चीनी खतरे के बीच ताइवान का युद्धाभ्यास, बख्तरबंद वाहन से राष्ट्रपति को ले जाया गया कमांड सेंटर

ताइपे। चीन के साथ ताइवान के रिश्ते सामान्य नहीं है। हाल फिलहाल में खतरा और बढ़ा है। इस सबके बीच ताइवान ने अपने वार्षिक ‘हान कुआंग’ सैन्य अभ्यास के दौरान गुरुवार तड़के एक महत्वपूर्ण युद्धकालीन अभ्यास किया। इस दौरान राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को बख्तरबंद सैन्य वाहन में सुरक्षित रूप से एक गुप्त कमांड सेंटर तक पहुंचाया गया, जहां उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन संचालन और सरकारी कामकाज की समीक्षा की। राष्ट्रपति लाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ तस्वीरों के साथ एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वो कमांड सेंटर पहुंचे और सालाना हान कुआंग ऑपरेशन को बारीकी से देखा। विभिन्न ड्रिल्स का जिक्र करते हुए उन्होंने अंत में कहा हम शांति स्थापित करने के अपने इरादे पर अडिग हैं। इससे पहले राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कुछ तस्वीरें जारी की गई थीं। जिसमें लाई बुलेटप्रूफ जैकेट और सैन्य हेलमेट पहने नजर आए। यह अभ्यास ऐसे परिदृश्य पर आधारित था, जिसमें युद्ध की स्थिति में शीर्ष नेतृत्व को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर सरकार और सेना की कमान निर्बाध रूप से जारी रखी जाती है। राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य कमांड संरचना, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की क्षमता का परीक्षण करना है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में सरकार प्रभावी ढंग से काम करती रहे। ताइवान लंबे समय से आशंका जताता रहा है कि किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में चीन शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की तथाकथित “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” (नेतृत्व को निष्क्रिय करने वाला हमला) करने की की कोशिश कर सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष के अभ्यास में नेतृत्व की सुरक्षित आवाजाही और वैकल्पिक कमांड व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। 10 दिनों तक चलने वाले इस वर्ष के हान कुआंग अभ्यास में 20,000 से अधिक रिजर्व सैनिक भाग ले रहे हैं। इसमें युद्धकालीन संचार व्यवस्था, नागरिक प्रशासन, हथियारों के भंडार को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने, साइबर व्यवधान और संभावित चीनी हमले जैसी परिस्थितियों का भी अभ्यास किया जा रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग से उसे अपने नियंत्रण में लेने की बात दोहराता रहा है। दूसरी ओर, ताइवान की सरकार इन दावों को खारिज करते हुए कहती है कि द्वीप का भविष्य केवल वहां की जनता ही तय कर सकती है।
कंगना रनौत ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की धांधली पर कहा – हमारे ‘जेन-जी’ सच में हर तरह की तकलीफ झेल रहे हैं

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले जेन जी प्रदर्शनकारियों को ‘गटर जेनरेशन’ कहने वाली भाजपा सांसद कंगना रनौत ने गुरुवार को रांची में चल रहे छात्र आंदोलन पर अपनी राय रखी। कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “हमारे ‘जेन-जी’ सच में हर तरह की तकलीफ झेल रहे हैं और ये मामला दशकों से चला आ रहा है। हम लोगों ने भी इस तरह की समस्याओं को देखा हुआ है, चाहे पेपर लीक हों या मेरिट-बेस पेपर समेत कई समस्याएं, लेकिन इन सभी के बीच मैं ये कहना चाहती हूं कि कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद में इतने तमाशे किए थे। अब जब झारखंड में ऐसी स्थिति बन रही है, वहां के हालात खराब हो रहे हैं। झारखंड में बच्चों को हर तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बच्चों की विवशता को समझाते हुए उन्होंने कहा, “मैंने कई वीडियो देखे हैं कि बच्चों को त्रिपाल लगाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। खाने की ठीक स्थिति नहीं है, बच्चों ने दो-तीन दिन से कपड़े नहीं बदले हैं। हालात यहां तक गंभीर हैं कि बच्चों के पास ऑनलाइन फूड नहीं जा पा रहा है। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी वहां नहीं पहुंच रहे हैं। कंगना रनौत ने कहा कि जब हुड़दंग मचाना था, लोगों को उकसाना था, बच्चों को उकसाकर देश की सिक्योरिटी के साथ खतरा मोल लेना हो, तब राहुल गांधी देश के लिए खतरा बनकर निकलते हैं।” हाल ही में मेटा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटा दिया गया था, जिसके बाद काफी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “देखिए, मैं भी उसी कमेटी से ताल्लुक रखती हूं और हमारे चेयरमैन निशिकांत दुबे ने बहुत कड़ा रुख अपनाया और माफी की मांग भी की। हमने इस बात पर भी चिंता जताई थी कि कैसे एंटी-नेशनल कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता है। हमें खुशी है कि उन्होंने अपनी गलतियां मान ली हैं। हमें उम्मीद है कि जिस तरह से ये आतंकवादी ताकतें हमारी नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बन रही हैं, उससे हमें राहत मिलने की अपेक्षा करते हैं।
झारखंड : जेपीएससी को लेकर प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी, छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को बदतर बताया

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 13वें दिन जारी है। इस आंदोलन को राज्य भर के कई छात्र संगठनों से समर्थन मिल रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे प्रदर्शन को लगातार लोगों का समर्थन मिल रहा है क्योंकि कई छात्र समूहों विरोध स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारी उम्मीदवारों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की उनकी मांगों का समर्थन कर रहे हैं। मुख्य रूप से जेपीएससी परीक्षा के उम्मीदवारों के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन पिछले दो हफ्तों में और तेज हो गया है। लगातार रात भर बारिश होने के बाद भी प्रदर्शनकारी स्थल पर डटे रहे और आंदोलन समाप्त करने से इनकार करते हुए दोहराया कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती। छात्र नेता देवेंद्र महतो ने भी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी, जबकि अन्य प्रदर्शनकारी प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बावजूद पूरी रात प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे। छात्रों ने कहा कि बारिश उनके संकल्प को कमजोर नहीं करेगी और उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ तब तक आवाज उठाते रहेंगे जब तक कि कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की जाती। आईएएनएस से बात करते हुए, विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों में से एक ने आरोप लगाया कि राज्य की शिक्षा और भर्ती प्रणाली में भ्रष्टाचार गहराई से जड़ जमा चुका है। छात्र ने कहा, “सभी जानते हैं कि यहां की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार से घिरी हुई है। यह आज से शुरू नहीं हुआ है, यह लंबे समय से चल रहा है। यह भगवान बिरसा मुंडा की भूमि है, जिनका हम आदर करते हैं और उन्हें नमन करते हैं। दुर्भाग्य से, इस पवित्र भूमि पर ऐसा भ्रष्टाचार हो रहा है। इसमें शामिल लोग झारखंड के ही हैं, और कई लोग कथित तौर पर घर बनवाने, कार खरीदने और धन जमा करने के लिए रिश्वत ले रहे हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में रिश्वतखोरी आम बात हो गई है। उन्होंने आगे कहा, “हर पद के लिए रिश्वत देनी पड़ती है, और तभी पद मिलता है। सीजीएल की सीट 25 लाख रुपये में बेची जा रही थी। यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है।” विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले एक अन्य छात्र ने आईएएनएस को बताया कि इस आंदोलन का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राज्य की परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना है। छात्र ने कहा, “हमने इस विरोध प्रदर्शन में इसलिए हिस्सा लिया है क्योंकि शिक्षा व्यवस्था बेहद दयनीय स्थिति में है। हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द सुधार लागू किए जाएं, हमारी मांगें पूरी हों और हमारी चिंताओं को झारखंड सरकार तक पहुंचाया जाए। हम यह भी चाहते हैं कि झारखंड में आयोजित सभी परीक्षाएं पेपर लीक से मुक्त हों।” उन्होंने कहा कि हम समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं; सरकारी नौकरी एक विकल्प है। ऐसे में अगर यहां भी अनियमितताएं हैं, तो नौकरी करने का कोई मतलब नहीं है। आंदोलन में शामिल एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर बनी अनिश्चितता उन हजारों युवाओं को प्रभावित कर रही है जिन्होंने सरकारी नौकरियों की तैयारी में वर्षों बिताए हैं। एक दूसरे छात्र ने कहा, “हम कहना चाहते हैं कि झारखंड पुलिस, वार्डर और अन्य भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हम सभी छात्र भविष्य में सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में अथक परिश्रम कर रहे हैं। हममें से कई आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, और हमारे माता-पिता हमारी शिक्षा और तैयारी के लिए बहुत त्याग करते हैं।” विरोध प्रदर्शन के बीच, छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल को गुरुवार को झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए समय दिया गया है।
कर्नाटक में पोर्टफोलियो बंटवारे में देरी को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर तंज, डीके शिवकुमार को बताया ‘रबर स्टैम्प सीएम’

बेंगलुरु। कर्नाटक में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में देरी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार दिल्ली में बैठे कांग्रेस हाईकमान के रिमोट कंट्रोल से चल रही है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने गुरुवार को कहा कि नए मंत्रियों के शपथ लेने के तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें विभाग नहीं दिए गए हैं। आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तंज कसते हुए पूछा, “क्या आप विभागों के बंटवारे के लिए कांग्रेस हाईकमान के आदेश का इंतजार कर रहे हैं? या फिर ‘तय भुगतान’ अभी खाते में नहीं आया है इसलिए देरी हो रही है?” उन्होंने कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला पर भी निशाना साधा। आर. अशोक ने कहा कि सुरजेवाला नाराज विधायकों को मनाने के लिए उनके घर-घर जा रहे हैं और ‘पैचवर्क’ कर सरकार को बचाने में लगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “क्या अब सुरजेवाला को हर सरकारी फाइल पास कराने के लिए बेंगलुरु आना पड़ेगा? क्या विधानसौध में उनके लिए कमरा बुक कर दिया गया है? क्या अब सारी फाइलें स्पीड पोस्ट से दिल्ली भेजी जाएंगी?” इसी के साथ उन्होंने शिवकुमार को ‘रबर स्टांप मुख्यमंत्री’ कहा। भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस अब स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही। दिल्ली से रिमोट के जरिए राज्य चलाया जा रहा है। आर. अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक की जनता समझ चुकी है कि असली सरकार बेंगलुरु में नहीं बल्कि दिल्ली में बैठकर चलाई जा रही है। कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस सरकार एक और मोर्चे पर घिरी है। ‘नवेद्दु निल्लादिद्दारे, कर्नाटक’ बैनर तले 30 महिला संगठनों और नारीवादी समूहों ने बुधवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार को खुला पत्र लिखा। पत्र में नए मंत्रिमंडल में किसी भी महिला को जगह न देने की कड़ी निंदा की गई। संगठनों ने मांग की कि तुरंत महिला मंत्रियों को शामिल कर इस गलती को सुधारा जाए। वहीं, कांग्रेस ने नाराजगी को शांत करने की कोशिश तेज कर दी है। सीएम शिवकुमार और रणदीप सुरजेवाला खुद नाराज विधायकों से बात कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत में सीएम शिवकुमार ने पार्टी में अंदरूनी कलह की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और नाराज नेताओं से सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है।
राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर सपा सांसदों का संसद में प्रदर्शन, अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग

नई दिल्ली।समाजवादी पार्टी के सांसदों ने गुरुवार को संसद भवन के बाहर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन किया। सपा सांसदों का आरोप है कि सरकार सदन में चर्चा नहीं कर रही है और इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए। पार्टी नेताओं ने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में सदन में जवाब दें। इसके साथ ही सपा सांसदों ने झारखंड में छात्रों के आंदोलन, प्रयागराज में कांग्रेस के ‘स्टूडेंट्स की गूंज’ सहित कई मुद्दों पर बात की। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड देश का एक महत्वपूर्ण राज्य है और पूरा विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली पांच सदस्यीय समिति राज्य सरकार से मिलने वाली है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री की ओर से क्या जवाब और आश्वासन दिया जाता है, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा, इसलिए फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सपा सांसद आनंद भदौरिया ने पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की अवधारणा को लेकर कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लखनऊ में छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्रा की जयंती मनाई गई, जो इस बात का प्रतीक है कि पार्टी सभी वर्गों का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पीडीए में दबे-कुचले, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, महिलाएं, समाजवादी विचारधारा से जुड़े सवर्ण और आदिवासी सभी शामिल हैं। प्रयागराज में कांग्रेस के ‘स्टूडेंट्स की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने को लेकर सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि छात्र कहीं भी अपनी आवाज उठाएं या किसी कार्यक्रम का आयोजन करें। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी छात्रों के मुद्दों पर किसी भी तरह की चर्चा से बचना चाहती है लेकिन अब छात्र और विपक्ष दोनों इन मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी धर्मेंद्र यादव ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2024 का लोकसभा चुनाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अपनी उपलब्धि बताकर लड़ा था। ऐसे में यदि वही कानून सरकार का अपना है, तो अब नए विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पहले भी इस प्रस्ताव के पीछे की मंशा पर सवाल उठा चुका है और आज भी सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यदि किसी भी ब्राह्मण परिवार से बात की जाए तो वह बताएगा कि मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक नुकसान ब्राह्मण समाज को हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार करने में विफल रही है। संसद की कार्यवाही को लेकर सपा सांसद इकरा हसन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मानसून सत्र के दौरान सदन केवल एक दिन ही ठीक से चल पाया है और सदन को सुचारु रूप से चलाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष से वादा किया गया था कि पुलिस की कथित बर्बरता और अत्याचार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी, सरकार जवाब देगी और विपक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इकरा हसन ने पीडीए की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि यह केवल पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें महिलाएं, आदिवासी, सवर्ण समाज के वंचित वर्ग, पंडित और वे सभी लोग शामिल हैं जो सरकार की विचारधारा से असहमत हैं या स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं। उनके अनुसार पीडीए एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मंच है। सपा सांसद अक्षय यादव ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पार्टी परिसीमन के वर्तमान प्रस्ताव का विरोध करती है। उनका आरोप था कि यदि महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी विरोधी कोई पार्टी है तो वह भाजपा है। उन्होंने छात्राओं के आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता को लोकतांत्रिक तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिलनी चाहिए और प्रशासन का दायित्व सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है। वहीं, सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने प्रयागराज में कांग्रेस के कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने पर सरकार को तानाशाही मानसिकता वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और उसकी कोशिश है कि कोई भी सरकार के खिलाफ अपनी बात न रख सके।
नीट पेपर लीक केस : सुप्रीम कोर्ट में 19 अगस्त को अगली सुनवाई, केंद्र के हलफनामे पर मांगा जवाब

नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की सुनवाई को लेकर राउज एवेन्यू की फास्ट ट्रैक कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने इस मुद्दे पर अहम टिप्पणियां कीं। राऊज एवेन्यू कोर्ट के फास्ट ट्रैक जज अजय गुप्ता ने सुनवाई के दौरान कहा, “इस केस में हर एक मिनट बहुत कीमती है। मेरी चिंताओं को समझिए।” उन्होंने सभी वकीलों से अपील की कि वे सुबह 10 बजे तक कोर्ट में पहुंच जाएं। साथ ही, जज ने निर्देश दिया कि न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आरोपियों को भी समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश किया जाए ताकि सुनवाई में देरी न हो। वहीं नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई अब 19 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, “हलफनामे में कई ऐसी बातें हैं जिन पर विचार और चर्चा की जाएगी।” याचिकाओं में परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि एनटीए को बदला जाए या उसकी जगह एक नई संस्था बनाई जाए।उनकी मांग है कि नई संस्था तकनीकी रूप से मजबूत हो, ज्यादा सुरक्षित हो और स्वतंत्र तरीके से काम कर सके ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। सरकार के मुताबिक 2026 में बने नए कानून के तहत अब पेपर लीक या नकल जैसे अपराधों में 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है। यह टास्क फोर्स मौजूदा परीक्षा सिस्टम में सुधार के सुझाव देगी।
लोकसभा में गतिरोध जारी, विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में गतिरोध लगातार जारी है। गुरुवार को भी लोकसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। स्पीकर ओम बिरला के बार-बार शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद विपक्ष के नारेबाजी और प्रदर्शन नहीं रुके, जिसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान की मांग कर रहे हैं। साथ ही राम मंदिर चढ़ावा मामले के आरोप का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। हंगामे के कारण प्रश्नकाल एक भी दिन ठीक से नहीं चल पाया है। इस वजह से सत्र शुरू होने से अब तक जरूरी सरकारी कामकाज ठप पड़ा है। स्पीकर ओम बिरला ने कई बार विपक्ष से सदन चलाने देने की अपील की, लेकिन उन्हें कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। बुधवार को हंगामे के बीच ही लोकसभा ने एक अहम बिल पास किया था। इस बिल के जरिए अब अदालतों में बैंक से जुड़े डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को भी सबूत के तौर पर माना जाएगा। ध्वनिमत से पास हुए इस कानून का मकसद बैंकिंग से जुड़े साक्ष्यों के कानून को नए जमाने के डिजिटल लेनदेन के हिसाब से अपडेट करना है। हंगामे के कारण इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस, सीपीआई और समाजवादी पार्टी लगातार भगवान राम का विरोध करती आई हैं। किरेन रिजिजू ने संसद परिसर में विपक्ष द्वारा राम मंदिर चढ़ावा को लेकर किए गए प्रदर्शन पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा था कि इससे देशभर के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर संसद को चलने नहीं दे रहा। उन्होंने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का नाम लेते हुए कहा था, “वेणुगोपाल अच्छे इंसान हैं, लेकिन वे अपने साथियों को शालीनता नहीं सिखा पा रहे। सरकार चर्चा के लिए तैयार है।
पटना : खत्म हुई नगर निगम के सफाईकर्मियों की हड़ताल, सरकार से वार्ता के बाद बनी सहमति

पटना। राजधानी पटना समेत राज्य के नगर निकायों में पिछले आठ दिनों से जारी सफाईकर्मियों की हड़ताल गुरुवार को समाप्त हो गई। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा के साथ सफाईकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल की हुई वार्ता में प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद संघर्ष समिति ने आंदोलन वापस लेने और कर्मचारियों के काम पर लौटने की घोषणा की। इससे राजधानी सहित अन्य नगर निकायों में सफाई व्यवस्था के जल्द सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। हड़ताल के कारण पटना शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। सड़कों, बाजारों, मोहल्लों और रिहायशी इलाकों में कूड़े का अंबार लग गया था। लगातार हो रही बारिश के बीच गीला कचरा जमा होने से दुर्गंध फैल रही थी और कई इलाकों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ने लगा था। शहरवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जिसके बाद सरकार ने मामले में सक्रिय हस्तक्षेप किया। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने सफाईकर्मियों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बातचीत की। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वार्ता के दौरान कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई और अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई, जबकि अन्य मांगों पर सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक के बाद मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा, ”सभी कर्मचारियों का धन्यवाद, जिन्होंने हम पर विश्वास किया। जो हमारे शहर को साफ रखने का काम करते हैं, उनके लिए जो भी आवश्यक निर्णय लेने होंगे, हम करेंगे। कई मांगों पर सहमति बन गई है। कुछ मामलों के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जबकि कुछ निर्णय ऐसे हैं, जिनके लिए मंत्रिपरिषद की स्वीकृति आवश्यक होगी।” सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को हर हाल में हड़ताल समाप्त कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही आंदोलन के दौरान कर्मचारियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई समाप्त करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे वार्ता का रास्ता आसान हुआ और दोनों पक्षों के बीच सहमति बन सकी। इससे पहले पटना नगर निगम में महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में सशक्त स्थायी समिति की विशेष बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सफाईकर्मियों की अधिकांश मांगें नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। ऐसे में इन मांगों से संबंधित प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, ताकि राज्य सरकार स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। महापौर सीता साहू ने कहा कि पटना नगर निगम हमेशा से सफाईकर्मियों के हितों और उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बनी सहमति से सफाई व्यवस्था शीघ्र पूरी तरह बहाल हो जाएगी।