टीएमसी कार्यकाल में लीज पर दी गई जमीन की समीक्षा करेगी पश्चिम बंगाल सरकार

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की जमीन और भू-राजस्व विभाग ने पुराने तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान निजी लोगों और कंपनियों को लीज पर दी गई जमीन की पूरी समीक्षा करने का फैसला किया है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह जांच दो बड़े कारणों से की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि सबसे पहले यह देखा जाएगा कि जिस काम के लिए जमीन लीज पर दी गई थी, उस काम में उसका इस्तेमाल हुआ या नहीं। अगर जमीन लंबे समय से खाली पड़ी है और उस पर कोई प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हुआ, तो सरकार उस जमीन को वापस ले सकती है। इसके बाद उस जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति या कंपनी को औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए दिया जा सकता है। वहीं अगर जमीन का कुछ हिस्सा ही इस्तेमाल हुआ है तो सरकार संबंधित व्यक्ति से पूछेगी कि बाकी काम कब तक पूरा होगा। जरूरत पड़ी तो सरकार इसके लिए एक तय समय सीमा भी तय कर सकती है। दूसरा मकसद यह जांचना है कि जमीन का इस्तेमाल उसी काम के लिए हुआ है जिसके लिए लीज दी गई थी या नहीं। अक्सर ऐसा देखा गया है कि उद्योग के लिए ली गई जमीन को बिना इजाजत किसी दूसरे काम में इस्तेमाल कर लिया जाता है। अगर ऐसा हुआ है तो सरकार संबंधित व्यक्ति से सफाई मांगेगी। इसके बाद मामले की समीक्षा कर जुर्माना लगाया जा सकता है या लीज भी रद्द की जा सकती है। सरकार को पहले ही कई शिकायतें मिली हैं कि लीज वाली कई जमीनें या तो पूरी तरह खाली हैं या आधी-अधूरी हैं या फिर गलत कामों में इस्तेमाल हो रही हैं। इसी के साथ राज्य सरकार ने ‘सीधी जमीन खरीद’ वाली नई नीति भी अपनाई है। इसके तहत सरकार सीधे जमीन मालिकों से जमीन खरीदेगी और फिर उसे इंफ्रास्ट्रक्चर या उद्योग के लिए इस्तेमाल करेगी।
निशिकांत दुबे बोले- ‘राहुल के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद 15 विशेषाधिकार प्रस्ताव लंबित, कार्रवाई करें लोकसभा अध्यक्ष’

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अनुराग ठाकुर के विशेषाधिकार हनन नोटिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से 15 विशेषाधिकार के प्रस्ताव लंबित हैं। लोकसभा स्पीकर को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “राहुल गांधी को भेजे गए नोटिस के बारे में अनुराग ठाकुर ही बेहतर बता पाएंगे क्योंकि मैंने खुद उसे नहीं पढ़ा है। हालांकि, मैंने आज के अखबारों में इसके बारे में पढ़ा और देखा कि उन्होंने कैसी भाषा का इस्तेमाल किया है।” दुबे ने कहा, “राहुल गांधी ने जिन अपशब्दों का उपयोग किया है और उन्होंने जिस तरीके की परंपरा शुरू की है, वे बेतुके बयान देते रहे हैं। वे 12 साल से सत्ता से बाहर हैं और सत्ता के बिना कांग्रेस के लोगों का दिमाग शून्य हो जाता है। दिमाग शून्यता की जो स्थिति है, उसी की पराकाष्ठा यह विशेषाधिकार प्रस्ताव है।” उन्होंने आगे कहा, “जब से राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बने हैं, तब से कम से कम 15 विशेषाधिकार के प्रस्ताव लंबित हैं। मेरा लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह है कि उनको इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता बिना सिर पैर की बातें कहते हैं। कल को कोई और सांसद भी बोलना शुरू कर देगा। इसलिए कार्रवाई होनी चाहिए।” इसी बीच, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ‘इंजीनियरिंग ग्रेजुएट क्रिमिनल वेस्ट हैं’ पर भी निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “रेवंत रेड्डी को राहुल गांधी की हर बात माननी पड़ती है। वे दुखी हो चुके हैं। इसलिए राहुल गांधी के कहने पर वे बयान देते हैं।” भाजपा सांसद ने कहा, “तेलंगाना के मुख्यमंत्री एक अच्छे इंसान और हमारे बहुत पुराने दोस्त हैं। हमने साथ मिलकर काम किया। हम दोनों ने संघ परिवार और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। जब मैंने 1995 में स्वदेशी जागरण मंच की ओर से सेवाग्राम से आलमपुर तक लगभग 750 किलोमीटर की पदयात्रा की थी, तो रेवंत रेड्डी ने उस मार्च में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। रेवंत रेड्डी एबीवीपी से आए हैं, इसलिए उनकी सोच सही है।
शारीरिक और मानसिक शांति के लिए करें योगमुद्रासन, जानें इसके लाभ

नई दिल्ली। आज की व्यस्त जीवनशैली में जहां तनाव, कब्ज और पीठ दर्द जैसी शारीरिक समस्याएं आम हो गई हैं, वहां योगमुद्रासन एक संजीवनी की तरह काम करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क संतुलित रहता है। यह एक ऐसी योग मुद्रा है, जिसे दो शब्दों ‘योग’, यानी ‘जोड़ना’, और ‘मुद्रा’, यानी ‘प्रतीक’, से मिलकर बनाया गया है, जबकि अंग्रेजी में इसे ‘साइकिक यूनियन पोज’ कहते हैं, जिसका हिन्दी भाषा में अर्थ ‘मानस को जोड़ना’ होता है। योग मुद्रासन, असल में, शरीर और मन के बीच अंतर को मिटाकर सामंजस्य स्थापित करने वाला योगासन है। इस आसन करने के दौरान शरीर ध्यान, समर्पण और आंतरिक शांति की स्थिति में जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योगासन को लेकर कुछ गाइडलाइन्स दिए हैं, जिसके अनुसार, यह पेट के अंगों को सक्रिय, पाचन में सुधार और मन को शांत करने में मदद करता है। इसके अभ्यास से पेल्विक मसल्स मजबूत होती और महिलाओं में प्रजनन अंगों से संबंधित समस्याओं को कम किया जा सकता है। लंबे समय तक इस आसन का अभ्यास करने से शरीर और दिमाग में स्थिरता और एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही, यह मणिपुर चक्र (मानव शरीर के सात मुख्य चक्रों में से तीसरा ऊर्जा केंद्र है, जो आत्मविश्वास, पाचन और अग्नि तत्व से जुड़ा) को सक्रिय और स्टिम्यूलेट करता है, जिससे शरीर में प्राणिक ऊर्जा को नियंत्रित करता है। इस आसन को करना बेहद आसान है, जिसे करने के लिए सबसे साधक पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों की कलाई को पीछे की ओर ले जाकर पकड़ें या पैरों के अंगूठे को पकड़ें। लंबी गहरी सांस लेते और छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। अपने माथे को जमीन पर स्पर्श कराने का प्रयास करें और शरीर को ढीला छोड़ दें। सामान्य: सांस लेते हुए कुछ सेकंड रुकें, फिर सांस लेते हुए वापस शुरुआती स्थिति में आएं। शुरू में इस आसन को करने के लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। कुछ दिनों के अभ्यास के बाद यह आसन करना काफी आसान हो जाता है। रीढ़ की हड्डी और पैरों सहित लगभग पूरा शरीर इस आसन में शामिल होता है, इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से यह शरीर के विभिन्न अंगों के लिए फायदेमंद होता है।
छात्रों को लेकर विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा, खड़गे ने अनुराग ठाकुर को घेरा

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट पर कांग्रेस सांसद कैप्टन विरियाटो फर्नांडीज और क्रिस्टोफर तिलक की प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को लेकर राज्यसभा सांसद और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “हमारे सांसद काबिल हैं और लोकसभा में इनका सामना करेंगे।” कैप्टन विरियाटो फर्नांडीस ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “अगर सरकार खुद कहती रहती है कि युवा और जेन-जी हमारे देश का भविष्य हैं, तो फिर आप उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों कर रहे हैं? सरकार उनके खिलाफ दर्ज केस वापस क्यों नहीं ले रही है?” उन्होंने आगे कहा, “सरकार की ओर से आंदोलनकारी छात्रों पर लाठी और पैलेट गन क्यों चलाया गया। सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। राहुल गांधी की ओर से जो भी कहा गया, वह बिल्कुल सही कहा गया। भविष्य को मौका दिया जाना चाहिए। छात्रों के खिलाफ जाने पर सरकार को ही समस्या हो जाएगी। युवाओं के साथ कांग्रेस हमेशा खड़ी रहेगी। कांग्रेस की ओर से छात्रों के भविष्य और भलाई की पूरी कोशिश की जाएगी।” कांग्रेस सांसद क्रिस्टोफर तिलक ने आईएएनएस से कहा, “जब वह (अनुराग ठाकुर) मंत्री थे, मुझे लगता है कि आपको याद होगा कि वह एक बार एक स्कूल गए थे और छात्रों से पूछा था कि स्पेस में जाने वाला पहला व्यक्ति कौन था। बच्चों ने जवाब दिया, ‘नील आर्मस्ट्रांग।’ उन्होंने जवाब दिया, ‘नहीं, नहीं, यह हनुमान थे।’ तो, अनुराग ठाकुर ऐसे व्यक्ति हैं जो पूरी तरह से बेसिक साइंटिफिक टेम्पर के खिलाफ हैं। सीपीआई(एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा, “इस सरकार और अमित शाह की पुलिस ने प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स के खिलाफ हजारों केस दर्ज किए हैं। सरकार ने स्टूडेंट्स को भरोसा दिलाया था कि उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा, लेकिन वह वादा पूरा नहीं किया गया। स्टूडेंट्स पुलिस की बर्बरता और उनके खिलाफ दर्ज झूठे केस के खिलाफ अपना प्रोटेस्ट जारी रखेंगे।
आरडीआई स्कीम में चयन को लेकर केंद्र ने जारी किया स्पष्टीकरण, रिपोर्ट्स को बताया भ्रामक

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) द्वारा अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के तहत कंपनियों को धनराशि वितरित करने में कथित हितों के टकराव से जुड़े मीडिया में प्रकाशित समाचार भ्रामक, गलत और संदर्भहीन हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि टीडीबी में मजबूत मूल्यांकन तंत्र, हितों के टकराव से संबंधित कड़े दिशा-निर्देश और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया का पालन किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, टीडीबी में हितों के टकराव को लेकर एक व्यापक और मजबूत नीति लागू है। मंत्रालय ने कहा, “इस नीति का लंबे समय से व्यवस्थित रूप से पालन किया जा रहा है और अब तक किसी भी पक्ष से इसकी कोई शिकायत, आपत्ति या अनियमितता सामने नहीं आई है।” मंत्रालय ने बताया कि टीडीबी की कठोर और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया की पुष्टि स्वतंत्र बाहरी आकलनों से भी होती है। टीडीबी द्वारा पहले चरण में स्वीकृत 22 परियोजनाओं में से 15 परियोजनाओं का चयन शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित अलग-अलग विशेषज्ञ समितियों ने स्वतंत्र रूप से किया था। इसके बाद इन परियोजनाओं ने फ्रांस के नीस शहर में आयोजित प्रतिष्ठित भारत इनोवेट इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बयान में कहा गया, “यह स्वतंत्र सत्यापन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि चयनित कंपनियां अत्याधुनिक डीप-टेक इनोवेटर्स हैं, जिनका चयन पूरी तरह तकनीकी क्षमता, नवाचार की संभावनाओं और राष्ट्रीय महत्व के आधार पर किया गया है।” मंत्रालय ने बताया कि पहली निवेश समिति (आईसी) की बैठक शुरू होने से पहले ही टीडीबी ने विस्तृत प्री-इन्वेस्टमेंट गाइडलाइंस और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किए थे। इन दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किन परिस्थितियों में हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न मानी जाएगी। यदि किसी सदस्य का किसी प्रस्ताव से संभावित हितों का टकराव होता है, तो उसे इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है और संबंधित प्रस्ताव पर होने वाली सभी चर्चाओं तथा निर्णय प्रक्रिया से स्वयं को पूरी तरह अलग करना अनिवार्य होता है। मंत्रालय ने कहा कि टीडीबी ने इन दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, आरडीआई फंड के कार्यान्वयन दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी वित्तपोषण संबंधी निर्णय पूरी तरह योग्यता के आधार पर लिए गए। संबंधित प्रस्तावों के मूल्यांकन या स्वीकृति प्रक्रिया में किसी भी हितों के टकराव वाले सदस्य की कोई भूमिका नहीं रही।
जंतर-मंतर हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने सुनाई आपबीती, बोले-हिंसा का पूरा सच आए सामने

नई दिल्ली, । जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान अचानाक हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच मारपीट और तनाव के मामले सामने आए थे। हिंसा के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिवारों ने शुक्रवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आपबीती सुनाई। जंतर-मंतर में विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए सब इंस्पेक्टर की बेटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा कुंतल ने मीडिया से बातचीत में कहा, ” दिल्ली पुलिस में मेरे पिता एएसआई हैं। मेरे पिता पुलिस में आने से पहले 15 साल तक नेवी में था। उन्हें मुख्य प्रदर्शन स्थल पर तैनात किया गया था और वे भारी भीड़ के बीच बैरिकेड्स के पास सबसे आगे मौजूद थे। वे अक्सर हमसे कहते थे कि यह प्रदर्शन अब छात्रों का प्रदर्शन नहीं लग रहा है और इसमें असामाजिक तत्व शामिल हो गए हैं। 20 जुलाई को एक हिंसक भीड़ ने मेरे पिता को घसीटा और जंतर-मंतर मंच के पास उन्हें पीट-पीटकर मारा, जिससे उनके सिर में 4 टांके आए। वे आरएमएल अस्पताल में करीब चार घंटे तक बेहोश रहे। उसी रात बाद में उनके साथी उन्हें घर लाए। उनकी वर्दी खून से लथपथ थी।” कुंतल ने आगे कहा, “वह रात हमारे लिए मुश्किल थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर मेरे पापा को क्रिमिनल बनाया जा रहा था। मेरे पापा को मारने वाले अपराध खत्म कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसलिए हम भी सुप्रीम कोर्ट गए हैं।” घायल पुलिसकर्मी के बेटे ने कहा, “मेरा नाम लक्ष्य सिंह बिष्ट हैं, मेरे पापा एसीपी हैं, जिन्हें 4 गैलेंट्री अवार्ड मिले हैं। मुझे पता चला कि 20 जुलाई को वे जख़्मी हो गए और उन्हें सिर पर स्टीचेस आए थे। पापा ने बताया कि पहले उन पर पत्थरबाजी शुरू हो गई और वे तैयार नहीं थे। जब मैं सोशल मीडिया देखता हूं, मेरे दोस्त पुलिस के लिए गलत बोल रहे होते हैं। पापा कहते हैं इस पर ध्यान मत दो, लेकिन मुझे गुस्सा आता है कि मेरे पिता के साथ ऐसा हुआ। विरोध में सिर्फ स्टूडेंट्स नहीं थे बल्कि ऐसे लोग थे जो पुलिस का नुकसान चाहते थे। लक्ष्य सिंह ने कहा, “मेरे दादाजी बीएसएफ में थे और उन्होंने 1971 की लड़ाई लड़ी थी। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मेरे पिता को फ्रंटलाइन पर तैनात किया गया था। मुझे उनके एक दोस्त से पता चला कि उनके सिर में चोट लगी है। जब मैंने उनकी तस्वीर देखी, तो उनका सिर मुंडा हुआ था और चार टांके लगे थे। मैं हैरान और डरा हुआ था। जब मेरे पिता घर लौटे, तो उन्होंने मुझे बताया कि विरोध प्रदर्शन सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं था, बल्कि भीड़ में कुछ उपद्रवी और हिंसक लोग भी शामिल हो गए थे। उन्होंने बताया कि जब वे अपने साथियों को जानकारी दे रहे थे, तो उन लोगों ने बिना किसी उकसावे के पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। जब वे अपने सीनियर अधिकारियों को सुरक्षित जगह ले जा रहे थे, तभी उनके सिर पर एक पत्थर लगा, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई।” प्रदर्शन में घायल हुए एएसआई की पत्नी सीमा ने कहा, “मेरे पति 33 साल से दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कॉन्स्टेबल के तौर पर नौकरी शुरू की थी और अभी एएसआई के पद पर तैनात हैं। 20 जुलाई को वे हमेशा की तरह जंतर-मंतर पर ड्यूटी के लिए गए थे। सुबह करीब 11:00 बजे उन्होंने मुझे बताया कि वहां बहुत भीड़ है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे हैं। मैंने उनसे अपना ख्याल रखने को कहा। बाद में शाम को मुझे पता चला कि उन्हें इलाज के लिए एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने मुझे बताया कि भीड़ उग्र हो गई थी और कुछ शरारती तत्व प्रदर्शन में शामिल हो गए थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर गमले, पत्थर, चप्पल और जूते फेंके। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने संसद की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए। ये सोच कर कि उस दिन कुछ भी हो सकता था, मेरी रूह कांप गई। मेरी मांग है कि सरकार दिल्ली पुलिस के मुद्दे भी उठाए। सोशल मीडिया पर प्रोटेस्ट का सिर्फ एक हिस्सा दिखाया है।” हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई की घटना में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 110 से अधिक बैरिकेड क्षतिग्रस्त हुए, 300 से अधिक बॉडी प्रोटेक्टर और 350 से अधिक हेलमेट क्षतिग्रस्त हुए, जबकि 50 से अधिक शील्ड और 20 से अधिक लाउडस्पीकर क्षतिग्रस्त हुए। आंकड़ों में आगे दावा किया गया है कि 10 हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर (एचएचएमडी), एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर और 25 से अधिक सरकारी वाहन तोड़फोड़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गए। बयान में यह भी कहा गया है कि घटना के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है।
शोध: मधुमेह से एमडीआर टीबी मरीजों में मौत का खतरा ज्यादा

लखनऊ। बहु दवा प्रतिरोधी (एमडीआर) टीबी से जूझ रहे मरीजों के इलाज में नई चुनौती सामने आई है। एमडीआर टीबी के साथ टाइप-2 मुधमेह से पीड़ित मरीजों पर टीबी की दवाओं का असर काफी धीमा होता है। इससे संक्रमण खत्म होने में अधिक समय लगता है। ऐसे में लंबे समय तक इलाज चलने के कारण दोनों बीमारियों से ग्रसित मरीजों में मौत का जोखिम बढ़ जाता है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में हुए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है। इसे वर्ल्ड जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन में स्थान मिला है। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के वर्ष 2023 से 2024 के बीच हुए अध्ययन में 264 एमडीआर टीबी मरीजों को शामिल किया गया। इसमें 155 पुरुष और 109 महिलाएं थीं। जिसमें 61 मरीज टाइप-2 मधुमेह, 66 प्री-डायबिटीज (बॉर्डरलाइन मधुमेह) और 137 रोगी मधुमेह रहित थे। इन्हें तीन समूहों में बांटने के बाद सभी मरीजों को मुंह से ली जाने वाली टीबी की दवाएं दी गईं। इलाज के दौरान समय-समय पर उनकी बलगम जांच और सेहत में सुधार की निगरानी की गई। शोध में पाया गया कि मधुमेह पीड़ित मरीजों के फेफड़ों में अन्य रोगियों की तुलना गंभीर संक्रमण और टीबी के ज्यादा जीवाणु मौजूद थे। जीवाणुओं में दवा प्रतिरोध बढ़ाने वाले आईएनएचए और केएटीजी जीन में म्यूटेशन मिला। इलाज के नतीजों की तुलना में सामने आया कि मुधमेह मरीजों की बलगम जांच निगेटिव होने में सबसे अधिक 133 दिन लगे। वहीं, प्री-डायबिटीज मरीजों में 113 और गैर-मधुमेह रोगियों की जांच रिपोर्ट सिर्फ 97 दिन में सामान्य हो गई। शोध में पता चला कि मुधमेह के साथ प्री—डायबिटीज भी एमडीआर टीबी का इलाज प्रभावित करती है। केजीएमयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के संस्थापक प्रभारी प्रो. सूर्यकांत के मुताबिक, भारत में टीबी और मधुमेह तेजी से बढ़ रही गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां हैं। एमडीआर टीबी में मधुमेह एक बड़ा जोखिम कारक है। इसलिए इस बीमारी से पीड़ित मरीज की मधुमेह और प्री-डायबिटीज जांच जरूरी है। मरीजों की निगरानी और दोनों बीमारियों का एक साथ इलाज होने से बेहतर नतीजे मिल सकते हैं। सह-मार्गदर्शक डॉ. अजय कुमार वर्मा ने कहा कि एमडीआर टीबी के उपचार में केवल प्रभावी एंटी-टीबी दवाएं पर्याप्त नहीं हैं। टीबी और मधुमेह की एकीकृत देखभाल (इंटीग्रेटेड टीबी टीबी डायबिटीज केयर) अपनाने से कल्चर कन्वर्जन में सुधार, उपचार की सफलता में वृद्धि तथा मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। केजीएमयू के श्वसन रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ ज्योति बाजपेयी ने कहा कि दुनिया में सबसे अधिक टीबी और मधुमेह के मरीज भारत में हैं। मधुमेह से एमडीआर टीबी के मरीजों पर दवाएं देर से असर करती हैं। ऐसे मरीजों में मधुमेह की जांच और इसे नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। इससे एमडीआर टीबी मरीजों के ठीक होने की दर बढ़ेगी। साथ ही राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन अभियान को भी मजबूती मिलेगी। शोध में इनका भी रहा योगदान। इस शोध में डॉ. योगिता वात्स, डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. पारुल जैन, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. राम अवध सिंह कुशवाहा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राजीव गर्ग, डॉ. अंकित कुमार तथा डॉ. अक्षय प्रधान का अहम योगदान रहा। एमडीआर टीबी का मतलब मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (दवा प्रतिरोधी टीबी) है। यह सामान्य ड्रग-सेंसिटिव या शुरुआती टीबी के मुकाबले ज्यादा घातक होती है। इसमें टीबी के जीवाणुओं पर इस बीमारी की सबसे असरदार दवाएं बेअसर हो जाती हैं। मरीजों को लंबे समय तक इलाज कराना पड़ता है। इसके कारण मृत्यु दर भी अधिक होती है। एमडीआर टीबी के कारण अधूरा इलाज, अनियमित व गलत दवा का सेवन, एमडीआर टीबी मरीज के जरिए संक्रमण, जीवाणुओं का म्यूटेशन, और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता एमडीआर टीबी की जाचें सीबी-नैट, जीन एक्सपर्ट, ट्रूनेट, एलपीए, और बीडी मैक्स।
लॉक अप 2′: शिवांगी-हर्षद की बढ़ती नजदीकियों पर जन्नत जुबैर की खुली सलाह, अपने खेल पर दो ध्यान

‘ मुंबई, । रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में पिछले कुछ हफ्तों से शिवांगी जोशी और एक्टर हर्षद चोपड़ा की दोस्ती को लेकर काफी बातें हो रही हैं। घर के अंदर और बाहर सोशल मीडिया पर भी लोग ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि दोनों के बीच आखिर चल क्या रहा है। इसी बीच एक्ट्रेस जन्नत जुबैर विजिटर बनकर शो में पहुंचीं और उन्होंने शिवांगी को आईना दिखाते हुए एक बड़ा रियलिटी चेक दिया। उन्होंने शिवांगी को समझाया कि वह बाहरी बातों पर ध्यान देने की बजाय खुद पर फोकस करें। जन्नत ने शिवांगी से कहा, “घर के अंदर जो कुछ हो रहा है, वही बाहर भी दिखाया जा रहा है। दर्शकों तक बिना किसी फिल्टर के वही तस्वीर पहुंच रही है जो कैमरे में कैद हो रही है। इसी वजह से जो तुम्हारे और हर्षद के रिश्ते को लेकर जो अटकलें लग रही हैं, वो बेवजह नहीं हैं। अगर बाहर लोग ये सोच रहे हैं कि दोनों साथ हैं, तो इसमें हैरानी वाली बात नहीं है, क्योंकि घर के अंदर भी कई लोग यही महसूस कर रहे हैं।” जन्नत ने शिवांगी को बताया, ”हर्षद स्वभाव से काफी इमोशनल हैं और बीते कुछ समय में दोनों कई बार इमोशनल भी हुए हैं। इसी वजह से घर के अंदर मौजूद लोग और बाहर के दर्शक दोनों को लग रहा है कि उनके बीच कनेक्शन दोस्ती से बढ़कर है। तुम इन बातों को लेकर परेशान न हों, बल्कि समझों कि पब्लिक और घर वाले दोनों क्या देख और सोच रहे हैं।” जन्नत और शिवांगी की दोस्ती टीवी इंडस्ट्री में काफी चर्चित है। दोनों अक्सर एक-दूसरे के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करती रहती हैं और मुश्किल समय में साथ खड़ी नजर आती हैं। जन्नत के जाने के बाद शो में शिवांगी और हर्षद को लेकर बातें और तेज हो गई हैं। फैंस अब ये देखने के लिए उत्सुक हैं कि जन्नत की सलाह के बाद शिवांगी का गेम किस तरह आगे बढ़ता है।
एप्पल लागत दबाव के बाद भी दूसरी स्मार्टफोन कंपनियों से कर सकता है बेहतर प्रदर्शन: एक्सपर्ट्स

नई दिल्ली। रिकॉर्ड जून तिमाही नतीजों के बाद इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि मजबूत इकोसिस्टम, बेहतर प्राइसिंग क्षमता और बेहतर ग्राहक आधार के दम पर एप्पल बढ़ती कंपोनेंट लागत के दबाव के बावजूद व्यापक स्मार्टफोन उद्योग की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करेगा। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) में इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप के प्रमुख प्रभु राम के अनुसार, एप्पल ने जून तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। आईफोन और मैक से रिकॉर्ड राजस्व और मेमोरी लागत में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद मजबूत ग्रॉस मार्जिन ने कंपनी के नतीजों को सहारा दिया। राम ने कहा, “एप्पल का मजबूत इकोसिस्टम, प्राइसिंग पावर और लॉयल ग्राहक आधार उसे एंड्रॉयड ओईएम कंपनियों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देता है। वहीं, अधिकांश एंड्रॉयड निर्माता बढ़ती कंपोनेंट लागत के बीच मार्जिन बचाने और बिक्री की मात्रा बनाए रखने की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं।” हालांकि, उन्होंने कहा कि इन्वेंट्री मैनेजमेंट और सप्लाई चेन दक्षता के जरिए बढ़ती मेमोरी लागत को संभालने की एप्पल की क्षमता अब सीमित होती जा रही है। साथ ही, सर्विसेज और ग्रेटर चाइना से होने वाली आय पर भी नजर बनाए रखने की जरूरत है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा कि भारत में एप्पल ने एक और रिकॉर्ड राजस्व वाली तिमाही दर्ज की। मैक इस दौरान सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला उत्पाद रहा, जिसे मैकबुक नियो की मजबूत मांग का लाभ मिला। वहीं, सप्लाई बाधाओं के बावजूद आईफोन 17 सीरीज की मांग भी मजबूत बनी रही। उन्होंने अनुमान जताया कि कैलेंडर वर्ष 2026 में भारत में एप्पल की बिक्री मात्रा में एकल अंक की वृद्धि होगी, जबकि मूल्य के लिहाज से दोहरे अंक की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मेमोरी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के चलते आईफोन की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना काफी अधिक है। पाठक ने कहा, “मजबूत ग्राहक आधार और सिरी एआई को मिली शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया के चलते एप्पल अपने प्रमुख हार्डवेयर उत्पादों की सभी श्रेणियों में उद्योग से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है।” इस बीच, एप्पल ने जून तिमाही में 109.4 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। वहीं, प्रति शेयर डाइल्यूटेड आय 29 प्रतिशत बढ़कर 2.02 डॉलर पर पहुंच गई। एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक ने कहा कि सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद कंपनी ने भारत समेत सभी भौगोलिक क्षेत्रों में जून तिमाही के लिए रिकॉर्ड राजस्व हासिल किया। इससे पहले अप्रैल में अमेरिका स्थित कंपनी ने घोषणा की थी कि हार्डवेयर इंजीनियरिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जॉन टर्नस 1 सितंबर से टिम कुक की जगह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पद संभालेंगे। वहीं, टिम कुक नई एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में कार्य करेंगे, जहां वे वैश्विक नीति-निर्माताओं के साथ संवाद करेंगे और कंपनी के चुनिंदा रणनीतिक मामलों में सहयोग देंगे।
यूएनएससी के शुरुआती पोल की रेस में यूएनसीटीएडी की महासचिव रेबेका सबसे आगे

संयुक्त राष्ट्र,। डिप्लोमैटिक सूत्रों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन सुरक्षा परिषद के पहले इनफॉर्मल पोल में आगे रहीं और अगली महासचिव बनीं। वहीं, गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट रनर-अप रहीं। कोस्टा रिका के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट और यूएन ट्रेड बॉडी की सेक्रेटरी-जनरल ग्रिनस्पैन को गुरुवार को हुए स्ट्रॉ पोल में दस पॉजिटिव वोट, एक नेगेटिव और चार न्यूट्रल वोट मिले। यह बात 1 फॉर 8 बिलियन (1एफ8बी) नाम के ग्रुप ने बताई है। यह ग्रुप निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए कैंपेन कर रहा है। सात उम्मीदवारों में से रोड्रिग्स-बिर्केट नौ पॉजिटिव, दो नेगेटिव और चार न्यूट्रल वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। हालांकि, काउंसिल अध्यक्ष जेनॉन मुकोंगो ने परिणामों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया, लेकिन राजनयिकों ने समाचार एजेंसियों को मतों की गिनती बता दी। यह गिनती 1एफ8बी द्वारा तैयार की गई थी, जो अनेक नागरिक समाज संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। काउंसिल एक उम्मीदवार चुनकर जनरल असेंबली को भेजती है और असेंबली आमतौर पर उसी को मंजूरी देती है। समर्थन जांचने के लिए 15 सदस्यीय काउंसिल में सीक्रेट स्ट्रॉ पोल होते हैं। स्ट्रॉ पोल तब तक जारी रहेंगे जब तक पांच स्थायी काउंसिल मेंबर्स की आम सहमति से कोई उम्मीदवार सामने नहीं आ जाता, जिसका मतलब है कि अमेरिका, रूस और चीन उम्मीदवार को ब्लॉक नहीं करेंगे। हालांकि, किसी भी देश की पहचान नहीं हुई है, लेकिन स्ट्रॉ पोल के आखिरी राउंड में पांच स्थायी सदस्यों को कलर-कोडेड बैलेट मिलते हैं ताकि यह पता चल सके कि किन उम्मीदवारों को वीटो का सामना करना पड़ेगा। बैलेट में हर उम्मीदवार के लिए तीन विकल्प थे: एनकरेज, डिसकरेज और नो ओपिनियन। इन पर काउंसिल मेंबर्स ने टिक किया। ये विकल्प पॉजिटिव, नेगेटिव और न्यूट्रल हैं। यह पता नहीं चला कि ग्रिनस्पैन या रोड्रिग्स-बिर्केट को स्थायी सदस्यों से कोई नेगेटिव वोट मिला था या नहीं, क्योंकि गुरुवार के पोल में उनके लिए अलग बैलेट नहीं थे। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के डायरेक्टर-जनरल राफेल ग्रॉसी, जो अर्जेंटीना से हैं, तीसरे नंबर पर रहे और चिली की पूर्व प्रेसिडेंट और यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट अगले नंबर पर रहीं। दोनों ही अमेरिका और रूस के खिलाफ हो गए हैं। ग्रॉसी को दो नकारात्मक वोट मिले। उन्होंने यूक्रेन में जापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट पर रूस के हमलों की आलोचना की और ईरान की न्यूक्लियर क्षमता को लेकर अमेरिका से सार्वजनिक रूप से अलग राय रखी है। बैचलेट को पांच नेगेटिव वोट मिले। उन्होंने ज्यादातर देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की आलोचना की। रूस, चीन और अमेरिका के साथी इजरायल ने इसका कड़ा जवाब दिया। अपने देश के समर्थन के बिना चुनाव लड़ रहे सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सैल चौथे स्थान पर रहे। वहीं महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा को सिर्फ 2 नेगेटिव वोट मिले। आठ देशों ने “कोई राय नहीं” कहा, जिससे उनके पास अब और समर्थन जुटाने की गुंजाइश बन गई है। ग्रिनस्पान, रोड्रिग्स-बर्केट और एस्पिनोसा को बढ़त मिल सकती है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्षों में पहली बार किसी महिला को महासचिव बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। साथ ही, 1991 में जेवियर पेरेज दे कुएलार के पद छोड़ने के बाद से 35 वर्षों से लैटिन अमेरिकी क्षेत्र से कोई व्यक्ति इस पद पर नहीं आया है। ओलारा ओतुनु संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और युगांडा के विदेश मंत्री रहे हैं और एक बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा सिर्फ पिछले हफ्ते की थी और वह आखिरी स्थान पर रहे।