जेपीएससी भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामला: सीआईडी की 20 से ज्यादा ठिकानों पर रेड, पूर्व अध्यक्ष से आज फिर पूछताछ

रांची, । झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में अनियमितताओं की जांच कर रही राज्य सीआईडी ने सोमवार सुबह से बड़ी कार्रवाई शुरू की है। एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने रांची, धनबाद, बोकारो, देवघर, गोड्डा, रामगढ़, हजारीबाग, पलामू समेत कई जिलों में 20 से अधिक ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इनमें रांची के धुर्वा और नामकुम क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों पर संचालित कुछ कोचिंग संस्थानों और उनसे जुड़े लोगों के ठिकाने भी शामिल हैं। छापेमारी उन व्यक्तियों और संस्थानों पर की जा रही, जिनके नाम अब तक की जांच में सामने आए हैं या जिनके परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े होने की आशंका है। जांच टीमों ने कई स्थानों से दस्तावेज, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की। कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी अपने कब्जे में लिए गए हैं, जिनका फोरेंसिक विश्लेषण कराया जाएगा। इससे पहले सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय और परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के दफ्तर में छापेमारी कर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए थे। जांच के दौरान अब तक आयोग और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनसे पूछताछ के आधार पर ही जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसी सिलसिले में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांगते से भी कई चरणों में पूछताछ की जा चुकी है। उन्हें सोमवार को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जांच एजेंसी परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र प्रबंधन, मूल्यांकन प्रक्रिया और अन्य पहलुओं से जुड़े तथ्यों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के विश्लेषण के आधार पर आने वाले दिनों में मामले में नए खुलासे हो सकते हैं और कई लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है। उल्लेखनीय है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलित हैं। इस मामले को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है और परीक्षा रद्द कर निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

झारखंड: गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर के साथ अब पूरे नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

रांची/जामताड़ा। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के रविवार देर रात जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के साथ ही राज्य में पिछले दो दशकों से सक्रिय संगठित अपराध के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया। हत्या, रंगदारी, अपहरण, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर अपराधों के 75 से अधिक मामलों में आरोपी सुजीत सिन्हा लंबे समय से कोयलांचल, पलामू समेत कई जिलों में दहशत का पर्याय बना हुआ था। पलामू के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा सुजीत जेल में बंद रहने के बावजूद अपने गैंग का संचालन कर रहा था। सुजीत सिन्हा को रविवार शाम साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा स्थानांतरित किया जा रहा था। उसे लेकर चल रहा कैदी वाहन जामताड़ा जिले में साहिबगंज-गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुपाईडीह और केंदबोना के बीच पहुंचा तो सुरक्षा काफिले की एक गाड़ी का अगला टायर पंचर हो गया। इसी दौरान उसे दूसरे वाहन में बैठाने की प्रक्रिया चल रही थी। पुलिस का दावा है कि उसने मौके का फायदा उठाकर एक जवान का हथियार छीन लिया और भागने के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। सोमवार सुबह घटना की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। जामताड़ा पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर पूरी घटना की जानकारी ली। पुलिस ने घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराया और घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं का दस्तावेजीकरण किया। सुबह सुजीत सिन्हा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पोस्टमार्टम डॉक्टरों के बोर्ड से कराया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। साथ ही मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है। मेदिनीनगर (पलामू) का रहने वाला सुजीत सिन्हा अपराध की दुनिया में हजारीबाग के कुख्यात डॉन सुशील श्रीवास्तव के शूटर के रूप में उभरा था। बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा कर धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, पलामू, लातेहार, चतरा और अन्य जिलों तक रंगदारी का नेटवर्क फैला लिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसका गिरोह कोयला कारोबारियों, रेलवे ठेकेदारों, बिल्डरों और अन्य व्यवसायियों से लेवी वसूलने के लिए कुख्यात था। जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल में बंद रहने के बावजूद सुजीत सिन्हा मोबाइल और अपने गुर्गों के जरिए गिरोह का संचालन करता था। पुलिस का दावा है कि उसकी पत्नी रिया सिन्हा और अन्य सहयोगी कथित तौर पर रंगदारी से प्राप्त धन के प्रबंधन और नेटवर्क संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। हाल के महीनों में पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया था और हथियारों तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद करने का दावा किया था। जांच में यह भी सामने आया है कि सुजीत सिन्हा का नेटवर्क धनबाद के फरार गैंगस्टर प्रिंस खान के गिरोह से भी जुड़ा था। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां कथित हवाला नेटवर्क, विदेश से संचालित रंगदारी सिंडिकेट और आधुनिक हथियारों की आपूर्ति से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर के बाद झारखंड पुलिस ने धनबाद, रांची, पलामू, रामगढ़, जामताड़ा और अन्य संवेदनशील जिलों में अलर्ट जारी किया है। पुलिस को आशंका है कि उसके गिरोह के बचे हुए सदस्य या प्रतिद्वंद्वी गिरोह सक्रिय हो सकते हैं। इसी के मद्देनजर खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है।

महिला पहलवानों से यौन शोषण के आरोप के मामले में बृजभूषण शरण सिंह बरी

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया। भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह सोमवार सुबह इस मामले में फैसले से पहले दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे। उन्होंने कहा, “जो कहेगा कोर्ट कहेगा हम अभी कुछ नहीं कहेंगे।” कोर्ट की सुनवाई शुरू होने पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी करने का फैसला सुनाया। इस मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर को भी बरी कर दिया गया है। दो जुलाई को अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की ओर से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। जनवरी 2023 में जब नए संसद भवन का उद्घाटन हो रहा था, तो उससे कुछ किलोमीटर दूर ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने साथी पहलवान विनेश फोगाट के साथ मिलकर पूर्व भाजपा सांसद पर यौन उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उनकी शिकायतों के आधार पर पुलिस ने सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस की एफआईआर में बृजभूषण सिंह के अलावा डब्ल्यूएफआई के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर का नाम शामिल किया गया। जून 2023 को पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ कई धाराओं के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया था। ट्रायल कोर्ट ने मई 2024 को 5 महिला पहलवानों के उत्पीड़न और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए थे। एक नाबालिग पहलवान ने भी बृजभूषण पर आरोप लगाए थे। हालांकि, बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली और दिल्ली पुलिस ने ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (पोक्सो एक्ट) के तहत उस मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की। ​​इसके बाद मामला बंद कर दिया गया था।

विजेंद्र सिंह ने राष्ट्रमंडल खेल में भारत के प्रदर्शन पर राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया

नई दिल्ली। ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंद्र सिंह ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के एथलीटों के प्रदर्शन पर बधाई देने वाले किसी भी सार्वजनिक संदेश के अभाव पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल किया और कहा कि देश की खेल उपलब्धियों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठना चाहिए। विजेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी अक्सर देश के युवाओं की बात करते हैं, लेकिन राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के एथलीटों के शानदार प्रदर्शन के लिए आपकी ओर से अभी तक एक भी बधाई संदेश या द्वीट नहीं आया है। जब भारत के युवा तिरंगा ऊंचा लहरा रहे हैं, तो राजनीति से ऊपर उठकर उनका मनोबल बढ़ाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” भारत के लिए मुक्केबाजी में पहला ओलंपिक पदक जीतने वाले पूर्व मुक्केबाज ने यह पोस्ट ऐसे समय में साझा किया जब भारतीय एथलीट 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में अपने शानदार प्रदर्शन के लिए प्रशंसा बटोर रहे थे। इससे पहले, विजेंदर ने खेलों में भारतीय मुक्केबाजी दल के ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए उन्हें बधाई दी थी। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, “जिम्मेदारी सफलतापूर्वक सौंप दी गई है। सीडब्ल्यूजी 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने 7 स्वर्ण और 3 रजत सहित कुल 10 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पूरी टीम को हार्दिक बधाई- आपकी मेहनत, जुनून और तिरंगे के प्रति सम्मान ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।” राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजी दल ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जिसमें सात स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतकर खेल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इन खेलों में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने भी इतिहास रचते हुए विजेंद्र सिंह और दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम के बाद ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज बन गईं। विजेंदर ने अपने शानदार करियर का समापन एक ओलंपिक पदक, तीन राष्ट्रमंडल खेलों के पदक और दो एशियाई खेलों के पदक के साथ किया। जो 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत के पहले ओलंपिक मुक्केबाजी पदक विजेता बने। भारत ने ग्लासगो में आयोजित 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में अपना अभियान पूरा कर लिया है और कुल पदक तालिका में 39 पदकों (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) के साथ चौथे स्थान पर रहा है।

पेट संबंधित समस्याओं से हैं परेशान? बस 5 मिनट इस योगासन को करने से मिलेगा आराम

नई दिल्ली। दिनभर ऑफिस में बैठकर रहने से पेट संबंधित समस्याएं शुरू होने लगती है। लगातार बैठने से पाचन तंत्र धीमा होता है और पेट की चर्बी बढ़ने लगती है। ऐसी स्थिति में पश्चिमोत्तानासन सबसे सरल और असरदार योगासनों में से एक माना जाता है। ‘पश्चिम’ का अर्थ है, शरीर का पिछला हिस्सा और ‘उत्तान’ का अर्थ खिंचाव होता है। इस आसन को करने के दौरान शरीर आगे की तरफ झुकता है, जिससे पेट के अंगों पर हल्का-सा दवाब पड़ता है। इससे पाचन बेहतर होता है, पेट की चर्बी कम होती है और कब्ज की भी शिकायत दूर होती है। साथ ही, ये रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर दिनभर की थकान भी दूर करता है। आयुष मंत्रालय के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, पश्चिमोत्तानासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ साइटिका की संभावना को भी कम करता है। यह कब्ज, मोटापा, अपच और त्वचा रोगों को दूर करने में भी सहायक होता है। रोजाना कुछ समय तक इस आसन को करने से शरीर लचीला बनता है, पाचन में सुधार होता है, और तनाव कम होता है। इस आसन को करने के समय साधक अपने पैरों की तरफ झुकते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी से लेकर पैरों की मांसपेशियों तक पूरा खिंचाव होता है। योग शास्त्रों में इस आसन को लंबी उम्र और बेहतर सेहत का राजा बताया गया है। इस आसन को करने से शरीर में खून का संचार बेहतर होता है, मोटापा कम होता है, और मन शांत रहता है। यह एक ऐसा योगासन है, जिसे हर उम्र के साधक कर सकते हैं। पश्चिमोत्तानासन करने से पहले इसका सही तरीका जानना जरूरी है। शुरुआत में शरीर पर अधिक दबाव न डालें। इस आसन के लिए सबसे पहले जमीन पर दोनों पैर सीधे फैलाकर बैठ जाएं। इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। हाथों से पैर के अंगूठों को छूने का प्रयास करें और सिर को घुटनों के पास लाएं। इस स्थिति में कुछ सेकंड रुकें, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। मंत्रालय ने अपने पोस्ट में उन लोगों को यह आसन करने से मना किया, जिनके पेट में अल्सर है। साथ ही विशेषज्ञ से परामर्श लेने की भी बात कही है।

दिल्ली से हरिद्वार तक : सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में तड़के से भक्तों का तांता

हरिद्वार। सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार पर देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। उत्तराखंड के हरिद्वार से लेकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या, हापुड़ और ग्रेटर नोएडा तक, वहीं दिल्ली के प्रमुख शिवालयों में भी सुबह तड़के से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। भक्त गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना कर रहे हैं। हरिद्वार के प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए कतार में लग रहे। सावन के पहले सोमवार के कारण मंदिर में भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिर प्रशासन ने दर्शन और पूजा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। दक्षेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी विनोद ने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पूरे महीने भगवान शिव प्रतीकात्मक रूप से दक्षेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान रहते हैं और यहीं से सृष्टि का संचालन करते हैं। यही वजह है कि सावन में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। महामंडलेश्वर संतोषी माता ने भी कनखल स्थित इस पवित्र स्थल के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान शिव की कृपा से यह स्थान सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है और सावन के महीने में यहां पूजा-अर्चना का विशेष फल मिलता है। मंदिर पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि दक्षेश्वर महादेव मंदिर को भगवान शिव का ससुराल माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के पूरे महीने भगवान शिव यहां निवास करते हैं और सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसी विश्वास के साथ हर साल हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने आते हैं। उधर, उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में भी सावन के पहले सोमवार पर लाखों श्रद्धालु उमड़े। भक्तों ने सबसे पहले सरयू नदी में पवित्र स्नान किया और उसके बाद नागेश्वर नाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हापुड़ के प्राचीन सिद्ध पीठ श्री सबली महादेव मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। मंदिर के पुजारी पंडित रवि शंकर शुक्ला ने बताया कि यह मंदिर जिले के सबसे प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है, इसलिए सावन के पहले सोमवार पर यहां विशेष भीड़ उमड़ती है। ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव स्थित प्रसिद्ध रावण मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बिसरख को रावण का जन्मस्थान माना जाता है। यहां मौजूद स्वयंभू शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि उसकी गहराई आज तक कोई नहीं जान पाया है। धार्मिक मान्यता यह भी है कि रावण ने इसी शिवलिंग की कठोर तपस्या कर भगवान शिव को अपने सिर अर्पित किए थे, जिसके बाद उसे 10 सिरों से जुड़ी अद्भुत शक्ति का वरदान मिला था। इसी वजह से सावन के दौरान यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी सावन के पहले सोमवार पर शिवभक्ति का विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। तुगलकाबाद के प्राचीन शिव मंदिर और ऐतिहासिक गौरी शंकर मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। गौरी शंकर मंदिर पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि वह सुबह छह बजे मंदिर पहुंचे थे, लेकिन तब तक भी दर्शन के लिए लंबी लाइन लग चुकी थी। उन्होंने कहा कि वह रोज मंदिर आते हैं, लेकिन सावन के पहले सोमवार जैसी भीड़ उन्होंने लंबे समय बाद देखी है।

ब्राजील की वर्कर्स पार्टी ने राष्ट्रपति लूला को चौथे कार्यकाल के लिए आधिकारिक तौर पर नॉमिनेट किया

रियो डी जेनेरो। ब्राजील में इस साल अक्टूबर में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहा है। इस बीच ब्राजील की रूलिंग वर्कर्स पार्टी (पीटी) ने मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को आने वाले प्रेसिडेंट चुनाव के लिए आधिकारिक तौर पर अपना उम्मीदवार नामित किया है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को साओ पाउलो में पार्टी के नेशनल कन्वेंशन में, डेलीगेट्स ने ब्राजीलियन सोशलिस्ट पार्टी के मौजूदा उपाध्यक्ष गेराल्डो अल्कमिन के साथ लूला को टिकट देने को आधिकारिक मंजूरी दे दी। पीटी प्रेसिडेंट एडिन्हो सिल्वा ने ऐलान किया कि पार्टी ने सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट में अपने उम्मीदवार का रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया है। कन्वेंशन को संबोधित करते हुए, 80 साल के ब्राजीलियाई राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार की उपलब्धियां कैंपेन के लिए एक मजबूत नींव का काम करेंगी। लूला ने कहा, “हम हर जगह लोगों को गर्व से दिखा सकते हैं कि फेडरल सरकार ने क्या हासिल किया है।” लूला ने ब्राजील की डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करने, देश के रणनीतिक मिनरल रिसोर्स की सुरक्षा करने और देश की संप्रभुता की रक्षा करने का वादा किया। उन्होंने कहा, “कोई भी चीनी, कोई भी अमेरिकी, कोई भी फ्रांसीसी ब्राजील की संप्रभुता का सम्मान किए बिना इन रिसोर्स को नहीं छुएगा।” उन्होंने कहा कि आगे बदलाव लाने के लिए उनकी सरकार को और ज्यादा हिम्मत दिखानी होगी। लूला के कैंपेन में कम आय वालों पर बोझ कम करने के मकसद से प्रस्तावित आय कर सुधारों के साथ-साथ एक ऋण राहत कार्यक्रम को भी उजागर किया गया। इसे सार्वजनिक समर्थन मिला है। इस बीच ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने चीन के साथ अपने देश के संबंधों को और मजबूत किया है। चीन ब्राजील का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। लूला ने हाल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सीधी बातचीत की। दोनों नेताओं की चर्चा में व्यापार, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि और मर्कोसुर-चीन के आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर जोर रहा। ब्राजील के चुनावी नियमों के तहत, राजनीतिक पार्टियों को 5 अगस्त तक अपने उम्मीदवारों की पुष्टि करनी होगी और 15 अगस्त तक आधिकारिक रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा। आधिकारिक चुनाव कैंपेन 16 अगस्त से शुरू होने वाला है। लूला ने पहले 2002 और 2006 के चुनाव जीतने के बाद लगातार दो कार्यकाल राष्ट्रपति के तौर पर काम किया था। उन्होंने 2022 का चुनाव जीतने के बाद फिर से पद की जिम्मेदारी संभाली और जनवरी 2023 में अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया।

बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी करेंगे बुलेटप्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल, जैश-ए-मोहम्मद की धमकियों के बीच सुरक्षा बढ़ी

कोलकाता। आतंकवादी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ से जान को खतरा होने की हालिया जानकारी के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी अब बुलेटप्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल करेंगे। यह जानकारी पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) से जुड़े सूत्रों ने दो संदिग्धों की गिरफ्तारियों के बाद दी। पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध हमीम मंडल और उसकी सहयोगी अर्पिता सरकार को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि हमीम मंडल और उसकी सहयोगी अर्पिता सरकार दोनों के संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकवादी-अपराधी समूह ‘शहजाद भट्टी नेटवर्क’ (एसबीएन) से भी हैं। मंडल को शुक्रवार सुबह पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर से गिरफ्तार किया गया था। एसटीएफ को उसके पास से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के रोजाना के कार्यक्रमों और आवाजाही से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। एसटीएफ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने रविवार शाम से ही नई बुलेटप्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। रविवार रात उन्होंने पूर्वी मिदनापुर जिले के कांथी में स्थित अपने पैतृक घर से कोलकाता तक इसी गाड़ी में यात्रा की। राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों के बाद जब सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने, तभी से उनके काफिले में बुलेटप्रूफ गाड़ी शामिल कर ली गई थी। हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री अपनी यात्राओं के दौरान लोगों से मिलने-जुलने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करना पसंद करते थे। लेकिन पुलिस अधिकारी का कहना है कि मौजूदा हालात और जान को गंभीर खतरे को देखते हुए उन्हें अब उस बुलेटप्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल करना ही होगा। गौरतलब है कि 6 मई को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की उत्तरी 24 परगना जिले के मध्यम ग्राम में हत्या हुई थी। एक कार ने चंद्रनाथ की गाड़ी का रास्ता रोका और मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों ने बहुत करीब से उन पर गोलियां चलाईं। इस हमले में चंद्रनाथ की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद, मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगे वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें केवल बुलेटप्रूफ गाड़ी में यात्रा करने की सलाह दी थी, जिसे उनके काफिले में शामिल भी किया गया था। हालांकि, बदली हुई परिस्थितियों के बावजूद मुख्यमंत्री ने रविवार शाम तक कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया।

बिहार : सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन में लगी भीषण आग, यात्रियों में मचा हड़कंप

पटना। बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन (63344) में सोमवार तड़के करीब 3:25 बजे भीषण आग लग गई, जिससे यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों में अफरातफरी मच गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग ट्रेन के मध्य इंजन के पास लगी और तेजी से तीन डिब्बों में फैल गई। घने धुएं और ऊंची लपटों ने स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। आग लगने के समय ट्रेन में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे। जैसे ही उन्होंने लपटें देखीं, यात्री डिब्बों से उतरने लगे। सभी यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने से एक बड़ा हादसा टल गया। सहरसा निवासी यात्री संजय कुमार ने बताया कि उन्हें सबसे पहले डिब्बे के नीचे से तीव्र गर्मी महसूस हुई। जब वे जांच करने के लिए नीचे उतरे, तो उन्होंने लपटें देखीं और तुरंत साथी यात्रियों को सतर्क किया। यात्री राजू कुमार ने बताया कि वह सिमरी बख्तियारपुर जाने के लिए मानसी स्टेशन पर ट्रेन में सवार हुए थे। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने के कुछ ही देर बाद इंजन के पास आग दिखाई दी, जो जल्द ही भीषण आग में बदल गई। जब स्टेशन अधिकारियों ने यात्रियों को ट्रेन से बाहर निकलने का आदेश दिया, तो कोच के अंदर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। आग की सूचना मिलने के बाद, कई दमकल गाड़ियां और रेलवे अधिकारी स्टेशन पहुंचे। दमकलकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और आखिरकार आग पर काबू पा लिया। इस घटना से सिमरी बख्तियारपुर में रेल परिचालन बाधित हुआ और कई ट्रेनें प्रभावित हुईं। स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सज्जन ने बताया कि इस घटना के बाद सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। कोसी एक्सप्रेस (सहरसा-पटना), जानकी एक्सप्रेस (मनिहारी-जयनगर), सहरसा-समस्तीपुर पैसेंजर और श्रावणी स्पेशल (सहरसा-देवघर) सहित कई ट्रेनें विलंबित रहीं। स्टेशन अधीक्षक के अनुसार, शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की आशंका है, हालांकि सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत एवं अग्निशमन कार्यों का निरीक्षण किया। रेलवे ने घटना के सटीक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। अधिकारी प्रभावित तीनों डिब्बों को हुए नुकसान का आकलन भी कर रहे हैं।

आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू, ब्याज दरों की होगी समीक्षा

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक की शुरुआत सोमवार से हो गई है। इस बैठक में ब्याज दरों (रेपो रेट) के साथ देश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक के फैसलों का ऐलान बुधवार को आबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से सुबह 10 बजे किया जाएगा। आरबीआई एमपीसी की द्विमासिक बैठक ऐसे समय पर हो ही है, जब दुनिया वैश्विक अस्थिरता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर बढ़ाने और बॉन्ड यील्ड के उच्च स्तर पर जाने जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। कई विश्लेषकों का मानना है कि छह सदस्यों वाली आरबीआई एमपीसी अगस्त में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकती है। एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि आरबीआई अपनी अगली बैठक में पॉलिसी रेट्स को अपरिवर्तित रख सकता है, क्योंकि अगले दो तिमाहियों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है, जबकि घरेलू आर्थिक गतिविधि में मजबूती के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है। इसके अलावा, तेल की कीमतों में अस्थिरता, रुपए पर दबाव और बाहरी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के कारण केंद्रीय बैंक से स्पष्ट रूप से नरम टिप्पणी आने की संभावना नहीं है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में मजबूत पूंजी प्रवाह, विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार, बेहतर मानसून की स्थिति और लगभग सामान्य जलाशय स्तरों के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था के आधारभूत कारकों में सुधार हुआ है। इससे पहले जून में हुई आरबीआई एमपीसी की बैठक ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा था और अपने पॉलिसी रुख को न्यूट्रल रखा था। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।