दिल्ली में कोचिंग सेंटरों पर सख्ती, शहरभर में सुरक्षा जांच के आदेश

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने कोचिंग संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया। शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बुधवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शहरभर में कोचिंग सेंटरों पर विशेष सुरक्षा जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए। बैठक में गृह विभाग, नगर निगम दिल्ली, शहरी विकास विभाग, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और उच्च शिक्षा निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और नियामकीय ढांचे की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कोचिंग संस्थानों को सरकार और न्यायालय द्वारा तय सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। सरकार ने तत्काल प्रभाव से दिल्ली विकास प्राधिकरण,एमसीडी, दिल्ली अग्निशमन सेवा और डीडीएमए को निर्देश दिया है कि मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर और कटवरिया सराय जैसे प्रमुख कोचिंग हब में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाए। इन टीमों द्वारा फायर सेफ्टी, भवन मानकों और अन्य अनिवार्य सुरक्षा नियमों की जांच की जाएगी। इसके साथ ही एमसीडी को पूरे दिल्ली में सर्वे किए गए 923 कोचिंग सेंटरों की सूची निरीक्षण टीमों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने यह भी आदेश दिया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर दिल्ली पुलिस और फायर डिपार्टमेंट द्वारा सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, एमसीडी को प्रतिदिन कार्रवाई रिपोर्ट मंत्री कार्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पूरे अभियान की निगरानी लगातार की जा सके। सरकार ने यह भी बताया कि उच्च शिक्षा निदेशालय कोचिंग संस्थानों के लिए एक व्यापक और मजबूत नियामक ढांचा तैयार कर रहा है। इस प्रस्तावित ढांचे का उद्देश्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और कोचिंग संस्थानों के संचालन को अधिक पारदर्शी बनाना है। मंत्री ने दोहराया कि दिल्ली सरकार छात्रों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी संस्थान को लापरवाही की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
उपराष्ट्रपति से छात्रों की मुलाकात, पंजाब विश्वविद्यालय और छात्र के हितों पर हुई बात

नई दिल्ली। छात्र संगठन से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राष्ट्र पुनर्निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका पर चर्चा की गई। उच्च शिक्षा से जुड़े समसामयिक विषयों पर भी संवाद हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इस प्रतिनिधिमंडल ने अभाविप द्वारा देशभर में संचालित विविध आयामों एवं अभियानों पर भी उपराष्ट्रपति के साथ विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा की। साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। अभाविप राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी तथा राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। उपराष्ट्रपति का दायित्व ग्रहण करने के पश्चात अभाविप प्रतिनिधिमंडल की यह प्रथम औपचारिक भेंट थी। चर्चा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अभाविप के संगठनात्मक विस्तार, विद्यार्थी हितों के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों तथा राष्ट्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों की रचनात्मक सहभागिता पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति को बताया कि विद्यार्थी परिषद द्वारा संचालित स्टूडेंट्स एक्सपीरियंस इन इंटरस्टेट लिविंग कार्यक्रम अपने 60 वर्ष पूर्ण कर रहा है। संगठन का कहना है कि छह दशकों से संचालित यह अभियान देश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर पूर्वोत्तर एवं शेष भारत के विद्यार्थियों के मध्य भावनात्मक एकात्मता, सांस्कृतिक संवाद तथा राष्ट्रीय समरसता को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने यहां युवाओं के मध्य बढ़ती डिजिटल निर्भरता की चुनौती का उल्लेख भी किया। अभाविप के ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान की जानकारी उपराष्ट्रपति के साथ साझा की गई। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को मोबाइल एवं स्क्रीन आधारित जीवनशैली से बाहर निकालकर खेल, शारीरिक गतिविधियों, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं रचनात्मक सहभागिता की ओर प्रेरित करना है। इस दौरान आगामी समय में आयोजित होने वाले विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों एवं कार्यक्रमों की जानकारी भी उपराष्ट्रपति को दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष, संत रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव वर्ष तथा वीरांगना रानी अबक्का के अद्वितीय योगदान पर केंद्रित देशव्यापी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की। साथ ही, महिला सुरक्षा एवं सशक्तीकरण के क्षेत्र में अभाविप के प्रमुख अभियान ‘मिशन साहसी’ के अंतर्गत अब तक 10 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की जानकारी दी। इसके अगले चरण को पुन देशव्यापी स्तर पर प्रारंभ किए जाने की योजना से उपराष्ट्रपति को अवगत कराया गया। चर्चा के प्रमुख बिंदु के रूप में पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को भी प्रमुखता से रखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की सीनेट में निर्वाचित विद्यार्थी प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व प्रदान किए जाने, बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप छात्रावास अवसंरचना के विस्तार की बात उपराष्ट्रपति के समक्ष रखी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियमित एवं समयबद्ध नियुक्तियां सुनिश्चित करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए अत्याधुनिक केंद्र की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया गया। विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने हेतु योग एवं माइंडफुलनेस सेंटर की बात कही। स्थायी परामर्शदाताओं से युक्त विद्यार्थी कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र की स्थापना का विषय भी प्रमुखता से रखा गया।