लवप्रीत सिंह: आर्थिक तंगी और ‘संघर्ष की तपस्या’ में तपकर चमका दर्जी पिता का बेटा, यादगार प्रदर्शन कर जीता सिल्वर मेडल

नई दिल्ली। ‘रात नहीं ख्वाब बदला है, मंजिल नहीं कारवां बदलता है, जज्बा रखो जीतने का क्योंकि किस्मत बदले न बदले, पर वक्त जरूर बदलता है।’ यह लाइनें पूरी तरह से भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह पर फिट बैठती हैं। आर्थिक तंगी और संघर्ष की तपस्या में तपकर लवप्रीत कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के मंच पर क्या खूब चमके। लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम का भार उठाते हुए देश को वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल दिलाया। लवप्रीत एक किलो के भार से गोल्ड लाने से चूक गए, लेकिन उन्होंने स्नैच राउंड में 176 किलो का वजन उठाने के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। हालांकि, लवप्रीत का गले में सिल्वर मेडल पहनने तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा। लवप्रीत एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता पेशे से दर्जी है, जबकि दादा सब्जियां बेचते हैं। शुरुआत से ही परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। हालांकि, माता-पिता ने लवप्रीत के हाथों में अपनी तरह सुई और धागे की डोर नहीं थमाई, बल्कि उन्हें देश के लिए मेडल लाने का सपना देखने की इजाजत दी। परिवार बेशक आर्थिक तंगी से लड़ाई लड़ता रहा, लेकिन इसका असर पिता ने कभी भी लवप्रीत की ट्रेनिंग पर नहीं पड़ने दिया। लवप्रीत ने महज 13 साल की उम्र में ही वेटलिफ्टिंग की दुनिया में कदम रख दिया था। परिवार ने उनकी ट्रेनिंग और खानपान का हमेशा ख्याल रखा और कभी भी कोई कमी महसूस नहीं होने दी। भारतीय वेटलिफ्टर की जिंदगी ने तब नया मोड़ लिया जब साल 2015 में उन्हें भारतीय नोसैना में नौकरी मिली। लवप्रीत को इसके बाद पटियाला में नेशनल ट्रेनिंग शिविर में प्रैक्टिस करने का चांस मिला। दो साल के भीतर ही लवप्रीत ने अपनी काबिलियत को साबित करके दिखा दिया और उन्होंने कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड और एशियाई जूनियर चैंपियनसशिप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। अपने इस प्रदर्शन के बाद वह धीरे-धीरे भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम के भरोसेमंद लिफ्टर बनते चले गए। लवप्रीत ने स्नैच में 176 किलोग्राम का भार उठाकर रिकॉर्ड तो बनाया ही, इसके साथ ही क्लीन एंड जर्क राउंड में उन्होंने 212 किलो का वजन उठाया। हालांकि, लवप्रीत अपने तीसरे प्रयास में 217 किलो का भार उठाने से चूक गए। अगर वह इस भार को लिफ्ट करने में सफल हो जाते, तो लवप्रीत एक और रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम कर लेते।
आयुष और इंडियाएआई की साझेदारी, एआई की मदद से पारंपरिक चिकित्सा को मिलेगा नई तकनीक का सहारा

नई दिल्ली। भारत में बदलते समय के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि भारत के पुराने चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए, ताकि शोध को बढ़ावा मिले और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई मिशन ने मिलकर काम करने का फैसला किया है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडियाएआई मिशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से आयुष क्षेत्र में नए शोध, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना है। इस पहल से आयुष क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मदद मिलेगी और पारंपरिक चिकित्सा को नई पहचान मिल सकेगी। इस समझौते पर आयुष मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी और चीफ विजिलेंस ऑफिसर डॉ. कविता जैन, इंडियाएआई मिशन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और माइटी के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। डॉ. कविता जैन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आयुष क्षेत्र से जोड़ने से शोध और नई रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। एआई की मदद से आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े पुराने ज्ञान को बेहतर तरीके से समझा और सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके अलावा औषधीय पौधों, दवाओं के उपयोग, शोध कार्यों और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इंडियाएआई के साथ यह सहयोग आयुष क्षेत्र को ज्यादा आधुनिक और मजबूत बनाने में मदद करेगा। इससे शोधकर्ताओं को नई तकनीक का उपयोग करने का मौका मिलेगा और आयुष से जुड़ी जानकारियों को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से रखा जा सकेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक तकनीक का साथ आना एक महत्वपूर्ण कदम है। इस साझेदारी के तहत एआईकोष प्लेटफॉर्म को आयुष क्षेत्र से जुड़े शोध और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी से जोड़ा जाएगा। इससे वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को एआई आधारित नए समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी। इस योजना के तहत आयुष मंत्रालय एआईकोष प्लेटफॉर्म पर अपनी योग्य शोध सामग्री साझा करेगा। इसमें स्वास्थ्य से जुड़े डेटा, एआई मॉडल, तकनीकी उपकरण और अलग-अलग उपयोग के उदाहरण शामिल होंगे। इससे आयुष क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को एक ऐसा मंच मिलेगा, जहां वे नई तकनीक के साथ मिलकर काम कर सकेंगे। आयुष ग्रिड के इमर्जिंग टेक्नोलॉजी कार्यक्रम के तहत भी एआई आधारित प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। आयुष ग्रिड के अधिकारी नमन गोयल ने कहा कि यह समझौता आयुष क्षेत्र में डिजिटल बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं और शोध कार्यों में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इस साझेदारी के तहत इंडियाएआई पहल के माध्यम से हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और जीपीयू जैसी आधुनिक कंप्यूटर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इन सुविधाओं की मदद से बड़े स्तर पर एआई आधारित शोध और स्वास्थ्य संबंधी तकनीक विकसित की जा सकेगी। एआई की मदद से भविष्य में औषधीय पौधों की पहचान, दवाओं के असर का अध्ययन, शोध में तेजी और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है। इससे आयुष चिकित्सा को और अधिक वैज्ञानिक तरीके से समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर बोला हमला, बोले- जेन जी को धमकाकर चुप नहीं करा सकते

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जेन जी की आवाज को दबाना चाहती है। राहुल गांधी ने लिखा, “पीएम मोदी और अमित शाह, आप जेन जी को धमकाकर चुप नहीं करा सकते। पहले आपने उनके हाथ-पैर तोड़े। अब एफआईआर कर रहे हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवा रहे हैं। आप भारत का अतीत हैं। भारत के भविष्य के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसे लेकर सावधान रहें।” इससे पहले बुधवार को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि उनसे कहा गया कि अगर वे गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयान पर माफी मांग लें तो उन्हें बोलने दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया। राहुल गांधी के मुताबिक उन्होंने कई बार लोकसभा अध्यक्ष से सदन में व्यवस्था बहाल करने और उन्हें बोलने देने की अपील की, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य मंत्रियों को बार-बार बोलने का मौका मिला, जबकि उन्हें रोका गया। राहुल गांधी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई। एक छात्र की आंख में पैलेट लग गया है और उसकी रोशनी जाने का खतरा है। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने एम्स का मेडिकल सर्टिफिकेट देखा है जिसमें पैलेट लगना कन्फर्म हुआ है। राहुल गांधी ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाते हुए कहा था, “पैलेट गन का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना नहीं हो सकता। मैंने खुद संसद में अमित शाह को पुलिस अधिकारियों से फोन पर बात करते देखा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को भी लगातार फोन आ रहे थे। इसका मतलब सरकार को पता था कि सड़क पर क्या हो रहा है।
व्हाइट हाउस का दावा- चीन ने अमेरिकी वोटरों का डेटा किया हैक

वाशिंगटन। व्हाइट हाउस ने एक फैक्ट शीट जारी की है, जिसमें दावा किया गया है कि सार्वजनिक किए गए अमेरिकी इंटेलिजेंस डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि चीन और उसके प्रॉक्सी ने 220 मिलियन (22 करोड़) अमेरिकियों का वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा हासिल किया। इसमें ऐसी जानकारी भी शामिल है जो सार्वजनिक तौर उपलब्ध नहीं थी। यह फैक्ट शीट व्हाइट हाउस गवर्नमेंट ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स ने जारी की थी और कहा था कि इसे नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के ऑफिस, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी और गृह सुरक्षा विभाग के डायरेक्टरों ने मंजूरी दी है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाल ही में विदेशी चुनाव गतिविधियों से जुड़े इंटेलिजेंस डॉक्यूमेंट्स को डीक्लासिफाई करने से जुड़ा है। जारी की गई परिभाषा के अनुसार, “चुनाव में प्रभाव डालने वाली गतिविधियों में विदेशी सरकारों या विदेशी सरकारों के एजेंट के तौर पर या उनकी ओर से काम करने वाले लोगों की खुली और छिपी हुई प्रभावी गतिविधियां शामिल हैं। इनका मकसद सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करना है, जिसमें उम्मीदवार, राजनीतिक पार्टियां, वोटर या उनकी पसंद, या राजनीतिक प्रक्रियाएं शामिल हैं। चुनाव में दखल देना चुनाव के तकनीकी पहलुओं पर लक्षित चुनाव प्रभाव का एक हिस्सा है, जिसमें वोटर रजिस्ट्रेशन, वोटिंग और वोटों की गिनती, और नतीजों की रिपोर्टिंग शामिल है।” सरकार ने कहा कि इस डेफिनिशन में साफ तौर पर किसी विदेशी ताकत द्वारा वोटर रजिस्ट्रेशन इंफ्रास्ट्रक्चर या वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा को टारगेट करने की कोशिशें शामिल हैं। फैक्ट शीट में आगे कहा गया है कि 2022 के इंटेलिजेंस कम्युनिटी के दस्तावेजों में एक चीनी कंप्यूटर नेटवर्क शोषण यानी सीएनई अभिकर्ता की पहचान की गई थी, जिसने व्यावसायिक वेबसाइटों पर संग्रहीत मतदाता पंजीकरण डेटा हासिल किया था। व्हाइट हाउस के मुताबिक, सीएनई के अभिकर्ता आमतौर पर ऐसी जानकारियां हासिल करने के लिए साइबर ऑपरेशन का सहारा लेते हैं जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होतीं। दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि जब कोई विदेशी दुश्मन ऐसी जानकारी हासिल कर लेता है, तो इंटेलिजेंस एजेंसियों के अनुसार उससे जुड़े संभावित जोखिम क्या हो सकते हैं। व्हाइट हाउस ने दस्तावेज के हवाले से कहा, “दुश्मन डेटा में बदलाव कर सकते हैं ताकि किसी एक वोटर या वोटरों के समूह को वोट देने से रोका जा सके, जिससे चुनाव के दिन देरी हो सकती है या वोटरों को प्रोविजनल बैलेट इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। दुश्मन रजिस्ट्रेशन डेटा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो कुछ मामलों में पब्लिकली या खरीदने के लिए भी उपलब्ध होता है, दूसरे दखल या असर डालने की कोशिशों को सही करने के लिए।” व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रंप के 16 जुलाई, 2026 के भाषण के पीछे की इंटर-एजेंसी प्रोसेस की डिटेल्स भी बताईं, जिसे सरकार ने चीन की चुनाव में दखल देने वाली गतिविधि बताई थी। इसमें कहा गया कि नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के ऑफिस, गृह सुरक्षा विभाग, सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी और फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के रिमार्क्स तैयार करने में व्हाइट हाउस के साथ कोऑर्डिनेट किया। फैक्ट शीट के अनुसार, “इंटेलिजेंस एजेंसियों ने राष्ट्रपति के भाषण में इस्तेमाल किए गए अपने डॉक्यूमेंट्स से फैक्ट्स को मंजूरी दी थी।” यह रिलीज ट्रंप सरकार का अमेरिकी चुनावों को टारगेट करने वाली विदेशी गतिविधियों से जुड़ी नई सार्वजनिक इंटेलिजेंस मटीरियल को पब्लिक करने का सबसे नया कदम है। सरकार का कहना है कि डॉक्यूमेंट्स को पब्लिक करने से चुनाव सुरक्षा और विदेशी साइबर ऑपरेशन्स से जुड़े इंटेलिजेंस असेसमेंट्स में ज्यादा ट्रांसपेरेंसी आती है। –
पटना की सड़कों पर पसरा हजारों टन कचरा, सफाईकर्मियों की हड़ताल से सफाई व्यवस्था चरमराई

पटना। पटना नगर निगम (पीएमसी) के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर राजधानी की सफाई सेवाओं पर बुरी तरह पड़ रहा है। कई इलाकों में घर-घर जाकर कचरा उठाने और सड़कों की रोजाना सफाई का काम रुक गया है। शुक्रवार सुबह नगर निगम कर्मचारियों के काम बंद करने से सड़कों और मुख्य रास्तों पर हजारों टन कचरा जमा हो गया। कई जगहों पर कचरे के ढेर लगने की खबर है, जिनमें किदवईपुरी में कवि रमन पथ, इंद्रपुरी में अटल पथ की सर्विस लेन, नवीन किशोर सिन्हा पथ, मीठापुर मेन रोड और राजीव नगर मेन रोड शामिल हैं। हार्डिंग रोड पर भी नगर निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियां खड़ी देखी गईं। यह हड़ताल 30 जुलाई को राज्यव्यापी आंदोलन के हिस्से के तौर पर शुरू हुई, जिसमें पीएमसी के लगभग 8,000 स्थायी, दिहाड़ी और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। सामान्य हालात में, पटना से हर दिन लगभग 1,200 टन कचरा इकट्ठा किया जाता है, जिसमें करीब 60 प्रतिशत गीला कचरा और 40 प्रतिशत सूखा कचरा होता है। मानसून के दौरान सफाई सेवाओं में रुकावट से लोगों की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। पीएमसीएच के सुपरिटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि बारिश के मौसम में जमा कचरे से मच्छर और मक्खियों का पनपना बढ़ सकता है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं, जिनमें दिहाड़ी कर्मचारियों को नियमित करना, आउटसोर्सिंग सिस्टम को खत्म करना और आउटसोर्स कर्मचारियों को नगर निगम में शामिल करना और एसीपी (असिस्टेंट सिटी प्लानर) और एमएसीपी (मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) के लाभों को बहाल करना शामिल हैं। अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने से पहले कर्मचारी लगभग एक महीने से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे थे। 30 जून से 25 जुलाई के बीच विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित किए गए, जबकि 28 जुलाई को शहरी विकास और आवास मंत्री के साथ बातचीत से विवाद का समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद 29 जुलाई को मशाल जुलूस निकाला गया। यह आंदोलन 23 जून को सफाई कर्मचारियों द्वारा वेतन भुगतान में देरी को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद हुआ है।
सीमा कालीरमन: चार साल के बेटे की जिम्मेदारी, पीएचडी की पढ़ाई के साथ पति से ली कोचिंग और देश को दिलाया ब्रॉन्ज मेडल

नई दिल्ली। बड़ी पुरानी कहावत है, ‘जहां चाह वहां राह’। यह लाइनें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला डिस्कस थ्रो में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली एथलीट सीमा कालीरमन पर फिट बैठती हैं। चार साल के बेटे की जिम्मेदारी, पीएचडी की पढ़ाई के साथ खेल के प्रति ऐसा जुनून उन्हें बाकी एथलीटों से अलग बनाता है। सीमा का सबसे बड़ा सहारा पति रविंदर भी बने, जिनकी कोचिंग में वह देश का नाम रोशन करने में कामयाब हो सकीं। हालांकि, सीमा का ब्रॉन्ज मेडल जीतने तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा। चोट, प्रेग्नेंसी और तमाम तरह की चुनौतियों के बावजूद सीमा ने कभी अपना हौसला कम नहीं होने दिया। जब-जब जिंदगी ने खेल को उनसे दूर करने की कोशिश की तो सीमा ने हर बार शानदार वापसी की। डिस्कस थ्रो के फाइनल में 27 साल की इस एथलीट के छह राउंड में से केवल दो ही थ्रो सही (वैलिड) हो पाए, क्योंकि बार-बार डिस्कस साइड नेटिंग में फंस जा रहा था। यह पोडियम सीमा के लिए पहला बड़ा इंटरनेशनल मेडल रहा। सीमा एक पीएचडी स्कॉलर भी हैं और चार साल के बेटे रुद्र की मां हैं। असल में, मां बनने के साथ-साथ सीमा एक टॉप एथलीट के तौर पर भी आगे बढ़ीं। 2022 में बेटे रुद्र के जन्म से पहले उनका पर्सनल बेस्ट 48.08 मीटर था। 2024 में 11 महीने के ब्रेक के बाद उन्होंने प्रतिस्पर्धी डिस्कस थ्रो में वापसी की और अपने पर्सनल बेस्ट को बेहतर करते हुए 57.19 मीटर तक पहुंचाया। इसके बाद इस साल की शुरुआत में भुवनेश्वर में हुई इंडियन चैंपियनशिप में उन्होंने 59.73 मीटर का थ्रो किया। सीमा को उनके पति रविंदर कालीरमन कोचिंग देते हैं। रविंदर खुद भारत के जाने-माने डिस्कस थ्रो एथलीट रहे हैं और उन्होंने भारतीय अंडर-18 और अंडर-20 चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीते थे। सीमा अपने स्पोर्ट्स करियर के साथ-साथ चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी (सीबीएलयू), भिवानी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी भी कर रही हैं। उनके एथलेटिक करियर को तब बड़ा झटका लगा था, जब घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें तीन साल से ज्यादा समय तक खेल से दूर रहना पड़ा। कड़ी मेहनत और लगन से सीमा ने कॉम्पिटिशन में सफल वापसी की और देश के टॉप डिस्कस थ्रोअर्स में अपनी जगह फिर से बनाई। उन्होंने 2025 नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता और बाद में नेशनल टाइटल भी अपने नाम किया। उनकी वापसी की खास बात साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में गोल्ड मेडल जीतना और नेशनल सर्किट पर लगातार शानदार प्रदर्शन करना रही। 2026 में, सीमा ने 59.73 मीटर का अपना अब तक का सबसे अच्छा थ्रो किया। इस इवेंट में भारत की बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक के तौर पर उभरते हुए उन्होंने 2026 एशियाई खेलों के लिए क्वालिफाई किया और साथ ही भारत की कॉमनवेल्थ गेम्स टीम में भी जगह बनाई।
उमर खालिद की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों की साजिश के मामले में जमानत की मांग करने वाले पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की गई है। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की बेंच ने शुक्रवार को उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने उमर खालिद की नियमित जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने खालिद की उस याचिका पर भी नोटिस जारी किया, जिसमें उसने अंतरिम जमानत की मांग की है। इसके बाद बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की। इसी दिन सह-आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर भी सुनवाई होगी। ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया। अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट ने कहा कि यूएपीए मामलों में लंबे समय तक मुकदमा चलने के आधार पर जमानत देने के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी पीठ को भेज रखा है। ऐसे में जब तक इस कानूनी विवाद पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, अदालत इस आधार पर जमानत नहीं दे सकती। उमर खालिद और शरजील इमाम ने पहले भी दो बार जमानत के लिए याचिकाएं दाखिल की थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक दोनों की याचिकाएं खारिज कर दी गईं। यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए दंगों से जुड़ा है, जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। दंगों को भड़काने की साजिश रचने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में आरोप है कि खालिद ने दंगे भड़काने की एक बड़ी साजिश रची थी। खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था, वह तब से जेल में है।
राज्यसभा सोमवार तक के लिए स्थगित, कृषि मंत्री बोले- विपक्ष सदन में सड़क छाप राजनीति कर रहा

नई दिल्ली। राज्यसभा में शुक्रवार लगातार जबरदस्त नारेबाजी होती रही। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के समीप आ गए और नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़े रहे। सभापति ने विपक्ष की यह मांग अस्वीकार कर दी, जिसके बाद सदन में नारेबाजी और हंगामा और तेज हो गया। बढ़ते हंगामे के बीच सभापति सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले राज्यसभा में बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम लोगों ने नोटिस दिया है। सभापति ने पूछा कि उस नोटिस में क्या है? खड़गे ने कहा कि विपक्ष के सांसद नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस के तहत चर्चा चाहते हैं। दरअसल कई विपक्षी सांसद कई दिनों से प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल पर इस नियम के तहत चर्चा करने की मांग कर रहे थे। सभापति ने नियम 267 को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह बात कई बार कही जा चुकी है। सभापति के मुताबिक पूर्व में भी नियम 267 के तहत चर्चा को अनुमति नहीं दी गई थी। इस पर विपक्ष ने हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। इस हंगामे के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष सदन में सड़क छाप राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैं केंद्रीय मंत्री के रूप में सदन में उपस्थित हूं, लेकिन जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। सदन में सड़क छाप राजनीति की जा रही है। लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और सदन की गरिमा को तार-तार किया जा रहा है। विपक्ष केवल अराजकता फैलाना और हंगामा करना चाहता है। देश इन्हें देख रहा है और जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी।” उन्होंने कहा कि आज सदन की कार्यवाही के दौरान जो व्यवहार किया जा रहा है, वह संसदीय परंपराओं और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। जिस प्रकार सदन की गरिमा के साथ व्यवहार किया जा रहा है, उससे लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। संविधान का बार-बार अपमान किया जा रहा है। विपक्ष केवल राजनीति करना चाहता है, ये अराजकता फैलाना चाहते हैं और सदन में हंगामा करना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार से किसी विषय पर सार्थक चर्चा या संवाद करने की इनकी कोई मंशा नहीं है। हम इसकी घोर निंदा करते हैं। हालांकि इस बीच सदन में विपक्षी संसद लगा तार नारेबाजी करते रहे। शोर व हंगामे के बीच कुछ देर शून्य की कारवाई चली। लेकिन, विपक्षी सदस्य अपने स्थानों से उठकर आगे आ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। इस पर सभापति ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का इस्तीफा, ‘एक्स’ से हटाया पार्टी का जिक्र

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नेता शहजाद पूनावाला ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। इसकी जानकारी खुद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दी। उन्होंने कुछ घंटे पहले अपना प्रोफाइल बायो अपडेट किया। नए बायो में भाजपा का नाम कहीं नहीं है। शहजाद पूनावाला ने अपने बायो का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। जिसमें लिखा था, “धर्म इस्लाम, संस्कृति-हिंदू, विचारधारा-भारतीय। लेखक: जीएसटी की यात्रा। पीएम मोदी के आजीवन अनुयायी।” यानी उन्होंने खुद को ‘पीएम नरेंद्र मोदी का जीवन भर का समर्थक’ बताया है, लेकिन भाजपा का कोई जिक्र नहीं किया। बता दें कि शहजाद पूनावाला पहले कांग्रेस में थे। 2017 में पार्टी के अध्यक्ष चुनाव को लेकर विवाद के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी। भाजपा में रहते हुए शहजाद टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर अपनी तीखी बातों के लिए जाने जाते थे। वे पीएम मोदी और भाजपा की नीतियों के सबसे मुखर समर्थकों में से एक माने जाते थे। उन्होंने कई बार कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी हमले किए थे। इस्तीफे की वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन बायो में बदलाव और पार्टी का नाम हटाने से कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने पीएम मोदी के प्रति अपना समर्थन बरकरार रखा है। बायो में ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आजीवन अनुयायी’ लिखकर उन्होंने साफ किया कि विचारधारा से उनका जुड़ाव अब भी है। शहजाद पूनावाला के इस कदम के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। भाजपा की तरफ से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शहजाद पूनावाला भाजपा की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समय-समय पर राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधते रहे हैं।
पश्चिम बंगाल: 28 करोड़ रुपए कैश और 15 किलो सोना बरामदगी के बाद खदान कारोबारी तुलु मंडल का घर सील

कोलकाता,। पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को बीरभूम के पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल का घर सील कर दिया। उन पर पूर्व सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। यह घटनाक्रम बीरभूम जिला पुलिस द्वारा तुलु मंडल के करीबी रिश्तेदार मिनार मंडल के घर से 28 करोड़ रुपए का कैश और लगभग 22 करोड़ रुपए की कीमत का 15 किलोग्राम सोना जब्त किए जाने के ठीक 24 घंटे बाद सामने आया। कैश और सोना जब्त होने के बाद से मिनार मंडल फरार हो गया था। पूछताछ के दौरान मिनार मंडल ने स्वीकर किया कि सोना और कैश असल में तुलु मंडल का था और वह सिर्फ उन्हें अपने घर में जमा करके रखने का काम कर रहा था। उसने यह भी माना कि उसके घर से बरामद सोने के बिस्किट दुबई से गैरकानूनी तरीके से लाए गए थे। गुरुवार को बीरभूम जिला पुलिस की एक बड़ी टीम बीरभूम जिले के सूरी में तुलु मंडल के घर पहुंची और रात भर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। उस समय घर पर देखभाल करने वाले और कुछ घरेलू सहायकों के अलावा परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। शुक्रवार सुबह पुलिस ने देखभाल करने वाले और घरेलू सहायकों को घर से निकाला और घर का मुख्य दरवाजा सील कर दिया। हालांकि तुलु मंडल के घर पर रातभर चली छापेमारी और तलाशी के बाद बरामद सामान के बारे में पुलिस ने कोई जानकारी नहीं दी। पूर्व सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान तुलु मंडल को टीएमसी के बीरभूम जिला अध्यक्ष रहे अनुब्रत मंडल का बेहद करीबी माना जाता था। मवेशियों की तस्करी के मामले में तुलु मंडल का नाम भी सामने आया था। इसी मामले में अगस्त 2022 में सीबीआई ने अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार किया था और उन्हें महीनों जेल में रहना पड़ा था।