एशियन गेम्स 2026: प्रणवी ने गोल्फ में भारत को दिलाया ऐतिहासिक गोल्ड मेडल, महिला टीम ने जीता सिल्वर

कासुगाई। एशियन गेम्स 2026 में प्रणवी उर्स ने इतिहास रच दिया है। वह कासुगाई कंट्री क्लब ईस्ट कोर्स में चार दिन तक चले इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। प्रणवी ने इवेंट के आखिरी दिन ‘ईवन पार 70′ का स्कोर किया और कुल ’15-अंडर 265′ के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता। प्रणवी ने महिला टीम को चार दिनों में ’14-अंडर 546’ के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। प्रणवी ने इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। वहीं, अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। अदिति अशोक 14वें स्थान पर रहीं। उन्होंने आखिरी दिन 3-अंडर 67 का स्कोर बनाया और टूर्नामेंट का समापन 2-ओवर 282 के कुल स्कोर के साथ किया। वहीं, दीक्षा डागर संयुक्त 23वें स्थान पर रहीं। उन्होंने चौथे दिन ‘7-ओवर पार’ का स्कोर बनाया और उनका कुल स्कोर 12-ओवर रहा। चीन की यिन रुओनिंग और सिंगापुर की शैनन टैन ने ’14-अंडर पार’ पर रहने के कारण संयुक्त रूप से सिल्वर मेडल जीता। प्रणवी आखिरी दिन दूसरे स्थान पर चल रही टैन से तीन स्ट्रोक की बढ़त के साथ उतरी थीं। तीसरे होल पर उनका प्रदर्शन बहुत खराब रहा, जहां उन्होंने ‘ट्रिपल बोगी’ की, जिससे वह दूसरे स्थान पर खिसक गईं। इसके बाद प्रणवी ने छठे, 10वें और 13वें होल पर तीन ‘बर्डी’ के साथ वापसी की और बढ़त बना ली। आखिर में 18वें होल पर ‘ईवन पार’ स्कोर करके उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। महिला टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए जश्न मनाने का मौका दिया। टीम ने चार दिनों में कुल 14-अंडर 246 का स्कोर बनाया। इस प्रदर्शन के दम पर भारत ने एशियन गेम्स के महिला टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। खास बात यह है कि महिला टीम स्पर्धा में एशियन गेम्स इतिहास का यह गोल्फ में भारत का पहला मेडल है। प्रणवी और भारतीय महिला टीम से आखिरी दिन दो मेडल की उम्मीद थी। अंतिम दौर से पहले प्रणवी शानदार स्थिति में थीं। वह हांगकांग की चौथे स्थान पर चल रही सोफी हान से नौ स्ट्रोक आगे थीं। हालांकि, उन्हें अपनी बढ़त बरकरार रखनी थी और कोई गलती नहीं करनी थी।भारतीय टीम के सामने अदिति अशोक का उदाहरण भी था। अदिति पिछले एशियन गेम्स में तीसरे दिन के बाद पहले स्थान पर थीं, लेकिन आखिरी दिन बढ़त नहीं बचा सकीं और दूसरे स्थान पर खिसक गई थीं। इसके चलते उन्हें गोल्ड की जगह सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था।

नशीले पदार्थों की तस्करी के सरगना नवप्रीत सिंह का प्रत्यर्पण, केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया- ‘मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि’

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि मोदी सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी के सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्किए से वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि भारत सरकार ने कथित नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्किए से भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है, ताकि उस पर ड्रग्स की तस्करी और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा सके। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मोदी सरकार ने तुर्किए से कुख्यात ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह को डिपोर्ट करवाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। नवाब विर्क की फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके तुर्किए की नागरिकता लेने के बाद भी, वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता रहा था।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी एजेंसियों ने उसका पता लगाया, उसकी असली पहचान का खुलासा किया और उसे डिपोर्ट करवाया। आज उसे भारत वापस लाया गया है और ड्रग तस्करी व अन्य अपराधों के मामलों में जेल भेज दिया गया है। इस सफलता के लिए सभी एजेंसियों को बधाई। मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर ड्रग-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।” इससे पहले अप्रैल में मोस्ट वांटेड गैंगस्टर और आतंकवादी दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी और ड्रग तस्करी के संदिग्ध मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किए से भारत वापस लाया गया था। उस समय केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को डोला को तुर्किए से वापस लाने में बड़ी कामयाबी मिली है। डोला की गिरफ्तारी ड्रग्स से जुड़े भगोड़ों और संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्यों को कानून के दायरे में लाने के सरकार के संकल्प को दिखाती है। मई में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) के साथ मिलकर अजरबैजान से भगोड़े प्रभदीप सिंह को प्रत्यर्पित कराया था। यह मामला 358 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़े ड्रग्स के एक बड़े केस से संबंधित था। पुलिस ने बताया कि 2023 से फरार चल रहे प्रभदीप को प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद स्पेशल सेल की तीन सदस्यीय टीम बाकू से भारत वापस लाई थी। भारत और तुर्किए ने 2001 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जो जून 2002 में लागू हुई। यह समझौता दोनों देशों को आतंकवाद और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित भगोड़ों के हस्तांतरण की मांग करने की अनुमति देता है। पिछले मामलों में तुर्किए ने चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों, जिनमें संदिग्ध इस्लामिक स्टेट ऑपरेटिव भी शामिल हैं, को निर्वासित करने में भारत की सहायता की है। ऐसे मामलों में अक्सर इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस और अन्य स्थापित प्रक्रियाओं का उपयोग करके समन्वय किया जाता है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथिंद्र बोस सीने में तेज दर्द के कारण अस्पताल में भर्ती

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथिंद्र बोस को शुक्रवार रात सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल, उनका पूर्वी कोलकाता में ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाईपास के पास एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। नवीनतम जानकारी के अनुसार, उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगभग स्थिर है। अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के मौके पर आयोजित दो कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। उन्होंने दिन भर अन्य कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन कार्यक्रमों से घर लौटने के बाद स्पीकर को अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ। परिवार के सदस्यों ने उन्हें तुरंत प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उनका इलाज तुरंत शुरू हो गया। नवीनतम जानकारी के अनुसार, डॉक्टरों ने विधानसभा अध्यक्ष के कई टेस्ट किए। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, सही समय पर इलाज शुरू होने के बाद से उनकी शारीरिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। फिलहाल वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद मई में उन्हें सर्वसम्मति से सदन का नया अध्यक्ष चुना गया। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रथिंद्र बोस, उत्तर बंगाल के किसी भी विधानसभा क्षेत्र से सदन के अध्यक्ष बनने वाले पहले विधायक हैं। वे पहली बार विधायक बने हैं। वे लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे। बाद में वह भाजपा के साथ सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। 2026 के विधानसभा चुनावों में, उन्होंने कूचबिहार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत भौमिक को 23,000 से अधिक वोटों से हराया। रथिंद्र बोस के साथ, लंबे समय बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा को ऐसा स्पीकर मिला जो कानूनी पेशे से नहीं था। उन्होंने हाल ही में अटलांटा का दौरा किया और वहां बसे बंगाली समुदाय के साथ पश्चिम बंगाल के आर्थिक विकास, राज्य के भविष्य, निवेश की संभावनाओं और राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सुधार सहित विभिन्न मुद्दों पर सार्थक बातचीत की। वहां बोस ने अधिक सार्थक विधायी बहसों को प्रोत्साहित करने और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच लोकतांत्रिक संवाद के लिए एक वातावरण बनाने के बारे में भी अपने विचार साझा किए।