नेपाल में बाढ़ के बाद 290 भारतीय लापता: विदेश मंत्रालय

काठमांडू। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि भोटे कोसी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद से 290 भारतीय लापता हैं। इस बाढ़ ने हिमालयी देश में तबाही मचा दी है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि रसुवा जिले में त्रिशुली-वन परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीय श्रमिक भी प्रभावित हुए हैं, जिनमें तमिलनाडु के 21 भारतीय शामिल हैं जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। विदेश मंत्रालय ने बचाए गए भारतीय नागरिकों की सूची भी जारी की है। सूची में सुमित कुमार खरे, मुकेश कुमार, सचिन कुमार, जसमंत सिंह, चंदन तिवारी, देवन कुमार शाह, अमरेंद्र कुमार यादव, ओम प्रकाश यादव, संपत कुमार, नीरज कुमार ठाकुर, जय हांसदा, सुनील कुमार सिंह, उपेंद्र बरनमल, राहुल कुमार गुप्ता, नीरज कुमार पटेल, सनोवर आलम, उपेंद्र भासिन, योगेश कुमार, मोहम्मद अकरम आलम शामिल हैं। एमडी इंजमामुल हक, अभिषेक कुमार, अभिषेक यादव, मंगल सिंह, पंकज कुमार शाह, नीलेश कुमार, आशुतोष मनकोपाध्याय, लक्ष्मण तिवारी और गांगुली पटेल के नाम शामिल हैं। इसी तरह, बचाए गए अन्य व्यक्तियों में शामिल हैं: इंद्रजीत कुमार, ज्ञान सिंह, जय कृष्ण, शाहरुख, निपिंदर मंडल, सद्दाम हुसैन, राज कुमार तिवारी, आलोक कुमार शाह, अरुण कुमार शाह, सत्येन्द्र कुमार सिंह, बिट्टू कुमार, आदि अबेद बसुमतारी, केके पांडे, अभिषेक तिवारी, आकाश, प्रदीप, रंजन कुमार, पवन लोधी, अनिल, विजय प्रसाद, नारायण बहादुर, जन्मेजय सिंह, सुनील गिरी, रोशन कुमार, विशमर सिंह, सुहैल मुस्तफा, नीलेश, प्रमोद गुप्ता, जीतेन्द्र राम, नितेश कुमार सिंह, निजाउदीन, कवि कुमार, रोहित वर्मा. रसुवा और नुवाकोट बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से हैं। माना जा रहा है कि यह बाढ़ नेपाल और चीन के बीच स्थित सीमावर्ती नदी, भोटे कोशी नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण आई थी। गुरुवार दोपहर तक, नेपाल पुलिस ने बताया कि कुल 644 लोग लापता हैं, जिनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि उसे लगभग 90 अमेरिकियों के बारे में जानकारी है जो बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं, और वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि हम पुष्टि कर सकते हैं कि नेपाल में तीन अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। हमें इस समय किसी भी अमेरिकी नागरिक की मृत्यु की जानकारी नहीं है। इसी तरह, नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में चीनी नागरिक भी लापता हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बुधवार को हुए भूस्खलन के बाद नेपाली सीमा पर लगभग 100 चीनी नागरिक अभी भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, 127 नेपाली नागरिक भी लापता हैं। विदेशी नागरिकों में 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 25 कनाडाई नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं।
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली

क्वेटा। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और कथित तौर पर राज्य समर्थित तत्वों पर किए गए कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने दावा किया है कि इन हमलों में 11 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी और दो कथित राज्य समर्थित ऑपरेटिव मारे गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि 22 अगस्त को संगठन के लड़ाकों ने अवारान जिले के कोलवाह-गिशकोर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना की सड़क सुरक्षा इकाई पर हमला किया। प्रवक्ता के मुताबिक, इस हमले में पांच सैन्यकर्मी मारे गए और तीन अन्य घायल हो गए। बीएलएफ ने यह भी दावा किया कि सड़क निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों को निशाना बनाया गया। संगठन के अनुसार, घटना के बाद इलाके में पहुंचे एक सैन्य हेलीकॉप्टर पर भी उसके लड़ाकों ने गोलीबारी की। प्रवक्ता ने कहा कि उसी दिन बीएलएफ के लड़ाकों ने शिरीन-ओ-फरहाद इलाके में एक पुलिस चौकी पर कब्जा कर लिया। बयान के अनुसार, चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों को हिरासत में लिया गया, एक कलाश्निकोव राइफल और अन्य उपकरण जब्त किए गए तथा चौकी, दो पुलिस वाहन और एक मोटरसाइकिल को आग लगा दी गई। बाद में हिरासत में लिए गए पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया गया। बीएलएफ ने यह भी दावा किया कि बेला-झाओ रोड पर नाकाबंदी के दौरान वाहन जांच के समय उसने दो लोगों को मार गिराया, जिन्हें संगठन ने “राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड” का सदस्य बताया। संगठन के अनुसार, दोनों की पहचान वाजा बाग, झाओ के निवासी मोहम्मद और उनके बेटे जफर के रूप में हुई। बयान में कहा गया कि दोनों से हथियार जब्त किए गए और उनकी मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया गया। बीएलएफ ने जफर पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने और पाकिस्तानी सैन्य बलों के साथ सहयोग करने का भी आरोप लगाया। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से बीएलएफ के इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और न ही हताहतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि हुई है।
दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना दिल के लिए बन सकता है खतरा, जाने सेहत पर कैसे डालता है असर

नई दिल्ली। आज के समय में लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत बनती जा रही है। काम शुरू करने के बाद कई लोग लगातार घंटों बीत जाने के बाद भी कुर्सी से उठते नहीं हैं। बीच में खाना, चाय और फोन जैसी चीजें भी अक्सर बैठे-बैठे ही हो जाती हैं। बाहर से देखने पर यह दिनचर्या आरामदायक लग सकती है, लेकिन शरीर के लिए लगातार कम एक्टिव रहना अच्छी बात नहीं है। कई वैज्ञानिक रिसर्च में लंबे समय तक बैठे रहने और दिल से जुड़ी बीमारियों के बीच संबंध पाया गया है। जब हम लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो हमारा शरीर बहुत कम काम करता है। पैरों और शरीर की दूसरी मांसपेशियां भी ज्यादा नहीं चलतीं। ऐसे में शरीर जितनी ऊर्जा चलने-फिरने के दौरान खर्च करता है, उतनी बैठने पर नहीं करता। अगर यह आदत रोज बनी रहे तो वजन बढ़ सकता है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और ब्लड शुगर को संभालना भी मुश्किल हो सकता है। ये सभी चीजें लंबे समय में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी लोगों को लंबे समय तक बैठे रहने का समय कम करने और दिन में ज्यादा एक्टिव रहने की सलाह दी है। लंबे समय तक बैठे रहने और दिल की बीमारी के बीच संबंध को लेकर कई रिसर्च हुई हैं। 2024 में प्रकाशित एक रिसर्च में करीब 4.8 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि जो लोग काम के दौरान ज्यादातर समय बैठे रहते थे, उनमें दिल की बीमारी से मौत का खतरा उन लोगों की तुलना में ज्यादा था जो काम के दौरान कम बैठते थे। रिसर्च में यह भी सामने आया कि रोजाना थोड़ी ज्यादा शारीरिक गतिविधि करने से इस खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। बता दें कि दिल की बीमारी का खतरा उम्र, वजन, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और खान-पान जैसी कई चीजों पर भी निर्भर करता है। समस्या तब ज्यादा बढ़ सकती है, जब लंबे समय तक बैठने के साथ चलना-फिरना भी बहुत कम हो। कई घंटे एक ही जगह बैठे रहने से पैरों की मांसपेशियां ज्यादा काम नहीं करतीं। कुछ लोगों को लंबे समय तक बैठने के बाद पैरों में भारीपन, अकड़न या हल्की सूजन महसूस हो सकती है। यही कारण है कि काम के बीच थोड़ी देर उठना और चलना शरीर के लिए अच्छा माना जाता है। बार-बार छोटे ब्रेक लेने से शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में नहीं रहता। बैठकर काम करने में शरीर बहुत कम कैलोरी खर्च करता है। अगर कोई व्यक्ति पूरे दिन बैठा रहता है और साथ में ज्यादा तला-भुना, मीठा या ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाता है, तो उसका वजन बढ़ सकता है। ज्यादा वजन होने से ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। अगर कोई व्यक्ति सुबह या शाम एक्सरसाइज करता है और बाकी पूरा दिन लगातार कुर्सी पर बैठे रहता है, तो यह भी सेहत के लिए नुकसानदायक है। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि रोजाना एक्सरसाइज के साथ दिनभर में छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियां भी जरूरी हैं। अगर आपका काम कंप्यूटर या लैपटॉप पर बैठकर करने वाला है, तो कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं। कोशिश करें कि लंबे समय तक लगातार बैठे न रहें। कुछ देर काम करने के बाद कुर्सी से उठें और थोड़ा चलें। फोन पर बात करते समय खड़े हो सकते हैं। पानी पीने के लिए अपनी सीट से उठकर जाएं। लंच के बाद कुछ मिनट पैदल चलें। अगर ऑफिस में सीढ़ियां इस्तेमाल करना आसान है, तो कभी-कभी लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। काम के बीच पैरों और शरीर को हल्का खींचना भी अच्छा रहेगा।
‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ अमेरिका-यूरोप का कॉन्सेप्ट, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं: हिमंता सरमा

सोमनाथ। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ को लेकर कहा कि ये अवधारणाएं अमेरिका और यूरोप से आई हैं और भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था से इनका सीधा संबंध नहीं है। सोमनाथ में मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम हिमंता सरमा ने कहा कि हमारे देश में ‘जेन जेड’ या ‘जेन अल्फा’ जैसी कोई चीज नहीं है। हमारे देश में बेटे-बेटियां, माता-पिता और दादा-दादी व नाना-नानी होते हैं। ‘जेन जेड’ और ‘जेन अल्फा’ जैसे कॉन्सेप्ट अमेरिका और यूरोप से आए हैं और हमारा उस कल्चर से कोई लेना-देना नहीं है। अपने बेटे-बेटियों की भलाई के लिए काम करना हमारा फर्ज है। अपने बच्चों को ‘जेन जेड’ या ‘जेन अल्फा’ जैसे लेबल में बांटना सही नहीं है। हमें साथ मिलकर रहना चाहिए, एक परिवार की तरह रहना चाहिए, अपने बेटे-बेटियों के लिए बिना थके काम करना चाहिए और देश को आगे बढ़ाना चाहिए। सोमनाथ मंदिर को लेकर सरमा ने कहा कि सावन के पवित्र महीने में उन्हें सोमनाथ जाने और दर्शन करने का अवसर मिला। उन्होंने यात्रा के इंतजाम के लिए सरकार का आभार जताया। सरमा ने कहा कि सोमनाथ देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए कहा कि सोमनाथ आने वाले समय में दुनिया के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल होगा। नेपाल में आई बाढ़ को लेकर भी असम के मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल ही में असम में भी बाढ़ आई थी और ऐसी आपदाओं के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बाढ़ में लोगों की जान जाने के साथ-साथ घरों और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है। सरमा ने प्रभावित लोगों की शांति और भलाई के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सरमा ने आरोप लगाया कि पार्टी महिलाओं के हितों के खिलाफ काम करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कारण देश में अब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो पाई है। महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए समान कानून जरूरी हैं और उन्होंने महिलाओं से कांग्रेस का बहिष्कार करने की अपील की।
एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, संतों ने बताया धर्म-दर्शन का विस्तार

खंडवा। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में एकात्म धाम प्रकल्प के तहत पंचायतन मंदिर के निर्माण की दिशा में मुख्यमंत्री द्वारा पंचायतन मंदिर का शिलान्यास और शिला पूजन किया गया। इस अवसर पर संतों ने इसे धर्म, दर्शन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर विवेकानंद पुरी महाराज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि संतों के चरण जहां पड़ते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है। ओंकारेश्वर भगवान आद्य गुरु शंकराचार्य की दीक्षा भूमि है। यहां पहले भूमि पूजन हो चुका है और इसके बाद आदि शंकराचार्य की मूर्ति की स्थापना भी की गई। अब पंचायतन मंदिर के शिला पूजन के साथ प्रकल्प का अगला चरण पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि ओंकार पर्वत पहले भी अनेक मंदिरों से सुशोभित रहा है। यहां गौरी सोमनाथ और चौरासी खंभे जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं। समय और परिस्थितियों के संयोग से अब आदि शंकराचार्य की परंपरा के साथ पंचायतन मंदिर की स्थापना हो रही है। यह केवल एक मंदिर निर्माण का कार्य नहीं, बल्कि ऐसा प्रकल्प है जो भविष्य में पूरे विश्व को भारतीय आध्यात्मिक दर्शन और ‘सबको साथ लेकर चलने’ के सिद्धांत का मार्गदर्शन करेगा। एकात्म धाम ओंकारेश्वर के आवासीय आचार्य स्वामी भूमनंद सरस्वती ने बताया कि पंचायतन मंदिर पंचमहाभूतों और पंचदेव उपासना की अवधारणा को समर्पित होगा। उन्होंने कहा कि पंचमहाभूतों से ही समस्त सृष्टि की रचना मानी गई है और पंचदेव उपासना के माध्यम से भगवान के विराट स्वरूप की आराधना की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह शिव पंचायतन मंदिर होगा। इसके मध्य में भगवान शिव मुख्य विग्रह के रूप में विराजमान होंगे, जबकि चारों दिशाओं/कोनों में अन्य देवताओं के मंदिर होंगे। इनमें शक्ति, गणेश, सूर्य और विष्णु की उपासना शामिल है। इस प्रकार मंदिर में विभिन्न उपासना परंपराओं के समन्वय और सम्मान का संदेश दिया जाएगा। स्वामी भूमनंद सरस्वती ने बताया कि मंदिर का निर्माण उसी बलुआ पत्थर से किया जाएगा, जिसका उपयोग अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण में हुआ है। मंदिर का मुख्य ढांचा अपेक्षाकृत जल्द तैयार हो सकता है, लेकिन पूरे प्रकल्प को पूरा होने में करीब ढाई से तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है। पंचायतन मंदिर समेत अलग-अलग निर्माण कार्यों के माध्यम से एकात्म धाम प्रकल्प को गति दी जाएगी। संतों ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अपने समय में विभिन्न संप्रदायों और उपासना पद्धतियों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया था। पंचायतन मंदिर उसी समन्वय और एकात्मता की भावना को आधुनिक समय में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनने की उम्मीद है।
संघ प्रमुख के न्यूयॉर्क दौरे को लेकर संजय राउत ने कहा- लोकतंत्र में बात रखने की हो आजादी

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे, ऑटो-रिक्शा चालकों और मराठी भाषा विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा, “आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क जा रहे हैं। अमेरिका की ओर से उनको आमंत्रण दिया गया है। भारत की तरह अमेरिका भी लोकतांत्रिक देश है। वहां आज भी मजबूत लोकतंत्र है। वहां बोलने की आजादी को मान्यता है लेकिन हिंदुस्तान में इस पर टकराव देखने को मिल रहा है। जिस तरह से युवाओं पर पैलेट गन चलाए गए वह भी एक मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।” उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में चुनाव हैं, है ना? तो, ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर की पार्टी के प्रमुख कौन हैं? अमित शाह हैं, और वे दिल्ली में बैठते हैं। चूंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं, इसलिए वे एक बार में तीन महीने की डेडलाइन देते हैं। हमारा कहना है कि उत्तर प्रदेश में ऑटो-रिक्शा चलाने वाले व्यक्ति को हिंदी आनी चाहिए। अगर वह कन्नड़ में बात करेगा, तो कैसे चलेगा? अगर वह पंजाबी में बात करेगा, तो कैसे चलेगा? वहां हिंदी आनी चाहिए। अगर कोई बंगाल में ऑटो-रिक्शा चलाता है, तो उसे बंगाली आनी चाहिए। हालांकि, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री बार-बार पीछे हट रहे हैं। दिल्ली से संदेश आता है और वे पीछे हट जाते हैं। यह भाषा का विवाद नहीं है, यह राज्यों के बीच का विवाद नहीं है।” शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा, “मराठी स्वाभिमान, मराठी गौरव और मराठी भाषा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अगर आप सर्विस प्रोवाइडर हैं, तो आपको यात्रियों से मराठी में बात करने में सक्षम होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि हमने आपको सिखाया नहीं है। हमारे सम्मानित नेता एकनाथ शिंदे और शिवसेना ने 1.5 लाख टैक्सी ड्राइवरों को एक महीने तक मराठी की मुफ्त क्लास दी है और उन्हें सर्टिफिकेट भी दिए हैं।” बीते दिनों भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा, “हमारे ऑटो-रिक्शा चालक भाई कड़ी मेहनत करते हैं; वे मुंबई की सड़कों पर पसीना बहाकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं और मुंबई के लोगों की सेवा करते हैं। जब सरकार ने मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य किया, तो उन्होंने मराठी सीखी और परीक्षा पास की। अब, बिना किसी डर या हिचकिचाहट के, वे ठीक से बातचीत कर सकते हैं और मुंबई की सड़कों पर रिक्शा चला सकते हैं।
‘दंगों के मास्टरमाइंड थे शरजील और उमर खालिद’, हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस ने दाखिल किया जवाब

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को मास्टरमाइंड बताया है। अदालत में पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का भी विरोध किया। 31 जुलाई को पिछली सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाब दाखिल करने को कहा था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा, “शरजील इमाम और उमर खालिद दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड थे। पुलिस के पास इनके खिलाफ दंगों की योजना बनाने, लोगों को जुटाने और दंगों में रणनीतिक भूमिका निभाने से जुड़े अहम सबूत है।” दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों की नई जमानत याचिकाएं अपने आप में ही ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सहआरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था कि दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका अलग है। पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि इस केस में यूएपीए की धारा 43डी(5) लागू होती है, जिसमें जमानत की सख्त शर्तों का प्रावधान है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जनवरी के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते समय नए सिरे से जमानत के लिए दो शर्त लगाई थीं। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील इस मामले में अहम गवाहों के बयान होने या फिर इस फैसले के एक साल पूरी होने पर नए सिरे से फिर जमानत की याचिकाएं लगा सकते है। पुलिस का कहना है कि अभी यह दोनों ही शर्त पूरी नहीं हुई है। लिहाजा इस स्तर पर दोनों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए। बता दें कि यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए दंगों से जुड़ा है, जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से खालिद और शरजील जेल में बंद हैं।
मुंबई की पहचान संस्कृति और सभ्यता से, दंगे ठीक नहीं : शाइना एनसी

मुंबई। मुंबई के परेल इलाके में ईद-ए-मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प और नारेबाजी के मामले पर शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने प्रतिक्रिया देते हुए मुंबईकर से गंगा-जमुनी तहजीब और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र की पहचान उनकी संस्कृति और सभ्यता से है। इतने वर्षों में शहर ने कई तरह की परिस्थितियां देखी हैं लेकिन दंगे होना किसी भी स्थिति में ठीक नहीं है। शाइना एनसी ने आईएएनएस से कहा कि मुंबई में अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और ईद से लेकर गणपति तक सभी त्योहार साथ मनाते हैं। शहर की पहचान जात-पात और धर्म से ऊपर उठकर शांति और भाईचारे के साथ रहने की है। उन्होंने कहा कि शिवसेना का भी यही लक्ष्य है और पार्टी के कार्यकर्ता जमीन पर रहकर अमन-शांति बनाए रखने में सहयोग करें। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक को लेकर भी शाइना एनसी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा में पेपर लीक नहीं होना चाहिए। चाहे परीक्षा केंद्रीय बोर्ड की हो, स्कूल बोर्ड की या किसी अन्य भर्ती संस्था की, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद पर शिवसेना की प्रवक्ता ने कहा, “मराठी स्वाभिमान, मराठी गौरव और मराठी भाषा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हमारा कहना है कि अगर आप सर्विस प्रोवाइडर हैं, तो आपको यात्रियों से मराठी में बात करने में सक्षम होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि हमने आपको सिखाया नहीं है। हमारे नेता एकनाथ शिंदे और शिवसेना ने 1.5 लाख टैक्सी ड्राइवरों को एक महीने तक मराठी की मुफ्त क्लास दी हैं और उन्हें सर्टिफिकेट भी दिए हैं।” उन्होंने कहा कि सिस्टम में मौजूद खामियों को दूर करने की जरूरत है। सरकार की ओर से संसद में लाया गया परीक्षा संबंधी कानून देशभर में होने वाली परीक्षाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर शाइना एनसी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “गृह मंत्रालय ने कहा है कि सभी छह पद गाए जाने चाहिए। जो लोग इसे नहीं गाते, उन्हें राष्ट्रवाद पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। इसे जबरदस्ती थोपा नहीं जाना चाहिए, लेकिन स्कूल और कॉलेज के कार्यक्रमों और अहम आयोजनों में ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ दोनों ही गाए जाने चाहिए। दोनों को गाने से देश और मातृभूमि के प्रति सशक्त होने का अहसास होता है।” नेपाल में आए भीषण फ्लैश फ्लड्स पर भी शाइना एनसी ने दुख जताया। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के कुछ पर्यटक भी नेपाल में फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए महाराष्ट्र के नेता एकनाथ शिंदे और शिवसेना की ओर से संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध हमेशा से दोस्ताना रहे हैं और भारत ने मुश्किल समय में नेपाल का साथ दिया है। साथ ही उन्होंने फ्लैश फ्लड्स को पर्यावरण से जुड़ी गंभीर चिंता बताया। उनका कहना है कि पर्यावरणीय चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं। इसलिए भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा आरएसएस के एक कार्यक्रम के विरोध के सवाल पर शाइना एनसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ममदानी ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने आरएसएस के कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य लोगों को साथ जोड़ना और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करना है। अमेरिका में रहने वाले बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग डॉक्टर, वकील, वैज्ञानिक और टैक्सी ड्राइवर जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं और ऐसे कार्यक्रमों के जरिए भारतीय समुदाय को जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
पैरा एथलीटों जीवन के प्रति हमारी सोच बदलते हैं, मैं इनसे प्रेरित होता हूं: नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मुश्किलों से उबरने और पूरे परिवारों और समुदायों को प्रेरित करने की भारत के पैरा एथलीटों की क्षमता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धियां लोगों का जिंदगी को देखने का नजरिया बदल सकती हैं और दिखा सकती हैं कि खेल कैसे जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं। खेलो इंडिया डायलॉग के दौरान युवाओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने भारत के जाने-माने पैरा एथलीटों के सफर पर रोशनी डाली और कहा कि उनकी सफलता पदक से कहीं ज्यादा मायने रखती है। खासकर, उन परिवारों के लिए जिन्होंने उनके खेल करियर के शुरुआती दौर में उनके संघर्षों को देखा है। पीएम ने कहा, “हमारे पैरा एथलीट इस बात का एक बड़ा उदाहरण हैं कि खेल कैसे जिंदगी बदलते हैं। जब कोई पैराएथलीट को मैदान में देखता है, तो जिंदगी के बारे में सोचने का तरीका बदल जाता है। और जब वह कुछ हासिल करता है, तो उस एथलीट के साथ-साथ उसके पूरे परिवार को एक नई जिंदगी मिलती है, जो माता-पिता, भाई-बहन अपने बच्चे को शुरुआती दिनों में संघर्ष करते हुए देखते हैं, उस एथलीट की सफलता उनके सपनों और हिम्मत को नई ऊंचाई देती है। मैं हमेशा ऐसे खिलाड़ियों से प्रेरित रहा हूं।” प्रधानमंत्री ने खास तौर पर भारतीय पैरा एथलीट शीतल देवी, अवनी लेखरा, सुमित अंतिल, नितेश कुमार और झंडू कुमार की उपलब्धियों को याद किया। उन्होंने कहा, “आप सबने आर्चरी में शीतल का नाम सुना होगा। पैरालिंपिक में पदक जीतकर उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूरे भारत को गर्वान्वित किया। हमारी एक और बेटी है, अवनी लेखरा, जिसने दो बार पैरालिंपिक पदक जीते हैं। जब भी मैं उससे मिलता हूं, मुझे बहुत गर्व महसूस होता है। चाहे सुमित अंतिल हों, नितेश कुमार हों, और हमारे हाल के चैंपियन झंडू कुमार हों, ऐसे ही हमारे पैरा-एथलीट हैं। वे हमें प्रेरित करते हैं। खेल बेहतर जिंदगी की गारंटी है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “हम अक्सर सुनते हैं कि एक स्वस्थ समाज, एक अच्छे परिवार, समाज और एक बेहतर संस्कृति के लिए खिलाड़ियों वाली भावना बहुत जरूरी है। खेल के मैदान में जाए बिना खेल भावना सीखना बहुत मुश्किल है। खेल हमें न सिर्फ चैंपियन बनना सिखाते हैं बल्कि बेहतर प्रतियोगी बनना भी सिखाते हैं। उठना, गिरना, गिरना और फिर से उठ खड़ा होना। खेल हमारे अंदर यह भावना लाता है।
नेपाल में फंसे मध्य प्रदेश के लोगों के साथ खड़ी है सरकार: सीएम मोहन यादव

भोपाल। नेपाल में आई बाढ़ के चलते मध्य प्रदेश के भी कई लोग मुसीबत में हैं और वह वापस नहीं लौट पा रहे हैं। इन लोगों की मदद का राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि नेपाल में फंसे प्रदेश के लोगों के साथ सरकार खड़ी है, इसके साथ ही कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। दरअसल, नेपाल में हुई भारी बारिश ने जमकर तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हुई है। इस बाढ़ की विभीषिका में देश के अन्य हिस्सों सहित मध्य प्रदेश से नेपाल गए पर्यटक भी फंसे हुए हैं। इन पर्यटकों के परिजन तो चिंता कर ही रहे हैं, राज्य सरकार ने भी इस दिशा में पहल की है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नेपाल त्रासदी पर दुख व्यक्त किया है। इस त्रासदी के बीच मध्य प्रदेश के कई निवासी भी वहां फंसे हुए हैं। सीएम यादव का कहना है कि राज्य सरकार संकट के समय अपने नागरिकों के साथ खड़ी है। सरकार जनता के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए सरकार ने जनता की सुविधा के लिए हर संभव व्यवस्था की है। बता दें कि राज्य सरकार ने नेपाल में आई आपदा के बीच मध्य प्रदेश वासियों की मदद के लिए नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से प्रभावितों को हर संभव सहायता मुहैया कराई जाएगी। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर, व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी जारी किए गए हैं। हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सएप नंबर 9818963273 हैं। राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि नेपाल में फंसे नागरिक या उनके परिजन सहायता और जानकारी के लिए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।