प्रणब मुखर्जी का मानना था- पीएम मोदी से पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री को ‘जनता से सीधे जनादेश’ नहीं मिला : शर्मिष्ठा मुखर्जी

नई दिल्ली,। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक लेख में दावा किया है कि उनके दिवंगत पिता का मानना था कि नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनता से सीधे जनादेश मिला। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी से पहले नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक कोई भी प्रधानमंत्री सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नहीं चुना गया था। उन्हें या तो उनकी पार्टी ने चुना था या फिर चुनावों के बाद गठबंधन के समीकरणों के आधार पर चुना गया था। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा, “भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री को लेकर चल रही बहस के बीच मुझे अपने स्वर्गीय पिता प्रणब मुखर्जी की 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्त जीत पर कही गई एक दिलचस्प बात याद आती है। उस समय बाबा भारत के 13वें राष्ट्रपति थे। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े होने के बावजूद दोनों के बीच अच्छे संबंध थे, जो एक सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।” उन्होंने लिखा कि चुनाव परिणाम आने के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे। बातचीत के दौरान प्रणब मुखर्जी ने उनसे चुनाव परिणाम का विश्लेषण पूछा। उन्होंने जवाब दिया कि तीन दशकों के बाद किसी राजनीतिक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है। तब बाबा ने अपने खास प्रोफ़ेसर वाले अंदाज़ में पूछा, “और क्या?” जब मोदी जी चुप रहे, तो बाबा ने बताया कि 2014 का लोकसभा चुनाव इतिहास में अनोखा था, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर एक नया चेहरा घोषित किया गया था। लेख के अनुसार, भाजपा को मिला व्यापक जनसमर्थन केवल पार्टी के पक्ष में नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के पक्ष में भी स्पष्ट जनादेश था। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि पहले के चुनावों में प्रधानमंत्री पद का चेहरा या तो औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया जाता था, या फिर चुनाव के बाद निर्वाचित सांसद अथवा गठबंधन दल मिलकर नेता का चयन करते थे। उन्होंने आगे लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जननेता नहीं थे और उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए चुना था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बनने के समय संसद के सदस्य नहीं थे। उनके अनुसार, 2014 का चुनाव भारतीय राजनीति में ऐसा बदलाव लेकर आया जिसमें मतदाताओं ने लगभग राष्ट्रपति प्रणाली जैसी शैली में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में जनादेश दिया। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि 2014 से पहले नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति में नए थे। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी, लेकिन 2014 उनका पहला लोकसभा चुनाव था। उन्होंने इसे अभूतपूर्व बताते हुए लिखा कि पहली बार कोई व्यक्ति पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री बना। उन्होंने संसद भवन की सीढ़ियों पर झुककर प्रणाम करने की पीएम मोदी की तस्वीर का भी उल्लेख किया, जिसने करोड़ों भारतीयों का दिल छू लिया। पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ने लिखा कि चुनाव जीतना कभी भी किसी एक वजह से नहीं होता, यह कई कारकों से जुड़ी एक जटिल प्रक्रिया है। भाजपा का मजबूत जमीनी संगठन, अलग-अलग जातियों और समुदायों तक लगातार पहुंचने की रणनीति, अपनी गलतियों को जल्दी पहचानना और तुरंत सुधार करने की इच्छाशक्ति, ये कुछ ऐसी मुख्य बातें हैं जिन्होंने इसे चुनाव जीतने वाली एक ऐसी ताकत बना दिया है जिसे फिलहाल रोकना मुश्किल लग रहा है। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पीएम मोदी का चेहरा शायद भाजपा का सबसे मजबूत तुरुप का पत्ता है। लोग उनमें एक ऐसा मजबूत नेता देखते हैं जो अपनी काबिलियत और कड़ी मेहनत के दम पर आगे बढ़ा है, न कि कांग्रेस की तरह वंशवादी विरासत या परिवार के दबदबे वाली क्षेत्रीय पार्टियों की तरह। एक तरह से, मोदी भाजपा के पर्याय बन गए हैं। उन्होंन लिखा, “मैं हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बारे में पश्चिम बंगाल के अपने दोस्तों के साथ हुई कुछ बातचीत का ज़िक्र करना चाहूंगी। जहां मेरे अपने रिश्तेदार अभी भी कांग्रेस के कट्टर समर्थक हैं और राज्य में कांग्रेस के मामूली 2.9 प्रतिशत वोट शेयर में उनका योगदान था, वहीं मेरे ज़्यादातर दोस्तों और परिचितों ने भाजपा को वोट दिया। चुनाव से पहले, मैं उनसे पूछती थी कि वे किस पार्टी को वोट देंगे। ज़्यादातर जवाब यही होता था कि वे “मोदी” को वोट देंगे। मैं उन्हें याद दिलाती थी कि यह विधानसभा चुनाव है और पीएम मोदी इसमें उम्मीदवार नहीं हैं। जवाब हमेशा यही होता था, ‘ओई एक-ई व्यापार’ (बात तो एक ही है)।” उन्होंने लिखा कि नरेंद्र मोदी न केवल भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं, बल्कि आजादी के बाद देश के सबसे मजबूत प्रधानमंत्रियों में भी शामिल हैं। उनके अनुसार, सहयोगी दलों पर निर्भर गठबंधन सरकारों की मजबूरियों से मुक्त रहते हुए उन्होंने अपेक्षाकृत स्थिर सरकार दी है। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने आगे लिखा, “हो सकता है कि कोई उनकी कई नीतियों या काम करने के तरीके से सहमत न हो और लोकतंत्र में ऐसा होना बिल्कुल सामान्य बात है, लेकिन कोई भी उनके करिश्मे या एक ‘आकांक्षी भारत’ के लिए प्रेरणा के तौर पर भारतीय मतदाताओं के साथ उनके जुड़ाव को नकार नहीं सकता। यह बात 2019 और फिर 2024 में भी साफ तौर पर दिखी। आप मोदी को पसंद करें या नापसंद, लेकिन आप “ब्रांड मोदी” को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते। बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। एक आम नागरिक के तौर पर, मैं यही कामना करती हूं कि जनता से सीधे मिले इस भारी जनादेश के साथ वे पूरा न्याय करें और हमारे देश को और भी ऊंचाइयों तक ले जाएं।
केतन मर्डर केस : घंटों की पूछताछ में सिया के भाई का बयान- अगर बहन ने मना किया होता तो शादी ही रद्द कर देते

पुणे,। केतन अग्रवाल हत्याकांड मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल से पुलिस ने करीब 10 घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान साहिल ने जांच अधिकारियों से कहा कि अगर सिया ने परिवार को पहले ही बता दिया होता कि वह केतन से शादी नहीं करना चाहती, तो परिवार खुद यह रिश्ता तोड़ देता। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साहिल शुक्रवार सुबह पूछताछ के लिए पहुंचा था और देर शाम उसे जाने की अनुमति दी गई। इस दौरान अधिकारियों ने उससे सिया और सह-आरोपी चेतन चौधरी के रिश्ते, उनके संपर्क और मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं पर सवाल पूछे। साहिल ने पुलिस से कहा, “अगर सिया ने कहा होता कि उसे केतन पसंद नहीं है, तो हम शादी रुकवा देते।” लोनावला ग्रामीण पुलिस के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि साहिल को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और कई घंटे तक पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। पुलिस के अनुसार, 18 जून को लोनावला के लोहगढ़ किले पर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन अग्रवाल की पहाड़ से धक्का देकर हत्या कर दी। जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों ने यह साजिश इसलिए रची क्योंकि सिया नवंबर में होने वाली शादी नहीं करना चाहती थी। केतन अग्रवाल अपने परिवार की रियल एस्टेट कंपनी सक्सेस ग्रुप में निदेशक और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर था। शुरुआत में उनकी मौत को ट्रैकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया था, लेकिन बाद में जांच में इसे सुनियोजित हत्या की साजिश बताया गया। यह मामला पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में केतन अग्रवाल के पिता से मुलाकात कर परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। परिवार की मांग पर महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का फैसला किया है और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है। सीएम फडणवीस ने इस घटना को बेहद चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि यह केवल आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज को यह सोचने की जरूरत है कि अच्छे परिवारों और शिक्षित युवाओं में आखिर ऐसी आपराधिक मानसिकता और बदले की भावना क्यों पैदा हो रही है।
राम मंदिर का चढ़ावा चोरी करने वाले जब जेल काटेंगे, तब उन्हें प्रभु राम याद आएंगे: नीरज कुमार

पटना। जेडीयू के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) नीरज कुमार ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर लोगों ने श्रद्धापूर्वक दान दिया था और यदि उस दान की राशि की चोरी या हेराफेरी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना स्वाभाविक है। एमएलसी नीरज कुमार ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “एसआईटी की 20 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है तथा लगभग 80 लाख रुपए की बरामदगी भी की गई है। मामले की सुनवाई जल्द पूरी होगी और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी। जब आरोपी जेल में सजा काटेंगे तो उन्हें भगवान श्रीराम की याद जरूर आएगी।” नीरज कुमार ने कहा कि यदि कोई अपराध करता है तो उसे जेल जाना ही होगा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के नाम पर आर्थिक सहयोग और सेवा भाव से योगदान दिया है। ऐसे पवित्र उद्देश्य के लिए जुटाई गई धनराशि का दुरुपयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता और कानून अपना काम करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू एमएलसी ने कहा कि किसी देश के प्रधानमंत्री का दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष के निमंत्रण पर मुख्य अतिथि के रूप में जाना भारत के लिए सम्मान और गर्व का विषय है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां भी जाते हैं, वहां भारत के हित के बारे में ही बात करते हैं, इसीलिए सबको खुश रहना चाहिए। पश्चिम एशिया में जारी संकट पर नीरज कुमार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत अभी पेट्रोलियम के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कठिन दौर से गुजर रही है, इसके बावजूद भारत अपनी आर्थिक मजबूती बनाए रखते हुए नागरिकों के हितों की रक्षा कर रहा है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि वे बधाई के पात्र हैं।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिएः स्वामी वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी

नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा विवाद पर किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी कोई भी हो, उसे सजा मिलनी चाहिए। स्वामी डॉ. वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने आईएएनए से बातचीत में कहा, “चाहे हमारे मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति हो, जो भी इस मामले में दखल दे, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके स्तर पर निष्पक्ष और बिना भेदभाव के जांच हो।” डॉ. वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने आगे कहा, “जब भी कहीं कोई गलत काम होता है, तो लोगों को दुख तो होता ही है। लेकिन जब निष्पक्ष जांच होती है, तो घटना के पीछे की असली वजह सामने आती है। वजह सबके सामने आनी चाहिए और जिसने भी गलत काम किया है, उसकी पहचान करके उसे सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह कोई भी हो।” नंदगिरी ने कहा, “यह बहुत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। सब जानते हैं कि श्री राम मंदिर के निर्माण में कितने सालों तक संघर्ष, मेहनत और लगन लगी। इतने लंबे समय के बाद, भगवान राम को आखिरकार उनकी सही जगह पर स्थापित किया गया। यह करोड़ों भक्तों के लिए आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है।” किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर ने कहा, “यह प्रशासन का मामला है और वे वैसा ही करेंगे, जैसा उन्हें सही लगेगा। हम इसमें दखल नहीं दे सकते। हालांकि, भारत के एक नागरिक और किन्नर अखाड़ा व जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर और संत समाज की सदस्य होने के नाते, मैं यही कहूंगी कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।” गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किए जाने के बाद तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, मोहर्रम अवकाश के चलते सभी आरोपियों को स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। तीन दिन बाद आरोपियों को फिर अदालत में पेश किया जाएगा। गुरुवार को अयोध्या कोतवाली में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मुकदमे में मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट कर्मचारी अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
तमिलनाडु में रविवार से शुरू होगा राज्यव्यापी पल्स पोलियो अभियान, सीएम विजय करेंगे शुभारंभ

चेन्नई, । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय रविवार को राज्यव्यापी वार्षिक पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का शुभारंभ करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखना और भारत के पोलियो-मुक्त दर्जे को बनाए रखना है। मुख्यमंत्री चेन्नई के पलावक्कम स्थित आदि द्रविड़ कल्याण उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में अभियान की शुरुआत करेंगे, जहां पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। यह अभियान राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत पांच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को नि:शुल्क पोलियो की दवा पिलाई जाती है ताकि इस अत्यधिक संक्रामक बीमारी के खिलाफ उनकी प्रतिरक्षा बनी रहे। इस वर्ष तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में 52.91 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए पूरे राज्य में 43,051 टीकाकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, टोल प्लाजा, चेक पोस्ट, हवाई अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बनाए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों तथा अलग-थलग बसे गांवों में रहने वाले बच्चों तक पहुंचने के लिए विशेष मोबाइल चिकित्सा दल भी तैनात किए गए हैं। ये टीमें घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे पांच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को निकटतम टीकाकरण केंद्र पर लेकर आएं, भले ही उन्हें पहले नियमित टीकाकरण या पोलियो की खुराक मिल चुकी हो। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार दी जाने वाली पोलियो की खुराक बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने और बीमारी की दोबारा वापसी रोकने के लिए आवश्यक है। अभियान के शुभारंभ से पहले ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के आयुक्त जी.एस. समीरन ने शनिवार को पलावक्कम स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को अभियान के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बता दें कि भारत को वर्ष 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पोलियो-मुक्त घोषित किया था। इसके बावजूद पोलियो वायरस की संभावित वापसी या बाहरी संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए देशभर में हर वर्ष पल्स पोलियो अभियान चलाया जाता है।
फीफा वर्ल्ड कप: जीत के साथ स्पेन ने नॉकआउट स्टेज में बनाई जगह, उरुग्वे का सफर समाप्त

गुआडालाहारा,। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप एच के मुकाबले में स्पेन ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उरुग्वे को 1-0 से हराया। इस जीत के साथ ही स्पेन ने राउंड ऑफ 32 में अपनी जगह पक्की कर ली है। स्पेन के खिलाफ मिली हार के साथ ही उरुग्वे का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया है। स्पेन की ओर से इस मुकाबले में एकमात्र गोल एलेक्स बेना ने किया। स्पेन अपनी दो जीत और एक ड्रॉ से 7 प्वाइंट्स के साथ ग्रुप में टॉप पर रहा, जबकि वर्ल्ड कप में डेब्यू करने वाली केप वर्डे की टीम तीन ड्रॉ के साथ दूसरे स्थान पर रही। उरुग्वे ग्रुप स्टेजमें सिर्फ दो प्वाइंट्स अर्जित कर सका। पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। उरुग्वे ने शुरुआत में अच्छा खेल दिखाया और स्पेन पर दबाव बनाने की कोशिश की। स्पेन की ओर से भी कई हमले हुए, खासकर सेट पीस पर, जहां पाउ क्यूबार्सी को गोल करने के मौके मिले, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। उरुग्वे की तरफ से फेडेरिको वाल्वरडे और डार्विन नुनेज ने भी एक अच्छा मौका बनाया, लेकिन टीम उसे गोल में तब्दील नहीं कर सकी। पहले हाफ में दोनों टीमों के गोलकीपरों ने दमदार प्रदर्शन किया। हालांकि, मैच के 42वें मिनट में स्पेन की टीम आखिरकार 1-0 की बढ़त हासिल करने में सफल रही। बेना ने बॉक्स के किनारे से जगह बनाते हुए तेज शॉट लगाया, जो उरुग्वे के अनुभवी गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा को चकमा देकर गोल पोस्ट में पहुंचा। यह थोड़ा अजीब गोल था, क्योंकि खेल जारी रहने के दौरान मैनुअल उगार्टे और लैमिन यामल दोनों का मैदान पर इलाज चल रहा था, लेकिन बेना ने कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। दूसरे हाफ में उरुग्वे ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखने की कोशिश की, लेकिन वह स्पेन के मजबूत डिफेंस को नहीं भेद सके। उरुग्वे के सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी फेडेरिको विनास को स्कोर बराबर करने का अच्छा मौका मिला,लेकिन उनका शॉट गोल पोस्ट के ऊपर से निकल गया। स्पेन की ओर से डैनी ओल्मो और फेरान टोरेस ने भी गोल करने का प्रयास किया, लेकिन उरुग्वे के गोलकीपर और डिफेंडरों ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया। मैच के अंतिम समय में उरुग्वे ने कई हमले किए, लेकिन स्पेन के गोलकीपर उनाई साइमन ने शानदार बचाव किए और टीम की बढ़त को बनाए रखा। स्टॉपेज टाइम में उरुग्वे के खिलाड़ी अगस्टिन कैनोबियो को रेड कार्ड मिला, जिसने टीम की निराशा को और बढ़ाने का काम किया।
महीनों बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे दक्षिण कोरिया के दो और जहाज

सियोल। अमेरिका और ईरान में शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन बढ़ने लगा है। इसी कड़ी में महीनों तक फंसे रहने के बाद दक्षिण कोरिया के दो और जहाज होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरे हैं। समाचार एजेंसी योनहाप की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया के एक अधिकारी ने कहा, “दक्षिण कोरियाई शिपिंग कंपनियों की ओर से संचालित दो जहाज, जो होर्मुज स्ट्रेट के अंदर इंतजार कर रहे थे, अब जलडमरूमध्य से गुजरने के बाद सामान्य रूप से आगे बढ़ रहे हैं।” ये उन 26 दक्षिण कोरिया से जुड़े जहाजों में शामिल थे, जो फरवरी के आखिर में ईरान की ओर से जलमार्ग में शिपिंग रूट बंद करने के बाद वहां फंस गए थे। इनमें से पहले दो जहाज तनाव के दौरान ईरान की मदद से स्ट्रेट से निकल गए थे, जबकि बाकी जहाज इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद एक-एक करके जलमार्ग से निकल रहे हैं। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट में दक्षिण कोरिया से जुड़े तीन जहाज अभी भी फंसे हुए हैं, जिनमें ‘एचएमएम नामु’ भी शामिल है। इस ईरान के मिसाइल हमलों में नुकसान पहुंचा था और दुबई के एक बंदरगाह पर उसकी मरम्मत की जा रही है। अधिकारी के अनुसार, कुल 43 दक्षिण कोरियाई क्रू सदस्य अभी भी जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, जिनमें दक्षिण कोरियाई जहाजों और विदेशी झंडे वाले जहाजों पर सवार लोग शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि उसने जहाजों को जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर रियल-टाइम मॉनिटरिंग की और राजनयिक व नेविगेशन सहायता प्रदान की। बीते दिनों होर्मुज स्ट्रेट से निकले दो जहाजों पर दक्षिण कोरिया के चार क्रू सदस्य सवार थे, लेकिन इनमें से कोई भी जहाज दक्षिण कोरिया नहीं जा रहा है। इसी बीच, दक्षिण कोरिया ने शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए ईंधन उत्पादों की अधिकतम कीमतों में कटौती की। साथ ही, वित्त मंत्री ने महंगाई को और नियंत्रित करने के लिए साल की दूसरी छमाही में बिजली और गैस की दरों को स्थिर रखने का वादा किया। वित्त मंत्री कू यूं-चेओल ने अर्थव्यवस्था से जुड़े मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जब तक उपभोक्ता कीमतें पूरी तरह से स्थिर नहीं हो जातीं, तब तक यह कैप सिस्टम लागू रहेगा। वित्त मंत्री ने कहा, “सरकार मिडिल ईस्ट और दक्षिण कोरियाई अर्थव्यवस्था में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है। इसके साथ ही, वर्तमान में लागू आपातकालीन उपायों में चरणबद्ध तरीके से बदलाव होंगे।
सलमान खान को बांद्रा में छह मंजिला रिहायशी इमारत बनाने की मिली मंजूरी

मुंबई, । बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान जल्द ही बांद्रा में अपने परिवार के लिए समुद्र के किनारे छह मंजिला नया घर बनाने जा रहे हैं। महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (एमसीजेडएमए) ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह प्लॉट एक्टर की मां के नाम पर रजिस्टर्ड है। यह नया घर बांद्रा के चिम्बाई इलाके में बनेगा, जो सलमान खान के मौजूदा घर ‘गैलेक्सी अपार्टमेंट्स’ से थोड़ी ही दूरी पर है। सलमान खान 1974 से गैलेक्सी अपार्टमेंट्स में रह रहे हैं। गौरतलब है कि 2024 में, बाइक पर सवार दो हमलावरों ने गैलेक्सी अपार्टमेंट्स के बाहर फायरिंग की थी। जांच में पता चला कि हमलावर बिश्नोई गैंग से जुड़े थे। इस घटना के बाद सलमान खान की सुरक्षा बढ़ा दी गई और उन्हें वाई प्लास सुरक्षा दी गई। जिस बालकनी से वे अपने फैंस का अभिवादन करते थे, उसे बुलेटप्रूफ ग्लास से सुरक्षित कर दिया गया है। एमसीजेडएमए के सूत्रों के मुताबिक, नया घर सलमान खान की मां सलमा खान के नाम पर रजिस्टर्ड जमीन पर बनाया जाएगा। इस प्लॉट पर पहले 1956 से पहले बना एक दो-मंजिला घर था, जिसे खरीदने के बाद परिवार ने उसकी जर्जर हालत के कारण गिरा दिया था। नई इमारत में ग्राउंड फ्लोर, स्टिल्ट पार्किंग और छह मंजिलें होंगी। इसका कुल कंस्ट्रक्शन एरिया लगभग 1,014 वर्ग मीटर होगा। इस प्रोजेक्ट का निर्माण ‘सच डेवलपर्स’ द्वारा किया जाएगा। बीएमसी ने अक्टूबर 2025 में इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआती परमिट (आईओडी) जारी किया था। खबर है कि निर्माण के दौरान कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा। इसके बजाय, परिसर और आसपास के इलाके में स्थानीय प्रजातियों के नए पेड़ लगाए जाएंगे। मुख्य सड़क से दूर एक शांत गली में स्थित यह नया घर सलमान खान और उनके परिवार को पहले से अधिक सुरक्षा और प्राइवेसी देगा। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर सलमान खान या उनकी टीम की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हाल ही में सलमान खान ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत में वैध और अंतरिम निषेधाज्ञा की शीट पेश की है, जिसमें फिल्म के निर्माण, प्रचार और वितरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।
हिंसा के कारण हैती में हजारों बेघर, जरूरी सेवाएं भी बाधित

यूएन संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अधिकारियों ने कहा है कि हैती के कई क्षेत्रों में प्रतिद्वंद्वी धड़ों के बीच बढ़ती सशस्त्र झड़पों के कारण हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) के अनुसार पिछले सप्ताह आर्टिबोनाइट विभाग में 2,600 से अधिक लोग विस्थापित हुए। इनमें से तीन-चौथाई से अधिक लोगों ने मार्चांद डेसालिन्स कम्यून में शरण ली। ओसीएचए ने कहा, “आर्टिबोनाइट विभाग में लगातार जारी हिंसा लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रही है।” आईओएम के अनुसार, हैती के वेस्ट विभाग में 13 जून से सिटे सोलेइल में फिर से शुरू हुई सशस्त्र झड़पों के कारण 5,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इससे पहले मार्च से मई के बीच भी सशस्त्र हिंसा से बचने के लिए हजारों लोग अपने घर छोड़ चुके थे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ओसीएचए ने कहा कि लगातार जारी हिंसा के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं, विशेषकर महिलाओं और लड़कियों के लिए। हिंसा के चलते गैर-सरकारी संगठन डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (एमएसएफ) को 19 जून को सिटे सोलेइल स्थित अपने मातृत्व केंद्र की सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं। इसके कारण पोर्ट- ओ-प्रिंस के सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में से एक में रहने वाली हजारों महिलाओं की मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बाधित हो गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए आने वाले घायल लोगों की संख्या भी बढ़ी है। आईओएम के अनुसार, पिछले महीने 25,500 से अधिक लोगों को जबरन वापस भेजा गया, जिससे इस वर्ष अब तक जबरन लौटाए गए लोगों की कुल संख्या 1,17,000 से अधिक हो गई है। इनमें 24 प्रतिशत महिलाएं और लगभग 8 प्रतिशत बच्चे हैं। ओसीएचए ने कहा कि पहुंच संबंधी गंभीर बाधाओं के बावजूद वह अपने मानवीय सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर जरूरतों का आकलन करने और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने का काम जारी रखे हुए है। उसने यह भी बताया कि वर्ष 2026 के लिए हैती की 88 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मानवीय सहायता अपील को अब तक केवल 27 प्रतिशत ही वित्तीय सहायता मिल पाई है।
भूकंप से तबाह ला गुआइरा में सेना ने संभाली कमान, राहत कार्य तेज

काराकस, । वेनेजुएला में बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों से ज्यादा तबाही ला गुआइरा में हुई है। हालात इतने खराब हैं कि राहत और बचाव कार्यों के लिए सेना को तैनात करना पड़ा है। नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य तैनाती की गई है। स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को टेलीविजन पर प्रसारित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान रोड्रिगेज ने कहा, “हम सभी को बताना चाहते हैं कि ला गुआइरा राज्य अब पूरी तरह सैन्य नियंत्रण में है और बोलिवेरियन नेशनल आर्म्ड फोर्सेज के पूर्ण नियंत्रण में काम कर रहा है।” रोड्रिगेज ने बताया कि कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, आंतरिक व्यवस्था बनाए रखने तथा वेनेजुएला के आपातकालीन बचावकर्मियों और अंतरराष्ट्रीय राहत टीमों के अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए यह कदम उठाने का निर्देश दिया है। समाचार एजेंसी सिंहुआ के अनुसार, उन्होंने बताया कि बचावकर्मियों का अधिकांश दल काराबायेडा, माकुतो, लॉस कोरालेस और कैटिया ला मार क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। ये सभी इलाके भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। रोड्रिगेज ने लोगों से अपील की कि वे ला गुआइरा की यात्रा न करें, ताकि निकासी मार्गों और बचाव दलों तथा राहत सामग्री ले जाने वाले रास्तों पर अनावश्यक भीड़ न हो। उन्होंने वेनेजुएला के नागरिकों से काराकास में स्थापित संग्रह केंद्रों के माध्यम से पानी, खाद्य सामग्री, गद्दे, कपड़े, कंबल, हल्के एवं भारी उपकरण तथा अर्थमूविंग मशीनों सहित आवश्यक राहत सामग्री दान करने की भी अपील की। उन्होंने हजारों स्वयंसेवकों, सरकारी अधिकारियों और बचाव संगठनों को प्रभावित लोगों की जान बचाने और उनकी सहायता के लिए किए जा रहे अथक प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। बुधवार के विनाशकारी भूकंपों के बाद पीड़ितों की सहायता और शुरुआती पुनर्वास कार्यों के लिए एक दर्जन से अधिक देशों से तकनीकी और मानवीय सहायता वेनेजुएला पहुंचनी शुरू हो गई है। गुरुवार से भारत, डोमिनिकन गणराज्य, अल सल्वाडोर, कोलंबिया, मेक्सिको, चिली, इक्वाडोर, स्पेन, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, कतर और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की ओर से बचाव दल और विशेष उपकरण वेनेजुएला पहुंच चुके हैं। शनिवार सुबह तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला में अब तक 920 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,360 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस आपदा से देश के मध्य तटीय क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।