वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 6,125 हुई, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष ने जारी किया अपडेट

काराकास। वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या में अब भी बढ़ोतरी हो रही है। नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज की ओर से ऑफिशियल अपडेट जारी किया गया है। उनकी ओर से जारी अपडेट के अनुसार, 24 जून को आए भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 6,125 हो गई है। रोड्रिग्ज के टेलीग्राम चैनल पर सोमवार को पोस्ट की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि बचाए गए लोगों की संख्या 6,462 बनी हुई है, जबकि 60,992 लोगों को अस्पताल में इलाज मिला है। जारी अपडेट में कहा गया है कि अधिकारियों ने भूकंप से प्रभावित परिवारों को 287 घर मुहैया कराए हैं और देश भर में 43,679 इमारतों का मूल्यांकन किया है। वेनेजुएला सरकार ने भवन की रहने की क्षमता का आकलन करने के लिए ट्रैफिक-लाइट टैगिंग प्रणाली का उपयोग किया है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हरे टैग रहने योग्य संरचनाओं को दर्शाते हैं, पीले टैग प्रतिबंधित पहुंच को दर्शाते हैं, जबकि लाल टैग उच्च जोखिम वाली इमारतों की पहचान करते हैं, जिन्हें ध्वस्त किया जा सकता है। 24 जून को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप आए थे। जिनका केंद्र पश्चिमी राज्य याराक्यू और मध्य राज्य ला गुएरा था। रोड्रिग्ज ने पहले कहा था कि तटीय राज्य ला गुएरा में आश्रय स्थलों में 10,981 लोग हैं, जबकि कराकस में 6,133 और मध्य राज्य मिरांडा में 1,323 लोग हैं। यहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। इससे पहले, वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने देश के हालिया भूकंप के पीड़ितों के समर्थन के लिए 28 देशों की ओर से दी गई मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कराकस में एक संग्रह केंद्र का निरीक्षण करने के बाद यह टिप्पणी की, जहां 24 जून के भूकंप के पीड़ितों के लिए अस्थायी शिविरों में वितरण के लिए 2,000 टन से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता वितरित की गई है। रोड्रिग्ज ने कहा, “जिन देशों ने हमारी मदद की, उनको बहुत-बहुत धन्यवाद है। उन्होंने कहा, ‘प्रत्येक देश यह देख सकेगा कि उसकी सहायता का उपयोग कैसे किया जा रहा है, ताकि वेनेजुएला के लोगों को उस देश की मैत्रीपूर्ण मदद का एहसास हो। इस त्रासदी पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, वेनेजुएला जानता है कि वह अकेला नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भविष्य को देखें, हम कैसे उबरेंगे, हम प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण कैसे करेंगे।

अमेरिका के 25 राज्यों ने सेक्शन 301 टैरिफ को लेकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दायर किया मुकदमा

न्यूयॉर्क। अमेरिका में 25 राज्यों के एक गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। कोर्ट के एक डॉक्यूमेंट के अनुसार, इसमें कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 60 व्यापारिक साझेदारों के सामान पर बड़े नए टैरिफ लगाकर अपने कानूनी अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है। यह शिकायत यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर की गई है। इसमें हाल ही में लगाए गए शुल्कों को चुनौती दी गई है। प्रभावित देशों से आयात होने वाले ज्यादातर सामानों पर 10 फीसदी या 12.5 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। राज्यों के अनुसार, ये देश मिलकर अमेरिका के कुल आयात का 99.4 फीसदी हिस्सा हैं। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, कोएलिशन कोर्ट से टैरिफ को रोकने, उन्हें गैर-कानूनी घोषित करने और पहले चुकाई गई ड्यूटी के रिफंड का ऑर्डर देने के लिए कह रहा है। कानूनी चुनौती प्रशासन के उस प्रयास पर केंद्रित है जिसके तहत वह ट्रंप की व्यापक टैरिफ व्यवस्था को बरकरार रखना चाहता है, जिसे संघीय अदालतों ने अलग-अलग वैधानिक ढांचों के तहत लागू किए गए दो पहले के संस्करणों को पहले ही खारिज कर दिया था। राज्यों का तर्क है कि फेडरल अधिकारियों ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 और जबरन मजदूरी की चिंताओं का इस्तेमाल सिर्फ एक बहाने के तौर पर किया ताकि लगभग वैसी ही ग्लोबल ड्यूटी को तेजी से फिर से बनाया जा सके, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पहले ही खारिज कर दिया था। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने एक बयान में कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के गैर-कानूनी टैरिफ मेहनती परिवारों पर टैक्स के अलावा और कुछ नहीं हैं। इससे किराने का सामान, घर की जरूरी चीजें, बिल्डिंग मटीरियल और रोजमर्रा की अनगिनत चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, जिन पर न्यूयॉर्क के लोग निर्भर हैं।” ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने भी यही बात कही और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव पर जोर दिया। रेफील्ड ने एक्स पर लिखा, “आज, हम ट्रंप के गैर-कानूनी टैरिफ के खिलाफ अपना तीसरा केस फाइल कर रहे हैं। ट्रंप एक बार फिर ओरेगन के परिवारों और छोटे बिजनेस के लिए रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ा रहे हैं और एक बार फिर, हम उन्हें रोकने के लिए एक मल्टीस्टेट कोएलिशन को लीड कर रहे हैं।” न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हारने के बाद, सरकार एक बार फिर टैरिफ के नए राउंड के साथ परिवारों और बिजनेस पर गैर-कानूनी तरीके से टैक्स बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।” व्हाइट हाउस ने कोएलिशन की दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि सेक्शन 301 टैरिफ राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही कानूनी तौर पर टिकाऊ टूल साबित हुए हैं और मौजूदा सरकार में भी ऐसे ही बने हुए हैं। सोमवार को घोषित मुकदमे में न्यूयॉर्क के साथ एरिजोना, कैलिफोर्निया, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, केंटकी, मैसाचुसेट्स, मैरीलैंड, मेन, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, नॉर्थ कैरोलिना, ओरेगन, पेंसिल्वेनिया, रोड आइलैंड, वर्जीनिया, वरमोंट, वाशिंगटन और विस्कॉन्सिन शामिल हैं। सोमवार (अमेरिकी स्थानीय समय) का मुकदमा नई ड्यूटीज के लिए कम से कम दूसरी बड़ी कानूनी चुनौती है। छोटे व्यवसाय के एक समूह ने पहले भी सरकार पर मुकदमा किया था और इसी तरह की दलील दी थी कि ट्रंप सुप्रीम कोर्ट के अपने बड़े टैरिफ एजेंडे को पहले से अमान्य ठहराए जाने से बचने के लिए नए कानूनी अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

यादों में जोशी : मेलोड्रामा के दौर में सूक्ष्म अभिनय के प्रतीक बने अरविंद जोशी

नई दिल्ली। अरविंद जोशी का जन्म 5 अगस्त 1929 को एक सुसंस्कृत गुजराती ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके बड़े भाई प्रख्यात रंगमंच कलाकार और निर्देशक प्रवीण जोशी थे, जिनसे उन्हें कला की दुनिया में एक मजबूत आधार मिला। अरविंद जोशी ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की और लगभग एक दशक तक ‘इंडियन नेशनल थिएटर’ (आईएनटी) के साथ जुड़े रहे। आईएनटी के साथ उनका अनुभव उनके लिए एक प्रयोगशाला के समान था, जहां उन्होंने पारंपरिक नाटकों को आधुनिक सामाजिक यथार्थवाद के साथ जोड़ना सीखा। बाद में उन्होंने ‘प्रस्थान’ नाम की अपनी खुद की नाट्य संस्था की स्थापना की, जिसका उद्देश्य गुजराती रंगमंच को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक चिंतन का माध्यम बनाना था। थिएटर के साथ-साथ सिनेमा की चकाचौंध में भी अरविंद जोशी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। 1970 और 1980 के दशक में, जब भारतीय सिनेमा मेलोड्रामा के चरम पर था, अरविंद जोशी ने ‘अंडरएक्टिंग’ और सूक्ष्म भावों की शैली को अपनाया। बता दें कि मेलोड्रामा अतिरंजित नाटक है, जिसमें अत्यधिक भावनाएं, बढ़ा-चढ़ाकर की गई हरकतें और सनसनीखेज घटनाएं होती हैं। 1975 की ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव सिंह (संजीव कुमार) के बड़े बेटे की भूमिका अरविंद जोशी ने ही निभाई थी। स्क्रीन पर उनका समय भले ही कम था लेकिन उनके सटीक भावों ने दृश्य की गंभीरता को स्थापित किया। इसके अलावा, उन्होंने हिंदी और गुजराती सिनेमा में अपनी कलात्मक विविधता का निरंतर प्रदर्शन किया। अरविंद जोशी ने 1961 में फिल्म ‘चुंदड़ी चोखा’ से डेब्यू किया जो ग्रामीण गुजराती जीवन पर आधारित थी। 1969 में ‘कंकु’ में उन्होंने ग्रामीण समाज में एक विधवा के संघर्ष को दिखाया और यह फिल्म काफी प्रशंसित हुई। उसी साल हिंदी फिल्म ‘इत्तेफाक’ में उनकी महत्वपूर्ण सहायक भूमिका थी। 1975 की मशहूर फिल्म ‘शोले’ में वह ठाकुर के बड़े बेटे के रूप में नजर आए। 1983 में ‘ढोला-मारू’ राजस्थानी लोककथा पर आधारित रोमांटिक महाकाव्य थी। वर्ष 1957 में उनकी शादी उषा जोशी से हुई थी। प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता शरमन जोशी उनके बेटे हैं और जानी-मानी टेलीविजन अभिनेत्री मानसी जोशी रॉय उनकी बेटी हैं। उम्र संबंधी जटिलताओं और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, विशेषकर सीने में गंभीर संक्रमण के कारण 29 जनवरी 2021 को मुंबई के विले पार्ले स्थित नानावटी अस्पताल में उनका निधन हो गया।

सोने और चांदी में तेजी के साथ कारोबार, कीमतें एक प्रतिशत तक बढ़ीं

मुंबई। सोने और चांदी की शुरुआत मंगलवार को तेजी के साथ हुई और दोनों कीमती धातुओं में करीब एक प्रतिशत की बढ़त देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,42,915 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,43,559 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। सुबह 9:50 पर यह 555 रुपए या 0.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,43,470 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,43,365 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,43,915 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ। सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखी गई। चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,16,746 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,18,143 रुपए प्रति किलो पर खुला। फिलहाल यह 2,354 रुपए या 1.09 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,19,100 रुपए प्रति किलो पर खुला। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,18,143 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,19,896 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। कॉमेक्स पर सोना 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,113 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59 डॉलर प्रति औंस पर था। इसके अलावा, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट में बताया गया कि 2026 की दूसरी तिमाही में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 1,269 टन पर स्थिर रही। वहीं, साल की पहली छमाही मांग सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़कर अनुमानित 2,522 टन (जिसकी कीमत 380 अरब डॉलर थी) हो गई है। साल की दूसरी तिमाही में गोल्ड ईटीएफ, बार और सिक्कों में निवेश घटकर 262 टन रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह दूसरी तिमाही में गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ से 45 टन की निकासी थी, हालांकि साल की पहली छमाही में ईटीएफ की मांग 18 टन के साथ थोड़ी सकारात्मक बनी रही। बार और सिक्कों में निवेश काफी हद तक स्थिर रहा; दूसरी तिमाही में इसमें साल-दर-साल सिर्फ 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पहली छमाही की मांग पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत ज्यादा रही, जिसकी वजह पहली तिमाही में हुई जबरदस्त मांग थी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का पूर्वोत्तर दौरा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की करेंगे समीक्षा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 4 से 6 अगस्त तक पूर्वोत्तर भारत के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लेंगे। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा 4 अगस्त को नई दिल्ली से असम के डिब्रूगढ़ पहुंचेंगे और रात वहीं प्रवास करेंगे। दौरे के दूसरे दिन, 5 अगस्त को वे असम के चराइदेव जिले का दौरा करेंगे, जो हाल की बाढ़ के दौरान सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। यहां वे स्वास्थ्य सुविधाओं, राहत कार्यों और प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सेवाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे नागालैंड के मोन जिले के लिए रवाना होंगे, जहां विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों और बैठकों में भाग लेंगे। नागालैंड के दौरे के बाद नड्डा उसी दिन डिब्रूगढ़ लौटेंगे। यहां वे असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, चिकित्सा ढांचे की बहाली, राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाओं तथा संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री स्थानीय कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे और रात डिब्रूगढ़ में ही ठहरेंगे। दौरे के अंतिम दिन 6 अगस्त को केंद्रीय मंत्री अरुणाचल प्रदेश के केयी पैन्योर जिले के याज़ाली जाएंगे। वहां वे स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण करेंगे, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों से चर्चा करेंगे तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत बनाने और आपदा के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा मुख्य रूप से बाढ़ और भूस्खलन के बाद उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का आकलन करने पर केंद्रित है। हाल की प्राकृतिक आपदाओं से कई क्षेत्रों में चिकित्सा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जबकि जलजनित और वेक्टर जनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी प्रणाली, मेडिकल राहत कार्यों, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता की समीक्षा करेंगे। हालिया आपदा के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले सबसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के रूप में नड्डा का यह दौरा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा प्रभावित लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान उनकी समीक्षा के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा भविष्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की संभावना है।

अपने पहले बजट में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की घोषणा कर सकती है तमिलनाडु सरकार

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार अपने पहले बजट में शिक्षा से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं की घोषणा कर सकती है। इनमें सरकारी स्कूलों से सरकारी कॉलेजों में जाने वाले छात्रों के लिए 8,000 रुपये की आर्थिक मदद और छोटे किसानों के बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं। तमिलनाडु का बजट 5 अगस्त को विधानसभा में पेश किया जाएगा और उसके बाद 6 अगस्त को कृषि बजट पेश किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए तैयारियां चल रही हैं। लोगों को इससे काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि यह विजय सरकार का पहला पूर्ण बजट होगा। खबरों के अनुसार, शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के मकसद से “वेट्री तमिलनाडु” नाम के पांच साल के विजन प्लान के तहत शिक्षा से जुड़ी कई घोषणाओं पर विचार किया जा रहा है। सरकार से यह भी उम्मीद है कि वह शिक्षा को ‘राज्य सूची’ में लाने के अपने रुख को दोहराएगी और शिक्षा क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपायों की रूपरेखा बताएगी। इन बाधाओं में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नीट परीक्षा को लागू करना भी शामिल है। खबरों के मुताबिक, जिन प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है, उनमें अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम से लेकर रिसर्च स्टडीज़ तक के कोर्स करने वाले छात्रों के लिए 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला एजुकेशन लोन शामिल है। सरकार उन किसानों के बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा की घोषणा भी कर सकती है, जिनके पास दो एकड़ से कम खेती योग्य जमीन है। एक और अहम प्रस्ताव यह है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट एडमिशन में आरक्षण को मौजूदा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया जाए। उन जिलों में पांच नए सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, जहां अभी कोई सरकारी प्रोफेशनल कॉलेज नहीं है। लगभग 30 सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों को ऑटोनॉमस संस्थानों में अपग्रेड भी किया जा सकता है। कॉलेज एडमिशन से जुड़े आर्थिक बोझ को कम करने के लिए, सरकार उन छात्रों के लिए 8,000 रुपये की एकमुश्त सहायता की योजना बना रही है, जिन्होंने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की है और बाद में सरकारी कॉलेजों में एडमिशन लिया है। बजट उभरती हुई टेक्नोलॉजी को भी बड़ा बढ़ावा दे सकता है। सरकार ‘पेरियार इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ स्थापित करने पर विचार कर रही है। यह एक खास यूनिवर्सिटी होगी जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। प्रस्तावित उपाय सरकार के व्यापक पांच साल के शिक्षा रोडमैप का एक अहम हिस्सा होंगे और बजट में इनके लिए फंडिंग और इन्हें लागू करने के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

रोज करें गरुड़ासन, मजबूत होंगे हाथ-पैर और दूर होगी शरीर की जकड़न

नई दिल्ली। स्वस्थ शरीर के लिए रोजाना योगासन और संतुलित आहार जरूरी है। योग में गरुड़ासन एक ऐसा आसन है जो शरीर को लचीलापन और मजबूती देता है। खासकर बच्चों के शारीरिक विकास और सेहत के लिए योग एक आसान और बहुत लाभकारी तरीका माना जाता है। गरुड़ासन का नाम ‘गरुड़’ शब्द पर रखा गया है। ‘गरुड़’ का मतलब होता है ‘चील’। इस आसन में आप चील की मुद्रा में होते हैं, इसलिए इसका नाम ‘गरुड़ासन’ दिया गया है। अंग्रेजी में इसे ईगल पोज कहा जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार गरुड़ासन संतुलन, एकाग्रता और शारीरिक मजबूती को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है, जो हाथ-पैर की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके साथ ही, यह टखनों, पिंडलियों, जांघों और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। पैरों और कूल्हों में जकड़न दूर करता है। संतुलन और एकाग्रता में सुधार लाता है। कंधों और ऊपरी पीठ की अकड़न को भी दूर करता है। नसों को सक्रिय कर नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है। गरुड़ासन को करने के लिए पहले आप ताड़ासन मुद्रा में आराम से खड़े हो जाएं। इस दौरान आप सामान्य रूप से सांस लेते रहें। अब अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ें और दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं। अब पूरे शरीर का संतुलन दाएं पैर पर लें और बाएं पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इसके बाद बाएं पैर को दाईं टांग के आगे से घूमाते हुए पीछे की ओर ले जाएं। इस स्थिति में बाईं जांघ दाईं जांघ के ऊपर रहेगी। इसके बाद आपको दोनों बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए क्रॉस करना है। इस दौरान बाईं बाजू को दाईं बाजू के ऊपर रखना है। फिर आपको दोनों हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में लाने की कोशिश करनी है। जब तक संभव हो इस मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं। इस तरह गरुड़ासन के तीन से पांच चक्र किए जा सकते हैं। यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन इसके नियमित अभ्यास से कई तरह के लाभ मिलते हैं। घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में कोई चोट लगी हो तो यह आसन न करें।

पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने पुडुचेरी के सीएम एन. रंगासामी को जन्मदिन की दी बधाई

नई दिल्ली। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी का मंगलवार को जन्मदिन है। उनका जन्म 4 अगस्त, 1950 को हुआ था। उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर रंगासामी को बधाई देते हुए लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उनके अनुभवी और विकास पर ध्यान देने वाले नेतृत्व से पुडुचेरी के लोगों को फायदा हुआ है। उनकी लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए प्रार्थना करता हूं।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई देते हुए लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को उनके जन्मदिन पर बधाई और शुभकामनाएं। वे पुडुचेरी के विकास को और मजबूत करने और लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। उनकी अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करता हूं।” लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामीजी को जन्मदिन की बधाई। आपके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और लंबी व संतुष्ट जिंदगी की कामना करता हूं।” केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “पुडुचेरी के सीएम एन. रंगासामी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और लोगों की समर्पित सेवा के लिए कई और सालों की कामना करता हूं।” मणिपुर के मुख्यमंत्री ⁠युमनाम खेमचंद सिंह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और लंबी उम्र की कामना करता हूं। उनकी अनुभवी लीडरशिप पुडुचेरी को तरक्की और खुशहाली के रास्ते पर ले जाती रहे।” हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के माननीय मुख्यमंत्री एन. रंगासामी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर ऊर्जा प्रदान करे तथा आपके नेतृत्व में पुडुचेरी विकास, समृद्धि और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करता रहे।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उनको बधाई देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। एनडीए के एक अहम सदस्य के तौर पर, वे पुडुचेरी के विकास को तेज करने के लिए बिना थके काम कर रहे हैं। मां कामाख्या और श्रीमंत शंकरदेव से उनकी लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए प्रार्थना।

ग्रेटर नोएडा: इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाने वाली कंपनी में भीषण आग, दीवार गिरने से दो फायर कर्मियों की दर्दनाक मौत

ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के थाना ईकोटेक-3 क्षेत्र स्थित इलेक्ट्रॉनिक चिप निर्माण करने वाली आईएलजीआईएम कंपनी में मंगलवार तड़के भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग बुझाने के दौरान कंपनी की एक साइड की दीवार और लोहे का भारी बीम अचानक भरभराकर गिर गया, जिसकी चपेट में आए फायर विभाग के पांच जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान फायरमैन रोहित यादव और मुख्य आरक्षी चालक तीरथपाल सिंह को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, 3 और 4 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि करीब तीन बजे थाना ईकोटेक-3 क्षेत्र में स्थित आईएलजीआईएम कंपनी में आग लगने की सूचना पुलिस और फायर विभाग को मिली। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। काफी मशक्कत के बाद फायर कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया, लेकिन इसी दौरान कंपनी की एक दीवार और लोहे का बीम अचानक गिर गया, जिससे राहत कार्य में जुटे पांच फायर कर्मी मलबे की चपेट में आ गए। घायलों में मुख्य आरक्षी चालक राजपाल सिंह, फायरमैन मनीष कुमार, मुख्य आरक्षी चालक तीरथपाल सिंह, फायरमैन अमित कुमार और फायरमैन रोहित यादव शामिल थे। सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रोहित यादव और तीरथपाल सिंह की मौत हो गई। वहीं अन्य तीन घायल कर्मियों की हालत चिकित्सकों के अनुसार खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनका उपचार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में कंपनी में इलेक्ट्रॉनिक पीसीबी चिप के निर्माण का कार्य होने की बात सामने आई है। घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, फायर विभाग के अधिकारी तथा एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की टीम मौके पर पहुंचकर राहत एवं जांच कार्य में जुट गई। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा है और हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। कंपनी में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। हादसे में जान गंवाने वाले दोनों फायर कर्मियों के प्रति प्रशासन ने गहरा शोक व्यक्त किया है। वहीं, घटना के संबंध में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

ट्रंप ने कहा ईरान से होर्मुज खोलने पर हो रही बात, तेहरान ने बातचीत से किया इनकार

न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही ईरान को “सिर कुचलने से पहले आखिरी मौका” देने की चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये भी दावा किया कि ये अगले एक दिन में संभव है। ओवल ऑफिस में सोमवार को उन्होंने कहा, “वे डील जल्दी करेंगे, चाहे जैसे भी। यह बहुत जटिल नहीं है। हम स्ट्रेट को लेकर बात कर रहे हैं, इसे खोलने की बात, इसे शाब्दिक रूप से कल तक खुला रखने की बात।” हालांकि, ईरान ने कहा है कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं हो रही है। अमेरिका और ईरान के इन दावों के बीच जहाजों के लिए होर्मुज से खुले और स्वतंत्र ट्रांजिट की स्थिति अनिश्चितता में है। तेहरान में एक प्रेस ब्रीफिंग में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा, “इस समय हम संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं कर रहे हैं।” बाघेई ने कहा कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची को छोड़कर सभी बातचीत करने वाले ईरान में थे। हालांकि, ट्रंप ने ईरानी मंत्री के इस दावे को खारिज करते हुए ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरानी नेतृत्व अविश्वसनीय रूप से दोहरे चरित्र वाली है। मीटिंग के लिए भीख मांगने के बाद वे खुलेआम और गर्व से कहते हैं कि वे कोई बातचीत नहीं कर रहे हैं।” बाघेई ने कहा कि ईरान ओमान के साथ परामर्श कर रहा है। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार इसका मकसद इस स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था करना है। उन्होंने कहा कि मस्कट-तेहरान वार्ता में कोई अन्य देश शामिल नहीं है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने रविवार को जिस बड़े बमबारी अभियान की योजना बनाई थी, उसे रोक दिया क्योंकि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर समेत कई देशों ने उनसे पहले से नियोजित हमले रोकने का अनुरोध किया था। रविवार को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से बात की। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार उन्होंने तनाव कम करने के लिए बातचीत को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया और संघर्ष विराम के लिए हर संभव प्रयास करने के महत्व को रेखांकित किया ताकि राजनयिक समाधान का रास्ता साफ हो सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि नियोजित हमले की खबरें लीक होने से ईरान घबरा गया था। उन्होंने कहा कि यह हमला द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा होता और ईरान ने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि हम बात करना चाहते हैं। हम स्ट्रेट को लेकर बात करना चाहते हैं। स्ट्रेट को खोलने के लिए एक ज्ञापन समझौते पर ट्रंप और ईरानी प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियन ने 17 जून को हस्ताक्षर किया था। लेकिन ईरान के स्ट्रेट में जहाजों पर हमला करने और अमेरिका के ईरानी पोर्ट्स को ब्लॉक करने के कुछ ही हफ्तों बाद यह समझौता टूट गया।