पेरेंट्सहुड को इंजॉय कर रहे दिव्यांका-विवेक, कहा – हमारी दुनिया ही बदल गई

मुंबई। टेलीविजन इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया इन दिनों पेरेंट्सहुड को इंजॉय कर रहे हैं। कपल का कहना है कि बच्चों के आने के बाद उनकी जिंदगी में प्राथमिकताएं बदल गई हैं। कपल ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि वे पूरे दिन अपने बच्चों के बारे में सोचते रहते हैं। उनकी जिंदगी अपने बच्चों की देखभाल करने और उनके साथ समय बिताने के ईर्द-गिर्द घूमती रहती हैं। उन्होंने कहा, “सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पहले हम अपने और एक-दूसरे के बारे में सोचते थे। अब हमारी पहली प्राथमिकता और सारा ध्यान हमारे बच्चों पर है।” दिव्यांका और विवेक दहिया ने बताया कि उनका दिन अपने बच्चों के बारे में सोचते हुए ही शुरू होता है कि वे ठीक है या नहीं। कपल ने कहा, “जब हम सुबह उठते हैं, तो हमारा पहला ख्याल यही होता है कि क्या बच्चे रो रहे हैं? क्या बच्चे ठीक हैं? क्या हमें जाकर उन्हें देखना चाहिए? और अगर वे ठीक हैं, तो हमारा मन करता है कि उनके साथ खेलें।” उन्होंने आगे कहा, “बस बात यह है कि हमने कभी अपने बारे में उतना नहीं सोचा जितना हम नए लोगों के बारे में सोचते हैं।” एक्टर्स ने यह भी बताया कि पेरेंटहुड ने उनकी प्रोफेशनल लाइफ को देखने का तरीका कैसे बदल दिया है। उन्होंने कहा, “हम सोचते थे कि हमें अपने काम में कुछ अच्छा करना चाहिए। अब हमें लगता है कि हम जो भी करें, वह बच्चों के लिए अच्छा होना चाहिए।” दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया टीवी इंडस्ट्री के सबसे चर्चित और पसंदीदा कपल्स में से एक हैं। दोनों की मुलाकात टीवी शो ‘ये है मोहब्बतें’ के सेट पर हुई थी। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। जनवरी 2016 में दोनों ने सगाई की और इसके करीब पांच महीने बाद, जुलाई 2016 में भोपाल में शादी कर ली। अब शादी के कुछ सालों के बाद अब दोनों के घर में दो-दो बेटों का जन्म हुआ, जिससे उनकी जिंदगी में एक नए और बेहद खूबसूरत अध्याय की शुरुआत हो चुकी है।

बिग बी ने मोतीलाल, सावित्री को किया याद, लिखा-उन्होंने अभिनय नहीं, परफॉर्म किया

मुंबई। मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और अक्सर ब्लॉग के जरिए अपने विचार साझा करते रहते हैं। अभिनेता ने हाल ही में सहज अभिनय की दुर्लभ कला पर अपने विचार साझा किए। अभिनेता ने मोतीलाल, गीता बाली और सावित्री को याद करते हुए कहा कि इन कलाकारों की स्वाभाविक प्रतिभा ने ही उन्हें दर्शकों का इतना प्यार और सम्मान दिलाया। मेगास्टार ने अपने ब्लॉग की शुरुआत में लिखा, “थोड़ा चिंतन कभी भी बुरा नहीं होता। कई विचार मन में आते हैं, काम से जुड़े और कई दूसरे भी लेकिन तब वे ज्यादा असरदार होते हैं जब आप अपने स्वभाव में सहजता लाते हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “अक्सर किसी पल को बेहतर बनाने के लिए की गई बड़ी-बड़ी घोषणाएं, मेरे हिसाब से कभी काम नहीं करतीं है। आज के समय में सहजता से अपनी बात कहना ही सही तरीका है। आखिर क्या हम रोज अपनी दिनचर्या में कोई घोषणा करते हैं या सहज रहते हैं, मैं कहूंगा कि सहजता ही सभी चीजों की नींव है।” बाद में ब्लॉग में अमिताभ ने सहज अभिनय के बारे में बात करते हुए मोतीलाल, गीता बाली और सावित्री जैसे कलाकारों को याद किया, जिनका काम कभी भी बनावटी नहीं लगता था। उन्होंने लिखा, “जिन अभिनेताओं में बिना अभिनय के अभिनय करने की स्वाभाविक प्रतिभा होती है, वही सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं और उनके चाहने वाले भी बहुत होते हैं। मोतीलाल जी, गीता बाली, सावित्री तुरंत दिमाग में आने वाले कुछ नाम हैं, हालांकि और भी कई शानदार कलाकार हैं। उन्होंने अभिनय नहीं किया बल्कि परफॉर्म किया और उन्हें उतना ही प्यार और सम्मान मिला।” मेगास्टार अमिताभ इन दिनों क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति-20’ में नजर आ रहे हैं, जो कि ब्रिटिश शो ‘हू वांट्स टू बी अ मिलियनेयर?’ का हिंदी वर्जन है। इसका फॉर्मेट ‘हू वांट्स टू बी अ मिलियनेयर?’ फ्रेंचाइजी के दूसरे शोज जैसा ही है, जिसमें प्रतियोगियों से बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाते हैं और उन्हें चार विकल्पों में से सही जवाब चुनना होता है। अगर उन्हें जवाब पर शक हो तो मदद के लिए उन्हें लाइफलाइन भी दी जाती है।

व‍िदेश मंत्री जयशंकर का दो द‍िवसीय भूटान दौरा, राजा और प्रधानमंत्री से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया क‍ि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 16 और 17 सितंबर को भूटान दौरे पर रहेंगे। उनकी यह दो द‍िवसीय यात्रा भूटान के विदेश और बाहरी व्यापार मंत्री ल्योंपो डीएन ढुंग्येल के निमंत्रण पर हो रही है। एमईए के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर भूटान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा, उनकी भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से शाही मुलाकात भी तय है। वे भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से भी मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और भूटान के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क की परंपरा को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद घनिष्ठ मित्रता तथा सहयोग को और मजबूत करने के लिए की जा रही है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और भूटान के बीच लगातार उच्चस्तरीय और संस्थागत स्तर पर बातचीत व सहयोग जारी है। दोनों देश कूटनीति, विकास और लोगों से जुड़े कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इससे पहले सोमवार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने थिम्पू में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। यह उनके तीन दिवसीय भूटान दौरे की शुरुआत थी। ज्ञानेश कुमार भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में भी हिस्सा लेने वाले हैं। भूटान के राजा ने फेसबुक पोस्ट में ल‍िखा, “भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। भूटान की तीन दिन की यात्रा पर आए भारतीय मुख्य चुनाव आयुक्त को आज शाही मुलाकात का अवसर दिया गया।” एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ज्ञानेश कुमार की यात्रा का उद्देश्य भारत के चुनाव आयोग और भूटान के चुनाव आयोग के बीच संस्थागत सहयोग को और मजबूत करना है। उनकी यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम मंगलवार को पारो स्थित जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस का समारोह था। भारत और भूटान समुदाय स्तर पर विकास परियोजनाओं में भी मिलकर काम कर रहे हैं। अगस्त में भूटान स्थित भारतीय दूतावास ने बताया था कि झेमगंग जिले के पानबांग क्षेत्र में तीन हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (एचआईसीडीपी) का उद्घाटन किया गया। भूटान में भारतीय दूतावास ने ‘एक्‍स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत के सहयोग से पूरी की गई ये एचआईसीडीपी परियोजनाएं कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचने में मदद करेंगी, लोगों की आजीविका बेहतर करेंगी और पानबांग क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएंगी।” जयशंकर की यह यात्रा भारत और भूटान को अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने और भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा करने का अवसर देगी। उनकी भूटान के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर रहने की उम्मीद है।

बकासन में संतुलन बिगड़ रहा है? इस तरह करें अभ्यास, कुछ दिन में बन जाएगी पकड़

नई दिल्ली। बकासन योग का एक कठिन लेकिन बेहद लोकप्रिय आसन है। इसे अंग्रेजी में क्राउ पोस कहा जाता है। शुरुआत में इसे करने में थोड़ा मुश्किल लग सकता है, क्योंकि इसमें शरीर का संतुलन हाथों पर बनाना होता है। लेकिन सही तकनीक और नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे इस आसन पर पकड़ बनाई जा सकती है। बकासन करते समय शरीर की स्थिति के साथ-साथ सांस और संतुलन पर ध्यान देना भी जरूरी है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि बकासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर सीधे खड़े होकर या स्क्वाट की स्थिति में आएं। अब दोनों हथेलियों को कंधों की चौड़ाई के आसपास जमीन पर मजबूती से टिकाएं। उंगलियों को अच्छी तरह फैलाएं, ताकि हथेलियों का आधार मजबूत रहे और शरीर का संतुलन बनाने में आसानी हो। अब धीरे-धीरे घुटनों को ऊपर उठाकर उन्हें बगल यानी ऊपरी बाजुओं के पास टिकाएं। इसके बाद कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं और शरीर का भार धीरे-धीरे पैरों से हटाकर हाथों की तरफ लाएं। इस दौरान कोशिश करें कि टेलबोन अंदर की ओर रहे और शरीर बहुत ज्यादा आगे या पीछे न झुके। अब पैरों को जमीन से ऊपर उठाने की कोशिश करें। शुरुआत में एक-एक पैर उठाकर अभ्यास किया जा सकता है। जब संतुलन बनने लगे, तो दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं। भुजाओं को जितना संभव हो सीधा रखें और कंधों को स्थिर रखें। बकासन में दृष्टि सामने की ओर रखना काफी महत्वपूर्ण है। नीचे देखने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। उंगलियों को फैलाकर हथेलियों के जरिए जमीन पर मजबूत पकड़ बनाएं। पैरों को भी ढीला न छोड़ें, बल्कि पंजों को तानकर पैरों को सक्रिय रखें। इस आसन के दौरान सांस को रोकने के बजाय सामान्य और नियंत्रित तरीके से सांस लेते रहें। शुरुआत में कुछ सेकंड तक संतुलन बनाना ही पर्याप्त है। अभ्यास बढ़ने के साथ धीरे-धीरे इस स्थिति में ज्यादा देर तक रहने की कोशिश की जा सकती है। बकासन शरीर के संतुलन और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसके अभ्यास से कलाई, हाथ, कंधे और बाजुओं की मांसपेशियों पर काम होता है। साथ ही पेट और कोर की मांसपेशियां भी सक्रिय रहती हैं। नियमित अभ्यास से शरीर पर नियंत्रण और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

तमिलनाडु: मदुरै मीनाक्षी मंदिर ‘महा कुंभाभिषेकम’ के लिए तैयार, जिला प्रशासन अलर्ट

मदुरै। तमिलनाडु के मदुरै में गुरुवार को मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर के ‘महा कुंभाभिषेकम’ के लिए व्यापक इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। इस मौके पर लाखों श्रद्धालुओं के मंदिर शहर में जुटने की उम्मीद है। तमिलनाडु सरकार ने मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में लोगों की भागीदारी को आसान बनाने के लिए मदुरै जिले में स्थानीय छुट्टी की घोषणा की है। जिला प्रशासन, मदुरै कॉर्पोरेशन, मंदिर प्रशासन और पुलिस ने दर्शन, परिवहन, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवा, आग से सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मिलकर इंतजाम किए हैं। अलग-अलग रंग के पास वाले श्रद्धालुओं के लिए सात अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए जाएंगे, जबकि भीड़ को रास्ता दिखाने के लिए अहम जगहों पर बैरिकेड और साइनबोर्ड लगाए जाएंगे। पुथु मंडपम में बना एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम एलईडी स्क्रीन के जरिए मंदिर और आस-पास की सड़कों पर नजर रखेगा। 70 जगहों पर 241 नए सीसीटीवी कैमरे और फेशियल-रिकग्निशन कैमरे लगाकर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पुलिसकर्मी मंदिर परिसर और आस-पास के इलाकों में कड़ी नजर रखेंगे। दूसरे ज़िलों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पाँच जगहों पर अस्थायी बस स्टैंड बनाए गए हैं। अतिरिक्त स्पेशल बसें चलाई जाएंगी और 55 जगहों पर मुफ्त पार्किंग की सुविधा होगी। नगर निकाय और मंदिर प्रशासन ने पीने के पानी की लगातार सप्लाई, पक्के और मोबाइल शौचालय और शिफ्ट में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों का इंतजाम किया है। सुबह के समय तेज गर्मी की आशंका को देखते हुए श्रद्धालुओं को गर्म जमीन से बचाने के लिए मुख्य सड़कों पर नारियल के रेशे वाली चटाइयां बिछाई जाएंगी। मंदिर के अंदर, उसकी छत पर और आस-पास के इलाकों में एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सुविधाओं वाले स्पेशल मेडिकल कैंप काम करेंगे। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए लगभग 70 डॉक्टर, 108 एम्बुलेंस और मोबाइल मेडिकल टीमें तैयार रहेंगी। खास जगहों पर फायर और रेस्क्यू सर्विस के कर्मचारी, पानी के टैंकर और बचाव के उपकरण तैनात किए जाएंगे। बिजली सप्लाई में कोई रुकावट न आए, इसके लिए वैकल्पिक बिजली कनेक्शन और जनरेटर का भी इंतजाम किया गया है। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीमें अधिकृत संस्थाओं द्वारा ‘अन्नदानम’ के लिए तैयार किए जा रहे खाने की जांच कर रही हैं। विशेष निगरानी अधिकारी के. वीरा राघवा राव, पी. मधुसूदन रेड्डी और सी. पझानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अंतिम तैयारियों की समीक्षा की गई। इस बैठक में एचआर एंड सीई कमिश्नर टी.जी. विनय और मदुरै कलेक्टर निशांत कृष्णा भी मौजूद थे। बाद में अधिकारियों ने मंदिर, सुरक्षा पॉइंट्स और कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया और सभी विभागों को आपसी तालमेल से काम करने का निर्देश दिया, ताकि गुरुवार को होने वाले मंदिर के बड़े अभिषेक समारोह के दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई परेशानी न हो। आपातकालीन स्थिति में, आम लोग टोल-फ्री नंबर 1800-425-6781 और 1800-425-6782 पर संपर्क कर सकते हैं।

मिस्र के राष्ट्रपति और सऊदी क्राउन प्रिंस की मुलाकात, संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर हुई चर्चा

काहिरा। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने काहिरा में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। मंगलवार को हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने तथा व्यापार और निवेश के बढ़ते प्रवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने पर सहमति जताई। यह जानकारी मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। बयान के अनुसार, राष्ट्रपति सीसी ने सऊदी अरब की संप्रभुता, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी हमले या धमकी की निंदा की और उन्हें पूरी तरह अस्वीकार किया। उन्होंने दोहराया कि मिस्र, सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का समर्थन करता है। साथ ही, यमन संकट का व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान निकालने की कोशिशों के भी पक्ष में है। वहीं, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में मिस्र की भूमिका की सराहना की। उन्होंने हाल की भू-राजनीतिक चुनौतियों के दौरान सऊदी अरब के प्रति मिस्र के समर्थन और एकजुटता की भी प्रशंसा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब यमन के हूती समूह और सऊदी अरब के बीच सीमा पार संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। हूती समूह ने सोमवार को दावा किया था कि उसने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक प्रमुख सैन्य एयरबेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इसके अलावा, पिछले सप्ताह हूती लड़ाकों ने रणनीतिक महत्व वाले मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वे दक्षिण की ओर बढ़ते हुए बाब-अल-मंदेब स्‍ट्रेट क्षेत्र में पहुंचे और मयून द्वीप पर भी नियंत्रण कर लिया। इससे लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई है। इस बीच, सोमवार को ही सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जेद्दा में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर से भी मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्र की ताजा परिस्थितियों की समीक्षा की और सऊदी अरब तथा अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा की।

भारत के साथ एफटीए को न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिलने पर पीएम लक्सन ने जताई खुशी, दोनों देशों के बीच व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

वेलिंग्टन/नई दिल्ली। भारत के साथ एफटीए को न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिलने पर प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने खुशी जताते हुए कहा कि इससे बड़ी संख्या नौकरियां पैदा होंगी। साथ ही, इस समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने पोस्ट किया कि लोगों ने मुझसे कहा था कि भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) मुमकिन नहीं है, लेकिन आज उस समझौते को संसद से मंजूरी मिल गई है। उन्होंने आगे कहा कि नेशनल पार्टी ने कहा था कि हम अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करेंगे, और हमने वह करके दिखाया है। इस अहम समझौते का मतलब है कि न्यूजीलैंड के लोगों के लिए ज्यादा नौकरियां और ज्यादा आमदनी होगी। साथ 1.4 अरब भारतीय ग्राहकों तक पहुंचने का रास्ता खुलने से भारत में न्यूजीलैंड के और ज्यादा उत्पाद बिकेंगे। साथ ही, यह अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और आपको तरक्की में मदद करने का एक तरीका है। न्यूजीलैंड की संसद ने बुधवार को भारत के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को 93-29 (पक्ष-विपक्ष) की मत से मंजूरी दे दी है। इससे पहले न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि जब यह समझौता लागू होगा, तो भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। पूरी तरह लागू होने पर, 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क हटा दिए जाएंगे या काफी कम कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस समझौते से बॉर्डर पर तेजी से क्लीयरेंस मिलेगी और भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जो भोजन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, पर्यटन, प्रोफेशनल सेवाओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ा रहा है। मैक्ले ने कहा कि न्यूजीलैंड-भारत के बीच बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी और सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता इस साल के आखिर तक लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एफटीए से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को अपने बिजनेस संबंध बढ़ाने में मदद मिलेगी और इससे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा।

‘तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते हैं अखिलेश’, यूसीसी के विरोध पर एनडीए नेताओं ने किया पलटवार

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत एनडीए के नेताओं ने यूसीसी को ‘अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वे तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते हैं, इसके लिए शब्द नहीं, इन शब्दों के पीछे उनकी सोच दिखती है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आईएएनएस से कहा, “अखिलेश यादव को हम क्या कहें। वे मुसलमान भाई को लेकर और मुसलमान भाई अखिलेश यादव को लेकर परेशान हैं। दोनों लोगों में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। यूसीसी से पहले अखिलेश यादव को तो ये ऐलान कर देना चाहिए कि अगर सपा सरकार बनेगी तो मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाएंगे।” राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव बहुत हमदर्द हैं मुसलमानों के लिए, क्योंकि चार बार मुसलमानों ने वोट दे करके यादव जी को मुख्यमंत्री बनाया। अब उनका कर्तव्य बनता है कि एक बार उनको भी मौका दें, ताकि उनको भी ये कहने का अवसर ना मिले कि हमारा वोट लेकर खाली लोग सरकार बनाते हैं। ज्यादा वोट तो अखिलेश यादव पाते हैं, हम लोग तो एनडीए गठबंधन वाले हैं, थोड़ा कम मिलता है।” उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “समाजवादी पार्टी के लोग आजकल परिभाषा गढ़ने में बड़ी चतुराई के साथ काम कर रहे हैं। गृहमंत्री की घोषणा की प्रशंसा होनी चाहिए थी कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में यूसीसी लागू करके प्रदेश में समान आचार संहिता लागू करने का फैसला लिया। उसके विरुद्ध समाजवादी पार्टी के लोगों ने यूसीसी परिभाषा को बदल के कहीं न कहीं, मैं समझता हूं कि अपने अहंकार भाव को दिखाया है और यही अहंकार भाव समाजवादी पार्टी को 2027 में खत्म करने का काम करेगा।” यूसीसी के विरोध पर संजय निषाद ने कहा, “उनके (अखिलेश यादव) पास जैसे सलाहकार हैं, उसी वजह से वे आज सत्ता से बाहर हैं। संविधान हमेशा सामाजिक न्याय की बात करता है। सामाजिक न्याय तभी मिलेगा जब समान नागरिक संहिता और समान अधिकार होंगे। अधिकार कानूनों, एक्ट और नोटिफिकेशन के जरिए दिए जाते हैं।” उन्होंने सवाल किया कि क्या मुस्लिम महिलाएं मतदाता नहीं हैं? क्या वह इस देश की महिलाएं नहीं हैं? उन्होंने कहा कि संविधान में धर्म की जगह नहीं है। धर्म जीने का आधार है, लेकिन समानता, सम्मान, सुरक्षा समृद्धि, स्वाभिलंबन पाने का अधिकार सबको है। जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। निषाद ने कहा कि यूसीसी उत्तराखंड, असम और गुजरात में लागू हुआ। वहां सब लोग खुश हैं। इसलिए हमें लगता है कि यह अन्य जगहों पर भी होना चाहिए। हम सभी को उसका स्वागत करना चाहिए। यूसीसी का विरोध करना गलत है। भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के विधायक राम कदम ने कहा, “अखिलेश यादव आजकल साहित्यकार हो गए हैं। वे खुद की अपनी एक नई डिक्शनरी बनाने का प्रयास करते हैं, उनको शुभकामनाएं, पर क्या शब्द बदलने से शब्दों के पीछे की सोच इंसान की नहीं बदलती।” उन्होंने कहा, “यह देश इसके पहले तुष्टिकरण की राजनीति पर चलता था। क्या एक ही देश में एक को एक कानून, दूसरे को दूसरा कानून, ये असमानता क्या संविधान के के तहत मंजूर हो सकती है? सबका साथ और सबका विकास इस मूल मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है, तो सबके लिए समान कानून है, पर इसकी मिर्ची अखिलेश यादव को इस कारण लगती हैं कि वे तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते हैं, इसके लिए शब्द नहीं, इन शब्दों के पीछे उनकी सोच दिखती है।” भाजपा की झारखंड इकाई के नेता प्रतुल शाहदेव ने कहा, “उन्हें ‘मुल्ला अखिलेश यादव’ ऐसे ही नहीं कहा जाता, क्योंकि वे हमेशा मुसलमानों के समर्थन में खड़े रहते हैं। वे उसी पार्टी से आते हैं जिसकी सरकार ने कार सेवकों पर गोली चलवाई थी। कहा जाता है कि पूरी सरयू नदी कार सेवकों के खून से लाल हो गई थी। इसलिए, उनके हाथ पहले से ही खून से सने हैं। वे देश में फिर से दंगे भड़काना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “कौन कहता है कि भाजपा सांप्रदायिक एजेंडा चला रही है? हम मुसलमानों के भले के लिए यूसीसी ला रहे हैं। किसी मुस्लिम पुरुष को चार शादियां करने की इजाजत क्यों होनी चाहिए? बेटियों का क्या कसूर है? तलाक देने का हक सिर्फ पुरुषों को क्यों होना चाहिए? क्या महिलाओं को यह हक नहीं मिलना चाहिए? इन विसंगतियों को दूर किया जाएगा। अखिलेश या राहुल चाहे कुछ भी करें, यूसीसी लागू होकर रहेगा।” भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा, “अखिलेश यादव को जानकारी की कमी है। उनको संविधान पढ़ना चाहिए। आप संविधान के नाम पर राजनीति करते हैं, संविधान के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन संविधान में जो चीजें लिखी हुई हैं, जो संविधान की प्रस्तावना में हैं और कानून के समक्ष समानता है, अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 44 पढ़कर आएं। वे एक वर्ग को अपीज करने के लिए इस प्रकार की बातें कर रहे हैं, इसका कोई अर्थ नहीं है।

मेरा शरीर अब साथ नहीं दे रहा, बिगड़ती सेहत के बीच जरांगे पाटिल ने मुंबई मार्च रद्द करने का दिया संकेत

पटोडा/बीड। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के बीड जिले के पटोडा में रात 2:00 बजे एक बड़ी सभा को संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक शारीरिक थकान के कारण उन्हें मुंबई की ओर अपनी आगे की यात्रा रद्द करनी पड़ सकती है। अपनी भूख हड़ताल के 18वें दिन जरांगे पाटिल ने कहा कि अगर समर्थक उनके पीछे गाड़ियों का काफिला लेकर चलते रहे, तो वह अपनी यात्रा रोक देंगे और या तो स्थानीय स्तर पर धरना शुरू करेंगे या अंतरवाली सराटी लौट जाएंगे। रात करीब 1:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बावजूद मराठा समुदाय के हजारों लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, उनकी बात सुनने के लिए पूरी रात इंतजार करते रहे। भीड़ को संबोधित करते हुए शारीरिक रूप से काफी कमजोर दिख रहे जरांगे पाटिल ने कहा कि 12 सितंबर को आईवी फ्लूइड (नसों के जरिए दी जाने वाली दवा/तरल पदार्थ) लेना बंद करने के बाद से वह बमुश्किल अपने हाथ-पैर हिला पा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “अपने समुदाय के बच्चों के लिए लड़ने का असर मेरे शरीर पर पड़ा है, लेकिन मैंने आप लोगों के लिए सरकार से टक्कर ली है। सरकार चाहती है कि मैं घुटने टेक दूं, लेकिन क्या मुझे अपनी मांग छोड़ देनी चाहिए? मेरा समुदाय किसी भी सरकार से बड़ा है – यह मेरे पिता के समान है। मेरे समुदाय में किसी भी सरकार को गिराने और नई सरकार बनाने की ताकत है।” जरांगे पाटिल ने आंदोलन की प्रगति के बारे में बताया कि 58 लाख पुराने रिकॉर्ड (नोंदी) मिल गए हैं, जिससे लगभग 2.5 करोड़ समुदाय के लोगों के लिए आरक्षण का लाभ पाने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी मुख्य मकसद सरकारी गजट हासिल करना है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी सीधा हमला किया और दावा किया कि उन्होंने हर कदम पर राजनीतिक चालों का मुकाबला किया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज पेन ड्राइव में सुरक्षित रख लिए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस पर “उनकी जान लेने की साजिश रचने” का आरोप भी लगाया। पश्चिमी महाराष्ट्र में फलों के बागों के मालिकों से जुड़े तर्क का जवाब देते हुए उन्होंने सवाल किया, “सरकार का कहना है कि पश्चिमी महाराष्ट्र में फलों के बाग है लेकिन क्या ओबीसी समुदायों के पास बाग नहीं हैं? फिर उन्हें आरक्षण क्यों मिलता है?” जरांगे पाटिल ने कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान रैली या दौरा करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे पटोडा से उनकी गाड़ी के पीछे न आएं बल्कि सीधे खोपोली में मिलें, वरना वे या तो अंतरवाली लौट जाएंगे या बीड जिले के पटोडा में ही अपनी भूख हड़ताल फिर से शुरू कर देंगे। अपने परिवार के लिए एक संदेश में जरांगे पाटिल ने कहा, “मैंने अपने परिवार से आत्मसम्मान के साथ जीने को कहा है। मैंने अपने बेटे से कहा है कि अगर मैं समाज के लिए अपनी जान दे दूं, तो वह हिम्मत के साथ आगे आए। भले ही इस मकसद के लिए एक जान चली जाए, लेकिन हमारी जाति की गरिमा कभी कम नहीं होनी चाहिए।” पुलिस से सीधे बात करने की इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनकी शारीरिक हालत ठीक रही, तो वे पटोडा से सीधे मुंबई जाना पसंद करेंगे, न कि लोगों के बड़े हुजूम के साथ।