प्रधानमंत्री मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी : मुख्यमंत्री योगी

वाराणसी। प्रधानमंत्री मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह रिश्ता पद से नहीं, विश्वास से बना था। पद बदलते रहे, लेकिन मित्रता नहीं बदली। 7 अक्टूबर 2001 को प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। जनसेवा की इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन उनके मित्र आबे की स्मृति को समर्पित गलियारे का उद्घाटन इससे सुंदर संयोग नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री योगी ने बुधवार को रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। मुख्यमंत्री योगी ने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से आबे को विनम्र श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को हमेशा के लिए बसा रही है। सीएम योगी ने कहा कि 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे। वहीं उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। उसी वर्ष आबे ने भारत की संसद में कहा था कि मजबूत भारत जापान के सर्वोत्तम हित में है और मजबूत जापान भारत के सर्वोत्तम हित में। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी में गंगा आरती देखी। वर्ष 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन का शिलान्यास किया। 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों का विश्वास बन जाती है तो इतिहास बदलता है। 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे। पूरे भारत ने राष्ट्रीय शोक रखा। उन्होंने कहा, ”यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था।” गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज की दुनिया में बिना लाभ-हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना कठिन है। दुनिया इंटरेस्ट देखकर रिश्ते बनाती है, जबकि भारत और जापान के रिश्ते ट्रस्ट यानी विश्वास पर आधारित हैं। करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। दोनों देशों की साझेदारी अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच चुकी है। जापान के पास टेक्नोलॉजी और अनुभव है तो भारत के पास टैलेंट और युवा ऊर्जा है। इसी वर्ष फरवरी की जापान यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ के निवेश पर समझौते हुए। उन्होंने 500 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज चलने वाली मैग्लेव ट्रेन में जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखा। यामानाशी अब उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है। इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है। जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास स्केल, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे व एयरपोर्ट का सबसे बड़ा नेटवर्क है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2027 में भारत-जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और यह गलियारा उस अमृत पर्व की पहली भेंट है। जापान ‘लैंड ऑफ द राइजिंग सन’ है और उत्तर प्रदेश ‘लैंड ऑफ द सन डायनेस्टी’। सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी और संकिसा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े तीर्थ हैं। इसलिए जापान की आस्था का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। काशी और क्योटो अपनी-अपनी सभ्यता की आत्मा हैं। दोनों ने विरासत को संभालकर विकास करना सिखाया है। मुख्यमंत्री योगी ने आबे मेमोरियल कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया। उन्होंने कहा कि यहां आने वाला हर युवा सीखेगा कि दूर की सोच रखने वाला एक नेता दो देशों का भविष्य कैसे बदल देता है। जापान की पूर्व प्रथम महिला अकी आबे पति शिंजो आबे को याद करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनके पति का प्रधानमंत्री मोदी से गहरा लगाव और आत्मीय संबंध था। वर्ष 2015 में काशी आने के बाद वह उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे। तभी से उनके मन में भी वाराणसी आने की इच्छा थी। उन्होंने कहा कि आज उनके पति जीवित होते तो अपने नाम पर बने इस स्मारक को देखकर बहुत खुश होते। यह कहते हुए उनकी आंखों में आंसू छलक आए। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के डिजाइन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसकी बाहरी दीवारों पर 108 रुद्राक्ष लगे हैं। जापान में भी 108 की संख्या का विशेष महत्व है और नया कार्य शुरू होने पर बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाई जाती हैं।
दीपोत्सव-2026 में दमकेगी रामनगरी, प्रमुख मार्गों से घाट तक दिखेगी आस्था की भव्य तस्वीर

अयोध्या। दीपों की रोशनी से निखरने वाली रामनगरी इस बार कलात्मक सजावट और रचनात्मक आकृतियों से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। दीपोत्सव-2026 में अयोध्या के प्रमुख चौराहों से लेकर प्रवेश मार्ग, रामकथा पार्क, राम की पैड़ी और सरयू तट तक रामायण की थीम पर भव्य सज्जा नजर आएगी। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इसके लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। रामनगरी में सजावटी द्वार, वे-फाइंडर, सेल्फी प्वाइंट और मंच के साथ राम रथ व पुष्पक विमान की झलक भी दिखाई देगी। वहीं, सरयू की लहरों पर आकर्षक फ्लोटर्स दीपोत्सव की भव्यता में चार चांद लगाएंगे। दीपोत्सव-2026 के तहत अयोध्या में छह से आठ नवंबर तक विभिन्न आयोजन होंगे। 7 नवंबर को दीपोत्सव का मुख्य आयोजन होगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए करीब 10 प्रमुख स्थानों पर थीम आधारित वे-फाइंडर लगाए जाएंगे। ये प्रमुख प्रवेश मार्गों, चौराहों और आयोजन स्थलों के आसपास होंगे। दीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए राम कथा पार्क और राम की पैड़ी पर 10-10 आकर्षक सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे। हर इंस्टॉलेशन की थीम, डिजाइन और निर्माण शैली अलग होगी। इनमें अयोध्या और दीपोत्सव की झलक कलात्मक अंदाज में नजर आएगी। त्रि-आयामी कलाकृतियां आयोजन स्थलों की खूबसूरती बढ़ाने के साथ आगंतुकों के अनुभव को भी खास बनाएंगी। इन्हें इस तरह तैयार किया जाएगा कि ये दीपोत्सव-2026 की सजावट का हिस्सा बनने के साथ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनें। इसी कड़ी में लता मंगेशकर चौक से राम की पैड़ी मार्ग तक कलात्मक स्थापनाएं (आर्ट इंस्टालेशन) तैयार की जाएंगी। ‘दीयों के उत्सव’ के सांस्कृतिक आयोजनों के लिए रामकथा पार्क का स्थायी मंच नए कलेवर में नजर आएगा। यहां ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था के साथ एलईडी स्क्रीन, थीम आधारित रंगीन कपड़े आदि का इस्तेमाल होगा। दोनों ओर सीढ़ियां, पुष्प सज्जा, रंगोली, पर्दे और मंच पर बैठने की व्यवस्था भी होगी। मौजूदा ढांचे के अनुरूप ही डिजाइन तैयार किया जाएगा। वहीं, राम कथा पार्क के प्रवेश और निकास को आकर्षक बनाने के लिए सजावटी गेट का निर्माण होगा। प्रत्येक द्वार का डिजाइन भारतीय संस्कृति, पारंपरिक प्रतीकों और रामायण के प्रसंगों पर आधारित होगा। दीपोत्सव-2026 में अयोध्या के प्रवेश मार्गों की तस्वीर इस बार नए रंग-रूप में नजर आएगी। शहर के प्रमुख हाईवे और ‘धर्म पथ’ पर रामायण की थीम से सजे 10 भव्य द्वार तैयार किए जाएंगे। लखनऊ, सुल्तानपुर और रायबरेली की ओर से अयोध्या आने वाले मार्गों के साथ धर्म पथ पर बनने वाले इन द्वारों की सजावट में हर गेट की अलग पहचान होगी। आकर्षक डिजाइन, थीम आधारित सज्जा और रोशनी से सजे ये प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचते ही दीपोत्सव की भव्यता का एहसास कराएंगे। राम की पैड़ी के निकट पुष्पक विमान थीम पर रोडसाइड इंस्टॉलेशन आकर्षण का केंद्र बनेगा। वहीं, रामायण की कथा को जीवंत करते हुए राम रथ और झांकी तैयार की जाएगी। राम की पैड़ी के पास राम दरबार की भव्य प्रस्तुति होगी, जबकि रामकथा पार्क के समीप हेलीपैड क्षेत्र में भरत मिलाप मंच और पाथवे विकसित किए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर फ्लैग पोल लगाकर आयोजन की भव्यता बढ़ाई जाएगी। वहीं, सरयू और राम की पैड़ी पर आकर्षक फ्लोटर्स भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचेंगे। इनके अतिरिक्त राम रथ, राम दरबार, भरत मिलाप मंच विशेष के आकर्षण होंगे। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में अयोध्या की भव्यता के साथ उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी नए रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। रामायण की थीम पर होने वाली सजावट, कलात्मक स्थापनाएं और प्रकाश व्यवस्था श्रद्धालुओं व पर्यटकों को रामनगरी के दिव्य और भव्य स्वरूप का नया अनुभव कराएंगी। हमारा प्रयास है कि दीपोत्सव की आभा अयोध्या आने वाले हर व्यक्ति के मन में अविस्मरणीय छाप छोड़े। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘दीपोत्सव-2026 में अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक रचनात्मकता के साथ भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। रामायण की थीम पर तैयार सजावटी द्वार, आकर्षक सेल्फी प्वाइंट और मनमोहक प्रकाश सज्जा श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। उन्होंने बताया कि शहर के प्रमुख मार्गों के किनारे रामायण के विभिन्न कांडों और प्रसंगों पर आधारित आकर्षक स्थापनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें लंका कांड समेत रामायण के प्रमुख प्रसंगों को बेहद सरल भाषा में एक-एक पंक्ति के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
एफआईआर मेरे लिए मेडल की तरह, ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही पड़ेगा : राहुल गांधी

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कहा कि उनके लिए हर एफआईआर एक मेडल की तरह है। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि मेरे खिलाफ 45 एफआईआर दर्ज हैं। मेरा लक्ष्य 100 एफआईआर का है। मैं चाहता हूं कि मेरे खिलाफ 100 एफआईआर दर्ज हों। हर एफआईआर मेरे लिए एक मेडल की तरह है। उन्होंने कहा कि करीब 300 लोकसभा और राज्यसभा सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे लेकिन उन्हें मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई। दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया और कहा कि वहां विरोध प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। अब इंडिया ब्लॉक के सांसद तय विरोध स्थल जंतर-मंतर पर जाएंगे और वहां बैठकर देश को बताएंगे कि ज्ञानेश कुमार देश के वैध मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं हैं और उन्होंने केंद्र सरकार के साथ मिलकर देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ऐसा किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम यह विरोध जारी रखेंगे। चुनाव आयोग की बार-बार की गलतियां और केंद्र सरकार के इशारे पर हो रही हरकतें यह दिखाती हैं कि वे देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वे संविधान की भी परवाह नहीं करते। इसलिए, हमने तय किया है कि लोगों की आवाज पूरे देश तक पहुंचनी चाहिए। यही हमारा काम है और इसीलिए राहुल गांधी लड़ रहे हैं। लोगों के हक छीने जा रहे हैं, उसकी सुरक्षा के लिए हम कोशिश कर रहे हैं, हम डरने वाले नहीं हैं बल्कि लड़ते रहेंगे और आगे बढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सभी साथी जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती, हम प्रदर्शन करते रहेंगे। चुनाव आयोग जो भी कर रहा है, उसके पीछे केंद्र सरकार है। इसलिए हम सभी विपक्षी दलों के नेता देश के लोगों को बताना चाहते हैं कि उनका अधिकार छीना जा रहा है। जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हमारे ऊपर कितने भी केस दर्ज किए जाएं, हम डरने और रुकने वाले नहीं हैं। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि सरकार को लगता है कि हम एफआईआर से डर जाएंगे लेकिन, हम डरने वाले नहीं हैं।
जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

नई दिल्ली। इंडिया ब्लॉक के नेताओं को बुधवार को जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। विपक्षी नेता लगातार दूसरे दिन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जा रहे थे। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “गृह मंत्री अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी, सीईसी ज्ञानेश कुमार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ये सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन हम उन्हें न्याय के कटघरे में लाएंगे। यह मेरी गारंटी है कि इन चारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह सब घबराहट में की गई प्रतिक्रिया है। यह सब डर है।” पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को धक्का देते हुए बसों में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर हिरासत में लिए गए राहुल गांधी और अन्य नेताओं को ले जा रही बस का टायर कथित तौर पर पंक्चर कर दिया। इससे पहले प्रियंका गांधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी के बीच सड़क पर लेट गईं और विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने की अनुमति दिए जाने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया। प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से कहा, “यह है कि वे सांसदों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जो सिर्फ चुनाव आयुक्त से मिलने की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर सांसदों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिसकर्मियों ने मुझे पूरी तरह खरोंच दिया है। उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया। अब हम यहां से नहीं हटेंगे। उन्हें अपनी फोर्स वापस बुलाने दीजिए। मैं यहां से नहीं हटूंगी।” कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सुरक्षाकर्मियों पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं करेंगे। राहुल जी और मैं बस में थे। जब राहुल जी बस से नीचे उतरे तो राहुल जी और प्रियंका जी के साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। उन्होंने गुंडागर्दी की है और गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।” कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “जब तक हमें अपने सवालों के जवाब नहीं मिलते, हमारी आवाज मजबूत बनी रहेगी।” वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेताओं को बसों में भरकर पुलिस थानों ले जाया गया और दुर्भाग्य से सुबह उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर जाना, धरना देना, विरोध प्रदर्शन करना या मार्च निकालना देश में गैरकानूनी है। इससे पहले जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को आकाशवाणी भवन के बाहर नौ घंटे से अधिक समय तक धरना देने के मामले में अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से ही 45 मामले हैं और उनका “लक्ष्य 100 प्राथमिकी” का है। मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए प्रदर्शन किया था। बुधवार को भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।
’12 घंटे हिरासत में रखा, फोन छीन लिया, अब विधानसभा नहीं जाऊंगा’, गिरफ्तारी के बाद हुमायूं कबीर का फूटा गुस्सा

मुर्शीदाबाद। उपचुनाव के दौरान 12 घंटे तक हिरासत में रखे जाने के बाद विधायक हुमायूं कबीर ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस आम लोगों पर जुल्म कर रही है, झूठे केसों में फंसा रही है और लूटपाट कर रही है, जिसका वह विरोध नहीं कर पाए। इसके विरोध में उन्होंने विधानसभा और उसकी कमेटियों की बैठकों से दूर रहने का ऐलान किया और रेजिनगर की जनता से माफी मांगी। साथ ही पुलिस की ओर से किए गए बर्ताव का भी जिक्र किया। विधायक हुमायूं कबीर ने कहा, “पुलिस वाला जो मुझे रात 8 बजे ले गया, वहां से लेकर जाकर मेरा फोन ले लिया और मुझे एक अलग घर में बैठाकर रखा। उस घर में मैं बैठा था, मैंने सहयोग किया। उन्होंने मेरे साथ कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि आखिर में रिलीज होने के समय फिर उन्होंने कहा कि जुबान संभाल कर चलनी चाहिए। तो कोई पुलिस वाला मुझे बताएगा कि मैं जुबान से क्या बोलूंगा और क्या नहीं बोलूंगा, वह मैं नहीं मानूंगा। पुलिस लोगों पर अत्याचार कर रही है, जुल्म कर रही है, झूठे मामले देकर उन्हें पकड़ रही है, उनके घर में घुसकर उनकी मां-बहन की इज्जत लेने की कोशिश कर रही है। उनकी बात सुनकर मैं कभी नहीं चलूंगा। विधायक हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि इसलिए मैंने उनसे कहा कि ठीक है, कोशिश करूंगा, लेकिन रेजिनगर थाने का ओसी मेरे सामने नहीं आया। वह मुझे छोड़कर फिर चला गया। एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर गोपाल सरकार भी थे, उन्होंने भी मेरे साथ कोई गलत बात नहीं की, अच्छे तरीके से बात की। बार-बार पूछा कि क्या जरूरत है, क्या खाएंगे, क्या खाना आएगा, सब कुछ किया। कोई बदतमीजी नहीं की। पुलिस वालों ने अंदर जो 12 घंटे रखा, इज्जत से बात की। किसी ने मेरे साथ कोई बदसलूकी नहीं की, कोई गलत बात भी नहीं की। राजनीति छोड़ने की अटकलों के बीच उन्होंने कहा कि मैंने राजनीति अभी छोड़ी नहीं है, लेकिन निर्णय नहीं लिया है। मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्रियों को बताना चाहता हूं कि दो महीने से पुलिस आम आदमी पर जबरदस्ती कर रही है। मंगलवार को उपचुनाव था, उसी समय से पुलिस ने आम आदमी के साथ जो बदतमीजी की, वोटरों के साथ जो किया, वह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। लेकिन मैं इसका प्रतिकार नहीं कर पाया, इसके लिए रेजिनगर के जो आम आदमी हैं, वोटर हैं, उनसे माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि मैं पुलिस की जबरदस्ती के खिलाफ कुछ नहीं कर पाया। मुझे बंद करके 12 घंटे रखा गया, इसीलिए कल जो पुलिस वालों ने लूटपाट की, लोगों के सर्टिफिकेट छीन लिए, उसके विरोध में मैं विधानसभा से दूर रहूंगा। मैं विधानसभा का सदस्य रहूंगा, लेकिन विधानसभा नहीं जाऊंगा, न ही किसी कमेटी की मीटिंग में शामिल होऊंगा, विधानसभा के किसी प्रोग्राम में नहीं जाऊंगा। जब अगला सत्र होगा, असेंबली शुरू होगी, उस समय देखेंगे, जब विधानसभा में मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे तब जाऊंगा, फिर वापस आ जाऊंगा।
सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने आडवाणी से लिया आशीर्वाद, कहा- उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने आडवाणी जी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी जी के दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र के लिए उनके योगदान ने देश में अमिट छाप छोड़ी है। भारत की प्रगति को मजबूत बनाने में आडवाणी जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था और बाद में वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने, तब से वह लगातार शासन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों के नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी और उनके नेतृत्व की सराहना की है। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें ‘हमारे समय का अवतार’ बताया। वहीं, नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनूबू ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई संदेश भेजते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लगातार 25 वर्षों तक नेतृत्व करना एक दुर्लभ उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में यह उपलब्धि भारतीय जनता के प्रधानमंत्री मोदी पर अटूट विश्वास को दर्शाती है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बधाई देते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष की अवधि पूरे होने पर मैं अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करना चाहती हूं। भारत के समाज और राष्ट्र के विकास को साकार करने के लिए वे वर्षों से प्रयास करते आए हैं और सन 2001 से अपने उत्कृष्ट राजनीतिक नेतृत्व से सरकार के प्रमुख के पद संभालते आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी ने भारत के विकास को गति देने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इन सारी उपलब्धियों के लिए, मैं एक साथी राजनीतिज्ञ के रूप में सम्मान की भावना व्यक्त करती हूं। वहीं, भाजपा और कई सरकारों की ओर से कई राज्यों में ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान चलाया जा रहा है।
25 साल के प्रशासनिक सफर पर दक्षिण कोरिया से आई बधाई, पीएम मोदी बोले- मिलकर बढ़ाएंगे शांति और समृद्धि का विजन

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रशासनिक जीवन के 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर पीएम मोदी को न केवल देशभर से, बल्कि दुनिया के कई देशों से शुभकामनाएं मिली हैं। इस लिस्ट में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का नाम भी शामिल है। वहीं, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ली की शुभकामनाओं के लिए आभार जताया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति ली का आभार जताते हुए लिखा, “आपके प्यार भरे मैसेज के लिए राष्ट्रपति ली जे-म्यांग का धन्यवाद। मुझे अप्रैल में आपका भारत दौरा याद है, जिसने हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार दी।” पीएम मोदी ने आगे कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि हम सब मिलकर अपने कई तरह के सहयोग को और गहरा करेंगे और दुनिया भर में शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए अपने साझा नजरिए को आगे बढ़ाएंगे। वहीं, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने अपने बधाई संदेश में लिखा था, “आज से 25 वर्ष पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद से आपने भारत के लोगों के बेहतर जीवन के निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित किया है। आपकी इस अटूट समर्पण के प्रति मैं अपना गहरा सम्मान व्यक्त करता हूं और इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपको हार्दिक बधाई देता हूं।” राष्ट्रपति ली ने प्रधानमंत्री की लीडरशिप की सराहना करते हुए कहा कि आपके नेतृत्व में भारत ने विनिर्माण क्षेत्र के विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के माध्यम से लगातार प्रगति की है और अलग-अलग चुनौतियों के बीच भी अपनी दृढ़ता का प्रदर्शन किया है। ये उपलब्धियां भारतीय जनता के लिए गर्व का विषय हैं और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका के विस्तार के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रणनीतिक साझेदारों के रूप में कोरिया गणराज्य और भारत मिलकर विकास और नवाचार के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। हम दोनों देशों में व्यवसायों और युवाओं की आकांक्षाओं और विकास को समर्थन देना जारी रखेंगे और पिछले अप्रैल में नई दिल्ली में हमने जो साझा दृष्टिकोण निर्धारित किया था, उसे साकार करेंगे। राष्ट्रपति ली ने पीएम मोदी को दक्षिण कोरिया आने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि मैं इस बार सियोल में आपका फिर से स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं। मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं और भारत की जनता के प्रति कोरिया गणराज्य की जनता की गहरी मित्रता व्यक्त करता हूं।
चुनाव आयोग के रवैये और विपक्षी सांसदों से बर्ताव पर सचिन पायलट ने उठाए सवाल

जयपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने बुधवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से जुड़े हालिया घटनाक्रम और दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों के साथ किए गए व्यवहार ने देश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। पायलट ने चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करने वाले प्रदर्शनों के दौरान विपक्ष के नेताओं, जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल थे, द्वारा विरोध-प्रदर्शनों को संभालने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से मिलने की कोशिश कर रहे विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया गया और सवाल उठाया कि चुने हुए प्रतिनिधियों को संवैधानिक संस्था के सामने अपनी बात रखने की इजाजत क्यों नहीं दी गई। पायलट ने इन घटनाओं को तानाशाही बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को बातचीत और जवाबदेही के लिए खुला रहना चाहिए। वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों वोटरों के नाम लिस्ट से कटने का खतरा है और इस मुद्दे को संविधान में दिए गए वोटिंग के अधिकार के लिए खतरा बताया। पायलट ने ‘वोटबंदी’ (वोट देने का अधिकार छिनना) शब्द का भी इस्तेमाल किया और इसकी तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा कि वोटर लिस्ट से जुड़ी चिंताओं पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। राजस्थान नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए पायलट ने दावा किया कि कांग्रेस का प्रदर्शन नतीजों से कहीं बेहतर रहा क्योंकि पार्टी को ज्यादा वोट शेयर मिला। उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि भाजपा जीत के बावजूद हार गई, जबकि हम हार के बावजूद जीत गए क्योंकि हमें ज्यादा वोट मिले। कांग्रेस नेता ने निकाय चुनावों के दौरान गड़बड़ियों और प्रशासनिक दखल का आरोप लगाया और दावा किया कि चुनाव के संचालन को लेकर कई जिलों से शिकायतें मिली थीं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने नतीजों की समीक्षा कर ली है और आने वाले पंचायती राज चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। पायलट ने भरोसा जताया कि कांग्रेस ग्रामीण राजस्थान में अच्छा प्रदर्शन करेगी और पंचायत चुनावों में भारी बहुमत हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी बेरोजगारी, किसानों की चिंताओं, कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने और राज्य में डीएपी खाद की कमी जैसे मुद्दों पर ध्यान देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में डीएपी खाद की भारी कमी है। इसे पुलिस सुरक्षा में बांटा जा रहा है, फिर भी सरकार बेपरवाह बनी हुई है। पायलट ने कहा कि कांग्रेस आगामी चुनाव एकजुट होकर लड़ेगी और पूरे राजस्थान के गांवों और मंडलों में दो महीने का जन-संपर्क अभियान चलाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी न केवल चुनावी मुद्दों पर ध्यान देगी, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और वोटिंग के अधिकारों की रक्षा करने की ज़रूरत पर भी जोर देगी। पंचायत चुनावों में बड़ी जीत की भविष्यवाणी करते हुए पायलट ने कहा कि इससे मिलने वाली बढ़त कांग्रेस को 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनावों की तैयारी में मदद करेगी।
दुर्गा पूजा में कैसे सजता है बंगाल? जानिए क्यों लाल-पाड़ वाली सफेद साड़ी है खास

कोलकाता। दुर्गा पूजा आते ही पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता, रोशनी, कला, सजावट और धार्मिक उत्सव के रंग में रंग जाता है। शहर की गलियों से लेकर बड़े चौराहों तक पंडाल, रोशनी और अलग-अलग तरह की सजावट लोगों का ध्यान खींचती है। इस दौरान पारंपरिक परिधान भी उत्सव का खास हिस्सा बन जाते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान अलग-अलग इलाकों में अस्थायी पंडाल तैयार किए जाते हैं। इनकी सजावट कई बार ऐतिहासिक इमारतों, मंदिरों या सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों की थीम पर आधारित होती है। पारंपरिक बंगाली संस्कृति से लेकर अलग-अलग कलात्मक विषयों को पंडाल की सजावट में जगह दी जाती है। पंडालों के साथ-साथ आसपास के इलाकों को भी रोशनी से सजाया जाता है। गलियों और प्रमुख स्थानों पर रंग-बिरंगी लाइटें, झांकियां और आधुनिक तकनीक से तैयार की गई सजावट देखने को मिलती है। दुर्गा पूजा की तैयारियों में महालया का विशेष महत्व है। इस अवसर से जुड़ी परंपराओं में देवी दुर्गा की प्रतिमा की आंखें बनाने की रस्म को चक्षु दान कहा जाता है। दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण में मिट्टी के साथ बांस और कपड़े जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल भी पारंपरिक रूप से किया जाता है। पूजा के दिनों में लोग नए कपड़े पहनकर अलग-अलग पंडालों में जाते हैं। रात के समय पंडालों को देखने निकलने की यह परंपरा दुर्गा पूजा के सार्वजनिक उत्सव का प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। दुर्गा पूजा की परंपराओं में धनुची नृत्य का भी खास स्थान है। संध्या आरती के दौरान धुनुची के साथ यह पारंपरिक नृत्य किया जाता है। वहीं, विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की विदाई से पहले महिलाओं के बीच सिंदूर खेला की परंपरा देखने को मिलती है। इस दौरान महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसके बाद प्रतिमा विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा का समापन होता है। दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली महिलाओं के पारंपरिक परिधानों में सफेद साड़ी और लाल बॉर्डर वाली साड़ी, जिसे आम तौर पर लाल-पाड़ साड़ी कहा जाता है, खास तौर पर नजर आती है। यह बंगाली पारंपरिक पहनावे की पहचान से जुड़ी साड़ी है। लाल-पाड़ साड़ी कपास और रेशम जैसे कपड़ों में तैयार की जाती रही है। बंगाल में तांत जैसी पारंपरिक साड़ियों की अपनी अलग पहचान है। दुर्गा पूजा जैसे अवसरों पर लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनने की परंपरा सांस्कृतिक और धार्मिक वातावरण से जुड़ती है। इस साड़ी के दोनों रंगों को लेकर भी पारंपरिक मान्यताएं हैं। लाल रंग को शक्ति और ऊर्जा से जोड़ा जाता है, जबकि सफेद रंग को पवित्रता से संबंधित माना जाता है। यही वजह है कि लाल और सफेद रंगों वाली साड़ी दुर्गा पूजा के अवसर पर विशेष रूप से पसंद की जाती है। हालांकि, इसे सभी बंगाली महिलाओं के लिए अनिवार्य परिधान मानना सही नहीं होगा। लाल-पाड़ साड़ी का पारंपरिक बंगाली ड्रेपिंग स्टाइल भी इसे अलग पहचान देता है। इसमें पल्लू और बॉर्डर को इस तरह रखा जाता है कि साड़ी का लाल किनारा स्पष्ट दिखाई दे। पारंपरिक बंगाली लुक में गहनों की भी अहम भूमिका होती है। सोने के हार, झुमके, चूड़ियां और पारंपरिक डिजाइन वाले आभूषण साड़ी के साथ पहने जाते हैं। इससे दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली पारंपरिक परिधान का स्वरूप और अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।
राहुल गांधी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया, कांग्रेसियों को इलाज कराना चाहिए: आलोक कुमार

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव हारने से राहुल गांधी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और चुने हुए प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलना गलत है। संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाने से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने के वादे का स्वागत किया, गरबा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक को जायज ठहराया और कहा कि एक देश एक चुनाव से विकास कार्यों में तेजी आएगी। विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “लगातार चुनाव हारने से उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। देशद्रोह जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना गलत है।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एसआईआर गलत है तो क्या केरल में दोबारा चुनाव कराया जाए? तमिलनाडु विधानसभा भंग कर चुनाव कराया जाए? कांग्रेस अध्यक्ष कह रहे हैं, “लोकसभा भंग करो, विधानसभाएं भंग करो, दोबारा चुनाव करो।” उनके मन में कहीं यह बैठा है कि हम राज परिवार से हैं और भारत में राज करने का हमारा पुश्तैनी अधिकार है। उन्होंने आगे कहा कि जनता समझती है कि यह सब नाटक है और इसका नुकसान होगा। संवैधानिक संस्थाओं का निरादर करना और उन पर उंगली उठाना ठीक नहीं है। इससे न तो कम समय के लिए कुछ फायदा होगा, न ही लंबे समय के लिए। कांग्रेसियों को खुद राहुल गांधी के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कुछ प्रयास करने चाहिए। पश्चिम बंगाल में यूसीसी को लेकर विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह बहुत अच्छा कदम है। हमने इसकी मांग की थी और संयोग से विश्व हिंदू परिषद की सभा में बोलते हुए उन्होंने इसका वादा किया है। लालच या धोखे से होने वाला अवैध धर्मांतरण तो बंद होना ही चाहिए। यह कानून आएगा तो देश के लिए अच्छा होगा। गरबा में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक की तैयारी को लेकर उन्होंने कहा कि मुसलमानों को खुद भी सोचना चाहिए कि वे क्यों आ रहे हैं। काबा उनका पवित्र स्थान है, वहां अन्य धर्मावलंबियों को आने की अनुमति नहीं है। हम इससे सहमत हैं कि अनुमति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह सैर-सपाटे की जगह नहीं बल्कि धार्मिक स्थान है। गरबा देवी की पूजा का स्थान है, माता की आराधना और श्रद्धा के साथ नृत्य करना एक धार्मिक कार्यक्रम है। आलोक कुमार ने कहा कि उनको तो इस धर्म में विश्वास नहीं है। अगर मुसलमानों को विश्वास नहीं है तो उन्हें नहीं आना चाहिए। कैसे रोकेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि मैं इतना आश्वासन दे सकता हूं कि कानून की मर्यादा में रहकर रोकेंगे। बाकी जो होगा वह आपके भी ध्यान में आएगा। एक देश एक चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों पर हमें बोलने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए एक आयोग बना है जो विचार कर रहा है। अभी क्या हो रहा है कि हर साल लगातार चुनाव होते हैं तो आचार संहिता लग जाती है, नई योजनाएं लागू नहीं हो पातीं, और सबका ध्यान चुनाव में लगा रहता है। एक देश एक चुनाव होगा तो इसके बहुत सारे लाभ हैं, और जो आयोग बना है वह इस पर विचार करके अपनी राय देगा।