ट्रंप के ‘लेक ओंटारियो’ नाम बदलने के आदेश पर भड़के कनाडाई पीएम कार्नी, बोले- 400 साल पुराना है इतिहास, यही रहेगा नाम

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय सरकार को ‘लेक ओंटारियो’ झील का नाम बदलने का आदेश दिया है, जिस पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि झील का इतिहास 400 साल पुराना है और सब जानते हैं कि इसका सही नाम ‘लेक ओंटारियो’ पहले से है और आगे भी रहेगा। मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”लेक ओंटारियो का नाम ‘वेंडैट’ भाषा के शब्द ‘ओंटारियो’ से आया है, जिसका सही मतलब है, ‘झील सुंदर है, झील बड़ी है।’ यह नाम 400 साल से भी ज्यादा पुराना है। यह कनाडा के कॉन्फेडरेशन के गठन और संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता घोषणा, दोनों से पहले का है।” कार्नी ने कहा कि हम जानते हैं कि अमेरिका बदल रहा है। उसके व्यापारिक संबंध, उसकी विदेश नीतियां, उसके राष्ट्रीय स्मारक और यहां तक कि उसके जलाशयों के नाम भी बदल रहे हैं। लेकिन कनाडाई यह भी जानते हैं कि हकीकत को सही नाम से पुकारने का मतलब है उसे ‘लेक ओंटारियो’ कहना, और यह नाम पहले भी ‘लेक ओंटारियो’ था, आज भी है और हमेशा रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय सरकार को ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने का आदेश दिया है। उन्होंने इसके पीछे झील के आर्थिक महत्व और ग्रेट लेक्स की सुरक्षा में अमेरिका की प्रमुख भूमिका का हवाला दिया। ‘लेक ओंटारियो’ अमेरिका और कनाडा दोनों के बीच साझा झील है और दोनों देशों की सीमा इसी झील के बीच से गुजरती है। आदेश में ट्रंप ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ग्रेट लेक्स का सबसे बड़ा संरक्षक है, जिसमें वह जल क्षेत्र भी शामिल है जिसे फिलहाल ‘लेक ओंटारियो’ कहा जाता है।” उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका सुरक्षा और निवेश न करता, तो यह मीठे पानी की प्रणाली आज की तरह शिपिंग, मनोरंजन और जिम्मेदार उपयोग के लिए इतनी खुली नहीं होती।” ट्रंप ने दावा किया कि ग्रेट लेक्स क्षेत्र में चलने वाले 11 आइस-ब्रेकिंग जहाजों में से 9 अमेरिकी तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) संचालित करता है और व्यापारिक जहाजों के मार्गों को बिना किसी शुल्क के खुला रखता है। ट्रंप ने कहा, “यह झील अमेरिका के भविष्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने में आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।” उन्होंने कहा, “इस समृद्ध आर्थिक संसाधन और हमारी अर्थव्यवस्था एवं नागरिकों के लिए इसके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए, मैं निर्देश देता हूं कि इस झील का आधिकारिक नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ किया जाए।” बोर्ड को यह निर्देश भी जारी करना होगा कि सभी सरकारी विभाग और संघीय एजेंसियां नक्शों, अनुबंधों, दस्तावेजों और आधिकारिक संचार में ‘लेक अमेरिका’ नाम का उपयोग करें।
हरदोई में एक घर के बाहर मिला हैंड ग्रेनेड, गांव में मचा हड़कंप, पुलिस ने बम निरोधक दस्ते को बुलाया

हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के एक गांव में घर के बाहर ग्रेनेड मिलने से हड़कंप मच गया। इसके बाद डायल-112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी गई। परिवार के एक सदस्य ने पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए अपने रिश्तेदारों पर घर के अंदर ग्रेनेड फेंके जाने का आरोप लगाया है। यह मामला हरदोई जिले के हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जोधनपुरवा गांव का है। गांव निवासी सतीश कुमार का आरोप है कि रात में किसी ने उनके घर के अंदर पॉलीथिन में लिपटी संदिग्ध वस्तु फेंकी। वह पहले घर में पड़े तिरपाल पर गिरी, फिर जमीन पर और इसके बाद पानी में जा गिरी। बाद में सतीश ने उसे उठाया और घर के बाहर फेंक दिया, लेकिन उस समय उन्हें पता नहीं था कि पॉलीथिन में क्या है। बाद में जब सुबह उन्होंने उसे खोलकर देखा तो अंदर हैंड ग्रेनेड देखकर उनके होश उड़ गए। सतीश के मुताबिक, संदिग्ध वस्तु मिलने के बाद उन्होंने आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और गांव में हड़कंप मच गया। सतीश ने पत्रकारों को बताया कि जब मैं खाना खा रहा था, उसी समय मेरे घर पर ग्रेनेड फेंका गया। मैंने उसे एक पॉलिथीन में रखकर बाहर फेंक दिया था। सुबह पॉलिथीन खोलकर देखने पर गांव और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी गई। साथ ही, पुलिस को ग्रेनेड फेंके जाने की सूचना दी गई। सतीश ने पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए सांडी क्षेत्र के अपने रिश्तेदारों पर घर के अंदर हैंड ग्रेनेड फेंके जाने का आरोप लगाया है। उनके आरोप के बाद मामले को लेकर गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि, पुलिस अभी आरोपों की जांच कर रही है। हरपालपुर के सीओ प्रवीण कुमार ने कहा कि पुलिस को शुक्रवार सुबह डायल 112 के माध्यम से सूचना मिली थी। टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचने के बाद घटनास्थल की निरीक्षण किया और आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए गए। उन्होंने बताया कि ग्रेनेड को नष्ट करने के लिए बम निरोधक दस्ते को सूचना दी गई है। साथ ही, मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
रक्षाबंधन : सुप्रिया सुले ने अजित पवार को किया याद, कहा-आपकी कमी से आया खालीपन कभी नहीं भरा जा सकता

नई दिल्ली। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के मौके पर अपने दिवंगत भाई और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके न होने से एक ऐसी कमी पैदा हुई है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुले ने अजित पवार के साथ अपनी बचपन की यादें ताजा कीं और कहा कि उनके अचानक चले जाने की बात को स्वीकार करना अब भी मुश्किल है। सुले ने कहा, “प्यारे दादा, आज रक्षाबंधन है लेकिन इस बार आप हमारे साथ नहीं हैं और यह एहसास मेरे दिल को बहुत बेचैन कर रहा है। सात महीने पहले की वह भयानक सुबह और आपका अचानक चले जाना, आज भी मुझे इस बात पर यकीन नहीं होता।” सुप्रिया सुले ने याद किया कि कैसे दोनों भाई-बहन साथ बड़े हुए। उन्होंने प्यार, मतभेद और एक-दूसरे पर गर्व के पल साझा किए। उन्होंने पोस्ट में कहा, “बचपन से साथ बड़े होना, हमारी लड़ाइयां, एक-दूसरे के लिए प्यार और एक-दूसरे पर गर्व – यही हमारे रिश्ते की नींव थी। अब भी ऐसा लगता है कि आप अचानक कहीं से आ जाएंगे, मुझे राखी बंधवाएंगे, अपनी बहनों के साथ बातें करेंगे और हंसेंगे-बोलेंगे और फिर से परिवार का हिस्सा बन जाएंगे।” सुले ने आगे कहा कि उनके भाई की कमी से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका प्यार और आशीर्वाद हमेशा उनके साथ बना रहेगा। उन्होंने कहा, “आपकी कमी से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकता। आप जहां भी हों, आपका प्यार और आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ बना रहे।” रक्षाबंधन एक हिंदू त्योहार है जो भाई-बहनों के बीच स्नेह, प्यार और सुरक्षा के बंधन का जश्न मनाता है। भारत में इस त्योहार का खास महत्व है, जहां भाई-बहन एक साथ मिलकर अपने रिश्ते का जश्न मनाते हैं और अपने भावनात्मक बंधन को और मजबूत करते हैं। रक्षाबंधन हिंदू चंद्र-सौर कैलेंडर के श्रावण महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अगस्त में आता है। “रक्षा बंधन” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, “रक्षा”, जिसका अर्थ है सुरक्षा और “बंधन”, जिसका अर्थ है कोई रिश्ता या बांधने की क्रिया। पारंपरिक रूप से बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी या पवित्र धागा बांधती हैं और उनकी भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं जबकि भाई उनका साथ देने और उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। हालांकि, यह त्योहार सिर्फ सगे भाई-बहनों तक ही सीमित नहीं है। रक्षा बंधन चचेरे-ममेरे भाई-बहनों और परिवार के अन्य करीबी रिश्तों- जैसे भाभी, बुआ-भतीजे आदि के बीच भी मनाया जाता है। यह पारिवारिक स्नेह और एक-दूसरे की देखभाल के व्यापक सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
बावुमा ने माना, साउथ अफ्रीका पर होगा डब्ल्यूटीसी खिताब का बचाव करने का दबाव

जोहान्सबर्ग। साउथ अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने स्वीकार किया है कि टीम पर अपने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के खिताब का बचाव करने का दबाव होगा। साउथ अफ्रीका का शेड्यूल काफी व्यस्त रहने वाला है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज शामिल है। साउथ अफ्रीका ने जून 2025 में लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया को हराकर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) का अपना पहला खिताब जीता था। अब टीम 9 अक्टूबर से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के साथ अपने खिताब बचाने के अभियान की शुरुआत करेगी। सीरीज का पहला मैच डरबन के किंग्समीड मैदान पर खेला जाएगा। इसके बाद दूसरा टेस्ट गकेबेरहा के सेंट जॉर्ज पार्क में होगा, जबकि तीसरा और अंतिम टेस्ट केपटाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर खेला जाएगा। साउथ अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने कहा कि टीम पर दबाव है, क्योंकि वह मौजूदा विश्व टेस्ट चैंपियन है। प्रोटियाज टीम अब घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के साथ नए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) चक्र की शुरुआत करने जा रही है। बावुमा ने माना कि चैंपियन होने के कारण टीम से उम्मीदें बढ़ गई हैं और खिताब बरकरार रखने की चुनौती भी उनके सामने है। बावुमा ने आगामी घरेलू अभियान से पहले कहा, “अगर मैं ऐसा कहूं तो हम सबके निशाने पर हैं। जो टीमें अब साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलेंगी, वे नंबर 1 टीम के तौर पर हमारे खिलाफ अपनी काबिलियत परखना चाहेंगी। अगर कोई दबाव है, तो वह इस बात का है कि हम उस उम्मीद पर खरे उतरें और दबाव को झेल सकें।” डब्ल्यूटीसी जीतने वाले साउथ अफ्रीका के कप्तान ने ज़ोर दिया कि अतिरिक्त दबाव के बावजूद टीम की मूल पहचान और मानक नहीं बदले हैं और उन्होंने भरोसा जताया कि टीम में मौजूदा चैंपियन होने की चुनौतियों से निपटने के लिए मानसिक मजबूती है। बावुमा ने कहा, “टीम के साथ बहुत सारा बुनियादी काम हुआ है, और मुझे नहीं लगता कि इससे हम बदलेंगे। हम जानते हैं कि हम क्या हासिल करना चाहते हैं; हमारी पहचान का एक बड़ा हिस्सा तय हो चुका है। बस हमें उन मानकों से बेहतर करने का तरीका खोजना है जो हमने अतीत में अपने लिए तय किए थे। हम टेस्ट चैंपियनशिप चैंपियन के तौर पर गर्व से घूमते हैं। ड्रेसिंग रूम में जब हम इस बारे में बात करते हैं तो मुझे खिलाड़ी डरे हुए नहीं दिखते।” बावुमा ने पुष्टि की कि ऑस्ट्रेलिया सीरीज और उसके बाद के घरेलू मैचों की तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है। साउथ अफ्रीका नवंबर में जोहान्सबर्ग के वांडरर्स और सेंचुरियन के सुपरस्पोर्ट पार्क में बांग्लादेश के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगा, और इसके बाद दिसंबर और जनवरी में टीम की भिड़ंत इंग्लैंड से होनी है।
सरकारी भर्ती में बड़े पैमाने पर नकल और गड़बड़ी करने वालों के साथ कर्नाटक सरकार की मिलीभगतः प्रह्लाद जोशी

हुबली। कर्नाटक के हुबली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित रक्षाबंधन उत्सव मनाया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय शिक्ष मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा। कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के लापता होने पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “सरकारी भर्ती में बड़े पैमाने पर नकल और गड़बड़ी करने वालों के साथ सरकार की मिलीभगत है। सरकार इस पूरे घोटाले की भागीदार है। इसीलिए, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक आईएएस अधिकारी लापता हो जाता है और उसके फरार होने की खबर आती है लेकिन सरकार यह भी नहीं बता पाती कि वह कहां है। इसका मतलब है कि पूरी सरकारी मशीनरी इस साजिश में शामिल है। प्रह्लाद जोशी ने कहा, “अगर बड़े पैमाने पर नकल और पूरे केपीएससी घोटाले में शामिल इस आईएएस अधिकारी का पता चल जाता है और ईडी या सीआईडी उनको हिरासत में ले लेती है तो सरकार का पूरा कांड बाहर आ जाएगा। सरकार में जो लोग हैं, वह पकड़े जाएंगे। यही कारण है कि आईएएस अधिकारी को सरकार ने भगा दिया है। सरकार ने अपने संरक्षण में आईएएस अधिकारी को रखा है। अगर कांग्रेस सरकार इस भर्ती घोटाले में शामिल नहीं है तो अधिकारी को जांच एजेंसियों के सामने पेश करे। कांग्रेस सरकार में पूरी तरह अस्थिरता का दौर चल रहे है। हर कांग्रेस विधायक को लग रहा है कि मंत्री पद उसको मिले, क्योंकि उनको पता है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार नहीं बनेगी।” केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हुबली महानगर द्वारा आयोजित रक्षाबंधन उत्सव में शामिल हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रक्षाबंधन का त्योहार सुरक्षा का दायित्व उठाने और राष्ट्र की रक्षा के कार्य में जुटने के संकल्प के साथ मनाता है। भाईचारे, आत्मीयता और सामाजिक समरसता का प्रतीक रक्षाबंधन हम सभी के बीच के रिश्तों को और मजबूत करे। यह त्योहार राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग के संकल्प के साथ सार्थक रूप से मनाया गया। रक्षाबंधन उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मनोहर बकाले और मुख्य वक्ता रामचंद्र एडके के साथ-साथ आरएसएस के नेता, स्वयंसेवक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
नेशनल हेराल्ड मामले ने अमेरिका में मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया: सैम पित्रोदा

न्यूयॉर्क। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने कहा है कि लंबे समय से चल रहे नेशनल हेराल्ड मामले ने अमेरिका में उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि भले ही मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं, लेकिन इन आरोपों के कारण अमेरिकी बैंक उनसे सवाल पूछ सकते हैं। आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पित्रोदा ने सवाल उठाया कि यह मामला लगभग 15 वर्षों से क्यों चल रहा है और अब तक इसका कोई निष्कर्ष क्यों नहीं निकला? उन्होंने कहा, “यह नेशनल हेराल्ड मामला पिछले 15 साल से चल रहा है। आखिर यह क्या है? आप सत्ता में हैं, सभी पर आरोप लगा देते हैं। यहां तक कि मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप भी लगा देते हैं। आपने कुछ साबित नहीं किया, लेकिन देखिए इससे कितना नुकसान होता है।” पिछले छह दशक से अधिक समय से अमेरिका में रह रहे पित्रोदा ने कहा कि इंटरनेट पर उनके नाम को इस मामले से जोड़कर दिखाया जाना भारत की राजनीति से कहीं आगे तक असर डाल सकता है। उन्होंने कहा, “मेरे जैसे व्यक्ति के लिए, जो अमेरिका में रहता है, अगर कोई इंटरनेट पर देखे और लिखा मिले कि सैम पित्रोदा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल हैं, तो इसका क्या असर होगा?” उन्होंने कहा, “मेरा बैंक मुझसे पूछ सकता है, ‘मिस्टर पित्रोदा, यह क्या मामला है?’ लेकिन मैं उन्हें नेशनल हेराल्ड, राजनीतिक पक्षपात और इन सब बातों को कैसे समझाऊं?” पित्रोदा ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाते समय ज्यादा निष्पक्षता और मर्यादा बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार कीजिए। थोड़ी शालीनता भी होनी चाहिए। उन्होंने भारत की न्याय व्यवस्था और अदालतों में लंबित मामलों पर भी चिंता जताई। पित्रोदा का कहना था कि न्याय मिलने में देरी होने से लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता और आरोप सालों तक उनके साथ जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि हम अदालत के मामलों का निपटारा जल्दी क्यों नहीं कर सकते? ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि लोगों को एक साल के भीतर न्याय मिले, 18 या 20 साल बाद नहीं?” पित्रोदा ने कहा कि भारत को लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए एआई और विकेंद्रीकृत प्रशासन का उपयोग करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिलों को अपने क्षेत्र के मामलों के निपटारे की ज्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे यहां पांच करोड़ मामले अदालत में लंबित क्यों हैं? हर जिला यह क्यों नहीं कह सकता कि वह कम से कम अपने लंबित मामलों का निपटारा करेगा?” जब उनसे पूछा गया कि मामलों का तय समय सीमा में निपटारा करना न्यायपालिका पर छोड़ देना चाहिए या नहीं, तो पित्रोदा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से मामलों में देरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर न्यायपालिका किसी मामले को सुलझाना भी चाहे, तो भी मुझे लगता है कि उस पर दबाव हो सकता है कि मामले को लंबित ही रहने दिया जाए। पित्रोदा ने न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ता दबाव देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, “आज के रिकॉर्ड को देखिए। क्या आपको लगता है कि भारत में चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र है? मुझे ऐसा नहीं लगता। मुझे लगता है कि संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ गया है।” पित्रोदा ने मौजूदा राजनीतिक माहौल की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल से की। उन्होंने कहा कि कम से कम मेरी जानकारी में, मनमोहन सिंह के समय प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से किसी पर दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई थी। नेशनल हेराल्ड से जुड़ी पूरी कार्रवाई एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के नियंत्रण को यंग इंडियन कंपनी को हस्तांतरित करने के आरोपों पर आधारित है। एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ही नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशक था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग शिकायत में सैम पित्रोदा, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य लोगों के नाम शामिल किए हैं। हालांकि, आरोपित पक्ष और कांग्रेस पार्टी इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई बताते हैं।
प्रज्ञानंद ने रचा इतिहास, ग्रैंड चेस टूर का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने

नई दिल्ली। रमेशबाबू प्रज्ञानंद ने इतिहास रच दिया है। वह ग्रैंड चेस टूर का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने अमेरिका के सेंट लुइस में हुए फाइनल में फैबियानो कारुआना को 15-13 से हराया। प्रज्ञानंद के लिए यह नतीजा खास रहा, क्योंकि फाइनल मुकाबले में शुरुआती बढ़त गंवाने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की। इस टूर्नामेंट में खिलाड़ियों की क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज, तीनों तरह की शतरंज में क्षमता की परीक्षा ली जाती है।अडानी ग्रुप द्वारा समर्थित इस भारतीय स्टार ने क्लासिकल चेस में 3-9 से हारने के बाद रैपिड सेक्शन में वापसी की और इसे 8-0 से जीता। इसके बाद ब्लिट्ज वर्शन में मुकाबला 4-4 से बराबरी पर छूटा, जिससे वह कुल 15-13 के स्कोर के साथ खिताब जीतने में सफल रहे। इस इवेंट में हर जीत पर छह प्वाइंट मिलते हैं, क्लासिकल में ड्रॉ पर तीन प्वाइंट मिलते हैं, जबकि रैपिड चेस में जीत पर चार प्वाइंट और ड्रॉ पर दो प्वाइंट मिलते हैं। ब्लिट्ज में हर जीत पर दो प्वाइंट और ड्रॉ पर एक प्वाइंट मिलता है। अमेरिका के ही वेस्ली सो ने तीसरे स्थान के लिए हुए प्लेऑफ में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। टॉप स्थान और फाइनल में जीत से प्रज्ञानंद को 2 लाख डॉलर (लगभग 1.90 करोड़ रुपये) मिले, जबकि कारुआना को दूसरे स्थान पर रहने के लिए 1 लाख 25 हजार डॉलर मिले। वेस्ली सो को तीसरे स्थान के लिए 75 हजार डॉलर मिले, जबकि विंसेंट कीमर ने चौथे स्थान पर रहने के लिए 50 हजार डॉलर हासिल किए। 21 वर्षीय प्रज्ञानंद ने पहले सेमीफाइनल में कीमर को 19-9 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी, जबकि कारुआना ने दूसरे सेमीफाइनल में वेस्ली सो को 18-12 से हराया था। प्रज्ञानंद 2018 में सिर्फ 13 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे। उनकी मौजूदा रेटिंग 2750 है और अगस्त 2026 की ताजा फिडे क्लासिकल रैंकिंग में वह दुनिया के 12वें नंबर के खिलाड़ी हैं। प्रज्ञानंद ने ग्रैंड चेस टूर 2026 सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। इस सीजन का ग्रैंड फिनाले 21 से 28 अगस्त के बीच सेंट लुइस चेस क्लब में खेला गया था। चेन्नई के 21 वर्षीय प्रज्ञानंद रेगुलर सीजन के बाद टॉप-4 खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिसके कारण उन्हें ग्रैंड चेस टूर खिताब के लिए आयोजित नॉकआउट टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिला। नॉकआउट टूर्नामेंट में प्रज्ञानंद को नंबर-1 सीड मिली थी। उनके अलावा वेस्ली सो दूसरे, फैबियानो कारुआना तीसरे और विंसेंट कीमर चौथे सीड थे। इस प्रतियोगिता में शीर्ष तीन स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ियों को 2027 ग्रैंड चेस टूर में खेलने का सीधा आमंत्रण भी मिला।
नेपाल त्रासदी : बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या 469 पहुंची, 977 लोग अब भी लापता

काठमांडू। नेपाल के भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। यह जानकारी नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने शुक्रवार को जारी की। माना जा रहा है कि यह बाढ़ नेपाल और चीन की सीमा के बीच बहने वाली एक अंतरराष्ट्रीय नदी में ऊपर की ओर हुए हिमस्खलन के कारण आई। इससे भोटेकोसी नदी के किनारे के निचले इलाकों में भारी तबाही मची है। बाढ़ के तेज बहाव में कई बस्तियां, सड़कें, जलविद्युत परियोजनाएं, बिजली प्रसारण ढांचा और अन्य सुविधाएं बह गईं। एनडीआरआरएमए के अनुसार, विभिन्न जिलों से अब तक 469 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 178 शव चितवन जिले से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, तनहुन में 28, नवलपरासी पश्चिम में 27, धाडिंग में 23 और रसुवा में 12 शव बरामद किए गए हैं। प्राधिकरण के अनुसार, जिन 977 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार रात बताया था कि भोटेकोसी नदी में आई इस आपदा के बाद 290 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं। अमेरिका ने कहा है कि करीब 90 अमेरिकी नागरिक इस बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चीन के अनुसार बुधवार को हुए भूस्खलन के बाद नेपाल की तरफ लगभग 100 चीनी नागरिक अब भी लापता हैं। लापता लोगों में विदेशों में रहने वाले 127 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। अथॉरिटी के अनुसार, संपर्क से बाहर लोगों में नेपाल पुलिस के 28 जवान, नेपाल सेना के 45 जवान, आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान, कस्टम ऑफिस के 15 कर्मचारी और इमिग्रेशन ऑफिस के चार कर्मचारी शामिल हैं। अथॉरिटी ने बताया कि इस आपदा में अब तक 73 लोग घायल हुए हैं। जिनमें रसुवा में 43, धाडिंग में तीन और नुवाकोट में 27 लोग शामिल हैं। बचाव और राहत कार्यों के लिए 13,295 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं। अब तक बचाव दलों ने 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला है। फंसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने राहत सामग्री वितरित करने या बचाव कार्य में मदद करने के इच्छुक लोगों और संगठनों से अपील की है कि वे पहले अपने संबंधित जिले के जिला प्रशासन कार्यालय से संपर्क करें और आवश्यक समन्वय के बाद ही राहत सामग्री भेजें। पीएमओ ने कहा, “संबंधित मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) का कार्यालय क्षेत्र की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार राहत सामग्री सीधे प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने की समन्वित व्यवस्था करेगा।” प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, हाल के दिनों में कई लोग और संगठन बिना पूर्व समन्वय के छोटे निजी वाहनों में सीमित मात्रा में राहत सामग्री लेकर प्रभावित क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं। सरकार का कहना है कि इससे सड़कों पर भारी जाम लग रहा है। इसके कारण आपातकालीन मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंसों की आवाजाही प्रभावित हुई है। साथ ही, सरकार की मुख्य बचाव टीमों और प्राथमिकता वाले राहत वाहनों को भी समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
मध्य प्रदेश : राजगढ़ के ब्यावरा में ओवरब्रिज पर अनियंत्रित होकर पलटी स्लीपर कोच बस, 4 लोगों की मौत

भोपाल। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में शुक्रवार सुबह तेज रफ्तार स्लीपर बस के पुल की दीवार से टकराने से ड्राइवर समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य घायल हो गए। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बस कानपुर से इंदौर जा रही थी। राजगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित तोलानी ने बताया कि हादसा सुबह करीब 8.30 बजे ब्यावर में भोपाल बाईपास पुल पर हुआ, जब बस एक मोड़ पर बेकाबू होकर पुल की दीवार से टकरा गई। तोलानी ने कहा, ” शुरुआती जांच में वजह तेज रफ्तार लग रही है। मोड़ पर बस का संतुलन बिगड़ गया और वह पुल की दीवार से टकरा गई। घटना के सही कारणों की जांच की जा रही है।” पुलिस अधिकारी ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस के स्लीपर कोच की खिड़कियां भी टूट गईं, जिससे कुछ यात्री पुल से नीचे गिर गए, जबकि कुछ पुल के ढांचे पर ही गिर पड़े। हादसे में बस बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने गाड़ी में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। सभी घायलों को पहले ब्यावर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें इलाज दिया गया। टोलानी ने बताया कि चार घायलों की हालत गंभीर है और उन्हें आगे के इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया है। पुलिस अधिकारी ने आगे कहा, “गंभीर रूप से घायल यात्रियों को भोपाल रेफर कर दिया गया है। मृतकों की पहचान की जा रही हैं।” पुलिस के अनुसार, मृतकों में एक स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) और बेंगलुरु के एक साइबर इंस्पेक्टर शामिल हैं। उनकी पहचान की पुष्टि की जा रही थी। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। जब क्षतिग्रस्त बस से यात्रियों को बाहर निकाला जा रहा था, तो वहां अफरातफरी और चीख-पुकार मची हुई थी। बाद में राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार और एसपी तोलानी ने ब्यावर के सिविल अस्पताल का दौरा किया और घायल यात्रियों का हालचाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से यात्रियों की हालत और इलाज के बारे में भी बात की। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि पुल पर बस का संतुलन कैसे बिगड़ा।