नए एफटीए से उत्तर प्रदेश का निर्यात 2030 तक बढ़कर करीब 5 लाख करोड़ रुपए पहुंचने की उम्मीद: पीयूष गोयल

ग्रेटर नोएडा। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) से भारत के लिए वैश्विक बाजारों में अवसर बढ़ेंगे और उत्तर प्रदेश का निर्यात 2030 तक दोगुना से अधिक बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है, जो कि मौजूदा समय में करीब 2 लाख करोड़ रुपए पर है। ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि निर्यात, निवेश और ग्लोबल मार्केट तक पहुंच बढ़ाने से राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि एफटीए से उत्तर प्रदेश के प्रोडक्ट्स और ब्रांड्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य के उद्यमियों के लिए नए मौके पैदा होंगे। उन्होंने विकास के इस सफर को आगे बढ़ाने के लिए राज्य के व्यापार और इंडस्ट्री जगत से सक्रिय भागीदारी और सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया से भारत में नया निवेश आने की उम्मीद है और बताया कि बेहतर औद्योगिक नीतियों और सक्रिय औद्योगिक योजनाओं की वजह से उत्तर प्रदेश निवेश के लिए एक पसंदीदा जगह बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सेक्टर में बड़ी कंपनियां और ग्लोबल निवेशक आ रहे हैं, जिससे रोजगार के नए मौके बन रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने राज्य के विकास को आगे बढ़ाने में आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और उत्तर प्रदेश के युवाओं की बेहतर होती कारीगरी और तकनीकी कौशल की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर के अंतरराष्ट्रीय आयोजन ग्लोबल मार्केट तक सीधी पहुंच का मौका देते हैं, जिससे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग तरह के उत्पाद, खान-पान और सेवाएं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच पाती हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, आधुनिक एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल पार्क के विकास पर जोर दिया और डिफेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आधुनिक हाई-टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में राज्य की बढ़ती मौजूदगी का जिक्र किया। उन्होंने ग्रेटर नोएडा में एक बड़ी रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के विस्तार का भी उदाहरण दिया, जो आधुनिक औद्योगिक विकास और तकनीकी प्रगति को दर्शाता है।
जब लता मंगेशकर को चुभ गया था दिलीप कुमार का मजाक, फिर मौलाना से ली उर्दू की तालीम

नई दिल्ली। भारत की स्वर कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर की आवाज से शायद ही कोई अनजान हो। उन्होंने हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी और बंगाली जैसी कई दूसरी भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उनकी गायकी में शब्दों का उच्चारण, भाव और आवाज की मिठास इतनी खास थी कि हर गीत सीधे दिल तक पहुंचता था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लता मंगेशकर ने अपने उर्दू उच्चारण को बेहतर बनाने के लिए बाकायदा उर्दू की तालीम ली थी। इसके पीछे का दिलचस्प किस्सा मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार से जुड़ा है। लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था। कम उम्र से ही उनका जुड़ाव संगीत से हो गया था। पिता दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की शुरुआती शिक्षा लेने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर फिल्मी दुनिया में अलग पहचान बनाई। कहा जाता है कि साल 1947 में संगीतकार अनिल विश्वास ने लता मंगेशकर की मुलाकात अभिनेता दिलीप कुमार से कराई थी। यह मुलाकात बेहद खास थी, क्योंकि उस समय लता अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं और दिलीप कुमार फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन चुके थे। दिलीप कुमार को जब पता चला कि लता मंगेशकर महाराष्ट्रीयन हैं, तो उन्होंने उनके उर्दू उच्चारण को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो गायक उर्दू भाषा से अच्छी तरह परिचित नहीं होते, उन्हें उर्दू के शब्दों के सही उच्चारण में परेशानी होती है। लता मंगेशकर को उस समय यह बात चुभ गई। हालांकि बाद में उन्होंने इस टिप्पणी को सिर्फ आलोचना के तौर पर नहीं लिया। उन्होंने इस पर गंभीरता से विचार किया और घर लौटने के बाद उर्दू सीखने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने एक विद्वान मौलाना से उर्दू की तालीम लेना शुरू किया। उन्होंने उर्दू के शब्दों के उच्चारण, उनके सही इस्तेमाल और भाषा की बारीकियों को समझने पर ध्यान दिया। बाद में लता मंगेशकर ने दिलीप कुमार की आत्मकथा ‘द सब्सटेंस एंड द शैडो: एन ऑटोबायोग्राफी’ में इस मुलाकात और उर्दू सीखने के अनुभव को याद किया। उन्होंने इस टिप्पणी को अपने लिए एक तरह का अनजाना तोहफा बताया था। उनका मानना था कि उस बातचीत ने उन्हें अपनी कमी पहचानने और उसे दूर करने की प्रेरणा दी।
तृणमूल-सीपीआई(एम) की नजदीकी पर सुवेंदु अधिकारी का तंज, बोले- यह ‘सुविधा की शादी’

कोलकाता। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई (एम) के बीच राष्ट्रीय स्तर पर बन रही समझ को लेकर चल रही अटकलों के बीच पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को इस उभरती हुई समझ को परोक्ष रूप से ‘सुविधा की शादी’ करार दिया। सीएम सुवेंदु अधिकारी की यह टिप्पणी हाल ही में एक मीडिया हाउस की रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के शीर्ष अधिकारियों के बीच ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) को लेकर मतभेदों के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सीपीआई (एम) के महासचिव एम.ए. बेबी के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का जिक्र किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा, “एम.ए. बेबी और ममता बनर्जी के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का मकसद साफ तौर पर राजनीतिक समझ बनाना था। एक समय था जब पश्चिम बंगाल की जनता ने सीपीआई (एम) को हटाने के लिए तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया था। और अब तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई (एम) दोस्त बन गए हैं। ममता बनर्जी ने सीपीआई (एम) से हाथ मिला लिया है। अब सीपीआई (एम) उनकी दोस्त बन गई है। यह सब सिर्फ खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इन सबके बावजूद वह राज्य में अपनी स्थिति नहीं बदल पाएंगी।” सीएम सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के उन आरोपों का भी जिक्र किया जिनमें कहा गया था कि एसआईआर के कारण पश्चिम बंगाल में 27 लाख से ज्यादा असली वोटरों के नाम हटा दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा, “अब वह अपनी हार का दोष भाजपा, ईसीआई और एसआईआर पर मढ़ रही हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वह एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। इन न्यायिक अधिकारियों ने ही फैसले लिए थे।” उन्होंने यह भी दावा किया कि ममता बनर्जी समेत विपक्ष के नेता बाद के चुनावों में अपनी हार के लिए एसआईआर को बहाना बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “पश्चिम बंगाल में हमने 208 सीटें जीतीं। तृणमूल कांग्रेस सिमटकर सिर्फ 80 सीटों पर रह गई। ममता बनर्जी जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। अब तो उन्होंने उस पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी खो दिया है जिसे उन्होंने ही बनाया था।” सीएम ने शनिवार दोपहर हुगली जिले के श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की रैली में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों की बहुत कम मौजूदगी का मजाक भी उड़ाया।
एसआईआर पर उलझी हुई है रिपोर्ट, जब तक सीबीआई जांच नहीं होगी, कुछ भी पता नहीं चलेगा: आनंद दुबे

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग, एसआईआर और राम मंदिर समेत कई मामलों पर प्रतिक्रिया दी है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए आनंद दुबे ने कहा, “हम राजनीतिक दल हैं। हम राजनीतिक दलों के बारे में बात कर सकते हैं। यह कोई तिलचट्टा-मिलचट्टा, छिपकली, यह कोई एनजीओ जैसा नहीं है। 10 लोग आपस में मिलकर कोई टीम बना दें, तो यह कोई बात करने लायक नहीं हैं और हमें इन पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है। आंदोलन करना सभी का अधिकार है, आप करिए।” आनंद दुबे ने कहा, “चुनाव आयोग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई है। हमारी मांग है कि जो कुछ भी हो, पारदर्शी ढंग से हो। कोई लुका-छिपी और धांधली न की जाए। मेरा मानना है कि विपक्ष के इतने दबाव के बाद ही सही चुनाव आयोग बैकफुट पर है। चुनाव आयोग की ओर से समय सीमा बढ़ा दी गई है। मेरा मानना है कि यह जनता की बहुत बड़ी जीत है। सरकार और चुनाव आयोग की किरकिरी जैसा है, क्योंकि उनकी चोरी पकड़ी गई है।” उन्होंने कहा, “एसआईआर की प्रक्रिया सबसे पहले बिहार से शुरू हुई थी। बिहार से होते हुए महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल समेत हर जगह गई। हमारी ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कोई नाम छूट न जाए और गलत ढंग से कोई नाम दर्ज न हो जाए। हमारी इतनी छोटी से लड़ाई है।” राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय, अनिल मिश्र, गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाए जाने पर आनंद दुबे ने कहा, “अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्र में चोरी का मामला जब सामने आया, तभी से सकल हिंदू समाज में गुस्सा और दुख है। क्योंकि इतने वर्षों की तपस्या के बाद हमें मंदिर मिला और मंदिर के दान पात्र में ही चोरी हो गई। यह बहुत ही कलंकित काम किया गया था। और इसमें बहुत सारे आरोप लगे थे। एसआईटी की रिपोर्ट आ गई है, आने वाली है, उस पर चर्चा हो रही है। बहुत सारे लोग, जिन पर आरोप लगे थे, वही गवाह भी बन रहे हैं। यह बहुत ही उलझा हुआ मामला है। इस पर जब तक सीबीआई जांच नहीं होगी, कैसे पता चलेगा कौन क्या है और सच क्या है?” एसआईआर को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर आनंद दुबे ने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी स्वयं भारतीय जनता पार्टी की ‘बी’ टीम हैं। भाजपा और एआईएमआईएम आपस में नूरा-कुश्ती करते हैं। भाजपा ही स्क्रिप्ट देती है, कहानी देती है, योजना देती है कि ‘ओवैसी, तुम आज इस विषय पर बात करोगे और फिर उसका हम खंडन करेंगे।
कोई वोट नहीं चोरी हुई, राहुल गांधी का दिमाग चोरी हो गया है : सीएम फडणवीस

नागपुर। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भले ही संविधान दिखा रहे हैं, लेकिन उनका प्लान कुछ और ही है। उनका मकसद संविधान को सामने रखकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “राहुल गांधी का मकसद सभी संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना और उनके प्रति जनता के मन में अविश्वास पैदा करना है। वे एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिससे लोगों का भरोसा इन संस्थाओं से उठ जाए और देश में अराजकता फैले। जब जनता यह मानने लगेगी कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था उन्हें न्याय नहीं दे सकती, तब इन सभी संस्थाओं को वामपंथी विचारधारा की ओर धकेल दिया जाएगा। यह राहुल गांधी का एक सुनियोजित डिजाइन है।” एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर एसआईआर के जरिए वोट हटाए गए तो टीएमसी कैसे जीती। सीएम फडणवीस ने कहा, “मैं एक सवाल पूछना चाहता हूं। पश्चिम बंगाल के चुनाव में जिन क्षेत्रों में एसआईआर के कारण बड़े पैमाने पर वोट कम हुए, ऐसे कम से कम 15 क्षेत्र हैं जहां टीएमसी जीतकर आई। अगर एसआईआर के जरिए भाजपा-विरोधी वोटों को हटाया गया, तो फिर उन क्षेत्रों में टीएमसी कैसे जीतकर आई?” उन्होंने कहा कि जहां तक एसआईआर का सवाल है, इसमें सभी को अवसर मिलता है। हर राजनीतिक दल प्रत्येक बूथ पर अपना बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए नियुक्त कर सकता है और बीएलए को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है। आप मतदाता सूची के एक-एक पन्ने और एक-एक नाम पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। सीएम फडणवीस ने कहा, “अगर किसी पात्र मतदाता का नाम छूट गया है, तो आप आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं होना चाहिए, तो उस पर भी आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। लेकिन आप इस प्रक्रिया में कुछ करते नहीं हैं, जबकि आपको पता है कि प्रक्रिया चल रही है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रक्रिया में पांच-दस प्रतिशत गड़बड़ी भी हो जाए और किसी व्यक्ति का नाम छूट जाए, तो वह व्यक्ति बाद में जाकर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, “आपको प्रक्रिया में शामिल नहीं होना है, आपको केवल हंगामा खड़ा करना है। आपको पता है कि जनता आपको स्वीकार नहीं कर रही है और आपके पास मुद्दे भी नहीं हैं, इसलिए इस प्रकार के मुद्दे बनाए जा रहे हैं।” राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए सीएम फडणवीस ने कहा, “मैं बहुत साफ शब्दों में कहना चाहता हूं, कोई वोट चोरी नहीं हुई है, राहुल गांधी का दिमाग चोरी हो गया है। और जब उनका दिमाग चोरी हो गया है, तो मैं प्रधानमंत्री से निवेदन करना चाहता हूं कि ऐसी कोई कमेटी भी बनाई जाए, जो उनका दिमाग ढूंढकर उन्हें वापस ला दे, ताकि वे देशहित में बात करें, सही बात करें और सच्ची बात करें।
एशियन गेम्स: स्क्वैश में अभय ने जीता सिल्वर, मगर एलए28 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन से चूके

नागोया। एशियन गेम्स 2026 में रविवार को मेंस सिंगल्स स्क्वैश फाइनल में भारतीय खिलाड़ी अभय सिंह को मलेशिया के मौजूदा चैंपियन ईन यो एनजी के खिलाफ 9-11, 5-11, 5-11 से शिकस्त मिली, जिससे अभय को सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा। इसी के साथ सौरव घोषाल के बाद अभय इस इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने। सौरव ने साल 2014 और 2023 में सिंगल्स इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किए थे। फाइनल में हारने के कारण अभय एलए 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने से चूक गए, जहां स्क्वैश पहली बार शामिल हो रहा है। नागोया किंजो फुतो एरिना में 44 मिनट तक चला यह मुकाबला काफी कड़ा रहा, लेकिन धीरे-धीरे ईन ने अपना नियंत्रण बनाते हुए अभय को वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया। पिछले संस्करण के फाइनल में सौरव घोषाल को शिकस्त देने वाले मलेशियाई खिलाड़ी ने संभलकर शुरुआत करते हुए लंबी रैलियां कीं। अभय ने एक बेहतरीन बैकहैंड शॉट के साथ पहली बढ़त बनाई और कुछ समय के लिए 2-1 से आगे रहे। ईन ने लगातार चार प्वाइंट्स जीतकर 6-3 की बढ़त बना ली, लेकिन अभय ने हार नहीं मानी। एक चालाकी भरे बैकहैंड विनर और एक स्ट्रोक कॉल की मदद से उन्होंने स्कोर 8-8 से बराबर कर लिया। हालांकि, ईन ने 10-8 पर दो गेम प्वाइंट्स हासिल किए और अभय द्वारा एक प्वाइंट्स बचाने के बावजूद पहला गेम 11-9 से जीत लिया। दूसरे गेम की शुरुआत में अभय ने 2-2 से बराबरी बनाए रखी, लेकिन लगातार गलतियों के कारण ईन ने 7-3 की बढ़त बना ली। डिफेंडिंग चैंपियन ने दबाव बनाए रखा और 10-5 के स्कोर पर पांच गेम प्वाइंट्स हासिल किए, जिसके बाद उन्होंने 2-0 की बढ़त के साथ गेम अपने नाम कर लिया। तीसरे गेम में अभय ने अच्छी शुरुआत की। सटीक बैकहैंड स्लाइस और क्रॉसकोर्ट किल के कॉम्बिनेशन से वे 4-2 से आगे हो गए, जिससे वापसी की उम्मीद जगी, लेकिन ईन ने संयम बनाए रखते हुए स्कोर 4-4 से बराबर किया और फिर लगातार तीन प्वाइंट्स जीतकर 7-5 की बढ़त बना ली। दो और प्वाइंट्स के साथ वे 9-5 के स्कोर पर खिताब के बेहद करीब पहुंच गए। 10-5 के स्कोर पर पांच चैंपियनशिप प्वाइंट्स मिलने के बाद, ईन को मुकाबला खत्म करने के लिए सिर्फ एक मौके की दरकार थी। आखिरी रैली में अभय ने स्लाइस की कोशिश की, लेकिन गेंद टिन से टकरा गई और मैच खत्म हो गया। इस जीत के साथ ईन ने एशियन गेम्स का मेंस सिंगल्स खिताब बरकरार रखा और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। इसके साथ ही वे ऐसे पहले स्क्वैश खिलाड़ी बन गए, जिन्होंने आइची-नागोया प्रतियोगिता के दौरान एक भी गेम गंवाए बिना ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया।
‘मन की बात’ देशभर के प्रेरक कहानियों को सामने लाने का माध्यम बन चुका है : नितिन नवीन

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पीएम मोदी की मन की बात कार्यक्रम को देशभर के प्रेरक कहानियों को सामने लाने का माध्यम बताया है। नितिन नवीन रविवार को पश्चिम बंगाल पहुंचे। यहां पर कोलकाता एयरपोर्ट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सहित बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके पश्चात नितिन नवीन ने न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 138वें एपिसोड को सुना। यह नितिन नवीन का पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक विजय के बाद राज्य का पहला प्रवास है। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुना। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के लाखों युवाओं द्वारा नशे के विरुद्ध लिए गए संकल्प और ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं द्वारा स्वयं नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा लेने और इस संदेश को अन्य लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाने की बात कही। नितिन नवीन ने कहा कि भाजपा हमेशा से नशे के मुद्दे को लेकर गंभीर रही है। हमारा लक्ष्य है कि देश को नशे से मुक्त किया जाए। इसी संकल्प के साथ भाजपा लगातार नशे के विरुद्ध लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान कोलकाता में कार्यकर्ताओं एवं आमजनों के साथ प्रधानमंत्री मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 138वें संस्करण को सामूहिक रूप से सुना। इस दौरान प्रधानमंत्री जी ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक की 10वीं वर्षगांठ पर भारतीय सेना के शौर्य, देश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति संरक्षण और युवाओं के नशामुक्ति संकल्प का उल्लेख किया। साथ ही जनगणना को प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए जनभागीदारी का आह्वान किया। ‘मन की बात’ देशभर के ऐसे अनगिनत प्रयासों और प्रेरक कहानियों को सामने लाने का माध्यम बन चुका है, जो सामूहिक प्रयासों के माध्यम से देश में सकारात्मक बदलाव की नई मिसाल कायम कर रहे हैं।