जी20 सम्मेलन: आरबीआई गवर्नर ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व और आईएमएफ अधिकारियों से की मुलाकात

एशविले । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नॉर्थ कैरोलिना में आयोजित जी20 बैठक के दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की। इसकी जानकारी आरबीआई ने दी। मल्होत्रा ने जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वरिष्ठ आर्थिक नीति निर्माता शामिल हुए। बैठक के दौरान गवर्नर मल्होत्रा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के साथ चर्चा की। हालांकि आरबीआई ने इन बैठकों में हुई बातचीत का विस्तृत ब्योरा या उठाए गए विशेष मुद्दों की जानकारी साझा नहीं की। बैठक से इतर संजय मल्होत्रा ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब दुनिया के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कर रहे थे। मल्होत्रा ने आईएमएफ के फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर डैन कैट्ज से भी मुलाकात की। इन बैठकों के जरिए भारत के केंद्रीय बैंक के प्रमुख का संपर्क उन दो प्रमुख वैश्विक संस्थानों से हुआ, जिनका अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय नीतियों पर बड़ा प्रभाव माना जाता है। फेडरल रिजर्व के फैसलों का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। वहीं, आईएमएफ वैश्विक अर्थव्यवस्था की निगरानी और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक, जी20 ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और वित्तीय प्रक्रिया मानी जाती है। इन बैठकों में सदस्य देश वैश्विक आर्थिक विकास, वित्तीय स्थिरता, विकास के लिए वित्तीय संसाधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत वाले अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हैं। एशविले में आयोजित इस बैठक में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने एक मंच पर आकर साझा आर्थिक और वित्तीय प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया। संजय मल्होत्रा ने इन चर्चाओं में भारत के केंद्रीय बैंक का प्रतिनिधित्व किया और औपचारिक बैठकों के साथ-साथ कई द्विपक्षीय मुलाकातें भी कीं।

वैष्णव तिलक और बेल पत्रों से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि, गुरुवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। गुरुवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े, और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई। वैष्णव तिलक और राम नाम के बेल पत्र से बाबा को सजाया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं।

ओडिशा में उर्वरक की कालाबाजारी पर कार्रवाई तेज, 11,684 दुकानों पर छापेमारी

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने चल रहे खरीफ 2026-27 सीजन के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, जिसके तहत 11,600 से अधिक छापे मारे गए हैं और राज्यभर में सैकड़ों भ्रष्ट डीलरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने उर्वरकों की कालाबाजारी और हेराफेरी से निपटने के लिए शून्य सहिष्णुता की रणनीति तैयार की है जिनके पास कृषि और किसान सशक्तिकरण मंत्रालय का भी प्रभार है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और घटिया उर्वरकों की आपूर्ति जैसी अनुचित प्रथाओं को रोकने के लिए जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय प्रवर्तन दस्ते गठित किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया, “राजस्व विभाग, कृषि विभाग और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों वाली निरीक्षण टीमें और हवाई दस्ते क्षेत्र में गठित किए गए हैं और आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव के आदेश पर विभिन्न थोक और खुदरा उर्वरक दुकानों पर नियमित छापे मारे जा रहे हैं।” जहां कहीं भी अनियमितता पाई जाती है, वहां उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत तत्काल कार्रवाई की जा रही है। राज्य सरकार ने खुलासा किया कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ओडिशा के विभिन्न जिलों में 11,684 उर्वरक दुकानों पर छापे मारे गए हैं। इस बीच, 2,774 व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि 321 डीलरों द्वारा उर्वरक की बिक्री अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई है। इसके अतिरिक्त अनुचित प्रथाओं का सहारा लेने के आरोप में 170 डीलरों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं, जबकि 96 डीलरों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। इसके अलावा, 12 दोषी डीलरों के पास से उर्वरक का भंडार जब्त कर लिया गया है और उनमें से सात के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले वर्ष, 2025-26 में, 9,017 उर्वरक दुकानों पर छापे मारे गए। 2,373 व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए, 48 डीलरों की बिक्री रोक दी गई और 53 डीलरों के लाइसेंस निलंबित या रद्द कर दिए गए। इसके अतिरिक्त, गंभीर आरोपों के कारण 15 डीलरों से उर्वरक का भंडार जब्त किया गया और नौ लोगों के खिलाफ कानूनी मामले दर्ज किए गए। प्रत्येक बिक्री केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और घबराने की कोई बात नहीं है। सरकार खरीफ के इस मौसम में उर्वरकों की आपूर्ति को प्रभावी ढंग से विनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है और स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत दुकानों से ही नियंत्रित कीमतों पर उर्वरक खरीदें। अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में उर्वरक की दुकानों पर की गई बड़ी छापेमारी और दोषी व्यापारियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई के भी जानकारी दी।

रीढ़ की हड्डी से लेकर पाचन तक हर समस्या का समाधान है वृश्चिकासन

नई दिल्ली। शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए योग एक कारगर पद्धति है। यह सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है, जो व्यक्ति को अंदर से शांत, मजबूत और एकाग्र बनाती है। योग के विभिन्न आसनों में वृश्चिकासन खास स्थान रखता है, जिसके अभ्यास से मानसिक संतुलन और शरीर पर नियंत्रण बेहतर करता है। इसका नाम ‘वृश्चिक’ यानी बिच्छू से लिया गया है, क्योंकि इस आसन के दौरान शरीर की स्थिति बिच्छू के समान होती है। इसके अभ्यास से शारीरिक मजबूती, लचीलापन और मानसिक शांति मिलती है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन को एक उन्नत स्तर का योग आसन बताया है। इसके नियमित रूप से करने से शरीर में शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का अद्भभुत संयोजन है। इस आसन में शरीर की आकृति डंक उठाए हुए बिच्छू की तरह हो जाती है। वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज एक इनवर्टेड बैकबेंड आसन है, जिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की ओर झुकाया जाता है। यह आसन कंधों, बाजुओं, पीठ और कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ता है, जिससे कमर दर्द और पीठ की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ ही, यह पेट की मांसपेशियों को खींचता है, पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। वृश्चिकासन एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है। यह एक अत्यंत कठिन आसन है। इसे केवल तभी करने का प्रयास करना चाहिए जब आप पिंचा मयूरासन में निपुण हों। हालांकि शुरुआती अभ्यासकर्ता संतुलन बनाने के लिए दीवार के पास अभ्यास करें और हो सके तो किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही करें। वहीं, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, चक्कर आना या गर्दन व पीठ में गंभीर चोट होने पर इस आसन को करने से बचें। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है तथा मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो सकती है। हालांकि यह एक कठिन आसन है, इसलिए इसे उचित मार्गदर्शन और सावधानी के साथ करना चाहिए।

4 सितंबर का पंचांग: जन्माष्टमी की पूजा का समय कब, 4 सितंबर को गृहस्थ लोग मनाएंगे श्री कृष्ण जन्मोत्सव

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन कृष्ण जन्माष्टमी है और भगवान श्रीकृष्ण (लड्डू गोपाल) की पूजा की जाती है। शुक्रवार को गृहस्थ लोग जन्माष्टमी मनाएंगे। निशीथ काल पूजा रात 11:57 बजे से रात 12:43 बजे तक की जाएगी। शुक्रवार सुबह 6:13 बजे सूर्योदय और शाम 6:38 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 11:45 बजे चंद्रोदय और अगले दिन सुबह 01:00 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा जबकि चंद्रमा रात लगभग 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। शुक्रवार दोपहर लगभग 03:44 बजे तक हर्षण योग रहेगा, इसके बाद वज्र योग शुरू हो जाएगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:50 तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल रात 8:02 से 09:32 बजे तक रहेगा। वहीं, राहुकाल सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:25 बजे और गुलिक काल सुबह 7:46 से 9:19 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 3:31 से दोपहर 5:05 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है। शुक्रवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा। पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

किरदार के लिए 14 किलो वजन बढ़ाना पड़ा भारी, निमिषा सजयन बोलीं- बुरे सपने जैसा था अनुभव

मुंबई। अभिनेत्री निमिषा सजयन क्राइम ड्रामा और मिस्ट्री-थ्रिलर फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ में बबीता सिंह उर्फ ‘बेबी’ की पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रही हैं। अभिनेत्री ने बताया कि इस किरदार को निभाने के लिए उन्होंने करीब 14 किलो वजन बढ़ाया था। अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि इस रोल के लिए जब उन्हें सुना गया था, तब उनका वजन 58 किलो था और वजन बढ़ाने के लिए एक प्रोफेशनल टीम के साथ काम करना शुरू किया और आखिरकार वजन बढ़कर 72 किलो तक पहुंच गया। अपने ट्रांसफॉर्मेंशन के अनुभव को शेयर करते हुए अभिनेत्री ने कहा, “मैं इस किरदार को निभाने के लिए 14 किलो वजन बढ़ाया। जब मुझे इस रोल के लिए चुना गया था तब मेरा वजन 58 किलो था, फिर हमने वजन बढ़ाने की जर्नी शुरू की, इसके लिए हमारे पास डॉ. सिद्धांत करण और शेफ सैफ दादा जैसे प्रोफेशनल्स की टीम थी। तो पहले इसकी शुरुआत 1,200 कैलोरी से हुई और फिर यह 8,000 कैलोरी तक पहुंच गई।” अभिनेत्री ने ट्रांसफॉर्मेशन के अनुभव को एक बुरे सपने की तरह बताया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह एक बुरे सपने की तरह था। क्योंकि 8,000 कैलोरी बढ़ाना बहुत ज्यादा है। यह खाने की बहुत बड़ी मात्रा है, मैं सच में बस खाना अंदर ठूंस रही थी, लेकिन मुझे इस पूरी प्रोसेस में मजा भी आया, क्योंकि इसने मुझे शायद किरदार के और करीब ला दिया था, इसलिए मैंने एंजॉय भी किया।” अभिनेत्री ने यह भी बताया कि फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ शूटिंग खत्म होने के बाद उन्होंने अपने वजन कम करने पर काम शुरू कर दिया था। अभिनेत्री निमिषा सजयन ने अपने लुक्स को लेकर जज किए जाने पर भी आईएएनएस के साथ बात की। उन्होंने कहा कि अब वह एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई हैं जहां इस तरह की बातों का उन पर पहले जैसा असर नहीं होता। अंबिएका पंडित द्वारा निर्देशित क्राइम ड्रामा और मिस्ट्री-थ्रिलर फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ निमिषा सजयन के अलावा, अंशुमान पुष्कर, बरुण सोबती, सुनीता राजवर और राजेश कुमार। यह फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है।

एआई डेटा सेंटरों का व‍िरोध करने वाले गंवा देंगे एक बड़ा आर्थिक अवसर : हॉवर्ड लटनिक

चैपल हिल। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा क‍ि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटरों को लेकर कई गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं। उन्‍होंने चेतावनी दी क‍ि अगर कोई समुदाय या क्षेत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े डेटा सेंटर बनाने का विरोध करता है, तो वह निवेश, रोजगार और कर (टैक्स) से मिलने वाले राजस्व जैसे बड़े आर्थिक अवसर खो सकता है। उनका कहना है कि डेटा सेंटरों को लेकर कई गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं। नॉर्थ कैरोलिना के चैपल हिल में आयोजित जी20 इनोवेशन मिनिस्टीरियल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में लटनिक ने एआई बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार का समर्थन किया। यह टिप्पणी तब आई जब एक पत्रकार ने बताया कि ऑरेंज काउंटी ने बड़े डेटा सेंटरों के निर्माण पर एक साल की रोक लगा दी है। लटनिक ने कहा, “मुझे लगता है कि आपने सही मुद्दा उठाया। असल समस्या गलत जानकारी की है। अगर आप डेटा सेंटरों पर रोक लगाते हैं, तो अगला बड़ा अवसर आपके पास नहीं आएगा।” उन्होंने कहा कि अमेरिका के कई अन्य क्षेत्र ऐसे प्रोजेक्ट्स का स्वागत करने के लिए तैयार हैं और वही निवेश और आर्थिक लाभ प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा, “अगर आप इन परियोजनाओं का स्वागत करेंगे, तो आप जीतेंगे। और अगर नहीं करेंगे, तो ये अवसर कहीं और चले जाएंगे।” लटनिक के अनुसार, डेटा सेंटरों में भविष्य के उन्नत एआई मॉडल काम करेंगे और यह स्थानीय समुदायों के लिए ज्ञान, नवाचार और नए आर्थिक अवसर लेकर आएंगे। उन्होंने कहा, “ये उन्नत एआई मॉडल दुनिया भर के ज्ञान को हर अर्थव्यवस्था, हर समुदाय और हर इलाके तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।” वाणिज्य मंत्री ने उन दावों को भी खारिज किया कि डेटा सेंटरों के कारण बिजली महंगी हो जाएगी या स्थानीय संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा क‍ि डेटा सेंटरों की छवि बेवजह खराब की जा रही है। हमारे प्रतिद्वंद्वी हमें धीमा करना चाहते हैं, इसलिए ऐसी बातें फैलाई जा रही हैं। लटनिक का दावा है कि डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियां अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खुद व्यवस्था करेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान देंगी। लटनिक ने कहा कि एआई डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों को स्थानीय लोगों के साथ अधिक संवाद करना चाहिए और उनकी चिंताओं को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों को लोगों को साफ-साफ बताना चाहिए कि वे बिजली की कीमतें नहीं बढ़ाएंगी। लटनिक का मानना है कि जो क्षेत्र आज इन परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं, वे आने वाले वर्षों में पछता सकते हैं जब वे देखेंगे कि पड़ोसी क्षेत्रों को निवेश और आर्थिक लाभ मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “एक साल, दो साल या पांच साल बाद जब हम पीछे मुड़कर देखेंगे, तो जो लोग कह रहे थे कि यहां डेटा सेंटर मत बनाओ, उन्हें महसूस होगा कि उन्होंने एक बड़ा आर्थिक अवसर गंवा दिया।

फ्रेंच ओपन वाली सफलता यूएस ओपन में दोहराना चाहता हूं: एलेक्जेंडर ज्वेरेव

नई दिल्ली। यूएस ओपन 2026 की शुरुआत हो चुकी है। नोवाक जोकोविच का पहले राउंड से बाहर होना अब तक की सबसे बड़ी खबर है। जानिक सिनर के इंजरी की वजह से टूर्नामेंट के बाहर रहने और जोकोविच के बाहर होने से स्पेन के कार्लोस अल्काराज और जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव के बीच एकल का खिताबी मुकाबला होने की प्रबल संभावना बन गई है। अल्काराज और ज्वेरेव दोनों ही दूसरे दौर में जगह बना चुके हैं। फ्रेंच ओपन 2026 का खिताब जीतने वाले एलेक्जेंडर ज्वेरेव की नजर अपने पहले यूएस ओपन और दूसरे ग्रैंड स्लैम खिताब पर है। एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अपने पहले मैच में इटली के लोरेंजो सोनेगो को हराया। ज्वेरेव ने सोनेगो के खिलाफ जीत के बाद जियोहॉटस्टार से बात करते हुए यूएस ओपन 2026 जीतने की इच्छा जताई है। जर्मन खिलाड़ी ने कहा, “मुझे लगता है कि जीत कड़ी मेहनत का नतीजा था जो मैंने इतने सालों में की है। कई बार, मैं थोड़ा पीछे रह गया। शायद इसी वजह से आखिर में पांचवें सेट में फ्लाविया के खिलाफ फर्क पड़ा। मैं जीतने के लिए सच में तैयार महसूस कर रहा था, जो दूसरे फाइनल की तुलना में एक अलग तरह की फीलिंग थी। बेशक, मैं खुश हूं कि ऐसा हुआ। अब हम न्यूयॉर्क में हैं, और मैं इसे फिर से करने की कोशिश करना चाहता हूं।” फ्रेंच ओपन 2026 ज्वेरेव का पहला ग्रैंड स्लैम था। उस अनुभव को याद करते हुए ज्वेरेव ने कहा, “मेरे कंधों पर जरूर कुछ बोझ था, खासकर जिस उम्र में मैं हूं। आपको कभी नहीं पता होता कि यह कभी होगा भी या नहीं। इसलिए, मैं आखिरकार अपनी पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी उठाकर बहुत खुश था, लेकिन अब, एक बार जब आप ऐसा कर लेते हैं, तो आप और चाहते हैं। मैं भविष्य में वह सफलता दोहराने के लिए उत्सुक हूं।” ज्वेरेव का दूसरे राउंड में क्वेंटिन हेलिस से मुकाबला होना है।

मथुरा से द्वारका तक जन्माष्टमी की धूम, मंदिरों में कान्हा के जन्मोत्सव की विशेष तैयारियां

मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर कान्हा की नगरी मथुरा पूरी तरह से सज-धजकर तैयार हो चुकी है और पूरा शहर किसी दुल्हन की तरह नजर आ रहा है। देश-विदेश के श्रद्धालुओं के आगमन से ब्रजमंडल में अभी से उत्सव का माहौल बन गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से लेकर द्वारकाधीश मंदिर, बांकेबिहारी मंदिर और इस्कॉन मंदिर तक हर जगह विशेष सजावट की गई है। मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और आकर्षक झांकियों से सजाया गया है। मथुरा-वृंदावन की गलियां कृष्ण भजनों से गूंज रही हैं। प्रशासन ने भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। वहीं दूसरी ओर भगवान श्री द्वारकाधीश की नगरी द्वारका में भी जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यात्राधाम द्वारका में भगवान श्री द्वारकाधीश के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाने के लिए विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। द्वारका स्थित जगत मंदिर को रोशनी से जगमगाया गया है। यहां द्वारका के राजा के तौर पर भगवान द्वारकाधीश बिराजमान हैं, इसलिए जन्माष्टमी उत्सव को बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार भगवान श्री द्वारकाधीश जगत मंदिर में की गई रोशनी की व्यवस्था इस प्रकार की गई है कि इसे द्वारका से 10 किमी दूर से भी देखा जा सकता है। हर साल भगवान श्री द्वारकाधीश के जगत मंदिर में हजारों भक्त दर्शन करने आते हैं और जन्माष्टमी उत्सव के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के जन्मोत्सव को मनाने के लिए पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए यात्राधाम द्वारका में जगत मंदिर परिसर, मंदिर के शिखर और आसपास के इलाके में आकर्षक लाइटिंग डेकोरेशन किया गया है। पूरा परिसर समेत मंदिर के आसपास के इलाके रोशनी से जगमग उठे हैं। रात के समय जगत मंदिर की छटा देखते ही बन रही है।

सही अवसर से निखरती है प्रतिभा, पीएम मोदी ने कालिदास के श्लोक से दिया संदेश

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत का सुभाषित शेयर किया। उन्होंने लिखा, “सच्ची प्रतिभा को जब सकारात्मक परिवेश मिलता है तो उससे अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है। इससे जहां प्रयासों में सफलता मिलती है, वहीं जीवन भी सार्थक बनता है।” प्रधानमंत्री की ओर से महाकवि कालिदास की ओर से रचित ‘मालविकाग्निमित्रम्’ नाटक से एक संस्कृत श्लोक, “पात्रविशेषे न्यस्तं गुणान्तरं व्रजति शिल्पमाधातुः। जलमिव समुद्रशुक्तौ मुक्ताफलतां पयोदयस्य॥” साझा किया गया है, जिसका हिंदी अर्थ है कि व्यक्ति या वस्तु की सार्थकता और उसका उत्थान इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार के पात्र या परिवेश को प्राप्त करती है, जिस प्रकार साधारण जल भी सीप के संपर्क में आने से अमूल्य मोती बन जाता है, उसी प्रकार उचित और सुयोग्य आश्रय मिलने पर सामान्य गुण भी परम श्रेष्ठता और प्रतिष्ठा को प्राप्त कर लेते हैं।” ‘मालविकाग्निमित्रम्’ कालिदास की ओर से रचित एक संस्कृत नाटक है, जिससे शुंग वंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग और उसके पुत्र अग्निमित्र के समय के राजनीतिक घटनाचक्र तथा शुंग एवं यवन संघर्ष का जिक्र मिलता है। पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह श्लोक ‘मालविकाग्निमित्रम्’ नाटक के प्रथम अंक में है। जब दो नृत्य आचार्यों (गणदास और हरदत्त) के बीच अपने श्रेष्ठता को लेकर विवाद होता है, तब आचार्य गणदास की ओर से अपनी शिष्या मालविका की योग्यता पर भरोसा जताते हुए राजा अग्निमित्र के सामने यह श्लोक, “पात्रविशेषे न्यस्तं गुणान्तरं व्रजति शिल्पमाधातुः। जलमिव समुद्रशुक्तौ मुक्ताफलतां पयोदस्य॥” कहा जाता है। आचार्य गणदास की ओर से बोले गए श्लोक का अर्थ है कि शिक्षक या कलाकार की कला (शिल्प) जब किसी विशेष योग्य पात्र (उत्कृष्ट शिष्य) को सौंपी जाती है, तो उसकी गुणवत्ता और अधिक बढ़ जाती है। ठीक उसी तरह जैसे बादल (पयोद) से गिरने वाली पानी की बूंद जब समुद्र की सीप (शुक्ति) में गिरती है, तो वह मूल्यवान मोती (मुक्ताफल) बन जाती है।