चिट फंड घोटाले के मामले में ईडी ने कोलकाता में छह जगहों पर छापेमारी की

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कोलकाता में कई करोड़ रुपये के चिट फंड मामले के सिलसिले में छह जगहों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि ईडी अधिकारियों की एक टीम, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (सीएपीएफ) के साथ सुबह करीब 7 बजे उत्तरी कोलकाता के नारकेलडांगा इलाके में एक बिजनेसमैन के घर पहुंची। पता चला है कि इस बिजनेसमैन ने अच्छा रिटर्न देने का वादा करके लोगों से पैसे जमा किए और उन्हें अलग-अलग सेक्टर में इन्वेस्ट किया। बाद में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की जांच एजेंसी ईडी की पांच और टीमों ने इसी चिट फंड मामले के सिलसिले में उत्तरी और दक्षिणी कोलकाता में पांच और जगहों पर छापेमारी की। सूत्रों ने बताया कि लोगों से पैसे एक पोंजी कंपनी, एपीएम ग्रुप के नाम पर जमा किए गए थे। इस ग्रुप ने पैसे इकट्ठा करके अलग-अलग सेक्टर में इन्वेस्ट किए लेकिन ऐसा एक दूसरी कॉर्पोरेट कंपनी के जरिए किया गया जो असल में एक शेल कंपनी (सिर्फ कागजों पर चलने वाली कंपनी) थी। पता चला है कि चिट फंड स्कीम में जमा किए गए पैसों के गबन के आरोपों के चलते ये छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए गए। सूत्रों के मुताबिक, पोंजी कंपनी के मालिक के घर के अलावा, मालिक के करीबी लोगों के घरों पर भी इसी तरह की छापेमारी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस कंपनी की धोखाधड़ी का तरीका एक जैसा था। पहले अलग-अलग मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम के ज़रिए लोगों से भारी मात्रा में पैसे जमा किए जाते थे और निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने का वादा किया जाता था, फिर जमा किए गए पैसे को एक शेल कंपनी (कागजी कंपनी) के ज़रिए अलग-अलग सेक्टर में निवेश किया जाता था। सूत्रों ने बताया कि लोगों से ये पैसे संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी से जरूरी मंजूरी लिए बिना जमा किए गए थे। 2012 से पश्चिम बंगाल पोंज़ी स्कीम चलाने वाली कंपनियों का गढ़ रहा है, जिनमें सुदीप्तो सेन की शारदा ग्रुप और गौतम कुंडू की रोज वैली ग्रुप जैसी कंपनियां शामिल हैं। ईडी और सीबीआई लंबे समय से ऐसी कई कंपनियों की गतिविधियों की अलग-अलग जांच कर रहे ही और उन्होंने इनसे जुड़े होने के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार भी किया है।
कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष के दौरान प्रीह विहियर मंदिर को हुआ नुकसान, संरक्षण में भारत करता रहा है मदद

प्रीह विहियर। कंबोडिया के 11वीं सदी के प्रीह विहियर मंदिर में 2025 में थाईलैंड के साथ हुई लड़ाई के दौरान हुई भारी तबाही का व्यापक असर अब सामने आया है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस ऐतिहासिक स्थल के परिसर में सैकड़ों स्थानों पर गोलाबारी के निशान मिले हैं। कंबोडिया-थाईलैंड की सीमा पर स्थित इस मंदिर के सरंक्षण और पुनर्निर्माण में भारत लंबे समय से मदद करता रहा है। संघर्ष के दौरान भारत ने यूनेस्को साइट को लेकर चिंता भी जताई थी। मंदिर में लड़ाई के स्पष्ट निशानों में टूटे हुए बलुआ पत्थर, क्षतिग्रस्त नक्काशी और अस्थिर हुई संरचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा बिना फटे विस्फोटक और आयुध अभी भी संरक्षण कर्मचारियों तथा आगंतुकों के लिए खतरा बने हुए हैं। क्योडो न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण ने नुकसान का आकलन किया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के सलाहकार पैनल के एक मिशन से मिली तकनीकी जानकारी और सत्यापन के आधार पर प्राचीन मंदिर परिसर में सैकड़ों प्रभावित स्थानों की पहचान की गई है। इससे मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। कंबोडियाई अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष हुई दो प्रमुख अवधि की लड़ाई के दौरान मंदिर को नुकसान पहुंचा। पहली लड़ाई 24 से 28 जुलाई के बीच हुई, जब भारी गोलाबारी में मंदिर परिसर के 142 स्थान प्रभावित हुए। इसके बाद 7 से 27 दिसंबर के बीच हुई दूसरी लड़ाई और बमबारी में 420 अन्य स्थानों को नुकसान पहुंचा। प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के महानिदेशक कोंग पुथिकार ने पत्रकारों को बताया कि माइनिंग और तकनीकी टीमों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि 81 मिलीमीटर से 155 मिलीमीटर तक के तोप के गोले और हवाई बम मंदिर के प्रमुख मंडपों तथा मार्गों पर गिरे। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत की मदद से जिन दो हिस्सों में बहाली का काम चल रहा था, वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। पुथिकार के मुताबिक विस्फोटों से प्राचीन बलुआ पत्थर की दीवारें टूट गईं, ऐतिहासिक शिलालेखों के हिस्से अपनी जगह से हट गए और मंदिर की आधार-उत्कीर्ण कलाकृतियों तथा पत्थर की संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। हेरिटेज इमरजेंसी फंड और एएलआईपीएच फंड की मदद से विशेषज्ञों ने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त 23 स्थानों को स्थिर किया है। इसके अलावा टूटे हुए पत्थरों और कलात्मक अवशेषों के 65,738 टुकड़ों का दस्तावेजीकरण और सूचीकरण किया गया है। प्राचीन जल निकासी व्यवस्था को भी बहाल किया गया है। अधिकारियों ने मंदिर परिसर का व्यापक त्रिआयामी डिजिटल दस्तावेजीकरण भी पूरा किया है। उनका कहना है कि यह रिकॉर्ड भविष्य में संरक्षण और पुनर्निर्माण के काम में मदद करेगा। यह कार्य अंतरराष्ट्रीय सलाहकार मिशन की सिफारिशों के अनुरूप किया गया है। 10 सितंबर को कंबोडिया और अन्य देशों के 40 से अधिक पत्रकारों को मंदिर का दौरा करने की अनुमति दी गई। पिछले साल दिसंबर में हुई दूसरी लड़ाई के बाद किसी मीडिया समूह को पहली बार मंदिर परिसर में जाने की अनुमति मिली थी। हालांकि, मंदिर अभी पर्यटकों के लिए बंद है। अधिकारियों का कहना है कि परिसर को अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया गया है। कंबोडियन माइन एक्शन सेंटर के विशेषज्ञों ने पत्रकारों को लड़ाई से प्रभावित इलाकों में ले जाकर उन स्थानों को दिखाया, जहां नुकसान और संघर्ष के अवशेष अभी भी दिखाई दे रहे हैं। इस बीच, थाईलैंड के ज्वाइंट इंफॉर्मेशन सेंटर ने हाल में आरोप लगाया है कि कंबोडियाई बलों ने प्रीह विहियर मंदिर के आसपास के इलाकों का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया था। 12 सितंबर को जेआईसी के निदेशक प्रापास सोर्नचाईदी ने आरोप लगाया कि थाईलैंड के पास ऐसे सबूत हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कंबोडियाई बलों ने मंदिर के इलाके को सैन्य गढ़ के रूप में इस्तेमाल किया। हालांकि कंबोडिया ने इस आरोप को खारिज किया है। प्रीह विहियर मंदिर को 2008 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इसे खमेर वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति और असाधारण सार्वभौमिक महत्व वाला स्थल माना गया है। मंदिर परिसर में कई धार्मिक संरचनाएं शामिल हैं, जो करीब 800 मीटर लंबे मार्ग के साथ सीढ़ियों और पक्के रास्तों से जुड़ी हैं। प्रीह विहियर को लेकर कंबोडिया और सियाम, जिसे अब थाईलैंड कहा जाता है, के बीच विवाद की जड़ें 20वीं सदी की शुरुआत में सीमा निर्धारण तक जाती हैं। यह कानूनी विवाद अंततः अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक पहुंचा, जब कंबोडिया ने 1959 में थाईलैंड के खिलाफ मामला दायर किया। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला दिया कि मंदिर उस क्षेत्र में स्थित है जिस पर कंबोडिया की संप्रभुता है। अदालत ने थाईलैंड को मंदिर और कंबोडियाई क्षेत्र में उसके आसपास से अपने सैन्य, पुलिस और अन्य बलों को हटाने का भी आदेश दिया। 2008 में मंदिर को विश्व धरोहर का दर्जा दिए जाने के बाद प्रीह विहियर को लेकर तनाव फिर बढ़ गया। इसके बाद सीमा क्षेत्र में कंबोडियाई और थाई बलों के बीच सशस्त्र झड़पें हुईं, जिनमें मंदिर के आसपास के इलाके भी शामिल थे। दक्षिण कोरिया के बुसान में जुलाई के अंत में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित सांस्कृतिक विरासत स्थलों की संवेदनशीलता को लेकर चिंता जताई गई। समिति ने संघर्ष के दौरान सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने और उसके विनाश को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।
लखनऊ: पत्नी को पिस्टल दिखाते समय युवक ने खुद को मारी गोली, इलाज के दौरान मौत

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। नशे में अवैध पिस्टल से खेल रहे 29 वर्षीय युवक की खुद को गोली मारने से मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अवैध हथियार को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। मामला सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र के महिपाल खेड़ा चौकी सरसवां का है। मृतक की पहचान यसार्थ शरण यादव (29) पुत्र शिव शरण यादव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, मंगलवार देर रात करीब 11 बजे थाना सुशांत गोल्फ सिटी पर सूचना मिली कि एक युवक ने अपने घर में खुद को गोली मार ली है। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मौके पर मौजूद परिजनों ने पुलिस को बताया कि यसार्थ शरण यादव कहीं से एक अवैध पिस्टल लेकर घर आया था। बताया जा रहा है कि वह शराब के नशे में था। घर आकर वह अपनी पत्नी को पिस्टल दिखा रहा था। पिस्टल दिखाने के दौरान उसकी मैगजीन नीचे गिर गई। परिजनों के मुताबिक, मैगजीन निकलने के बाद भी पिस्टल के चैंबर में एक कारतूस फंसा हुआ था, लेकिन युवक को लगा कि मैगजीन निकलने के बाद पिस्टल से फायर नहीं होगा। इसी गलतफहमी में वह पिस्टल को अपनी कनपटी पर सटाकर कहने लगा कि “मैगजीन निकल गई है, कुछ नहीं होगा” और उसने ट्रिगर दबा दिया। ट्रिगर दबाते ही चैंबर में फंसे कारतूस से गोली चल गई और सीधे उसकी कनपटी में जा लगी। गोली लगते ही युवक गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। परिजन आनन-फानन में उसे सिविल हॉस्पिटल, हजरतगंज लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने फॉरेंसिक टीम और फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाया। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। मौके से अवैध पिस्टल और एक खोखा कारतूस बरामद किया गया है, जिसे कब्जे में लेकर सुरक्षित रख लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मृतक के पास अवैध पिस्टल कहां से आई थी। इसके लिए उसके संपर्कों और हाल की गतिविधियों की जांच की जा रही है।
यूपी में पंचायत सहायकों को मिलेंगे 9000 रुपए महीना, वापस होंगे मुकदमे, हटाए गए सहायक होंगे बहाल: राजभर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को जानकारी दी कि राज्य में आंदोलन के दौरान पंचायत सहायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन के समय हटाए गए सहायकों की बहाली होगी। साथ ही, उनको हर महीने 9 हजार रुपए दिए जाएंगे। ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, “हमारे पंचायत सहायक 24 तारीख से धरने पर बैठे थे और सोमवार को मैं लखनऊ आया तो कुछ साथियों से बातचीत हुई, इन लोगों की जो मांग थी जायज मांग है। मैंने आज सुबह मुख्यमंत्री से बात की है। बातचीत के बाद सभी हमारे जितने भी पंचायत सहायक हैं, सभी को 9,000 रुपया महीना देने का ऐलान मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद हुआ है।” राजभर ने कहा कि हम लोग 8,000 रुपए पर अड़े थे। फिर हमने आश्वासन दिया था कि मुख्यमंत्री से बात करेंगे और अब बात करके आप लोगों को कोशिश करेंगे कि और हो जाए। अब 9 हजार रुपए महीने मिलेंगे। उन सहायकों की कुल संख्या 57 हजार से अधिक है। उन्होंने कहा कि हर पंचायत सहायक के परिवार को कैशलेस सुविधा मिलेगी। राजभर ने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनके सभी मुकदमे वापस किए जाएंगे और जिनको हटाया गया है, उनकी फिर से बहाली कर दी जाएगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों पंचायत सहायकों ने अपना मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश में जगह-जगह प्रदर्शन किए। 2022 में राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए लगभग पंचायत सहायकों की नियुक्ति की थी। इन्हें आधिकारिक तौर पर पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-सह-डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किया गया था। राज्य की इस पहल का उद्देश्य सेवा वितरण का विकेंद्रीकरण करना और ग्रामीण आबादी के लिए प्रशासनिक कामकाज को सुलभ बनाना था।
बीबीएल: उस्मान ख्वाजा ने ब्रिस्बेन हीट के साथ किया करार

ब्रिस्बेन। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने बिग बैश लीग (बीबीएल 16) के लिए ब्रिस्बेन हीट के साथ फिर से करार किया है। वह क्लब के साथ पांचवां सीजन खेलेंगे। 39 साल के ख्वाजा ने जनवरी में एशेज सीरीज के सिडनी टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। इससे पहले उन्होंने कन्फर्म किया था कि मार्च में क्वींसलैंड का शेफील्ड शील्ड कैंपेन खत्म होने पर उनका प्रथम श्रेणी करियर भी समाप्त हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने बीबीएल में खेलने का फैसला किया है। वह अगले सीजन में ब्रिस्बेन हीट के लिए सभी मैचों में उपलब्ध होंगे। उस्मान ख्वाजा टीम की कप्तानी करेंगे या नहीं, इस पर स्पष्टता नहीं है। नए हेड कोच जेम्स होप्स के अंडर, हीट ने अभी तक आने वाले सीजन के लिए अपने कप्तान की पुष्टि नहीं की है। ब्रिस्बेन हीट के कोच जेम्स होप्स ने बीबीएल 16 के लिए ख्वाजा की वापसी का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “हमारे ग्रुप में ख्वाजा जैसी क्लास, शांत और अनुभवी खिलाड़ी का होना हमें और बेहतर बनाएगा। उनका योगदान हमेशा कीमती होता है।” ख्वाजा ने कहा कि वह हीट के लिए पूरा कॉम्पिटिशन खेलने की उम्मीद को लेकर उत्सुक थे। उन्होंने कहा, ”15 दिसंबर को हमारे सीजन के पहले गेम के लिए गाबा में होना थोड़ा अजीब होगा, लेकिन बहुत रोमांचक भी होगा। पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम की प्रतिबद्धता के आधार पर कुछ गेम इधर-उधर होते थे। अब पूरे कॉम्पिटिशन की उम्मीद और भी बेहतर है।” ख्वाजा, 2015-16 में सिडनी थंडर और 2023-24 में हीट के साथ बीबीएल चैंपियनशिप टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने अपने टी20 करियर में 124 गेम खेले हैं, जिसमें तीन सेंचुरी और 18 हाफ सेंचुरी शामिल हैं। वह इस गर्मी में शुरू होने वाले बिग बैश से पहले हीट के प्री-बीबीएल ट्रेनिंग शेड्यूल से जुड़ेंगे।
केंद्र सरकार मछुआरों को ज्यादा कीमत वाले मछली संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए करेगी प्रोत्साहित

नई दिल्ली। सरकार गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने के लिए मछुआरों को ज्यादा कीमत वाली मछली पकड़ने के संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत, गुजरात के गांधीनगर में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने और एक्सेस पास व लेटर ऑफ ऑथराइजेशन रखने वालों के साथ बातचीत करने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस चर्चा से भारत के गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक अहम मंच मिलने की उम्मीद है। इसमें नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान, इंडस्ट्री से जुड़े लोग, सहकारी समितियां और मछुआरे एक साथ आकर खास मुद्दों पर चर्चा करेंगे। गुरुवार को गुजरात में होने वाला यह कार्यक्रम मछुआरों को जमीनी चुनौतियों को समझने और इस सेक्टर को और मजबूत करने के लिए संबंधित लोगों से सुझाव लेने का मंच देगा। बयान में कहा गया है कि कार्यशाला से निकलने वाली चर्चाएं और सुझाव जमीनी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान खोजने, टेक्नोलॉजी, कौशल, फाइनेंस और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने में मछुआरों की ज्यादा भागीदारी को आसान बनाने में मदद करेंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य लोग शामिल होंगे। यह कार्यशाला ऐसे समय में हो रही है जब भारत के ईईजेड (अनन्य आर्थिक क्षेत्र) में समुद्री मछली पकड़ने की क्षमता का अनुमान 58.6 लाख एमटी है। इससे लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका चलती है और यह खाद्य सुरक्षा, पोषण, रोजगार, आय सृजन और निर्यात से होने वाली कमाई में अहम योगदान देता है। भारत अभी दुनिया में मछली और एक्वाकल्चर का उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है और इसने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री भोजन का निर्यात किया। ज्यादातर मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 नॉटिकल मील के दायरे में होती हैं, जबकि गहरे पानी और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के इलाकों में ज्यादा कीमत वाली प्रजातियों, खासकर टूना और टूना जैसी मछलियों को पकड़ने के बड़े मौके हैं। मत्स्य पालन विभाग ने मछली पालन करने वाले किसानों के उत्पादक संगठनों और मछली पालन सहकारी समितियों को मजबूत करने पर खास ज़ोर दिया है, साथ ही कई पहलों के ज़रिए मछली पालन सेक्टर के डिजिटलाइजेशन पर भी ध्यान केंद्रित किया है। कार्यशाला में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की पूरी वैल्यू चेन को कवर करने वाले खास तकनीकी सत्र होंगे। इनमें संसाधन की क्षमता और जहाज़ों के आधुनिकीकरण से लेकर कौशल विकास, फाइनेंसिंग, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात बाज़ारों तक पहुंच जैसे विषय शामिल होंगे।
तमिलनाडु उपचुनाव: मदुरंतकम और धरपुरम सीटों के लिए नामांकन का आखिरी दिन

चेन्नई। तमिलनाडु में मदुरंतकम और धरपुरम विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया बुधवार को समाप्त हो रही है और प्रमुख दलों के उम्मीदवारों से समय सीमा से पहले अपने नामांकन पत्र जमा करने की उम्मीद है। इन दोनों सीटों पर सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्टी कजगम (टीवीके), डीएमके, एआईएडीएमके, नाम तमिलर काची (एनटीके) और वामपंथी दलों के बीच पंचकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। नामांकन प्रक्रिया 9 सितंबर को राजस्व मंडल अधिकारियों के कार्यालयों में शुरू हुई। टीवीके की उम्मीदवार पी सत्यबामा और एआईएडीएमके की उम्मीदवार भानुमति द्वारा बुधवार को धरपुरम में अपने नामांकन पत्र दाखिल करने की उम्मीद है। सीपीआई और एनटीके के उम्मीदवारों द्वारा भी अपना नामांकन दाखिल करने का कार्यक्रम निर्धारित है। मदुरंतकम में एआईएडीएमके और सीपीआई (एम) के उम्मीदवारों के चुनाव मैदान में उतरने की उम्मीद है। 12 से 14 सितंबर तक लगातार तीन छुट्टियों के बाद प्रक्रिया फिर से शुरू होने के बाद मंगलवार को नामांकन गतिविधियों में तेजी आई। चेंगलपट्टू जिले के मदुरंतकम में, दिन के दौरान 14 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए, जिससे निर्वाचन क्षेत्र में कुल नामांकनों की संख्या 18 हो गई। टीवीके की उम्मीदवार और पूर्व विधायक के. मरगथम कुमारवेल ने पार्टी के महासचिव और मंत्री एन आनंद के साथ अपना नामांकन पत्र जमा कराया। डीएमके उम्मीदवार परंथमन ने पूर्व मंत्री टीएम अंबरासन, पूर्व विधायक सुंदर और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। जनाकिरामन ने एनटीके उम्मीदवार के रूप में चुनाव में प्रवेश किया। तिरुप्पुर जिले के धरपुरम में भी नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया उतनी ही तेज रही, जहां मंगलवार को 15 उम्मीदवारों ने अपने कागजात जमा किए। नवीनतम नामांकनों के साथ, निर्वाचन क्षेत्र में प्राप्त नामांकनों की कुल संख्या 17 हो गई है। थलवैपट्टिनम की वकील और डीएमके उम्मीदवार सुकन्या ने नामांकन पत्रों के चार सेट दाखिल किए। पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद, वह पूर्व मंत्रियों एमपी समिनाथन और एन. कायलविझी तथा पार्टी के अन्य प्रतिनिधियों के साथ आरडीओ कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर फेलिक्स राज को नामांकन पत्रों का एक सेट सौंपा, जबकि उनके पति मणिवासगम ने उनकी ओर से दूसरा सेट जमा किया। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद चुनाव अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करेंगे। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की अंतिम सूची नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद घोषित की जाएगी।
लियोनेल मेसी अर्जेंटीना की टीम में, बेनिन के खिलाफ फेयरवेल मैच खेलेंगे

नई दिल्ली। लियोनेल मेसी अगले महीने ब्यूनस आयर्स के एस्टाडियो मोन्यूमेंटल में बेनिन के खिलाफ होने वाले एक मैत्री मैच में खेलेंगे। अर्जेंटीना के लिए आधिकारिक तौर पर मेसी का यह आखिरी मैच होगा। एफए अध्यक्ष क्लाउडियो टैपिया ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमने दुनिया के सबसे अच्छे खिलाड़ी, हमारी नेशनल टीम के आइकॉन, हमारे कप्तान लियोनेल आंद्रेस मेसी को अर्जेंटीना में एक अच्छी फेयरवेल के लिए बुलाया है।” अर्जेंटीना एफए ने कहा, “लियोनेल मेसी, रोड्रिगो डी पॉल और जियोवानी लो सेल्सो 6 अक्टूबर को होने वाले आखिरी फ्रेंडली मैच के लिए टीम में शामिल होंगे। घरेलू लीग से बुलाए गए खिलाड़ियों की सूची शुक्रवार को घोषित की जाएगी।” मेसी ने पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का ऐलान किया था। संन्यास के ऐलान के साथ ही उनके 20 साल के अर्जेंटीना करियर का अंत हो गया। अर्जेंटीना टीम के साथ मेसी ने एक वर्ल्ड कप, दो कोपा अमेरिका खिताब जीते और देश के लिए रिकॉर्ड 207 मैच खेले। मेसी ने 31 अगस्त को लिखा, “फाइनल के बाद से जो समय बीत चुका है, और इस पर बहुत सोचने के बाद, मैं सबको बताना चाहता हूं कि मैं अर्जेंटीना की नेशनल टीम से रिटायर हो रहा हूं। यह एक ऐसा फैसला था जिससे दुख हुआ – और अब भी बहुत दुख होता है – लेकिन मैं समझता हूं कि अब समय आ गया है। मैं कसम खाता हूं कि मैंने हमेशा अपना सब कुछ दिया – सिर्फ इन पिछले कुछ सालों में नहीं जब हमने सब कुछ जीता, बल्कि उससे पहले भी। मैंने हमेशा इस जर्सी के लिए मैदान पर सब दिया, ताकि आपको खुशी मिल सके और फुटबॉल के जरिए आपको अर्जेंटीना का होने पर गर्व महसूस हो।” 39 साल के आठ बार के बैलन डी’ओर विनर, जो अभी एमएलएस में इंटर मियामी के लिए खेलते हैं, अर्जेंटीना के ऑल-टाइम लीडिंग स्कोरर और सबसे ज्यादा कैप्ड प्लेयर हैं। मेसी ने 207 मैचों में 125 गोल किए हैं। मेसी ने 2005 में 18 साल की उम्र में अर्जेंटीना के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने एल्बिसेलेस्टे को ब्राजील 2014 में रनर-अप और कतर 2022 में टाइटल जिताने के लिए प्रेरित किया। इस साल की शुरुआत में अपने आखिरी फीफा वर्ल्ड कप में, मेसी ने आठ गोल और चार असिस्ट करके लियोनेल स्कालोनी की टीम को फाइनल तक पहुंचाया। फाइनल में अर्जेंटीना को स्पेन से 1-0 से हार का सामना करना पड़ा था। अर्जेंटीना की नेशनल टीम 21 सितंबर से 6 अक्टूबर तक तीन अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच खेलेगी। पहला मैच बुधवार, 30 सितंबर को कॉर्डोबा प्रोविंस के मारियो अल्बर्टो केम्पेस स्टेडियम में बोलीविया के खिलाफ होगा। बाकी दो मैच 3 अक्टूबर को रिवर प्लेट स्टेडियम में बुर्किना के खिलाफ और फासो में, 6 अक्टूबर को बेनिन के खिलाफ होगा। ब्यूनस आयर्स में रिवर प्लेट का एस्टाडियो मोन्यूमेंटल, जिसकी कैपेसिटी 85,000 है, बेनिन के खिलाफ मैच होस्ट करेगा। अर्जेंटीना के 2022 वर्ल्ड कप विनर्स और उनके परिवारों को भी मैच के लिए आमंत्रित किया गया है।
जापान: पीएम ताकाइची ने पार्टी नेतृत्व में किया बदलाव, अधिकांश पुराने चेहरों को रखा बरकरार

टोक्यो। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बुधवार को सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के शीर्ष नेतृत्व में पहला बदलाव किया। उन्होंने पार्टी के अधिकांश प्रमुख पदाधिकारियों को बरकरार रखा। यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब वर्ष के अंत तक सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दे हैं। क्योडो न्यूज एजेंसी ने बताया कि ताकाइची ने पूर्व प्रधानमंत्री तारो आसो को एलडीपी के उपाध्यक्ष पद पर बनाए रखा है। आसो पार्टी के भीतर बचे एकमात्र प्रमुख गुट का नेतृत्व करते हैं और पिछले वर्ष अक्टूबर में हुए पार्टी नेतृत्व चुनाव में ताकाइची की जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। आसो के रिश्तेदार शुनिची सुजुकी को भी महासचिव पद पर बरकरार रखा गया है। नई टीम की घोषणा के बाद टोक्यो में पत्रकारों से बातचीत में ताकाइची ने कहा कि पार्टी देश के सामने मौजूद कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि नए पदाधिकारियों की नियुक्ति का उद्देश्य ऐसी कार्यान्वयन व्यवस्था तैयार करना है, जिसके तहत सरकार और एलडीपी पूरी ताकत से काम कर सकें। काजियामा के पहले संभाले जा रहे डाइट मामलों के प्रमुख पद की जिम्मेदारी प्रतिनिधि सभा के सदस्य हिदेकी मुराई को दी गई है। मुराई इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के कार्यकाल में उप मुख्य कैबिनेट सचिव रह चुके हैं। संसद में सरकार की ओर से विपक्ष के साथ बातचीत की जिम्मेदारी संभालने वाले इस महत्वपूर्ण पद पर ऐसे नेता की नियुक्ति हुई है, जिसे अब तक कैबिनेट में काम करने का अनुभव नहीं है। हालांकि, मुराई ने महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर विपक्षी दलों के साथ बातचीत में अहम भूमिका निभाई है। पार्टी के चुनाव रणनीति प्रमुख यासुतोशी निशिमुरा और कार्यकारी कार्यवाहक महासचिव कोइची हागिउदा को भी उनके पदों पर बनाए रखा गया है। दोनों नेताओं का नाम वर्ष 2023 के अंत में सामने आए चर्चित राजनीतिक स्लश फंड घोटाले में आया था। इस घोटाले ने एलडीपी की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। एलडीपी के उच्च सदन नेतृत्व में किया गया बदलाव पार्टी के भीतर विवाद का कारण बन सकता है। सत्तारूढ़ गठबंधन को हाउस ऑफ काउंसिलर्स में बहुमत हासिल नहीं है। एलडीपी के शीर्ष नेतृत्व में यह फेरबदल गुरुवार को होने वाले ताकाइची मंत्रिमंडल के पुनर्गठन से ठीक पहले हुआ है। सत्तारूढ़ एलडीपी और जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) का गठबंधन अक्टूबर की शुरुआत में शुरू होने वाले संभावित असाधारण डाइट सत्र की तैयारी कर रहा है। इस सत्र में खाद्य उत्पादों पर उपभोग कर को मौजूदा 8 प्रतिशत से घटाकर दो वर्षों के लिए 1 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। यह कटौती अप्रैल से लागू किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा राजनीतिक सुधार विधेयक भी संसद के एजेंडे में रहने की संभावना है। इस विधेयक में डाइट की सीटों की संख्या कम करने का प्रस्ताव है। पिछले सत्र में इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने बहिष्कार किया था। ताकाइची ने 4 अक्टूबर 2025 को एलडीपी अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था और उसी महीने के अंत में वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। कैबिनेट में होने वाले फेरबदल में भी उनके कई प्रमुख मंत्रियों को बरकरार रखे जाने की संभावना है। इनमें रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के नाम शामिल हैं।
तमिलनाडु में कामराज ब्रेकफास्ट योजना का विस्तार, अब कक्षा 6 से 8 के छात्रों को भी मिलेगा नाश्ता

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार छात्रों के लिए चलाई जा रही पेरुन्थलैवर कामराज ब्रेकफास्ट योजना का विस्तार करने जा रही है। अब कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इसका शुभारंभ 22 सितंबर को होगा। पहले यह कार्यक्रम गुरुवार को होना था, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया था। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय लंदन की अपनी आधिकारिक यात्रा से लौटने के बाद इस विस्तारित योजना का उद्घाटन करेंगे। वे लंदन में तमिलनाडु में नए निवेश को आकर्षित करने के लिए बैठकें कर रहे हैं। शुरुआत में यह कार्यक्रम गुरुवार को समाज सुधारक पेरियार की जयंती के अवसर पर लॉन्च किया जाना था। हालांकि, मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर होने के कारण सरकार ने उद्घाटन को टाल दिया। समाज कल्याण सचिव पल्लवी बलदेव ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर संशोधित लॉन्च तिथि के बारे में सूचित किया है और कार्यक्रम को लागू करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। यह योजना पूरे तमिलनाडु में लागू की जाएगी, सिवाय चेंगलपट्टू और तिरुप्पुर जिलों के, जहां अभी विधानसभा उपचुनाव चल रहे हैं। इन दो जिलों को बाहर रखने की वजह चुनाव के लिए लागू आदर्श आचार संहिता बताई जा रही है। टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री की ब्रेकफास्ट योजना का नाम बदलकर पेरुन्थलैवर कामराज ब्रेकफास्ट योजना कर दिया गया था। यह नाम पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने तमिलनाडु में स्कूली शिक्षा के विस्तार और छात्रों के लिए कल्याणकारी उपायों को शुरू करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। पहले यह ब्रेकफास्ट कार्यक्रम केवल सरकारी स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए था, अब इसे कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए बढ़ाया जा रहा है। इस विस्तार से बड़ी संख्या में छात्रों को फायदा होने की उम्मीद है, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को। सरकार का मानना है कि कक्षाएं शुरू होने से पहले छात्रों को पौष्टिक नाश्ता देने से उपस्थिति में सुधार होगा, कक्षा में भूख कम होगी और बच्चों को पढ़ाई पर बेहतर ध्यान देने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को समाज कल्याण विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, स्थानीय निकायों और स्कूल प्रशासन के बीच उचित समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। जिला कलेक्टरों से लाभार्थियों की पहचान, खाद्य सामग्री की आपूर्ति, रसोई की सुविधाओं, स्वच्छता मानकों और नाश्ते के समय पर वितरण सहित तैयारियों की निगरानी करने की उम्मीद है। 22 सितंबर से पहले स्कूलों को विस्तारित योजना के उद्घाटन और कार्यान्वयन के बारे में विस्तृत निर्देश भेजे जाएंगे।