स्टारलिंक लाइसेंस विवाद: मस्क के सवाल पर कमल हासन ने दिया करारा जवाब, भारत अपना भविष्य खुद तय करेगा

नई दिल्ली। अमेरिकी अरबपति और स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क के तंज भरे सवाल पर अभिनेता कमल हासन ने तीखा जवाब दिया है। कमल हासन ने मस्क को जवाब देते हुए कहा कि किसी भी अरबपति को किसी देश की पॉलिसी तय नहीं करनी चाहिए, चाहे वह भारत हो या अमेरिका। दरअसल, इससे पहले एलन मस्क ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर सवाल उठाया था, “स्टारलिंक को 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और इसने भारत सरकार के हर नियम और जरूरत को पूरा करने में पांच साल बिताए हैं, तो फिर भी लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?” इस पर कमल हासन ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “मिस्टर मस्क, किसी भी अरबपति को किसी देश की पॉलिसी तय नहीं करनी चाहिए। भारत को सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भारतीय और ग्लोबल प्रोवाइडर्स से कॉम्पिटिशन का स्वागत करना चाहिए, जो भी दूर-दराज के इलाकों में रहने वालों के लिए सबसे प्रैक्टिकल और किफायती ‘लास्ट-माइल सॉल्यूशन’ दे सके। कम प्रति-व्यक्ति आय वाले देशों में सैटेलाइट इंटरनेट किफायती होना चाहिए। ज्यादा सब्सक्रिप्शन फीस और इक्विपमेंट की लागत से यह आम घरों की पहुंच से दूर हो जाएगा। कनेक्टिविटी से डिजिटल अंतर कम होना चाहिए, न कि नया अंतर पैदा होना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा, “भारत जानता है कि हमारे नेटवर्क और स्पेक्ट्रम स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर हैं, न कि सिर्फ कमर्शियल एसेट्स। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” उन्होंने पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंड पर भी निशाना साधा। हासन ने लिखा, “हर देश अपने हितों के आधार पर फैसले लेता है। पश्चिमी देश अपने यहां प्रोटेक्शनिज्म अपनाते हुए फ्री मार्केट की वकालत नहीं कर सकते। अमेरिका ने अपने घरेलू उद्योग को बचाने के लिए चीनी ईवी पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया, ठीक वैसे ही जैसे भारत अपने घरेलू मैन्युफैक्चरर्स की सुरक्षा के लिए कदम उठाता है। भारत और अमेरिका दोनों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण हुआवेई पर रोक लगाई है।” भारतनेट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश के तौर पर भारतीय अपनी खूबियों और कमियों पर आपस में बहस करेंगे। उन्होंने सीएजी की 2026 की ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि 39,888 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद सर्विस के लिए तैयार ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 33.2 प्रतिशत ही क्यों चालू थीं। साथ ही उन्होंने भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की सराहना की जिसने डेटा को दुनिया में सबसे सस्ता बनाया। अंत में उन्होंने कहा, “भारत एक लोकतंत्र है, कोई कॉलोनी नहीं। हम दुनिया का स्वागत करते हैं, लेकिन हम भारतीय ही अपना भविष्य तय करेंगे न कि पश्चिमी देशों के निहित स्वार्थ, उनके दोहरे मापदंड या कोई अरबपति, चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी।
स्टारलिंक लाइसेंस विवाद गरमाया, मस्क का अंबानी पर तीखा कटाक्ष

नई दिल्ली। स्पेसएक्स और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने शुक्रवार को स्टारलिंक के भारत में प्रवेश को लेकर अरबपति मुकेश अंबानी पर एक बार फिर तंज कसा। उन्होंने उन्हें ‘प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी’ कहा और उन पर एकाधिकार बनाए रखने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या वह सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को देश में प्रतिस्पर्धा करने देंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मस्क ने अंबानी को भारत का ‘असली बॉस’ बताया और उनके प्रभाव को न पहचानने के लिए माफी मांगी। मस्क ने पोस्ट किया, “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी, कृपया यह न समझ पाने के लिए मेरी विनम्र क्षमा स्वीकार करें कि आप ही भारत के असली बॉस हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “स्वाभाविक रूप से, आप भारत की महान जनता का एकाधिकारवादी शोषण बनाए रखना चाहेंगे, लेकिन क्या फिर भी आप स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?” उन्होंने कहा कि “भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जैसे सभी देशों में होते हैं, जहां इंटरनेट की पहुंच नहीं है, जो बच्चों को शिक्षा के अवसर से और छोटे व्यवसायों को अपने सामान को वैश्विक बाजार में बेचने के अवसर से वंचित करता है। स्टारलिंक उनके जीवन को बेहतर बनाएगा।” मस्क ने कहा, “स्टारलिंक ने दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जीवन बचाने के लिए आवश्यक साबित हुआ है, जब अन्य सभी संचार प्रणालियां विफल हो गई हैं, इसलिए आप पूरे भारत में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की जान बचाने में भी मदद करेंगे।” एलन मस्क ने इससे पहले सवाल उठाया था कि स्टारलिंक को भारत में वाणिज्यिक संचालन शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी अभी तक क्यों नहीं मिली है और दावा किया था कि सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी ने देश के कानूनों और नियमों का पालन करने में पांच साल बिताए हैं। मस्क ने पहले बिना नाम लिए कुछ ‘अरबपतियों’ पर भारत में स्टारलिंक के प्रवेश को रोकने का आरोप लगाया था, और कहा था कि ताकतवर व्यावसायिक हित देश के टेलीकॉम बाजार में अपनी स्थिति को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया था। इसके बाद सरकार ने सैटकॉम सेवाओं को रोके जाने के उनके आरोपों को लेकर अमेरिकी उद्योगपति को फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानदंडों का अनुपालन साबित करना देश में हर सैटकॉम लाइसेंसधारी के लिए अनिवार्य है। सरकार के जवाब के कुछ ही घंटों के भीतर, मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट में पूछा कि क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं? यह टिप्पणी एक पोस्ट के जवाब में आई थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि स्टारलिंक भारत के उन हिस्सों में इंटरनेट पहुंच का विस्तार करने में मदद कर सकता है, जहां पारंपरिक टेलीकॉम बुनियादी ढांचे का निर्माण मुश्किल या महंगा है। स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं प्रदान करने के लिए लाइसेंस हासिल कर लिया है, लेकिन कंपनी को अपनी सेवा को व्यावसायिक रूप से शुरू करने से पहले अभी भी सुरक्षा संबंधी मंजूरी और अन्य अनुमोदन की आवश्यकता है। सरकार ने इस सुझाव को खारिज कर दिया है कि स्टारलिंक को भेदभावपूर्ण नियामक व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है और ऐसे दावों को निराधार और भ्रामक बताया।
एसआईआर नोटिस के बाद 17.03 लाख वोटरों के दस्तावेज वेरिफाई किए गए: दिल्ली सीईओ

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अशोक कुमार ने कहा कि शुक्रवार तक, एसआईआर नोटिस पाने वाले मतदाताओं से मिले दस्तावेजों के आधार पर ‘नो-मैपिंग’ और ‘लॉजिकल विसंगति’ के 17,03,515 मामलों की पुष्टि की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एसआईआर के शेड्यूल के अनुसार सभी नोटिस/दावे और आपत्तियों का निपटारा 30 नवंबर तक कर दिया जाएगा। शुक्रवार को जारी एक बयान में, दिल्ली के सीईओ ने भरोसा दिलाया कि जो भी योग्य वोटर जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ फॉर्म-6 जमा करेंगे, उन्हें एनसीटी दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा। सीईओ ऑफिस के बयान में कहा गया है कि जिन योग्य वोटरों ने कैंप में सर्विस का फायदा नहीं उठाया है, वे 30 अक्टूबर तक फॉर्म-6 समेत दूसरे फॉर्म ईआरओ, एईआरओ, बीएलओ और तय जगहों (पोलिंग स्टेशन) पर जाकर जमा कर सकते हैं। बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को वोटरों की सुविधा के लिए दिल्ली के सभी पोलिंग स्टेशन पर स्पेशल कैंप लगाए गए थे। हाल ही में तोड़ी गई कॉलोनियों, जैसे वजीरपुर विधानसभा क्षेत्र के जेलरवाला बाग, के वोटरों के लिए भी स्पेशल कैंप लगाए गए थे। साथ ही, मंगोलपुरी के एस-ब्लॉक, ए-ब्लॉक, यू-ब्लॉक और एन-ब्लॉक में भी स्पेशल कैंप लगाए गए थे। बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को इंडियन एडल्ट एजुकेशन, आईपी एस्टेट में ट्रांसजेंडर वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए भी एक स्पेशल कैंप लगाया गया था। बयान में कहा गया, “दिल्ली में चल रहे एसआईआर के दौरान छूटे हुए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए ऐसे ही कैंप लगते रहेंगे। जिन योग्य वोटरों के नाम 31.08.2026 को पब्लिश हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं, उनसे गुजारिश है कि वे वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए इन कैंप में जाएं।” बुधवार और गुरुवार को, सीईओ ने राजधानी के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में स्पेशल कैंप लगाए। यह दो दिन का एक प्रोग्राम था जिसमें बीएलओ ने छात्रों को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए जरूरी फॉर्म भरने में मदद की, एसआईआर से जुड़े सवालों के जवाब दिए और भरे हुए एप्लीकेशन जमा किए। चुनाव आयोग के बयान के मुताबिक, बीएलओ घर-घर जाकर उन वोटरों की पहचान भी करेंगे जो ड्राफ़्ट लिस्ट में छूट गए हैं, ताकि योग्य पाए जाने पर फॉर्म 6 के ज़रिए उनका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जा सके। चुनाव आयोग के 1 अक्टूबर को जारी निर्देशों के अनुसार, वोटर लिस्ट में सभी “छूटे हुए योग्य वोटरों” को शामिल करने के लिए एक खास अभियान चलाया जा रहा है। चुनाव आयोग ने उन वोटरों से भी अपील की है जिनके नाम बीएलओ के घर-घर जाकर किए गए सर्वे के दौरान अनुपस्थित, दूसरी जगह चले गए, मृत और डुप्लिकेट यानी एएसडीडी लिस्ट में शामिल हो सकते हैं, कि अगर वे चाहें तो वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने के लिए फॉर्म-6 भरें।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ग्रामीणों को वितरित किए रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र

भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को हरदा जिले में आयोजित कार्यक्रम में स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के हस्तांतरण विलेख के निष्पादन योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 के हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र वितरित किए। मुख्यमंत्री ने ग्राम गोंदागांव के ग्रामीण श्री निर्भयदास एवं श्री भैयालाल को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किये। इस दौरान अन्य आठ हितग्राहियों को भी रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए। सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र ग्रामीणजन को उसकी भूमि का अधिकार मिले। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को न केवल कानूनी सुरक्षा मिल रही है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहे हैं। रजिस्ट्री मिलने से उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ेगी और वे शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे। रजिस्ट्री प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी भूमि का विधिवत मालिकाना हक मिलने से उन्हें अब बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी तथा अपनी भूमि पर वे निर्भय होकर निर्माण एवं अन्य कार्य कर सकेंगे। उन्होंने सरकार की इस योजना की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टर को निर्देश दिए कि भू-स्वामित्व के अंतर्गत रजिस्ट्री के कार्य में गति बढ़ाएं एवं पटवारियों को बताए कि शासकीय कार्य निष्पादन में किसी के भी विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी, जिसमें वह राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में निष्पादन अधिकारी घोषित है। रजिस्ट्री का निष्पादन अधिकार अभिलेख में उल्लेखित जानकारी के आधार पर ही किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति के स्वामित्व का निर्धारण अथवा नई जानकारी का सृजन नहीं किया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय सुदाम खाड़े तथा कमिश्नर नर्मदापुरम श्रीकांत बनोठ, आईजी चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक श्री शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, हितग्राही और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
नावी पिल्लै का नोबेल सम्मान दक्षिण अफ्रीका और कानून के शासन के मूल्यों की जीत : अनिल सूकलाल

नई दिल्ली। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने शुक्रवार को भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनेथम “नावी” पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बधाई दी और उनकी उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मानवाधिकार, न्याय और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में नावी पिल्लै के लंबे और उल्लेखनीय योगदान की वैश्विक मान्यता है। पिल्लै यह सम्मान पाने वाली पांचवीं दक्षिण अफ्रीकी और नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली पहली दक्षिण अफ्रीकी महिला हैं। सूकलाल ने कहा कि नावी पिल्लै अब उन प्रतिष्ठित दक्षिण अफ्रीकियों की सूची में शामिल हो गई हैं, जिसमें नेल्सन मंडेला, आर्कबिशप डेसमंड टूटू, अल्बर्ट लुथुली और एफ.डब्ल्यू. डी. क्लार्क जैसे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शामिल हैं। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा, “यह दक्षिण अफ्रीकी समाज, अफ्रीका और कानून के शासन के मूल्यों के बारे में एक बहुत शक्तिशाली संदेश देता है। यह पुरस्कार उन असाधारण लोगों को सम्मानित करता है जिन्होंने अपना जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया है। पिल्लै तमिल समुदाय से आती हैं। उनके माता-पिता और परदादा-परदादी 1890 के दशक में तमिलनाडु से अनुबंधित मजदूरों के रूप में दक्षिण अफ्रीका की चीनी बागानों में काम करने गए थे।” उन्होंने कहा, “मुझे विशेष गर्व है, क्योंकि वह उसी इलाके से आती हैं, जहां मेरा जन्म और पालन-पोषण हुआ। उन्होंने उसी हाई स्कूल में पढ़ाई की, जहां मैंने शिक्षा प्राप्त की थी। आज हमारे समुदाय में जश्न का माहौल है, क्योंकि वह बेहद साधारण और संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि से उठकर यहां तक पहुंची हैं। उनकी शिक्षा के लिए स्थानीय समुदाय ने मिलकर आर्थिक मदद की थी और आज वह सार्वजनिक जीवन के सर्वोच्च पदों तक पहुंच चुकी हैं।” डर्बन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मी 85 वर्षीय नावी पिल्लै, दक्षिण अफ्रीका की हाईकोर्ट की पहली अश्वेत महिला न्यायाधीश बनी थीं। उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है। सूकलाल ने बताया कि रंगभेद के दौर में पिल्लै ने स्वतंत्रता के संघर्ष के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। वह क्वाजुलु-नटाल में वकालत का अपना दफ्तर खोलने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं। उन्होंने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस और अन्य मुक्ति आंदोलनों से जुड़े रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का कानूनी बचाव भी किया। उनके पति को भी सक्रियता के कारण रंगभेदी शासन ने हिरासत में रखा था। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक दक्षिण अफ्रीका के गठन के बाद पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वह रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में वरिष्ठ न्यायिक पद पर रहीं, हेग में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया और बाद में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त भी बनीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता के कल्याण और बेहतर दुनिया के निर्माण के लिए समर्पित किया। उच्चायुक्त ने कहा कि यह पुरस्कार ऐसे समय में मिला है, जब दुनिया को मानवाधिकारों, बुनियादी स्वतंत्रताओं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा की सबसे अधिक जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान नावी पिल्लै की बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकारों के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है और दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। सूकलाल ने कहा, “यह दक्षिण अफ्रीका के लिए गर्व की बात है कि हमारे पास अब पांच नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं। यह अपेक्षाकृत युवा लोकतंत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह केवल दक्षिण अफ्रीका या अफ्रीका की कहानी नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि असाधारण नेतृत्व वैश्विक दक्षिण और अफ्रीका से भी उभर सकता है।” नावी पिल्लै ने 1967 में अपना लॉ फर्म शुरू किया था और रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का कानूनी बचाव किया। 1973 में उन्होंने एक महत्वपूर्ण मुकदमा जीतकर नेल्सन मंडेला सहित रॉबेन द्वीप में बंद राजनीतिक कैदियों को वकीलों तक पहुंच और कुछ बुनियादी अधिकार दिलाने में सफलता हासिल की। 1995 में रंगभेद शासन के अंत के बाद उन्हें हाई कोर्ट में नियुक्त किया गया। 1999 में वह इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल फॉर रवांडा की न्यायाधीश और अध्यक्ष बनीं। वहां उन्होंने हुतू नेता जीन-पॉल अकायेसू के मुकदमे में यह स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि बलात्कार और यौन हिंसा को भी युद्ध अपराध माना जाएगा। अंत में सूकलाल ने कहा, “मेरा मानना है कि नोबेल समिति ने जज पिल्लै को इस समय सम्मानित करके दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की है कि विभाजनों, संघर्षों और निर्दोष लोगों की मौतों को रोकने के लिए सामूहिक कार्रवाई की जरूरत है। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता शांति है।
नगांव सीट पर भाजपा की जीत राहुल गांधी की राजनीति के लिए करारी हार: हिमंता बिस्वा सरमा

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को नगांव सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की जीत को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के लिए करारी हार बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर ऐसी राजनीति करने का आरोप लगाया जो देश और उसकी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करती है। गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि मतदाताओं ने कांग्रेस नेता को यह संदेश दिया है कि देश किसी भी एक नेता से ऊपर है। यह राहुल गांधी की करारी हार है। यह उनकी राजनीति की करारी हार है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी को ऐसा ड्रामा या राजनीति नहीं करनी चाहिए जिससे देश, उसकी संस्कृति और देश कमजोर हो। राहुल गांधी पर भारत की तरक्की के विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असम की जनता ने अपने जनादेश के जरिए एक राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत आपसे ऊपर है, देश आपसे ऊपर है। आप देश से ऊपर नहीं हैं। राहुल गांधी के लिए इस चुनाव का यही संदेश है। भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के देबाशीष शर्मा ने 1,40,257 वोटों के अंतर से नागांव उपचुनाव जीता। शर्मा को 7,11,912 वोट मिले, जबकि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के उम्मीदवार बदरुद्दीन अजमल 5,71,637 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार सिबामनी बोरा 1,29,136 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। इसी के साथ भाजपा की उस सीट पर वापसी हुई है, जिसे कांग्रेस ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में जीता था। सीएम सरमा ने कहा कि भाजपा को लगभग 50 प्रतिशत वोट मिले हैं और दावा किया कि पार्टी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़कर समर्थन हासिल किया है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ वर्ग भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नतीजों से असम में बीजेपी के विकास एजेंडे के लिए जनता का समर्थन झलकता है। नगांव का नतीजा भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि उसने वह सीट फिर से हासिल कर ली है जिस पर लगातार दो आम चुनावों में कांग्रेस का कब्जा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जीत से साबित होता है कि मतदाताओं ने विपक्ष के राजनीतिक नजरिए को नकार दिया है।
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन ठगी से रहें सावधान, राजस्थान पुलिस ने नकली सेल ऑफर और फर्जी लिंक से बचने की दी चेतावनी

जयपुर। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों पर अमल करते हुए, राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (आर4सी) ने फ्लिपकार्ट की ‘बिग बिलियन डेज’ और अमेजन की ‘ग्रेट इंडियन फेस्टिवल’ जैसी बड़ी ई-कॉमर्स सेल के दौरान साइबर धोखाधड़ी से लोगों को बचाने के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर अपराध) वी.के. सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर बड़ी ऑनलाइन सेल के दौरान खरीदारों को भारी छूट, सीमित समय के ऑफर और आकर्षक कैशबैक स्कीम का लालच देकर निशाना बनाते हैं। “आज ही खरीदें”, “सिर्फ दो मिनट बचे हैं” और “अभी भुगतान करें वरना ऑफर खत्म हो जाएगा” जैसे संदेश ग्राहकों पर जल्दबाजी में फ़ैसले लेने का दबाव बनाने के लिए बनाए जाते हैं। धोखाधड़ी करने वाले लोग अनजान खरीदारों को ठगने के लिए नकली वेबसाइट, नकली मोबाइल ऐप, संदिग्ध लिंक और धोखे वाले पेमेंट तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने लोगों से ऑनलाइन खरीदारी करते समय सतर्क रहने और भुगतान करने से पहले ऑफर की सच्चाई की जांच करने की अपील की है। उसने कहा कि सावधानी बरतने और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होने का जोखिम काफी कम हो सकता है। राजस्थान पुलिस ने ऑनलाइन खरीदारों के लिए कुछ सुझाव जारी किए हैं, जिनमें सिर्फ इसलिए जल्दबाजी में भुगतान न करना शामिल है क्योंकि किसी ऑफर में भारी छूट का वादा किया गया हो। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर डील्स की जांच करें और वाट्सअप, एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए मिले अनजान लिंक से खरीदारी करने से बचें। सलाह में वेबसाइट डोमेन की सावधानीपूर्वक जांच करने की भी बात कही गई है, क्योंकि एचटीटीपीएस या पैडलॉक आइकन होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि वेबसाइट असली है। मोबाइल ऐप केवल आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर और ऐपल प्ले स्टोर से ही डाउनलोड किए जाने चाहिए। उपयोगकर्ताओं को याद दिलाया गया है कि भुगतान को मंज़ूरी देने के लिए यूपीआई पीन की जरूरत होती है, न कि पैसे पाने के लिए, और उन्हें रिफंड या कैशबैक पाने के लिए कभी भी अपना पीन दर्ज नहीं करना चाहिए या क्यूआर कोड स्कैन नहीं करना चाहिए। उन्हें यह भी सलाह दी गई है कि वे गूगल सर्च या सोशल मीडिया पर मिले कस्टमर केयर नंबरों पर आँख बंद करके भरोसा न करें और इसके बजाय आधिकारिक ऐप और वेबसाइट पर दिए गए सपोर्ट विकल्पों का इस्तेमाल करें।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान पर भड़के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, विपक्ष से पूछे सवाल

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवादों में घसीट रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था को भी राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया जा रहा है। शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद को राजनीति में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के साथ हुई मुलाकात को जिस तरह प्रस्तुत किया, उससे सच से अधिक राजनीति की झलक दिखाई देती है। भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी पहले भी सर्वोच्च न्यायालय के बारे में गलत बयान देने के मामले में माफी मांग चुके हैं और अब वह राष्ट्रपति के नाम पर भी भ्रामक दावे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था का प्रतिनिधित्व करती हैं। डॉ. त्रिवेदी ने कांग्रेस से उपचुनावों और मतदाता सूची को लेकर कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को मतदाता सूचियों पर आपत्ति थी तो उसके बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने जांच के दौरान कोई शिकायत या आपत्ति क्यों दर्ज नहीं कराई। उन्होंने सवाल किया कि मतदान और मतगणना के दौरान कांग्रेस के एजेंट मौजूद थे या नहीं और यदि कोई गड़बड़ी थी तो उस समय आपत्ति क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 45 दिनों की समयसीमा को लेकर लगातार सवाल उठाती रही है। ऐसे में उसे स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह निर्धारित अवधि के भीतर सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की मांग करेगी या बाद में समयसीमा खत्म होने का हवाला देगी। भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर परस्पर विरोधी आरोप लगाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले ईवीएम पर सवाल उठाती थी और अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आरोप लगा रही है। उनके अनुसार, दोनों दावे एक साथ सही नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, “यदि ईवीएम में गड़बड़ी थी तो फिर एसआईआर का मुद्दा क्या था और यदि एसआईआर में गड़बड़ी है तो फिर ईवीएम पर पहले लगाए गए आरोपों का क्या आधार था।” डॉ. त्रिवेदी ने दावा किया कि कांग्रेस का उद्देश्य चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर भ्रम का माहौल बनाना है। उन्होंने कहा कि असम के सिलचर नगर निगम चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान हुआ था, लेकिन वहां भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रपति के नाम पर किए गए दावों का उनके पास क्या प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना और चुनावी हार के बाद नए-नए आरोप लगाना कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति बन चुकी है। प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. त्रिवेदी ने कांग्रेस से पांच प्रमुख सवाल पूछे, जिनमें उपचुनाव के दौरान मतदाता सूची की जांच, मतदान और मतगणना की निगरानी, 45 दिनों के भीतर सीसीटीवी फुटेज की मांग, राष्ट्रपति के नाम पर किए गए दावों के सबूत तथा ईवीएम और एसआईआर को लेकर लगाए गए आरोपों को लेकर स्पष्टीकरण शामिल है। पहला सवाल – उपचुनावों में आपने मतदाता सूचियों की जांच की थी या नहीं? क्या आपने कोई आपत्ति दर्ज कराई थी? दूसरा सवाल – चुनाव और मतगणना के दौरान सब कुछ सीसीटीवी में दर्ज हो रहा था। क्या आपने किसी बात पर आपत्ति जताई थी या नहीं? तीसरा सवाल – क्या आप 45 दिनों के भीतर कोई फुटेज या अन्य जानकारी मांगेंगे या नहीं? चौथा सवाल – आपने राष्ट्रपति का नाम लेकर जो बात कही है, उसका आपके पास क्या साक्ष्य है? किसी बात का इस प्रकार राजनीतिक इस्तेमाल करना बेहद निंदनीय है। पांचवां सवाल – ईवीएम को लेकर लगाया गया आपका आरोप सही था या एसआईआर को लेकर लगाया गया आरोप सही है? कोई भी व्यक्ति सामान्य बुद्धि से समझ सकता है कि दोनों आरोप एक साथ सही नहीं हो सकते। अर्थात, दोनों ही आरोप झूठे हैं।
पश्चिम बंगाल: ‘वोट चोर’ टिप्पणी पर मुख्य सचिव ने महुआ मोइत्रा को भेजा कानूनी नोटिस

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को सोशल मीडिया पर उन्हें ‘वोट चोर’ कहने के आरोप में कानूनी नोटिस भेजा है। कानूनी नोटिस में मनोज कुमार अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर उन्हें ‘वोट चोर’ बताया, जबकि वह इस वर्ष हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के रूप में कार्य कर रहे थे। महुआ मोइत्रा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया था कि अग्रवाल ने लाखों वैध बंगाली मतदाताओं के मतदान अधिकार को अवैध रूप से छीन लिया। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत अग्रवाल का पीछा करेगा और वह इससे बच नहीं पाएंगे। कानूनी नोटिस में मनोज कुमार अग्रवाल के वकील ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में उनके मुवक्किल ने कानून और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के निर्देशों के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन किया था। नोटिस में यह भी कहा गया है कि महुआ मोइत्रा के आरोपों से उनके मुवक्किल की पेशेवर ईमानदारी, योग्यता और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा है। अग्रवाल के वकील ने महुआ मोइत्रा से नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर दोनों विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और लिखित माफी मांगने को कहा है। इसके अलावा उनसे भविष्य में इस तरह की कथित मानहानिकारक टिप्पणियां न करने का लिखित आश्वासन देने की भी मांग की गई है। कानूनी नोटिस में कथित मानहानि के लिए 10 करोड़ रुपए का मुआवजा और 50,000 रुपए कानूनी तथा अन्य खर्चों के रूप में देने की भी मांग की गई है। वकील ने चेतावनी दी है कि यदि नोटिस में की गई मांगों का पालन नहीं किया जाता है, तो उनके खिलाफ सिविल और आपराधिक कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस की हाई लेवल बैठक, 20 जोन में बांटी गई नई दिल्ली

नई दिल्ली। दिल्ली में 10 अक्टूबर को सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक हुई। पुलिस आयुक्त ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ लगभग तीन घंटे तक बैठक कर प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की गई है। इसी क्रम में नई दिल्ली जिले को 20 जोन में विभाजित किया गया है, ताकि सुरक्षा प्रबंधन, निगरानी और त्वरित कार्रवाई को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार की शाम से जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित रहेंगी और यह प्रतिबंध शनिवार रात 10 बजे तक लागू रहेगा। दिल्ली पुलिस का कहना है कि सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि आयोजकों ने कानूनी निर्देशों और पिछले प्रदर्शन के दौरान दिए गए अपने आश्वासनों का पालन नहीं किया। इंटरनेट सेवाएं बंद करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद स्पेशल सेल (मुख्यालय) के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनीषी चंद्रा ने टेलीकॉम कंपनियों के नोडल अधिकारियों को 24 घंटे के प्रतिबंध लागू करने के निर्देश दिए। टेलीकॉम कंपनियों को भेजे गए डीसीपी के पत्र में कहा गया कि केंद्रीय गृह सचिव ने दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के नियम 3 की उपधारा (1) और दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 20(2)(बी) के तहत मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के पुलिस के अनुरोध को मंजूरी दे दी है। टेलीकॉम ऑपरेटरों से कहा गया है कि वे शुक्रवार रात 10 बजे से शनिवार रात 10 बजे तक जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट प्रतिबंध लागू करें। इंटरनेट सेवाओं पर यह रोक 57 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के अतिरिक्त है। इन स्टेशनों को शुक्रवार रात 9 बजे से बंद किया गया। पुलिस ने बताया कि नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू है और कानून-व्यवस्था तथा सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए एहतियाती प्रतिबंध लगाए गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) को भेजा गया है। इनमें राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, लोक कल्याण मार्ग, सुप्रीम कोर्ट, मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, आईटीओ, दिल्ली गेट, कश्मीरी गेट, सराय काले खां-निजामुद्दीन, लाजपत नगर, जंगपुरा, विश्वविद्यालय, सिविल लाइंस, ओखला विहार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, आश्रम, रोहिणी वेस्ट, वेलकम, शालीमार बाग, आदर्श नगर और हौज खास समेत अन्य स्टेशन शामिल हैं। रेलवे के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) बी. भरत रेड्डी ने कहा कि शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित सीजेपी प्रदर्शन के मद्देनजर 334 सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) कर्मियों को तैनात किया गया है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 14 कंपनियों की भी मांग की गई है। आईएएनएस से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ट्रेन से दिल्ली आने वाले लोगों की आवाजाही को संभालने के लिए प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा, “सीजेपी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ट्रेन से आने वाले लोगों के लिए 334 जीआरपी कर्मियों की तैनाती की गई है और सीएपीएफ की 14 कंपनियां मांगी गई हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती 24 घंटे जारी रहेगी। दिल्ली में सात प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जहां सबसे ज्यादा ट्रेनें आती हैं और यात्रियों की संख्या भी सबसे अधिक रहती है।” उन्होंने बताया कि इन सभी स्टेशनों पर सुरक्षा कर्मी 24 घंटे तैनात रहेंगे। यात्रा में होने वाली संभावित परेशानियों को लेकर पूछे गए सवाल पर रेड्डी ने कहा कि जिन यात्रियों की ट्रेनें डायवर्ट नहीं की गई हैं और जो निर्धारित स्टेशनों पर पहुंचेंगी, उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।