सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत पर राहुल गांधी बोले-‘युवाओं को जेल भेजना कायरता’

नई दिल्ली। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को जेल भेजना कायरता का काम है। यह बयान तब आया जब सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “शांतिपूर्ण विरोध में जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता का काम है। छात्र, युवा, पत्रकार, इंडिया ब्लॉक, अलग-अलग बैनर के एक ही कारण है कि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेंगे।” तीन सीजेपी सदस्यों को जंतर-मंतर में अतिक्रमण के लिए निवारक गिरफ्तारी के तहत पकड़ा गया था, जिसे अब निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया है। उन पर अतिक्रमण, बॉन्ड उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को बुधवार सुबह नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पर एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर के विरोध से जुड़े मामले में 50,000 रुपए का बॉन्ड भरने और इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग के किसी भी मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बार सौरव दास और आशुतोष रांका पर अतिक्रमण और बॉन्ड शर्तों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। उन्हें आदतन अपराधी के तौर पर देखा जा रहा है। तीनों सीजेपी नेताओं को मंगलवार सुबह पुलिस बैरिकेड्स पार कर जंतर-मंतर में प्रवेश करने के लिए हिरासत में लिया गया था, जिसे निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किया जा चुका है। वे चुनाव आयोग के खिलाफ मतदाता सूची की एसआईआर में अनियमितताओं को लेकर विरोध करने जा रहे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते हुए पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद तीनों को हिरासत में ले लिया गया। 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर को ‘निर्धारित’ विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह फैसला गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था। दिल्ली में विरोध के लिए तीन नई जगहें (रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड) तय की गई हैं।

दिसंबर में पीएम मोदी का कनाडा दौरा द्विपक्षीय संबंधों की तरफ बढ़ा अगला ‘तार्किक कदम’ होगा: उच्चायुक्त पटनायक

दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा यात्रा पर सभी की निगाहें टिकी हैं। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने कहा कि भारतीय समुदाय भी पीएम मोदी के दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों को मजबूती देने की दिशा में अगला तार्किक कदम होगा। आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में पटनायक ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया है। राजनीतिक संपर्क बढ़ने के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कृषि, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया गया है। पढ़िए पूरा साक्षात्कार: आईएएनएस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कनाडा दौरा दिसंबर में प्रस्तावित है। ये भारत-कनाडा संबंधों की दृष्टि से कितना अहम है? दिनेश के पटनायक: पिछले वर्ष से, हम अपने संबंधों को उच्च स्तर पर बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। यह प्रक्रिया तब शुरू हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के कनानास्किस में जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां उन्हें प्रधान मंत्री मार्क कार्नी द्वारा आमंत्रित किया गया था। दोनों नेताओं ने फैसला किया कि दोनों देशों के उच्चायुक्तों को अपने-अपने पद पर लौट जाना चाहिए। दोनों उच्चायुक्तों ने पिछले साल सितंबर में अपना कार्यभार फिर से शुरू किया। तब से, हमने एक वर्ष पूरा कर लिया है, और बहुत कुछ हुआ है। प्रधानमंत्री कार्नी ने इस वर्ष फरवरी-मार्च में भारत का दौरा किया, और दोनों विदेश मंत्री पिछले वर्ष में 12 से अधिक बार मिल चुके हैं। हमने कई बार रक्षा मंत्रियों, व्यापार मंत्रियों, ऊर्जा मंत्री, प्राकृतिक संसाधन मंत्री, कनाडा, शिक्षा प्रतिनिधिमंडलों और हाल ही में कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भारत यात्रा देखी है। इन सभी चीजों को मिलाकर, ये घटनाक्रम हमें एक ऐसे चरण पर ले आए हैं जहां प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा अगला तार्किक कदम है। प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था, इसलिए काफी समय हो गया है। हम व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत की प्रक्रिया में हैं और चौथे दौर की बातचीत समाप्त हो गई है। बातचीत तेजी से आगे बढ़ी है। जब पिछले साल नवंबर में दोनों प्रधानमंत्रियों की जोहान्सबर्ग में मुलाकात हुई, तो उन्होंने एक साल के भीतर वार्ता समाप्त करने पर सहमति जताई थी। मुझे विश्वास है कि हम नवंबर तक इन्हें पूरा कर लेंगे। हमें उम्मीद है कि जब प्रधानमंत्री मोदी कनाडा जाएंगे तो हम सीईपीए पर हस्ताक्षर करने की स्थिति में होंगे। संक्षेप में कहूं, भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने के लिए जरूरी प्रमुख क्षेत्रों में अब काम आगे बढ़ रहा है। इनमें सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, निवेश, व्यापार, रक्षा संवाद, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, कृषि एवं खाद्य क्षेत्र, लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं। मैं इसके लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और सबसे बढ़कर दोनों प्रधानमंत्रियों का आभार जताना चाहता हूं जिनकी अगुवाई में ये संभव हो पाया है। आईएएनएस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और नेतृत्व ने समय के साथ भारत-कनाडा संबंधों को किस तरह आकार दिया है? दिनेश के पटनायक: बिल्कुल, मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन और नेतृत्व के बिना, कुछ भी नहीं हो पाता। मैं इसका पूरा श्रेय दोनों प्रधानमंत्रियों को दूंगा। प्रधानमंत्री कार्नी ने कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जबकि मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया। जब दोनों देशों के उच्चायुक्तों ने अपने-अपने पद संभाले, तब उन्हें सरकारों के शीर्ष स्तर से स्पष्ट निर्देश मिले थे कि द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत बनाना है और उन्हें पहले से बेहतर स्तर पर ले जाना है। मेरा विचार है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के सक्रिय समर्थन और मार्गदर्शन के बिना यह प्रगति संभव नहीं होती। आईएएनएस: कनाडा में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा के दौरान उनके स्वागत के लिए यह समुदाय कैसी तैयारी कर रहा है? दिनेश के पटनायक: प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था। ऐसे में करीब 11 साल बाद उनकी प्रस्तावित यात्रा को लेकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय में काफी उत्साह है। कनाडा की 2021 की जनगणना के अनुसार, यहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी लगभग 30 लाख है। भारतीय समुदाय के अलग-अलग वर्गों के लोगों से लगातार यह पूछने के लिए संदेश और अनुरोध मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी वहां कब आएंगे और वो उनसे मिलने की इच्छा रखते हैं। इस समुदाय में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख सहित विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमियों के लोग हैं। इसके अलावा छात्र, शोधकर्ता, शिक्षाविद, कारोबारी और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग भी प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जता रहे हैं। लगभग 30 लाख भारतीय मूल के लोगों वाले इस समुदाय के हर व्यक्ति से प्रधानमंत्री की मुलाकात संभव नहीं होगी, लेकिन यह प्रयास किया जाएगा कि उनकी यात्रा से अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर मिले। आईएएनएस: भारत और कनाडा अंतरराष्ट्रीय अपराध, आतंकवाद और प्रत्यर्पण के मामलों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आतंकवाद से निपटने में यह कितना अहम है? दिनेश के पटनायक: हम इन मुद्दों से पार पाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जब मैं पिछले साल 18 सितंबर को भारत आया था, तो कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी उसी हफ्ते भारत के दौरे पर थीं ताकि अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ बातचीत कर सकें। इसी तरह, एनएसए अजीत डोभाल ने फरवरी में कनाडा का दौरा किया था। तब से दोनों देश सीमापार अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए काम कर रहे हैं। पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ा है। दोनों देशों की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों पक्षों में यह साझा समझ विकसित हुई है कि कनाडा में सामने आने वाली कुछ सुरक्षा चुनौतियां भारत के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं और इसी तरह इनका असर कनाडा पर भी पड़ता है।

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 14वें आरोपी सूर्यवंशी के खिलाफ दाखिल किया पूरक आरोपपत्र

नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। यह पूरक आरोपपत्र मामले में आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी के खिलाफ दाखिल किया गया है। कोर्ट 22 अक्टूबर को इस पर सुनवाई करेगा। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक पेश हुए। पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने उसे रिकॉर्ड पर लिया। साथ ही, कोर्ट ने आरोपी को इस आरोपपत्र की कॉपी देने का आदेश दिया। शेषराव बजरंग सूर्यवंशी को 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, जो नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में 14वां आरोपी है। बाकी 13 आरोपियों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। कोर्ट ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल उस आरोपपत्र पर भी संज्ञान लिया था। अन्य 13 आरोपियों में मनीषा मंधारे, मनीषा संजय हवलदार, मनीषा वाघमारे, प्रहलाद कुलकर्णी, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनोज शिरुरे, तेजस हर्षद शाह, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल शामिल हैं। शेषराव बजरंग सूर्यवंशी महाराष्ट्र के पुणे का रहने वाला बताया जाता है। आरोप है कि उसने कथित तौर पर परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को नीट-यूजी का पेपर उपलब्ध कराया था। सीबीआई के अनुसार, आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी पेपर लीक मामले में आरोपी शुभम खैरनार का सहयोगी था। शुभम खैरनार एक करियर काउंसलर है, जिसे 12 मई को नासिक से गिरफ्तार किया गया था। उस पर सोशल मीडिया के जरिए प्रश्नपत्र फैलाने का आरोप है। आरोप है कि 3 मई की परीक्षा से पहले एनटीए के विषय विशेषज्ञों, बिचौलियों, कोचिंग संचालकों और अन्य लोगों के नेटवर्क के जरिए गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी पीवी कुलकर्णी ने कथित तौर पर रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्न और उनके उत्तर विकल्प छोटे-छोटे कागजों पर लिख लिए और उन्हें छिपाकर गोपनीय सेक्शन से बाहर ले गए। सीबीआई ने कहा कि एनटीए के गोपनीय विभाग में प्रवेश या बाहर निकलते समय विशेषज्ञों की जांच या तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी। एजेंसी का आरोप है कि एक अन्य आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने एनसीईआरटी की किताबों की अपनी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए होटल लौटने के बाद प्रश्नों को दोबारा तैयार किया। वहीं, मनीषा संजय हवालदार ने कथित तौर पर अपने ठहरने के स्थान पर लौटने के बाद भौतिक विज्ञान के प्रश्नों को संक्षिप्त रूप में नोट कर लिया था। बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में विशेष रूप से गठित इस फास्ट ट्रैक अदालत को सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और इससे जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाया गया है।

डीआरडीओ का प्लेटफार्म, हथियारों के परीक्षण से जुड़ी अहम सूचनाओं को मिलेगी सुरक्षा

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सुरक्षित संचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संगठन ने क्वांटम की (कुंजी) डिस्ट्रिब्यूशन (क्यूकेडी) प्लेटफार्म को सफलतापूर्वक स्थापित कर उसका परीक्षण किया है। इस तकनीक से तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण के दौरान मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारियों और आंकड़ों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। दरअसल, क्वांटम कुंजी वितरण ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग संचार के दौरान सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से संदेशों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक गोपनीय कुंजियों का आदान-प्रदान किया जाता है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति संचार के दौरान इन कुंजियों की जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है, तो उसकी गतिविधि का पता लगाया जा सकता है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (पीएक्सई) परीक्षण क्षेत्र के लाइव संचार नेटवर्क में किया गया। इस परीक्षण ने रियल टाइम में महत्वपूर्ण सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक की उपयोगिता प्रदर्शित की है। तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण तथा उनके मूल्यांकन के दौरान विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारियां और आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। इनमें परीक्षण से जुड़े अवलोकन और उपकरणों से मिलने वाले तकनीकी आंकड़े भी शामिल होते हैं। इन सूचनाओं की सुरक्षा परीक्षण प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। डीआरडीओ का यह सफल परीक्षण ऐसे आंकड़ों व सूचनाओं को सुरक्षित रखने में इस तकनीक की भूमिका को दर्शाता है। डीआरडीओ के अनुसार, प्लेटफार्म को इस तरह विकसित किया गया है कि यह महत्वपूर्ण सैन्य संचार को सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही साथ इस संचार में किसी की ओर से सेंध लगाने या सूचनाएं चुराने की कोशिश का पता लगाने में भी सक्षम है। इससे हथियारों के परीक्षण से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है। डीआरडीओ ने निजी क्षेत्र के सहयोग से इसे विकसित किया है। क्वांटम कुंजी वितरण प्लेटफार्म को डीआरडीओ के सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और साइबर सुरक्षा समूह के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसके विकास में तैकबिट लैब्स ने उत्पादन भागीदार के रूप में सहयोग किया है। यह क्वांटम आधारित सुरक्षित संचार तकनीक के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह तकनीक विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है, जहां हथियारों के परीक्षण और मूल्यांकन के दौरान जुटाई गई संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।