तमिलनाडु के गुडलूर में बाघ को पकड़ने के लिए अभियान शुरू, मवेशियों पर कर रहा था हमला

गुडलूर। तमिलनाडु वन विभाग ने एक बाघ को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया है, जो लगातार रिहायशी और खेती वाले इलाकों में घुस रहा है। यह बाघ नीलगिरी जिले के गुडलूर वन रेंज में नंबलाकोट्टई के पास विमलागिरी इलाके में देखा जा रहा है। बाघ की निगरानी के लिए दो पिंजरे रणनीतिक जगहों पर लगाए गए हैं जबकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 25 कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। बाघ और स्थानीय लोगों के बीच टकराव को रोकने के लिए अतिरिक्त वनकर्मियों को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि विमलागिरी में घूम रहा यह बाघ वह संदिग्ध आदमखोर नहीं है, जिस पर ओ-वैली वन रेंज के लॉरिस्टन में दो लोगों की मौत का शक है। मुख्य वन्यजीव वार्डन राकेश कुमार डोगरा ने दोनों जानवरों को पकड़ने की अलग-अलग अनुमति दी है। बताया जा रहा है कि विमलागिरी का बाघ दिन के समय भी आबादी वाले इलाकों में घुस रहा है। इसने मक्कामूला, अंबालाकाडु और विमलागिरी में मवेशियों को मार डाला है, जिससे स्थानीय लोगों में काफी दहशत है। बाघ को एक प्राइमरी स्कूल के पास भी देखे जाने की खबर है। स्थानीय लोगों ने पिछले एक हफ्ते में बस्तियों में आए बाघ की तस्वीरें शेयर की हैं और तुरंत कार्रवाई की मांग की है। वन अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मवेशियों को चरने के लिए अकेला न छोड़ें। उन्हें कहा गया है कि जानवरों को सुरक्षित शेड के अंदर रखें, खासकर उस समय जब बाघ के इलाके में घूमने की आशंका हो। गुडलूर के मंडल वन अधिकारी पी. देवराज ने कहा कि विभाग ने बिना देरी किए पकड़ने का अभियान शुरू करने का फैसला किया क्योंकि विमलागिरी में जंगल का क्षेत्र कम है। यहां ज्यादातर रिहायशी इलाके, खेती की जमीन और कॉफी-चाय के छोटे-छोटे बागान हैं, जिससे लोगों से अक्सर सामना होने की संभावना बढ़ जाती है। पशु चिकित्सक बाघ को बेहोश कर सकते हैं, अगर उसकी लोकेशन और मौजूदा हालात उन्हें सुरक्षित रूप से ऐसा करने की अनुमति देते हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस बात की भी पूरी संभावना है कि यह जानवर मुदुमलाई टाइगर रिजर्व की ओर जा सकता है, जो हवाई दूरी से पांच किलोमीटर से भी कम दूर है। इस बीच, ओ-वैली में संदिग्ध आदमखोर की तलाश कर रहे वनकर्मियों को स्थानीय लोगों से बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली थी, लेकिन वे यह तय नहीं कर पाए कि यह वही जानवर है जो घातक हमलों में शामिल था। पी. देवराज ने बताया कि अधिकारियों को चट्टानों के बीच गायब होने से पहले बाघ की केवल आंशिक झलक ही मिली। दोनों जगहों विमलागिरी और ओ-वैली में निगरानी अभियान जारी है और टीमें स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए दोनों जानवरों की पहचान कर उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही हैं।
पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेस-3 में युवक की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या

नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मयूर विहार फेस-3 इलाके में रविवार सुबह करीब 5:00 बजे अज्ञात लोगों ने लाठी और डंडों से पीटकर एक युवक की हत्या कर दी। इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल का मुआयना कर रहे हैं। हालांकि, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया है और आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदा लोगों की सूचियों से इसका मिलान किया जा रहा है। गार्ड नंदलाल ने बताया कि वह सुबह करीब 4:00 बजे जब अपने बाथरूम से वापस लौट रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि कुछ युवक एक व्यक्ति को बेरहमी से पीट रहे थे। नंदलाल ने जब हिम्मत जुटाकर उन हमलावरों को भगाने और बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन पर भी हमला करने का प्रयास किया। हमलावरों ने गार्ड को धमकाते हुए कहा कि चुपचाप यहां से भाग जाओ, वरना तुम्हें भी जान से मार देंगे। जान बचाने के डर से गार्ड तुरंत वहां से हटा और बिना देर किए पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे। पुलिस अब आरोपियों की धरपकड़ के लिए इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को खंगाल रही है। घटनास्थल के आसपास और भागने वाले संभावित रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को पुलिस द्वारा बारीकी से खंगाला जा रहा है, ताकि हमलावरों के चेहरों की पहचान की जा सके और उनके भागने की दिशा का पता चल सके। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच आपसी रंजिश, लूटपाट या किसी अन्य विवाद की ओर इशारा कर रही है, लेकिन असली वजह आरोपियों के पकड़े जाने के बाद ही साफ हो पाएगी। पुलिस आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है ताकि मृतक की शिनाख्त जल्द से जल्द की जा सके।

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने करीबी सहयोगी और राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन से व्यथित हैं। उन्होंने सोनू के निधन को अपने लिए व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि उनके जाने से जीवन में ऐसी रिक्तता पैदा हो गई है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री ने भावुक संदेश में कहा, “देर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुखद समाचार मिला। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है।” हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू उनके लिए सिर्फ वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे। वह उनके लिए बड़े भाई की तरह थे। स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि सोनू के साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा उनके साथ रहेगी। मुख्यमंत्री ने सुदिव्य सोनू के साथ अपने पुराने राजनीतिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन के दौर से ही वह स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि झारखंडियत के प्रति सुदिव्य सोनू का समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी। सुदिव्य सोनू के आकस्मिक निधन ने मुख्यमंत्री को जीवन की क्षणभंगुरता पर भी सोचने को मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा, “कल तक जो आवाज हमारे बीच थी, आज वह सिर्फ स्मृतियों में रह गई है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य सोनू का जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है और उनकी कमी हमेशा महसूस होगी। उन्होंने कहा कि सोनू का स्नेह, उनका संघर्ष और झारखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जीवनभर उनके साथ रहेगी। अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने बेहद भावुक होते हुए कहा, “सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के लिए आपकी प्रतिबद्धता को मैं जीवनभर अपने साथ लेकर चलूंगा। आप हमेशा याद आएंगे भैया।
पुतिन और अमेरिकी प्रतिनिधियों की अहम बैठक, संघर्ष के मूल कारणों को खत्म करने पर हुई चर्चा

मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर के साथ मॉस्को में गहन, रचनात्मक और खुली बातचीत की। क्रेमलिन के सलाहकार यूरी उशाकोव ने रविवार तड़के यह जानकारी दी। उशाकोव ने बताया कि बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कार्य-स्तरीय बैठक के दौरान हुई और बाद में रात्रि भोज के समय अनौपचारिक बातचीत भी हुई। पुतिन ने एक बार फिर दोहराया कि रूस, यूक्रेन से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम जारी रखने को तैयार है। उशाकोव के अनुसार, रूसी पक्ष ने विशेष सैन्य अभियान के दौरान बन रही स्थिति का स्पष्ट और विस्तृत आकलन अमेरिकी प्रतिनिधियों के सामने रखा। उन्होंने कहा, “खासतौर पर युद्ध क्षेत्र में रूसी सेना की वास्तविक प्रगति का जिक्र किया गया। साथ ही यह भरोसा जताया गया कि निर्धारित उद्देश्यों को हासिल कर लिया जाएगा और इस बात पर जोर दिया गया कि संघर्ष के मूल कारणों को खत्म करना जरूरी है।” उशाकोव ने बताया कि बातचीत सिर्फ यूक्रेन संकट के समाधान तक सीमित नहीं रही। दोनों पक्षों ने आर्थिक मुद्दों और रूस-अमेरिका के बीच बड़े पैमाने पर संभावित आपसी लाभ वाले परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उनके मुताबिक, कुल मिलाकर यह बातचीत सही समय पर हुई और दोनों देशों के लिए काफी उपयोगी रही। यह भी तय हुआ कि दोनों देशों के राष्ट्रपति आगे भी सीधे संपर्क बनाए रखेंगे और विटकोफ तथा कुशनर के माध्यम से बातचीत जारी रहेगी। यह बैठक कुल 3 घंटे 10 मिनट तक चली। उशाकोव ने कहा कि अमेरिकी दूतों ने आश्वासन दिया है कि वे अगले दिन कीव में होने वाली अपनी बैठकों के दौरान यूक्रेन संघर्ष के स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान को लेकर राष्ट्रपति पुतिन से मिली जानकारी और उनके विचारों को वहां तक पहुंचाएंगे। इससे पहले, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शनिवार को बताया था कि अमेरिकी दूतों के साथ संपर्क की तैयारियों के दौरान पुतिन ने कीव पर हमलों को तीन दिनों के लिए रोकने का आदेश दिया है। पेसकोव ने पत्रकारों से कहा, “राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठक निश्चित रूप से होगी और बातचीत भी होगी। आम तौर पर ऐसी मुलाकातें पहले काफी लंबी चली हैं। आइए इंतजार करते हैं और देखते हैं। हम आपको इसकी जानकारी देते रहेंगे।” उन्होंने कहा कि किसी संभावित शांति प्रस्ताव के बारे में पहले से अनुमान लगाने से बचना चाहिए और पुतिन तथा अमेरिकी वार्ताकारों की बैठक के नतीजों का इंतजार करना चाहिए।
सीपीएल 2026: सुनील नरेन का चला जादू, त्रिनबागो नाइट राइडर्स ने बारबाडोस को 35 रन से हराया

बारबाडोस। कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) 2026 का 27वां मुकाबला किंग्सटन ओवल, ब्रिजटाउन में खेला गया। बारबाडोस ट्राइडेंट्स और त्रिनबागो नाइट राइडर्स के बीच खेला गया। त्रिनबागो ने 35 रन से मैच जीता। बारबाडोस ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करने उतरी त्रिनबागो नाइट राइडर्स ने 6 विकेट पर 147 रन बनाए थे। कप्तान निकोलस पूरन ने 37 गेंदों पर 7 छक्कों और 2 चौकों की मदद से 59 रन की पारी खेली। इसके अलावा, सलामी बल्लेबाज कोलिन मुनरो ने 32 गेंदों पर 38 रन बनाए। किरोन पोलार्ड ने 15 और जोशुआ डा सिल्वा ने 10 रन बनाए थे। बारबाडोस के लिए गुडाकेस मोती ने 3, मुजीब उर रहमान ने 2 और जकीम पोलार्ड ने 1 विकेट लिए। 148 रन के सामान्य लक्ष्य का पीछा करने उतरी बारबाडोस की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। बारबाडोस 18.3 ओवर में 112 रन पर सिमट गई और 35 रन से मैच हार गई। जैकरी कार्टर और शरफेन रदरफोर्ड ने 21-21 रन बनाए। इसके अलावा, डेनियल सैम्स ने 17, ब्रैंडन किंग्स और सैड्रैक डेसकार्टेस ने 16-16 रन बनाए। क्विंटन डि कॉक और रिवाल्डो क्लार्क जैसे बल्लेबाज शून्य पर आउट हुए। त्रिनबागो के लिए सुनील नरेन ने बेहतरीन और मैच विजयी स्पेल फेंका। नरेन ने 3.3 ओवर में 12 रन देकर 4 विकेट लिए। इसके अलावा, जेड गुली ने 4 ओवर में 20 रन देकर 3 विकेट लिए। लाहिरु कुमारा ने 2 और अकील हुसैन ने 1 विकेट लिया। सुनील नरेन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। त्रिनबागो नाइट राइडर्स की सीजन के नौवें मैच में यह तीसरी जीत थी। 6 अंकों के साथ टीम छठे स्थान पर है। वहीं, बारबाडोस की सीजन के छठे मैच में यह चौथी हार थी। 4 अंक के साथ बारबाडोस आखिरी (सातवें) स्थान पर है। एंटिगुआ एंड बरबुडा फॉल्कंस 9 मैचों में 5 जीत के साथ 11 अंक लेकर पहले स्थान पर है।
आईआरजीसी का दावा-ईरान ने किए जवाबी हमले, तीन तेल टैंकरों और अन्य जहाजों को बनाया निशाना

तेहरान। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने शनिवार को अमेरिकी हमले के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों और अन्य क्षेत्रों में अमेरिका से जुड़े तीन जहाजों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार मंच सेपाह न्यूज पर जारी एक बयान में नौसेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जिन तीन टैंकरों को निशाना बनाया गया, वे ‘अनधिकृत’ मार्ग से गुजर रहे थे। बयान में कहा गया कि बाकी तीन जहाजों पर अन्य इलाकों में हमला किया गया। नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद सभी जहाजों से अपील की कि वे अमेरिकी सेना के बहकावे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि से बचें। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई जहाज ‘अनधिकृत’ मार्गों से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। इससे पहले शनिवार को ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरआईबी ने खबर दी थी कि ईरान के दक्षिणी तटों के पास तीन ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी सेना ने हमला किया। घटना के बाद ईरान की प्रमुख सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फघारी ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह ईरानी जहाजों पर हमले और देश के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी जारी न रखे। जोल्फघारी ने ईरानी मीडिया में जारी एक बयान में कहा, “अगर ईरानी जहाजों के खिलाफ दुश्मनी, असुरक्षा पैदा करने वाली कार्रवाइयां और उन्हें परेशान करना जारी रहा, साथ ही ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी भी जारी रही, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाएं क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों पर पहले से भी ज्यादा कड़े हमले कर सकती हैं। साथ ही इन कार्रवाइयों के और बढ़ने की भी संभावना है।” इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सेना जल्द ही ईरान के ‘पिकऐक्स माउंटेन’ को निशाना बना सकती है। यह एक मजबूत सुरक्षा वाला क्षेत्र है, जो ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र के पास स्थित है। हालांकि ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को कम महत्व देते हुए इसे ‘बहुत छोटी बात’ भी बताया। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम बहुत जल्द पिकऐक्स पर हमला कर सकते हैं।” उन्होंने उस भूमिगत सुविधा का जिक्र किया, जहां अमेरिका के अनुसार ईरान ने अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का कुछ भंडार स्थानांतरित किया है। साथ ही ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रही स्थिति को युद्ध नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह एक सैन्य संघर्ष है, लेकिन बीच-बीच में होने वाला संघर्ष है।” हालांकि ट्रंप पहले कई बार इस स्थिति को ‘युद्ध’ भी कह चुके हैं, जबकि कुछ मौकों पर उन्होंने इस शब्द के इस्तेमाल से बचने की कोशिश की है। ट्रंप ने कहा, “मैं इसे सैन्य संघर्ष कहता हूं क्योंकि हमारे लिए यह बहुत छोटी बात है। यह कोई बड़ी चीज नहीं है।” 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए थे। ईरान ने अमेरिका या इजरायल से जुड़े जहाजों के वहां से गुजरने पर रोक लगा दी थी। वहीं अमेरिकी बलों ने भी ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हुए समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी थी।
मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा रवाना; सीएम पुष्कर धामी ने लिखा-गहरी आस्था का अद्भुत प्रतीक

देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिद्धपीठ मां नंदा देवी की 12 वर्ष बाद आयोजित होने वाली बड़ी जात यात्रा कुरुड़ में नंदा देवी धाम से कैलास के लिए शनिवार को रवाना की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से रविवार को सोशल मीडिया पर अपील की गई कि चमोली जिले में आगमन पर यहां दर्शन अवश्य करें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा गया, “कुरुड़, चमोली स्थित सिद्धपीठ मां नंदा देवी मंदिर भक्ति, आस्था और हिमालयी संस्कृति का दिव्य संगम है। उत्तराखंड की समृद्ध परंपरा से जुड़ा यह पावन स्थल अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए विशेष पहचान रखता है। कुरुड़ से जुड़ी नंदा देवी की लोकजात और राजजात यात्रा उत्तराखंड की जीवंत लोकपरंपराओं और गहरी आस्था का अद्भुत प्रतीक है। चमोली जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।” कुरुड़ में स्थित नंदा देवी धाम को मां का मूल मायका माना जाता है। इस मंदिर में मां नंदा देवी (पार्वती) चतुर्भुज स्वयं-भू शिला मूर्ति के रूप में विराजमान हैं। कुरुड़ धाम में मां नंदा देवी की डोली दो मुख्य रुपों (कुरुड़ बधाण और कुरुड़-दशोली) में निवास करती है। मां नंदा देवी की 12 वर्ष में आयोजित होने वाली बड़ी जात यात्रा शनिवार को शुरू हुई है। इस यात्रा में पांच निर्जन और 21 आबादी वाले पड़ाव रहेंगे। पैदल गुजरने वाली यह यात्रा 296 किलो मीटर दूरी तय कर 20 सितंबर को (कैलास/होमकुंड) पहुंचेगी। इसके बाद मां की डोली वापस लौटेगी। 30 सितंबर को इस यात्रा का समापन होगा। इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए विवाहित बेटियां मायके पहुंचती हैं। कुरुड़ बधाण मां नंदा देवी की डोली हर वर्ष लोकजात यात्रा में बधाण क्षेत्र में आती है। वेदनी कुंड में पूजा करने के बाद अपने ननिहाल देवराड़ा मंदिर वापस लौट जाती है। इस लोकजात में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। छह महीने देवड़ा में निवास करने के बाद मां की डोली मकर संक्रांति के दिन कुरुड़ धाम, मायके में विराजमान होती है।
चुंबक’ पर काम करते हुए एक कलाकार के तौर पर खुद को विकसित होते देखा: हेली शाह

मुंबई। एक्ट्रेस हेली शाह, जो अपनी आने वाली स्ट्रीमिंग सीरीज ‘चुंबक’ की रिलीज की तैयारी कर रही हैं, ने कहा है कि इस शो पर काम करते हुए उन्होंने खुद को एक आर्टिस्ट के तौर पर बेहतर होते देखा है। यह शो उनके लिए पूरी तरह से कॉमेडी रोल वाला है। हालांकि उन्होंने पहले भी कॉमेडी में कुछ काम किया है लेकिन ‘चुंबक’ में उनके रोल ने उन्हें एक अलग तरह के काम में कदम रखने का मौका दिया। एक्ट्रेस ने मुंबई के बीकेसी इलाके में शो के प्रमोशन के दौरान अर्जुन बिजलानी, अनंत जोशी, डेलनाज ईरानी और अमायरा दस्तूर के साथ आईएएनएस से बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें यह रोल कैसे मिला। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मेरे लिए यह किरदार बहुत अलग है। मैंने कॉमेडी में कुछ काम किया है लेकिन ट्विंकल जैसा किरदार, मुझे नहीं लगता कि मैंने पहले कभी निभाया है। इस रोल को निभाते हुए मुझे एहसास हुआ कि मैं कॉमेडी कर सकती हूं। कम से कम कोशिश तो कर ही सकती हूं। जैसा कि अनंत ने कहा, हमने जो कुछ भी किया, वह मेकर्स द्वारा बताई गई कहानी पर आधारित था। उन्होंने असल में हम सभी से सब कुछ निकलवाया। यह बहुत अच्छा अनुभव रहा क्योंकि मैंने अपने कॉमेडी वाले पहलू को जाना, जिसके बारे में मुझे पता ही नहीं था कि वह मुझमें है। यह भी कि मैं इसे करने की कोशिश कर सकती हूं। इस शो की शूटिंग के दौरान मैंने खुद को बेहतर होते देखा है।” उन्होंने कहा, “यह बहुत खास था क्योंकि मेकर्स ने मुझे फोन करके बताया कि यह शो बन रहा है। उस समय नवरात्रि चल रही थी और मैं गरबा खेलने की तैयारी कर रही थी।” इससे पहले, एक्ट्रेस ने टेलीविजन से ओटीटी में आने और इस रास्ते को तय करने के बारे में बात की थी। टेलीविजन से दूसरे माध्यमों में जाने वाले एक्टर्स के लिए, पहले से बनी धारणाओं से बाहर निकलना अक्सर सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होता है। टेलीविजन के जरिए मजबूत फैन फॉलोइंग बनाने के बावजूद, हेली ने माना कि नए फॉर्मेट आजमाने के बाद भी कई एक्टर्स को ‘टीवी एक्ट्रेस’ का लेबल झेलना पड़ता है। ‘चुंबक’ 10 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।
धौला कुआं फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी भीषण आग, समय रहते फायर ब्रिगेड ने बुझाई आग

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के धौलाकुआं फ्लाईओवर पर रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चलती कार में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया और वाहन धू-धूकर जलने लगा। घटना के बाद फ्लाईओवर पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की स्थिति भी बन गई। कार में आग लगने की सूचना दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की। आग इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और लगभग पूरी तरह जलकर खाक हो गई। आग लगने से आसपास के रास्तों को कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया था। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जानकारी में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। आग कैसे लगी और घटना के समय कार में कितने लोग सवार थे, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में विस्तृत जानकारी का इंतजार है। वहीं, इससे पहले 4 सितंबर को दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके के खजूरी खास में शुक्रवार सुबह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर एक पोल्ट्री ट्रक डंपर के पिछले हिस्से से टकरा गया था। हादसे में ट्रक चालक 35 वर्षीय अंशुल की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, हादसा सुबह करीब 5 बजे हुआ था। इसके बाद खजूरी खास थाने में पीसीआर को कॉल मिली थी लेकिन पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो पता चला कि पोल्ट्री लेकर जा रहा ट्रक डंपर के पीछे से टकराया था। हादसे के बाद डंपर चालक मौके से फरार हो गया था। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पोल्ट्री ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। ट्रक चालक अंशुल क्षतिग्रस्त केबिन के अंदर फंस गया था और बाहर नहीं निकल पा रहा था। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को मौके पर बुलाया गया था। टीमों ने कटिंग उपकरणों की मदद से ट्रक के क्षतिग्रस्त हिस्से को काटकर अंशुल को बाहर निकाला था।
सीएम विजय ने पुलिस दिवस पर दी बधाई, बोले-कानून-व्यवस्था बनाए रखकर जनसेवा करते हैं पुलिसकर्मी

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने रविवार को तमिलनाडु पुलिस दिवस पर पुलिसकर्मियों को बधाई दी। उन्होंने राज्य भर में शांति बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा करने और कानून का शासन बनाए रखने में उनके साहस, बलिदान और समर्पण की सराहना की। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक संदेश में, सीएम विजय ने कहा कि यह दिन 1859 में मद्रास डिस्ट्रिक्ट पुलिस एक्ट (मद्रास जिला पुलिस अधिनियम) के लागू होने की याद दिलाता है। यह एक ऐतिहासिक कदम था जिसने इस क्षेत्र में एक आधुनिक और संगठित पुलिस बल की स्थापना का रास्ता साफ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी अपराध को रोककर और कानून-व्यवस्था बनाए रखकर एक बहुत जरूरी जनसेवा करते हैं। उनकी जिम्मेदारियां केवल रोजमर्रा के पुलिसिंग कार्यों से कहीं ज्यादा हैं, खासकर तब जब समुदाय आपातकालीन स्थितियों, खतरनाक हालात या प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हों। सीएम विजय ने कहा कि पुलिस अधिकारी खुद की परवाह किए बिना लोगों की जान, संपत्ति और अधिकारों की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सेवा करते हुए उनकी बहादुरी और बलिदान समाज से हमेशा सम्मान और सराहना पाने के हकदार हैं। पुलिस बल के सभी सदस्यों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक शांति सुनिश्चित करने और कानून के शासन को मजबूती से स्थापित करने के लिए उनका निस्वार्थ काम बहुत जरूरी है। पुलिसकर्मी अक्सर मुश्किल हालात में कठिन कर्तव्यों का पालन करते हैं और उन पर बड़ी पेशेवर जिम्मेदारियां होती हैं। सीएम विजय ने कहा कि उनकी सरकार पुलिसकर्मियों के काम के बोझ को कम करने वाले उपायों को प्राथमिकता देगी। सरकार पुलिस बल को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस करके उनकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने की कोशिश भी करेगी, ताकि अधिकारी बदलती पुलिसिंग जरूरतों और सार्वजनिक सुरक्षा चुनौतियों का ज्यादा प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगी कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए जरूरी कल्याणकारी कार्यक्रम उपलब्ध हों। पुलिस दिवस के संदेश में इन प्रतिबद्धताओं को प्रशासन की उस व्यापक जिम्मेदारी के हिस्से के तौर पर पेश किया गया, जिसका मकसद कानून लागू करने की व्यवस्था को मजबूत करते हुए बल का समर्थन करना है। बेहतर तकनीक, काम का सही बोझ और परिवार के कल्याण के भरोसेमंद उपायों से पुलिसकर्मियों को ज्यादा प्रभावशीलता और आत्मविश्वास के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सीएम विजय ने तमिलनाडु भर में सेवा कर रहे पुलिसकर्मियों को सलाम करते हुए और सामान्य समय के साथ-साथ संकट के समय में भी समुदायों की सुरक्षा में उनकी भूमिका को मान्यता देते हुए अपनी बात समाप्त की। उन्होंने अधिकारियों को उनकी अटूट जनसेवा के लिए धन्यवाद किया और कहा कि उनकी निरंतर सेवा सार्वजनिक व्यवस्था, नागरिकों की सुरक्षा और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।