कनाडा का जवाब, ‘अमेरिकी टैरिफ के बदले डॉलर फॉर डॉलर शुल्क पर होगा काम’

ओटावा। कनाडा की अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की समयसीमा शुक्रवार आधी रात तक थी। ये बिना किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचे समाप्त हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ का “डॉलर फॉर डॉलर” जवाब देने का ऐलान किया है। कार्नी ने इसे लेकर बयान जारी किया। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ये बयान पोस्ट किया गया। उन्होंने कहा, ” कनाडाई अधिकारियों ने बातचीत में पूरी ईमानदारी से काम किया, लेकिन अंतिम समय में अमेरिका की ओर से प्रस्तावित शर्तों में किए गए बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदेह थे। इन बदलावों से किसी भी संभावित समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया।” अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे 50 प्रतिशत टैरिफ का जिक्र करते हुए कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने श्रमिकों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए उतने ही मूल्य का जवाबी शुल्क लगाएगा। अमेरिकी टैरिफ से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद प्रभावित होंगे। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक कई तरह के सामान शामिल हैं। दोनों देशों के बीच पिछले साल करीब 880 अरब डॉलर का वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार हुआ था। वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने बातचीत विफल होने को कनाडा के लिए “गंवाया हुआ अवसर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा ने पहले जिन प्रतिबद्धताओं पर सहमति जताई थी, उनसे पीछे हटते हुए नई मांगें रखीं, जिससे दोनों पक्षों के बीच बना संतुलन बिगड़ गया। कनाडा ने स्टील, एल्युमीनियम, वाहन और लकड़ी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अमेरिकी रियायतों की मांग की थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन इन पर सहमत नहीं हुआ। इस टकराव का आर्थिक असर भले सीमित हो, लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव बड़ा माना जा रहा है। इससे अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कनाडा के ओंटारियो प्रांत के प्रीमियर डग फोर्ड ने कार्नी के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कनाडा को अमेरिकी कदम का “टैरिफ के बदले टैरिफ, डॉलर के बदले डॉलर” जवाब देना चाहिए। कनाडाई चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष कैंडेसा लांग ने अमेरिकी टैरिफ को “उत्तर अमेरिकी प्रतिस्पर्धा पर बड़ा प्रहार” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं की लागत बढ़ेगी और कनाडा में ग्राहक, निवेश तथा छोटे कारोबार प्रभावित होंगे।
देवदत्त पड्डिकल ने तीसरे नंबर के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है: मोहम्मद कैफ

नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच रविवार से कोलंबो में टेस्ट सीरीज के दूसरे और आखिरी मैच की शुरुआत हो रही है। पहला टेस्ट जीत सीरीज में 1-0 से आगे चल रही टीम इंडिया की कोशिश दूसरा टेस्ट जीत क्लीन स्वीप करने की होगी। वहीं, श्रीलंका जीत दर्ज कर सीरीज में बराबरी की कोशिश करेगी। पहले टेस्ट में भारत की तरफ से तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पड्डिकल ने पहली पारी में शतक लगाया था। पड्डिकल ने 167 रन की पारी खेली थी, जो भारत के लिए निर्णायक साबित हुई। पड्डिकल ने दूसरी पारी में भी 44 रन बनाए थे और भारत की 165 रन की जीत के बाद उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज और अपने क्षेत्ररक्षण के लिए मशहूर रहे मोहम्मद कैफ का मानना है कि शतकीय पारी के बाद टेस्ट में तीसरे नंबर के बल्लेबाज के रूप में देवदत्त पड्डिकल का पलड़ा भारी हो गया है। कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “साई सुदर्शन को मौका दिया गया और उन्होंने हर तीसरी या चौथी पारी में अर्धशतक लगाया। लेकिन दूसरा खिलाड़ी (पड्डिकल) 160 रन बना रहा है और मैन ऑफ द मैच बन रहा है। इसलिए, एक हर तीसरी पारी में 50 रन बनाता है, और दूसरा असरदार पारी खेलता है। शुभमन गिल की कप्तानी में मदद करने वाले और भारत की डब्ल्यूटीसी उम्मीदों को जिंदा रखने वाले खिलाड़ी की अहमियत ज्यादा मायने रखेगी। पड्डिकल ने अपनी दावेदारी मजबूती से पेश की है।” चेतेश्वर पुजारा के संन्यास के बाद भारतीय टीम टेस्ट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए बेहतर विकल्प की तलाश में है। साई सुदर्शन और देवदत्त पड्डिकल इस जगह को भरने के लिए काफी आगे नजर आ रहे हैं। पड्डिकल के कोलंबो में होने वाले दूसरे टेस्ट के प्रदर्शन पर उनके आगे का भविष्य निर्भर करेगा।
फिलीपींस की राजधानी में बाढ़ के बाद बीमारी का संकट, तेजी से बढ़ रहा लेप्टोस्पायरोसिस

मनीला। फिलीपींस की राजधानी में संक्रामक रोगों के एक बड़े अस्पताल में लेप्टोस्पायरोसिस के मामले 50 तक पहुंच गए हैं और वहीं दो लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी वजह मूसलाधार बारिश और उसके बाद आई व्यापक बाढ़ है। समाचार एजेंसी सिंहुआ ने स्थानीय मीडिया टीवी5 के हवाले से बताया कि स्वास्थ्य विभाग (डीओएच) द्वारा संचालित संक्रामक रोगों के लिए राष्ट्रीय रेफरल केंद्र, सैन लाजारो अस्पताल ने लेप्टोस्पायरोसिस के मरीजों के लिए एक एक्सप्रेस लेन खोली है। डीओएच के अनुसार, अब तक देश भर से 3,760 मामले सामने आए और आशंका है कि गुजरते दिनों के साथ ये संख्या और बढ़ेगी। स्थानीय मीडिया की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य फिलीपींस के इलोइलो प्रांत में पिछले आठ महीनों में लेप्टोस्पायरोसिस से करीब 10 लोगों की मौत हुई है। इलोइलो प्रांत में मरने वालों की संख्या 2025 की इसी अवधि में इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या से दोगुनी है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, लोगों से आग्रह किया गया है कि अगर उन्हें संक्रमित होने का अंदेशा है तो प्रोफिलैक्सिस या बचाव वाली एंटीबायोटिक्स तुरंत लें। इस बीच, नागरिक सुरक्षा कार्यालय ने शुक्रवार को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के कारण कुल 88 शहरों और नगर पालिकाओं ने आपदा की स्थिति घोषित की गई है। सबसे बुरी तरह प्रभावित प्रांतों में सेंट्रल लुजोन के पम्पांगा, बाटान और बुलाकान शामिल हैं; यह देश का सबसे बड़ा मैदानी इलाका है जो लुजोन के मुख्य द्वीप पर मनीला के उत्तर में स्थित है। पम्पांगा प्रांत में, आधे से ज्यादा गांव अभी भी जलमग्न हैं, जिसके लगभग 10 लाख (1 मिलियन) लोगों पर इसका असर पड़ा है और कृषि को लगभग 1.4 बिलियन पेसो (लगभग 22.68 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हुआ है। बाटान प्रांत ने आपदा की स्थिति घोषित की है और लगभग 8,000 निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बुलाकान प्रांत में, बाढ़ से हुए नुकसान के कारण सांता मारिया का एक पुल बंद रहा। ‘आपदा की स्थिति’ फिलीपींस सरकार द्वारा जारी की गई एक आधिकारिक आपातकालीन घोषणा है, जो तब की जाती है जब कोई गंभीर प्राकृतिक आपदा, महामारी या बड़ा संकट किसी शहर, प्रांत या पूरे देश को अपनी चपेट में लेता है।
केके की आवाज में बसता था हर दिल का अफसाना, कभी अपने प्यार को पाने के लिए की थी सेल्समैन की नौकरी

नई दिल्ली। “कोई कहे, कहता रहे कितना भी हमको दीवाना, हम लोगों की ठोकर में है ये जमाना, जब साज है, आवाज है, फिर किसलिए हिचकिचाना।” यह वो आवाज थी जो बस दिल में उतर जाती थी। यह आवाज कॉलेज के गलियारों में गूंजती थी। यह आवाज कानों में ईयरफोन लगाकर सुनी गई पहली मोहब्बत की भी थी। बात हो रही है कि दिवंगत गायक केके की। केके का पूरा नाम कृष्ण कुमार कुन्नथ था। 23 अगस्त 1968 को केके दिल्ली में जन्मे, लेकिन परिवार मलयाली था। केके ने सेंट मैरी स्कूल से स्कूल की पढ़ाई पूरी की और किरोड़ीमल कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन पूरी की। उन्होंने दो साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था और वे अपने कॉलेज के रॉक बैंड का हिस्सा भी थे। उन्हें यूटीवी के लिए सिंगर लेस्ली लुईस का एक मिनट का जिंगल गाने का मौका मिला, जिससे उनके करियर की शुरुआत हुई। किशोर कुमार की गायकी और आरडी बर्मन का संगीत केके पर बड़ा गहरा असर डालता था, लेकिन बॉलीवुड में गायक बनना इतना आसान नहीं होता है। केके ने जिंगल्स बनाने शुरू किए। बॉलीवुड में आने से पहले केके ने अनेकों जिंगल्स बनाए। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया। उनकी जिंदगी का एक किस्सा यह बताया जाता है कि ग्रेजुएशन के बाद छह-आठ महीने केके ने सेल्समैन की नौकरी भी की। यह नौकरी उन्होंने इसलिए की कि उन्हें शादी करनी थी। एक लड़की से उन्हें प्यार था और उसके परिवार को दिखाना था कि लड़का नौकरी करता है। हालांकि, छह-आठ महीने बाद केके समझ चुके थे कि उनकी नियति सेल्समैन बने रहना नहीं था। उनकी मंजिल कुछ और थी जिसको तलाशने के लिए केके ने खुद को आजमाना शुरू कर दिया। 1999 में जब भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप खेलने जा रही थी, तब केके ने टीम के लिए ‘जोश ऑफ इंडिया’ गाना गाया। इस गाने ने टीम इंडिया में खूब जोश भरा। बिना किसी ट्रेनिंग और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के, युवा केके ने 1990 के दशक की शुरुआत में म्यूजिक कंपोजरों के दरवाजे खटखटाना शुरू कर दिया था। “तड़प तड़प के इस दिल से आह निकलती रही, मुझको सजा दी प्यार की, ऐसा क्या गुनाह किया, तो लुट गए हां लुट गए, तो लुट गए हम तेरी मोहब्बत में” बॉलीवुड फिल्म के लिए गाने का उनका सपना तब सच हुआ, जब विशाल भारद्वाज ने उन्हें संपूर्ण सिंह गुलजार की फिल्म ‘माचिस’ (1996) में “छोड़ आए हम” गाना गाने के लिए कहा। लेकिन उन्हें बड़ी पहचान संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ (1999) के बेहद लोकप्रिय गाने “तड़प तड़प” से मिली। केके की खासियत उनके गानों का ताजापन और जोश था। जहां बॉलीवुड एक के बाद एक रोमांटिक गाने बना रहा था, वहीं केके के शुरुआती हिट गाने दोस्ती और जिंदगी के उतार-चढ़ाव व पुरानी यादों के खट्टे-मीठे एहसास के बारे में थे। चाहें “छोड़ आए हम वो गलियां, जहां तेरे पैरों के कंवल गिरा करते थे, हंसे तो दो गालों में भंवर पड़ा करते थे।” या “सच कह रहा है दीवाना दिल, दिल ना किसी से लगाना। झूठे हैं यार के वादे सारे, झूठी हैं प्यार की कस्में।” बॉलीवुड में केके की आवाज ने ऐसा जादू किया कि उनके पास लंबी फेहरिस्त बनती चली गई। वे लोगों के दिलों में भी बस चुके थे। केके की आवाज में एक अलग कशिश थी। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती भाषाओं की फिल्मों में गाने रिकॉर्ड किए। केके कोलकाता में लाइव परफॉर्म कर रहे थे, लेकिन स्टेज के इस कलाकार ने स्टेज पर ही आखिरी सांस ली। केके को उन लोगों के सामने हार्टअटैक आया, जो इस बेहतरीन गायक के फन के मुरीद थे। केके 53 साल की उम्र में 31 मई 2022 को इस दुनिया को छोड़कर चले गए। हालांकि, कलाकार कभी मरता नहीं है, केके अपनी हमेशा गूंजने वाली आवाज के जरिए श्रोताओं के दिलों में जिंदा हैं।
रसिका दुग्गल ने शेयर किया मेलबर्न का अनुभव, कहा- रेखा के साथ ‘उमराव जान’ देखना रहा यादगार

मुंबई, 22 अगस्त (आईएएनएस)। अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने भारतीय फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2026 में ‘बेस्ट एक्ट्रेस (सीरीज)’ का पुरस्कार जीतकर नया कीर्तिमान हासिल किया है। शनिवार को अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मेलबर्न जर्नी के बारे में बताया। अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने इंस्टाग्राम पर मेलबर्न फिल्म फेस्टिव की कुछ झलकियां शेयर कीं। इसमें उनके साथ अभिनेत्री रेखा, रानी मुखर्जी और अभिनेता विजय शामिल हैं। इसके साथ ही स्टेज पर पुरस्कार लेते हुए भी तस्वीर नजर आ रही है। अभिनेत्री ने अपनी इस पोस्ट के जरिए फिल्म फेस्टिवल में यादगार पलों के बारे में बताया। साथ ही, क्लासिक उमराव जान देखने के अनुभव को याद किया और रानी मुखर्जी के बारे में एक इमोशनल किस्सा शेयर किया। लिखा, “लंबी फ्लाइट्स, एक के बाद एक इवेंट्स जल्दी-जल्दी में किया गया मेकअप, मेरा कैमरा खुद कहता है कि अपना लेंस साफ करो और हेडफोन कभी मिलता ही नहीं। इन सबके बावजूद मुझे हैरान होती है कि मैं हमेशा आईएफएफएम से इंसपायर्ड होकर लौटती हूं। मुझे एहसास होता है कि पागलपन भरी जिंदगी वाकई में जीने लायक है। अभिनेत्री ने आगे फिल्म प्रोड्यूसर मिटू भौमिक लांगे और स्टाइलिश नताशा समेत पूरी टीम का शुक्रिया अदा किया। साथ ही, बताया कि अभिनेत्री रेखा कि फिल्म उमराव का असर आज भी बरकरार है। उन्होंने लिखा, “रेखा जी और ऐसी ऑडियंस के साथ फिल्म उमराव जान देखना, जो फिल्म के डायलॉग पूरे कर रही थी और गानों के साथ गा रही थी। एक फिल्म का 45 साल बाद भी ऐसा असर हो सकता है। अभिनेत्री ने आगे रानी मुखर्जी की कहानी के बारे में बताते हुए लिखा, “रानी मुखर्जी को स्कूल के एक नाटक में शकुंतला के रोल के लिए कास्ट न होने की एक खूबसूरत कहानी सुनाते हुए सुनना – जिससे मैं पूरी तरह से जुड़ पाई। पता चला हम सबकी एक शकुंतला वाली कहानी है और जाहिर है, दिल्ली क्राइम सीरीज के लिए अवॉर्ड जीतना भी मेरे लिए खास था।
प्रधानमंत्री मोदी भाजपा मुख्यालय में जारी बैठक में होंगे शामिल, शाम 7 बजे नितिन नवीन की नई टीम को करेंगे संबोधित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में पार्टी मुख्यालय में जारी नए पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होंगे। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा की बैठक में शामिल होने के लिए जाएंगे। वे शनिवार शाम करीब 7 बजे भाजपा मुख्यालय में चल रही बैठक में शामिल पदाधिकारियों को संबोधित भी करेंगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक का एक मुख्य एजेंडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना होगा। बता दें कि नरेंद्र मोदी ने पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। तब से वे लगातार सार्वजनिक पद पर बने हुए हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने लगभग 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वे 12 वर्षों से अधिक समय से इस पद पर हैं। इससे पहले, शनिवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के नए पदाधिकारियों की बैठक की शुरुआत की। नव-नियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों की परिचय बैठक के आरंभ में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी ने ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किया। बैठक में भाजपा ने 19 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम’ के सिर्फ प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा की। साथ ही, इसका स्पष्ट शब्दों में विरोध किया गया। नितिन नवीन ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “भाजपा ‘वंदे मातरम’ को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है।
वंदे मातरम की विरासत की रक्षा के लिए भाजपा ने प्रस्ताव किया पारित, सीडब्ल्यूसी के फैसले की निंदा की

नई दिल्ली। वंदे मातरम् के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के संबंध में भाजपा ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव की कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा कि भाजपा 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ के केवल प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध करती है। भाजपा वन्दे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वन्दे मातरम् ने भारत माता के प्रति भक्ति और समर्पण को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी और राष्ट्रीय जागरण का एक शक्तिशाली माध्यम बना। वन्दे मातरम्, जिसका अर्थ है “हे माता, मैं तुझे नमन करता हूं” 1905 में बंगाल विभाजन के बाद चले स्वदेशी आंदोलन के दौरान प्रतिरोध की हुंकार बना और देश के कोने-कोने तक पहुंचा। नवीन ने आगे पोस्ट में लिखा कि गीत की क्रांतिकारी शक्ति को पहचानते हुए ब्रिटिश साम्राज्य ने इसे बार-बार दबाने का प्रयास किया। 1906 में बरिसाल में इसके सार्वजनिक गायन पर प्रतिबंध लगाया गया, लेकिन इसकी आवाज को दबाया नहीं जा सका। 1907 में स्टुटगार्ट में भीकाजी कामा द्वारा प्रदर्शित ध्वज पर वन्दे मातरम् अंकित था और शीघ्र ही यह राष्ट्रीय आंदोलन की चेतना में गहराई से समाहित हो गया। इसलिए यह इतिहास की विडंबना है कि जिस वन्दे मातरम् को अंग्रेजों ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध की चेतना जगाने के कारण दबाने का प्रयास किया था, उसी वन्दे मातरम् को कुछ दशकों बाद कांग्रेस ने सांप्रदायिक तुष्टीकरण के नाम पर छह में से केवल दो पदों तक सीमित कर दिया। भाजपा प्रमुख ने कहा कि कांग्रेस ने कभी वन्दे मातरम् के राष्ट्रीय महत्व को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में बढ़ते सांप्रदायिक दबाव के आगे झुकती चली गई। 1923 के काकीनाडा कांग्रेस अधिवेशन में जब पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने वन्दे मातरम् गाना प्रारंभ किया, तब कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने आपत्ति जताई और अधिवेशन से बाहर चले गए। 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति ने निर्णय लिया कि राष्ट्रीय अवसरों पर वन्दे मातरम् के छह में से केवल प्रथम दो पद गाए जाएंगे। बाद के पदों में धार्मिक संदर्भों को लेकर उठाई गई आपत्तियों को स्वीकार करते हुए कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत के पूर्ण स्वरूप को सीमित किया। यह उस व्यापक तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा था जिसने सांप्रदायिक और अलगाववादी राजनीति को लगातार अधिक स्थान दिया। इसी राजनीतिक वातावरण में द्विराष्ट्र सिद्धांत को बल मिला और अंततः भारत को विभाजन की त्रासदी झेलनी पड़ी। प्रस्ताव का जिक्र करते हुए नितिन नवीन ने आगे बताया कि इस निर्णय की राजनीतिक पृष्ठभूमि 1938 में मोहम्मद अली जिन्ना और पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच हुए पत्राचार से भी स्पष्ट होती है। मुस्लिम लीग की चौदह मांगों में वन्दे मातरम् को पूरी तरह त्यागने की मांग भी शामिल थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय अवसरों पर वन्दे मातरम् के छह में से चार पदों को हटाने के कांग्रेस कार्यसमिति के निर्णय का बचाव और समर्थन किया। इस प्रकार सांप्रदायिक आपत्तियों को राष्ट्रीय गीत के सार्वजनिक स्वरूप को प्रभावित करने की अनुमति दी गई। लेकिन वन्दे मातरम् के इतिहास को केवल उसके कुछ पदों के धार्मिक संदर्भों तक सीमित करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ अन्याय होगा। महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए नवीन ने कहा कि उन्होंने स्वयं वन्दे मातरम् के बारे में लिखा था कि इसका स्रोत क्या था और इसकी रचना कब और कैसे हुई, यह अलग बात है। लेकिन बंगाल के विभाजन के दिनों में यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक अत्यंत शक्तिशाली युद्धघोष बन गया था। यह साम्राज्यवाद-विरोधी नारा था। जब मैं छोटा था और न आनंदमठ के बारे में जानता था, न उसके अमर रचयिता बंकिम के बारे में, तब भी वन्दे मातरम् ने मुझे अपने प्रभाव में ले लिया था। जब मैंने इसे पहली बार सुना और गाया, तो यह मुझे मंत्रमुग्ध कर गया। मैंने इसके साथ शुद्धतम राष्ट्रीय भावना को जोड़ा। मुझे कभी यह विचार नहीं आया कि यह हिंदुओं का गीत है या केवल हिंदुओं के लिए है। दुर्भाग्य से, आज हम बुरे दौर में आ गए हैं। महात्मा गांधी का यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्पष्ट करता है कि वन्दे मातरम् का ऐतिहासिक अर्थ केवल उसके कुछ पदों में प्रयुक्त धार्मिक बिंबों तक सीमित नहीं था। करोड़ों भारतीयों के लिए यह स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान साम्राज्यवाद-विरोधी हुंकार और शुद्ध राष्ट्रीय भावना की अभिव्यक्ति बन चुका था। 24 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि जन गण मन को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया जाएगा और वन्दे मातरम्, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, को जन गण मन के साथ “समान सम्मान और समान दर्जा” प्राप्त होगा। इस प्रकार स्वतंत्र भारत ने स्वयं अपना संवैधानिक समाधान प्रस्तुत किया। जन गण मन औपचारिक राजकीय प्रोटोकॉल में राष्ट्रगान के रूप में स्थापित हुआ, जबकि वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत के रूप में समान राष्ट्रीय सम्मान और गौरव के साथ भारत की राष्ट्रीय चेतना में प्रतिष्ठित रहा। लेकिन स्वतंत्रता के बाद धीरे-धीरे वन्दे मातरम् के प्रथम दो पद ही सार्वजनिक गायन की मानक परंपरा बन गए और शेष चार पद नई पीढ़ियों के लिए अपरिचित होते गए। परिणाम यह हुआ कि भारत के पास छह पदों वाला राष्ट्रीय गीत था, लेकिन पीढ़ियां मुख्यतः उसके दो पदों को ही जानती रहीं। नवीन ने आगे पोस्ट में लिखा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा विषय नहीं है। यह भारत के सम्मान और उन असंख्य देशभक्तों की विरासत का प्रश्न है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। भारतीय जनता पार्टी देशवासियों से आह्वान करती है कि वे स्मरण रखें – वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई
भगवंत मान की पत्नी पर गंभीर आरोपों के बाद हमलावर विपक्ष, मांगा पंजाब के मुख्यमंत्री का इस्तीफा

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी के खिलाफ कथित रूप से रेप मामले को दबाने के लिए 5 करोड़ मांगने के आरोपों पर विपक्ष हमलावर है। विपक्ष ने मामले की सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आम आदमी पार्टी की महिला विरोधी राजनीतिक पर्दाफाश हुआ। दिनदहाड़े आम आदमी पार्टी का भ्रष्टाचार खुला। और तो और, पार्टी ने इसे दबाने की कोशिश भी की।” प्रदीप भंडारी ने लिखा, “राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन आरोपों का संज्ञान लिया है, जिनमें कहा गया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी ने रेप के एक मामले को दबाने के लिए 5 करोड़ रुपए की मांग की थी। ये आरोप पंजाब के पूर्व जज जस्टिस रंजीत सिंह ने लगाए हैं। आयोग ने अब पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को इस मामले की जांच करने और दो हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।” भाजाप प्रवक्ता ने आगे लिखा, “आम आदमी पार्टी महिलाओं की आवाज दबाती है। महिलाओं के प्रति अरविंद केजरीवाल का रवैया शर्मनाक है।” प्रदीप भंडारी ने सवाल किया कि क्या अब आतिशी और आम आदमी पार्टी की दूसरी महिला नेता इस पर कुछ बोलेंगी? वहीं, शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने भगवंत मान को ‘गुरु-द्रोही’ बताते हुए इस घटना पर जवाब मांगा। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “रेप पीड़िता उस पुलिस फोर्स से क्या न्याय की उम्मीद कर सकती है जो आपके (भगवंत मान) इशारों पर नाचती है?” मजीठिया ने कहा, “भगवंत मान की पत्नी पर 5 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आपके डीजीपी और मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि आपकी पुलिस पीड़िता के बजाय आरोपी को बचाने में लगी है। आपके कहने पर, आरोपी को कथित तौर पर रेप के दो मामलों में जमानत मिल गई और उसे आजाद छोड़ दिया गया।” अकाली नेता ने कहा, “अगर आपमें हिम्मत है, तो सच सामने लाएं। आपका ‘अस्थायी डीजीपी’ 5 करोड़ रुपए की मांग के आरोप की जांच नहीं कर सकता, क्योंकि आप खुद गृह मंत्री भी हैं। भगवंत मान को पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए तुरंत इस मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करनी चाहिए। भगवंत मान, आपकी पत्नी पर 5 करोड़ रुपए की मांग करने का गंभीर आरोप लगा है। नैतिक आधार पर आपने पंजाब के लोगों का भरोसा खो दिया है। तुरंत पंजाब के राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजें।
विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधा, उदयवीर सिंह बोले- उन्हें ‘पी’ अक्षर से परेशानी है

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 52 नेताओं को बुलेटप्रूफ जैकेट दिए जाने और अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी पर टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रिया दी है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी पर टिप्पणी को लेकर उदयवीर सिंह ने कहा, “वे चौधरी चरण सिंह के व्यक्तित्व को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं। समाजवादियों ने चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में काम किया है। उनके आदर्श और विचार को लेकर आज भी चल रहे हैं। चौधरी चरण सिंह भाजपा के खिलाफ थे, किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ थे। लेकिन आरएलडी उनके (भाजपा) साथ चली गई, वो उसको सोचना है। चौधरी चरण सिंह एक विचार और विचारधारा हैं।” उदयवीर सिंह ने कहा कि स्वार्थ के कारण लोग चौधरी चरण सिंह को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं। यादव, मुस्लिम, गुर्जर और जाट सभी वर्ग के लोग उनको नेता मानते थे। अब कुछ लोगों की ओर से एक जाति में घेरने की कोशिश की जा रही है। समाजवादी पार्टी चौधरी चरण सिंह की विचारधारा पर चलती है; उनको अपना आदर्श मानती है। उदयवीर सिंह आगे कहा, “सीएम योगी सोच-विचार, पाकिस्तान, हिंदू और मुसलमान से आगे न जानते हैं और न सोच सकते हैं। उनके लिए ‘पी’ अक्षर से परेशानी है। उन्होंने इन 10 वर्षों में जिन लोगों को परेशान किया है, वे सभी लोग अब इनकी सरकार को परेशानी में डालने वाले हैं। वे सत्ता से हटने वाले हैं, इसलिए वे नाराजगी में इधर-उधर बोल रहे हैं। उनको इतना ही याद रखना है कि ये सारे पीड़ित, शोषित और वंचित समाज के लोग इकट्ठे होकर उनके विचार को नष्ट करेंगे। इसलिए उनको ‘पी’ से परेशानी याद रखना चाहिए। सरकार की ओर से बुलेटप्रूफ जैकेट दिए जाने को लेकर उदयवीर सिंह ने कहा, “सरकार के शीर्ष स्तर के लोग ही परेशान हैं। उन्हें या तो बुलेटप्रूफ जैकेट भौकाल के लिए चाहिए, या तो योगी सरकार में उनको अपनी सुरक्षा का विश्वास नहीं है। नेताओं की सुरक्षा तो होनी चाहिए, लेकिन जब चुनाव नजदीक आता है, तो असुरक्षा की भावना से घिरी सरकारें बहुत लोगों को रेवड़ी बांट कर प्रेरित करने की कोशिश करती हैं। अखिलेश यादव के पीडीए में ‘पी’ को लेकर सीएम योगी के बयान पर कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “इनका पाकिस्तान के बिना काम नहीं चलता। देश के पिछड़े, पंडित, पीड़ित और देश में परिवर्तन की लहर इनको नहीं दिखाई देती है। इस बार भाजपा का ‘पी’ से पाकिस्तान वाला नैरेटिव हम लोगों की ओर से पूरा नहीं होने दिया जाएगा। ओपी राजभर को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर की ओर से मानसिक विक्षिप्त की तरह व्यवहार किया जा रहा है। जितना ही वे भाजपा के पक्ष में बातें करने की कोशिश करते हैं, उतना ही वे अपने समाज से दूर जा रहे हैं। भाजपा की संगत के कारण उनके पास एक भी विधायक नहीं रहा। उनके कुछ एमएलए भाजपा में तो कुछ सपा में चले गए। अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर जयंत चौधरी की ओर से पलटवार करने को लेकर सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि ‘चवन्नी’ वाला हल्का शब्द जयंत चौधरी की ओर इस्तेमाल किया गया था, किसी और ने नहीं किया था। इस शब्द की जिम्मेदारी उनको लेनी पड़ेगी। वे चौधरी चरण सिंह के पोते हैं, हम सभी लोगों की ओर से चौधरी चरण सिंह का सम्मान किया जाता है, लेकिन चौधरी चरण सिंह ने कभी इस तरह की अवसरवादिता के लिए ये पार्टी नहीं बनाई थी। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने बाबा रामदेव को लेकर कहा, “रामदेव तो पहले ही सलवार पहनकर भाग गए थे। बृजभूषण शरण सिंह का यह कहना सही है। और बृजभूषण शरण सिंह जी ने जो कहा है, उससे साफ पता चलता है कि भारतीय जनता पार्टी के अपने खेमे में ही काफी बेचैनी है। लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। एक दूसरे पर नकली उत्पादों का आरोप लगा रहा है, तो दूसरा पहले वाले पर कुछ और आरोप लगा रहा है। जिन्हें सत्ता में अपना हिस्सा मिल रहा है, वे चुप हैं और जिन्हें हिस्सा नहीं मिल रहा, वे आपस में लड़ रहे हैं, चाहे वह बृजभूषण हों या बाबा रामदेव।