अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की भारत कड़े शब्दों में निंदा करता है : रणधीर जायसवाल

नई दिल्ली। भारत ने अफगानिस्तान के पक्तिका और कुनार पर पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमले की निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में भारत का पक्ष रखा। रणधीर जायसवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा, “पाकिस्तान के हमले की हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। उस हिंसा में कई आम लोगों की जान गई, हमारी उनके साथ संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं, जो घायल हैं उनके लिए कामना है कि वो जल्द ठीक हो जाए। ऐसी आक्रामकता क्षेत्र की अखंडता और शांति व्यवस्था के खिलाफ है। हम अफगानिस्तान के साथ हैं। पाकिस्तान को अपने कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए। इससे पहले की दुनिया उससे इसे लेकर सवाल पूछे।” सोमवार (21 सितंबर) को अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में पाकिस्तानी हवाई हमले किए थे। जिसमें तालिबान सरकार के अनुसार तीन लोगों की मौत हो गई थी। एयर स्ट्राइक की निंदा करते हुए तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने चेतावनी दी थी कि इन हमलों का ‘उचित जवाब’ दिया जाएगा। मुजाहिद के मुताबिक पाकिस्तान ने कुनार में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। जहां पाकिस्तानी बमबारी में एक महिला और दो पुरुषों की मौत हो गई, जबकि दो महिलाएं और दो पुरुष घायल हो गए थे। वहीं, पक्तिका हवाई हमले में एक स्थानीय दुकान और एक घर को निशाना बनाया गया। मुजाहिद ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह अपने देश के अंदर सुरक्षा से जुड़ी नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए अफगानिस्तान में हमले कर रहा है। मुजाहिद ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “हम इस हमले की निंदा करते हैं और इसे पहले किए गए अपराधों की एक और कड़ी मानते हैं। पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व अपने देश की अंदरूनी सुरक्षा नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए एक बार फिर इस तरह की कार्रवाई कर रहा है। अफगान इस हमले का उचित जवाब देगा।” ये ताजा हमले ऐसे समय हुए हैं, जब पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों पक्षों के बीच कई बार गोलीबारी हो चुकी है और आम नागरिकों के हताहत होने को लेकर चिंता भी बढ़ी है। पाकिस्तान बार-बार तालिबान पर आरोप लगाता रहा है कि वह हथियारबंद समूहों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को अफगान जमीन से गतिविधियां चलाने से रोकने में नाकाम रहा है। हालांकि, अफगान अधिकारी इस आरोप को खारिज करते रहे हैं। ‘संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान’ (यूनामा) ने 28 जुलाई को कहा था कि 1 अप्रैल से 30 जून के बीच अफगानिस्तान में सीमा पार से हुई हथियारबंद हिंसा में 57 लोगों की मौत हुई और 342 अन्य घायल हुए। अपनी रिपोर्ट में यूनामा ने कहा कि हवाई हमले और जमीन पर हुई लड़ाई आम नागरिकों के हताहत होने की मुख्य वजह थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान सीमा पार से हुई हिंसा में दर्ज सभी नागरिक हताहतों के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया गया।
भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी में सहयोग के नए रास्ते खोलती है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत अनुसंधान जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोल रही है। यह बयान यूरोपीय संसद की उद्योग, अनुसंधान एवं ऊर्जा समिति (आईटीआरई) के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान आया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऑस्ट्रिया की एंजेलिका विनजिग और यूरोपीय संसद सदस्य राफेले स्टांकानेली ने किया। बैठक में प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के कार्यान्वयन, वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस दौरान, मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी पारस्परिक हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं रखती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार दोनों पक्षों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित एफटीए पर शीघ्र हस्ताक्षर और उसका प्रभावी क्रियान्वयन दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यवसायों, उपभोक्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करेगा तथा भारत-ईयू संबंधों को नई गति देगा। यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से एंजेलिका विनजिग ने भारत को यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत की औद्योगिक और प्रौद्योगिकी नीतियों को बेहतर तरीके से समझना तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है। उन्होंने औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने और हरित तथा डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। भारत के नवाचार एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि अनुसंधान और नवाचार ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना के केंद्र में हैं। उन्होंने बताया कि भारत अब उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान, तकनीक के व्यावसायीकरण और उद्योग की अधिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। मंत्री ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) और प्रस्तावित 10 अरब यूरो के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा डीप-टेक स्टार्टअप्स को समर्थन देना है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूरोपीय संघ को एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत सामग्री, बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों, विशेषकर 6जी, में सहयोग बढ़ाने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी संयुक्त अनुसंधान, कौशल विकास और तकनीकी इकोसिस्टम निर्माण के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है। वहीं एआई के क्षेत्र में सहयोग विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में केंद्रित हो सकता है, जहां जिम्मेदार और विश्वसनीय उपयोग सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ के जंगलों में सुरक्षा बलों की मिली बड़ी कामयाबी, नक्सलियों के ठिकाने से हथियारों का जखीरा बरामद

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ (बेड़रे) थाना क्षेत्र के लंका पहाड़ी गांव के जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा जमीन के अंदर छुपाकर रखे गए हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। सुरक्षा बलों ने जंगल वाले इलाके में सघन तलाशी और बारूदी सुरंग हटाने का अभियान चलाया, जिसके दौरान यह बरामदगी हुई। बरामद सामान में एक एसएलआर/एलएमजी राइफल, एक आईएनएसएएस राइफल, एक .315 बोर की बंदूक, दो बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर), 17 बीजीएल शेल, एक चीनी हैंड ग्रेनेड, 49 एसएलआर राउंड, .315 बोर के 15 राउंड, 15 बीजीएल कारतूस, चार एसएलआर मैगजीन, एक .315 बोर की मैगजीन और अन्य संबंधित सामग्री व उपकरण शामिल हैं। यह हालिया सफलता सितंबर महीने में बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अभियानों की एक कड़ी है, जिसमें हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामान वाले कई माओवादी डंप को नष्ट किया गया है। 20 सितंबर को सुरक्षा बलों ने भैरमगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले आड़वारा के जंगलों से एक एके-47, एक .315 बोर की राइफल, एक सिंगल-शॉट हथियार, एक पिस्तौल के साथ-साथ कारतूस बरामद किए। इससे पहले, 16 सितंबर को फरसेगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत बड़े-आलवारा के जंगलों से एक .315 बोर की राइफल, 49 राउंड, .303 बोर के 25 राउंड, 12-बोर के 49 राउंड, आठ किलोग्राम जिलेटिन, एक वॉकी-टॉकी और अन्य उपकरण जब्त किए गए थे। 10 सितंबर को सुरक्षा बलों ने मिरतुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत इंद्रीपाल के जंगलों में अलग-अलग जगहों से नॉन-इलेक्ट्रिक तार के सात बंडल, डेटोनेटर और ग्रेनेड बरामद किए। 1 सितंबर को भोपालपटनम पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत नीलमाडगु के जंगलों में एक माओवादी डंप से 12-बोर की पिस्तौल, एक बीजीएल लॉन्चर, आठ बीजीएल शेल, 12-बोर के 10 राउंड और अन्य सामग्री मिली थी। सितंबर में पूरे जिले में चलाए गए अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने एक एलएमजी, एक एके-47, एक आईएनएसएएस, दो .315 बोर के हथियार, एक 12-बोर का हथियार, तीन बीजीएल लॉन्चर और दो पिस्तौल के साथ-साथ भारी मात्रा में विस्फोटक, गोला-बारूद और माओवादियों से जुड़ी अन्य सामग्री बरामद की है। अधिकारियों ने बताया कि जिले के संवेदनशील जंगली इलाकों में तलाशी और माइन हटाने (डी-माइनिंग) के ऑपरेशन जारी रहेंगे।
चीनी की कीमतें वैश्विक मांग-आपूर्ति की गतिशीलता से निर्धारित होती हैं, न कि सरकारों से: नितिन गडकरी

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि चीनी सहित कृषि उत्पादों की कीमतें अब मुख्य रूप से वैश्विक मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा दौर में सरकारों की भूमिका इनकी कीमतें निर्धारित करने में सीमित रह गई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने यह टिप्पणी उस समय की, जब विभिन्न राज्यों के मंत्री और उद्योग प्रतिनिधि चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। वर्तमान में घरेलू बाजार में चीनी की खुदरा कीमतें आपूर्ति में कमी के कारण 70 रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच चुकी हैं। गडकरी ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में कृषि उत्पादों की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि चीनी की कीमतें विशेष रूप से ब्राजील जैसे बड़े उत्पादक देशों के उत्पादन और आपूर्ति रुझानों से प्रभावित होती हैं, जबकि अन्य कृषि उत्पादों की कीमतें भी वैश्विक बाजार के प्रमुख उत्पादक देशों की स्थिति के अनुसार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा, “हम अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और ऐसी स्थिति में कोई भी सरकार कृषि उत्पादों की कीमतें तय नहीं कर सकती, भले ही वह ऐसा करना चाहे।” गडकरी ने कहा कि व्यावहारिक परिस्थितियां अक्सर प्रशासनिक रूप से तय कीमतों की मांगों को लागू करना कठिन बना देती हैं। भारत की प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि ब्राजील को बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खेती का लाभ मिलता है, जिससे वहां उत्पादन लागत काफी कम रहती है। उन्होंने बताया कि ब्राजील में चीनी उत्पादन की लागत लगभग 23 रुपए प्रति किलोग्राम है, जबकि भारत में यह लागत 33-34 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास है। ऐसे में जब ब्राजील में अधिशेष उत्पादन होता है, तो उसका दबाव वैश्विक बाजार के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। गडकरी ने किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में किसानों की परेशानी का मूल कारण यह है कि खेती अनेक मामलों में आर्थिक रूप से पर्याप्त लाभदायक नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय नवाचार और विविधीकरण को बढ़ावा देना होगा। स्थायी समाधान तभी संभव है जब कृषि से जुड़े नए आय स्रोत विकसित किए जाएं। चीनी उद्योग के भविष्य पर बोलते हुए गडकरी ने कहा कि केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर रहना अब व्यवहारिक रणनीति नहीं है। उन्होंने चीनी मिलों और उद्योग जगत को बायोमास उपयोग, पराली-आधारित उत्पाद, ऑर्गेनिक खाद और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद चीनी मिलों और किसानों दोनों के लिए अतिरिक्त राजस्व के स्रोत बन सकते हैं और उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। गडकरी ने संकेत दिया कि बदलते वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी उद्योग को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए पारंपरिक व्यवसाय मॉडल से आगे बढ़कर नवाचार, विविधीकरण और वैकल्पिक आय के अवसरों को अपनाना होगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और उद्योग को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।
पाकिस्तान: बलूचिस्तान में स्कूल बंद होने और टीचरों की कमी से जूझ रहे

क्वेटा। बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) की पहली बलूच लिटरेसी कैंपेन (बीएलसी) ने मंगलवार को बलूचिस्तान के डेरा बुगती जिले में शिक्षा की बिगड़ती हालत पर गंभीर चिंता जताई, जहां शिक्षकों और बेसिक रिसोर्स की भारी कमी के कारण कई स्कूल बंद हैं या आंशिक रूप से ही चल रहे हैं। बीएलसी के मुताबिक, कई स्कूलों के पूरी तरह बंद होने और उनके बेसिक कामकाज के लिए जरूरी रिसोर्स की कमी की वजह से जिले में लिटरेसी रेश्यो में लगातार और खतरनाक गिरावट आ रही है। जिले के अलग-अलग स्कूलों से इकट्ठा किए गए डेटा का हवाला देते हुए बीएलसी ने कहा कि स्कूल अभी बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, जिसमें पूरी तरह से काम न करना और जरूरी रिसोर्स की कमी शामिल है। बीएलसी ने कहा, “ऊपर बताई गई स्थितियां एजुकेशन सेक्टर में लोकल कम्युनिटी के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों को दिखाती हैं। स्कूलों का पूरी तरह बंद होना, टीचिंग स्टाफ की कमी और एजुकेशनल रिसोर्स की कमी सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव नाकामी नहीं हैं, ये ऐसी रुकावटें हैं, जो सीधे बच्चों के भविष्य और जिले की एजुकेशन पर असर डालती हैं।” इसमें आगे कहा गया, “एजुकेशन एक फंडामेंटल राइट है, और हर बच्चे को संविधान में मिला यह राइट और मौका सीखने का मिलता है, चाहे उनकी जगह, नेशनलिटी, और जेंडर कुछ भी हो। डेरा बुगती में स्कूलों का लगातार बंद रहना एक बड़ी चिंता की बात है और इस पर तुरंत एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन लेने की जरूरत है।” बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से डेरा बुगती में इन स्कूलों को चालू करने, जरूरी टीचरों को अपॉइंट करने और बेहतर पढ़ाई के माहौल के लिए जरूरी बेहतर सर्विस देने के लिए तुरंत और प्रैक्टिकल कदम उठाने को कहा। इसमें कहा गया, “डेरा बुगती में स्टूडेंट्स के एजुकेशनल अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, और इन स्कूलों को बंद करने के मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए।” यह चिंता तब आई जब बीएलसी ने पिछले महीने डेरा बुगती के पीर शरी दरबार इलाके के स्टूडेंट्स के बारे में ऐसा ही मुद्दा उठाया था, जिनके बारे में कहा गया था कि उन्हें पढ़ाई तक कोई एक्सेस नहीं है क्योंकि आसपास कोई चालू स्कूल नहीं है। इसमें कहा गया कि लोकल कम्युनिटी ने जोर देकर मांग की थी कि इलाके के स्कूल को ठीक किया जाए ताकि बच्चे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें। यह कहते हुए कि स्थिति डेरा बुगती से आगे तक फैली हुई है, बीएलसी ने कहा, “हम संबंधित अधिकारियों को यह भी याद दिलाना चाहते हैं कि बलूचिस्तान के कई इलाकों में ऐसी ही स्थिति है, जहां काम न करने वाला या थोड़ा-बहुत काम करने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर काम करने वाले स्कूलों के बजाय टूटी-फूटी इमारतों में बदल गया है। ऐसे सभी स्कूलों को जल्द से जल्द फिर से बनाने और रेनोवेट करने की जरूरत है।
वित्त मंत्री सीतारमण का उद्योग जगत से आह्वान: ‘मेड इन इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘इमैजिन्ड इन इंडिया’ का लक्ष्य तय करें, आरएंडडी पर खर्च बढ़ाएं

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को भारतीय उद्योग जगत से केवल कारोबार का आकार बढ़ाने के बजाय नवोन्मेषी, मजबूत, सुशासित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियां बनाने पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के विकास का अगला चरण गुणवत्ता आधारित होना चाहिए और इसके लिए कॉरपोरेट क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर अधिक निवेश करना होगा। ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कंपनियों को अपने यहां या शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से आरएंडडी पर खर्च बढ़ाना चाहिए। इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, उत्पादों में सुधार होगा और भारत में अधिक बौद्धिक संपदा (आईपी) का निर्माण होगा। उन्होंने कहा, “हमारी महत्वाकांक्षा केवल ‘मेड इन इंडिया’ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ‘इमैजिन्ड इन इंडिया’ होनी चाहिए, जिसमें न केवल यहीं पर निर्मित उत्पाद हों, बल्कि यहीं पर उनकी कल्पना, डिजाइन और तकनीकी विकास भी किया जाए और फिर उन्हें दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाए।” सीतारमण ने कहा कि भारत का सकल आरएंडडी व्यय (जीईआरडी) अभी जीडीपी का केवल 0.83 प्रतिशत है, जो ओईसीडी देशों के औसत 2.7 प्रतिशत, चीन के 2.6 प्रतिशत और अमेरिका के 3.5 प्रतिशत से काफी कम है। उन्होंने कहा कि भारत में निजी क्षेत्र का आरएंडडी योगदान केवल 36 प्रतिशत है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 70 प्रतिशत से अधिक है। वित्त मंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारतीय प्रबंधन की सफलता का आकलन इस आधार पर होगा कि आज कितनी गुणवत्तापूर्ण कंपनियां और संस्थान तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रबंधन शिक्षा को और व्यावहारिक बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप संस्थापकों और शुरुआती कर्मचारियों के लिए भर्ती, जिम्मेदारी सौंपने, वित्तीय अनुशासन, ग्राहक प्रबंधन, अनुपालन और संगठनात्मक ढांचा विकसित करने जैसे विषयों पर छोटे और उपयोगी पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। सीतारमण ने परिवार-आधारित व्यवसायों के लिए भी विशेष कार्यक्रमों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार योजना, कॉरपोरेट गवर्नेंस, पेशेवर प्रबंधन, विवाद समाधान और जिम्मेदारियों के बंटवारे जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिए जाने चाहिए। वित्त मंत्री ने कंपनियों से यह भी कहा कि वे केवल शहरी और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद विकसित करने तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि भारत की खपत का वास्तविक आधार कृषि, ग्रामीण निर्माण, परिवहन और असंगठित क्षेत्र से जुड़े करोड़ों परिवार हैं। उन्होंने कहा, “यदि कॉरपोरेट इंडिया केवल शहरी प्रीमियम उपभोक्ताओं पर फोकस करेगा, तो विकास की संरचनात्मक मजबूती कमजोर पड़ सकती है।” कॉरपोरेट गवर्नेंस पर जोर देते हुए सीतारमण ने उद्योग जगत से सरकार और नियामकों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर मतभेद को तुरंत कानूनी विवाद में बदलने के बजाय बातचीत और परामर्श के जरिए समाधान खोजने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवसायों को पारदर्शिता, पूर्वानुमान और संवाद की संस्कृति अपनानी चाहिए, क्योंकि एक परिपक्व अर्थव्यवस्था में असहमति का अर्थ टकराव नहीं होना चाहिए।
फिल्मों में भारतीयों के सपने, परम्पराएं, संघर्ष और भविष्य की संभावनाएं भी हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को एकता नगर, केवड़िया, गुजरात में आयोजित समारोह में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने भारतीय सिनेमा में असाधारण योगदान के लिए दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 का दादासाहब फाल्के पुरस्कार भी प्रदान किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने उन सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी, जिन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा और कठिन परिश्रम के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि अनंत नाग को दादासाहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्मों में उनका अभिनय थिएटर और सिनेमा के श्रेष्ठ आयामों का समन्वय प्रस्तुत करता है। वे अपने सहज, संयत और प्रामाणिक अभिनय के लिए जाने जाते हैं। वे कलाकारों की भावी पीढ़ियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सभी भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों में हमारे भारत की छवि दिखाई देती है। भारतीय फिल्मों में, भारत के लोगों के सपने हैं, परम्पराएं हैं, संघर्ष हैं, और भविष्य की संभावनाएं भी है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि उत्कृष्ट फिल्मों को सम्मानित करने का समारोह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के प्रांगण में, वॉल ऑफ यूनिटी के समीप आयोजित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर ऐसा लगता है कि भारत की एकता के शिल्पकार, सरदार वल्लभभाई पटेल स्वयं देश की सांस्कृतिक एकता के इस महोत्सव को आशीर्वाद दे रहे हैं। राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेता फिल्मों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फिल्म ‘आर्टिकल 370’ देश की एकता से जुड़ी गंभीर चुनौतियों और उनके समाधान का एक जीवंत विवरण प्रस्तुत करती है। गैर-फीचर फिल्म ‘भंगार’ जीवन और मृत्यु, सार्थकता और निरर्थकता से जुड़े अनदेखे आयामों को अभिव्यक्त करती है। ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’, वीर सावरकर की असाधारण जीवनगाथा को एक कलात्मक श्रद्धांजलि है। फिल्म ‘भक्षक’ महिला-सुरक्षा के अत्यंत गंभीर विषय पर समाज को जागृत करती है। संथाली फिल्म ‘आंगेन’ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत होने से, एक उत्कृष्ट फिल्म को तो प्रोत्साहन मिला ही है और साथ-साथ, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समावेश को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने समाज और राष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर बनी फिल्मों का चयन करने के लिए ज्यूरी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्रीय ज्यूरी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी क्षेत्र में, महिलाओं के दृष्टिकोण को शामिल करके ही एक समग्र मानवीय दृष्टिकोण का निर्माण संभव होता है। राष्ट्रपति ने कहा कि पूरी टीम के सभी सदस्यों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का भाव रखना फिल्म उद्योग की कार्य संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने क्रिएटिव इकोनॉमी के प्रमुख प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि मजदूरों, छोटे कलाकारों, सहायकों और संघर्षरत लोगों को सम्मान और सामाजिक सुरक्षा मिले। राष्ट्रपति ने कहा कि जो फिल्म कलाकार बहुत लोकप्रिय होते है उनमें देशवासियों को, विशेषकर युवाओं को प्रभावित करने की असीम क्षमता होती है। जब सफल फिल्म कलाकार अनुशासित जीवनशैली के फायदों के बारे में बताते हैं तो करोड़ों बच्चे और युवा उनका अनुकरण करते हैं। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि लोकप्रिय कलाकार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का समर्थन न करें। उन्होंने कहा कि एक सच्चा स्टार वही है जो रोशनी फैलाता है, अंधेरा नहीं।
भाजपा मतलब भाईचारा, जनता ने कांग्रेस की ‘रील की राजनीति’ को नकारा : भाजपा नेता रोहन गुप्ता

अहमदाबाद। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने इमरान मसूद के बयानों समेत विभिन्न मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर कांग्रेस के तेवरों पर सवाल उठाए। इमरान मसूद के हालिया बयान पर रोहन गुप्ता ने कहा कि पहले भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसान उठाना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस को भस्मासुर की तरह बताया था और उनका दावा है कि जो भी पार्टी उसके साथ जाती है, वह राजनीतिक रूप से नुकसान उठाती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस धरातल की वास्तविकता से अलग बड़े-बड़े दावे करती है। कांग्रेस को गठबंधन में इस तरह की ‘दादागिरी की भाषा’ से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है। समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस के मौजूदा तेवर चिंता का विषय हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश की जनता बार-बार विपक्षी दलों के बीच के आंतरिक मतभेदों को देख चुकी है और जनता ऐसे राजनीतिक समीकरणों पर आसानी से भरोसा नहीं करेगी। अभी यह सिर्फ ‘ट्रेलर’ है और पूरी तस्वीर बाकी है। प्रदेश की जनता भाजपा के साथ है और सरकार के कामों के आधार पर समर्थन देती रहेगी। मध्य प्रदेश में छात्रों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की मिमिक्री से जुड़े विवाद पर रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां या मिमिक्री का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। कई बार चुनावी हार के बावजूद कांग्रेस की राजनीतिक शैली में बदलाव दिखाई नहीं देता। रोहन गुप्ता ने छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस के दावों को भी सवालों के घेरे में रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस ‘छात्रों की गूंज’ की बात कर रही है, उसके विपरीत छात्रों से जुड़े मामलों में पार्टी को जनता के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कोटा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां छात्रों और जनता ने कांग्रेस को चुनाव में जवाब दिया, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस अपनी राजनीति में सुधार नहीं कर रही है। रोहन गुप्ता ने कांग्रेस के छात्र संबंधी दावों को ‘झूठ’, ‘फरेब’ और ‘प्रोपगेंडा’ की गूंज बताया और कहा कि छात्रों का वास्तविक समर्थन भाजपा के पक्ष में दिखाई देता है। राजस्थान नगर निकाय चुनाव के परिणामों पर रोहन गुप्ता ने राजस्थान की जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले उन्होंने एक नारा दिया था, ‘कांग्रेस मतलब कलह और भाजपा मतलब भाईचारा’। चुनाव परिणामों में यही अंतर दिखाई दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने चुनाव के दौरान बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन धरातल पर चुनावी तैयारी और जनता के मुद्दों को लेकर पर्याप्त काम नहीं किया। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक शैली को ‘रील की राजनीति’ बताते हुए कहा कि जनता ने इसका जवाब चुनाव परिणामों के माध्यम से दिया। रोहन गुप्ता ने कहा कि राजस्थान की जनता ने धरातल पर हुए कामों को देखा और भजनलाल सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा करने के दावे को स्वीकार किया। सरकार ने विधानसभा में अपने प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखते हुए 78 प्रतिशत वादे पूरे करने की बात कही। भाजपा कार्यकर्ता के रूप में और राजस्थान से जुड़े होने के नाते वह भरोसा दिलाते हैं कि जनता से किए गए वादों को पूरा करने का प्रयास जारी रहेगा। एशियाई खेल 2026 में भारत के पहले स्वर्ण पदक पर रोहन गुप्ता ने खुशी जताई। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की 19 रन से जीत को बड़ी उपलब्धि बताया और सभी भारतीय खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत को अभी और पदक जीतने हैं। पिछले दिनों विभिन्न खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है और नए-नए खेलों में भी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की दुआएं और शुभकामनाएं उनके साथ हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से इसी तरह देश के लिए खेलते रहने और भारत का नाम रोशन करने की अपील की।
दिल्ली के एलजी ने अधिकारियों के साथ नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग पर चर्चा की

नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय सभागार में नागरिक केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करने के उपायों पर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों- सहायक आयुक्तों और उससे ऊपर के अधिकारियों के साथ बातचीत की। एलजी टीएस संधू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “आज पीएचक्यू में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से बात की और ऑन-ग्राउंड नतीजों का अंदाजा लगाया और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत किया।” संधू ने कहा, “महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है। दिल्ली पुलिस को स्कूलों, कॉलेजों, मेट्रो स्टेशनों और कमजोर हॉटस्पॉट पर ट्रेंड महिला पेट्रोल यूनिट्स की एक डेडिकेटेड, दिखने वाली और रिस्पॉन्सिव फोर्स ‘पिंक फोर्स’ बनाने का निर्देश दिया।” उन्होंने कहा, “हर नागरिक को सुरक्षित महसूस होना चाहिए। दिल्ली पुलिस को पुलिसिंग को और ज्यादा आसान और रिस्पॉन्सिव बनाने का निर्देश दिया, जिसमें हर बीट, हर रिस्पॉन्स और हर एक्शन के केंद्र में पब्लिक सेफ्टी हो।” संधू ने निर्देश दिया कि हर पुलिस स्टेशन ऐसी जगह हो, जहां नागरिक की सुनें, मदद किए जाएं और सुरक्षित महसूस करें। उन्होंने पुलिस स्टेशनों, बीट ऑफिसर्स और जिन समुदायों की वे सेवा करते हैं, उनके बीच एक मजबूत कनेक्शन बनाने की अपील की। उन्होंने कमजोर, क्राइम-प्रोन और ज्यादा लोगों के आने-जाने वाले इलाकों में ज्यादा दिखने वाली मौजूदगी और पैदल और मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग को मजबूत करने पर भी जोर दिया। संधू ने कहा कि स्कूल, कॉलेज, मार्केट और ट्रांसपोर्ट हब के आसपास के इलाकों पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए। एलजी का पुलिस हेडक्वार्टर का यह दूसरा दौरा था। इससे पहले वे 24 जून 2026 को आए थे। बातचीत में उठाए गए कदमों पर जनता की प्रतिक्रिया, जो कमियां रह गई हैं, और उन्हें पूरा करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इस पर भी फोकस किया गया। एलजी ने कहा कि मकसद आसान और साफ होना चाहिए, ‘एक सुरक्षित दिल्ली और लोगों में पुलिस पर ज्यादा भरोसा।’ संधू ने निर्देश दिया कि जन सुनवाई की शिकायतों को डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जाए, हर शिकायत को एक तय टाइमलाइन के अंदर माना जाए, ट्रैक किया जाए, और उस पर कार्रवाई की जाए, और दूसरे डिपार्टमेंट की शिकायतों को तुरंत संबंधित एजेंसी को भेजा जाए। एलजी ने स्कूलों में पॉक्सो और बच्चों की सुरक्षा, साइबर क्राइम, नशीली दवाओं के सेवन और सड़क सुरक्षा पर रेगुलर, इंटरैक्टिव जागरूकता प्रोग्राम चलाने का भी निर्देश दिया, जिसमें हर पुलिस डिस्ट्रिक्ट एक नोडल ऑफिसर बनाएगा और ऐसे सेशन के लिए हर तीन महीने में एक कैलेंडर तैयार करेगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट पर उन्होंने भीड़भाड़ वाले बड़े पॉइंट की पहचान और मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया, जिसमें पीक आवर्स के दौरान उनकी मौजूदगी हो और रियल-टाइम सीसीटीवी और ट्रैफिक कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग को मजबूत किया जाए। एलजी ने ब्रिक्स समिट के सफल और सुरक्षित आयोजन के लिए दिल्ली पुलिस और दूसरी सभी सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ की और कहा कि इवेंट का लेवल सावधानी से की गई प्लानिंग, करीबी तालमेल और प्रोफेशनलिज्म के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड को दिखाता है, जबकि राजधानी में आम जिंदगी में कम से कम रुकावट सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि समिट से मिले ऑपरेशनल सबक दिल्ली में भविष्य के बड़े इंटरनेशनल इवेंट्स के लिए तैयारी को मजबूत करने के लिए कीमती इनपुट देंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में दो सैन्य अड्डे बनाएगा

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में दो बड़े सैन्य अड्डे बनाएगा। इस समझौते के तहत अमेरिका को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर स्थायी नियंत्रण प्राप्त होगा। ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के इस विस्तार की घोषणा की। उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ हुए इस समझौते को अभूतपूर्व बताया और कहा कि इससे अमेरिका को उत्तरी अमेरिका और यूरोप की रक्षा करने का व्यापक अधिकार मिलेगा। ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क साम्राज्य और ग्रीनलैंड की जनता के साथ हुए इस समझौते से अमेरिका को उस क्षेत्र की सुरक्षा और अन्य सभी जरूरतों पर स्थायी नियंत्रण प्राप्त होगा। उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास अमेरिकी महाद्वीप, यूरोप और अन्य स्थानों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने की पूरी क्षमता होगी। ट्रंप ने कहा कि जिन देशों को वाशिंगटन शत्रु मानता है, उन्हें ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति स्थापित करने से रोक दिया जाएगा। उन्हें अमेरिका की लिखित अनुमति के बिना संवेदनशील निवेश करने से भी रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी स्पष्ट लिखित स्वीकृति के बिना किसी भी अमेरिकी विरोधी को ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति स्थापित करने या वहां संवेदनशील निवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रम्प ने उन देशों के नाम नहीं बताए जिन पर ये प्रतिबंध लागू होंगे। हालांकि, अमेरिका ने आर्कटिक में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर बार-बार चिंता जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वाशिंगटन ग्रीनलैंड में उपयुक्त स्थानों पर अपनी सैन्य उपस्थिति को काफी हद तक बढ़ाना शुरू करेगा। ट्रम्प ने कहा कि हम उपयुक्त स्थानों पर बड़ी सैन्य उपस्थिति स्थापित करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करेंगे। हम दो बहुत बड़े सैन्य अड्डे बनाएंगे। मंगलवार को बाद में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी। ट्रम्प ने कहा कि बातचीत से वाशिंगटन को डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों और सरकारों के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि इस समझौते पर आज बाद में हस्ताक्षर किए जाएंगे, और मैं डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अद्भुत लोगों के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं। ट्रम्प ने इस समझौते को आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक में सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में अमेरिकी उपस्थिति का विस्तार यूरोप के साथ-साथ अमेरिका की भी रक्षा करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते को नाटो के व्यापक सैन्य सुदृढ़ीकरण से भी जोड़ा। उन्होंने नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे की प्रशंसा की और गठबंधन द्वारा रक्षा खर्च के लक्ष्यों को बढ़ाने के कदम की ओर इशारा किया।