सीएम नायब सैनी ने यूथ मैराथन को हरी दिखाई झंडी, बोले-रेवाड़ी ने नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का संकल्प लिया

रेवाड़ी। मुख्यमंत्री नायब सैनी की ओर से रविवार को रेवाड़ी में नशे के खिलाफ यूथ मैराथन को हरी झंडी दिखाई गई। इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित किया। लोगों को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा, “आप सभी ऊर्जावान युवाओं के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। आप हजारों युवाओं का उत्साह इस बात का प्रमाण की रेवाड़ी ने नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई करने का लिया संकल्प ले लिया गया है। 5 किलोमीटर की रन फॉर ऑल हो या 10 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दौड़ इनमें भाग लेने वाले युवाओं का हर कदम नशे के खिलाफ कड़ा प्रहार है।” उन्होंने कहा कि ‘नशे से जंग रेवाड़ी के संग’ इस मैराथन का स्पष्ट संदेश है। यह दौड़ जन जागरण की एक ऐसी यात्रा होगी जिसकी गूंज पूरे हरियाणा में सुनाई देगी। हमारी सरकार ने नशे को हरियाणा के परिवारों के दर्द और युवाओं के भविष्य से जोड़कर देखा है। नशे के विरुद्ध कार्रवाई, जागरूकता, उपचार और पुनर्वास और चारों स्तरों पर मजबूत व्यवस्था तैयार की गई है। सीएम की ओर से कहा गया कि नशा तस्करों के विरोध प्रभावी कार्रवाई के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित की गई। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना भी की गई है। हमारी सरकार नशामुक्त हरियाणा के संकल्प के साथ एक्शन प्लान 2029 पर मजबूती से काम कर रही है। बीते दिन उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा था, “सेवा ही संकल्प, समर्पण ही पहचान और विकसित भारत ही लक्ष्य। उन्होंने लिखा था कि चंडीगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक जीवन एवं जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होगा।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में तोड़ी गई मस्जिद के बीच निकला 20 फीट गहरा कुआं, एएसआई की टीम करेगी जांच

सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी अवैध मस्जिद को तोड़ने के बाद उसके बीच में एक गहरा कुआं मिला है। फिलहाल, पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद है और मस्जिद के बीच मिले कुएं को ढक दिया गया है। अवैध मस्जिद को गिराए जाने के बाद जब अधिकारियों ने मलबा हटाया, तो वहां तकरीबन 20 फीट गहरा कुआं मिला है। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से इसकी जांच कराने का फैसला किया गया है। एसडीएम (सदर) सुबोध कुमार ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “कोर्ट के आदेश के मुताबिक, पहले मस्जिद को गिराने की कार्रवाई की गई थी। उसी क्रम में एक कुएं की संरचना प्राप्त हुई है। इसके संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से जांच की जाएगी। इसके बाद ही कुएं के संबंध में आगे की जानकारी दी जाएगी।” उन्होंने दोहराते हुए कहा, “इस मामले में आगे के निर्देश जारी किए गए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टीमें यहां आएंगी और वे ही इसकी जांच करेंगी।” वहीं, प्रशासन ने मस्जिद को जमींदोज करने के बाद खाली स्थान को पूरी तरह समतल कर दिया है। मस्जिद के मलबे को भी सहारनपुर से 10 किलोमीटर दूर गिराया गया है। कलेक्ट्रेट परिसर से एक-एक ईंट उठाई गईं। मस्जिद के बीच में कुआं मिलने से प्रशासन और अधिक सतर्कता बरत रहा है। उधर, समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 119 वर्ष पुरानी मस्जिद को गिराए जाने के मामले में जांच और तथ्य जुटाने के लिए पहुंचेगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचेगा। सपा कार्यालय के ज्ञापन के अनुसार, सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित मस्जिद को सिविल कोर्ट के आदेश पर बुलडोजर से ढहा दिया गया। सपा का दावा है कि 4 सितंबर की शाम जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि मस्जिद को सील किया जाएगा, लेकिन उसे गिराया नहीं जाएगा। समाजवादी पार्टी ने कहा कि घटना के संबंध में जानकारी प्राप्त करने और पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचकर मंडलायुक्त (कमिश्नर) से मुलाकात करेगा। दौरे के बाद प्रतिनिधिमंडल अपनी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा।
सुदिव्य कुमार सोनूः संघर्ष से शिखर तक पहुंची सियासी यात्रा पर लगा विराम

रांची। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात निधन की खबर से पूरा राज्य स्तब्ध है। 56 साल के इस मुखर नेता का असमय जाना झारखंड की राजनीति में एक ऐसी जगह खाली कर गया है, जिसे भरना आसान नहीं होगा। सुदिव्य कुमार सोनू ने एक संघर्षशील कार्यकर्ता से विधायक और फिर कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत किसी चमक-दमक भरी जीत से नहीं, बल्कि एक कठिन पराजय से हुई थी। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में जब वे गिरिडीह सदर सीट पर पहली बार झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी के तौर पर उतरे, तो महज 8,272 वोटों के साथ छठे स्थान पर रहे। लेकिन हार ने उनके हौसले को तोड़ा नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक व्यक्तित्व की मजबूत नींव रखी। वर्ष 2014 में उन्होंने जबर्दस्त वापसी की और दूसरे स्थान पर पहुंचे। भले ही वे भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने खुद को मुख्य मुकाबले में मजबूती से स्थापित कर लिया। पांच साल बाद, 2014 में तस्वीर बदली। सुदिव्य कुमार सोनू दूसरे स्थान पर पहुंचे। भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से वह करीब नौ हजार से अधिक मतों से चुनाव हार गए। लेकिन अब वह मुकाबले में मजबूती से स्थापित हो चुके थे। हार के बावजूद क्षेत्र में उनकी सक्रियता बनी रही और अगले चुनाव तक उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत किया। फिर आया 2019 का चुनाव। यही चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने उसी निर्भय कुमार शाहाबादी को 15 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया, जिनसे पांच साल पहले उन्हें हार मिली थी। 2009 में छठे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार अब गिरिडीह सदर का विधायक बन चुका था। 2024 में उन्हें फिर कड़ी चुनौती मिली। इस बार मुकाबला बेहद करीबी रहा। इसके बावजूद उन्होंने 3,838 मतों के अंतर से जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उनके राजनीतिक सफर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हुआ। दिसंबर 2024 में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास तथा पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। गिरिडीह की राजनीति से निकलकर राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों तक पहुंचना उनके लिए बड़ा राजनीतिक पड़ाव था। खास बात यह थी कि यह सफर उन्होंने किसी एक चुनावी जीत के सहारे नहीं, बल्कि लगातार संगठन और क्षेत्र में सक्रिय रहकर तय किया था। सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान सिर्फ गिरिडीह के विधायक के तौर पर नहीं बनी। झामुमो संगठन में उनकी सक्रियता लंबे समय तक रही। वह पार्टी के केंद्रीय महासचिव रहे और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा को पार्टी के भीतर खास महत्व दिया जाता था। झारखंड आंदोलन की राजनीतिक विरासत और झामुमो की विचारधारा से उनका जुड़ाव उनके सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण पहचान रही। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ उनकी राजनीतिक निकटता भी चर्चा में रही। वह सरकार के पक्ष को मजबूती से रखने वाले नेताओं में शामिल थे। विधानसभा में वह मुखर रहे और विपक्ष के सवालों का जवाब बेबाकी से देते थे। हाल के छात्र आंदोलन के दौरान सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच संवाद की जिम्मेदारी संभालना भी सरकार के उन पर भरोसे को दर्शाता है। सुदिव्य कुमार सोनू की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि इसमें सफलता से पहले संघर्ष का लंबा दौर है। 2009 में छठे स्थान से शुरुआत। 2014 में दूसरे स्थान तक पहुंचना। 2019 में पहली बड़ी जीत। 2024 में करीबी मुकाबले में दूसरी जीत और फिर कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी। राजनीति में कई बार अंतिम मुकाम ही याद रखा जाता है। सुदिव्य कुमार सोनू की यात्रा यह याद दिलाती है कि अंतिम मुकाम तक पहुंचने के पीछे कई ऐसे पड़ाव होते हैं, जिन्हें भुलाया नहीं जाना चाहिए। उनकी राजनीतिक यात्रा में हार भी थी, इंतजार भी था, संगठन के प्रति निष्ठा भी थी और वापसी का जज्बा भी। उनके निधन के साथ यह सफर अचानक थम गया। लेकिन गिरिडीह की चुनावी राजनीति में छठे स्थान से शुरू होकर राज्य सरकार के कैबिनेट तक पहुंची उनकी यात्रा लंबे समय तक याद की जाएगी।
‘केरल भूमि सुधार’ के प्रणेता और संत केशवानंद भारती की पुण्यतिथि पर सीएम योगी समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली। ‘केरल भूमि सुधार’ के प्रणेता और संत केशवानंद भारती की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “महान संत एवं ‘केरल भूमि सुधार’ के प्रणेता, पूज्य संत केशवानंद भारती का संपूर्ण जीवन भारतीय संस्कृति के उत्थान और समाज सेवा में समर्पित रहा। उन्होंने अपने संघर्ष, त्याग और दूरदर्शी चिंतन से समाज में जागरूकता, आध्यात्मिकता एवं राष्ट्रभाव का संचार किया। संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए वे सदैव स्मरण किए जाएंगे। आज उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा गया, “सनातन संत परंपरा के तेजस्वी साधक पूज्य संत केशवानंद भारती जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित उनका तपस्वी जीवन राष्ट्रचेतना और लोकमंगल की प्रेरणा देता रहेगा।” उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “संविधान के रक्षक के रूप में प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत, पूजनीय स्वामी केशवानंद भारती जी की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन। भारतीय संविधान, लोकतंत्र और न्याय की रक्षा के लिए आपका समर्पित जीवन सदैव स्मरणीय रहेगा। आपके विचार, आदर्श और सेवा भाव हम सभी को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रेरणा देते रहेंगे।” उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “एडनीर मठ के पूर्व प्रमुख, पूज्य स्वामी केशवानंद भारती जी के महाप्रयाण दिवस पर सादर नमन। संविधान की आत्मा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में उनका ऐतिहासिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया, “महान आध्यात्मिक संत एवं केरल भूमि सुधार आंदोलन के अग्रदूत पूजनीय स्वामी केशवानंद भारती जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! स्वामी केशवानंद भारती जी का संघर्ष भारत के लोकतंत्र, मौलिक अधिकारों और न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। संविधान के मूल ढांचा सिद्धांत के संरक्षण में उनकी भूमिका भारतीय संवैधानिक इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगी।” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “महान आध्यात्मिक संत, अद्वैत दर्शन के विद्वान और केरल भूमि सुधार आंदोलन के प्रणेता पूज्य स्वामी केशवानंद भारती जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
परमवीर चक्र विजेता मेजर धन सिंह थापा को पुण्यतिथि पर ओम बिड़ला समेत कई नेताओं ने किया नमन

नई दिल्ली। 1962 के भारत-चीन युद्ध में अद्वितीय वीरता, साहस और पराक्रम का परिचय देने वाले परमवीर चक्र विजेता मेजर धन सिंह थापा की पुण्यतिथि पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई भाजपा नेताओं ने नमन किया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा, “वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के नायक, परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर धन सिंह थापा की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उनकी वीरता और नेतृत्व भारतीय सैन्य इतिहास के उन गौरवपूर्ण अध्यायों में शामिल हैं, जिन्हें देश सदैव सम्मान के साथ स्मरण करता रहेगा।” राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पोस्ट में कहा, “मातृभूमि की रक्षा के लिए अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देने वाले परमवीर चक्र से अलंकृत मेजर धनसिंह थापा की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन! 1962 के भारत-चीन युद्ध में वीरता, राष्ट्रभक्ति और उनका सर्वोच्च बलिदान देश के वीर सैनिकों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनका अमर योगदान राष्ट्र की स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेगा।” उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा, “1962 के भारत-चीन युद्ध में अदम्य शौर्य एवं साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले मां भारती के वीर सपूत परमवीर चक्र से अलंकृत मेजर धन सिंह थापा की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन। आपकी वीरता की गाथा हमें सदैव राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक्स पोस्ट में कहा, “भारत-चीन युद्ध के दौरान अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देने वाले परमवीर चक्र विजेता मेजर धन सिंह थापा की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि कोटि नमन।” बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पोस्ट में कहा, “भारत-चीन युद्ध के दौरान अदम्य साहस व पराक्रम दिखाने वाले’ परमवीर चक्र विजेता, मेजर धन सिंह थापा की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन।” बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक्स पर पोस्ट किया, “मां भारती के वीर सपूत, ‘परमवीर चक्र’ मेजर धन सिंह थापा की पुण्यतिथि पर सादर नमन। मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य और समर्पण प्रत्येक भारतीय को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
रुमेश पथिरगे ने रचा इतिहास, डायमंड लीग खिताब जीतने वाले पहले श्रीलंकाई बने

ब्रसेल्स। श्रीलंका के जैवलिन थ्रोअर रुमेश थरंगा पथिरगे ने इतिहास रच दिया है। वह डायमंड लीग चैंपियन बनने वाले पहले श्रीलंकाई बन गए हैं। दुनिया के नंबर 1 जेवलिन थ्रोअर रुमेश ने ब्रसेल्स के किंग बाउडौइन स्टेडियम में आयोजित डायमंड लीग फाइनल में खिताब जीत सीजन का अंत शानदार और यादगार अंदाज में किया। 23 साल के इस खिलाड़ी ने किंग बाउडौइन स्टेडियम में अपनी तीसरी कोशिश में 89.04 मीटर की बड़ी दूरी तय करके जीत पक्की की। पोलैंड के डेविड वेगनर 87.47 मीटर दूसरे स्थान पर रहे। पूर्व ओलंपिक चैंपियन त्रिनिदाद और टोबैगो के केशोर्न वालकॉट ने सीजन का सबसे अच्छा थ्रो फेंका और 83.99 मीटर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। ग्रेनेडा के दो बार के वर्ल्ड चैंपियन एंडरसन पीटर्स 83.70 मीटर के साथ चौथे स्थान पर रहे। जीत के बाद रुमेश ने कहा, “मैं डायमंड लीग फाइनल जीतने वाला पहला श्रीलंकाई हूं और इससे मुझे बहुत गर्व है। मैं डायमंड लीग में मुकाबला करने के लिए बहुत उत्सुक था और मैं बहुत खुश हूं कि मुझे फाइनल में जीत मिली। मुझे पता है कि मैं आज 89.04 से कहीं बेहतर कर सकता था, लेकिन हालात मुश्किल थे। मुझे बहुत ज्यादा तापमान की आदत है। मैं अगले कुछ सालों में अटैक करने और मीटिंग रिकॉर्ड तोड़ने की कोशिश करूंगा।” इस जीत ने श्रीलंकाई खिलाड़ी के लिए एक शानदार डायमंड लीग कैंपेन पूरा किया, जो सीजन के दौरान शानदार प्रदर्शन के बाद सर्किट लीडर के तौर पर फाइनल में पहुंचे थे। श्रीलंकाई स्टार ने इस सीजन में शानदार प्रदर्शन किया है, जिसमें उनके पांच डायमंड लीग मैचों में से चार में जीत मिली है। वह रबात में अपनी सीरीज में डेब्यू करते हुए दूसरे नंबर पर रहे, लेकिन रोम और ज्यूरिख दोनों जगह उन्होंने 92 मीटर से ज्यादा फेंका, और अब तक के टॉप टेन थ्रोअर में शामिल हो गए। रोम में श्रीलंकाई खिलाड़ी की 92.62 मीटर की वर्ल्ड लीड ने उन्हें इस सीजन में वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप पर पहुंचने में मदद की है। 2022 में चैंपियन रहे भारतीय स्टार नीरज चोपड़ा ने इंजरी की वजह से फाइनल में हिस्सा नहीं लिया था।
सलेम के किसानों ने सब्सिडी वाले मक्के के बीजों से कम पैदावार को लेकर जताई चिंता

सलेम। सलेम जिले के कई हिस्सों में मक्का उगाने वाले किसानों ने सरकारी सब्सिडी स्कीम के तहत तमिलनाडु कृषि विभाग द्वारा बांटे गए बीज की एक किस्म के प्रदर्शन पर चिंता जताई है। किसानों का कहना है कि कम पैदावार के कारण कई किसान अपनी खेती की लागत भी नहीं निकाल पाए हैं। अत्तूर, पेथानाइकेनपालयम, वाज़ापाडी और आसपास के इलाकों के किसानों ने कहा कि पिछले सीजन में सप्लाई की गई किस्म सलेम की मिट्टी और मौसम के हिसाब से सही नहीं थी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि या तो कोई दूसरी किस्म उपलब्ध कराई जाए या फिर पुरानी सब्सिडी व्यवस्था बहाल की जाए, जिसके तहत वे अपनी पसंद के बीज खरीद सकते थे। सलेम जिला किसान कल्याण संघ के अध्यक्ष वी.एस. गोविंदराज ने बताया कि पिछले साल सब्सिडी वाले बीजों से किसानों को प्रति एकड़ मक्के की सिर्फ 15 बोरियां ही मिलीं जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाली किस्मों से लगभग 40 बोरियां मिलती हैं। उन्होंने कहा कि पहले मक्के की सफल फसल से किसान को लगभग 2 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता था। हालांकि, सब्सिडी वाली किस्म का इस्तेमाल करने वाले किसानों को अपना खर्च निकालने में भी मुश्किल हुई। आम तौर पर लगभग 420 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत वाले ये बीज सब्सिडी के बाद किसानों को 320 रुपये में दिए जा रहे हैं। खबर है कि कई किसान इस सीजन में फिर से वही किस्म खरीदने से हिचकिचा रहे हैं। गोविंदराज ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर किसानों को चेतावनी दी जा रही है कि अगर उन्होंने बीज खरीदने से इनकार किया, तो सरकारी फायदों के लिए उनकी पात्रता पर असर पड़ सकता है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि सीमित शेल्फ-लाइफ वाले ये बीज अगर नहीं बिके, तो इनकी मियाद खत्म हो सकती है। राज्य ने इस सीजन में सलेम के लिए सब्सिडी वाले मक्के के बीज की 58 टन मात्रा मंजूर की है, जिसमें पेथानाइकेनपालयम ब्लॉक के लिए 18.5 टन शामिल है। इनका वितरण मुख्य रूप से अत्तूर, गंगावल्ली, पेथानाइकेनपालयम, कोलाथूर और थलाइवासल में किया जा रहा है। हालांकि, कृषि अधिकारियों ने ‘एडवांटा 762’ का बचाव करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इसे पांच राज्यों में खेती के लिए मंजूरी दी है। नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन के जरिए सप्लाई किए जाने वाले इन बीजों का वितरण तमिलनाडु के 20 जिलों में किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सलेम के लिए आवंटित बीज लगभग 1,866 हेक्टेयर जमीन के लिए पर्याप्त होंगे और वितरण से पहले हर बैच की जांच की गई थी, जिसमें बीज के अंकुरण का मानक 90 प्रतिशत पाया गया। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक के. श्रीनिवासन ने पिछले साल कम पैदावार का मुख्य कारण अपर्याप्त बारिश को बताया। उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में प्रमाणित एफ 1 किस्म से प्रति एकड़ लगभग 3.5 टन पैदावार मिल सकती है। किसानों द्वारा ‘एडवांटा 762’ खरीदने में हिचकिचाहट दिखाने के बाद विभाग ने सस्ती ‘डीएचएम 206’ किस्म भी उपलब्ध कराई है।
Gen Z कम उम्र में ही हेयर ट्रांसप्लांट करवा रहे हैं: सोशल मीडिया और कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या से बढ़ी मांग : एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। बाल झड़ने की समस्या, जो पहले मुख्य रूप से अधेड़ उम्र के लोगों से जुड़ी मानी जाती थी, अब युवाओं के बीच भी चिंता का विषय बनती जा रही है। डर्मेटोलॉजिस्ट और हेयर-रेस्टोरेशन स्पेशलिस्ट के अनुसार, 20-25 साल की उम्र के युवा हेयरलाइन पीछे हटने, बाल पतले होने और हेयर ट्रांसप्लांट के समाधान के लिए बड़ी संख्या में संपर्क कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस ट्रेंड के पीछे दो मुख्य कारण हैं कम उम्र में बाल झड़ने की वास्तविक समस्या और सोशल मीडिया के कारण अपने लुक को लेकर बढ़ती जागरूकता, जहाँ युवा लगातार “परफेक्ट” हेयरलाइन वाली बेहतरीन तस्वीरें देखते रहते हैं।नई दिल्ली के डर्मालाइफ स्किन एंड हेयर क्लिनिक के सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट, हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. गौरव गर्ग ने कहा, “हम युवा मरीज़ों (जिनमें 20 साल की उम्र के शुरुआती दौर वाले लोग भी शामिल हैं) की तरफ़ से हेयरलाइन ठीक कराने और हेयर ट्रांसप्लांट के बारे में पूछताछ में साफ़ बढ़ोतरी देख रहे हैं। सोशल मीडिया ने युवाओं के अपने लुक को देखने का नज़रिया बदल दिया है हेयरलाइन का थोड़ा पीछे हटना, जिसे पहले सामान्य बात माना जाता था, अब उस पर ध्यान दिया जाता है, उसकी तस्वीरें ली जाती हैं और सेलिब्रिटीज़ और इन्फ्लुएंसर्स से उसकी तुलना की जाती है। साथ ही, हम कम उम्र में बाल झड़ने के असली मामले भी देख रहे हैं। हालाँकि, ट्रांसप्लांट की इच्छा का मतलब यह नहीं है कि युवा मरीज़ इसके लिए तैयार है; सबसे पहले बाल झड़ने की वजह, पैटर्न और आगे इसके बढ़ने की संभावना का पता लगाना ज़रूरी है।रिसर्च से यह भी पता चलता है कि एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया, जिसे आमतौर पर पुरुषों में बाल झड़ने की समस्या (मेल-पैटर्न हेयर लॉस) के तौर पर जाना जाता है, उम्मीद से कहीं पहले शुरू हो सकता है। 2024 की एक समीक्षा में अलग-अलग आबादी और परिभाषाओं के आधार पर, कम उम्र में होने वाले एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया के मामलों का अनुमान 19.2% से 57.6% के बीच बताया गया। 2025 में पब्लिश हुई एक भारतीय स्टडी में, कम उम्र में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया से जूझ रहे 99 मरीज़ों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि 20-25 साल की उम्र के लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा थी, जिनकी औसत उम्र लगभग 24.8 साल थी। आधे से ज़्यादा लोगों ने यह भी बताया कि उनके परिवार में भी यह समस्या रही है।सोशल मीडिया का बढ़ता असर इस समस्या को और बढ़ा सकता है। फ़ोटो, छोटे वीडियो, वीडियो कॉल और लुक पर ध्यान देने वाले कंटेंट की वजह से हेयरलाइन चेहरे की खूबसूरती का एक अहम हिस्सा बन गई है। सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर और दोस्तों की बहुत ज़्यादा स्टाइल की गई या खास तौर पर तैयार की गई तस्वीरें “परफेक्ट” हेयरलाइन कैसी होनी चाहिए, इसे लेकर गलत उम्मीदें पैदा कर सकती हैं। इसलिए, कुछ युवाओं के लिए, हेयरलाइन का थोड़ा पीछे हटना या कुदरती तौर पर ऊंची हेयरलाइन भी लुक को लेकर बड़ी चिंता का कारण बन सकती है, जिससे वे बहुत कम उम्र में ही पक्के इलाज के बारे में सोचने लगते हैं।डॉ. गर्ग ने आगे कहा, “आम तौर पर, हम 25 साल की उम्र से पहले हेयर ट्रांसप्लांट की सलाह देने में बहुत सावधानी बरतते हैं क्योंकि बाल झड़ने का पैटर्न अभी भी बदल रहा हो सकता है। एक बार जब पैटर्न स्थिर हो जाता है, तो नतीजे का अंदाज़ा लगाना आसान हो जाता है और मरीज़ की लंबे समय की ज़रूरतों के हिसाब से हेयरलाइन की योजना बनाई जा सकती है। ट्रांसप्लांट सिर्फ़ युवा की आज की पसंद के हिसाब से हेयरलाइन बनाने के लिए नहीं होना चाहिए; इसे इस तरह से डिज़ाइन किया जाना चाहिए कि यह सालों बाद कैसा दिखेगा। इसलिए, युवा मरीज़ों में सर्जरी के बारे में सोचने से पहले जांच, निगरानी और सही नॉन-सर्जिकल इलाज पर ध्यान देना चाहिए।हेयर-ट्रांसप्लांट गाइडलाइंस भी युवा मरीज़ों की सावधानीपूर्वक जांच की सलाह देती हैं क्योंकि बिना ट्रांसप्लांट किए गए बालों का लगातार झड़ना लंबे समय में लुक पर असर डाल सकता है। सिर्फ़ उम्र ही तय करने वाली बात नहीं है; डॉक्टर जांच, बालों के झड़ने की स्थिरता और तेज़ी, परिवार का इतिहास, डोनर-बालों की उपलब्धता और मरीज़ की उम्मीदों पर भी विचार करते हैं।मेदांता हॉस्पिटल के डर्मेटोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. रमनजीत सिंह ने कहा, “युवाओं में बालों का झड़ना सिर्फ़ कॉस्मेटिक इलाज के बजाय सही डर्मेटोलॉजिकल जांच का हकदार है। सोशल मीडिया लुक को लेकर चिंता बढ़ा सकता है, लेकिन हर बार हेयरलाइन पीछे हटने पर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत नहीं होती और न ही हर बार बाल झड़ने का मतलब हमेशा के लिए गंजापन होता है। सर्जरी से पहले असल वजह, समस्या के बढ़ने की रफ़्तार, फ़ैमिली हिस्ट्री, स्कैल्प की सेहत और डोनर हेयर की उपलब्धता जैसी सभी बातों की जांच होनी चाहिए। मकसद सिर्फ़ फ़ोटो जैसी हेयरलाइन बनाना नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले और नैचुरल दिखने वाले बाल वापस पाना होना चाहिए।डॉक्टर इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि युवाओं में बाल झड़ने और पतले होने के कई कारण हो सकते हैं और इसे तुरंत हमेशा के लिए गंजापन नहीं मान लेना चाहिए। बाल झड़ने की समस्या वाले 24,595 मरीज़ों के भारतीय विश्लेषण में पाया गया कि ‘टेलोजन एफ्लुवियम’ सबसे आम समस्या थी, जो 40.7% मामलों में देखी गई, जबकि पुरुषों में होने वाले पैटर्न का हेयर लॉस 7.49% मामलों में पाया गया। ये नतीजे बताते हैं कि किसी भी परमानेंट कॉस्मेटिक प्रोसीजर के बारे में सोचने से पहले सही जांच कितनी ज़रूरी है।जो युवा तेज़ी से झड़ते बालों या बदलती हेयरलाइन की समस्या का सामना कर रहे हैं, उनके लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वे किसी प्रोफेशनल से जाँच करवाएँ। इससे समस्या का कारण पता चल सकता है, यह समझा जा सकता है कि समस्या कितनी तेज़ी से बढ़ रही है, और जहाँ संभव हो, बालों के झड़ने को रोकने के लिए सही इलाज पर विचार किया जा सकता है। सही तरह से चुने गए मरीज़ों के लिए हेयर ट्रांसप्लांट एक असरदार विकल्प हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सिर्फ़ सोशल मीडिया की तस्वीरों या तुरंत “परफेक्ट” हेयरलाइन पाने की चाहत में कोई फ़ैसला न लें।जैसे-जैसे Gen Z अपनी दिखावट को लेकर ज़्यादा
संगठन की जिम्मेदारी को जनसेवा का संकल्प बनाकर निभाऊंगा : जय प्रकाश

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी दक्षिणी दिल्ली जिला कार्यालय में जिला प्रभारी जय प्रकाश ‘जेपी’ को पार्टी का राष्ट्रीय मंत्री नियुक्त किए जाने पर भव्य अभिनंदन किया गया। मीडिया प्रमुख एस राहुल ने प्रभु श्रीराम का चित्र भेंट किया और अन्य कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया और नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर प्रदेश महामंत्री योगिता सिंह, सह प्रभारी आदित्य झा, जिलाध्यक्ष माया सिंह बिष्ट, निगम पार्षद अनीता सिंघल आदि मौजूद रहे।जय प्रकाश ने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संगठन की उस सामूहिक शक्ति का सम्मान है, जो एक सामान्य कार्यकर्ता को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। पार्टी ने मुझे जो नई जिम्मेदारी दी है, उसे मैं पद नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी और जनसेवा के नए अवसर के रूप में देखता हूं। और संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं से निरंतर संवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में जनभागेदारी को बढ़ाएंगे।जय प्रकाश ने कहा कि भाजपा की ताकत केवल उसके विचारों में नहीं, बल्कि उन करोड़ों कार्यकर्ताओं में है जो बिना किसी व्यक्तिगत अपेक्षा के संगठन और राष्ट्रहित में निरंतर काम करते हैं। और इन्ही कार्यकर्ताओं का विश्वास और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। और यहीं उनको नई जिम्मेदारी को और अधिक ऊर्जा, प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ निभाने की प्रेरणा देगा।सह प्रभारी आदित्य झा कहा कि जय प्रकाश की कार्यशैली, सहज उपलब्धता और संगठन के प्रति समर्पण ने कार्यकर्ताओं के बीच एक मजबूत विश्वास कायम किया है।इस मौके पर मोर्चों के नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारी और जिला के मोर्चा अध्यक्षों को भी सम्मानित किया गया।
ओमान में भारतीय NDC प्रतिनिधिमंडल का दौरा भारत और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बातचीत का प्रतीक रहा: दूतावास

मस्कट । मस्कट में भारतीय दूतावास ने शनिवार को कहा कि भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) का ओमान दौरा भारत और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बातचीत का प्रतीक था।भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल अपनी ‘स्ट्रैटेजिक नेबरहुड स्टडी टूर’ (रणनीतिक पड़ोसी अध्ययन यात्रा) के हिस्से के रूप में 30 अगस्त से 3 सितंबर तक ओमान के दौरे पर था।NDC इंडिया में सीनियर डायरेक्टिंग स्टाफ (एयर) एयर वाइस मार्शल मनीष वसंतकुमार पटेल VM के नेतृत्व में, प्रतिनिधिमंडल ने मस्कट में कई अधिकारियों और संस्थानों के साथ बातचीत की।अपनी यात्रा के दौरान, प्रतिनिधिमंडल को ‘मजलिस ए-दौला’ और ‘मजलिस ए-शूरा’ जाने और ओमान काउंसिल के सदस्यों के साथ बातचीत करने का मौका मिला।दूतावास के एक बयान में कहा गया, “प्रतिनिधिमंडल ने सुल्तान की सशस्त्र सेनाओं के चीफ ऑफ स्टाफ, वाइस एडमिरल अब्दुल्ला बिन खमीस अल रायसी के साथ भी बातचीत की, जिसमें भारत-ओमान के बीच व्यापक द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के दायरे में आपसी सुरक्षा हितों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।प्रतिनिधिमंडल ने NDC, ओमान के कमांडेंट, रियर एडमिरल अली अब्दुल्ला अल शिदी के साथ भी बातचीत की और प्रशिक्षण तथा शैक्षणिक सहयोग सहित द्विपक्षीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा की।दूतावास के अनुसार, अन्य कार्यक्रमों में ओमान की डिप्लोमैटिक एकेडमी और ‘पब्लिक अथॉरिटी फॉर स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन्स एंड फ्री ज़ोन्स’ के साथ ‘फायदेमंद’ बातचीत शामिल थी।दूतावास ने इस बात पर जोर दिया, “यह दौरा भारत और ओमान जैसे दो मित्र देशों के बीच एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बातचीत का प्रतीक था और इसने शांति, समृद्धि और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उनकी साझा और अटूट प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।प्रतिनिधिमंडल ने ‘शबाब ओमान II’ जहाज का भी दौरा किया और जहाज, उसकी सभ्यतागत, सांस्कृतिक और राजनयिक भूमिकाओं तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के बारे में जानकारी प्राप्त की।दूतावास ने ‘X’ पर कहा, “जहाज ‘शबाब ओमान II’ ने भारत गणराज्य के नेशनल डिफेंस कॉलेज के सीनियर एडवाइजर, एयर वाइस मार्शल का स्वागत किया। इस यात्रा के दौरान उन्हें जहाज, उसकी सभ्यतागत, सांस्कृतिक और राजनयिक भूमिकाओं, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और विभिन्न क्षेत्रों में उसकी विविध उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई।”