कोयंबटूर की नोय्याल नदी में बह रहा बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज, एसटीपी प्रोजेक्ट में देरी से बढ़ी चिंता

कोयंबटूर। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के तहत नेशनल रिवर कंजर्वेशन डायरेक्टरेट (एनआरसीडी) से मंजूरी मिलने के बावजूद नोय्याल नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने के काम में बहुत कम प्रगति हुई है। इस वजह से कोयंबटूर जिले की 9 नगर पंचायतें अभी भी बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी नदी में बहा रही हैं। इरुगुर, सुलूर, कन्नमपलयम, वेल्लालोर, पेरूर, पूलुवापट्टी, वीरपांडी, अलंदुरई और थोंडामुथुर से होने वाले सीवेज प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए ‘नदंथई वाझी कावेरी’ योजना के तहत 2024 में एसटीपी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी। इस पहल का मकसद इन स्थानीय निकायों से निकलने वाले सीवेज को नोय्याल नदी में पहुंचने से पहले इकट्ठा करना और उसे ट्रीट करना है। यह प्रोजेक्ट नदी के पानी की गुणवत्ता सुधारने और नदी के रास्ते में आने वाले इलाकों में भूजल को और दूषित होने से बचाने के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। हालांकि, मंजूरी मिलने के लगभग दो साल बाद भी, प्रस्तावित ट्रीटमेंट सुविधाओं को लागू करने का काम अभी तक तेजी नहीं पकड़ पाया है। तमिलनाडु में बहने वाली कावेरी नदी की एक प्रमुख सहायक और मौसमी नदी है, जो कोयंबटूर जिले में पश्चिमी घाट से निकलती है और कावेरी में मिलने से पहले कोयंबटूर, तिरुप्पुर, इरोड और करूर जिलों से होते हुए लगभग 158.35 किलोमीटर तक बहती है। नदी का लगभग 62.21 किलोमीटर हिस्सा कोयंबटूर जिले से गुजरता है, जहां इसके जल तंत्र में 17 बांध और 25 तालाब शामिल हैं। नदी के किनारे बसे स्थानीय निकायों से बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज बहाना पर्यावरण के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। मंजूर की गई फंडिंग व्यवस्था के तहत, केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट की लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा उठाने की उम्मीद है, जबकि तमिलनाडु सरकार बाकी 40 प्रतिशत हिस्सा देगी। नोय्याल के किनारे रहने वाले किसानों ने चिंता जताई है कि गंदा पानी लगातार बहाए जाने से भूजल दूषित हो रहा है और खेती के काम पर असर पड़ रहा है। एक किसान और गैर-राजनीतिक किसान संघ के सदस्य राजन अरुणाचलम ने कहा कि शुरुआती घोषणा के बाद एटीपी बनाने के काम में लगभग कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों से बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी लगातार नदी में जा रहा है, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है और नोय्याल के किनारे के इलाकों में खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। कोयंबटूर के जिला कलेक्टर पवनकुमार जी. गिरियप्पनावर ने कहा कि नोय्याल नदी के किनारे स्थित स्थानीय निकायों तक इस प्रोजेक्ट को बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट अभी ‘डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ के चरण में है और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।

पहाड़ी बारिश का असर: प्रयागराज में बढ़ रहा गंगा-यमुना का जलस्तर, नदी किनारे के लोगों को सतर्क रहने की सलाह

प्रयागराज। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और ऊपरी इलाकों से छोड़े जा रहे पानी के कारण प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी तटबंध को कोई खतरा नहीं है। बाढ़ जैसी स्थिति भी अभी नहीं बनी है। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं तथा नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। एहतियात के तौर पर नदी किनारे आजीविका चलाने वाले लोग अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने लगे हैं। प्रशासन का कहना है कि जलस्तर में लगातार हो रहे बदलाव पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव के कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जब भी पहाड़ी क्षेत्रों या ऊपरी राज्यों में बारिश होती है तो उसका असर प्रयागराज में जरूर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि संगम वह स्थान है जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम माना जाता है, इसलिए विभिन्न नदियों का पानी यहां आकर मिलता है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर बारिश न होने के बावजूद भी जलस्तर बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि संगम क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु घूमने-फिरने तथा धार्मिक गतिविधियों के लिए आते हैं। मौसम सुहावना होने के कारण लोगों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन प्रशासन द्वारा लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि दो दिन पहले जलस्तर कुछ कम हुआ था, लेकिन पिछले दो दिनों में यह फिर तेजी से बढ़ा है। नदी का जलस्तर करीब 10 से 12 फीट तक बढ़ चुका है, जिससे नदी किनारे के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। वहीं, संगम में नियमित स्नान करने आने वाले एक श्रद्धालु ने बताया कि वह रोज नदी में स्नान करने आते हैं। उन्होंने कहा कि दो-तीन दिन पहले तक लोग नदी के भीतर काफी दूर तक जा सकते थे, लेकिन अब पानी बढ़ने के कारण स्नान का क्षेत्र सीमित हो गया है। हालांकि अभी जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है, लेकिन इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्क रहें, अनावश्यक रूप से गहरे पानी में न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। फिलहाल हालात सामान्य हैं, लेकिन लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

आमिर खान धमकी मामले में बड़ा खुलासा, फॉरेंसिक जांच में आरजू बिश्नोई की आवाज से ऑडियो मैच होने का दावा

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को मिली जान से मारने की धमकी के मामले में जांच एजेंसियों को एक अहम सुराग मिला है। पंजाब पुलिस की फॉरेंसिक जांच के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल हुए धमकी भरे ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्य आरजू बिश्नोई की पुरानी रिकॉर्डिंग से मेल खाती है। इस रिपोर्ट के बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने जांच तेज कर दी है। हालांकि पुलिस अभी इस पूरे मामले में मिले डिजिटल सबूतों और अन्य तकनीकी जानकारियों की भी गहराई से जांच कर रही है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वायरल ऑडियो में मौजूद आवाज को आरजू बिश्नोई के पुराने वॉयस सैंपल से मिलाया गया। पंजाब पुलिस ने जांच के बाद इसकी जानकारी मुंबई क्राइम ब्रांच को दी। पुलिस इसे मामले में मिले महत्वपूर्ण सुरागों में से एक मान रही है। दरअसल, कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हुई थी। इस ऑडियो में बोलने वाले व्यक्ति ने खुद को आरजू बिश्नोई बताया था और आमिर खान को धमकी देते हुए उन्हें चेतावनी दी थी। ऑडियो में अभिनेता को सबक सिखाने की बात कही गई थी। इस ऑडियो के सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच में यह भी सामने आया कि धमकी देने वालों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया। मुंबई पुलिस की साइबर सेल की शुरुआती जांच में धमकी से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट (आईपी) विदेश से जुड़े मिले थे। जांच में पता चला कि स्वीडन आधारित वीपीएन और एन्क्रिप्टेड टोर ब्राउजर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर वास्तविक लोकेशन और डिवाइस की जानकारी छिपाने की कोशिश की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि धमकी वाला ऑडियो सीधे तौर पर आरज़ू बिश्नोई ने रिकॉर्ड किया था या फिर गैंग के किसी अन्य सदस्य ने उसकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए इसे तैयार किया। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि ऑडियो को किसने सबसे पहले सोशल मीडिया पर डाला और इसे फैलाने में कौन-कौन लोग शामिल रहे। इस मामले में मुंबई पुलिस, पंजाब पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियां साथ में काम कर रही हैं। एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, इंटरनेट कॉलिंग और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही हैं, ताकि धमकी देने वाले व्यक्ति और उसके पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।

तमिलनाडु में 13 साल बाद ऑटो-रिक्शा के किराए में होगा संशोधन, यूनियनों ने सौंपे ज्ञापन

चेन्नई। तमिलनाडु में 13 साल के अंतराल के बाद ऑटो-रिक्शा के किराए में संशोधन होने जा रहा है। राज्य परिवहन प्राधिकरण ने ट्रेड यूनियनों और यात्री प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। परिवहन प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा कि किराए में संशोधन की सिफारिश करने वाली रिपोर्ट तमिलनाडु गृह विभाग को भेज दी गई है और नए शुल्क पर जल्द ही निर्णय आने की उम्मीद है। तमिलनाडु में लगभग 3.46 लाख ऑटो-रिक्शा हैं और मौजूदा किराया ढांचा लगभग 13 वर्षों से अपरिवर्तित है। ऑटो चालकों और ट्रेड यूनियनों ने ईंधन की कीमतों, रखरखाव खर्च, बीमा प्रीमियम और अन्य परिचालन लागतों में हुई भारी वृद्धि का हवाला देते हुए सरकार पर किराया संशोधन का दबाव बनाया है। संशोधित किराया संरचना निर्धारित करने की प्रक्रिया के अंतर्गत, सरकारी अधिकारियों, ऑटो-रिक्शा ट्रेड यूनियनों और यात्री संगठनों की एक त्रिपक्षीय बैठक 9 जुलाई को चेन्नई में आयोजित की गई। इस परामर्श में ट्रेड यूनियनों के 30 से अधिक प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ-साथ यात्री संगठनों के लगभग 90 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हालांकि, दोनों पक्षों ने न्यूनतम किराए को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव रखे। ऑटो-रिक्शा ट्रेड यूनियनों ने न्यूनतम किराया बढ़ाकर 70 रुपये करने की मांग की, उनका तर्क था कि पिछले दशक में परिचालन खर्चों में भारी वृद्धि को देखते हुए मौजूदा किराया अब व्यवहार्य नहीं रह गया है। यात्री संगठनों ने संशोधन की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए सरकार से न्यूनतम किराया 50 रुपये पर बनाए रखने का आग्रह किया ताकि ऑटो यात्रा सस्ती बनी रहे, विशेष रूप से दैनिक यात्रियों के लिए। परामर्श के बाद, परिवहन प्राधिकरण के अधिकारियों ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों की जांच की और सरकार के विचारार्थ एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट में त्रिपक्षीय चर्चाओं के दौरान उठाए गए प्रमुख बिंदुओं के साथ-साथ ऑटो-रिक्शा परिचालन लागत को प्रभावित करने वाले कई कारकों को भी ध्यान में रखा गया है। प्राधिकरण ने अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले अन्य प्रमुख शहरों में प्रचलित ईंधन की कीमतों और ऑटो-रिक्शा के किराए का भी अध्ययन किया है। रिपोर्ट को अब आगे विचार के लिए गृह विभाग को सौंप दिया गया है, जो परिवहन संबंधी नियामक मामलों की देखरेख करता है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार संशोधित न्यूनतम किराया और उसके बाद प्रति किलोमीटर शुल्क को अंतिम रूप देने से पहले सिफारिशों की जांच करेगी। मंजूरी मिलने के बाद, यह नया किराया तमिलनाडु में 13 वर्षों में ऑटो-रिक्शा किराए में पहला बड़ा संशोधन होगा और राज्य भर में चलने वाले लगभग 3.46 लाख वाहनों पर लागू होगा।

फैमिली वेकेशन पर मीरा राजपूत, शेयर कीं ससुरालवालों संग मस्ती भरी तस्वीरें

मुंबई। एंटरप्रेन्योर मीरा राजपूत कपूर ने मंगलवार सुबह फैंस के साथ अपनी फैमिली वेकेशन की मजेदार झलकियां शेयर कीं। उन्होंने अपने पति शाहिद कपूर, सास सुप्रिया पाठक, ससुर पंकज कपूर, ननद सनाह कपूर और कपूर परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए अपने ‘कपूर ससुराल वालों’ के साथ बिताए मजेदार पलों को दिखाया। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मीरा ने सुप्रिया पाठक के साथ एक खुशमिजाज तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वे कैमरे के सामने मुस्कुराती हुई नजर आ रही थीं। तस्वीर के साथ कैप्शन में मीरा ने लिखा, “हैव-टू-बी कपूर” एक और तस्वीर में शाहिद कपूर अपने पिता और दिग्गज एक्टर पंकज कपूर के साथ पोज देते हुए दिखे। उनके बेटे जैन, जिनका चेहरा फुटबॉल इमोजी से ढका हुआ था, शाहिद को गले लगाते हुए दिखे। मीरा ने तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा, “कैन-ओनली-बी कपूर” उन्होंने एक्ट्रेस और अपनी ननद सनाह कपूर की अपनी बेटी मिशा के साथ पोज देते हुए एक तस्वीर भी शेयर की और लिखा, “ओनली-वांट-टू-बी कपूर” जानकारी के लिए बता दें कि मीरा राजपूत ने 7 जुलाई 2015 को गुरुग्राम में एक निजी समारोह में शाहिद कपूर से शादी की थी। उनकी शादी आध्यात्मिक संस्था ‘राधा स्वामी सत्संग ब्यास’ के जरिए तय हुई थी क्योंकि दोनों परिवार इस समुदाय के माध्यम से एक-दूसरे को जानते थे। लगभग 10 साल के उम्र के अंतर के बावजूद, इस कपल को बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक माना जाता है। वे बेटी मिशा (जन्म 2016) और बेटे जैन (जन्म 2018) के माता-पिता हैं। प्रोफेशनल तौर पर, मीरा एक वेलनेस क्लिनिक और स्किन केयर ब्रांड को संभाल रही हैं। काम की बात करें तो, इस साल शाहिद कपूर की दो बड़ी फिल्में रिलीज हुईं। उन्हें आखिरी बार जून में रिलीज हुई ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था और उससे पहले वे विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी ‘ओ रोमियो’ में नजर आए थे।

महाराष्ट्र में मछली पकड़ने पर 15 अगस्त तक पाबंदी, मंत्री नितेश राणे ने गोवा से मांगा सहयोग

मुंबई। समुद्री मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने तटीय इलाकों में मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी को 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इस फैसले की जानकारी महाराष्ट्र के मत्स्य मंत्री नितेश राणे ने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से फोन पर बात कर साझा की। नितेश राणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से टेलीफोन पर बात की। उन्होंने उन्हें महाराष्ट्र के मत्स्य विभाग द्वारा 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर लगाए गए प्रतिबंध के बारे में बताया।इस दौरान उन्होंने गोवा सरकार से अनुरोध किया कि इस अवधि में महाराष्ट्र का सहयोग करे और यह सुनिश्चित करे कि गोवा के मछुआरे महाराष्ट्र के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए प्रवेश न करें। मंत्री नितेश राणे ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस मामले पर सकारात्मक जवाब दिया और पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने सहयोग के लिए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का धन्यवाद भी किया। बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने तटीय इलाकों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध 15 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इसके तहत राज्य की तटरेखा से 12 समुद्री मील यानी करीब 24 किलोमीटर के भीतर व्यावसायिक और यंत्रीकृत मछली पकड़ने पर रोक रहेगी। यह पाबंदी केंद्र सरकार के 31 जुलाई को खत्म हुए मानक प्रतिबंध से भी आगे तक बढ़ाई गई है। हालांकि इस प्रतिबंध से पारंपरिक मछुआरों को छूट दी गई है। अधिकृत छोटे और बिना मोटर वाले नावों का इस्तेमाल करने वाले पारंपरिक मछुआरे तट के पास स्थानीय पानी में मछली पकड़ सकते हैं। वहीं, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए यंत्रीकृत नावों को 1 अगस्त से 12 समुद्री मील से आगे खुले समुद्र में मछली पकड़ने की अनुमति है। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि इस पाबंदी का मकसद समुद्री जीवों को प्रजनन का समय देना और मछली भंडार को बढ़ाना है ताकि मछुआरों को आगे चलकर बेहतर मुनाफा मिल सके।

भारत का लक्ष्य 2030 तक 10,000 जीआई पंजीकरण और एफटीए के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाना

नई दिल्ली। भारत का ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) इकोसिस्टम परंपरा और अवसरों के बीच एक पुल के रूप में विकसित हो रहा है। 2030 तक 10,000 जीआई रजिस्ट्रेशन के लक्ष्य के साथ, देश अपनी विरासत-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अपने अनोखे क्षेत्रीय उत्पादों की वैश्विक उपस्थिति बढ़ाने की अच्छी स्थिति में है। यह जानकारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में मंगलवार को दी गई। भारत में 800 से ज्यादा रजिस्टर्ड जीआई प्रोडक्ट हैं और 2014 से अब तक 607 जीआई दिए जा चुके हैं। पिछले 10 सालों में, जीआई टैग के लिए अधिकृत यूजर्स की संख्या 365 से बढ़कर 29,000 (जनवरी 2025 तक) हो गई है। 2025 के संशोधन के जरिए, जीआई एप्लीकेशन और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए फीस में 80 प्रतिशत की कमी की गई है। टैग के रिन्यूअल की फीस भी 3,000 रुपए से घटाकर सिर्फ 500 रुपए कर दी गई है। सरकारी बयान के अनुसार, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) खास क्षेत्रीय उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाकर जीआई की वैल्यू बढ़ाते हैं। जीआई टैग प्रमाणिकता और मूल स्थान को प्रमाणित करते हैं, जबकि एफटीए व्यापार की बाधाओं को कम करते हैं और निर्यात के मौकों को बेहतर बनाते हैं। इनके बढ़ते महत्व को देखते हुए, जीआई भारत की व्यापार वार्ताओं में एक अहम मुद्दा बन गए हैं। प्रोडक्ट्स को उनके मूल स्थान से जोड़कर, जीआई टैग पारंपरिक ज्ञान को बचाते हैं, उनके गलत इस्तेमाल को रोकते हैं और ग्राहकों का भरोसा बढ़ाते हैं। ये कारीगरों, बुनकरों, किसानों और उत्पादक समूहों को बाजार में बेहतर पहचान दिलाने और प्रीमियम बाजारों तक पहुंचने में मदद करते हैं। फैक्टशीट के अनुसार, भारत का जीआई इकोसिस्टम पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है, जिसे मजबूत कानूनी ढांचे और लोगों में बढ़ती जागरूकता का समर्थन मिला है। सरकारी पहलें वित्तीय सहायता, निर्यात को बढ़ावा देने, पर्यटन को जोड़ने और खास मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए इस इकोसिस्टम को और मजबूत कर रही हैं। ये सभी प्रयास मिलकर जीआई प्रोडक्ट्स को ग्रामीण विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और निर्यात-आधारित विकास का जरिया बना रहे हैं। बयान में कहा गया, “जीआई टैग कारीगरों की कलाकृतियों के लिए असलियत की मुहर का काम करता है, जो उन्हें नकल, गलत इस्तेमाल और बिना इजाज़त कमर्शियल इस्तेमाल से बचाता है। हालांकि, इसका महत्व कानूनी सुरक्षा से कहीं अधिक है।” उदाहरण के लिए, चन्नापटना के खिलौनों को 2006 में जीआई पहचान मिली थी। यह मान्यता सिर्फ कर्नाटक के चन्नापटना इलाके में बने लकड़ी के खिलौनों के लिए है। इन खिलौनों को उस इलाके की खास ‘लैकरवेयर’ कला (लकड़ी पर रंग-रोगन और पॉलिश की कला) का इस्तेमाल करके बनाया जाना चाहिए। बयान में कहा गया है कि भले ही यह एक साधारण सर्टिफिकेशन लगे, लेकिन इस टैग से बहुत बड़े फायदे हो सकते हैं। जीआई टैग सिर्फ एक लेबल से कहीं ज्यादा है। कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, इससे ग्रामीण कारीगरों की आमदनी 20-30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। किसी प्रोडक्ट की उत्पत्ति और उसकी खास विरासत को सर्टिफाई करके, जीआई टैग खरीदारों का भरोसा बढ़ाते हैं और मार्केट में प्रोडक्ट की अपील को बेहतर बनाते हैं। जीआई-टैग वाले प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग से कारीगरों को ज्यादा पहचान मिलती है, वे प्रीमियम मार्केट तक पहुंच पाते हैं, उनकी मोल-भाव करने की क्षमता मजबूत होती है और उन्हें अपने काम से बनने वाली वैल्यू का बड़ा हिस्सा मिलता है। बयान के अनुसार, यह मान्यता टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करती है। ये आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कारीगरी को बचाने और बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। भारत में हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स, कृषि प्रोडक्ट्स, मैन्युफैक्चर्ड गुड्स, फ़ूड प्रोडक्ट्स और नेचुरल प्रोडक्ट्स जैसी कैटेगरी में जीआई-टैग वाले प्रोडक्ट्स मौजूद हैं।

पीएम आवास की ओर प्रस्तावित मार्च पर रोक की मांग, सैकड़ों वकीलों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास की ओर किसी भी प्रस्तावित मार्च को रोकने और हाई-सिक्योरिटी इलाकों में प्रदर्शन के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग को लेकर देशभर के सैकड़ों वकीलों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन भेजा है। यह ज्ञापन एडवोकेट संकेत गुप्ता के जरिए भेजा गया। वकीलों ने ज्ञापन में कहा कि प्रधानमंत्री आवास देश के सबसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले प्रतिष्ठानों में से एक है। ऐसे में यहां राजनीतिक प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने दिल्ली पुलिस से मांग की कि पीएम आवास जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में राजनीतिक प्रदर्शन के लिए एक एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया बनाई जाए। ज्ञापन में अरविंद केजरीवाल द्वारा पीएम आवास की ओर मार्च के आह्वान का भी हवाला दिया गया। वकीलों ने कहा कि 20 जुलाई को बिना अनुमति के हुए धरने जैसी घटनाएं फिर न हों, इसे रोकना जरूरी है। वकीलों ने आशंका जताई कि अगर राजनीतिक दल या संगठन हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों की ओर जुटान करते हैं तो इससे सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ज्ञापन में कहा गया कि संविधान के आर्टिकल 19 के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को उससे ऊपर रखना जरूरी है। इसी वजह से मांग की गई कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास किसी भी तरह की अवैध सभा, जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति न दी जाए। ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और एसपीजी एक्ट के प्रावधानों का भी जिक्र किया गया। वकीलों ने कहा कि इन कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही दिल्ली पुलिस से अपील की गई कि वह सभी हाई-सिक्योरिटी प्रतिष्ठानों के आसपास प्रदर्शन को लेकर एक जैसी और व्यापक एसओपी जारी करे। वकीलों ने यह भी कहा कि भविष्य में अगर कोई राजनीतिक दल या संगठन हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र की ओर मार्च का सार्वजनिक आह्वान करता है तो उस पर रोक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से तय होने चाहिए। ज्ञापन को अत्यंत जरूरी बताते हुए वकीलों ने दिल्ली पुलिस से इस मामले में तत्काल निवारक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

केरल: बाढ़ से मरने वालों की संख्या 21 हुई, छह लापता; आईएमडी ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया

तिरुवनंतपुरम। केरल में लगातार हो रही बारिश की वजह से मरने वालों की संख्या 21 हो गई है, जबकि छह लोग अभी भी लापता हैं। भारी बारिश से पूरे राज्य में स्थिति गंभीर हो गई है। बाढ़, भूस्खलन और नदियों के उफान पर होने की वजह से हजारों लोग बेघर हो गए हैं, घरों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों को कई जिलों में बचाव और राहत कार्य तेज करने पर मजबूर होना पड़ा है। परिस्थितियों का समाधान करने के लिए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन मंगलवार को पठानमथिट्टा जिले के रन्नी और अरनमुला के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। उनका पहला पड़ाव दोपहर में अरनमुला होगा, जहां उनसे जिले के अधिकारियों से बातचीत करने, राहत कैंपों के कामकाज का आकलन लगाने और दूसरी प्रभावित जगहों पर जाने से पहले बचाव कार्यों की समीक्षा करने की उम्मीद है। आपदा से निपटने के तरीकों से राजनीतिक आलोचना से घिरी सरकार के लिए मुख्यमंत्री का यह दौरा अहम है। पुलिस की ओर से बाढ़ के शुरुआती अहम दौर में कोऑर्डिनेशन में कमी का आरोप लगाया गया है, और सवाल उठाया है कि समय पर कार्रवाई से आपदा का असर कम हो सकता था? जंगल के इलाकों में रात भर बारिश कम हुई, लेकिन पठानमथिट्टा में हालात अभी भी ठीक नहीं हैं। रन्नी और अरनमुला में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, जहां पंबा, अचनकोविल और कक्कत्तर नदियों में पानी का लेवल अभी भी ज्यादा है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी है। जिला प्रशासन की ओर से 74 राहत कैंप खड़े हो गए हैं, जिनमें से 3,000 से ज्यादा लोगों को रहने की जगह दी गई है। कैंपों के रास्ते जरूरी सामान बांट जा रहा है, जबकि बचाव दल कमजोर जगहों पर तैयार हैं। अधिकारियों की ओर से लोगों को पहाड़ी और बाढ़ वाले इलाकों में बिना वजह जाने से बचने की सलाह दी गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मध्य और उत्तरी केरल में और भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है, जिससे नई बाढ़ और भूस्खलन का डर बढ़ गया है।

विपक्ष नहीं चलने दे रहा सदन; जेपीएससी परीक्षा पर नहीं दे रहा जवाब : संबित पात्रा

नई दिल्ली। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पर संसद की कार्यवाही न चल पाने को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष के सांसद सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे हैं। एक के बाद एक अवरोध लाकर सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विपक्ष संसद में किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार नहीं है। ये केवल सदन में शोर कर रहे है जिससे सदन चल नहीं पा रहा है। इसके साथ ही वे अभी भी झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा पर चुप हैं। इस पर कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में खड़े होकर घंटों भाषण देते हैं। अच्छी बात है, कम से कम चर्चा तो हुई लेकिन जब उसी विषय पर उनके बेटे कर्नाटक में ऐसा बयान देते हैं जो असंवेदनशील है, अमानवीय है तो उस पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे चुप हैं। उन्होंने कहा कि कल हमने टीवी पर देखा कि कर्नाटक में हुए पेपर लीक और पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों ने आंदोलन किया और मीडिया बंधुओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे व कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से पूछा कि क्या आप जिम्मेदारी लेंगे क्योंकि आप राज्य के गृह मंत्री हैं। इस दौरान बड़े अहंकार से प्रियांक खड़गे ने कहा कि ठीक है, पहले छात्रों को 25 दिन की भूख हड़ताल करने दो, फिर हम लाठीचार्ज करेंगे और फिर अपने इस्तीफे के बारे में चिंता करेंगे। प्रियांक के इस बयान पर राहुल गांधी चुप हैं और मैं दावे के साथ कहना चाहूंगा कि आज भी वे सदन चलने नहीं देंगे। यह कांग्रेस का डबल स्टैंडर्ड है। कर्नाटक में प्रियांक खड़गे ने असंवेदनशील बयान देते हुए कहा, “उन्हें भूख हड़ताल करने दो। फिर हम उन पर लाठीचार्ज करेंगे और उसके बाद ही मैं इस्तीफ़े के बारे में सोचूंगा। राहुल गांधी इस पर अभी भी चुप हैं।” संबित पात्रा ने कहा कि मानसून सत्र को कांग्रेस पार्टी और उसके कुछ सहयोगी दल बाधित कर रहे हैं। एक सत्र पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। हालांकि जब से सत्र शुरू हुआ है, प्रश्नकाल हो नहीं पा रहा है। जीरो आवर के लिए सदन में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। लगभग किसी भी बिल पर चर्चा हो नहीं पा रही है। इसके पीछे का कारण आपने कांग्रेस और उसके कुछ इंडिया ब्लॉक के साथियों में देखा होगा। मुझे तो उनके डबल स्टैंडर्ड पर आश्चर्य होता है। उन्होंने कहा कि झारखंड में हजारों छात्र आंदोलन पर बैठे हैं और कांग्रेस पार्टी एक शब्द भी झारखंड में आंदोलन पर बैठे छात्रों के पक्ष में बोलती नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस के विधायक सदन में उस विषय को उठाने से बच रहे हैं। झारखंड की जेपीएससी परीक्षा को लेकर एक तख्ती भी कांग्रेस के हाथों में नहीं देखी गई क्योंकि यह सेलेक्टिव आउटरेज है। भाजपा सांसद ने कहा कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 कितने दिनों के भीतर बर्थ और डेथ रजिस्टर होना चाहिए, अगर नहीं हुआ तो उसका परिणाम क्या होगा। जन्म और मृत्यु सतत प्रक्रिया है, जो देश और विश्व में चलती रहती है। इसे लेकर नागरिक अपने अधिकारों का प्रयोग किस तरह करें और नए कानून में क्या है, इस पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने चर्चा नहीं होने दी। क्या यह विषय गंभीर है या नहीं। उन्होंने कहा कि सोमवार को निर्मला सीतारमण ने बैंकर बुक एविडेंस बिल 2026 पेश किया, यह कितना बड़ा बिल है क्योंकि सभी का सरोकार बैंकिंग से है लेकिन बैंकिंग से सरोकार रखने वाली भारत की जनता को बैंकर बुक एविडेंस बिल 2026 के बारे में कोई चर्चा सुनने को नहीं मिलती है क्योंकि सदन में हुड़दंग मचा हुआ है।