जगन मोहन रेड्डी का सीएम नायडू पर निशाना, बोले- सरकारी स्कूलों में शिक्षा को कमजोर कर रही है सरकार

अमरावती। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने रविवार को राज्य सरकार पर सरकारी स्कूलों की शिक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों में दाखिले बढ़ने का दावा कर रही है, लेकिन असल में सरकारी शिक्षा को खत्म कर प्राइवेट संस्थानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। जगन मोहन रेड्डी ने शिक्षा मंत्रालय की यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई प्लस) रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2025-26 के आंकड़े राज्य के लिए बहुत खतरनाक ट्रेंड दिखा रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में जगन मोहन रेड्डी ने कहा, “राज्य सरकार बार-बार दावा कर रही है कि 1.10 लाख से ज्यादा छात्र प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए हैं और इसे सरकारी शिक्षा पर जनता के बढ़ते भरोसे के तौर पर दिखा रही है। यह उनकी पार्टी के उस सोच के मुताबिक है जिसमें बेबुनियाद दावे किए जाते हैं, जो सरकारी आंकड़ों से ही गलत साबित हो जाते हैं।” उन्होंने बताया कि अगर सच में सरकारी स्कूलों में इतने छात्र आते, तो कुल दाखिले बढ़ने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जगन मोहन रेड्डी ने आंकड़े पेश करते हुए कहा, “वर्ष 2023-24 और वर्ष 2025-26 के यूडीआईएसई प्लस आंकड़ों की तुलना करें तो सरकारी स्कूलों में दाखिले 40,50,116 से घटकर 34,93,450 हो गए हैं, यानी 5,56,666 छात्रों की कमी आई है। इसी दौरान सरकारी स्कूलों की संख्या भी 45,000 से घटकर 44,222 रह गई है, जबकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल 991 से घटकर 797 रह गए हैं।” उन्होंने कहा, “ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी अवधि में प्राइवेट मैनेजमेंट वाले स्कूलों में दाखिले 2023-24 में 45,53,380 से बढ़कर 2025-26 में 48,40,296 हो गए हैं। इसलिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में दाखिले कम हुए हैं और प्राइवेट स्कूलों में बढ़े हैं। यह साफ दिखाता है कि आंध्र प्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत खराब है और सरकार का दावा गलत है।” पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में प्राइवेट शिक्षा क्षेत्र पर नारायणा, श्री चैतन्य, भाष्यम, विज्ञान और गीतम जैसे संस्थानों का दबदबा है। चंद्रबाबू नायडू सरकार का इन संस्थानों के साथ गहरा और गलत गठजोड़ है और इसलिए वह सरकारी क्षेत्र की शिक्षा को जानबूझकर कमजोर कर रही है ताकि प्राइवेट संस्थानों को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि आंकड़े एक चिंताजनक ट्रेंड दिखाते हैं कि जो छात्र प्राइवेट स्कूलों की फीस नहीं दे सकते, उनके लिए अच्छी शिक्षा पहुंच से दूर होती जा रही है। जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि 2019 से 2024 तक वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठाए गए थे। उनकी सरकार का जोर सबके लिए अच्छी शिक्षा को सुलभ बनाने पर था। उन्होंने बताया, “मना बडी – नाडु नेडु पहल के तहत 56,703 सरकारी स्कूलों, कल्याण छात्रावासों और जूनियर कॉलेजों में बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया गया। फर्नीचर, पीने का पानी, शौचालय, क्लासरूम जैसी सुविधाओं को सुधारा गया। पहले फेज में 15,715 स्कूलों का काम पूरा हुआ, दूसरे फेज में 22,344 स्कूलों में सुधार किया गया और जून 2024 तक तीसरा फेज चल रहा था।” उन्होंने कहा कि क्लास 8 के छात्रों और उनके शिक्षकों को बायजू कंटेंट वाले फ्री टैब दिए गए थे। प्राइमरी लेवल से ही इंग्लिश मीडियम को शिक्षा का माध्यम बनाया गया था और इसे आसान बनाने के लिए सभी छात्रों को दो भाषाओं वाली किताबें और ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी दी गई थी। यह इसलिए जरूरी था ताकि हमारे बच्चे ग्लोबल लेवल पर मुकाबला कर सकें। जगन मोहन रेड्डी ने बताया कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्लास 6 से ऊपर की हर क्लास में 62,000 आईएफपी लगाए गए थे और क्लास 1 से 5 तक वाले हर स्कूल में 45,000 स्मार्ट टीवी लगाए गए थे। टीओईएफएल (विदेशी भाषा के रूप में अंग्रेजी का टेस्ट) को लेकर उन्होंने कहा कि क्लास 3 से ही एक विषय शुरू किया गया था ताकि बच्चों में इंग्लिश बोलने की स्किल विकसित हो। इसके लिए अमेरिकन एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विस के साथ एमओयू साइन किया गया था ताकि टीओईएफएल का इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन मिल सके। इसके अलावा छात्रों को ग्लोबल लेवल पर सफल बनाने के लिए आईबी (इंटरनेशनल बैकलॉरिएट) शुरू करने की योजना थी और इस पर काम शुरू हो चुका था। टीचर्स, स्कूल हेड्स, एमईओ और अन्य फैकल्टी को आईबी सिस्टम की ट्रेनिंग भी दी जा रही थी।

अखिलेश यादव पर भाजपा नेताओं का हमला, बोले-इनके लिए ‘पीडीए’ परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी

लखनऊ, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा के राज्यसभा सांसद बृजलाल और राकेश त्रिपाठी की ओर से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव के ‘भाग जाओ पाकिस्तान’ वाले कमेंट पर बृजलाल ने कहा कि भाजपा, पाकिस्तान को सबक सिखाने वाली पार्टी है। अखिलेश यादव ने जिस कांग्रेस पार्टी के साथ गलबहियां की हैं, पाकिस्तान बनाने की जिम्मेदारी उसी पार्टी की है। अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने आतंकवादियों की 14 चार्जशीट वापस ली थी। ये तुष्टिकरण की राजनीति में किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। मैं इनके बयान की घोर निंदा करता हूं। अखिलेश यादव की ओर से सांसदों को तोड़ने वाले बयान पर बृजलाल ने कहा कि अखिलेश यादव की ओर से अपनी परिवारवादी राजनीति को खुद ही बखान कर दिया गया है। इनके लिए पीडीए, परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी है। इनकी ओर से पीडीए का जो ढिंढोरा पीटा जाता है, उससे पिछड़ों-दलितों और अल्पसंख्यकों को सावधान रहने की जरूरत है। इनकी ओर से केवल अपने परिवार के लिए नैरेटिव बनाया जाता है। आईएएनएस से बातचीत में भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “क्या किसी सार्वजनिक मंच से इससे ज्यादा शर्मनाक बात कोई हो सकती है? भारत एक लोकतंत्र है, लेकिन वे एक ऐसे राजनीतिक राजघराने को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें वे अपनी पार्टी को अपनी निजी संपत्ति मानते हैं। पार्टी के विधायक, सांसद और यहां तक कि अध्यक्ष भी सिर्फ सैफई परिवार से ही आएंगे। सार्वजनिक रूप से ऐसी शर्मनाक बात कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक है।” जयंत चौधरी को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “आज अखिलेश यादव जयंत चौधरी को लेकर इतने चिंतित इसलिए हैं क्योंकि वे खुद को बहुत अकेला और परेशान महसूस कर रहे हैं। वे जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी एक बोझ है और उन्हें चाहे कितनी भी सीटें क्यों न दी जाएं, वे सभी हार जाएंगे। ऐसे में, वे कभी ओम प्रकाश राजभर तो कभी जयंत चौधरी से संपर्क करके अपने विकल्प खुले रखने की कोशिश कर रहे हैं।” उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “उत्तर प्रदेश और पांच अन्य राज्यों में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और चुनाव आयोग का इनकी तैयारी के लिए अभ्यास करना बिल्कुल स्वाभाविक है।

हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकतेः राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि अब हमारी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि भारत को दुनिया से क्या खरीदना है। हमारी सोच यह होनी चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। स्वदेशी हथियार हमारे लिए कितने जरूरी हैं, इसका उदाहरण हमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी। राजनाथ सिंह ने यह बात रविवार को पांच रक्षा प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के दौरान कहीं। जिनका शिलान्यास किया गया वे पश्चिम बंगाल स्थित जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड की 5 नई फैसिलिटी हैं। जीआरएसई देश के प्रमुख युद्धपोत निर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है। जीआरएसई के पास 800 से अधिक जहाजों के निर्माण का अनुभव है। यहां राजनाथ सिंह ने कहा, हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि क्वालिटी ऐसी कि दुनिया भरोसा करे, कीमत ऐसी कि दुनिया चुने और डिलीवरी ऐसी कि दुनिया बार-बार ऑडर करे। उन्होंने बताया जीआरएसई पास तकनीकी जानकारी है, कुशल कार्यबल है और अब विस्तारित क्षमता भी होगी। आपको इसका पूरा उपयोग करना होगा। आप अभी नौसेना के ऑर्डर के साथ-साथ, एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज बना रहे हैं। यह बिल्कुल हमारी मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, विजन के अनुरूप है। जैसे-जैसे आपकी क्षमता बढ़ेगी, आपको घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में अधिक आक्रामक बोली लगानी होगी। राजनाथ सिंह ने कहा, “आगे भी, रक्षा मंत्रालय के साथ, हमारी प्रयोगशालाएं, हमारे सार्वजनिक उपक्रम, और निजी हितधारक मिलकर, अपनी सेनाओं को स्वदेशी प्लेटफॉर्म से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमने यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं है। आत्मनिर्भरता, युद्धक्षेत्र क्षमता का गुणक है। और इस पहल में जीआरएसई, तथा यंत्र इंडिया लिमिटेड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।” रक्षामंत्री ने कहा कि यदि हम हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज मरम्मत और ओवरहॉल का केंद्र बन जाएं, तो विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ, हजारों रोजगार पैदा होंगे। आज भी हमारे बनाए युद्धपोत, दुनिया के संघर्ष क्षेत्रों से होकर हमारी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकते। हमारी अपनी स्वदेशी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को ही इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रभुत्व हासिल करना होगा। और आज के ये पांचों परियोजनाएं उसी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रतिबिंबित कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने बताया, “आज हम, लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपयों की लागत वाली पांच अत्यंत महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें जीआरएसई की तीन नई जहाज निर्माण सुविधाएं – रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा जहाज निर्माण सुविधा और दामोदर कॉम्प्लेक्स जहाज निर्माण सुविधा शामिल हैं। इसके साथ ही यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं, 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट, का भी शिलान्यास हो रहा है। ये पांचों परियोजनाएं आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की भावना को बल देने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड जैसे संस्थान, इस बात के प्रमाण हैं, कि बंगाल का औद्योगिक आधार फिर से मजबूत हो रहा है। यहां से शुरू होने वाले ये परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन को तो बढ़ाएंगे ही, साथ ही साथ एमएसएमई, संबद्ध उद्योगों और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। एक तरह से देखें, तो ये परियोजनाएं, बंगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के, नए अध्याय के रूप में सामने आने वाले हैं।

सीएम योगी ने अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी को दी श्रद्धांजलि, कहा- 32 साल की उम्र में दी थी शहादत

लखनऊ। स्वाधीनता संग्राम सेनानी अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के 91वें बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को झंडेवाला पार्क, अमीनाबाद में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि 23 अगस्त 1935 को मात्र 32 वर्ष की उम्र में भारत माता के महान सपूत अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी ने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देते हुए इसी पार्क में भारत का तिरंगा फहराया था। उस समय तिरंगा स्वाधीनता का प्रतीक था। कायर ब्रिटिश सरकार ने उनके इस साहस का जवाब गोलियों से दिया और वह देश की आजादी के लिए शहीद हो गए। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गुलाब सिंह लोधी बलिदान हुए लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वाधीनता का एक स्वर्णिम पृष्ठ छोड़ गए हैं। उनके बलिदान के महज 12 वर्ष बाद देश ब्रिटिश दासता से मुक्त होकर स्वतंत्र हुआ। सीएम योगी ने कहा कि इस अवसर पर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से वह अमर शहीद की पुण्य स्मृतियों को नमन करते हैं। गुलाब सिंह लोधी का जन्म वर्ष 1903 में उन्नाव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनके भीतर देश की आजादी के लिए जज्बा था। इसी भावना के साथ उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और लखनऊ आकर देश की स्वाधीनता के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी जी की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार ने उन्नाव जिले में पार्क, स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उत्तर प्रदेश सरकार अपने उन सभी अमर बलिदानियों के पुण्य स्मरण को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत की आजादी के लिए 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने आप को बलिदान करने वाली वीरांगना अवंतीबाई लोधी जी के नाम पर अलीगढ़ में स्टेडियम का नामकरण और बदायूं में पीएसी की नई बटालियन का नामकरण किया गया है। लखनऊ में पीएसी की महिला बटालियन का नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी के नाम पर रखा गया है। इसी तरह गोरखपुर में नवस्थापित पीएसी महिला बटालियन का नाम वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर तथा औरैया में नए मेडिकल कॉलेज का नाम लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के नाम पर किया गया है। इन सभी महापुरुषों और वीरांगनाओं ने भारत की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी जैसे क्रांतिकारियों ने देश की आन, बान और शान को बनाए रखने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और अमर बलदानियों की स्मृतियों को संरक्षित रखने के लिए स्मारक निर्माण के कार्यक्रम को निरंतर आगे बढ़ाएगी। सीएम योगी ने बताया कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने सामाजिक न्याय और देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महापुरुषों के सम्मान में करीब 500 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस धनराशि से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, सद् गुरु रविदास जी महाराज, महर्षि वाल्मीकि जी महाराज समेत अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं पर छाजन लगाने, पार्कों के नवनिर्माण और उन्हें सुरक्षित बनाने के कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का यह क्रम लगातार आगे बढ़ता रहेगा।

कोलकाता होटल अग्निकांड: लाइसेंस जारी करने की मौजूदा व्यवस्था में खामियों की समीक्षा कर रही बंगाल सरकार

कोलकाता। पिछले सप्ताह बीरभूम जिले के तारापीठ में और मिर्जा गालिब स्ट्रीट पर लगी आग में कुल 18 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों की समीक्षा और उन्हें ठीक करने का काम शुरू कर दिया है। स्टेट फायर सर्विस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय “फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट” और “फायर लाइसेंस” देने की व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने का नीतिगत फैसला लिया गया था। अधिकारी ने बताया, “लाइसेंस देने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए पिछली सरकार ने दो अहम नीतिगत फैसले लागू किए थे। पहला, ऐसे होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस के मालिकों से ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ (स्व-घोषणा) लेने की व्यवस्था शुरू की गई थी। दूसरा, अलग-अलग फायर सर्विस स्टेशनों के स्टेशन अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया कि वे सेल्फ-डिक्लेरेशन जमा करने वाले ऐसे हॉस्पिटैलिटी प्रतिष्ठानों के मालिकों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस जारी कर सकें।” उन्होंने बताया कि जब ये दो सबसे जरूरी सर्टिफिकेट मिल गए, तो संबंधित सिविक बॉडीज से ट्रेड लाइसेंस लेना और उसके बाद बिजली वितरण कंपनियों से बिजली कनेक्शन लेना काफी आसान हो गया। अधिकारी ने कहा, “स्टेशन अधिकारियों से मिले फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस की वजह से ऐसे हॉस्पिटैलिटी बिजनेस के मालिक आसानी से ट्रेड लाइसेंस और बिजली कनेक्शन हासिल कर पाए, जबकि सिविक बॉडीज या बिजली कंपनियों की तरफ से शायद ही कोई क्रॉस-चेक किया गया हो।” अब, तारापीठ और कोलकाता में लगी आग के बाद, अलग-अलग लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया में ये कमियां साफ तौर पर दिख रही हैं, इसलिए नई राज्य सरकार कुछ पॉलिसी में बदलाव करने की योजना बना रही है। राज्य फायर सर्विस अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित पॉलिसी बदलावों का मुख्य मकसद लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच की व्यवस्था करना है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “पहली पॉलिसी जिस पर विचार किया जा रहा है, वह है स्टेशन अधिकारियों के पास मौजूद उस पूर्ण अधिकार को खत्म करना, जिसके तहत वे फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस देते हैं। इसके बजाय, ये दोनों सर्टिफिकेट दो-चरणों वाली जांच के बाद दिए जाने चाहिए। पहले स्टेशन अधिकारियों के स्तर पर और फिर उनसे एक या दो स्तर ऊपर के अधिकारियों द्वारा जांच किया जाना जाहिए।” अधिकारी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस के बीच का अंतर भी समझाया। फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (फायर एनओसी) एक ऐसा दस्तावेज है, जो यह पुष्टि करता है कि कोई इमारत या ढांचा स्थानीय फायर सेफ्टी कोड और आर्किटेक्चर नियमों को पूरा करता है। वहीं, फायर लाइसेंस खास कमर्शियल गतिविधियों या औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए जारी किया गया एक औपचारिक ऑपरेशनल परमिट होता है। विभाग के अधिकारी ने बताया कि एक प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस के आधार पर संबंधित सिविक निकायों द्वारा ट्रेड लाइसेंस और बिजली वितरण कंपनियों द्वारा बिजली कनेक्शन देने की उस व्यवस्था को खत्म किया जाएगा, जिसमें ये लगभग अपने-आप (ऑटोमैटिक रूप से) मिल जाते हैं। प्रस्ताव यह है कि संबंधित सिविक अधिकारियों और बिजली वितरण कंपनियों को ट्रेड लाइसेंस और बिजली कनेक्शन देने से पहले अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। इससे ऐसी हॉस्पिटैलिटी इकाइयों द्वारा सुरक्षा पहलुओं को नजरअंदाज करके अपनी दुकानें चलाने की संभावना कम हो जाएगी।

तमिलनाडु में सीपीआई (एम) नेताओं पर हमला, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

उलुंदुरपेट। सीपीआई (एम) ने तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले में उलुंदुरपेट के पास पार्टी के वरिष्ठ नेताओं समेत चार लोगों पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की है और इसमें शामिल सभी लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। सीपीआई (एम) तमिलनाडु के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने एक बयान में कहा कि 21 अगस्त की रात आठ लोगों के एक समूह ने जिला सचिव डीएम जयशंकर, पूर्व जिला सचिव डी. एझुमलई, जिला समिति सदस्य डी.एस. मोहन और उनकी कार के ड्राइवर पर हमला किया। यह घटना तब हुई जब नेताओं ने उलुंदुरपेट में होने वाले विरोध प्रदर्शन की तैयारी पूरी कर ली थी। पार्टी के अनुसार, वे किलियाुर गांव से होकर गुजरे और अपनी गाड़ी पार्क की, तभी वडामंगलम गांव के एक समूह ने उन्हें रोका। हमलावरों ने कथित तौर पर नेताओं के साथ बदसलूकी की और सीपीआई (एम) के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। उन्होंने पार्टी का झंडा भी क्षतिग्रस्त कर दिया और कार में बैठे लोगों पर हमला करने से पहले कार की खिड़कियां तोड़ दीं। पार्टी ने इस घटना को पहले से सोची-समझी और जानलेवा हमला बताया। सीपीआई (एम) ने आरोप लगाया कि यह हिंसा वडामंगलम में प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू करने में कथित अनियमितताओं को लेकर चलाए जा रहे उनके अभियान से जुड़ी थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि गांव के एक पूर्व पंचायत अध्यक्ष ने योजना के तहत 22 घर बनाने का वादा करके निवासियों से पैसे तो लिए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। पार्टी ने प्रभावित निवासियों को एकजुट किया और न्याय तथा उनके पैसे की वापसी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। बयान में कहा गया है कि सीपीआई (एम) कार्यकर्ता इलाके के लोगों से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों पर भी अभियान चला रहे थे। शनमुगम के अनुसार, पूर्व पंचायत अध्यक्ष पार्टी के दखल से नाराज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आठ लोगों के एक समूह ने, जिसमें पूर्व अध्यक्ष के दो बेटे भी शामिल थे, सीपीआई (एम) की गतिविधियों के जवाब में हमले की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। कलमारुदुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। घायल नेताओं का अस्पताल में इलाज हुआ और वे अब घर लौट आए हैं। हालांकि, पार्टी ने चिंता जताई कि पुलिस ने अब तक केवल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। सीपीआई (एम) की राज्य कार्यकारी समिति ने तमिलनाडु पुलिस से पूर्व पंचायत अध्यक्ष के दो बेटों सहित सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने का आग्रह किया। साथ ही, पार्टी ने मांग की कि स्थानीय निवासियों के समर्थन में अभियान चला रहे नेताओं को निशाना बनाने के लिए जिम्मेदार लोगों को उचित सजा दिलाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए जाएं।

राहुल गांधी के प्रदर्शन के दौरान संसद मार्ग थाने की दीवार गंदी करने पर एक की गिरफ्तारी, फिर जमानत पर रिहाई

नई दिल्ली। संसद मार्ग पुलिस थाने की दीवार पर ग्रैफिटी बनाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान थाने की दीवार पर ग्रैफिटी लिखकर उसे गंदा किया गया था। इस मामले में पुलिस ने दिल्ली संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान की गई और फिर उसे गिरफ्तार किया गया। हालांकि, इस मामले में जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के कारण आरोपी को जमानत पर छोड़ दिया गया है। बता दें कि 21 अगस्त को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। वे जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चल रही जांच की प्रगति जानने के लिए डीसीपी ऑफिस गए थे। राहुल गांधी पहले कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे। वहां से वे सीधे संसद मार्ग थाने में स्थित डीसीपी ऑफिस पहुंचे। वे पैलेट गन पीड़ित साहिल को साथ लेकर गए थे और इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे थे। दिल्ली के डीसीपी ऑफिस में उनके साथ नई दिल्ली के डीसीपी के अलावा जॉइंट सीपी भी डीसीपी रूम में मौजूद थे। डीसीपी ऑफिस से बाहर आते ही राहुल गांधी पीड़ित परिवार के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में धरने पर बैठ गए थे। तब पुलिस की ओर से जानकारी दी गई थी कि शिकायतकर्ता की तरफ से शिकायत दी गई है, जबकि राहुल गांधी शिकायतकर्ता नहीं हैं। पुलिस ने कहा था कि विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों की ओर से तब बताया गया था कि 20 जुलाई को दर्ज हुए सभी मामलों की जांच क्राइम ब्रांच के पास है। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी की ओर से इस मामले में एफआईआर ली थी। जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी की लगातार कोशिशों का नतीजा बताया था।

‘इंस्टाग्राम पर लिखी हर बात को अपनी जिंदगी से जोड़ना सबसे बड़ी भूल’, जान खान ने सोशल मीडिया को लेकर दी सलाह

मुंबई। आज के समय में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का इतना बड़ा हिस्सा बन चुका है कि रिश्तों, प्यार और भावनाओं को समझने का तरीका भी बदलता जा रहा है। इंस्टाग्राम पर किसी की तस्वीर देखकर हम उसकी जिंदगी को खुशहाल मान लेते हैं, किसी का लिखा विचार पढ़कर उसे अपनी कहानी से जोड़ लेते हैं। टीवी अभिनेता जान खान का मानना है कि ऐसा करना सही नहीं है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज सच नहीं होती और वहां लिखी बातों को अपनी जिंदगी से जोड़ना समझदारी नहीं है। आईएएनएस ने जान खान से जब पूछा कि सोशल मीडिया के दौर में रिश्ते और भावनाएं ऑनलाइन दिखाई देने वाली चीजों से प्रभावित होती हैं, क्या इसका असर उनके शो की कहानी पर भी पड़ता है? इस सवाल के जवाब में जान ने कहा, “दिल से दीवानगी तक एक काल्पनिक कहानी है और इसे वास्तविक जिंदगी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्तों की दुनिया अलग है और असल जिंदगी के रिश्तों से उसकी तुलना नहीं की जा सकती।” जान ने कहा, ”आज बहुत सी चीजें इंस्टाग्राम पर निर्भर हो गई हैं। लोग अपना काफी समय वहां बिताते हैं और लगातार अलग-अलग तरह के विचार, सलाह और रिश्तों से जुड़ी बातें पढ़ते रहते हैं। समस्या तब होती है, जब लोग इन बातों को बिना सोचे अपनी जिंदगी पर लागू करने लगते हैं।” उन्होंने कहा, ”सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे लोग भी रिश्तों और जिंदगी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें लिखते हैं, जिन्होंने शायद खुद उन परिस्थितियों का सामना नहीं किया हो। कुछ लोग सिर्फ ज्यादा लोगों तक पहुंचने, चर्चा पाने या व्यूज बढ़ाने के लिए ऐसी बातें लिखते हैं। इसके बाद दूसरे लोग उन विचारों को पढ़कर अपनी जिंदगी से जोड़ने लगते हैं।” अभिनेता ने आगे कहा, “हम सभी अपनी जिंदगी में मुश्किलों से गुजर रहे हैं, लेकिन मैं खुद को इंस्टाग्राम, वहां लिखे विचारों या वहां मिलने वाली कथित सीख से जोड़कर नहीं देखता। यह सब बहुत अस्थायी है। सोशल मीडिया पर कुछ मिनट या कुछ घंटे के लिए लोकप्रिय होने वाली बातें जरूरी नहीं कि लंबे समय तक हमारी जिंदगी के लिए सही साबित हों।’” वहीं, अपने शो ‘दिल से दीवानगी तक’ के बारे में बात करते हुए जान ने बताया कि उन्हें इस कहानी की सबसे ज्यादा दिलचस्प बात इसका लव ट्रायंगल लगा। शो में अबीर, सिया और जहां के बीच रिश्तों की कहानी दिखाई गई है। जान इसमें जहान का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहान एक ऐसा व्यक्ति है, जिसे समझना आसान नहीं है। उसका अगला कदम क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। जान ने अपने किरदार को लेकर कहा, ”जहान जैसा किरदार मैंने पहले कभी नहीं निभाया और इसी वजह से वह मेरे लिए खास है। एक अभिनेता के तौर पर मुझे ऐसे किरदार पसंद हैं, जिनमें मुझे कुछ नया करने और अपनी अभिनय क्षमता को आजमाने का मौका मिला। जहान का अलग व्यक्तित्व मेरे लिए इसी तरह की चुनौती लेकर आया है।” ‘दिल से दीवानगी तक’ का प्रसारण ऑलराइट टीवी के मोबाइल ऐप पर हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को होता है।

मेरा सपना पूरा हुआ, भगवान और परिवार का शुक्रिया: सारांश जैन

कोलंबो। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में दूसरा टेस्ट मैच रविवार को शुरू हुआ। ऑलराउंडर सारांश जैन ने इस मैच से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया है। सारांश को घरेलू क्रिकेट में लंबा समय बिताने के बाद डेब्यू का मौका मिला है। इससे वह बेहद खुश हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ स्पिन गेंदबाज सारांश जैन को डेब्यू कैप दिग्गज ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने सौंपी। सारांश को 320 नंबर कैप दी गई। डेब्यू कैप मिलने के बाद सारांश ने भगवान और अपने परिवार का शुक्रिया अदा किया। बीसीसीआई द्वारा सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में सारांश ने कहा, “जब भी कोई खिलाड़ी क्रिकेट खेलना शुरू करता है, तो उसका सपना भारत के लिए खेलना होता है। मैंने आज इसे हासिल कर लिया है। इसलिए, मैं भगवान और परिवार का बहुत शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरा साथ दिया और मुझे यह कामयाबी मिली।” रवींद्र जडेजा से टेस्ट कैप मिलने पर सारांश बेहद खुश दिखे। उन्होंने कहा, “जड्डू भाई एक लेजेंड हैं और अगर मुझे उनसे कैप मिलती है, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ा फायदा होगा। मैं बहुत खुश हूं और मैं एक ऐसे ऑल-राउंडर से कैप लेना चाहता था जो मुझे प्रेरित करे क्योंकि मैं भी एक ऑल-राउंडर हूं। मैं इसे पूरा करने की कोशिश करूंगा।” जडेजा ने भी सारांश को डेब्यू टेस्ट कैप देते हुए कहा, “टेस्ट कैप नंबर 320, सारांश, बहुत बढ़िया। आप इतने सालों से घरेलू क्रिकेट में हैं। आपने कड़ी मेहनत की है और लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, चाहे वह भारत हो या रणजी ट्रॉफी। मुझे लगता है कि यह आपके लिए जीवन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मौका होगा क्योंकि एक क्रिकेटर के रूप में हर किसी का सपना भारत का प्रतिनिधित्व करना और टेस्ट खिलाड़ी बनना होता है।” उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आपको इस पल का मजा लेना चाहिए, और बिल्कुल भी दबाव नहीं लेना चाहिए। आप जैसे घरेलू क्रिकेट में इतने सारे मैच खेले हैं, वैसे ही यहां खेलें। समर्थन के लिए 14 और खिलाड़ी आपके साथ हैं। इसलिए, दबाव के बजाय इस पल का मजा लें। ऑल द बेस्ट।” 33 साल के सारांश ने मध्यप्रदेश के लिए 2014 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया। 12 साल के लंबे और शानदार सफल घरेलू करियर के बाद सारांश को भारतीय टीम के लिए डेब्यू करने का मौका मिला है। सारांश 1998 में रॉबिन सिंह के बाद 33 साल की उम्र में टेस्ट खेलने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय खिलाड़ी भी हैं। दिलचस्प बात यह है कि मुरली विजय और मोहम्मद शमी के बाद सारांश तीसरे ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट मिलने से पहले टेस्ट डेब्यू किया। सारांश ने 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 31.75 की औसत से 2,223 रन बनाने के साथ ही 188 विकेट ले चुके हैं। मध्यप्रदेश रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम के सदस्य रहे हैं। इंडिया ए टीम के लिए भी खेल चुके हैं।

एक महीने बाद फिर शुरू हुआ हंगरी का पाक्स न्यूक्लियर प्लांट, नदी का जलस्‍तर सुधरने से चालू हुआ टरबाइन

बुडापेस्ट। हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने कहा है कि पाक्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट-3 का टरबाइन 6 दोबारा चालू कर दिया गया है। यह संभव हो सका क्योंकि आपातकालीन निर्माण कार्यों और डेन्यूब नदी में जलस्तर बढ़ने से रिएक्टर को ठंडा रखने की स्थिति में सुधार हुआ है। यूनिट-3 का टरबाइन 6 इस महीने की शुरुआत में बंद कर दिया गया था। उस समय डेन्यूब नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, जिससे संयंत्र को ठंडा करने के ल‍िए नदी से पर्याप्त मात्रा में पानी लेना मुश्किल हो गया था। बुडापेस्ट से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित पाक्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र में चार वीवीईआर-440 रिएक्टर यूनिट और कुल आठ टरबाइन हैं। यह संयंत्र सामान्य तौर पर हंगरी की कुल बिजली जरूरत का लगभग आधा हिस्सा पूरा करता है। इसके सभी चार रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए डेन्यूब नदी के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। जुलाई के अंत में नदी का जलस्तर बहुत कम हो जाने के कारण संयंत्र को बिजली उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ी थी। संकट के सबसे कठिन दौर में केवल एक टरबाइन ही चालू था। बाद में हालात कुछ बेहतर होने पर 10 अगस्त को दूसरा टरबाइन भी दोबारा शुरू किया गया। शनिवार शाम संयंत्र से किए गए एक लाइव प्रसारण के दौरान मैग्यार ने कहा, “अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो बुधवार तक परमाणु ऊर्जा संयंत्र अपनी 2,000 मेगावाट की पूरी क्षमता पर पहुंच जाएगा। पहले टरबाइन के बंद होने के लगभग एक महीने बाद सभी आठों टरबाइन फिर से चालू हो जाएंगे।” पिछले सप्ताह सरकार ने संयंत्र के लिए ठंडा करने वाले पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई आपातकालीन कदम उठाए थे। इन उपायों में पाक्स और डुनास्जेटबेनेडेक के बीच डेन्यूब नदी पर एक डूबा हुआ बांध (वियर) बनाना और नदी के एक हिस्से में 80-मीटर के दो बजरे (बड़ी नाव) को नियंत्रित तरीके से डुबोना शामिल था। मैग्यार ने कहा कि आंशिक रूप से बने बांध और दो बजरे ने प्लांट के पास जलस्तर को लगभग 15 सेंटीमीटर बढ़ा दिया है। इससे डेन्यूब में जलस्तर बहुत कम होने के बावजूद उस समय चल रही दो टरबाइन को चालू रखने में मदद मिली।