दिशा सालियान केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर उठाए सवाल, पिता को न्याय की उम्मीद

मुंबई। दिशा सालियान की मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई पुलिस की ओर से की गई जांच और सीआरपीसी की धारा 174 के तहत की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। अदालत में यह सवाल भी सामने आया कि जब गंभीर अपराध की शिकायत का दावा किया जा रहा है, तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि अभी भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है। सुनवाई के बाद दिशा सालियान के पिता ने अदालत से इंसाफ की उम्मीद जताते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा है। छह साल बाद उन्हें महसूस हो रहा है कि अब उन्हें, उनकी बेटी और उनकी पत्नी को न्याय मिलेगा। पुलिस की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस ने जो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, वह पूरी तरह फर्जी थी और उसमें सही तथ्यों को सामने नहीं रखा गया। यह रिपोर्ट आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि दिशा की मौत के दिन वह अस्पताल पहुंचे थे। उसी दिन पुलिस ने उनका बयान लिया और उनसे पूछा कि क्या उन्हें किसी पर शक है। उन्होंने उस समय कहा था कि अभी उन्हें किसी पर शक नहीं है और बाद में इस बारे में देखा जाएगा। इसके दो-तीन दिन बाद उन्हें मालवणी पुलिस स्टेशन बुलाया गया। वहां पुलिस ने दिशा की पढ़ाई, उसके स्कूल-कॉलेज, नौकरी और उसके साथ काम करने वाले लोगों के बारे में सवाल किए। दिशा के पिता ने कहा कि उनकी बेटी की मौत के बाद मीडिया में लगातार रेप और मर्डर जैसी बातें सामने आ रही थीं। इन खबरों को सुनकर वह बेहद परेशान हो गए थे और उस समय उन्हें केवल राहत चाहिए थी। इसी परिस्थिति में उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी की मौत का फायदा न उठाया जाए और जो सही है, वही बताया जाए। दिशा के पिता ने बताया कि वह कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने आदित्य ठाकरे, रोहन राय, सूरज पंचोली और डिनो मोरिया समेत दो-तीन अन्य लोगों के नाम लिए। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज होने के बाद जांच होनी चाहिए और जिसकी भी गलती सामने आए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। दोष सामने आने पर गिरफ्तारी होनी चाहिए। दिशा सालियान के पिता के वकील नीलेश ओझा ने सुनवाई को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कोर्ट ने सरकारी वकील और पुलिस से स्पष्ट सवाल किया कि धारा 174 के तहत की गई जांच की कानूनी स्थिति क्या है। पुलिस ने अदालत में कहा कि उसने धारा 174 के तहत जांच की है और गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इस पर अदालत ने सवाल किया कि यदि शिकायत में गैंगरेप और हत्या जैसे संज्ञेय अपराध के आरोप हैं, तो केवल धारा 174 के तहत जांच कैसे की जा सकती है। ओझा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के केस लॉ के आधार पर ऐसी जांच का कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एक पिता को अपनी बेटी की मौत की सच्चाई जानने का अधिकार है और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच होना जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि यदि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोई काउंटर या अलग कानूनी आधार है, तो उसे अगली सुनवाई में अदालत के सामने रखा जाए। सुनवाई के दौरान सीबीआई जांच को लेकर भी चर्चा हुई। नीलेश ओझा ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे की ओर से दाखिल एक इंटरवेंशन एप्लीकेशन में हलफनामे के जरिए यह कहा गया था कि मामले की सीबीआई जांच हो चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। उन्होंने अदालत के सामने इस दावे को गलत बताया। इसके बाद अदालत ने सीबीआई के वकील से इस बारे में जानकारी मांगी। ओझा का दावा है कि सीबीआई के वकील ने अपने कार्यालय से पुष्टि करने के बाद अदालत को बताया कि सीबीआई ने दिशा सालियान मामले की कोई जांच नहीं की और न ही कोई क्लीन चिट दी। ओझा ने अदालत से कथित तौर पर गलत हलफनामा दाखिल करने के आधार पर आदित्य ठाकरे की याचिका खारिज करने, भारी जुर्माना लगाने और गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग किए जाने की बात कही। वकील नीलेश ओझा ने सुनवाई के दौरान पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का भी उल्लेख किया। उन्होंने अदालत के सामने आरोप लगाया कि घटना के बाद मामले को दबाने के लिए सचिन वाजे को इस्तेमाल किया गया और वह कथित कवर-अप के मास्टरमाइंड थे। ओझा ने कथित तौर पर फर्जी सीसीटीवी फुटेज और फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने पंचनामे में तारीखों का जिक्र करते हुए कहा कि एक जगह 8 जून और दूसरी जगह 9 जून की तारीख दर्ज होने की बात सामने आती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि रोहन राय और उनके दोस्तों द्वारा कमरे का दरवाजा तोड़े जाने की बात कही गई थी, लेकिन पुलिस के पास इसका कोई पंचनामा या अन्य सबूत नहीं था। सुनवाई के बाद नीलेश ओझा ने कहा कि अदालत में हुई कानूनी बहस के आधार पर उन्हें 100 प्रतिशत उम्मीद है कि इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए जाएंगे।

अहमदाबाद को ग्लोबल स्पोर्ट्स हब बनाने की तैयारी, अमित शाह ने 2036 ओलंपिक की दावेदारी पर की समीक्षा बैठक

अहमदाबाद। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को अहमदाबाद में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सरकार भारत को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करके एक ग्लोबल स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह बैठक 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी और 2029 वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स व 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के संबंध में थी। बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शाह ने कहा, “मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करके भारत को खेलों के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” उन्होंने आगे कहा, “आज अहमदाबाद में 2036 ओलंपिक के लिए भारत की दावेदारी, साथ ही 2029 पुलिस और फायर गेम्स और 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की तैयारियों पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।” बैठक में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के साथ-साथ अन्य अधिकारी भी शामिल हुए। यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब अहमदाबाद कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है; शहर को पहले ही 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान घोषित किया जा चुका है। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट ने नवंबर 2025 में ग्लासगो में अपनी आम सभा में अहमदाबाद (जिसे संगठन ‘अमदावाद’ कहता है) को शताब्दी कॉमनवेल्थ गेम्स के मेजबान के रूप में औपचारिक रूप से मंजूरी दी। 2030 का संस्करण 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में आयोजित पहले कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे होने का प्रतीक होगा। 2030 के गेम्स अहमदाबाद में 2029 वर्ल्ड पुलिस और फायर गेम्स के बाद आयोजित होंगे। पिछले साल जून में भारत को उस आयोजन के लिए मेजबान देश के रूप में चुना गया था और अहमदाबाद को आयोजन स्थल के तौर पर तय किया गया था। तब शाह ने इस चयन को देश के बढ़ते खेल बुनियादी ढांचे और खेलों के केंद्र के रूप में अहमदाबाद की बढ़ती प्रतिष्ठा की मान्यता बताया था। सरकार ने इन आयोजनों की तैयारियों को भारत के दीर्घकालिक ओलंपिक लक्ष्यों से भी जोड़ा है। 2036 ओलंपिक के लिए अहमदाबाद को भारत के प्रस्तावित मेजबान शहर के तौर पर पेश किया गया है, और तैयारियां अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने वाले खेल बुनियादी ढांचे और सुविधाओं पर केंद्रित हैं। शाह ने पहले कहा था कि शहर 2036 तक कई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर सकता है और ऐसे आयोजनों के लिए विकसित की गई सुविधाएं बाद में एथलीटों की मदद कर सकती हैं और प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे के रूप में काम आ सकती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के सिलसिले में कॉमनवेल्थ स्पोर्ट और भारतीय अधिकारियों के बीच पहले ही बातचीत हो चुकी है। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट के एक प्रतिनिधिमंडल ने अप्रैल में अहमदाबाद और नई दिल्ली का दौरा किया था। उन्होंने नरेंद्र मोदी स्टेडियम, महात्मा मंदिर और वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सहित विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया और 2030 गेम्स के आयोजन को लेकर गुजरात और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ चर्चा की। यह ताज़ा समीक्षा ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के समापन के बाद हुई है, जहां भारत ने स्कॉटलैंड के साथ संयुक्त रूप से चौथा स्थान हासिल किया और 13 गोल्ड मेडल समेत कुल 29 मेडल जीते। ग्लासगो ने अब 2030 में होने वाले शताब्दी संस्करण (100वें साल के आयोजन) के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स की जिम्मेदारी अहमदाबाद को सौंप दी है। सरकार अहमदाबाद में प्रस्तावित बड़े आयोजनों को ध्यान में रखते हुए खेल सुविधाओं का विकास कर रही है।

2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य, भारत-रूस संबंध दो महान सभ्यताओं की साझेदारी है: रूसी उप महावाणिज्य दूत

मुंबई। रूसी संघ के उप महावाणिज्य दूत अलेक्जेंडर फर्सोव ने भारत-रूस द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है। उन्होंने भारत के साथ साझेदारी को दो महान सभ्यताओं के बीच की साझेदारी बताया और कहा कि ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम आपसी सांस्कृतिक और व्यापारिक समझ को गहरा करने का अहम मंच बनेगा। उप महावाणिज्य दूत अलेक्जेंडर फर्सोव ने कहा, “मुझे लगता है कि वे हर क्षेत्र में हमारे द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत, विस्तारित और गहरा करते रहेंगे। हमने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 100 अरब डॉलर हासिल करने का लक्ष्य रखा है, तो देखते हैं कि इसे हासिल करने के लिए हम क्या कर सकते हैं। हम इस लक्ष्य की दिशा में बहुत-बहुत मेहनत कर रहे हैं।” रूसी संघ के उप महावाणिज्य ने कहा, “मैं केवल इतना कह सकता हूं कि हम भारत के साथ अपनी साझेदारी को दो महान सभ्यताओं के बीच की साझेदारी के रूप में देखते हैं। इसीलिए हम फोरम की थीम का पूरी तरह समर्थन करते हैं। गहरी आपसी समझ विकसित करने के लिए एक-दूसरे की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को समझना बहुत जरूरी है। किसी दूसरे देश के समकक्ष के साथ व्यापार करते समय भी उनकी संस्कृति, पृष्ठभूमि और सोचने के तरीके को समझना जरूरी है।” अलेक्जेंडर फर्सोव ने कहा कि हमारा सांस्कृतिक सहयोग हमारे दोनों देशों के बीच दोस्ती और साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है, और हम इस क्षेत्र को विकसित करने पर बहुत ध्यान देते हैं। हाल के वर्षों में, हमने देखा है कि भारतीय उत्पादों की बढ़ती संख्या रूसी बाजार में प्रवेश कर रही है। हमने भारतीय फिल्मों और भारतीय संगीत में रूसी लोगों की बढ़ती रुचि भी देखी है। बेशक, संगीत के बिना भारतीय फिल्म क्या है? रूसी संघ के उप महावाणिज्य दूत अलेक्जेंडर फर्सोव ने कहा, “हम सितंबर की शुरुआत में होने वाले दूसरे ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि कई रूसी लोग आएंगे और अपने भारतीय समकक्षों से मिलेंगे, और दोनों देशों के पास सहयोग के जो अवसर हैं, उनके बारे में और जानेंगे। जैसा कि हमने आज की बैठक के दौरान चर्चा की, यह समझौतों, एमओयू या इस तरह की किसी चीज पर हस्ताक्षर करने के बारे में इतना नहीं है, हालांकि मेरा मानना है कि निश्चित रूप से कुछ समझौते इससे निकल सकते हैं।

ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की डेडलाइन, संजय निरुपम ने फैसले को सराहा

मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की समयसीमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक साल का समय देने के फैसले का शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने स्वागत किया। उन्होंने इसे ऑटो-टैक्सी चालकों के हित में बेहतर फैसला बताते हुए कहा कि मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए और भाषा को सख्ती के बजाय प्रेम और सम्मान के साथ बढ़ावा दिया जाना चाहिए। संजय निरुपम ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा का वह स्वागत करते हैं। अभी करीब 10 से 15 प्रतिशत ऑटो-टैक्सी चालक ऐसे हैं, जिन्होंने मराठी भाषा नहीं सीखी है। ऐसे लोगों को अब एक वर्ष का समय दिया गया है, ताकि वे आसानी से भाषा सीख सकें। कुछ दिन पहले उनकी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से भी मुलाकात हुई थी। उस दौरान उन्होंने 12 अगस्त के जीआर में दी गई एक महीने की समयसीमा को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप है कि इस आदेश का इस्तेमाल करते हुए कुछ आरटीओ अधिकारियों ने ऑटो चालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी। कई चालकों को नोटिस दिए गए और लाइसेंस, बैज तथा परमिट जब्त किए जाने जैसी कार्रवाई की गई। इस वजह से ऑटो चालकों में डर का माहौल पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की नई घोषणा को कानूनी और प्रशासनिक रूप से लागू करने के लिए 12 अगस्त का जीआर वापस लेकर नया सरकारी आदेश जारी किया जाना चाहिए। करीब ढाई से तीन हजार ऑटो चालकों को नोटिस दिए जाने की जानकारी है और नया जीआर जारी होने के बाद इन नोटिसों को भी वापस लेना होगा। एक वर्ष के भीतर जो चालक मराठी सीख लेते हैं, यह अच्छी बात होगी। अगर किसी को इसके बाद भी कठिनाई रहती है तो उसे अतिरिक्त समय देने पर भी विचार किया जा सकता है। भाषा सीखने के लिए बहुत कठोर डेडलाइन जरूरी नहीं है। संजय निरुपम ने कहा कि शिवसेना की शुरुआत से यह भूमिका रही है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा, संस्कृति और मराठी अस्मिता का सम्मान करना चाहिए। यह नीति शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के समय से चली आ रही है। उन्होंने एकनाथ शिंदे के बयान का भी हवाला देते हुए कहा कि मराठी को सख्ती की भाषा नहीं, बल्कि भक्ति की भाषा के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में रहने वाले दूसरे राज्यों के लोग भी मराठी का सम्मान करते हैं और इसे सीखने का प्रयास करते हैं। निरुपम ने कहा कि परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ऑटो-टैक्सी चालकों के संबंध में मोटर व्हीकल एक्ट में मौजूद प्रावधानों को लागू करने की बात कही थी। इस पहल का उद्देश्य भाषा के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना था और इसका किसी चुनाव से संबंध नहीं था। हालांकि, उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। निरुपम ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के नेताओं द्वारा मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीय ऑटो और टैक्सी चालकों के मुद्दे को उठाने पर सवाल किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव को देखते हुए मुंबई में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भड़काने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। मुंबई में रहने वाले इन लोगों की समस्याओं को शिवसेना गंभीरता से समझती है और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही है। मराठी सीखने और महाराष्ट्र की भाषा-संस्कृति का सम्मान करने की अपेक्षा अपनी जगह है, लेकिन इसके लिए चालकों को पर्याप्त समय और सहयोग भी मिलना चाहिए।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने इंदिरा गांधी अस्पताल में एच1एन1 से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में एच1एन1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल का निरीक्षण किया और अस्पताल तथा स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा की। एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष एच1एन1 आइसोलेशन वार्ड का निरीक्षण किया और मरीजों के इलाज और देखभाल के लिए किए गए इंतजामों की समीक्षा की। पंकज कुमार सिंह ने डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों से बातचीत की और बेड, ऑक्सीजन, दवाएं, तरल पदार्थ, जांच सुविधाएं और अन्य आवश्यक चिकित्सा बुनियादी ढांचे की उपलब्धता का जायजा लिया। मंत्री ने एच1एन1 की रोकथाम, लक्षणों और सावधानियों के बारे में समय पर और सटीक जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान की भी समीक्षा की। स्थिति को देखते हुए मंत्री पंकज कुमार सिंह दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में तैयारियों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी आवश्यक इंतजाम मौजूद हों। निरीक्षण के बाद बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मैं दिल्ली के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार हैं। हमारे डॉक्टर, नर्स, प्रयोगशाला तकनीशियन और अन्य स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह से सतर्क हैं और पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं। पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी अस्पताल का उनका दौरा दिल्ली सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर तैयारियों का जायजा लेने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा था। उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल में एच1एन1 मरीजों के लिए एक विशेष आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था की गई है। ऑक्सीजन, दवाएं, तरल पदार्थ, जांच और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। हम अस्पताल की तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मरीजों की देखभाल में कोई कमी न रहे। अस्पताल में एक समर्पित स्वाइन फ्लू/एच1एन1 क्लिनिक भी स्थापित किया गया है, जहां संदिग्ध मरीजों की पहली जांच की जाएगी और एच1एन1 का निदान किया जाएगा। संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों को आगे के इलाज और देखभाल के लिए समर्पित एच1एन1 वार्ड में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता से निगरानी पर जोर देते हुए कहा कि ये निरीक्षण जारी रहेंगे। मैं व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नजर रख रहा हूं और नियमित रूप से अस्पतालों का निरीक्षण कर रहा हूं। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षकों/चिकित्सा निदेशकों को पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, और मैं आवश्यकतानुसार किसी भी समय किसी भी अस्पताल का दौरा कर सकता हूं।

‘सुगम डिजिटल गुजरात’ के माध्यम से एक लाख से अधिक नागरिकों ने ऑनलाइन प्रमाण पत्र प्राप्त किए

गांधीनगर। गुजरात में एक लाख से अधिक नागरिकों ने ‘सुगम डिजिटल गुजरात’ पोर्टल के माध्यम से अपने घरों से ही आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं। पिछले चार महीनों में सात प्रमुख प्रमाण पत्र सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं, जो सरकारी सेवाओं के डिजिटल वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। राज्य सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक सात प्रमाण पत्र पोर्टल पर उपलब्ध कराए हैं। इनमें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) प्रमाण पत्र, नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) पात्रता प्रमाण पत्र, अनारक्षित श्रेणी प्रमाण पत्र, धार्मिक अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र और गैर-अधिसूचित जनजाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया, “मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री प्रद्युमन वाजा और राज्य मंत्री मनीषाबेन वकील के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल से आवेदक सरकारी कार्यालयों में जाए बिना ही ऑनलाइन प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं।” दस्तावेज सत्यापन के बाद, आवेदक ई-हस्ताक्षर सहित डिजिटल रूप से जारी प्रमाणपत्र ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। ये प्रमाणपत्र व्हाट्सएप और डिजिलॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध होंगे, जिससे उपयोगकर्ता इन्हें सहेज कर रख सकेंगे और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें देख सकेंगे। यह सुविधा सरकारी भर्ती की तैयारी कर रहे छात्रों और युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी होने की उम्मीद है। कॉलेज प्रवेश, छात्रवृत्ति और भर्ती के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र अब सत्यापन के बाद ऑनलाइन प्राप्त किए जा सकते हैं, जिससे सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी और ऐसे दस्तावेजों की आवश्यकता वाली प्रक्रियाओं में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा। सरकार ने कहा कि डिजिटल प्रणाली का उद्देश्य प्रशासनिक देरी को कम करना और शिक्षा, रोजगार और कल्याण संबंधी सेवाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता में सुधार करना है। विकासशील जाति कल्याण के निदेशक विक्रमसिंह जादेव ने राज्य भर के नागरिकों से अपील की है कि वे प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों में जाने के बजाय ‘सुगम डिजिटल गुजरात’ पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध सेवाओं का अधिकतम उपयोग करें।

सैंड आर्टिस्ट ने नेपाल बाढ़ पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि, डब्ल्यूबीएफ बोला- भारत के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता

नई दिल्ली। इंटरनेशनल सैंड आर्टिस्ट मानस कुमार साहू ने सैंड एनिमेशन बनाकर नेपाल बाढ़ पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। वहीं, वर्ल्ड बुद्धिस्ट फेडरेशन (डब्ल्यूबीएफ) ने नेपाल त्रासदी पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत-नेपाल का रोटी-बेटी का रिश्ता है और इस मुश्किल घड़ी में भारत समेत पूरी दुनिया नेपाल के साथ खड़ी है। मानस कुमार साहू ने 15 मिनट में एक दिल को छू लेने वाला सैंड एनिमेशन बनाया, जिसमें उन्होंने नेपाल बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाई और दुनिया भर के लोगों से भयानक बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना, दया और समर्थन में एक साथ आने की अपील की। वर्ल्ड बुद्धिस्ट फेडरेशन (डब्ल्यूबीएफ) के फाउंडिंग प्रेसिडेंट डॉ. परविंदर सिंह कहते हैं, “हरीश जी (नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के रिश्तेदार), एक भारतीय होने के नाते, बाहर से आए लोगों के साथ मुलाकात कर रहे थे और कह रहे थे कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है, इसलिए इसे बनाए रखना चाहिए और नेपाल में आई बाढ़ से प्रभावित नेपाली लोगों को ज्यादा से ज्यादा मदद दी जानी चाहिए।” डॉ. परविंदर सिंह ने कहा कि हम जमीनी स्तर पर काम करते हैं। हमारे दो मुख्य मकसद हैं- एक, लोगों को अच्छी शिक्षा दें, और दूसरा, उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे। ये उनका अधिकार है, और इसी अधिकार को मानकर भगवान बुद्ध के चरण को स्पर्श करने से जो हमें ज्ञान मिला है, उसी से हम नेपाल के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज नेपाल में 80 फीसदी घरों में खाना नहीं बना होगा। जो त्रासदी आई है, उससे वो भी दुखी होंगे। जो नेपाल को अपना लेते हैं, तो भगवान बुद्ध खुद अपनाए जाते हैं। भगवान बुद्ध का सिर्फ जन्म नेपाल में हुआ, बाकी का सारा जीवन उन्होंने भारत में बिताया है। इसलिए भारतीयों ने उन्हें ज्यादा अपनाया है। बुद्धिस्ट होने के नाते शांति की बात करें। प्रधानमंत्री मोदी ने बात की, तो पीएम बालेन शाह ने भी पोस्ट करके धन्यवाद किया। नेपाल त्रासदी पर वर्ल्ड बुद्धिस्ट फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष अमर नाथ ने कहा, “वर्ल्ड बुद्धिस्ट फेडरेशन इंडिया नेपाल में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है। इस मुश्किल समय में, न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया उनके साथ खड़ी है। हम हर संभव तरीके से उनके साथ खड़े हैं। नेपाल और भारत की साझी विरासत है। हमारी संस्कृति भी जुड़ी है। फिर चाहे मां सीता का जन्म हो या फिर भगवान बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल रही है, उसके बाद उनकी सारी प्रज्ञा भारत में रही।

जयपुर नगर निगम चुनाव: पहले दिन 11 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए

जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया गुरुवार को शुरू हुई। पहले दिन 11 उम्मीदवारों ने 13 नामांकन पत्र दाखिल किए। जिला चुनाव शाखा के अनुसार, जयपुर में 15 जगहों पर बने रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तरों में सुबह 10:15 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच नामांकन पत्र लिए गए। कुल 150 वार्डों में से नौ वार्डों – 148, 99, 50, 12, 14, 16, 25, 31 और 40 – के लिए नामांकन पत्र भरे गए। बाकी 141 वार्डों के लिए कोई नामांकन नहीं भरा गया। कुल 13 नामांकन पत्रों में से चार कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों ने भरे, जबकि आठ निर्दलीय उम्मीदवारों ने भरे। दो उम्मीदवारों ने दो-दो नामांकन पत्र भरे – एक पार्टी उम्मीदवार के तौर पर और दूसरा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर। भाजपा और कांग्रेस ने अभी तक अपने आधिकारिक उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। इसके बावजूद, चार उम्मीदवारों ने खुद को इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी) से जोड़कर नामांकन पत्र दाखिल किए, जबकि पार्टी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आधिकारिक टिकट घोषणाओं से पहले नामांकन पत्र दाखिल करना यह दर्शाता है कि चुनाव कार्यक्रम के दौरान उम्मीदवारों के पास कितना कम समय होता है। अब नामांकन केवल 29 अगस्त और 31 अगस्त को ही दाखिल किए जा सकते हैं। रक्षाबंधन की छुट्टी के कारण 28 अगस्त को कोई नामांकन स्वीकार नहीं किया जाएगा, जबकि 30 अगस्त को रविवार है और रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय बंद रहेंगे। उम्मीद है कि नामांकन की बची हुई अवधि के दौरान भाजपा और कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करेंगी, इसलिए अगले दो कामकाजी दिनों में नामांकन की संख्या में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

ई20 पेट्रोल को ई10 से बदलने की कोई योजना नहीं, पुराने वाहनों के लिए अलग विकल्प पर चल रही चर्चा: बीपीसीएल चेयरमैन

नई दिल्ली। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के चेयरमैन और एमडी संजय खन्ना ने गुरुवार को कहा कि ई20 पेट्रोल को ई10 से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो चर्चा चल रही है, वह केवल इस बात को लेकर है कि क्या पुराने वाहनों के लिए 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन का अलग विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कंपनी की वार्षिक आम बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बीपीसीएल के चेयरमैन ने कहा कि कुछ हलकों में यह बहस चल रही है कि पुराने वाहनों को कम एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की सुविधा मिलनी चाहिए या नहीं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि सरकार की मौजूदा ई20 नीति को वापस लेने या उसे बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि ई20 को ई10 में बदला जाएगा। चर्चा केवल इस बात पर हो रही है कि क्या पुराने वाहनों को कम एथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।” खन्ना ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सरकार एथेनॉल मिश्रण नीति में कोई बदलाव करने का निर्णय लेती है, तो ई20 से ई10 या किसी अन्य मिश्रण पर जाने में बीपीसीएल को कोई बड़ा परिचालन या लॉजिस्टिक संकट नहीं दिखाई देता। हालांकि एक साथ कई ग्रेड के पेट्रोल की आपूर्ति और वितरण को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां जरूर मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “वर्तमान में जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें पुराने वाहनों के लिए ई10 ईंधन उपलब्ध कराना भी शामिल है। लेकिन इसके साथ आपूर्ति और वितरण संबंधी चुनौतियां जुड़ी हुई हैं, क्योंकि एक अतिरिक्त ग्रेड के पेट्रोल को समानांतर रूप से संभालना आसान नहीं होता।” गौरतलब है कि ई10 पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल और 90 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि ई20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल शामिल होता है। केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के जरिए पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। हाल ही में कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहन ई20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं हैं और वाहन निर्माता कंपनियां भी निजी तौर पर इस ईंधन को लेकर चिंतित हैं। इन दावों के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक फैक्टशीट जारी कर ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया था। मंत्रालय ने कहा था कि ई15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग पिछले साढ़े तीन वर्षों से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। इस अवधि में एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहनों में तकनीकी विफलता की कोई प्रमाणित घटना सामने नहीं आई है। फैक्टशीट के अनुसार, यदि एथेनॉल मिश्रण वास्तव में इंजनों या ईंधन प्रणालियों को व्यापक नुकसान पहुंचा रहा होता, तो वाहन निर्माताओं को बड़ी संख्या में वारंटी दावे, विशेष सेवा अभियान चलाने पड़ते और उपभोक्ताओं की ओर से व्यापक शिकायतें दर्ज होतीं। लेकिन ऐसा कोई रुझान देखने को नहीं मिला है।

तमिलनाडु ने नेपाल में फंसे तमिलों के बचाव के लिए आईएएस नेतृत्व वाली टीम भेजी

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हिमालयी देश के उत्तरी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के बाद फंसे तमिलनाडु निवासियों के बचाव प्रयासों के समन्वय के लिए आईएएस नेतृत्व वाली टीम को नेपाल भेजने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री विजय ने गुरुवार को अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता में आपदा में फंसे राज्य के लोगों की स्थिति की समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के गृह आयुक्त आशीष कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना होगा, फंसे हुए तमिलों का आकलन करेगा और बचाव कार्यों के समन्वय के लिए नेपाल सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। हिमस्खलन के कारण कोसी और त्रिशुली नदियों में उफान आने से बाढ़ आई, जिससे बड़े क्षेत्र जलमग्न हो गए। नेपाल के उत्तरी सीमावर्ती जिले रसुवा में कम से कम 175 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि लगभग 300 भारतीयों सहित लगभग 1,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा ने परिवहन और संचार व्यवस्था को बाधित कर दिया है, जिससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का पता लगाने के प्रयास जटिल हो गए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन अरुमुगम ने तमिलनाडु विधानसभा को विनाशकारी बाढ़ में फंसे राज्य के लोगों की दुर्दशा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु से 103 लोग नेपाल गए थे। इनमें कुंभकोणम के 57 लोगों का एक समूह भी शामिल था। मंत्री ने सदन को बताया, “कुंभकोणम के इन 57 लोगों में से 21 को बचा लिया गया है और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।” बाकी लोगों से संपर्क स्थापित करने और उनके स्थान और स्थिति का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में एक दल भेजने के निर्णय से तमिलनाडु अधिकारियों, भारतीय राजनयिक अधिकारियों और नेपाल सरकार के बीच समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है। प्रतिनिधिमंडल लापता या फंसे हुए लोगों के बारे में सत्यापित जानकारी एकत्र करेगा, उनकी आवश्यकताओं की पहचान करेगा और उनके बचाव में सहायता करेगा। अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे प्रभावित लोगों के परिवारों के साथ संपर्क में रहें और बचाव अभियान की प्रगति के बारे में अपडेट जानकारी प्रदान करें। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे फंसे हुए यात्रियों को हर संभव सहायता प्रदान करें और बचाए गए निवासियों को सुरक्षित घर वापस लाने की व्यवस्था करें। कई भारतीयों के लापता होने की आशंका बनी हुई है, ऐसे में बचाव दल क्षतिग्रस्त सड़कों और बाधित संचार नेटवर्क के बीच दुर्गम इलाकों में काम कर रहे हैं।