कैनेडियन ओपन: बेन शेल्टन लगातार दूसरी बार फाइनल में, सेमीफाइनल में लर्नर टीएन को हराया

मॉन्ट्रियल। गत चैंपियन बेन शेल्टन ने अपने साथी अमेरिकी खिलाड़ी लर्नर टीएन को सेमीफाइनल में 6-2, 6-3 से हराकर कैनेडियन ओपन के फाइनल में जगह बना ली। यह लगातार दूसरा मौका है, बेन शेल्टन ने इस टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई। 2026 में अपना खिताब बचाने उतरे बेन शेल्टन का प्रदर्शन शानदार रहा है। सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले, वह ड्रॉ में अकेले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने टूर्नामेंट में एक भी सेट नहीं गंवाया था और यह ट्रेंड बुधवार को भी जारी रहा। 1995 के बाद पहली बार मॉन्ट्रियल में फाइनल में पहुंचने वाले सभी खिलाड़ी अमेरिकी हैं। आंद्रे अगासी ने पुराने जैरी पार्क स्टेडियम में खेले गए फाइनल टूर्नामेंट में पीट सम्प्रास को हराकर खिताब जीता था। 31 साल बाद, दुनिया के नंबर 10 शेल्टन का मुकाबला गुरुवार रात आईजीए स्टेडियम में दुनिया के नंबर 31 खिलाड़ी ब्रैंडन नाकाशिमा से होगा। टीएन के खिलाफ पहले पांच गेम कड़े मुकाबले वाले थे, और शेल्टन को शुरुआत में एक ब्रेक पॉइंट भी बचाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने विपक्षी की तेज शुरुआत का सामना किया। शुरुआती सेट में 4-2 से आगे रहे शेल्टन ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शेल्टन ने दूसरे सेट की शुरुआत में फिर से सर्व तोड़ी, ऐसा लगा कि आखिरी फ्रेम में 4-1 पर टीएन के लॉब का पीछा करते हुए बैक वॉल से टकराने से ही उनकी गति धीमी हुई, जिससे उन्हें अपनी कोहनी पर लगे कट के इलाज के लिए मेडिकल टाइमआउट लेना पड़ा। शेल्टन गुरुवार को चैंपियन के तौर पर खेलते हुए लगातार दूसरी बार खिताब जीतने के इरादे से उतरेंगे। फाइनल में शेल्टन का मुकाबला ब्रैंडन नाकाशिमा से होगा। नाकाशिमा ने सेमीफाइनल में राफेल जोडार को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। नाकाशिमा का यह पहला एटीपी मास्टर्स 1000 फाइनल मुकाबला है।

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच मानसून सत्र में कई अहम बिल हुए पास

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र इस बार हंगामे की भेंट चढ़ गया। गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही मानसून सत्र का समापन हुआ। गुरुवार को सुबह 11 बजे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के साथ लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। राष्ट्रगीत के सभी छह पद बजाए गए। इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सदन में मौजूद रहे। राष्ट्रगीत के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इस बार स्पीकर ओम बिरला ने सत्र के दौरान लोकसभा के कामकाज और उत्पादकता का ब्यौरा देने वाला पारंपरिक समापन भाषण भी नहीं पढ़ा। गौरतलब है कि इस बार पूरे सत्र में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर गबन और नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामा जारी रहा। विपक्ष ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई का भी विरोध किया। साथ ही, विपक्ष ने सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी नहीं होने पर सवाल उठाए और छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सरकार का जवाब मांगा। उधर, लोकसभा में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच सरकार कई अहम बिल पास कराने में सफल हुई। कुछ बिल विपक्ष के सदस्यों की ओर से चर्चा में हिस्सा नहीं होने पर बिना किसी बहस के लोकसभा से पास हुए। मानसून सत्र में लोकसभा से पारित होने वाले विधेयकों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने वाले केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक शामिल रहे। वहीं, लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भेजने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया।

‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन को लेकर प्रियांक खड़गे ने साधा निशाना, लिखा-बांटते फिरते हैं ‘देशभक्त’ होने का सर्टिफिकेट

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रभक्ति के उत्सव में बदलने के लिए देशभर में भाजपा की ओर से ‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन चलाया जा रहा है। इसे लेकर कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “भाजपा को अपना ‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन आरएसएस हेडक्वार्टर से शुरू करना चाहिए। प्रियांक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “आजादी के बाद पांच दशकों से ज्यादा समय तक आरएसएस ने अपने नागपुर हेडक्वार्टर पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। तिरंगा आधिकारिक तौर पर 2002 में ही फहराया गया था। हर भारतीय को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने से पहले शायद भाजपा को पहले यह बताना चाहिए कि उसकी वैचारिक मूल संस्था ने तिरंगे के बजाय भगवा ध्वज को क्यों चुना और इतने लंबे समय तक उसके अपने हेडक्वार्टर से राष्ट्रीय ध्वज क्यों नदारद रहा?” प्रियांक खड़गे ने सवाल करते हुए लिखा, “एक सीधा सा सवाल अब भी बाकी है कि आपने आरएसएस के कितने ऐसे रूट मार्च देखे हैं जिनमें स्वयंसेवक पूरी यूनिफॉर्म में गर्व के साथ भारतीय तिरंगा लेकर मार्च करते हैं? एक भी नहीं। और ये लोग हर किसी को ‘देशभक्त’ होने का सर्टिफिकेट बांटते फिरते हैं। बता दें कि दिल्ली भाजपा की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा गया, “हर घर तिरंगा अभियान के तहत आइए, स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रभक्ति के उत्सव में बदलें। अपने घर, प्रतिष्ठान और कार्यस्थल पर तिरंगा फहराकर देश के प्रति सम्मान, गौरव और एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाएं। तिरंगे के साथ अपनी फोटो/सेल्फी लें और ‘हर घर तिरंगा’ के साथ सोशल मीडिया पर साझा करें।” भाजपा ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “डल झील, शिकारे, तिरंगा और पूरे रोंगटे खड़े हो गए! कश्मीर की खूबसूरती के बीच, शान से लहरता तिरंगा…यही है नए कश्मीर की नई पहचान! यहां सुकून है, विकास है और हर दिल में देश के लिए गर्व है। ये सिर्फ एक नजारा नहीं…नए कश्मीर की एनर्जी है!

लेह में भूकंप के तेज झटके, 5.5 रही तीव्रता, 10 किलोमीटर की गहराई पर था केंद्र

लेह। लेह में गुरुवार सुबह 6:05 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था और इसका केंद्र बिंदु 36.881 डिग्री नॉर्थ, 74.402 डिग्री ईस्ट पर दर्ज किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए बताया कि फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है। उथला भूकंप होने के कारण झटके काफी तेज महसूस किए गए। उथला भूकंप वह भूकंप है जिसका उद्गम केंद्र पृथ्वी की सतह से 0 से 70 किलोमीटर की गहराई के भीतर होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप पृथ्वी की सतह से लेकर 700 किलोमीटर तक की गहराई में आ सकते हैं। यूएसजीएस के आंकड़ों के मुताबिक इस पूरी रेंज को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिमसें उथला, मध्यम और गहरा भूकंप शामिल हैं। उथले भूकंप आमतौर पर ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं। इसकी वजह यह है कि इनमें भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है। इससे जमीन ज्यादा जोर से कांपती है और इमारतों को नुकसान पहुंचने और जानमाल की हानि की आशंका बढ़ जाती है। इससे पहले 5 अगस्त 2026 को दोपहर 3:36 बजे अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में भी भूकंप आया था। इसकी तीव्रता 5.4 मापी गई थी। उस भूकंप का केंद्र 29.008 डिग्री नॉर्थ, 94.739 डिग्री ईस्ट पर था और गहराई 17 किलोमीटर थी। मुख्य झटके से 5 मिनट पहले 3.6 तीव्रता का एक फोरशॉक भी आया था। मुख्य भूकंप के दो घंटे के भीतर केंद्र के उत्तर में 5.1 तीव्रता का एक बड़ा आफ्टरशॉक और कई छोटे झटके भी दर्ज किए गए थे। उस भूकंप का केंद्र डिब्रूगढ़ (असम से लगभग 171 किमी उत्तर, चांगलांग, अरुणाचल प्रदेश से 233 किमी उत्तर-पश्चिम, ईटानगर से 241 किमी उत्तर-पूर्व, जोरहाट, असम से 256 किमी उत्तर और मोकोकचुंग, नागालैंड से 299 किमी उत्तर में था। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

राजद के मार्च पर पप्पू यादव बोले- ‘राजनीतिक एजेंडा स्वीकार नहीं करेंगे लोग’, तेजस्वी को दी राहुल से सीखने की सलाह

नई दिल्ली/पटना। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 19 अगस्त को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राजभवन मार्च को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोग अब राजनीतिक एजेंडे को स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही, पप्पू यादव ने तेजस्वी को राहुल गांधी और अखिलेश यादव के सीखने की सलाह दी। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए सांसद पप्पू यादव ने राजद के मार्च पर कहा, “जेन-जी और अल्फा के आने से राजनीति का स्वरूप बदल गया है। लोगों का राजनीतिक दलों से भरोसा उठ गया है, सिवाय शायद एक-दो प्रतिशत नेताओं के। लगभग 98-99 प्रतिशत नेता बिहार के भविष्य के बारे में देखना पसंद नहीं करते। बिहार भी ऐसे लोगों के बारे में सोचना नहीं चाहता।” उन्होंने आगे कहा, “अगर वे (तेजस्वी यादव) कुछ सीखना चाहते हैं, तो उन्हें राहुल गांधी और अखिलेश यादव से सीखना चाहिए। लेकिन सीखने की कोई इच्छा नहीं है। वे कुंभकर्ण की तरह गहरी नींद में ही रहना चाहते हैं। इसलिए, लोग अब राजनीतिक एजेंडे को स्वीकार नहीं करेंगे और राजनीतिक एजेंडे का आम लोगों से कोई लेना-देना नहीं रह जाएगा। इसलिए राजनीतिक पार्टियों, खासकर छोटे दलों की दुकानें खत्म होने जा रही हैं।” वहीं, बिहार में शराबबंदी पर एनसीएईआर की स्टडी के बारे में पप्पू यादव ने कहा, “बिहार में असल में क्या सफल हुआ है? शराबबंदी फेल हो गई है, ड्रग्स हर घर तक पहुंच गया है और अपराध बहुत बढ़ गया है। ऐसा लगता है कि सिर्फ नेता और अधिकारी ही खुद को बचा पा रहे हैं। आम आदमी भगवान भरोसे है। गरीबी चरम पर है।” सांसद ने कहा कि सरकार में बहुत अधिक भ्रष्टाचार है। जिस चीज की कीमत एक हजार रुपए है, उसका बिल 15 हजार रुपए बनाया जा रहा है। नगर निगमों में भी भ्रष्टाचार है। अस्पतालों से लेकर नगर निगमों तक, अरबों-खरबों रुपये लूटे गए हैं। उन्होंने अपनी बातों को दोहराते हुए कहा कि शराबबंदी कभी सफल नहीं रही। शराबबंदी के तरीकों को बदलने की जरूरत थी और उसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए था। 20-25 सालों में सरकार ने कोई मूल्यांकन ही नहीं किया है। शराबबंदी के कारण आर्थिक रूप से नुकसान राज्य को हुआ है और ड्रग्स भी घर-घर पहुंचा है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के रांची छात्र आंदोलन में शामिल होने की घोषणा पर पप्पू यादव ने कहा, “रघुवर दास और भाजपा का अब कोई भविष्य नहीं बचा है। उन पर और उनके नेताओं पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। सबसे पहले, उन्हें इन मुद्दों पर भाजपा के अंदर ही विरोध-प्रदर्शन करना चाहिए। चार पूर्व मुख्यमंत्री हैं, उनकी ही लड़ाई चल रही है। रघुवर दास की अब कोई साख या आधार नहीं बचा है। सबसे पहले, उन्हें इस बात का जवाब देना चाहिए कि झारखंड की जनता से क्या-क्या लूटा गया। उन्हें देखना चाहिए कि उनकी सरकार के समय कितने पेपर लीक हुए।

गिरिराज का राहुल गांधी पर हमला, कहा-उद्दंड लड़के की तरह करते हैं काम

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में लगातार गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष नीट पेपर लीक, विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में सीधे जवाब चाहता है। वहीं, सत्ता पक्ष का आरोप है कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष अपनी गलतियां छिपाने के लिए सदन से भाग रहा है। इस बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी उस व्यक्ति का नाम है जो गांव के किसी शरारती बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं। उनके चेहरे देखिए, उनके भाव देखिए, उनके बात करने का तरीका देखिए। हमारे एक सांसद ने ठीक ही कहा है कि वह एक उद्दंड लड़के की तरह काम करते हैं।” गिरिराज सिंह ने कहा, “वह विपक्ष के नेता हैं और कहते हैं ‘मैं चुनौती देता हूं।’ आप कैसी चुनौती दे रहे हैं? संसदीय प्रणाली की अपनी मर्यादा होती है। क्या आप अमित शाह से अपनी तुलना करेंगे? उन्होंने काम करके दिखाया है कि कैसे अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाया गया और सीएए को लागू किया गया। आप चाहते हैं कि देश में आतंकवाद फैले। आप ‘अर्बन नक्सल’ की भूमिका निभा रहे हैं। अगर आपमें हिम्मत है तो संसदीय प्रणाली के अनुरूप बात करें और दूसरों की भी सुनें। आप ‘हिट-एंड-रन’ जैसा व्यवहार करते हैं।” उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा, “अमित शाह ने उनकी असलियत उजागर कर दी है। राहुल गांधी में नीट पर चर्चा करने की हिम्मत नहीं है। जब पैलेट गन के मुद्दे पर चर्चा होगी, तो नीट पर भी चर्चा होगी। जब ऐसा होगा, तो देश के अन्य राज्यों पर भी चर्चा होगी – पंजाब, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और झारखंड पर भी बात होगी। इसलिए, उनमें हिम्मत नहीं है। कांग्रेस को खुद पर शर्म आनी चाहिए।” गिरिराज सिंह ने कहा, “खड़गे जी, जो इतने वरिष्ठ नेता हैं, वे राहुल गांधी की ‘चाटुकारिता’ में लगे रहते हैं। उन्होंने दो-तीन पीढ़ियां देखी हैं, फिर भी वे राहुल गांधी की चापलूसी करते रहते हैं। वे कांग्रेस को डुबो देंगे और संसदीय प्रणाली को नुकसान पहुंचाएंगे।

मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा संकेत, मतदाता पहचान के लिए लगा सकते हैं राष्ट्रीय आपातकाल

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत दिया है कि वह अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन को अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करने की संभावना पर विचार कर सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके इस बयान ने चुनावी नियमों, मतदाता अधिकारों और संघीय सरकार की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ पर वेन एलिन रूट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इससे भी ज्यादा असामान्य चीजें पहले हो चुकी हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा।” रूट ने ट्रंप से कहा कि अगर सीनेट ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को मंजूरी नहीं देती, तो उन्हें आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। रूट ने सुझाव दिया कि ऐसी शक्तियों के जरिए फोटो पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य किया जा सकता है और डाक के जरिए भेजे जाने वाले मेल-इन बैलेट पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं। ट्रंप ने इस प्रस्ताव का साफ तौर पर समर्थन नहीं किया, लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों पर सीनेट को कार्रवाई करनी चाहिए। ट्रंप ने कहा, “सीनेट को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर आगे बढ़ना होगा। मुझे सच में लगता है कि ऐसा होना चाहिए, क्योंकि लोग इसकी उम्मीद कर रहे हैं और यह जरूरी भी है।” उन्होंने आगे कहा क‍ि हम चाहते हैं कि नागरिकता का प्रमाण हो। और मतदाता पहचान पत्र भी होना चाहिए। ट्रंप ने दावा किया कि कुछ रिपब्लिकन सीनेटर इन उपायों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन की तारीफ की और कहा कि प्रतिनिधि सभा इस कानून को पांच बार मंजूर कर चुकी है, लेकिन यह हर बार सीनेट में जाकर अटक जाता है। राष्ट्रपति ने डाक से मतदान की व्यवस्था की भी फिर से आलोचना की। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि यह प्रणाली धोखाधड़ी के लिए संवेदनशील है और खास तौर पर कैलिफोर्निया की चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा क‍ि मेल-इन बैलेट्स बहुत भ्रष्ट हैं। उन्होंने कहा क‍ि कैलिफोर्निया चुनावों के मामले में सबसे भ्रष्ट जगहों में से एक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में रिपब्लिकन मतदाताओं को मतपत्र प्राप्त करने में कठिनाई होती है। रूट ने ट्रंप से कहा कि चुनाव संबंधी यह कानून शायद सीनेट से मंजूरी न पा सके। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस इसे पारित कर भी दे, तब भी इसे तुरंत कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद रूट ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे अगले एक महीने के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करें। रूट का दावा था कि इससे प्रशासन सीनेट की मंजूरी का इंतजार किए बिना फोटो पहचान पत्र, नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता और मेल-इन वोटिंग पर सीमाएं लागू कर सकेगा। ट्रंप की प्रतिक्रिया ने इस संभावना को ज‍िंदा रखा, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की ओर से इस रास्ते को अपनाने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस कानून को पारित कर देती है तो इसे अदालत में चुनौती देना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। इंटरव्यू में जिस चुनावी प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत संघीय चुनावों में वोटर पंजीकरण करवाते समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य किया जाए। समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी सुरक्षा और मजबूत होगी। वहीं विरोधियों का तर्क है कि जिन योग्य नागरिकों के पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वोटर पंजीकरण कराने में परेशानी हो सकती है। अमेरिकी संघीय कानून पहले से ही गैर-नागरिकों को संघीय चुनावों में मतदान करने से रोकता है। अमेरिका में चुनाव मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन की ओर से कराए जाते हैं, जो अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों द्वारा तय ढांचे के तहत काम करते हैं।

दिल्ली: 15 अगस्त से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल, लाल किला-राजघाट के रास्ते बंद, बॉर्डर सील

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर गुरुवार को दिल्ली पुलिस राजधानी में फुल ड्रेस रिहर्सल करेगी। इसी के चलते सुबह से ही दिल्ली के संवेदनशील इलाकों, बॉर्डरों और लाल किले के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कई मार्गों को बंद कर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है और चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया है। आज गीता कॉलोनी से लाल किला और जामा मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे रूट पर बैरिकेडिंग की गई और हर आने-जाने वाले वाहन की गहन जांच की गई। आईटीओ से लाल किले की तरफ जाने वाले रास्ते और राजघाट की तरफ जाने वाले रास्ते को पूरी तरीके से बंद कर दिया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की तरफ से रूट डायवर्ट किया गया है। शाहदरा जिले में सुरक्षा और सख्त है। शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया, “आज फुल ड्रेस रिहर्सल है। शाहदरा जिला एक बहुत संवेदनशील इलाका है। बॉर्डर के नजरिए से देखें तो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से सटे हमारे सात बॉर्डर पॉइंट हैं। इन पॉइंट्स पर कल रात 10 बजे से ट्रैफ़िक पूरी तरह बंद कर दिया गया था। हमने पूरे जिले में पिकेट बनाए हैं। हमारे मौजूदा स्थायी पिकेट के अलावा हमने अस्थायी पिकेट भी लगाए हैं।” डीसीपी मीणा ने बताया कि लाल किले के पीछे के इलाके खासकर यमुना रिवरफ्रंट और खादर इलाके में चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग की जा रही है। बाहरी फोर्स और स्थानीय स्टाफ दोनों का इस्तेमाल करके इलाके के हर हिस्से में बारीकी से तलाशी ली जा रही है। यह पक्का किया जा रहा है कि वहां कोई अनाधिकृत व्यक्ति न रहे। उन्होंने कहा, “यमुना के पानी में नियमित रूप से नाव से पेट्रोलिंग की जा रही है और 15 अगस्त को सुरक्षा इंतजाम खत्म होने तक यह जारी रहेगी। हमने गीता कॉलोनी और काली नगर पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र को कवर करने के लिए दो नावें तैनात की हैं। इसके अलावा सभी ईआरवी यानी इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल अपने-अपने इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं।” आगामी 15 अगस्त को देखते हुए यूपी के नोएडा बॉर्डर से दिल्ली में आने-जाने वाले वाहनों की भी सघन तलाशी ली जा रही है। हर गाड़ी को रोककर कागजात और सामान चेक किया जा रहा है। संदिग्ध पाए जाने पर पूछताछ की जा रही है।

झारखंड छात्र आंदोलन: सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र, तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन 20वें दिन भी जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 6 छात्र अभी भूख हड़ताल पर हैं। छात्र परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच, रिफॉर्म और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े हैं। इस बीच तिरंगा यात्रा निकालने की भी योजना बना रहे हैं। छात्र नेता रवींद्र ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “आज विरोध प्रदर्शन का 20वां दिन है। मेरे दो साथी भूख हड़ताल पर हैं और दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई अन्य छात्र भी भूख हड़ताल पर हैं। सरकार से मेरी अपील है कि हम सभी छात्र हैं, इसलिए कृपया हमें यहां लंबे समय तक न रहने दें और हमारी मांगें पूरी करें।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी कीमत पर अपनी मांगो से समझौता नहीं करेंगे। जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हम सरकार के हमसे बात करने के लिए तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बातचीत करना चाहते हैं।” रवींद्र ने कहा, “हम स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहे हैं और एक भव्य तिरंगा यात्रा की योजना बना रहे हैं। जब से हम यहां हैं, हम कई तरह की गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं, जिनमें से हर एक यह संदेश देती है कि यहां के छात्र शिक्षित और जागरूक हैं। इससे पहले हमने सरकार को यह दिखाने के लिए एक मौन मार्च निकाला था कि नारे लगाने और शोर मचाने के बाद, अब हम शांतिपूर्वक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।” वहीं, झारखंड पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर उन्होंने कहा, “कल हमारी एसएसपी के साथ बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हमारा विरोध प्रदर्शन ऐतिहासिक था, जिसमें छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई और उसे मजबूत किया। अगर प्रशासन को लगता है कि कुछ असामाजिक तत्व मौजूद थे जो छात्रों के आंदोलन को भटकाने की कोशिश कर रहे थे तो सरकार को उनकी पहचान करनी चाहिए। ऐसा करते समय, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि वहां लगभग 50,000 छात्र मौजूद थे। अगर एक या दो प्रतिशत ऐसे अवांछित या असामाजिक तत्व थे, तो केवल उन्हीं लोगों की पहचान की जानी चाहिए और छात्रों को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।” इस बीच विरोध कर रहे छात्र पीयूष कुमार सिंह ने कहा, “फिलहाल, हम इसी तरह अपना शांतिपूर्ण और अनुशासित विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। जब तक बातचीत का अगला दौर नहीं होता या हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हम न्याय चाहते हैं और हमें मंत्री पर पूरा भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा। हमें सरकार से उम्मीद है, इसीलिए हम यहां बैठे हैं। हम अपने मुख्यमंत्री से गुजारिश करते हैं कि वे जल्द से जल्द हमारी समस्याओं का समाधान करें।

केला खाने का सही समय कौन सा? सुबह, खाली पेट या रात, जानिए क्या कहता है विज्ञान

नई दिल्ली। बहुत से लोग केले को नाश्ते, वर्कआउट से पहले या बाद में और कभी-कभी रात की हल्की भूख के समय भी खा लेते हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया में कई तरह की धारणाएं मौजूद हैं। कोई इसे सुबह खाली पेट खाने की सलाह देता है तो कोई रात में केला खाने को नुकसानदायक बताता है, लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो केले को खाने का कोई एक समय नहीं है। केला एक आम फल है, जो कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, पोटैशियम और विटामिन बी6 जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है। इसे आप अपनी सहूलियत और शरीर की जरूरत के हिसाब से खा सकते हैं। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के अनुसार , एक केले में करीब 422 मिलीग्राम पोटैशियम और 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 होता है। पोटैशियम नसों और मांसपेशियों के काम और शरीर में पानी के संतुलन के लिए जरूरी है, जबकि विटामिन बी6 प्रोटीन के इस्तेमाल और कई एंजाइम संबंधी प्रक्रियाओं में मदद करता है। केले में कार्बोहाइड्रेट भी अच्छी मात्रा में होता है। इसी वजह से जिम जाने वाले और खिलाड़ी इसे स्नैक के तौर पर खाना पसंद करते हैं। इससे तुरंत ऊर्जा मिलती है, लेकिन सिर्फ केला खाने से शरीर की सभी पोषक जरूरतें पूरी नहीं होंगी। इसे संतुलित भोजन का एक हिस्सा मानना बेहतर है। अगर खाली पेट केला खाना सही है या गलत, तो अगर किसी को सुबह केला खाने से कोई परेशानी नहीं होती, तो इसे नाश्ते में शामिल किया जा सकता है। वहीं जिन लोगों को खाली पेट फल खाने के बाद पेट फूलने या भारीपन जैसी समस्या महसूस होती है, वे ब्रेड, ओट्स या दही के साथ ले सकते हैं। केला-दूध का शेक या स्मूदी बहुत आम है। केला कार्बोहाइड्रेट देता है, जबकि दूध प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। अगर किसी व्यक्ति को दूध और केला दोनों आसानी से पचते हैं तो यह कॉम्बिनेशन सामान्य डाइट का हिस्सा हो सकता है। समस्या तब आती है जब किसी को लैक्टोज से दिक्कत होती है। ऐसे में गैस या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है लेकिन इसका इस स्थिति को सिर्फ केले से जोड़ना सही नहीं होगा। रात में केला खाने से कोई न लेकिन अगर रात में खाने के बाद पेट भारी लगता है, तो इसे दिन में लेना बेहतर रहेगा। डायबिटीज और किडनी के मरीजों को थोड़ी सावधानी रखनी चाहिए। डायबिटीज में केले में मौजूद शर्करा ब्लड शुगर बढ़ा सकती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखें। किडनी की बीमारी में शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ऐसे मरीजों को डॉक्टर या डाइटीशियन से पूछकर ही केला खाना चाहिए। केला एक अच्छा और सस्ता फल है। यह एनर्जी देता है और पोटैशियम, फाइबर की कमी पूरी करता है, लेकिन किसी एक फल पर निर्भर रहना ठीक नहीं। सेहत के लिए केले के साथ-साथ दूसरे फल, सब्जी, दाल, साबुत अनाज और प्रोटीन को भी डाइट में शामिल करना जरूरी है।