समृद्धि महामार्ग पर 31 अगस्त से 7 सितंबर तक चरणबद्ध ट्रैफिक ब्लॉक, कुछ हिस्सों में एक-एक घंटे बंद रहेगा यातायात

मुंबई। हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत सीसीटीवी कैमरों के लिए गैन्ट्री लगाने का कार्य शुरू होने वाला है। इस वजह से सिन्नर इंटरचेंज से इगतपुरी इंटरचेंज के बीच चरणबद्ध तरीके से अस्थायी ट्रैफिक ब्लॉक लागू किया जाएगा। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यातायात प्रतिबंध दो चरणों में लागू किए जाएंगे। इस दौरान मुंबई और नागपुर दोनों दिशाओं में निर्धारित समय के लिए वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। पहले चरण में 31 अगस्त, 1 सितंबर और 2 सितंबर को सिन्नर इंटरचेंज से भरवीर इंटरचेंज के बीच ट्रैफिक ब्लॉक रहेगा। मुंबई की ओर जाने वाला यातायात दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक और नागपुर की ओर जाने वाला यातायात दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक बंद रखा जाएगा। दूसरे चरण में 4 सितंबर, 5 सितंबर और 7 सितंबर को भरवीर इंटरचेंज से इगतपुरी इंटरचेंज के बीच यातायात प्रतिबंध लागू रहेगा। इस अवधि में भी मुंबई दिशा में दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक तथा नागपुर दिशा में दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक ट्रैफिक बंद रहेगा। एमएसआरडीसी ने यात्रियों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे इन निर्धारित समयों को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं। अधिकारियों ने कहा कि कार्य के दौरान संभावित देरी से बचने के लिए पर्याप्त समय लेकर यात्रा शुरू करें और प्रशासन का सहयोग करें। अधिकारियों के अनुसार, समृद्धि महामार्ग पर सीसीटीवी आधारित निगरानी और आईटीएमएस प्रणाली को मजबूत करने के लिए यह कार्य किया जा रहा है, जिससे भविष्य में यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

ओडिशा में अगले 48 घंटे बेहद भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल राहत

नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, पश्चिम बंगाल और हिमालयी इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने के अनुमान हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के लोगों को फिलहाल भारी बारिश से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले दो से तीन दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की उम्मीद है और इस दौरान भारी बारिश की संभावनाएं नहीं है। आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में देश में मौजूदा मौसम की स्थिति को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस समय ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। खास तौर पर ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी भारत के अलावा हिमालयी क्षेत्रों में भी आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। डॉ. नरेश कुमार ने विशेष रूप से उत्तराखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालयी इलाकों में अगले छह से सात दिनों तक अत्यधिक बारिश होने की संभावना है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में लंबे समय तक भारी बारिश होने से भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क संपर्क प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर के लिए फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत राहत भरी रहने की उम्मीद है। डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अगले दो से तीन दिनों तक भारी बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में दिल्ली और आसपास के इलाकों में मौसम ज्यादातर शुष्क रहने का अनुमान है। डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल में भी मौसम की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आईएमडी ने राज्य के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण राज्य के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। अलीपुर मौसम विभाग के मौसम विज्ञानी सौरिश बंद्योपाध्याय ने आईएएनएस को बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और इसके प्रभाव से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि रविवार को बहुत ज्यादा बारिश होने की चेतावनी दी गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यंगी उज्बेकिस्तान पार्क में पुष्पांजलि अर्पित की, बताया- उज्बेक के समृद्ध इतिहास का सम्मान

ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ताशकंद में यंगी उज्बेकिस्तान पार्क में पुष्पांजलि अर्पित की और देश के समृद्ध इतिहास, विरासत और राष्ट्रीय भावना को सम्मान दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद के यंगी उज्बेकिस्तान पार्क में पुष्पांजलि अर्पित की और उज्बेकिस्तान के समृद्ध इतिहास, विरासत और राष्ट्रीय भावना का सम्मान किया। इस अवसर ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरी और लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को रेखांकित किया।” इस दौरान पीएम मोदी के साथ उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव भी मौजूद थे और दोनों नेताओं ने यंगी उज्बेकिस्तान पार्क में उज्बेक संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली कलाकृतियों को देखा। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य एशियाई देश की अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा शुरू करने पर ताशकंद हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव को धन्यवाद दिया। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव हवाई अड्डे पर पहुंचे और पीएम मोदी का स्वागत किया, जो पिछले 12 वर्षों में दोनों देशों के बीच काफी बढ़ी दोस्ती को दर्शाता है। ताशकंद में उतरने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा कर लिखा, “राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव द्वारा गर्मजोशी से स्वागत के साथ ताशकंद पहुंचा। इस विशेष भाव के लिए उनका आभारी हूं। यह उज्बेकिस्तान की मेरी चौथी यात्रा है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और बढ़ती गति को दर्शाती है।” यात्रा के दौरान पीएम मोदी राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे, जिसमें ‘विकसित भारत 2047’ और ‘उज्बेकिस्तान 2030’ के साझा विकास विजन को आगे बढ़ाया जाएगा। पीएम मोदी ने अपनी यात्रा से पहले कहा, “हाल के वर्षों में भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मैं व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा में हमारे सहयोग को और गहरा करने और विकसित भारत और यंगी उज्बेकिस्तान के हमारे साझा विजन को आगे बढ़ाने पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ अपनी चर्चा को लेकर उत्सुक हूं।

नेपाल की मदद के लिए भारत ने भेजी स्पेशल तकनीकी टीम, सुरंग से रेस्क्यू के लिए सर्च अभियान चलाया

काठमांडू। नेपाल में भारतीय दूतावास ने शनिवार को बताया कि भारत की एक विशेष तकनीकी टीम ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में सुरंगों के अंदर फंसे लोगों की तलाश और बचाव के लिए जलविद्युत सुरंगों का मौके पर सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। नेपाल के अनुरोध पर भारत ने डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेषज्ञ कर्मियों वाली 11 सदस्यीय रेस्क्यू टीम भेजी है। विशेष तकनीकी टीम रसुवा जिले में त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पहुंची है, जहां अचानक आए बाढ़ के बाद सुरंग के अंदर फंसे लोगों के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, भारतीय टीम ने आगे की जरूरत के हिसाब से बचाव अभियान चलाने से पहले हेलीकॉप्टर से चिलिमे और लांगतांग इलाकों का प्रारंभिक हवाई जायजा लेने की योजना बनाई है। पीएमओ ने बताया कि शुक्रवार रात से नेपाली सेना के 62 जवानों और सशस्त्र पुलिस बल नेपाल और नेपाल पुलिस के 20 जवानों सहित 82 नेपाली सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम सुरंग के प्रवेश द्वार को साफ करने और तलाशी अभियान में तेजी लाने के लिए लगातार तैनात है। बयान में कहा गया, “इलाके में प्रतिकूल मौसम के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।” स्थानीय विशेषज्ञता की सीमाओं के कारण बचाव अभियान धीमी गति से आगे बढ़ने के चलते नेपाल ने भारत और चीन से सहयोग मांगा है। दूतावास ने कहा कि भारत नेपाल के जारी राहत और बचाव प्रयासों का समर्थन जारी रखे हुए है और बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की तलाश और बचाव में नेपाली अधिकारियों के साथ संपर्क में बना हुआ है। नेपाल के निजी बिजली उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (आईपीपीएएन) ने कहा कि नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में 11 जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 934 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। एसोसिएशन के अनुसार, 26 अगस्त को भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद रसुवा में छह जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 730 लोग और नुवाकोट में पांच परियोजनाओं से जुड़े 204 लोग संपर्क से बाहर हैं। बाढ़ ने दोनों जिलों में जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। आईपीपीएएन के अनुसार, 26 अगस्त की बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट में 675.6 मेगावाट की संयुक्त स्थापित क्षमता वाली 13 जलविद्युत परियोजनाओं को प्रभावित किया है। इस बीच, दूतावास ने बताया कि भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (वाणिज्य) ने हाल ही में अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से बचाए गए भारतीय श्रमिकों से मुलाकात कर उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम की जानकारी ली।

नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 616, सरकार अंतरराष्ट्रीय मदद लेने के लिए सहमत

काठमांडू। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से शनिवार सुबह तक मरने वालों की संख्या 616 हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों के हवाले से स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी है। नेपाल के प्रमुख अखबार ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, शनिवार सुबह 6 बजे तक पुलिस ने चितवन में 233, नवलपरासी ईस्ट में 158, गोरखा में 48, नवलपरासी वेस्ट में 47, धाडिंग में 45, नुवाकोट में 41, तनहुन में 31 और रसुवा में 13 शव बरामद हुए थे। इस बीच, हिमालयी देश के प्रभावित जिलों में खोज और बचाव अभियान चल रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस लापता लोगों का पता लगाने और बाढ़ में फंसे लोगों की मदद करने के लिए स्थानीय निवासियों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। बचाए गए लोगों को ज्यादा जोखिम वाले इलाकों से सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा रहा है। इसके अलावा, खोज और बचाव दल बाढ़ के मलबे और भूस्खलन से बंद सड़कों को साफ करने का काम कर रहे हैं ताकि आवाजाही फिर से शुरू हो सके और राहत कार्यों में आसानी हो। बुधवार को नेपाल के रसुवा में आई जबरदस्त बाढ़ चीन के तिब्बत इलाके से शुरू हुई थी। यह बाढ़ सीमा पार से बहने वाली भोटेकोशी नदी के जरिए आई और देश में भारी तबाही मचाई। भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के किनारे बसे रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुन, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) जिले में नदी के किनारों से शव बरामद किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि खोज और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। इस बीच, नेपाल सरकार अंतरराष्ट्रीय खोज और बचाव टीमों से मदद लेने के लिए सहमत हो गई है। इससे पहले, बालेन शाह की सरकार ने यह कहते हुए मदद लेने से इनकार कर दिया था कि नेपाली बचावकर्मी खोज अभियान संभालने में सक्षम हैं और वह दूसरे देशों के बचावकर्मियों को अनुमति नहीं देगी। हालांकि, ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला एक दिन भी नहीं टिक पाया क्योंकि प्रशासन ने बचाव कार्यों के लिए विदेशी विशेषज्ञता से सीमित अंतरराष्ट्रीय मदद लेने का निर्णय लिया। नेपाल पर्यटन बोर्ड के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। शुक्रवार को भारत से सहायता सामग्री और 11 सदस्यीय चिकित्सा एवं सुरंग बचाव दल के साथ तीसरा विमान नेपाल पहुंचा। इस विमान में 10 टन मानवीय सहायता सामग्री थी, जिसमें पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और पानी को शुद्ध करने वाली गोलियां शामिल थीं। इसके अलावा, भारत ने गुरुवार को नेपाल को मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री, दवाओं और खाने के पैकेट की दूसरी खेप (37.5 टन) सौंपी, ताकि विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों में हिमालयी देश की मदद की जा सके।

यूपी : मोदीनगर में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, एक के पैर में लगी गोली, दूसरा गिरफ्तार

गाजियाबाद। गाजियाबाद के मोदीनगर थाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के पैर में गोली लग गई, जबकि उसके दूसरे साथी को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया। दोनों बदमाशों पर मोदीनगर क्षेत्र में बीते दिनों एक महिला से हुई लूट की वारदात में शामिल होने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, मोदीनगर इलाके में पुलिस टीम नियमित रूप से वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध युवक पुलिस को आते दिखाई दिए। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन दोनों युवक बाइक को दूसरी दिशा में भगाने लगे। पुलिस ने उनका पीछा किया। भागते समय उनकी मोटरसाइकिल खड़ंजे पर पड़ी ईंटों के कारण असंतुलित होकर फिसल गई। इसके बाद, दोनों बदमाशों ने पुलिस टीम पर 315 बोर के तमंचे से गोली चला दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान, पुलिस की एक गोली एक बदमाश के पैर में लग गई। पुलिस ने मौके से दोनों आरोपियों को दबोच लिया। घायल बदमाश को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पूछताछ में घायल आरोपी ने अपना नाम फारूक बताया, जबकि उसके साथी का नाम कासिम बताया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों मेरठ के रहने वाले हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से महिला से लूटे गए पीली धातु के कुंडल बरामद किए हैं। इसके अलावा एक 315 बोर का तमंचा, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है। बरामदगी के बाद पुलिस दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य वारदातों में उनकी संभावित संलिप्तता की जानकारी जुटा रही है। एसपी भास्कर वर्मा ने पत्रकारों को बताया कि चेकिंग के दौरान बाइक सवार दो संदिग्ध पुलिस को देखकर भागने लगे थे। बाइक का संतुलन बिगड़ने के बाद उन्होंने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में की गई कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों की पहचान फारूक और कासिम के रूप में हुई है और दोनों मेरठ के रहने वाले बताए गए हैं। घायल आरोपी का अस्पताल में उपचार चल रहा है। पुलिस की कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया की जाएगी।

कैलाश-मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे 26 तीर्थायात्री, बोले- वीजा मिला तो खुशी हुई, लेकिन आपदा का सामना करना पड़ा

विशाखापत्तनम। कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए आंध्र प्रदेश के 26 तीर्थयात्रियों का एक समूह नेपाल में अचानक आई बाढ़ के दौरान बाल-बाल बच गया था। सभी लोग सकुशल घर लौट आए हैं। सभी लोगों के चेहरों पर अलग ही खुशी देखने को मिल रही है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए तीर्थयात्री गाडू अलीवेनी ने बताया, “पिछले शुक्रवार को हम बागडोगरा एयरपोर्ट से काठमांडू पहुंचे। हमें उम्मीद थी कि वीजा तुरंत मिल जाएगा और हम आगे बढ़ पाएंगे, लेकिन हमें तीन दिन इंतजार करना पड़ा। आखिरकार पिछली रात वीजा आ ही गया। जैसे ही वीजा मिला, आंध्र से आए हम सभी 26 लोग और पश्चिम बंगाल से आए 28 लोग खुशी से झूम उठे, यह सोचकर कि ‘भगवान शिव ने हमें मंजूरी दे दी है।’ अलीवेनी ने बताया, “उससे पहले वाले दिन, जब वीजा में देरी हुई तो सब बहुत निराश थे; लोग सोच रहे थे कि भगवान शिव हमें क्यों रोक रहे हैं और उन्हें डर था कि शायद हम जा ही न पाएं। इसलिए जब वीज़ा मिला, तो हमारी खुशी का ठिकाना न रहा। लेकिन अगली सुबह आपदा का सामना करना पड़ा।” आईएएनएस से बात करते हुए तीर्थयात्री गाडू थतिनाइडु ने कहा, “मानसरोवर कैलाश यात्रा के तहत, इस महीने की 21 तारीख को रात करीब 9:30 बजे हममें से 26 लोग भोगापुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यात्रा के लिए निकले। हालांकि, चीन से वीजा मिलने में देरी की वजह से हमें काठमांडू में तीन दिन रुकना पड़ा। हमारे साथ-साथ ईशा फाउंडेशन के सदस्यों और पश्चिम बंगाल के ग्रुप्स को भी ग्रुप वीजा जारी किए गए थे। हम सभी एक साथ यात्रा कर रहे थे और वीजा में देरी हुई, इसलिए हमें काठमांडू में तीन दिन रुकना पड़ा। अगले दिन, रात करीब 8:30 बजे हमें अपने वीजा मिले। लेकिन अगली सुबह त्रासदी का सामना करना पड़ा।” आईएएनएस से बात करते हुए, विशाखापत्तनम जिला पशुधन विकास संघ के चेयरमैन गाडू वेंकटाप्पाडू ने बताया, “हम आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के भीमूनिपटनम से हैं। हम 21 तारीख को यहां से निकले, दिल्ली गए, और फिर दिल्ली से मानसरोवर यात्रा के लिए काठमांडू गए। वहां पहुंचने के बाद, चीनी सरकार ने हमारे वीजा में तीन दिन की देरी कर दी क्योंकि मानसरोवर रास्ते में बाढ़ आई हुई थी। एक तरह से, हमें लगता है कि यह अच्छा ही हुआ; अगर देरी नहीं होती, तो हम प्रभावित इलाके में फंस जाते। इस तरह हम बच गए।

तमिलनाडु सरकार ने होसुर फॉरेस्ट डिवीजन में तीन हाथी कॉरिडोर की घोषणा की

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने होसूर फॉरेस्ट डिवीजन में कावेरी नॉर्थ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के तीन हाथी कॉरिडोर को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। इससे हाथियों के रहने की जगहों के बीच संपर्क बेहतर होगा और तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच हाथियों की सुरक्षित मौसमी आवाजाही आसान होगी। अधिसूचना के तहत जवालागिरी-उलिबांडा-थग्गाट्टी, जवालागिरी-पनाई-अंचेट्टी और बिल्लिकल-जवालागिरी पहचाने गए कॉरिडोर हैं। यह आदेश पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ककरला उषा ने जारी किया। ये तीनों कॉरिडोर मिलकर 10,300 हेक्टेयर से अधिक रिजर्व फॉरेस्ट और वाइल्डलाइफ सेंक्चुअरी की जमीन को कवर करते हैं। तीनों में सबसे बड़ा कॉरिडोर जवालागिरी-पनाई-अंचेट्टी है, जो 20.90 किलोमीटर तक फैला है और इसमें 6,881.47 हेक्टेयर जमीन शामिल है। जवालागिरी-उलिबांडा-थगट्टी कॉरिडोर 18.50 किलोमीटर के दायरे में 3,241.53 हेक्टेयर जमीन को कवर करता है। सबसे छोटा कॉरिडोर बिलिक्कल-जवालागिरी, 2.20 किलोमीटर लंबा है और लगभग 196 हेक्टेयर जमीन को कवर करता है। यह सरकारी नोटिफिकेशन मद्रास हाई कोर्ट के अंतरिम निर्देशों और उन कमेटियों की सिफारिशों के आधार पर जारी किया गया है, जिन्हें हाथियों के कॉरिडोर की पहचान करने और उनके संरक्षण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए नियुक्त किया गया था। राज्य सरकार को ‘प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स’ और ‘चीफ़ वाइल्डलाइफ वॉर्डन’ की ओर से सौंपी गई एक रिपोर्ट में इन तीनों रास्तों को हाथियों की मौसमी आवाजाही के लिए अहम बताया गया है। ये कॉरिडोर तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा पर अहम इकोलॉजिकल लिंक बनाते हैं। हाथियों के झुंड मानसून के पैटर्न, पानी और चारे की उपलब्धता में बदलाव, प्रजनन की जरूरतों और रहने की दूसरी स्थितियों के आधार पर नियमित रूप से इन दोनों राज्यों के बीच आते-जाते रहते हैं। इसलिए, हाथियों की आबादी को बनाए रखने और टुकड़ों में बंटे उनके रहने की जगहों पर दबाव कम करने के लिए इन पारंपरिक रास्तों को बचाना जरूरी माना जाता है। चूंकि ये तीनों कॉरिडोर पहले से ही रिजर्व फॉरेस्ट या सुरक्षित अभयारण्य इलाकों में आते हैं, इसलिए इस नोटिफिकेशन से जमीन के कानूनी वर्गीकरण में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे स्थानीय लोगों पर कोई अतिरिक्त पाबंदी भी नहीं लगेगी, क्योंकि ये इलाके पहले से ही रिजर्व फॉरेस्ट या वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत आते हैं। हालांकि, औपचारिक मान्यता मिलने से इन कॉरिडोर को संरक्षण के मामले में ज्यादा प्राथमिकता मिलने, वन अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल होने और भविष्य में विकास कार्यों या रहने की जगहों में रुकावट के कारण हाथियों की आवाजाही बाधित होने से रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे लंबे समय की लैंडस्केप प्लानिंग, वन्यजीवों की निगरानी और माइग्रेशन रूट के पास की बस्तियों में इंसान और हाथी के बीच टकराव को कम करने के उपायों में भी मदद मिल सकती है, साथ ही इन रास्तों पर खराब हो चुके हिस्सों को ठीक करने के लिए खास कोशिशों को भी दिशा मिल सकती है। यह नोटिफिकेशन तमिलनाडु सरकार के राजपत्र (गजट) और कृष्णगिरि जिले के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे औपचारिक मान्यता की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

नई दिल्ली। अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा। आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है। बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है। आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं। अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है। आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं। वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं। इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं। हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते। विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए। साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए। टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है। इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें। इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है। जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ की बधाई, मेजर ध्यानचंद को किया याद

नई दिल्ली। हॉकी दिग्गज मेजर ध्यानचंद की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने देशवासियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की बधाई दी है और मेजर ध्यानचंद को याद किया है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रीय खेल दिवस पर सभी को बधाई। मेजर ध्यानचंद की हमेशा रहने वाली विरासत का सम्मान करते हुए, हम पक्के इरादे, अनुशासन और बेहतरीन काम की भावना का जश्न मनाते हैं, जो भारत की खेल संस्कृति को दिखाता है। भारत का बढ़ता स्पोर्ट्स इकोसिस्टम हर स्तर पर प्रतिभा को आगे बढ़ाने के हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। हमारे एथलीट वैश्विक स्टेज पर चमकते रहते हैं, देश का नाम रोशन करते हैं और अगली पीढ़ी को ऊंचे लक्ष्य रखने के लिए प्रेरित करते हैं।” उन्होंने लिखा, “आइए, यह दिन फिटनेस को बढ़ावा देने, खेलों में ज्यादा से ज्यादा हिस्सा लेने को बढ़ावा देने और हर युवा भारतीय को लगन और लगन के साथ बेहतरीन काम करने के लिए प्रेरित करने के हमारे इरादे को फिर से मजबूत करे।” पीएम मोदी ने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए राष्ट्रीय खेल दिवस की बधाई दी है। उन्होंने लिखा, “हर खेल प्रेमी के लिए आपकी लगन, जुनून और पक्का इरादा सभी को गर्व महसूस कराता है। हम महान मेजर ध्यानचंद को भी श्रद्धांजलि देते हैं, जिनकी प्रतिभा पीढ़ियों को प्रेरित करती है।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, “राष्ट्रीय खेल दिवस पर, मैं मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि देता हूं। उनका बेमिसाल हुनर, लगन और हॉकी के लिए प्यार भारतीयों की कई पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। मैं हमारे उन खिलाड़ियों को भी सलाम करता हूं जो अपनी स्किल, कड़ी मेहनत और शानदार कामयाबियों से दुनिया भर में भारत का तिरंगा गर्व से लहरा रहे हैं।” उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एथलीटों को मजबूत बनाने, युवा टैलेंट को आगे बढ़ाने और खेल की उम्मीदों को राष्ट्रीय कामयाबियों में बदलने के लिए एक मजबूत स्पोर्टिंग इकोसिस्टम बनाया जा रहा है।” जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने एक्स पर लिखा, “सभी खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की बधाई। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। प्रेरणा के प्रतीक, उन्होंने देश को बहुत गर्व दिलाया। उनकी शानदार खेल भावना और उपलब्धियां पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।