विवादों से आगे बढ़कर अमेरिकी लोगों तक संगठन का संदेश पहुंचाएगा मोहन भागवत का संबोधन: गायिका मैरी मिलबेन

न्यूयॉर्क। अमेरिका की लोकप्रिय गायिका मैरी मिलबेन ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपने न्यूयॉर्क संबोधन को विवादों से आगे बढ़कर संगठन के कार्यों और उसके संदेश को सीधे अमेरिकी लोगों तक पहुंचाने के लिए कर सकते हैं। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “सबसे पहले मैं आरएसएस प्रमुख का अमेरिका में स्वागत करती हूं। मुझे लगता है कि जब ऐसे विवाद शुरू होते हैं तो हम किसी का अपने देश में स्वागत करने की मूल भावना को भूल जाते हैं।” मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम को संबोधित करने वाले हैं। यह कार्यक्रम एकता और आपसी जुड़ाव के विषय पर केंद्रित है, लेकिन इसे लेकर शहर में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। मैरी मिलबेन ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय से बाहर अधिकांश अमेरिकी आरएसएस के बारे में बहुत कम जानते हैं। अगर आप न्यूयॉर्क की सड़कों पर किसी आम अमेरिकी से बात करें तो उसे शायद यह भी पता नहीं होगा कि आरएसएस क्या है। उन्होंने माना कि संगठन अतीत में कुछ विवादों का हिस्सा रहा है, लेकिन उनका कहना था कि उसके नेताओं को न्यूयॉर्क के इस कार्यक्रम का इस्तेमाल आज के समय में आरएसएस के संदेश को समझाने के लिए करना चाहिए। मिलबेन ने कहा, “मुझे लगता है कि आरएसएस प्रमुख और संगठन के नेताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे लोगों को बताएं कि आज के समय में आरएसएस का संदेश क्या है।” उन्होंने कहा कि मेरी उम्मीद है कि आरएसएस प्रमुख इस कार्यक्रम का उपयोग अमेरिकी जनता को आरएसएस के सकारात्मक पहलुओं के बारे में बताने के लिए करेंगे, खासकर हिंदू समुदाय के समर्थन से जुड़े उसके कार्यों के बारे में। मिलबेन ने कार्यक्रम के आयोजकों से अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर इस कार्यक्रम का विषय एकता और समरसता है तो यह एक अच्छा मौका है कि वे अन्य समुदायों और धर्मों के लोगों को भी आमंत्रित करें। इससे यह दिखाया जा सकता है कि आरएसएस और प्रधानमंत्री के धार्मिक स्वतंत्रता के संदेश को व्यापक समर्थन प्राप्त है। गायिका ने मोहन भागवत की यात्रा को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की टिप्पणियों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि उनका रुख डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका से उनकी निकटता से प्रभावित दिखाई देता है और उन्होंने इस विचारधारा को काफी कट्टर बताया। मिलबेन ने कहा, “मुझे उम्मीद थी कि वे भारत से आने वाली उन बातों का विरोध करेंगे जो लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता और निश्चित रूप से प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन से जुड़ी हों।” उनका मानना था कि ममदानी की टिप्पणियां केवल मोहन भागवत को लेकर नहीं थीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके प्रतिनिधित्व वाले विचारों की ओर भी इशारा करती थीं। मिलबेन ने ममदानी को एक प्रतिभाशाली राजनेता बताया, लेकिन कहा कि वे अपनी पार्टी के भीतर कुछ लोगों के प्रभाव में गलत दिशा में जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे एक प्रतिभाशाली युवा हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें गलत दिशा में मार्गदर्शन मिल रहा है। यदि उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर सही मार्गदर्शन मिले और दुनिया, अमेरिका तथा न्यूयॉर्क के काम करने के तरीके की बेहतर समझ हो तो उनका भविष्य बहुत अच्छा हो सकता है।” मिलबेन ने कहा कि भागवत को इस कार्यक्रम का इस्तेमाल राजनीतिक टकराव की बजाय सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह कार्यक्रम ममदानी और अन्य लोगों की ओर से पैदा किए गए शोर-शराबे को शांत करने का एक अच्छा अवसर है। मुझे उम्मीद है कि आरएसएस प्रमुख और अन्य नेता इस अवसर का पूरा फायदा उठाएंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 1925 में हुई थी। संगठन खुद को स्वयंसेवकों पर आधारित एक सांस्कृतिक संगठन बताता है। मोहन भागवत 2009 से इसके सरसंघचालक यानी प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरएसएस को भारत के व्यापक हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलन में एक प्रभावशाली संगठन माना जाता है। मैरी मिलबेन भारत में विशेष रूप से राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ और भक्ति गीत ‘ॐ जय जगदीश हरे’ की अपनी प्रस्तुतियों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका में भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े कई कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति दी है।
नेपाल बाढ़ त्रासदी : कैलाश यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन के 80 लोग लापता, सद्गुरु ने मांगी घटनास्थल पर जाने की अनुमति

नई दिल्ली। तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ पर आध्यात्मिक गुरु व ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरा दुख जताते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर पर तबाही हुई है, उसे देखते हुए अभी नुकसान का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन से जुड़ा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया एक समूह बाढ़ की चपेट में आया, जिसमें 80 लोग शामिल थे। सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह खुद घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सभी फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद हैं और रास्ते भी बाधित हैं। ऐसे में प्रभावित इलाके में संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के जरिए वहां पहुंचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि राहत और बचाव के काम में मदद की जा सके। सद्गुरु ने बताया, “हमारे ग्रुप में से एक एस3 ग्रुप जिससे हम सागर में मिले थे और फिर दोबारा तब मिले जब हम ऊपर ट्रेकिंग कर रहे थे और वे नीचे आ रहे थे। इस ग्रुप में 80 लोग शामिल थे जिनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं थीं। इनमें से 22 लोग अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति ग्रुप में शामिल था। सद्गुरु ने बताया कि समूह जब वापसी के दौरान इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा, तब तक सब कुछ सामान्य था। बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर ने संदेश भेजकर बताया था कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके हैं। इसके कुछ ही मिनट बाद करीब 9:14 बजे अचानक यह भयावह आपदा आई। इसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क टूट गया। सद्गुरु ने कहा कि उनके नेपाल के फोन नंबर भी सक्रिय नहीं हुए, जिससे चिंता और बढ़ गई। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन स्वयंसेवक लापता बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां इमारतें और शहर का एक हिस्सा तक पानी और मलबे में बह गया। इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लापता हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह के साथ स्वयंसेवक और एक डॉक्टर भी मौजूद थे। कई नेपाली गाइड भी यात्रा दल के साथ थे और उनके परिवार प्रभावित इलाके में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ तीर्थयात्रियों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। सद्गुरु ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल की तरफ सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात सामने आ रही है जबकि तिब्बत की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है। शुरुआत में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था। हालांकि बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत मिले कि आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से का खिसकना या ग्लेशियर से जुड़ी घटना हो सकती है। इसके बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा और देखते ही देखते तेज फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि रास्ते, पुल, मकान और दूसरी संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं। राहत एवं बचाव दल के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई जगहों पर सड़कें टूटने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना मुश्किल है। सद्गुरु ने कहा कि इस मुश्किल समय में सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की है। उन्होंने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है और प्रभावित परिवारों तक भी संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम हरसंभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी काम है कि किसी भी तरह प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाए और वहां मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए।
कृति सेनन के विज्ञापन विवाद पर सोनू निगम ने तोड़ी चुप्पी, बोले- वह अकाउंट मेरा नहीं है

मुंबई। सिंगर सोनू निगम ने अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन वाले विज्ञापन को लेकर चल रहे विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि मीडिया जो दिखा रहा है, वह गलत है। दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में इस विवाद पर लंबा पोस्ट सोनू निगम के नाम शेयर किया गया था। सिंगर ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर कर साफ किया कि वह अकाउंट उनका नहीं है। सोनू निगम ने इंस्टाग्राम पर एक नोट शेयर करते हुए लिखा, “यह मैं नहीं हूं और मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया था।” बता दें कि अभिनेत्री कृति सेनन के विज्ञापन विवाद पर प्रतिक्रिया देने वाला पोस्ट सोनू निगम के नाम वाले एक ‘एक्स’ अकाउंट से शेयर किया गया था। पोस्ट में लिखा था, “विवाद किसी भी तरह से इस बात पर नहीं है कि एक महिला क्या पहनती है। समस्या पाखंड और हिंदू त्योहारों पर उनकी परंपराओं के जरिए लोगों को प्रभावित करने की तरीकों में है। ऐसा नहीं है कि कृति सेनन ने पहली बार कुछ ऐसा पहना है, जिससे विवाद खड़ा हो गया।” सोनू निगम के फैंस ने सिंगर के कमेंट सेक्शन में बताया कि यह अकाउंट सोनू निगम नाम के किसी दूसरे व्यक्ति का है, जबकि सिंगर ने कई बार साफ किया है कि वह एक्स पर नहीं हैं। सिंगर प्राजक्ता शुकरे ने भी सोनू निगम की सफाई पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कमेंट में लिखा, “सोनू कई सालों से साफ तौर पर कह रहे हैं कि वह एक्स पर नहीं हैं और यह अकाउंट उनका नहीं है। फिर भी यह अकाउंट उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा है और ऐसे निजी विचार शेयर कर रहा है जैसे कि वह उन्हीं की तरफ से आ रहे हों। यह इस बात पर नहीं है कि कोई उन विचारों से सहमत है या नहीं। यह पहचान और जवाबदेही की बात है। एक्स के अपने नियम भ्रामक प्रतिरूपण को रोकते हैं। फिर भी इसे जारी क्यों रहने दिया जा रहा है? इसे अभी तक हटाया क्यों नहीं गया?” उन्होंने आगे कहा, “और मीडिया के लिए भी एक सवाल आप सोनू निगम जैसे दिग्गज के नाम पर बयान और राय बिना पुष्टि किए कैसे प्रकाशित कर सकते हैं? जब कलाकार ने खुद बार-बार साफ किया है कि वह एक्स पर नहीं हैं, तो क्या एक जिम्मेदार मीडिया हाउस को किसी प्रतिरूपण करने वाले को मंच देने से पहले सबसे पहले यही जांच नहीं करनी चाहिए? एक फर्जी अकाउंट जो चाहे पोस्ट कर सकता है, लेकिन मीडिया का इसे एक दिग्गज के नाम से आगे बढ़ाना बिल्कुल गलत है।” यह विवाद कृति सेनन वाली एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर हुए विरोध के बीच सामने आया है। कृति के आउटफिट को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने इस कैंपेन की आलोचना की थी। कृति रक्षाबंधन मनाते हुए ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहने नजर आई थीं। कुछ यूजर्स ने रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर आधारित विज्ञापन के लिए इस तरह के आउटफिट को अनुचित बताकर इसकी आलोचना की थी। बाद में कृति ने इस आलोचना पर जवाब देते हुए अपने आउटफिट और कैंपेन दोनों का बचाव किया था।
पीएम से संवाद का मौका खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करेगा: दलजिंदर सिंह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को ‘खेलो इंडिया संवाद कार्यक्रम’ के दौरान देश भर के युवा एथलीटों को वर्चुअली संबोधित करेंगे। एथलीटों के लिए यह विशेष अवसर होगा। खेल जगत से जुड़े लोगों ने इस कार्यक्रम की प्रशंसा की है। स्पेशल ओलंपिक्स भारत टीम के कोच और पूर्व वर्ल्ड कप हॉकी खिलाड़ी दलजिंदर सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “सबसे पहले, मैं प्रधानमंत्री मोदी और स्पेशल ओलंपिक्स भारत की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा को उनके पूरे समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं पूरे एसओबी (स्पेशल ओलंपिक्स भारत) संस्था को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिसने इन बच्चों के लिए बहुत अच्छे इंतजाम किए और कैंप लगाए। इसी वजह से हम एफआईएच विश्व कप में हिस्सा ले सके।” उन्होंने कहा, “विश्व कप में हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा। वहां 16 टीमें थीं। सभी टीमों को 8-8 की संख्या में 2 पूल में बांटा गया था। हम पूल बी में थे। हमारी दुनिया में 11वीं रैंकिंग है।” दिलजिंदर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री से बात करने का मौका खिलाड़ियों के लिए खास है और इससे उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन करने का प्रोत्साहन मिलेगा। इंडियन पैरा हॉकी टीम के सीनियर खिलाड़ी ईशान प्रताप सिंह ने कहा, “असल में प्रधानमंत्री जानते हैं कि हम सभी एक नैतिक जीवन जीना चाहते हैं। हम ईमानदारी से हॉकी खेलते हुए सफलता हासिल करना चाहते हैं।” कोच राजेश्वरी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खेल को बढ़ावा दे रहे हैं। खिलाड़ियों के जरूरत की सभी चीजें सरकार उपलब्ध करा रही है। पैरा एथलीटों को भी काफी सहायता मिल रही है। हम लोग पैरा विश्व कप खेलने गए। इसमें सरकार का अहम योगदान रहा।” पीएम मोदी देश भर में होने वाले कार्यक्रम ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत युवा एथलीटों और युवा नेताओं को संबोधित करेंगे। नेशनल स्पोर्ट्स डे 2026 के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम 1,500 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों में वर्चुअली आयोजित किया जाएगा। बड़े पैमाने पर होने वाला यह युवा सहभागिता कार्यक्रम उभरते हुए एथलीटों, विद्यार्थियों, नीति निर्माताओं और जाने-माने खिलाड़ियों को एक साथ लाएगा, जिससे युवा प्रतिभागियों के लिए भारत के स्पोर्टिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने और देश के युवाओं के लिए मौके बढ़ाने के लिए आइडिया साझा करने का एक प्लेटफॉर्म तैयार होगा।
गौतमबुद्ध नगर में बढ़ा स्वाइन फ्लू और डेंगू का खतरा, संक्रमित मरीजों की संख्या 140 पहुंची

नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में स्वाइन फ्लू और डेंगू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले में स्वाइन फ्लू संक्रमण के मामलों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले आंकड़ों की तुलना में 20 नए मरीज सामने आने के बाद स्वाइन फ्लू से प्रभावित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 140 हो गई है। लगातार बढ़ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभाग की ओर से लोगों को बदलते मौसम के बीच विशेष सावधानी बरतने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कराने की सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों में मुख्य रूप से तेज बुखार, सूखी खांसी और गले में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों में कमजोरी, शरीर में दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें भी सामने आ सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर लगातार तेज बुखार या खांसी की समस्या रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू की पहचान के लिए रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के मुताबिक संक्रमण के लक्षण वाले लोगों को जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू और डेंगू दोनों ही बीमारियों के लक्षणों में शुरुआती स्तर पर कुछ समानताएं हो सकती हैं, इसलिए बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के खुद से दवा लेना उचित नहीं है। विशेष रूप से बुखार आने पर मरीज को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही उपचार लेना चाहिए। स्वाइन फ्लू के साथ-साथ जिले में डेंगू के खतरे को देखते हुए भी स्वास्थ्य विभाग निगरानी कर रहा है। बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों से घरों और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की जा रही है। कूलर, गमले, छत और अन्य स्थानों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि बुखार, खांसी, गले में दर्द या शरीर में असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण होने पर लापरवाही न बरतें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचें, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें तथा हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
भारत दौरे की वजह से न्यूजीलैंड में टिकटों की रिकॉर्ड मांग

क्राइस्टचर्च। न्यूजीलैंड क्रिकेट के इंटरनेशनल समर क्रिकेट ने रिकॉर्ड तोड़ शुरुआत की है। क्रिकेट नेशन मेंबर्स की प्री-सेल के पहले 48 घंटों के अंदर 26,000 टिकट बिक गए। टिकटों की जबरदस्त मांग भारत दौरे की वजह से है। भारतीय टीम अक्टूबर में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज के लिए न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। इस दौरे पर 12 मैच खेले जाने हैं। ऑकलैंड के ईडन पार्क में व्हाइट-बॉल मैच शुरुआती बिक्री में सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरा हैं। क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल में भी टिकटों की जबरदस्त मांग देखी गई है। 9,000 की क्षमता वाले इस वेन्यू पर 22 और 24 अक्टूबर को होने वाले शुरुआती दो टी20 के साथ-साथ 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक होने वाले टूर के दूसरे और आखिरी टेस्ट के लिए भी टिकट बिक जाने की उम्मीद है। वेलिंगटन में भी टिकटों की बिक्री जोरों पर है। यहां तीसरा टी20 और दूसरा वनडे खेला जाना है। पहला टेस्ट, जो 19 नवंबर से शुरू होगा, बेसिन रिजर्व में खेला जाएगा। न्यूजीलैंड क्रिकेट के चीफ मार्केटिंग और कमर्शियल ऑफिसर ग्लेन क्रिचली ने कहा कि शुरुआती रिस्पॉन्स भारत के दौरे को लेकर उत्साह दिखाता है। शुरू से ही फैन्स के लिए हमारा संदेश यही रहा है कि वे कुछ भी मिस न करने के लिए तैयार रहें। पहले दो दिनों में टिकटों की रिकॉर्ड बिक्री से यह साबित होता है कि बहुतों ने हमारी बात सुनी है। न्यूजीलैंड के लोगों के लिए यह एक बहुत कम मिलने वाला मौका है कि वे भारत से जुड़े क्रिकेट के खेल का जबरदस्त मजा लें और दुनिया के कुछ सबसे बड़े क्रिकेट स्टार को खेलते हुए देखें।” उन्होंने कहा, “हमने जानबूझकर टिकट की कीमतें पिछले सीजन जितनी ही रखी हैं, और हमारे क्रिकेट नेशन एक्सेस कोड का इस्तेमाल करके एक टिकट 30 डॉलर से कम में मिल रहा है। हमें खुशी है कि फैंस अपनी सीट पक्की करने के लिए जल्दी आ रहे हैं और जनरल पब्लिक सेल में अभी 11 दिन बाकी हैं। हमारा संदेश यही है कि मौका न चूकें।” क्रिचली ने ‘द फोर’ और ‘द सिक्स’ ग्रुप टिकट पैकेज के साथ-साथ वेन्यू टिकट बंडल को भी हाईलाइट किया, जो उन सपोर्टर्स के लिए अतिरिक्त वैल्यू विकल्प है और जो कई मैच देखने का प्लान बना रहे हैं। जनरल पब्लिक सेल 7 सितंबर से शुरू होने वाली है। हालांकि, फैंस अभी भी क्रिकेट नेशन के लिए साइन अप करके एक्सक्लूसिव प्री-सेल का फायदा उठा सकते हैं, जो टिकटों पर 15 प्रतिशत का डिस्काउंट भी देता है। भारतीय टीम 22 अक्टूबर से 27 नवंबर 2026 तक न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 टी20, 5 वनडे और 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी।
सोना बढ़त के साथ खुला, चांदी का दाम 2.40 लाख के पार

मुंबई। सोने और चांदी की शुरुआत गुरुवार को तेजी के साथ हुई। हालांकि, दोनों कीमती धातुओं का दाम एक सीमित दायरे में बना हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,59,663 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 836 रुपए की तेजी के साथ 1,60,499 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह सुबह 9:45 पर 468 रुपए या 0.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,60,131 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। शुरुआती कारोबार में सोने ने 1,59,954 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,60,898 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ था। चांदी में भी खरीदारी देखी जा रही है। चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोंजिग 2,39,638 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,361 रुपए की मजबूती के साथ 2,42,999 रुपए प्रति किलो पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसमें मुनाफावसूली देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक यह 923 रुपए या 0.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,40,561 रुपए प्रति किलो पर था। अब तक कारोबार में सोने ने 2,40,429 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,42,999 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ था। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई लगातार फेड के लक्ष्य 2 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। इससे फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ने की संभावना बनी हुई है। वहीं, बॉन्ड यील्ड कम हैं, जिससे सोने एक सीमित दायरे में बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। सोना 0.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,678 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.41 प्रतिशत की मजबूती के साथ 68.98 डॉलर प्रति औंस पर था। सोने और चांदी का प्रदर्शन बीते एक महीने में काफी अच्छा रहा है। इस दौरान सोने ने डॉलर में करीब 15 प्रतिशत और चांदी ने 17.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। वहीं, बीते एक साल में सोने ने 36 प्रतिशत से अधिक और चांदी ने 76 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
गुजरात में अलग-अलग सेक्टर में ज्यादा इन्वेस्ट करने के लिए उत्सुक हैं निवेशक : सीएम भूपेंद्र पटेल

अहमदाबाद। अमेरिका और कनाडा की सफल यात्रा के बाद लौटने पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का अहमदाबाद एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि राज्य सरकार का मकसद गुजरात में ज्यादा से ज्यादा ग्लोबल निवेश लाना रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पत्रकारों से कहा, “इस यात्रा के दौरान हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्लोबल रिश्तों और उन पर लोगों के भरोसे का असर देखा है। प्रधानमंत्री पर लोगों के पूरे भरोसे की वजह से, निवेशक अलग-अलग सेक्टर में ज़्यादा निवेश करने के लिए उत्सुक हैं।” उन्होंने कहा कि डेलीगेशन का मकसद यह पक्का करना था कि भारत में आने वाला निवेश गुजरात में आए। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर की बड़ी कंपनियों और इन्वेस्टर्स के साथ-साथ उपहार सिटी के लिए प्रमुख फाइनेंशियल कंपनियों के साथ हुई मीटिंग्स में उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। मुख्यमंत्री ने कहा, “कई कंपनियां गुजरात में निवेश करने के लिए उत्साहित हैं।” अमेरिका और कनाडा की यात्रा के फायदेमंद साबित होने का भरोसा जताते हुए भूपेंद्र पटेल ने कहा, “गुजरात में बहुत अच्छा निवेश आएगा।” बता दें कि यात्रा के दौरान ग्लोबल इन्वेस्टर्स और इनोवेटर्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में 10 से 12 जनवरी 2027 तक होने वाले 11वें वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में निवेश, सहयोग और पार्टनरशिप के लिए आमंत्रित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नेतृत्व में गुजरात सरकार के एक हाईलेवल डेलीगेशन ने आगामी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका और कनाडा की अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। यात्रा के दौरान डेलीगेशन ने सैन फ्रांसिस्को, वाशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में इन्वेस्टर्स, टेक्नोलॉजी लीडर्स, युवा उद्यमियों, इनोवेटर्स और गुजराती समुदाय के सदस्यों के साथ बैठकें कीं। डेलीगेशन में मुख्य सचिव एमके दास, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी नटराजन, उद्योग और खान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ममता वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार शामिल थे। इसके साथ ही वहां मौजूद लोगों में इंडेक्स-बी के मैनेजिंग डायरेक्टर केसी संपत, इंडस्ट्रीज के एडिशनल कमिश्नर अमित प्रकाश यादव, अहमदाबाद सिटी पुलिस कमिश्नर अनूप सिंह गहलोत और अहमदाबाद जिला कलेक्टर भव्य वर्मा समेत अन्य अधिकारी शामिल थे।
ट्रंप ने सीआईए प्रमुख की रूस यात्रा को ‘अर्ध-नियमित’ बताया

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ की रूस की अघोषित यात्रा को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज करते हुए इसे “काफी हद तक एक अर्ध-नियमित (सेमी-रूटीन) यात्रा” बताया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह दौरा यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में सहायक साबित हो सकता है। ट्रंप ने यह टिप्पणी रूढ़िवादी प्रसारक ग्लेन बेक को दिए एक साक्षात्कार में की। बेक ने उनसे उन खबरों के बारे में सवाल किया था, जिनमें कहा गया था कि सीआईए प्रमुख रात के बीच में रूस के लिए रवाना हुए थे। बेक ने इस यात्रा को लेकर लगाई जा रही विभिन्न अटकलों का जिक्र किया, जिनमें नाटो की प्रतिबद्धता की रूस द्वारा संभावित परीक्षा से लेकर ईरान से जुड़े प्रतिबंधों के संबंध में अमेरिका की चेतावनी पहुंचाने जैसे दावे शामिल थे। इस पर ट्रंप ने कहा, “हां, लेकिन इनमें से कोई भी बात सही नहीं है।” राष्ट्रपति ने कहा, “वह वहां एक तरह के काफी हद तक अर्ध-नियमित काम से गए हैं। मुझे लोगों को निराश करने से नफरत है।” ट्रंप ने यह नहीं बताया कि रैटक्लिफ रूस कब पहुंचे, वह किन लोगों से मुलाकात कर रहे हैं या उनकी यात्रा का सटीक उद्देश्य क्या है। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि सीआईए निदेशक कितने समय तक रूस में रहेंगे। हालांकि राष्ट्रपति ने इस यात्रा को व्यापक रूप से अपने प्रशासन के उस प्रयास से जोड़ा, जिसका उद्देश्य रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करना है। उन्होंने कहा, “हम यूक्रेन के साथ युद्ध का अंत देखना चाहते हैं।” ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि यदि रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण किए जाने के समय वह राष्ट्रपति होते, तो यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। उन्होंने कहा, “यह ऐसा युद्ध है, जो मेरे राष्ट्रपति होने पर कभी शुरू नहीं होता। यह उन नकारात्मक परिणामों में से एक है, जो मेरे सत्ता में न होने के कारण सामने आए।” ट्रंप ने आगे कहा, “आपके पास यूक्रेन का युद्ध नहीं होता और न ही 2.5 करोड़ लोग हमारे देश में आते, जैसे वे आए, मानो हम मूर्ख हों।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में प्रवेश करने वालों की संख्या इससे भी अधिक थी और आरोप लगाया कि उनमें से कुछ लोग जेलों से आए थे या गंभीर अपराधों में शामिल थे। इसके बाद ट्रंप ने फिर रैटक्लिफ का जिक्र करते हुए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “जॉन रैटक्लिफ एक शानदार व्यक्ति हैं। वह सीआईए के प्रमुख हैं।” ट्रंप ने कहा, “और वह वहां उन कारणों से नहीं गए हैं, जिनका आपने उल्लेख किया।” हालांकि उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि रैटक्लिफ की यात्रा से कोई कूटनीतिक प्रगति हो सकती है। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन युद्ध समाप्त कराने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है और उनका मानना है कि अब दोनों पक्ष भी इसे खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि इस यात्रा से कुछ सकारात्मक परिणाम निकलें। हम इस युद्ध को समाप्त करने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं।” ट्रंप ने कहा, “सच कहूं तो इस समय दोनों पक्ष इस युद्ध का अंत चाहते हैं।” राष्ट्रपति ने किसी संभावित वार्ता, युद्ध समाप्त करने की शर्तों या इस बात का कोई विवरण नहीं दिया कि क्या रैटक्लिफ उनकी ओर से कोई विशेष संदेश लेकर गए हैं। साक्षात्कार में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि सीआईए निदेशक की बैठकें वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच किसी व्यापक कूटनीतिक संपर्क का हिस्सा हैं या नहीं। टेक्सास से पूर्व रिपब्लिकन सांसद रह चुके जॉन रैटक्लिफ ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (डीएनआई) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
रीढ़ को लचीला बनाता है तिर्यक ताड़ासन, जानें करने के सही तरीके और फायदे

नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खानपान की वजह से कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। ऐसे में खुद को तरोताजा और फिट रखने के लिए योग से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इन्हीं आसनों में से एक है तिर्यक ताड़ासन, जो पेट और कमर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। आयुष मंत्रालय और योग संस्थानों के दिशा-निर्देशों के अनुसार, तिर्यक ताड़ासन (झूलते ताड़ के पेड़ की मुद्रा) शरीर को लचीला बनाने और संतुलन सुधारने का एक बेहतरीन योगासन है। यह एक आसान और प्रभावी खड़े होकर किया जाने वाला आसन है, जिसमें शरीर को साइड की ओर झुकाया जाता है। इस आसन में सजगता बहुत जरूरी है। तिर्यक ताड़ासन के अभ्यास के लिए, सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में खड़े होकर पैरों को कंधों की चौड़ाई जितना अलग रखें, शरीर सीधा और हाथ नीचे रखें। सांस भरते हुए, दोनों हाथों की उंगलियां इंटरलॉक करें, हथेलियां ऊपर करके सिर के ऊपर सीधे उठाएं और कोहनियां सीधी रखें। इस दौरान, सांस छोड़ते हुए कमर से बाईं या दाईं ओर धीरे झुकें। इस पोज में 10 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। यह 3 से 5 बार कर सकते हैं। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, कमर दर्द और साइड में जकड़न को कम करता है। पेट और आंतों की मालिश होती है, जिससे पाचन क्रिया सुधरती है और कब्ज दूर होता है। बगल, कंधे, छाती और हाथों की मांसपेशियां स्ट्रेच होने के साथ मजबूत भी होती हैं। फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, सांस लेना आसान होता है। संतुलन और एकाग्रता में सुधार आता है, तनाव कम होता है। शरीर की एनर्जी बढ़ती है। नियमित अभ्यास से कमर की चर्बी घटती है। हालांकि, आयुष मंत्रालय ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी हैं। उनके अनुसार, जिन लोगों को पीठ, रीढ़ की हड्डी या पेट में चोट लगी हो, उन्हें यह आसन करने से बचना चाहिए। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए।