प्रयोग करने के लिए अब ज्यादा समय शेष नहीं, अगली सीरीज से हमारे सभी प्रमुख खिलाड़ी उपलब्ध होंगे: शुभमन गिल

न्यू चंडीगढ़। भारत के कप्तान शुभमन गिल का मानना है कि टीम को अगली सीरीज से ही वही प्लेइंग कॉम्बिनेशन अपनाना शुरू कर देना चाहिए, जिसे वर्ल्ड कप में उतारने की योजना है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड कप में अब सिर्फ एक साल का समय बचा है, इसलिए लगातार नए प्रयोग करने के बजाय टीम को अपने सबसे मजबूत संयोजन के साथ खेलना चाहिए। एशियन गेम्स में अपना गोल्ड मेडल बचाने के लिए भारत ने अपनी सबसे मजबूत टी20 टीम उतारी थी। इसी कारण टीम के कई नियमित वनडे खिलाड़ी वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में नहीं खेल सके। इसके अलावा, हार्दिक पांड्या और प्रसिद्ध कृष्णा की चोटों ने भी भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रसिद्ध कृष्णा बाएं हैमस्ट्रिंग में चोट लगने के कारण तीसरे वनडे मैच में हिस्सा नहीं ले पाए थे। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, वनडे टीम के उप-कप्तान श्रेयस अय्यर, ईशान किशन, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर एशियन गेम्स में खेलने में व्यस्त थे। वहीं, हर्षित राणा चोट के कारण उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में अनुभवी और बैकअप खिलाड़ियों का मिश्रण उतारना पड़ा। मुख्य खिलाड़ियों की गैर-मौजूदगी में ऋतुराज गायकवाड़, नमन धीर, अंशुल कंबोज और आकिब नबी जैसे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। इसके अलावा, नीतीश कुमार रेड्डी और गुरनूर बरार ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें भारत भविष्य और वर्ल्ड कप की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए तैयार कर रहा है। भारत ने इसी संतुलित टीम के साथ वेस्टइंडीज के खिलाफ 2-1 से सीरीज अपने नाम की। मैच के बाद गिल ने कहा कि इस स्थिति ने दूसरे दर्जे के खिलाड़ियों को अपनी दावेदारी पेश करने का मौका दिया। इसके साथ ही उन्हें उम्मीद है कि अगली सीरीज से भारत के पास वर्ल्ड कप वाला मुख्य कॉम्बिनेशन होगा। अगली सीरीज न्यूज़ीलैंड के खिलाफ है, जिसमें पांच वनडे, पांच टी20 इंटरनेशनल और दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए कहा, “चोटों और दूसरे मैचों के शेड्यूल की वजह से हम उस बॉलिंग लाइन-अप के साथ नहीं खेल पाए, जिसके साथ हम खेलना चाहते थे। मगर यह हमारे हाथ में नहीं है। यह दूसरे खिलाड़ियों के लिए एक अच्छा मौका था, जो शायद टीम में नहीं होते अगर हमारे पास पूरी ताकत वाली बॉलिंग लाइन-अप होती। इसी वजह से दूसरे खिलाड़ियों के लिए अपनी काबिलियत दिखाने का यह एक शानदार मौका था।” हालांकि, शुभमन गिल का मानना है कि अब टीम के पास ज्यादा प्रयोग करने का समय नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि अब प्रयोग के लिए बहुत समय है। उम्मीद है कि अगली सीरीज से हमारे सभी प्रमुख खिलाड़ी उपलब्ध होंगे। इसके बाद हम उसी टीम कॉम्बिनेशन के साथ खेलना शुरू करना चाहते हैं, जिसे वर्ल्ड कप में उतारने की योजना है।” गिल ने सीरीज में डेब्यू करने वाले अंशुल कंबोज और आकिब नबी का भी समर्थन किया, भले ही उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने कहा, “अंशुल और आकिब ऐसे खिलाड़ी हैं जो भविष्य में भी टीम का हिस्सा रह सकते हैं। प्रसिद्ध कृष्णा के चोटिल होने और सीरीज पहले ही जीत लेने के बाद हमारे पास नए खिलाड़ियों को आजमाने का मौका था, इसलिए हमने इसका फायदा उठाया।” गिल ने खास तौर पर अंशुल कंबोज की तारीफ करते हुए कहा कि वह सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजी भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “अंशुल नंबर-8 पर बल्लेबाजी कर सकते हैं और यह पोजिशन हमारी टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
सोनिया गांधी की आंखों में बाटला हाउस एनकाउंटर के आरोपियों के लिए थे आंसू, कैप्टन स्मित के लिए करुणा का भाव नहीं : सुधांशु त्रिवेदी

नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने एक फ्लाइट में कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की तारीफ की और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “कैप्टन स्मित मच्छार ने फ्लाइट में अपने अदम्य साहस का परिचय दिया है। उनके इस कार्य से सारा देश गौरवान्वित है। पीएम मोदी उनसे बात कर चुके हैं। इजरायल और अमेरिका के राष्ट्रपति उनकी प्रशंसा कर चुके हैं।” उन्होंने कहा कि आज मीडिया में यह भी खबर आई है कि आरोपी पायलट इमाम अल हमामी का अल-कायदा ने तारीफ करते हुए समर्थन किया है। इसी को लेकर सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “इस पर कांग्रेस की ओर से एक भी शब्द, एक भी पोस्ट और एक भी प्रेस वक्तव्य कैप्टन स्मित के लिए न आना यह सवाल खड़ा करता है कि सोनिया गांधी की आंखों में बाटला हाउस एनकाउंटर के आरोपियों के लिए आंसू थे, उनकी आंखों में करुणा का एक भी भाव कैप्टन स्मित मच्छार के लिए दिखाई नहीं दे रहा है।” उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और कहा, “वो बिगड़ैल शहजादा, जो गाजा पर गमजदा था, जो ‘एक्स’ से लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी के प्रस्तावों और अखबारों में आर्टिकल लिखे जा रहे थे, लगता है वो अपने वोटबैंक से इतने खौफजदा हो गए हैं कि उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला। पूरे देश को कांग्रेस के सर्वोच्च नेतृत्व के इस आचरण को देखना चाहिए।” सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “आज हम सीधे कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहते हैं कि आखिर क्यों उन लोगों के मुंह से कैप्टन स्मित मच्छार के लिए एक भी शब्द नहीं निकल रहा, जिन्होंने जाकिर नाइक को शांति का मसीहा कहा, अफजल गुरु को हालात का शिकार बताया, बुरहान वानी को भटका हुआ नौजवान कहा, याकूब मेमन की फांसी को न्यायिक हत्या कहा और बाटला हाउस एनकाउंटर पर आंसू बहाए।” उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित ने ऐसी वीरता दिखाई और इतने लोगों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली लेकिन उनके लिए कांग्रेस के मुंह से एक शब्द नहीं आ रहा। हम इस पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से सीधा जवाब मांगते हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “देश यह भी महसूस कर रहा है कि अगर वोट बैंक की राजनीति इस मानसिकता के हिसाब से चलेगी, तो यह इस देश की विमान को किस हद तक और कहां ले जाकर क्रैश करेगी? आज पूरे देश के सामने यह सोचने और चिंतन करने का विषय है।” वहीं, उन्होंने कहा, “जैसा कि आप सबने देखा, शांति और अहिंसा के प्रतीक महात्मा गांधी की जयंती पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने नई नियुक्तियां कीं और अहम बात यह है कि गांधी जयंती के शुभ अवसर पर उन्होंने इमरान मसूद को यूपी कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका आचरण और रिकॉर्ड क्या रहा होगा। और जब उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान पीएम मोदी को “बोटी-बोटी” करने वाला शर्मनाक बयान दिया था, तब वह कांग्रेस में नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी में थे।” सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मुझे जो कहना है वह यह है कि लगातार हार की हताशा में गर्दन तक डूबे हुए मल्लिकार्जुन खड़गे, जो इतने वरिष्ठ नेता हैं, वह राहुल गांधी की विकृत मानसिकता को क्यों अपनाना चाहते हैं?” उन्होंने कहा, “पूरी विनम्रता के साथ मैं मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछना चाहता हूं कि जब आपका चुनाव हुआ था, तब एक नहीं बल्कि कई कांग्रेस नेताओं ने कम से कम इलेक्टोरल कॉलेज की लिस्ट, यानी कम से कम चुनावी बोर्ड की लिस्ट देने के लिए कहा था लेकिन कांग्रेस ने वह लिस्ट नहीं दी। तो पहला सवाल यह उठता है कि अध्यक्ष पद के लिए आपका चुनाव ही अवैध है। दूसरा दृश्य याद कीजिए जब प्रियंका गांधी या राहुल गांधी का नामांकन हुआ था। सबको वह वीडियो याद होगा जहां परिवार के अन्य सदस्य नामांकन कक्ष के अंदर बैठे थे लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे को अंदर घुसने भी नहीं दिया जा रहा था क्योंकि माना जा रहा था कि अगर वह अंदर आएंगे तो यह अवैध हो जाएगा।
केरल के गृह मंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े 2006 के मामले में विजिलेंस जांच के दिए आदेश

तिरुवनंतपुरम। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच के नए आदेश दिए। यह जांच राज्य के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान लगे आरोपों से जुड़ी है और इसके लिए कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल ने याचिका दायर की थी। यह मामला मलेशियाई सिविल इंजीनियर लीसी बीन से जुड़ा है, जिन्होंने नवंबर 2006 में केरल से लौटने के बाद कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली थी। वह पीएचीआई-बीईएल कंसोर्टियम से जुड़े थे, जो केरल राज्य परिवहन परियोजना (केएसटीपी) के तहत एमसी रोड को अपग्रेड करने का काम कर रहा था। खबरों के अनुसार, इंजीनियर के कथित सुसाइड नोट में कुमार का नाम था, जो उस समय पीडब्ल्यूडी सचिव के पद पर थे। यह मामला परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं और इन दावों से संबंधित है कि बाहरी दबाव के कारण 2006 में की गई शुरुआती विजिलेंस जांच पटरी से उतर गई थी। इन आरोपों पर कार्रवाई करते हुए राज्य के गृह विभाग ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) द्वारा पहले की गई जांच से जुड़ी सभी संबंधित फाइलें मांगी हैं। इन रिकॉर्ड्स की जांच करके यह पता लगाया जाएगा कि मूल कार्यवाही कैसे की गई थी और क्या बाहरी प्रभाव ने इसकी दिशा को प्रभावित किया था। केरल के गृह मंत्री के कार्यालय के अनुसार, चेन्निथला ने विजिलेंस डायरेक्टर को दखलंदाजी के आरोपों की पूरी जांच करने और जांच के नतीजों के आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने कहा कि बाहरी दखल के आरोप गंभीर हैं और इनकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। नई जांच में उन हालात पर ध्यान दिया जाएगा, जिनमें शुरुआती जांच की गई थी और उस समय उठाए गए आरोपों को कैसे संभाला गया था। बता दें कि मलेशियाई सिविल इंजीनियर लीसी बीन ने उस कंसोर्टियम के साथ काम किया था, जिसे एमसी रोड को अपग्रेड करने का काम सौंपा गया था, यह केरल राज्य परिवहन परियोजना का एक अहम हिस्सा था। बाद में उनकी मौत को सड़क सुधार के कामों के प्रशासन और उन्हें पूरा करने से जुड़े आरोपों से जोड़कर देखा जाने लगा। सरकार के इस नए कदम का आधार वेणुगोपाल की याचिका है। यह नई जांच उन आरोपों के बाद शुरू की गई है जिनमें कहा गया था कि पिछली जांच बाहरी दबाव के कारण पटरी से उतर गई थी, जिसके बाद राज्य के गृह विभाग ने दोबारा जांच के लिए रिकॉर्ड मंगाए। कथित सुसाइड नोट में कुमार का जो जिक्र होने की बात कही जा रही है, वह जांच का विषय है। न तो उस कथित जिक्र से और न ही नई जांच की घोषणा से यह साबित होता है कि उन्होंने कोई गलत काम किया है। आगे की कार्रवाई विजिलेंस की जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। सरकार का तत्काल निर्देश है कि रिकॉर्ड हासिल किए जाएं, दखलंदाजी के आरोपों की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या मूल कार्यवाही में कोई गड़बड़ी हुई थी, ताकि यह तय किया जा सके कि आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
उत्तर प्रदेश: सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर खड़े ट्रक से टकराई एंबुलेंस, चार लोगों की मौत

सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में रविवार सुबह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर एंबुलेंस के एक खड़े ट्रक से टकराने के कारण चार लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना की शिकार हुई एंबुलेंस चंडीगढ़ से भारतीय सेना के सूबेदार का पार्थिव शरीर लेकर देवरिया जा रही थी। यह हादसा सुबह करीब 8 बजे अयोध्या-सुल्तानपुर बॉर्डर के पास हलियापुर के नजदीक हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, एंबुलेंस बेकाबू होने के कारण वह सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराई थी, जिससे वह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। मृतकों में एंबुलेंस चालक जसपाल के अलावा राजन सिंह पुत्र भूपति, गौरव सिंह पुत्र सत्यभान और राम समझ पुत्र जयसिंह शामिल हैं। सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनीत जायसवाल ने बताया कि पुलिस को डायल 112 के माध्यम से दुर्घटना की सूचना मिली थी। बताया गया कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 79.6 माइलस्टोन के पास एक एंबुलेंस की अज्ञात वाहन के साथ टक्कर हुई है। इस दुर्घटना पर तत्काल स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उच्च अधिकारियों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनीत जायसवाल ने बताया कि एंबुलेंस में एक सूबेदार (सत्यवान फौजी) का पार्थिव शरीर था। यह एंबुलेंस चंडीगढ़ से देवरिया जा रही थी। हादसे के समय एंबुलेंस में ड्राइवर और सूबेदार के परिजन मौजूद थे। इस घटना में एंबुलेंस सवार सभी लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मृतकों के शव को पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्यवाही के लिए भेजा दिया है। स्थानीय पुलिस मौके पर मौजूद है। पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि सभी मृतकों की पहचान हो चुकी है। ये देवरिया जनपद के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे का संज्ञान लिया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने और राहत व बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “जनपद सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में जनहानि अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। अधिकारियों को परिजनों से संवाद कर हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को सद्गति प्रदान करें।
दिल्ली के कालिंदी कुंज में वीडियो को लेकर ननद-भाभी में झगड़ा, कूदने के दौरान दोनों घायल

नई दिल्ली। दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में एक वीडियो को लेकर हुई बहस के बाद एक महिला कथित तौर पर बालकनी से कूद गई जबकि उसकी ननद घर के शाफ्ट में कूद गई। पुलिस ने बताया कि यह घटना जैतपुर एक्सटेंशन पार्ट-II, खड्डा कॉलोनी के ‘डी’ ब्लॉक में हुई। इसके बाद कालिंदी कुंज पुलिस स्टेशन को एक पीसीआर कॉल मिली कि एक महिला ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना शुक्रवार को हुई, जब रुबिया और फातिमा (नाम बदले गए हैं) के बीच बहस हो गई। बहस तब शुरू हुई जब उनमें से एक ने दूसरी का वीडियो बनाया और उसे किसी और को भेज दिया। जब कालिंदी कुंज पुलिस स्टेशन की टीम और दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, तो पता चला कि 25 साल की रुबीना नामक महिला पहली मंजिल से सड़क की तरफ कूद गई थी और उसे चोटें आई थीं। उसे पहले स्थानीय अस्पताल ‘फेलिज’ ले जाया गया और बाद में आगे के इलाज के लिए पीसीआर गाड़ी से एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। पुलिस ने बताया कि दूसरी महिला, 24 साल की फातिमा ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और फिर घर के शाफ्ट (खुले हिस्से) में कूद गई। अधिकारियों ने कमरा खोला और उसे शाफ्ट के अंदर पाकर बचाव अभियान शुरू किया। पुलिस ने बताया कि स्टेशन ऑफिसर राकेश सिंह की अगुवाई में फायर सर्विस के कर्मचारियों ने उपलब्ध उपकरणों का इस्तेमाल किया और पुलिस टीम के साथ मिलकर फातिमा को उस ‘मुश्किल जगह’ से बाहर निकाला। इसके बाद उसे पीसीआर गाड़ी ‘काइट-22’ से एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। पुलिस ने कहा कि बचाव अभियान पीसीआर और दिल्ली फायर सर्विस की टीमों के साथ मिलकर चलाया गया ताकि दोनों महिलाओं को सुरक्षित बचाया जा सके और उन्हें समय पर इलाज मिल सके।