केंद्रीय फंड का हवाला देने पर भाजपा ने सीएम शिवकुमार पर उठाए सवाल, कहा- कर्ज माफी को केंद्र के फंड से जोड़ना भ्रामक

बेंगलुरु। कर्नाटक में किसान कर्ज माफी को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता आर. अशोका ने शनिवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना की। आर. अशोका ने आरोप लगाया कि सीएम शिवकुमार किसानों के कर्ज माफी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल रहे हैं। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार खुद पहल कर किसानों का कर्ज माफ करे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आर. अशोका ने सवाल उठाया कि जब किसान कर्ज माफी मांग रहे हैं तो केंद्र की तरफ उंगली उठाना कैसा शासन है। उन्होंने कहा, “पहले राज्य सरकारों ने, जिनमें कर्नाटक में आपकी अपनी पार्टी की सरकारें भी शामिल हैं, जरूरत पड़ने पर किसानों का कर्ज माफ किया था और उनकी मदद की थी। लेकिन आज जिम्मेदारी से बचने के लिए केंद्र की ओर इशारा करना शर्मनाक है।” आर. अशोका ने सरकार को उसके 2023 विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में किए गए वादों को लेकर भी घेरा। उन्होंने पूछा कि वादे के अनुसार 1.50 लाख करोड़ रुपए के ‘कृषि सर्वोदय निधि’ और 5,000 करोड़ रुपए के स्थायी प्राकृतिक आपदा कोष का क्या हुआ। उन्होंने कांग्रेस के उस वादे पर भी सवाल उठाया जिसमें 3 लाख से 10 लाख रुपए तक के ब्याज मुक्त कृषि ऋण देने की बात कही गई थी। आर. अशोका ने आरोप लगाया, “चुनाव से पहले आपने अपने वादों से किसानों को हवा में महल दिखाए। सत्ता में आने के बाद आपने राज्य का खजाना खाली कर दिया और अब कह रहे हैं कि केंद्र को करना चाहिए। यह गैर-जिम्मेदारी की पराकाष्ठा है।” उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि पहले अपने स्तर पर किसान कर्ज माफी की घोषणा करे और कांग्रेस के घोषणापत्र में वादा किए गए 5,000 करोड़ रुपए के प्राकृतिक आपदा कोष के तहत मुआवजा जारी करे। उन्होंने कहा, “पहले राज्य की जिम्मेदारियों को पूरा करो और फिर केंद्र में प्रतिनिधिमंडल ले जाने की बात करो।” आर. अशोका ने मुख्यमंत्री शिवकुमार के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण पर भी निशाना साधा और सवाल किया कि क्या किसानों की परेशानी को हेलीकॉप्टर से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान हवाई सर्वे उचित है, लेकिन सूखे और दरार पड़े खेतों का हवाई सर्वे करने की क्या जरूरत है। उन्होंने पूछा कि सीएम शिवकुमार किसानों के खेतों में जाकर उनसे सीधे बातचीत करने से क्यों कतरा रहे हैं। आर. अशोका ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री किसानों के सवालों से बच रहे हैं और उन्हें डर है कि अगर वे जमीन पर आए तो सरकार की नाकामियां उजागर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि बल्लारी, विजयनगर और बागलकोट के किसानों को तुरंत राहत की जरूरत है, न कि ‘पब्लिसिटी फोटो शूट’ की। उन्होंने यह भी दावा किया कि हेलीकॉप्टर के किराए और ईंधन पर खर्च किया गया पैसा प्रभावित किसान परिवारों को राहत देने में इस्तेमाल किया जा सकता था। उन्होंने सीएम शिवकुमार से खेतों का दौरा कर किसानों को व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिलाने का आग्रह किया।

खेल और शिक्षा जीवन बदल सकती है, ब्राजील फुटबॉल लीजेंड काफू ने युवा लड़कियों को दी सलाह

मुंबई। ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर रहे और टीम को 2 बार विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले काफू ने शनिवार को मुंबई की जरूरतमंद युवा लड़कियों के साथ फुटबॉल फील्ड पर समय बिताया। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को फुटबॉल के गुर बताने के साथ ही खेल और शिक्षा के जरिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। काफू ने मुंबई के ‘ड्रीमिंग इन स्लम्स फाउंडेशन’ की लड़कियों के साथ समय बिताया। वह उनके साथ एक मैत्री मैच में शामिल हुए। यह फाउंडेशन जरूरतमंद शहरी समुदाय की युवा लड़कियों के साथ काम करता है, फुटबॉल का इस्तेमाल लाइफ स्किल्स, आत्मविश्वास और अवसर ढूंढने के लिए करता है। यह प्रोग्राम छह से 16 साल की लड़कियों के लिए है। इस अवसर पर काफू ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “फुटबॉल बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने में मदद करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। जो बच्चे फुटबॉल पढ़ते और खेलते हैं, उनके लिए मेरी राय है कि उन्हें इसी रास्ते पर चलते रहना चाहिए। खेल दुनिया में सामाजिक जुड़ाव के सबसे बड़े तरीकों में से एक है।” उन्होंने कहा, “खेल आपको भविष्य, शिक्षा और समाजीकरण देता है। यह आपको बहुत सम्मान भी देता है। मुझे लगता है कि स्कूल और फुटबॉल का यह मेल एकदम सही है। बच्चे सामाजिक रूप से शामिल हो सकते हैं और ट्रेनिंग का सम्मान कर सकते हैं। ऐसा तरीका भविष्य के लिए बेहतर है।” युवा खिलाड़ियों से मिलने के बाद काफू खुश दिखे और उनके प्यार और सम्मान से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, “यह बहुत बढ़िया था। मुझे ऐसा लग रहा है कि दुनिया मुझसे प्यार करती है। यह बहुत खुशी की बात है। मैंने उन बच्चों से प्यार और सम्मान महसूस किया, जिन्होंने मुझे खेलते हुए लगभग कभी नहीं देखा था। मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिसे समझाया नहीं जा सकता। मैं यहां भारत में आकर बहुत खुश हूं। फाउंडेशन बहुत अच्छा है।” ब्राजील के पूर्व कप्तान ने भारत में फुटबॉल के विकास पर कहा, “भारत एक ऐसा देश है जो हर साल खेल में, खासकर फुटबॉल में ज्यादा निवेश कर रहा है। मुझे लगता है कि अगर हम निवेश करना और पेशेवर खिलाड़ियों को लाना शुरू कर दें, तो भारत में दुनिया की बेस्ट फुटबॉल टीमों में से एक बनने की बहुत क्षमता है।” काफू के साथ मैदान पर खेलने का अनुभव लड़कियां कभी नहीं भूल पाएंगी। सोनाली यादव ने आईएएनएस से कहा, “मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूं। मेरे पिता एक ऑटो ड्राइवर हैं और मेरी मां एक हाउसवाइफ हैं। मुझे एक एनजीओ के साथ फुटबॉल खेलने का मौका मिला, और मैं अपने कोच, गुलाब शाह और प्रजोधी को थैंक यू बोलना चाहूंगी। ब्राजील के महान खिलाड़ी काफू ने संदेश और प्रेरणा ने हम पर गहरी छाप छोड़ी।” सोनल ने कहा, “उन्होंने हमें कभी हार न मानने की सलाह दी। शुरुआत में उन्हें कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने 2 बार (1994 और 2002) ब्राजील के लिए विश्व कप जीता। वह हमें सिखाते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, आपको कभी हार नहीं माननी चाहिए। वह बहुत अच्छे खिलाड़ी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो बच्चों के साथ काम करते हैं। मेरा सपना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

90 फीसदी महाराष्ट्र पर सूखे का संकट मंडराया, सामना में ठाकरे खेमे का दावा

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि दोहरे इंजन वाली सरकार राज्य के बढ़ते कृषि संकट के प्रति उदासीन है, क्योंकि लंबे समय तक सूखे के कारण महाराष्ट्र के बड़े हिस्से सूखे की चपेट में आ रहे हैं। ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र सामना में चेतावनी दी है कि अगर पूर्वानुमान सही साबित होते हैं, तो अगले दो महीनों में राज्य के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में भीषण सूखे का संकट आ जाएगा। वैश्विक अल नीनो की वजह से देशभर के 350 से अधिक जिलों में इसी तरह का सूखा पड़ रहा है, जिससे अनाज और पीने के पानी की भारी कमी की आशंका बढ़ गई है। संपादकीय में सवाल उठाया गया है कि क्या “दोहरे इंजन” वाली सरकार इस विकट संकट को लेकर चिंतित है। संपादकीय में इस बात का विस्तार से वर्णन किया गया है कि प्रकृति ने महाराष्ट्र के कृषि समुदाय को किस प्रकार करारा झटका दिया है। राज्य के 36 में से 31 जिलों में बारिश नहीं हुई है, जिससे खड़ी फसलें संकटग्रस्त स्थिति में हैं और खेत सूखकर भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं। छिटपुट हल्की बारिश को छोड़कर, इस क्षेत्र में 30 से 45 दिनों तक सूखा पड़ा रहा है, जिससे स्थानीय किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालांकि मानसून से पहले की चेतावनियों में “अल नीनो प्रभाव” के कारण संभावित वर्षा की कमी की आशंका जताई गई थी, संपादकीय में इस बात पर कहा गया कि मौसम वैज्ञानिकों ने भी इसके प्रभाव की भयावहता का कम अनुमान लगाया था। राज्य के 18 जिलों में तो सामान्य मानसून बिल्कुल भी नहीं आया है। संपादकीय के अनुसार, इस वर्ष मानसून की बारिश लगभग 15 दिन देरी से आई। जून में कम बारिश के बाद जुलाई में भारी वर्षा हुई, जिसके कारण प्रमुख क्षेत्रों में बुवाई में पूरे एक महीने की देरी हुई। मुंबई, पुणे, पश्चिमी महाराष्ट्र और नासिक जैसे क्षेत्रों में जुलाई के दौरान छिटपुट बारिश हुई, लेकिन अगस्त के पहले सप्ताह से पूरे राज्य में बारिश रुक गई और फिर से शुरू नहीं हुई। वहीं, जुलाई की शुरुआती बारिश से अस्थायी राहत मिली और फसलों की वृद्धि में तेजी आई। हालांकि जैसे ही फसलें अपने महत्वपूर्ण पुष्पन चरण में पहुंचीं। सोयाबीन में फली बनने लगीं, कपास में फली विकसित होने लगीं और मक्का में बालियां उगने लगीं, पानी की आपूर्ति सूख गई। संपादकीय में कहा गया है कि कुओं वाले किसानों ने जुलाई में जमा हुए जल भंडार का उपयोग करके खेतों की सिंचाई करने का प्रयास किया, लेकिन अब जब वे स्रोत पूरी तरह से समाप्त हो गए हैं। खड़ी फसलों को बचाना लगभग असंभव हो गया है। संपादकीय में इस बात पर जोर दिया गया कि सिंचाई सुविधाओं से वंचित शुष्क भूमि के किसानों को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। सोयाबीन, कपास, मक्का, अरहर (तुअर) और हल्दी जैसी नकदी फसलें लाखों हेक्टेयर में सूख गई हैं, जबकि उड़द और मूंग जैसी दलहन फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। श्रावण का पारंपरिक महीना, जिसमें आमतौर पर रुक-रुक कर बारिश होती है, कई इलाकों में बिना एक बूंद बारिश के गुजरा दशकों में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। कभी हरे-भरे खेत पीले पड़ गए हैं, जिससे फसलों की वृद्धि रुक गई है, वित्तीय निवेश नष्ट हो गए हैं और महीनों की मेहनत बेकार हो गई है। विदर्भ में 50 लाख हेक्टेयर से अधिक और मराठवाड़ा में 48 लाख हेक्टेयर में इस मौसम में बुवाई की गई। फसलों के मुरझाने से परेशान कई इलाकों के किसानों ने आगामी रबी मौसम के लिए जमीन तैयार करने के लिए खड़ी फसलों की जुताई शुरू कर दी है। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में बारिश न होने से चिंता बढ़ रही है कि क्या गेहूं और चना (हरभरा) जैसी शीतकालीन फसलों की बुवाई हो पाएगी। साथ ही, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। खेतों के सूख जाने से किसानों के सामने यह एक कठिन दुविधा खड़ी हो गई है कि अगले सात से आठ महीनों तक पशुओं को खिलाने के लिए ज्वार और मक्का का चारा कैसे जुटाया जाए, संपादकीय में यह बताया गया है। इस पृष्ठभूमि में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने सरकार से आग्रह किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के अभूतपूर्व पतन का सामना करने के बावजूद, अनदेखी करने की बजाय तुरंत जल प्रबंधन योजनाएं और सूखा-पूर्व राहत उपाय शुरू किए जाएं।

संयुक्त राष्ट्र में ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव का भारत ने किया समर्थन

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव पारित कर दिया। दुनिया के नक्शों में देशों और महाद्वीपों के वास्तविक आकार को अधिक सटीक तरीके से दर्शाने के उद्देश्य को भारी बहुमत से मंजूरी दी। पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसके विरोध में वोट किया और छह देश मतदान से दूर रहे। भारत ने कहा कि वो इस मुद्दे पर तकनीकी और पद्धतिगत रूप से तटस्थ रुख का समर्थक है। भारत ने कहा कि इस समर्थन को किसी एक खास नक्शा प्रणाली, जैसे इक्वल-एरिया मैप प्रोजेक्शन्स, के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने कहा, “भारत का मानना है कि प्रस्ताव को समान क्षेत्रफल वाले नक्शा प्रोजेक्शन्स के व्यापक इस्तेमाल और विचार को बढ़ावा देने के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि इक्वल अर्थ या किसी अन्य विशेष प्रोजेक्शन के समर्थन के तौर पर।” उन्होंने कहा, “अलग-अलग मैप प्रोजेक्शन का इस्तेमाल अलग-अलग भौगोलिक विशेषताओं जैसे आकार, दिशा या दूरी को बेहतर तरीके से दर्शाने के लिए किया जाता है। ऐसे में भारत इस मुद्दे पर तकनीकी और पद्धतिगत रूप से तटस्थ रुख का समर्थक है।” पुरी के अनुसार, जब उद्देश्य महाद्वीपों के वास्तविक सापेक्ष क्षेत्रफल को दिखाना हो, तब इक्वल एरिया अप्रोच उपयोगी हो सकता है। इससे नक्शों में भूमि के आकार को लेकर पैदा होने वाली दिक्कतों को कम किया जा सकता है। भारत ने इसी सिद्धांत के आधार पर प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन किसी एक कार्टोग्राफिक मेथेडोलॉजी या प्रोजेक्शन को अनिवार्य बनाने का समर्थन नहीं किया है। अफ्रीकी देशों की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद खास तौर पर अफ्रीका के आकार को दुनिया के नक्शों में अधिक वास्तविक रूप में दिखाना है। प्रस्ताव में समान क्षेत्रफल दर्शाने वाले यानी इक्वल-एरिया मैप प्रोजेक्शन्स के व्यापक इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया गया है। मामला मुख्य रूप से सदियों से व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे ‘मर्केटर प्रोजेक्शन’ से जुड़ा है। वर्ष 1569 में तैयार यह प्रक्षेपण नौवहन के लिए बेहद उपयोगी रहा है, लेकिन इसमें भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्रों का आकार वास्तविकता की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देता है। इसका असर खास तौर पर यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है, जबकि अफ्रीका अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। अफ्रीकी देशों का तर्क है कि नक्शे पर लंबे समय से चली आ रही यह विकृति केवल भौगोलिक गलती नहीं है, बल्कि इससे दुनिया की सामूहिक सोच में अफ्रीका के आकार और महत्व को लेकर गलत धारणा भी बनी है। इसी वजह से ‘करेक्ट द मैप’ अभियान को ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक महत्व दिया जा रहा है। यह महासभा का प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी है। इसका अर्थ यह है कि दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले सभी नक्शों को तत्काल मर्केटर से बदलना अनिवार्य नहीं होगा। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अधिक सटीक और समानुपातिक कार्टोग्राफिक मेथेडोलॉजी को प्रोत्साहित करना है।

शुद्धिकरण विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस को घेरा, कहा- यह तुष्टिकरण की राजनीति

गोंडा। बेंगलुरु में भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “एक एफआईआर उत्तराखंड में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के खिलाफ लिखी गई थी। अब कांग्रेस पार्टी की ओर से बेंगलुरु में एफआईआर लिखी गई है। यह वोट की राजनीति है। उन्होंने ये भी कहा कि जब चुनाव पास आएगा तो राहुल गांधी हिंदू भी बनेंगे। अभी वे हिंदू विरोध दर्शाने का काम कर रहे हैं। विवाद शुरू होने की वजह यह है कि पहले वहां कांग्रेस का कार्यक्रम किया गया था। बाद में भाजपा का कार्यक्रम किया गया।” बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि भाजपा के जो भी कार्यक्रम होते हैं, वो विधि-विधान से किए जाते हैं। ऐसा केवल उत्तराखंड में ही नहीं, भाजपा की कहीं भी बड़ी रैली और बैठक में भी किया जाता है। कुछ भी नहीं होता तो एक अगरबत्ती ही जला दी जाती है। जैसे विद्यालय में कार्यक्रम किए जाते हैं तो मां सरस्वती की पूजा की जाती है। अब उसको उन्होंने ‘शुद्धिकरण’ के रूप में ले लिया। इसको कांग्रेस की ओर से गलत दिशा दी गई और उसी का परिणाम है कि बेंगलुरु में एफआईआर दर्ज कराई गई है। भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह तुष्टिकरण की राजनीति है और इससे कांग्रेस का कोई फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियां दलित मतदाताओं को साधने की कोशिश करती हैं, लेकिन आज की तारीख में भाजपा के पास दलित मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ मामले में बेंगलुरु में भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता की ओर से बताया गया कि 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। जनसभा के बाद 10 अगस्त को ‘शुद्धिकरण’ किया गया था।

शिक्षकों के सम्मान में योगी बोले ‘ठेके पर नकल’ वाले यूपी की बदली तस्वीर, शिक्षक बने परिवर्तन के वाहक

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर गोरखपुर में आयोजित समारोह में प्रदेश की बदली तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और संस्कार ही किसी राष्ट्र को सशक्त बनाने की बुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल बच्चों को पढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि उन्हें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठते थे और नकल तक ठेके पर होने की चर्चा होती थी। प्रदेश की पहचान को लेकर युवाओं और शिक्षकों को दूसरे राज्यों में भी संशय की नजर से देखा जाता था। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में व्यवस्था बदली है और अब उत्तर प्रदेश के लोगों को बाहर सम्मान की नजर से देखा जाता है। इस बदलाव के वाहक प्रदेश के शिक्षक भी हैं। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि पहले प्रदेश में कर्फ्यू और दंगे आम बात माने जाते थे। उन्होंने जन्माष्टमी के आयोजन का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में पुलिस लाइनों, थानों, मोहल्लों और अन्य स्थानों पर कार्यक्रम हुए, लेकिन कहीं से दंगे या उपद्रव की खबर नहीं आई। उन्होंने कहा कि जिस माहौल में पहले स्कूल-कॉलेज चलाना भी मुश्किल था, आज वहां सुरक्षित वातावरण में शिक्षा व्यवस्था आगे बढ़ रही है। योगी ने कहा कि भारत आदिकाल से ही ज्ञान की उपासना करने वाला देश रहा है। समय के साथ ज्ञान की परंपरा के स्वरूप में बदलाव आया, लेकिन शिक्षा और संस्कार का महत्व हमेशा बना रहा। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र तभी मजबूत और समर्थ बन सकता है, जब उसकी भावनाओं और मूल्यों के अनुरूप शिक्षा और संस्कार नई पीढ़ी को मिलें। यह जिम्मेदारी शिक्षक से बेहतर कोई नहीं निभा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में ज्ञान और गुरु परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है। मां सरस्वती की आराधना से जुड़े वसंत पंचमी और गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व इसी परंपरा के प्रतीक हैं। शिक्षक दिवस शिक्षकों को देश की इसी समृद्ध ज्ञान परंपरा से जुड़ने और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराने का अवसर देता है। गोरखपुर के योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रोटोकॉल से अलग हटकर सभी 81 सम्मानित शिक्षकों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया था कि केवल 10 शिक्षक मंच पर आएंगे, लेकिन वह जानते थे कि सम्मान पाने वाले शिक्षक प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लंबी दूरी तय करके यहां पहुंचे हैं। इसलिए सभी को मंच पर बुलाकर सम्मानित करना जरूरी समझा। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को संस्कारित करते हैं और इसके लिए उनका स्वयं संस्कारित होना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों की मौजूदगी और उनका उत्साह इस समारोह को नई ऊर्जा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान वास्तव में उस परंपरा का सम्मान है, जो पीढ़ियों को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध से जोड़ती है। उन्होंने शिक्षकों से शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया। समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग के और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

मध्य प्रदेश के शिक्षक टीईटी देंगे ऑफलाइन : मोहन यादव

भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के शिक्षकों के लिए शिक्षक दिवस पर बड़ा ऐलान किया है और कहा है कि शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) ऑफलाइन देनी होगी। दरअसल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश के सभी राज्यों में शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित की जा रही है। मध्य प्रदेश में यह परीक्षा ऑनलाइन प्रस्तावित थी। शिक्षक इस परीक्षा का ही विरोध कर रहे हैं। शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह राजधानी स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित किया गया। इसका राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने टीईटी के माध्यम से ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। हमारा संकल्प है कि मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए, हमारे शिक्षकों को सम्मान और बेहतर अवसर मिले तथा प्रदेश का हर विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार कर सके। मुख्यमंत्री यादव ने आगे कहा कि आज दुनिया भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। दुनिया भर में मची उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। वहीं, आज शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं देश और समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को नमन करता हूं। गुरु की महिमा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा जाता है कि जहां “गुरुर” समाप्त होता है, वहीं “गुरु” की प्राप्ति होती है। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। हम सभी जानते हैं कि देश की किस्मत स्कूल की कक्षाओं में बनती है और उन कक्षाओं के अधिपति हमारे शिक्षक होते हैं। एक सच्चा शिक्षक उस समय सबसे अधिक आनंदित होता है, जब उसका शिष्य उससे भी आगे बढ़कर सफलता प्राप्त करता है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश में हमारे सरकारी विद्यालयों के शिक्षक अपने समर्पण और मेहनत से इस भावना को निरंतर साकार कर रहे हैं। जब मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम सामने आते हैं, तो मेरिट सूची में शामिल होने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक बच्चे सरकारी स्कूलों से होते हैं। यह उपलब्धि हमारे शिक्षकों की मेहनत, समर्पण और विद्यार्थियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में हम निरंतर नए कदम उठा रहे हैं।

केएन नेहरू पर छापेमारी को लेकर भड़के एमके स्टालिन, बोले-डीएमके डरने वाली नहीं

चेन्नई। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने शनिवार को पार्टी महासचिव और पूर्व मंत्री केएन नेहरू से जुड़ी संपत्तियों पर की गई तलाशी का कड़ा विरोध किया और राज्य सरकार पर विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियान चलाने का आरोप लगाया। स्टालिन ने कहा कि न तो के. एन नेहरू और न ही डीएमके नई सरकार द्वारा राजनीतिक विरोधियों को डराने के प्रयासों से भयभीत होंगे। पार्टी कानूनी माध्यमों से इस कार्रवाई का सामना करेगी और सफल होगी। भ्रष्टाचार विरोधी विभाग के अधिकारियों ने शनिवार सुबह के. एन नेहरू और उनके भाई रविचंद्रन से जुड़े परिसरों पर तलाशी शुरू की। इस कार्रवाई से डीएमके की ओर से तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई, जिसने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल उसके वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। स्टालिन ने तलाशी के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि संबंधित मामले उच्च न्यायालय में लंबित थे जबकि राज्य विधानसभा का सत्र भी चल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि केएन नेहरू के खिलाफ की गई कार्रवाई भ्रष्टाचार से निपटने के वास्तविक प्रयास के बजाय पूरी तरह से राजनीतिक विचारों से प्रेरित थी। सरकार पर निशाना साधते हुए डीएमके नेता ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक दलबदल और विधायकों को कथित रूप से रिश्वत देने से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई करने में विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि अन्य पार्टियों से संबंधित विधायकों पर इस्तीफा देने के लिए दबाव डाला गया और बाद में उन्हें सत्ताधारी पार्टी में शामिल कर लिया गया, जबकि विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों की अभी भी जांच नहीं हुई है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि इस तरह के घटनाक्रमों को लेकर शिकायतों के बावजूद, भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारियों ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफडी) तक दर्ज नहीं की थी और उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोग भ्रष्टाचार के आरोपों के प्रति सरकार के चयनात्मक दृष्टिकोण से अवगत थे। स्टालिन ने प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया कि जब भी उसे असहज राजनीतिक सवालों का सामना करना पड़ता है, तो वह ध्यान भटकाने वाली रणनीति का सहारा लेता है। उन्होंने केएन नेहरू के खिलाफ की गई तलाशी को सरकार के सामने मौजूद मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का एक और प्रयास बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमके अपने पदाधिकारियों को निशाना बनाकर की जाने वाली छापेमारी या जांच से डरने वाली नहीं है। स्टालिन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “के एन नेहरू और पार्टी नई सरकार के ऐसे डरावने धमकाने वालों से नहीं डरेंगे और जोर देकर कहा कि डीएमके कानून के दायरे में इस कार्रवाई को चुनौती देगी। इन तलाशी अभियानों से सरकार और प्रमुख विपक्षी दल के बीच राजनीतिक टकराव के और तेज होने की आशंका है और डीएमके इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों तरह से उठाने की तैयारी कर रही है।

फिल्म में डरावने, लेकिन असल जिंदगी में बेहद अच्छे थे शाहरुख खान, ‘अंजाम’ की पिंकी ने सुनाया किस्सा

मुंबई। 1994 में आई फिल्म ‘अंजाम’ में माधुरी दीक्षित की ऑन-स्क्रीन बेटी पिंकी चोपड़ा का किरदार निभाने वाली गजाला सलमीन ने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे सुपरस्टार शाहरुख खान सेट पर जब भी मिलते थे तो उन्हें कंफर्टेबल फील कराते थे। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने शाहरुख खान से जुड़ा पर्दे के पीछे का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया, “फिल्म ‘अंजाम’ में शाहरुख खान के साथ मेरा एक सीन था। उस समय में बहुत छोटी थी और हम मॉरीशस में शूटिंग कर रहे थे। वैसे, फिल्म में मेरे बर्थडे वाले सारे सीन मॉरीशस के ही शूट हुए हैं। मुझे अभी भी याद है, शाहरुख खान मेरे पास आते थे, मुझे गले लगा लेते थे। कैमरे के पीछे वो बहुत अच्छे इंसान थे। फिल्म में वो डरावने लगते थे। एक बच्चे के तौर पर मुझे डर लगता था, लेकिन कैमरे के पीछे वो हमेशा मुझे कंफर्टेबल महसूस कराते थे।” गजाला सलमीन ने बताया कि फिल्म में अभिनेता शाहरुख खान ने बिना हार्नेस के सारे स्टंट सीन शूट किए थे। उन्होंने कहा, “यह मेरा पहला स्टंट सीन था, जहां शाहरुख खान अपनी कार लेकर आते हैं और हम टकराते हैं तभी मैं कार से गिर जाती हूं। रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक शूटिंग चली। मैं रात में वहां थी और मुझे चोट नहीं लग रही थी, लेकिन मैं कभी देख ही नहीं पाई कि मैं कितनी ऊंची उछली। मुझे बहुत डर लग रहा था, क्योंकि कोई हार्नेस नहीं था लेकिन मैं सेफ थी लेकिन मैं कई बार यहां से वहां उछली थी।” अभिनेत्री गजाला सलमीन ने 1994 की मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म ‘अंजाम’ में पिंकी चोपड़ा का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी में पिंकी का किरदार बहुत भावुक और महत्वपूर्ण मोड़ लाता है। फिल्म के विलेन विजय अग्निहोत्री (शाहरुख खान) के जुनून और नफरत की वजह से मासूम बच्ची की जान चली जाती है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भले ही औसत या मध्यम सफलता हासिल कर पाई हो, लेकिन इसका गाना ‘चने के खेत में’ बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुआ था, जो आज भी पसंद किया जाता है।

अफगान सीरीज में हार की डर से युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं दिया गया: श्रीकांत

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मुख्य चयनकर्ता रहे कृष्णमाचारी श्रीकांत का मानना ​​है कि अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज का इस्तेमाल भारत के युवा खिलाड़ियों के पूल को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि हाल में मिली हार की वजह से चयनकर्ताओं ने अफगान सीरीज में टीम के साथ प्रयोग नहीं किया। श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “आयरलैंड और इंग्लैंड में सीरीज हारने के बाद, चयनकर्ताओं ने कोई रिस्क न लेने का फैसला किया और अफगानिस्तान के खिलाफ एक मजबूत टीम चुनी। वे पूरी ताकत लगा रहे हैं, लेकिन यह एक गलती है। अफगानिस्तान जैसी टीमों के खिलाफ आपको युवाओं को आजमाना चाहिए था। हार के डर से ताकतवर टीम चुनी गई है। आयरलैंड और इंग्लैंड में हार के बाद यह एक डेस्परेशन मूव जैसा लगता है। यह टीम लगभग वैसी ही है जैसी उन्होंने इंग्लैंड के लिए चुनी थी।” भारत को श्रेयस अय्यर की कप्तानी में हाल में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए सभी छह टी20 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। इसके बाद दूसरी क्लास की भारतीय टीम ने जुलाई में जिम्बाब्वे के खिलाफ 3-0 से सीरीज जीता। अफगान सीरीज के लिए घोषित टीम में 4 इंजर्ड खिलाड़ी हैं। इस पर श्रीकांत ने कहा, “सिर्फ बेंगलुरु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग से खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के लिए तैयार नहीं किया जा सकता। इन चारों ने मैच-फिटनेस साबित नहीं की है। वे किस आधार पर फिटनेस के दायरे में आते हैं? सिर्फ इसलिए कि आप बेंगलुरु सीओई में अपनी फिटनेस साबित कर देते हैं, क्या आप फिट हैं? इसी तरह हर्षित राणा इंग्लैंड गए थे, और फिर वहां उनके साथ क्या हुआ? इसलिए मैच-फिटनेस जरूरी है।” अफगानिस्तान के खिलाफ चुनी गई भारतीय टीम में जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, नीतीश कुमार रेड्डी और वाशिंगटन सुंदर को जगह मिली है, लेकिन ये खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं हैं। भारत और अफगानिस्तान सीरीज 13, 15 और 17 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जाएगी।