को बचा लिया गया है। उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में दुखद घटना गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। उच्चायोग ने पोस्ट में लिखा, ”इस दुखद हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और उनके प्रियजनों के प्रति हम अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। हमारी प्रार्थनाएं और शुभकामनाएं घायल लोगों के साथ हैं। साथ ही, उन लोगों के लिए भी हैं जिनके अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। इस कठिन समय में बांग्लादेश उच्चायोग इस दुखद दुर्घटना से प्रभावित और संकट का सामना कर रहे सभी महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ एकजुटता से खड़ा है।” सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद रातभर राहत और बचाव अभियान जारी रहा। सोमवार सुबह भी दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), दिल्ली अग्निशमन सेवा और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें अभियान में जुटी हैं। मलबा उठाने का काम भी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि मलबे में अभी भी कई लोगों, जिनमें अधिकतर छात्र हैं, के फंसे होने की आशंका है और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं। बता दें कि यह हादसा रविवार दोपहर 1.30 बजे हुआ। उस समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई कि भारी बारिश भी इस घटना का कारण हो सकती है। लगभग 40-50 साल पुरानी इस इमारत में एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। इसका इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी के तौर पर किया जा रहा था, जिनमें से कई छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में पढ़ाई कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि परिसर में लगभग 40 लोगों के ठहरने के कमरे बने थे। वहीं, रविवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बहुमंजिला इमारत के ढहने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इमारत गिरने के कारणों की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया और इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रेखा गुप्ता ने घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा, “इस गंभीर घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाएगा और कानून के कड़े प्रावधानों के तहत उनसे निपटा जाएगा।
मुंह में छाले होने पर कान में क्यों होने लगता है दर्द? जानिए दोनों के बीच क्या है कनेक्शन

नई दिल्ली। मुंह में छाला होना सुनने में भले ही छोटी सी परेशानी लगे, लेकिन जब यही छाला खाने, पीने या बोलने में दर्द देने लगे तो काफी तकलीफ होती है। कई बार इस दर्द के साथ कान में भी दर्द महसूस होने लगता है। ऐसे में लोग अक्सर सोचते हैं कि शायद कान में कोई इंफेक्शन हो गया है। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार परेशानी मुंह में होती है और उसका दर्द कान तक महसूस होता है। जब छाला जीभ के पीछे, मुंह के पिछले हिस्से या गले के पास हो, तब कान में दर्द जैसा एहसास होता है। दरअसल, हमारे मुंह, गले और कान के आसपास की नसें एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। जब मुंह के किसी हिस्से में छाला, जलन या सूजन होती है तो वहां से निकलने वाला दर्द का संकेत आसपास के दूसरे हिस्सों में भी महसूस हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘रेफर्ड पेन’ कहते है। अगर छाले के साथ कान में दर्द हो रहा है तो सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि दर्द सिर्फ हल्का है और छाले के साथ ही शुरू हुआ है या कान में अलग तरह की परेशानी भी है। अगर छाला ठीक होने के साथ कान का दर्द भी कम होने लगे तो संभव है कि दोनों का संबंध हो। लेकिन अगर कान में लगातार दर्द बना हुआ है तो सिर्फ छाले को इसकी वजह मान लेना सही नहीं होगा। कान का दर्द कई दूसरी वजहों से भी हो सकता है। कान में इंफेक्शन, दांत में परेशानी, मसूड़ों की समस्या या गले में दर्द होने पर भी कान तक दर्द पहुंच सकता है। अगर कान के दर्द के साथ दांत में तेज दर्द है या निगलने पर दर्द बढ़ रहा है तो इसकी वजह मुंह या गले की कोई दूसरी समस्या भी हो सकती है। वहीं कान से पानी या पस निकलना, सुनाई कम देना, बुखार आना या कान के आसपास सूजन होना कान की समस्या की ओर इशारा कर सकता है। छाले के दौरान खाने-पीने में थोड़ी सावधानी बरतने से दर्द कम किया जा सकता है। बहुत तीखा, खट्टा, नमकीन और बहुत गर्म खाना कुछ दिनों के लिए छोड़ देना बेहतर रहता है, क्योंकि इससे छाले में जलन बढ़ सकती है। इसकी जगह नरम खाना खाएं और ठंडे या सामान्य तापमान वाले पेय लें। मुलायम ब्रश से दांत साफ करें। घर पर राहत के लिए गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डालकर कुल्ला करें। एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक डालें, उससे मुंह अच्छी तरह घुमाकर कुल्ला करें और बाहर निकाल दें। इससे छाले की वजह से होने वाली परेशानी में कुछ राहत मिल सकती है। बार-बार छाले होने की वजह भी सिर्फ मसालेदार खाना नहीं होती। तनाव, शरीर में कुछ विटामिन और दूसरे पोषक तत्वों की कमी भी बार-बार होने वाले छालों से जुड़ी हो सकते है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को बार-बार छाले होते हैं तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से इसकी वजह जानना बेहतर है।
तनाव और पीठ दर्द से पाना है छुटकारा? जीवनशैली में शामिल करें मकरासन

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ते तनाव, पीठ दर्द और सांस से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में योग एक बेहतरीन माध्यम है। भारतीय संस्कृति की इस प्राचीन विधा में ‘मकरासन’ का खास महत्व है। यह आसन थकान मिटाने और शरीर को पूरी तरह आराम देने के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। ‘मकर’ शब्द का संस्कृत में अर्थ ‘मगरमच्छ’ होता है। इस आसन में शरीर की स्थिति पानी में विश्राम कर रहे मगरमच्छ के समान प्रतीत होती है, इसलिए इसे ‘मकरासन’ कहा जाता है। यह आसन तनाव को दूर कर पाचन को बेहतर बनाता है और अस्थमा, ग्रीवा संबंधी तकलीफ और साइटिका के दर्द से भी राहत देता है। हठयोग की परंपरा में ‘मकरासन’ को एक अत्यंत प्रभावी आसन माना गया है, जहां योग के अधिकांश आसन शरीर में शक्ति, लचीलेपन और संतुलन का निर्माण करते हैं, वहीं मकरासन शरीर और मन दोनों को गहरे विश्राम की स्थिति में ले जाने का कार्य करता है। इस आसन को नियमित रूप से करना रीढ़ की हड्डी के लिए बेहद लाभकारी होता है। यह रीढ़ की हड्डी की संरचना को संतुलित बनाए रखने में मदद करता और उसमें लचीलापन बढ़ाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो पीठ दर्द, स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, मकरासन मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में सहायक होता है। इस आसन के अभ्यास से मस्तिष्क को शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, मकरासन पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है। इस आसन को करते समय शरीर पेट के बल जमीन पर लेटा होता है, जिससे पेट पर हल्का दबाव पड़ता है। यह दबाव पाचन अंगों को सक्रिय करता है। इस आसन को करते वक्त जब गहरी और धीमी सांस लेते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
माही विज ने बताया क्यों छोड़ा था ‘सहर होने को है’, बोलीं- ‘बिग बॉस के लिए नहीं लिया था फैसला’

मुंबई,। टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस माही विज इन दिनों ‘बिग बॉस 20’ को लेकर चर्चा में हैं। सलमान खान के होस्ट किए जाने वाले इस रियलिटी शो में माही की एंट्री ने उनके फैंस को काफी उत्साहित किया है। शो में आने के बाद जहां दर्शक उनके अलग-अलग अंदाज को देखने के लिए उत्सुक हैं, वहीं उनके पिछले शो ‘सहर होने को है’ से बाहर होने को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आ रही थीं। ऐसी चर्चा थी कि माही ने ‘बिग बॉस’ का हिस्सा बनने के लिए अपना पिछला शो छोड़ा है। अब एक्ट्रेस ने खुद इस बात पर चुप्पी तोड़ी है और बताया कि दोनों फैसलों का आपस में कोई लेना-देना नहीं है। आईएएनएस से बातचीत में माही विज ने कहा, ”मैं ‘सहर होने को है’ को जनवरी में ही छोड़ने का फैसला ले चुकी थीं। हालांकि, शो छोड़ने की प्रक्रिया में काफी समय लग गया। मेरा बाहर निकलना अचानक लिया गया फैसला नहीं था। शो के क्रिएटिव्स भी मुझे इतनी जल्दी छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। इसलिए शो से अलग होने में मुझे समय लगा।” माही ने कहा, ”सच कहूं तो मैं खुद भी उस समय शो छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थीं। ‘सहर होने को है’ मेरे दिल के काफी करीब था। मैं इस शो से भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई थीं और इसलिए इसे छोड़ना मेरे लिए आसान नहीं था। हालांकि, मैंने ‘बिग बॉस’ में एंट्री लेने के लिए अपना पिछला शो नहीं छोड़ा है। ‘बिग बॉस’ का ऑफर मुझे काफी बाद में मिला था।” माही ने कहा, ”मैंने बहुत पहले ही शो छोड़ दिया था और ‘बिग बॉस’ का ऑफर मुझे बाद में आया। ऐसे में पुराने शो से बाहर होने और नए रियलिटी शो में आने के बीच सीधा संबंध जोड़ना सही नहीं है। मैं पहले ही अपना फैसला ले चुकी थीं और ‘बिग बॉस’ का फैसला बाद में आया।” ‘बिग बॉस 20’ का हिस्सा बनने को लेकर भी माही काफी उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा, ”जिंदगी में समय-समय पर कुछ नया आजमाते रहना चाहिए। ‘बिग बॉस’ शो को देखना मुझे काफी पसंद हैं, लेकिन खुद इसमें आने को लेकर पहले कभी इतनी सीरियस नहीं थीं। इस बार मुझे खुद समझ नहीं आया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मैंने शो का हिस्सा बनने के लिए हां कह दी।” माही ने कहा, ”हर काम का एक सही समय होता है और शायद मेरे लिए ‘बिग बॉस’ करने का समय अब आया है। यही वजह है कि इस बार मैंने इस मौके को स्वीकार कर लिया। अब मैं यह देखने के लिए भी उत्साहित हूं कि घर के अंदर मेरा सफर किस तरह आगे बढ़ता है।” उन्होंने कहा, ”’बिग बॉस’ के घर में परिस्थितियां बदलती रहती हैं। अभी मैं नहीं जानती कि घर के अंदर मेरे व्यवहार का कौन सा रूप सामने आएगा। ऐसे में दर्शकों को मेरा एक ऐसा अंदाज भी देखने को मिल सकता है, जिसे उन्होंने पहले नहीं देखा होगा।
तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल, विदेश मंत्री जयशंकर से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली। लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल का सोमवार सुबह नई दिल्ली पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। उप प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल की यह आधिकारिक यात्रा तीन दिवसीय रहने वाली है। यात्रा के पहले ही दिन, सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में उप प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की वार्ता होगी। यह वार्ता दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के आगमन की जानकारी साझा की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, ”लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल का नई दिल्ली पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। उनकी यह आधिकारिक भारत यात्रा भारत और लक्जमबर्ग के बीच विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद रिश्तों को और मजबूत बनाने का एक अच्छा अवसर प्रदान करती है।” विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, उप प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल मंगलवार को चेन्नई जाएंगे, जहां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास कैंपस का दौरा करेंगे। विदेश मंत्री जयशंकर की जनवरी में लक्जमबर्ग की आधिकारिक यात्रा के दौरान, बेटेल ने भारत के साथ संबंधों को गहरा करने का आह्वान किया था और लक्जमबर्ग के तकनीकी, डिजिटल और वित्तीय क्षेत्रों के विकास में भारतीय समुदाय द्वारा निभाई गई भूमिका पर प्रकाश डाला था। इस दौरान बेटेल ने विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक के दौरान अपने शुरुआती संबोधन में कहा था, “मैं डॉ. जयशंकर का लक्जमबर्ग में स्वागत करना चाहता हूं और मैं बस यही कहना चाहता था कि मुझे ऐसे लोग पसंद हैं जो कुछ कहते हैं और उसे करते भी हैं। आपने पिछले साल जब हम दिल्ली में मिले थे, तब मुझसे कहा था कि आप लक्जमबर्ग आएंगे और आप यहां हैं।” उन्होंने कहा कि मैं इसकी बहुत सराहना करता हूं। हमारे लिए दोनों देशों के बीच संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है। आपको पता होना चाहिए कि भारतीय मूल के लोगों का लक्जमबर्ग में 10वां सबसे बड़ा समुदाय है। बेटेल ने विश्वास जताया कि विदेश मंत्री जयशंकर के साथ उनकी चर्चा के बाद भारत और लक्जमबर्ग के बीच संबंध और गहरे होंगे।
जस्टिस मिश्रा ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर ली शपथ, समारोह से शामिल नहीं हुए सीएम मान

चंडीगढ़। जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच बढ़ते टकराव के कारण पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस समारोह में शामिल नहीं हुए। पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने एक औपचारिक समारोह में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को शपथ दिलाई। इस समारोह में हाईकोर्ट के जज, सीनियर अधिकारी और विधि क्षेत्र के सदस्य शामिल हुए। इनके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और गवर्नर प्रो. असीम कुमार घोष भी मौजूद रहे। हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री और उनकी पूरी कैबिनेट का समारोह में शामिल न होना चर्चा का विषय बना रहा। ऐसा इसलिए क्योंकि कैबिनेट ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए एक प्रस्ताव पास किया था और शपथ ग्रहण समारोह को रोकने की मांग की थी। पंजाब सरकार का कहना है कि केंद्र ने राज्य की राय का इंतजार किए बिना ही नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। पंजाब सरकार ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गवर्नर से नियुक्ति और शपथ ग्रहण समारोह को टालने का आग्रह किया था। आरोप था कि राज्य सरकार से सलाह-मशविरा करने की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति ‘प्रक्रिया के ज्ञापन’ और जजों की नियुक्ति के संवैधानिक तरीके से होती है और इसके लिए राज्य सरकार की सहमति जरूरी नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (जो उस समय कॉलेजियम के प्रमुख थे) की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति की सिफारिश की थी। जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति से एक अजीब राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि पंजाब सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के तरीके पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। नियुक्ति के खिलाफ कैबिनेट के प्रस्ताव के बाद मुख्यमंत्री मान ने शपथ ग्रहण समारोह से दूर रहने का फैसला किया। मौजूदा चीफ जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट होने के बाद जस्टिस मिश्रा 2 जून से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे थे। उन्हें जुलाई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था। इस घटना ने आप की सरकार और भाजपा की केंद्र सरकार के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों में एक नया मोड़ ला दिया है। 16 नवंबर 1968 को जन्मे जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बीए (ऑनर्स) किया। इसके अलावा, दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्हें 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त किया गया और 1 फरवरी 2016 को वे परमानेंट जज बने। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में ट्रांसफर होने से पहले उन्होंने 20 जुलाई 2025 तक वहां अपनी सेवाएं दीं।
कावेरी डेल्टा की सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध से पानी का प्रवाह बढ़कर 12,000 क्यूसेक हुआ

सलेम (तमिलनाडु)। कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई की मांग बढ़ने के कारण सोमवार सुबह मेटूर बांध से पानी का निर्वहन बढ़ाकर 12,000 घन फीट प्रति सेकंड कर दिया गया। अधिकारियों ने सोमवार सुबह 6 बजे से पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ा दी, जो सांबा की खेती के लिए 1 सितंबर को जलाशय से पानी खोले जाने के बाद से पानी में की गई वृद्धि की श्रृंखला में नवीनतम कदम है। इस निर्णय से उन कृषि क्षेत्रों में आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद है जहां किसान खेतों को तैयार कर रहे हैं और प्रारंभिक चरण की खेती कर रहे हैं। महीने की शुरुआत में जब बांध खोला गया, तो शुरू में 3,000 क्यूसेक की दर से पानी छोड़ा गया। कुछ ही घंटों में जल प्रवाह को बढ़ाकर 7,000 क्यूसेक कर दिया गया और लगातार छह दिनों तक इसी स्तर पर बनाए रखा गया। कावेरी डेल्टा में सिंचाई की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए, अधिकारियों ने रविवार शाम 6 बजे पानी का बहाव बढ़ाकर 10,000 क्यूसेक कर दिया। सोमवार सुबह इसमें एक और संशोधन किया गया, जिससे रिलीज की मात्रा बढ़कर 12,000 क्यूसेक हो गई। रविवार शाम को दर्ज आंकड़ों के अनुसार, मेटूर जलाशय में जलस्तर 92.39 फीट था। बांध में पानी का प्रवाह 9,709 क्यूसेक मापा गया, जबकि उपलब्ध भंडारण लगभग 55.35 हजार मिलियन घन फीट (टीएमसी) था। पानी की बढ़ी हुई निकासी का उद्देश्य डेल्टा जिलों तक अधिक पानी पहुंचाना है, जहां सांबा धान की फसल के लिए भरोसेमंद सिंचाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्षेत्र के किसान आशावान हैं कि अधिक पानी छोड़े जाने से उनकी तत्काल पानी की आवश्यकता पूरी हो जाएगी और खेती बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेगी। यह ताजा वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब अधिकारी जलाशय में पानी के प्रवाह और शेष भंडारण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में 12,000 क्यूसेक का बहिर्वाह, 9,709 क्यूसेक के दर्ज किए गए अंतर्वाह से अधिक है, जिससे भविष्य में पानी छोड़ने के संबंध में निर्णय लेते समय अंतर्वाह एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है। आगे की व्यवस्था करने से पहले अधिकारी जलाशय के जलस्तर, जल प्रवाह, भंडारण और सिंचाई की मांग पर नजर रखेंगे। फिलहाल, बढ़ी हुई जल आपूर्ति से डेल्टा क्षेत्र के उन किसानों को राहत मिली है जो सांबा की खेती के लिए कावेरी नदी के पानी पर निर्भर हैं।
झारखंड के खूंटी में आठ माह की गर्भवती युवती की हत्या, आरोपी प्रेमी गिरफ्तार

खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले के मुरहू थाना क्षेत्र में आठ माह की गर्भवती 19 वर्षीय युवती की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने हत्या के आरोप में उसके कथित प्रेमी 20 वर्षीय सागर ओड़ेया को गिरफ्तार किया है और उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेजने की तैयारी चल रही है। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम के दौरान युवती के गर्भ से मृत शिशु भी मिला। इसके बाद पुलिस ने मामले में दोहरे हत्याकांड के पहलू से जांच शुरू की है। मृतका अड़की थाना क्षेत्र की रहने वाली थी और सागर ओड़ेया के साथ करीब दो वर्षों से उसके संबंध थे। पुलिस के अनुसार, युवती के गर्भवती होने के बाद वह सागर पर उसे और होने वाले बच्चे को स्वीकार करने का दबाव बना रही थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब दो महीने पहले सागर ने कथित तौर पर दूसरी युवती को अपने घर में रखना शुरू किया था। इसके बाद पहली युवती और सागर के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस के मुताबिक, युवती अपने और अजन्मे बच्चे के भविष्य को लेकर सागर से लगातार बातचीत कर रही थी। वह 2 सितंबर को सागर के घर पहुंची थी। इसके बाद 4 सितंबर से उसका कोई पता नहीं चला। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान रविवार को पंगुरा गांव के जंगल में उसका शव मिला। शव मिलने की सूचना पर डीएसपी मंगल सिंह जामुदा और मुरहू थाना प्रभारी गॉडविन केरकेट्टा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के दौरान गर्भ में मृत शिशु मिलने की जानकारी सामने आई। मुरहू थाना पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सागर ओड़ेया ने युवती की हत्या की बात स्वीकार की है। पुलिस का दावा है कि आरोपी युवती को बहाने से जंगल की ओर ले गया, जहां विवाद के बाद उसकी हत्या कर दी। पुलिस घटना के कारणों, घटनास्थल और हत्या में इस्तेमाल तरीके समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।