अमेरिकी सेना के एआई सिस्टम पर उठे सवाल, तीन सीनियर सीनेटरों ने की जांच की मांग

वाशिंगटन। अमेरिकी सेना और खुफिया ऑपरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के फेल होने की खबरों के बाद अमेरिका में हड़कंप मच गया है। तीन सीनियर अमेरिकी सीनेटरों ने इन मामलों की जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि गलत डेटा और एआई से बनी झूठी जानकारी से जानलेवा गलतियां हो सकती हैं। सीनेटर मार्क वार्नर, जैक रीड और क्रिस कून्स ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन से कहा है कि वे इंस्पेक्टर जनरल को इन घटनाओं की जांच के लिए पूरी छूट दें। मार्क वार्नर सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी में सीनियर डेमोक्रेट हैं। जैक रीड सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के रैंकिंग मेंबर हैं, जबकि क्रिस कून्स सीनेट की रक्षा सबकमेटी में डेमोक्रेट्स का नेतृत्व करते हैं। सीनेटरों ने पत्र में सार्वजनिक रिपोर्टों का हवाला दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मिनाब में अमेरिकी हमले के दौरान एआई टारगेटिंग प्लेटफॉर्म ने पुराने भौगोलिक डेटा का इस्तेमाल किया था। दूसरा मामला स्पेशल ऑपरेशंस कमांड पैसिफिक से जुड़ा है, जहां एआई से बनी गलत जानकारी को अमेरिकी खुफिया जानकारी में शामिल कर दिया गया, जिसके कारण एक सैन्य अभियान को बीच में ही रोकना पड़ा। सीनेटरों ने मिनाब हमले या रोके गए मिशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। उनके द्वारा जारी की गई सामग्री में इन खामियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सीनेटरों ने पत्र में लिखा, “हाल की घटनाओं ने हमें चिंतित कर दिया है। सार्वजनिक रिपोर्ट है कि मिनाब, ईरान में हमले में एआई टारगेटिंग प्लेटफॉर्म ने पुराने डेटा पर भरोसा किया और एक रिपोर्ट है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड पैसिफिक द्वारा फैलाई गई खुफिया जानकारी में एआई की गलत जानकारी के कारण एक सैन्य अभियान रोकना पड़ा। इससे लगता है कि आपकी निगरानी वाली एजेंसियों ने एआई की क्षमता को तेजी से अपनाने और प्रयोग को सही निगरानी से ज्यादा महत्व दिया है।” उन्होंने चेतावनी दी कि टारगेटिंग और इंटेलिजेंस सिस्टम में गलतियों से ऑपरेशन फेल हो सकते हैं और अमेरिकी जनता और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के बीच अमेरिकी खुफिया जानकारी पर भरोसा कमजोर हो सकता है। सीनेटरों ने लिखा, “सार्वजनिक रिपोर्ट है कि एआई टारगेटिंग प्लेटफॉर्म ने बार-बार गलत जानकारी दी है, जो पुराने डेटा या पूरी तरह से गलत जानकारी पर आधारित है, इससे गंभीर ऑपरेशनल गलती का खतरा है।” उन्होंने कहा कि ऐसी विफलताओं से ‘अमेरिकी खुफिया और खुफिया जानकारी पर आधारित सैन्य कार्रवाई की सटीकता और विश्वसनीयता’ पर भरोसा कम हो सकता है। सीनेटरों ने इंस्पेक्टर जनरल से तुरंत जांच और नतीजों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने पेंटागन पर एक बड़ी अमेरिकी एआई कंपनी पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, यह कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से ऑटोनॉमस ऑपरेशन में इस्तेमाल करने की इजाजत देने से बच रही थी। हालांकि बयान में कंपनी का नाम नहीं बताया गया। सीनेटरों ने लिखा, “ये संभावित गलतियां, इस पृष्ठभूमि में कि रक्षा विभाग ने एक प्रमुख अमेरिकी एआई कंपनी को परेशान किया क्योंकि वह अपने प्रोडक्ट को पूरी तरह से ऑटोनॉमस हमलों में इस्तेमाल नहीं होने देना चाहती थी, इनकी इंस्पेक्टर जनरल द्वारा तुरंत जांच होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि एआई खुफिया विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इस पर सख्त प्रोफेशनल मानकों और मानवीय निगरानी की जरूरत है। सीनेटरों ने लिखा, “एआई का एनालिटिक और अन्य क्षेत्रों में सही इस्तेमाल है, मजबूत मानकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी खुफिया प्रोडक्ट में एआई से बनी गलतियां न हों, खासकर जब ऐसी खुफिया जानकारी परमाणु हथियार वाले दुश्मन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का कारण बन सकती है।” उन्होंने सरकार द्वारा नेशनल सिक्योरिटी मेमोरेंडम 25 को रद्द करने और रक्षा विभाग की एक रणनीति की भी आलोचना की, जो उनके अनुसार, निगरानी की जरूरतों को तेजी से एआई अपनाने में बाधा मानती है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर ‘ मूव फास्ट एंड ब्रेक थिंग्स’ वाला तरीका चल सकता है, लेकिन इससे गंभीर ऑपरेशनल गलतियां हो सकती हैं।” सीनेटरों ने जांचकर्ताओं से इन दो घटनाओं की जांच करने और यह पता लगाने को कहा है कि क्या एआई टारगेटिंग से जुड़ी अन्य बड़ी विफलताएं भी हुई हैं जो सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अमेरिकी सेना निगरानी की जानकारी को प्रोसेस करने, पैटर्न पहचानने और ऑपरेशनल फैसलों में मदद के लिए तेजी से एआई का इस्तेमाल कर रही है। इससे डेटा की सटीकता, जवाबदेही और मानवीय नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है, खासकर जब एआई से बनी खुफिया जानकारी घातक बल के इस्तेमाल का कारण बन सकती है। इस मुद्दे का असर भारत सहित अमेरिका के रक्षा सहयोगियों पर भी पड़ेगा, क्योंकि सेनाएं खुफिया और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ा रही हैं।

जयशंकर ने की पी4एम समिट की अध्यक्षता, कहा- वर्ल्ड ऑर्डर दबाव में, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना जरूरी

नई द‍िल्‍ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल सेशन के ल‍िए न्‍यूयार्क पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (पी4एम)’ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, “यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (पी4एम)’ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करके खुशी हुई।” व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, सम्‍मेलन को संबोध‍ित करते हुए व‍िदेश मंत्री जयशंकर ने भारत को को-स्पॉन्सर के तौर पर इसमें शामिल करने पर खुशी जाह‍िर की। साथ ही प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा का आभार व्‍यक्‍त क‍िया। मंत्री जयशंकर ने कहा क‍ि हम ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब दुनिया की मौजूदा व्यवस्था दबाव में है। पिछले कुछ दशकों में दुनिया में ताकत का संतुलन धीरे-धीरे बदलता रहा है। यह एक ऐसा बड़ा बदलाव था, जिसकी लंबे समय से उम्मीद की जा रही थी। लेकिन अब बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस बदलाव को बिल्कुल अलग रूप दे दिया है। अगर इसे ऐसे ही बढ़ने दिया गया, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि इस समय बहुपक्षीय सहयोग को मजबूती से आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्‍होंने कहा क‍ि यहां सिर्फ शब्दों या बयानों की बात नहीं है, बल्कि कई ऐसे मुद्दे दांव पर हैं जिनका वास्तविक असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य, जलवायु के लिए कार्रवाई और जलवायु न्याय, नई तकनीक, विकास के लिए वित्तीय मदद, आतंकवाद का मुकाबला, सप्लाई चेन को मजबूत बनाना, आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाना और महामारियों के लिए तैयारी, ये सभी इस बात पर निर्भर करते हैं कि हम आपस में मिलकर काम करने के लिए कितने तैयार हैं। उन्‍होंने कहा क‍ि हमें यह समझना होगा कि हमने अब तक जो भी हासिल किया है, वह सामूहिक कोशिशों से ही संभव हुआ है। इससे हमें यही सीख मिलती है कि जो अच्छा हासिल किया गया है, उसे बचाकर रखा जाए और साथ ही उसे और बेहतर बनाने की कोशिश की जाए। व‍िदेश मंत्री ने कहा क‍ि इस लक्ष्य को कई अलग-अलग कोशिशों और पहलों को मिलाकर हासिल किया जा सकता है। जहां मौजूदा संघर्षों की बात है, वहां व्यापक शांति के लिए कोशिश जारी रखते हुए संघर्ष से जुड़े खास मुद्दों पर भी अलग से काम किया जा सकता है। फ्यूल, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस से जुड़े ‘4-एफ संकट’ को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। जहां नई क्षमताएं और नई चिंताएं सामने आ रही हैं, वहां उनके लिए स्पष्ट नियम, ढांचे और जरूरी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की मजबूत जरूरत है। उन्‍होंने कहा क‍ि जहां किसी अहम सप्लाई या रास्ते पर किसी एक का ज्यादा नियंत्रण होने या उसमें रुकावट आने का खतरा हो, वहां जोखिम कम करने और विकल्प बढ़ाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जहां कोई अहम मुद्दा हो या किसी कदम के पक्ष में मजबूत वजह हो, वहां एक जैसी सोच रखने वाले देशों को साथ आने का भरोसा होना चाहिए। बहुपक्षीय सहयोग तभी बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकता है, जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और तय मानकों का पूरी गंभीरता से पालन किया जाए। मंत्री ने कहा क‍ि बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ उसका समर्थन करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे असल में लागू करने के तरीके को भी मजबूत करना होगा। इसलिए बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है। उन्‍होंने कहा क‍ि चर्चाओं में ज्यादा भागीदारी और फैसले लेने की प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता लंबे समय से जरूरी है। इससे संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था में वह उम्मीद और सकारात्मक सोच पैदा हो सकती है, जिसकी इस समय साफ तौर पर जरूरत है। साथ ही, इससे मिलकर काम करने का हमारा इरादा भी और मजबूत होगा। बैठक के दौरान व‍िदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अन्‍य देश के नेताओं से भी मुलाकात की और भारत के द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीड‍िया ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर ल‍िखा, ”यूएनजीए-81 सत्र के दौरान मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई के साथ अच्छी बैठक हुई। हमने भारत और मोल्दोवा के बीच राजनीतिक, आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों और हुई प्रगति पर चर्चा की। साथ ही, यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी एक-दूसरे के विचार साझा किए।” एक अन्‍य पोस्‍ट पर ल‍िखा, ”हाल ही में यूक्रेन की मेरी यात्रा के बाद, वहां के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से एक बार फिर मिलने का मौका मिला, जिसका मैंने स्वागत किया। हमारी बातचीत पिछले कुछ हफ्तों में हुए घटनाक्रम पर केंद्रित रही।

महाराजा अग्रसेन की जयंती पर ओम बिड़ला समेत कई नेताओं ने दीं शुभकामनाएं

नई दिल्ली। लोककल्याण, सेवा, समरसता और सुशासन के महान प्रेरणास्रोत, प्रजापालक महाराजा अग्रसेन की जयंती के अवसर पर नेताओं ने शुभकामनाएं दी हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “लोककल्याण, सेवा, समरसता और सुशासन के महान प्रेरणास्रोत, प्रजापालक महाराजा श्री अग्रसेन जी की जयंती पर सभी को शुभकामनाएं। महाराजा श्री अग्रसेन जी का जीवन भारतीय समाज की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसमें राजधर्म का अर्थ जनकल्याण, न्याय, समानता और समाज के प्रत्येक वर्ग के सम्मान की रक्षा करना माना गया है।” ओम बिड़ला ने आगे लिखा, “उन्होंने अपने आचरण और विचारों से ऐसी सामाजिक व्यवस्था का संदेश दिया, जिसमें सहयोग, सहभागिता, सरोकार और परस्पर विश्वास को विशेष स्थान प्राप्त हो। महाराजा अग्रसेन जी की जीवन-दृष्टि का मूल भाव ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ में निहित है। महाराज अग्रसेन के अनन्य उपासक अग्रवाल समाज उनके आदर्श को अंगीकार कर लोक कल्याण के भाव से अनेक कार्य देशभर में कर रहा है। देश और दुनियाभर में निवास कर रहे अग्र बंधुओं-बहनों को विशेष हार्दिक बधाई व मंगलकामनाएं।” हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “करुणा, त्याग, सेवा और मानवता के प्रतीक महाराजा अग्रसेन जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों को आत्मसात करते हुए अग्रवाल समाज ने सदैव सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आइए, उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर जनसेवा और विकसित हरियाणा के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करें।” भाजपा नेता संजय भाटिया ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “समता, समरसता व समानता का संदेश देने वाले महाराजा अग्रसेन जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।” हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष सुमन सैनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “महाराजा अग्रसेन जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। उनके आदर्शों में सेवा, समानता और समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण की भावना निहित थी, जो आज भी हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। महाराजा अग्रसेन जी ने समाज को ‘एक ईंट, एक रुपया’ जैसी परंपरा के माध्यम से परस्पर सहयोग और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। उनकी यही सोच सामाजिक एकता और सामूहिक प्रगति की मजबूत आधारशिला है।” भाजपा नेता महेंद्र भट्ट ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “समाज कल्याण, गरीबों के उत्थान और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाले लोकनायक, कर्मयोगी महाराज अग्रसेन जी की जयंती पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।” छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री रामविचार नेतराम ने सोशल मीडिया पर लिखा, “समाजवाद के अग्रदूत महाराजा अग्रसेन जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन एवं समस्त प्रदेश वासियों को ‘अग्रसेन जयंती’ की हार्दिक शुभकामनाएं।” उत्तराखंड सरकार में मंत्री गणेश जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “सामाजिक समरसता, समानता और जनकल्याण के प्रेरणास्रोत महाराजा अग्रसेन जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। सहयोग, बंधुत्व और सर्वजन हिताय की भावना पर आधारित उनके आदर्श आज भी एक सशक्त एवं समतामूलक समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनका प्रेरणादायी जीवन हमें समाज की एकता, परस्पर सहयोग और प्रत्येक व्यक्ति के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने की दिशा दिखाता रहेगा।

भस्म आरती: परिवर्तनी एकादशी पर बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार, अर्पित किए गए राम नाम के बेल पत्र

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी (परिवर्तनी एकादशी) तिथि पर, मंगलवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंगलवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े, और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार कर राम नाम के बेल पत्र अर्पित किए गए। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सालाना सत्र में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अराघची

तेहरान। संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक के 81वें सत्र में भाग लेने के ल‍िए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के साथ सोमवार दोपहर न्यूयॉर्क पहुंचे। ईरान के व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा के सालाना शिखर सम्मेलन में अराघची इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का पक्ष रखेंगे। ईरान के व‍िदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता इस्‍माइल बाघेई ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर यह जानकारी साझा की। बाघेई ने पोस्‍ट में ल‍िखा, ”ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची सोमवार दोपहर एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के साथ न्यूयॉर्क पहुंचे। वह वहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के सालाना सत्र की बैठकों और चर्चाओं में हिस्सा लेंगे। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय भी है। महासभा के अलग-अलग एजेंडे और बैठकों में हिस्सा लेने के साथ-साथ ईरानी विदेश मंत्री इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का रुख भी सामने रखेंगे।” उन्‍होंने बताया क‍ि इसके अलावा, वह इस सम्मेलन में आए कई देशों के अधिकारियों और विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत और विचार-विमर्श भी करेंगे। बाघेई ने कहा क‍ि संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सालाना सत्र मंगलवार से राष्ट्राध्यक्षों के भाषणों के साथ शुरू होगा। इस बार इसका संदेश ‘रीबिल्डिंग ट्रस्ट’ यानी ‘भरोसा फिर से कायम करना’ है। इससे पहले सोमवार को ही अमेर‍िका ने राष्ट्रपति पेजेश्कियन की टीम को वीजा देने से इनकार कर द‍िया। अमेरिका ने ईरानी डेलिगेशन को संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए आने की मंजूरी तो दे दी है, लेकिन पिछले साल की तरह ही कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं। जैसे उदाहरण के लिए, विदेश विभाग ने गुरुवार को कहा कि ईरानी डेलिगेशन को लग्जरी सामान या अन्य चीजें खरीदने की इजाजत नहीं होगी। ईरान की मीडिया ने सोमवार को बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक के 81वें सत्र में शामिल हो रहे राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की कम्युनिकेशन टीम को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के एक प्रवक्ता का हवाला देते हुए यह खबर दी और कहा कि पेजेश्कियन बुधवार को यूएन जनरल असेंबली को संबोधित करेंगे। पेजेश्कियन न्यूयॉर्क के लिए मंगलवार को रवाना होंगे।

धोनी की सलाह के बिना हम कुछ नहीं करते, जहीर के सीएसके का हेड कोच बनने पर बोले केएस विश्वनाथन

नई दिल्ली। चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) ने आईपीएल 2027 के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान को अपना मुख्य कोच नियुक्त किया है। फ्रेंचाइजी ने सोमवार को इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की। सीएसके के मुख्य कोच के रूप में जहीर खान की नियुक्ति पर टीम के मैनेजिंग डायरेक्टर केएस विश्वनाथन ने आईएएनएस से कहा, “मैनेजमेंट ने यह फैसला लिया है। हम जहीर खान को उनके अनुभव के आधार पर हेड कोच बनाना चाहते थे। उन्होंने आईपीएल में 100 से ज्यादा मैच खेले हैं। हमें लगा कि वह एक अच्छा विकल्प होंगे और हमने उनके नाम को अंतिम रूप दिया।” जहीर के चयन में एमएस धोनी की भूमिका पर विश्वनाथन ने कहा, “निश्चित रूप से, जब यह फैसला लिया गया तो वह इसका हिस्सा थे। उनकी सलाह के बिना, हम कुछ नहीं करते।” उन्होंने यह भी कहा कि जहीर अपना सपोर्ट स्टाफ खुद चुन सकेंगे। वह अपने सपोर्ट स्टाफ का फैसला करेंगे। सीएसके में खिलाड़ी के तौर पर धोनी के भविष्य से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “देखिए, वह हमारे लिए एक खिलाड़ी बने रहेंगे। मैं बस यही कह सकता हूं।” इससे पहले जहीर की नियुक्ति पर विश्वनाथन ने कहा था, “जहीर एक वर्ल्ड क्लास बॉलर हैं और पिछले कुछ सालों में कई युवा क्रिकेटरों, खासकर तेज गेंदबाजों के मेंटर रहे हैं। एक खिलाड़ी के तौर पर, जहीर 2000 के दशक में भारत की सफलता के मुख्य कारणों में से एक थे। वह सबसे बेहतरीन क्रिकेटिंग दिमागों में से एक हैं और हम उन्हें अपने परिवार में शामिल करने का इंतजार कर रहे हैं।” सीएसके का हेड कोच नियुक्त होने के बाद जहीर ने कहा, “आईपीएल के इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक का हिस्सा बनना सम्मान की बात है। एक क्रिकेटर के तौर पर, मैंने मैदान पर सीएसके का सामना किया है और मैचों का पूरा मजा लिया है। चेपॉक में सुपरफैन्स ने जो माहौल बनाया है, वह इसे और भी खास बनाता है। मैं इतने शानदार इतिहास और विरासत वाली फ्रेंचाइजी में शामिल होने का इंतजार नहीं कर सकता।

मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला, रियल्टी और डिफेंस में खरीदारी

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में हल्की तेजी के साथ खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 58 अंक या 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,926 और निफ्टी 35 अंक या 0.15 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,449 पर था। शुरुआती बाजार में रियल्टी और डिफेंस स्टॉक्स में खरीदारी देखी जा रही थी। सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी इंडिया डिफेंस करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर्स थे। निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी मेटल, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी प्राइवेट बैंक हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में था। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 224 अंक या 0.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 62,237 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 75 अंक या 0.39 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,939 पर था। सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स,मारुति सुजुकी, एमएंडएम, इटरनल, टाटा स्टील, ट्रेंट, पावर ग्रिड, कोटक महिंद्रा बैंक, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, एसबीआई और आईसीआईसीआई हरे निशान में हैं। एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, भारती एयरटेल और टाइटन लाल निशान में थे। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों और यूएस के 10-साल के बॉन्ड यील्ड में थोड़ी कमी आने से अमेरिकी इक्विटी मार्केट में जोखिम कम हुआ है। इस सकारात्मक बदलाव का असर दूसरे इक्विटी मार्केट पर भी दिखेगा। भारत में, एनएसई आईपीओ के पूरा होने और रिफंड मिलने शुरू होने के साथ सेकेंडरी मार्केट पर फिर से फोकस में आ गया है, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी। ज्यादातर वैश्विक बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और ताइपे हरे निशान में थे। केवल जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार हरे निशान में बंद हुए, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.71 प्रतिशत की तेजी के साथ और नैस्डैक 2.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

बारिश थमते ही दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा प्रदूषण, ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 300 के पार

नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक दिल्ली-एनसीआर के मौसम में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा और तापमान में भी खास उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं है। हालांकि, मौसम साफ होने और बारिश थमने के बाद प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। 22 सितंबर से 24 सितंबर तक आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। इन दिनों में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। वहीं, 25 सितंबर से 27 सितंबर तक आसमान में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। इन दिनों में भी तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा। मौसम साफ होते ही वायु प्रदूषण ने एक बार फिर से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 इलाके का वायु गुणवत्ता सूचकांक 330 तक पहुंच गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, नॉलेज पार्क-3 का एक्यूआई 209 दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां भी कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के आंकड़ों के अनुसार, चांदनी चौक का एक्यूआई 235, आनंद विहार का 208, बवाना का 203 और कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का 162 दर्ज किया गया है। इसके अलावा, बुराड़ी क्रॉसिंग (159), सीआरआरआई मथुरा रोड (159) और आया नगर (127) जैसे इलाके भी प्रदूषण की चपेट में हैं। गाजियाबाद में भी हवा की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। यहां लोनी का एक्यूआई 203, वसुंधरा का 187, इंदिरापुरम का 186, वेद विहार-लोनी का 171, संजय नगर का 164 और गोविंदपुरम का 123 दर्ज किया गया है। एनसीआर में मौसम तो शुष्क और साफ बना हुआ है, लेकिन यह साफ मौसम प्रदूषण के लिए मुफीद साबित हो रहा है। बारिश न होने के कारण हवा में मौजूद प्रदूषक कण जमा हो रहे हैं, जिससे दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में एक्यूआई ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया है।

तमिलनाडु : सीएम विजय छठी से आठवीं कक्षा के लिए विस्तारित ‘कामराज नाश्ता योजना’ शुरू करेंगे

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय मंगलवार को थिरुवनमियूर के गांधीग्राम स्थित ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन मिडिल स्कूल में ‘पेरुंथलैवर कामराज ब्रेकफास्ट स्कीम’ (नाश्ता योजना) के विस्तार का शुभारंभ करेंगे। उद्घाटन से पहले पूरे राज्य में तैयारियां चल रही थीं और सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कर्मचारी नाश्ता बना रहे थे। इस विस्तार से छठी से आठवीं कक्षा तक के छात्र भी इस योजना के दायरे में आ जाएंगे, जिससे इसका लाभ केवल प्राथमिक स्कूल के बच्चों तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह नाश्ता कार्यक्रम मूल रूप से तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 2022 में सरकारी स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए शुरू किया था। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटना, स्कूल में उपस्थिति बढ़ाना और छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़ने के बजाय अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना था। बाद में इस योजना का विस्तार सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तक किया गया। इस हालिया विस्तार से पहले, इसमें तमिलनाडु भर के 37,447 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 19.34 लाख छात्र शामिल थे। टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद, इस कार्यक्रम का नाम बदलकर ‘मुख्यमंत्री कामराज नाश्ता योजना’ कर दिया गया। बाद में विजय ने घोषणा की कि इसे छठी, सातवीं और आठवीं कक्षाओं तक बढ़ाया जाएगा, जिससे 15.30 लाख और छात्र इसके दायरे में आ जाएंगे। इस विस्तार के बाद, कार्यक्रम से कुल 34.64 लाख छात्रों को लाभ होगा जो 44,984 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे हैं। राज्य सरकार ने विस्तारित योजना को लागू करने के लिए अतिरिक्त 217.63 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। शुरुआत में इसे 17 सितंबर को लॉन्च किया जाना था, जो समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती है। हालांकि, इसे टाल दिया गया क्योंकि मुख्यमंत्री तमिलनाडु में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए लंदन गए हुए थे। यह योजना मंगलवार से पूरे राज्य में लागू की जाएगी, सिवाय चेंगलपट्टू और तिरुप्पुर जिलों के, जहां क्रमशः मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं। तय साप्ताहिक मेनू के अनुसार, छात्रों को सोमवार को उपमा, मंगलवार को खिचड़ी, बुधवार को पोंगल और गुरुवार को फिर से उपमा परोसा जाएगा। शुक्रवार को मीठा व्यंजन परोसा जाएगा। स्कूल अधिकारियों और खाना बनाने वाले कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि भोजन साफ-सुथरे तरीके से पकाया जाए और समय पर परोसा जाए। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस व्यापक दायरे से मिडिल स्कूल के छात्रों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के पोषण, उपस्थिति और सीखने के परिणामों में सुधार होगा।